मुझे अपने भाई से चुदना है – 8

Bhai Bahan ki chudai ki hot xxx story के पिछले पार्ट में आपने जाना की कैसे गिरने से अपने को बचाते हुए भाई के सामने मेरा टॉवल खुल गया और ये सब मम्मी ने देख लिया. फिर मुझे मम्मी गुस्से में अपने कमरे में ले गयी. अब आगे…

Last Part =>मुझे अपने भाई से चुदना है – 7

Bhai Bahan ki chudai ki hot xxx story

मम्मी: देखा मैं इसीलिए तुझे बार बार बोलती थी की घर में इतना रिलैक्स मत घूमा कर.

मैं जानती थी मम्मी किस बारे में बोल रही थी पर मैंने नाटक किया.

मैं: क्या बोल रही हो? किस बारे में?

मम्मी: ये जो आज हुआ तुझे ज़रा सा भी ध्यान था आशु वहीँ पे बैठा था?

मैं: हां जानती हूं तो?

मम्मी: तू जो कहती थी की वो नहीं देखता. आज उसकी भी नज़र तेरी छाती पे पड़ गयी.

मैं: अरे ऐसे अचानक कोई गिरने वाला होगा तो वो तो देखेगा ही न.

मम्मी इर्रिटेट होने लगी. मम्मी: तुझे हुआ क्या है बता तो? कुछ महीनो से देख रही हूं कुछ ज़्यादा ही छोटे-छोटे टाइट कपडे पहनने लगी है. घर पे ब्रा पैंटी पहनना ही छोड़ दिया है. इतना छोटा स्कर्ट पहनती है की ज़रा सा झुकने से नीचे का सब कुछ दिखने लगता है. नहाते वक़्त आशु से टॉवल मांगती है और लेने के लिए आधी बाहर निकल जाती है. भाई के सामने ब्रा-पैंटी पहन रही है.

मुझे डर तो लग रहा था लेकिन साथ लगा की ये अच्छा मौका है अपनी और भाई की बात को खोलने का.

मैं: तो क्या बाहर पहन के घूमू ऐसे? आपको अच्छा लगेगा? सारा दिन तो ये सब पहनती हूँ घर में तो आराम से रहने दो.

मम्मी: बात पहनने न पहनने की नहीं है. तुझे कितनी बार बोला है घर में एक लड़का भी है जो बड़ा हो रहा है. ऐसे घूमेगी तो नज़र खराब हो जाएगी.

मैं: मुझे समझ नहीं आ रहा है की आप इतना टेंशन क्यों ले रही हो. हमारे फॅमिली में कपड़ों को लेके कभी इतनी प्रॉब्लम नहीं हुई. फिर आज क्यों? और नज़र खराब हो जाएगी का क्या मतलब है? जैसे उसको पता नहीं है लड़की के बदन के बारे में? ऐसे तो आप लोग मॉडर्न और अपडेट रहने को बोलते हो. कॉलेज में भी बायोलॉजी में पढ़ते है तो अभी इतना क्यों रोक-टोक? और मैंने आपकी पिक्स देखि है. आप भी तो मिनी स्कर्ट पहनती थी न? आज मुझे क्यों रोक रही है?

मम्मी बिलकुल शांत खड़ी थी.

मम्मी: तू क्या करना चाहती है मुझे सीधे-सीधे बता?

वो अब मेरे कण्ट्रोल में आ रही थी. डर भी था की थप्पड़ न मार दे. पर मैंने हिम्मत करके धीरे सुर में बोला-

मैं: देखो मम्मी सीधी सी बात है. आशु बड़ा हो गया है. उसे सब पता है लड़की के बदन में क्या-क्या होता है. तो मेरा कहना है की रहने दो न.

मम्मी: अरे बेटा वो मुझे पता है की उसको सब मालूम है. पर तू नहीं समझ रही है. इस उम्र में सामने लड़के कुछ नहीं रियेक्ट करते पर घर जाके….

ये कहते हुए मम्मी चुप हो गयी.

मैं: चुप क्यों हो गयी? घर जाके क्या?

मम्मी: रहने दे.

मैं: घर जाके लड़की के बारे सोच के मुठ मारते है यही न?

मम्मी: शी ये सब क्या भाषा है?

मैं: बनो मत. मुझे पता है आपको सब पता है. ऐसे ही दो बच्चे थोड़ी हुए है?

मम्मी मुस्कुराने लगी. मैंने भी इसी का फ़ायदा उठाया. सोचा मूड अच्छा हो रहा है.

