दोस्त की माँ सविता को चोदा

Dost ki maa ki chudai xxx story:- हैलो दोस्तों मेरा नाम राहुल है. मैं मुंबई का रहने वाला हूँ आप सब ने मेरी पिछली कहानी पढ़ी बहुत अच्छा फीडबैक दिया थैंक यू यार. आज एक बिलकुल नयी कहानी लेके आया हूं और ये 100% सच्ची घटना पर आधारित है. एक बार मुझे गुडगाँव जाना पड़ा किसी इम्पोर्टेन्ट काम से. वहां मेरे गाँव के पुराने दोस्त जतिन और उसकी फॅमिली रहते है. जब जतिन को पता चला की मैं आ रहा हूं तो उसने फ़ोन किया “भाई होटल में क्या करेगा? मेरे घर आजा मम्मी-पापा भी बहुत खुश होंगे.”

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मैंने पहले मना किया लेकिन वो इतना ज़ोर देने लगा की आखिरकार मै मान गया. जब मैं उसके घर पहुंचा शाम का टाइम था. घर में सब लोग थे – जतिन उसकी मम्मी-पापा. मुझे देख कर सब बहुत खुश हो गए. गले लगे बातें हुई. मैं अंदर गया फ्रेश हुआ सबके साथ डिनर किया.

फिर जतिन बोला “भाई चल कुछ बातें करते है.” मैं उसके रूम में चला गया.

रात को जतिन मुस्कुरा के बोला “भाई सच-सच बता शिल्पा आंटी और सोनिया आंटी के साथ क्या-क्या हुआ था?” मैंने हँसते हुए पूरी स्टोरी सुना दी (ये स्टोरी मै आपको फिर कभी सुनाऊँगा) कैसे शिल्पा आंटी ने मुझे सेड्यूस किया. कैसे सोनिया आंटी रात भर तड़पती रही. लेकिन बातों के बीच मैंने नोटिस किया की जतिन की मम्मी सविता बाहर से ही सब सुन रही थी. वो चुपके से अपने रूम में चली गयी. फिर हम दोनों भी सो गए.

अगला दिन सुबह जतिन और उसके पापा ऑफिस चले गए. मुझे दोपहर में जाना था तो मैं घर पर ही था. सविता आंटी घर पर थी. आंटी थोड़ी मोटी थी लेकिन फेस बहुत क्यूट था – गोरी स्किन बड़ी-बड़ी आँखें गुलाबी होंठ. सुबह मैं उठा तो आंटी मेरे लिए चाय लेके आयी. हम बालकनी में बैठ कर चाय पी रहे थे.

आंटी ने हाल-चाल पुछा मैंने भी जवाब दिया.

फिर बोली “आज गर्मी बहुत है न?”

मैंने हां बोला. तभी आंटी ने ब्लाउज के ऊपर के दो बटन खोल दिए और फैन के नीचे बैठ गयी. बटन खुलते ही उनकी ब्रा और गहरी क्लीवेज साफ़ दिखने लगी. दोनों चूचियां थोड़ी उभरी हुई थी. दरार में पसीना चमक रहा था.मैंने नज़र हटाने की पूरी कोशिश की खुद को कण्ट्रोल किया.

थोड़ी देर बाद आंटी ने मुझसे मेरी गर्लफ्रेंड के बारे में पुछा.

मैंने कहा “मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है.”

तब उन्होंने जो बोला मेरे होश उड़ गए.

उन्होंने कहा “कल रात मैंने सब सुन लिया था… कैसे तूने शिल्पा आंटी और सोनिया आंटी को सेटीस्फाइ किया उनकी चुदाई की.”

मैं शॉक हो गया सर नीचे कर लिया.

फिर वो मेरे बगल में बैठ गयी और बोली “इसमें शर्माने वाली कोई बात नहीं है. ये तो पुण्य का काम है. हर औरत को खुश रहने का हक़ है.”

फिर उन्होंने जो बोला मैं सोच भी नहीं सकता था. उन्होंने कहा “राहुल मुझे भी वही ख़ुशी दे… जो तूने उन दोनों को दी थी.”

मैंने तुरंत मना कर दिया “नहीं आंटी आप मेरी दोस्त की माँ हो मैं ऐसा नहीं कर सकता.”

उन्होंने कहा “दोस्त की माँ हूं तुम्हारी नहीं.”

फिर वो और करीब आयी और अपने ब्लाउज के सारे बटन खोल दिए. काली ब्रा साफ़ दिख रही थी. फिर उन्होंने मेरे होंठो पर अपने होंठ रख दिए और किश करने लगी. मैंने हटाने की कोशिश की लेकिन काफी देर तक हम अलग नहीं हुए. आखिर मैं मैं वहां से हट गया और दोपहर को अपने काम पर निकल गया. रात को वापस आया तो सब घर पर थे. हम टेबल पर बैठ कर खाना खा रहे थे. आंटी मेरे बगल में बैठी थी. खाने के दौरान नीचे से सब की नज़र बचा कर उन्होंने हाथ मेरी पैंट पर रख दिया.

धीरे-धीरे हाथ से मेरे लंड को पैंट के ऊपर से सहलाने लगी. उँगलियाँ ऊपर-नीचे कर रही थी हल्का-हल्का दबाव डाल रही थी. मैं खाना खाते-खाते तड़प रहा था लेकिन फेस नार्मल रखने की कोशिश कर रहा था. खाना ख़तम हुआ तो सब सोने चले गए. अगली सुबह जतिन और पापा जा चुके थे. मैं बेड से उठा तो घर में कोई दिखाई नहीं दिया. मैं सविता आंटी को ढूंढ रहा था. शायद वो बाथरूम में थी.