मैं: मुझे पता है लड़के क्या-क्या करते है इस उम्र में. मेरा भी यही बोलना है की करने दो न.

मम्मी: तू पागल हो गयी है क्या? मतलब तू क्या कहना चाह रही है की तू ऐसे अपने भाई के सामने ब्रा पैंटी के घूमेगी. बाद में वो तेरे बारे में सोच के वो सब करेगा?

मैं: हां यहीं तो कह रही हूँ मुठ मारने दो न. आप कितना मना करोगी? और मना करोगी तो क्या नहीं मारेगा?

मम्मी: छी! ये क्या बोल रही है तू? भाई अपनी बहन को देख के वो सब करेगा. और तू दिखा रही है इसलिए तो देख रहा है. तू बोलती है नहीं देखता. मैंने कितनी बार देखा उसे आते-जाते तेरे हितले हुए बूब्स की और देखते हुए. झाड़ू लगाती है तो मिनी स्कर्ट के नीचे से तेरा पिछवाड़ा घूरता रहता है. और तो और आज-कल कुछ ज़्यादा ही चिपक के चलता है. उसका हाथ कहाँ-कहाँ जाते है तुझे पता भी होता है?

मैं: हां जानती हु.

मम्मी: अच्छा ये भी पता है तुझे. और ये भी आम बात होगी?

मैं: सच बताऊ तो हां. मुझे कोई प्रॉब्लम नहीं है वो जैसे भी मुझे देखे. मर्द है वो और खेल-खेल में लग ही जाता है यहाँ-वहां. इट्स ओके मम्मी. आप क्यों इतना टेंशन ले रही हो?

मम्मी: दो बच्चो में माँ हूँ खेल में और जान-बूझ के छूने में मुझे फर्क पता है. मैं और बहस नहीं कर सकती. तू मुझे एक बात बता दे बस. तू क्या चाहती है?

मुझे बहुत घबराहट हो रही थी. पर फिर भी मैंने बोल दिया.

मैं: मैं बस आपसे एक परमिशन चाहती हूँ नहीं बोलोगी तो नहीं करुँगी कभी. पर प्लीज सोच समझ के बोलना.

मम्मी: बहन को कोई दिक्कत नहीं है उसका भाई उसके बदन को घूरे यहाँ-वहां छुए. इससे नीचे और क्या चाहिए तुझे?

मैं: जैसा आपने कहा वो वैसे भी बहुत कुछ देख चुका है मेरा. आज एक्सीडेंटली शायद मेरे बूब्स भी दिख गए. तो जब देख ही लिए है तो अब छुपा के फ़ायदा नहीं है.

मम्मी: मतलब अब कपडे पहनना भी छोड़ देगी?

मेरे मन में तो यही सोच थी पर फिर भी मैं धीरे-धीरे मैनेज करना चाह रही थी.

मैं: मेरा कहने का मतलब है. जब देख ही लिया है तो उसके सामने अब से नोर्मल्ली चेंज करू?

मम्मी: तो इतने दिनों से तो कर रही है बेटा?

मैं: नहीं मेरा मतलब. वैसे ही टॉवल हटा के?

मम्मी ने सर पकड़ लिया.

मम्मी: क्या! तेरा मतलब तू अपने भाई के सामने नंगी होकर कपडे बदलेगी? तेरा दिमाग तो ठीक है? किसी ने जादू-टोना किया है क्या?

मैं: मम्मी रिलैक्स. तुम्ही ने तो कहा टॉवल मांगते वक्त नंगे बदन ही उससे टॉवल लेती हूँ हलाकि तब भी दरवाज़े के पीछे मेरा बदन ढका होता है. पर फिर भी पता तो होता है की मैं अंदर नंगी हूँ आज तो आधे से ज़्यादा बदन तो देख ही लिया मेरा. तो यही कह रही हूं की पूरा ही क्यों न कर लू.

मम्मी: बाप रे मैं पागल हो जाउंगी.

मैं: और इसमें बहुत फ़ायदा है.

मम्मी: अच्छा ज़रा मैं भी सुनु क्या फायदा है?

मैं: देखो अगर मैं ऐसे फ्री रहूंगी. तो ये बार-बार चुन्नी से ढकना क्लीवेज निप्पल्स दिखने का टेंशन ही नहीं रहेगा. उल्टा मुझे पता होगा की दिख रहा है और मैं नार्मल रहूंगी. और तो और फिर कभी टॉवल पकड़ने का झंझट भी नहीं. गिरता है गिरने दो. इन फैक्ट टॉवल हटा के ही कपडे पहनूंगी.

मम्मी बड़ी-बड़ी आँखों से शॉक होकर देख रही थी.

मैं: देखो मम्मी मैं आपसे कुछ छुपा के नहीं करुँगी. मैं चाहती हूं की आपको पता हो सब कुछ. तो फिर मुझे आपका भी डर नहीं रहेगा.

मम्मी: अच्छा मतलब मेरी पीठ पीछे करेगी अगर मैं नहीं मानु तो?

मैं: नहीं मम्मी आप नहीं मानी तो नहीं करुँगी. और आप टॉपलेस रहने पर इतना सोच रही हो. आपको अगर इंटरनेट खोल के दिखाऊ तो हज़ारों कहानियां है जहाँ बहन भाई के सामने या माँ बेटे के सामने, बेटी बाप के सामने ऐसे नार्मल रहती है.

मम्मी: अच्छा- अच्छा अब समझ में आया ये सब बुद्धि कहाँ से आया है.

मैं: हां मम्मी मैं पोर्न देखती हूं और सेक्स स्टोरीज भी पढ़ती हूँ ये सब नार्मल है. वो छोड़ो. आप ही सोचो आप भी जब डीप नैक ब्लाउज पहन के निकलती हो तो आपको पता होता ही की क्लीवेज दिख रहा है. और आपको ये भी पता है की आस-पास के सारे अंकल आपका क्लीवेज देखते है. फिर भी आप पहनती हो न? और अब तो मेरा भी देखते है. तो जब बाहर वालो के सामने हम कम्फर्टेबल है तो आशु तो फिर भी अपना भाई है. उससे क्या छिपाना?

मम्मी बहुत देर सोच में डूबी रही. उनको भी लगा की मेरी बात सही थी. फिर कुछ देर बाद वो मायूसी भरी आवाज़ में बोली-

मम्मी: देख ले तू. लेकिन तुझे मेरी कसम है. गलती से भी किसी को पता नहीं चलना चाहिए की हमारे घर में बहन अपने भाई के सामने टॉपलेस रहती है. पापा को भी नहीं.

मेरी ख़ुशी का ठिकाना नहीं था. मैं ख़ुशी से उछल पड़ी और मम्मी को गाल पे ज़ोर से किश किआ. इसमें मेरा टॉवल खुल के गिर गया.

मम्मी: देख फिर से.

मैं बिलकुल टॉपलेस सिर्फ पैंटी में खड़ी रही.

मैं: अरे मम्मी अब क्या? अल्लोव कर दिया तो तुमने.

मम्मी की हलकी हंसी निकल गयी.

मम्मी: पागल हो गयी है बिलकुल. जा कपडे पहन. और चिपकना कम कर भाई से.

मैंने सोचा मम्मी अच्छे मूड में थी तो मैंने मौके पर एक तरकीब लगायी.

मैं: मम्मी मैंने कहा न. भाई ने…

इससे पहले मम्मी ने बाकी का बोल दिया.

मम्मी: हां समझा गयी. बहुत बार छू चुका है तो छूने दो. हैना?

मैं: वाह मम्मी तुम तो कमाल हो.

मम्मी: मतलब भाई तुझे जहाँ भी जैसे भी छुए मैं इसको नार्मल समझू?

मैं: हां मम्मी और कैसे बताऊ.

मम्मी: जा जो मर्ज़ी कर. अब सब डीसाइड ही कर लिया है तो कर. याद रखना ऐसे करते-करते आज खेल रहा है एक दिन डायरेक्ट बोलेगा “दीदी खोलो मुझे आपके बूब्स छूने है”. तब क्या करेगी? तब मेरे पास मत आना की भाई पीछे पड़ गया है.

मैं (स्माइल करते हुए): फ़िक्र मत करो मैं नहीं आउंगी. मैनेज कर लूंगी.

मम्मी को ज़्यादा देर नहीं लगी और वो समझ गयी.

मम्मी: मतलब? ये भी सोच लिया है. कल को तेरा भाई सामने से आके तेरे बूब्स या कुछ छूने मांगेगा तो दे देगी?

मैं मुस्कुराते रही और धीरे से कहा: मैंने पहले भी कहा है की मुझे प्रॉब्लम नहीं है. आप भी टेंशन मत लो.

मम्मी: हां-हां मैं तो भूल ही गयी. कहानी पढ़-पढ़ के अब ये सब नार्मल ही लगता होगा. छी छी ये लड़की ख़तम हो चुकी है.

ये कहते हुए मम्मी किचन में चली गयी. और मैं ख़ुशी से टॉवल पहन के चली गयी और सोचा भाई को एक सरप्राइज देती हु. मैं रूम में पहुंची तो भाई घबराया हुआ बैठा था.

आशु: दीदी क्या हुआ? इतनी देर. मैंने सोचा आज मार खाओगी.

मैंने देखा तो मम्मी किसी काम से लिविंग रूम में आयी. फिर मैंने मौका देखा और आशु के सामने टॉवल गिरा दी. उस दिन तो मैंने पहली बार मम्मी के सामने खुले आम भाई के आगे टॉपलेस खड़ी थी.

आशु देखते ही शॉक हो गया और इशारे करने लगा की मम्मी पीछे है. मैं सामने वाले आईने में देख रही थी मम्मी ये सब देख रही थी और थोड़ी मायूस थी. भाई भी शर्मा गया. फिर मैंने ब्रा भी पहन ली और ऐसे ही बाल झाड़ने लगी. मम्मी के जाने के बाद भाई ने पुछा-

आशु: दीदी मम्मी ने सब देख लिया. अब क्या होगा. लग गयी अपनी तो.

मैं: यही तो सरप्राइज था.

आशु: मतलब?

फिर मैंने आशु को सारा कुछ बताया. वो एक-दम से मुझपे कूद पड़ा.

आशु: वाह दीदी तुमने तो कमाल कर दिया. मतलब अब तुम पूरे घर में नंगी रह सकती हो?

मैं: ऐसे पूरे घर में तो नहीं बोली. पर टॉपलेस कपडे बदल सकती हूं वो बोली है. कुछ दिन जाने दो वो भी करेंगे. जैसे मम्मी के लिए ये सब नार्मल होने लगेगा फिर एक-एक करके आगे बढ़ेंगे.

आशु: मतलब? क्या-क्या करेंगे?

मैं: अभी जैसे टॉवल लेते वक़्त बदन छुपा के रखती हूँ आगे से खुले बूब्स लेके बाहर आ जाया करुँगी. फिर (आशु के कान पकड़ के कहा) तू जो मेरा सब कुछ देखता है यहाँ-वहां छूना. ये सब जब मम्मी को नार्मल लगने लगेगा तो धीरे-धीरे मैं बाकी घर में भी किसी न किसी बहाने से कपडे कम करने लगूंगी.

मैं: इसी बीच एक और चीज़ करेंगे. मैंने कह दिया की अगर तू कल सामने से छूने माँगा तो मैं मना नहीं करुँगी. इसका मतलब ये नहीं की कल ही मम्मी के सामने बोल दे की दीदी बूब्स दिखाओ! धीरे-धीरे करेंगे. मैंने बोला है की खेल-खेल में हाथ बूब्स या गांड पर लगाना स्कर्ट ऊपर आ जाना मुझे इस सब से प्रॉब्लम नहीं है.

मैं: यहाँ पे तू ये करना. कभी-कभी कोई शैतानी करना. जैसे कभी मेरा टॉप ऊपर करके भाग जाना. मैं फिर तुझे मारने भागुंगी. ऐसा करते-करते एक दिन टॉप इतना उठा देना की मेरे बूब्स बाहर आ जाये. काफी टाइम लगेगा मम्मी को ये सब आम बात लगने में. मैं भी किसी न किसी बहाने से गर्मी से या चेंज करने के बहाने से तेरे सामने टॉप उतारती रहूंगी.

मतलब जैसे भी हो मम्मी के सामने तेरा मेरे बूब्स देखना छूना खेलना और मेरा टॉपलेस होना बिलकुल आम बात हो जाना चाहिए. उसके बाद हम प्लान में आगे बढ़ेंगे.

आशु: आगे?

मैं: जैसे ही बूब्स की आदत हो जाये. मैं फिर स्कर्ट उतारने के बारे में बात करुँगी.

आशु: वो तो वैसे भी दीखता है.

मैं: निप्पल्स भी तो दीखता ही था ऊपर से. लेकिन आज बात किया तो सामने देखने मिल गया न. ऐसे करते-करते एक दिन जैसा तू चाहता था मैं पूरी घर में तेरे सामने नंगी घूमूंगी.

आशु: वाह दीदी वाह. आपने तो कमाल ही कर दिया. देखो अब जल्द ही आपको सारा दिन नंगा देखने मिलेगा. ये सोच के ही मेरा लंड खड़ा हो गया.

मैं: अरे बेचारा. ला मैं शांत कर देती हु.

हमने इसी ख़ुशी में पूरी रात एक-दुसरे को चूसा और चाटा. अगले दिन से हमने अपना खेल शुरू कर दिया. क्या किया ये अगले भाग में जानिये.

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