तभी अंदर से आवाज़ आयी “राहुल तुम इधर हो क्या?”

मैंने हां बोला.

फिर बोली “बाहर सोफे पर टॉवल रखा है ज़रा देदो न मैं भूल गयी.”

मैंने टॉवल उठाया और बाथरूम नॉक किया. उन्होंने दरवाज़ा आधा खोला. मैं हाथ अंदर करके टॉवल देने लगा तभी उन्होंने मेरा हाथ पकड़ कर ज़ोर से अंदर खींच लिया. अंदर देखा तो सांस रुक गयी. आंटी बिलकुल नंगी खड़ी थी. पूरे बदन पर पानी की बूँदें चमक रही थी. उनकी चूचियां भरी हुई थी. पानी की बूँदें चूचियों से नीचे बहकर नाभि पर जा रही थी. नीचे चूत पर भी बूँदें टपक रही थी. और उनकी गांड… उफ्फ्फ… क्या बताऊँ यार गोल-मटोल फूली हुई जैसे मखमल जैसी सॉफ्ट. पानी की बूँदें उस पर भी चमक रही थी. पूरा बदन इतना हॉट लग रहा था की कोई भी इंसान पागल हो जाए. Dost ki maa ki chudai

वो मुझे देख कर हसने लगी. मैं जैसे ही होश में आया बाहर भाग आया. लेकिन उनका नंगा बदन दिमाग में चिपक गया था. ख़ास कर वो गांड… मैं उसका दीवाना बन गया था. मेरा लंड पूरी तरह टाइट होकर खड़ा था जैसे सलामी दे रहा हो. थोड़ी देर बाद आंटी बाहर आयी. वो अपने कमरे में जा कर साड़ी पहन कर आयी. लेकिन मेरे दिमाग में बस वही नज़ारा घूम रहा था – उनका नंगा भीगा हुआ बदन गांड पर वो बूँदें… उफ्फ्फ.

मैं खुद को रोक नहीं पाया. उनके पास गया और उनके होंठो पर अपने होंठ रख कर किश करने लगा. हम दोनों एक-दुसरे में खोये हुए थे किश करते हुए एक-दुसरे को सपोर्ट दे रहे थे. मैंने धीरे-धीरे अपने कपडे उतार दिए और सिर्फ अंडरवियर में आ गया. अंडरवियर में मेरा लंड का उभार साफ़ दिख रहा था. फिर मैंने आंटी के गाल पे किश करते-करते उनकी साड़ी का पल्लू निकाल दिया और ब्लाउज के ऊपर से ही चूचियों को दबाने लगा. आंटी सिसकियाँ ले रही थी. मैंने ब्लाउज के बटन खोले ब्रा भी निकाल दी. उनके बड़े-बड़े बूब्स को दबाने लगा और चूसने लगा.

आंटी ऊपर से पूरी नंगी हो चुकी थी. फिर आंटी ने बैडरूम में चलने को कहा. हम बैडरूम में आ गए. मैंने आंटी को बिस्तर पर लिटाया उनके ऊपर चढ़ गया और दूध को चूसना शुरू कर दिया. उनके बूब्स को ज़ोर-ज़ोर से दबाने लगा. फिर किश करते-करते नीचे की तरफ आया और उनकी नाभि को किश करने लगा. आंटी तड़प रही थी. फिर किश करते-करते उनकी साड़ी पूरी निकाल दी और दांतों से पेटीकोट का नाडा खोल दिया. उन्होंने खुद मदद की पेटीकोट उतारने में. अब वो सिर्फ पैंटी में मेरे सामने लेटी हुई थी.

एक तरफ पूरा भरा हुआ बदन और सिर्फ एक पैंटी. कोई भी मर्द देख कर पागल हो जाता. मैंने उनकी जाँघों को किश करना शुरू किया. हर किश पे वो मदहोश हो रही थी. जाँघों को किश करते-करते पैंटी के बीच में आ गया और चूत के ऊपर से ही पैंटी को किश करने लगा. जीभ से जाँघों को चाट रहा था. आंटी पूरी तरह मदहोश हो चुकी थी. फिर मैंने धीरे-धीरे उनकी पैंटी भी निकाल दी. अब आंटी मेरे सामने पूरी तरह नंगी थी. चूत तो बिलकुल क्लीन थी जैसे मेरे लिए की हो. नज़ारा कुछ ऐसा था – सिर्फ गले में मंगलसूत्र और हाथो में चूड़ियां बिलकुल अप्सरा जैसी. Dost ki mummy ki chudai

मैंने उनकी जाँघों को चौड़ा किया और चूत के आस-पास किश करना शुरू कर दिया. आंटी की सांसें तेज़ हो रही थी. वो धीरे-धीरे मोअन करने लगी “आह राहुल… हां बेटा… ऐसे ही… मत रुकना.” मैं अपनी जीभ से उनकी चूत के बाहर के हिस्से को चाट रहा था धीरे-धीरे अंदर की तरफ बढ़ रहा था. उनकी चूत बिलकुल गीली हो चुकी थी. उनकी चूत से जो भी पानी आ रहा था मैं उसे चाट रहा था. मैंने जीभ चूत के अंदर डाली तो आंटी ने मेरी बाल पकड़ कर ज़ोर से दबाया “आआह्ह्ह… कितना अच्छा लग रहा है… ज़ोर से चाट बेटा… आंटी की चूत को पूरा साफ़ कर दे.”

मैं ज़ोर-ज़ोर से चाटने लगा. आंटी की टांगें कांप रही थी वो बेड पर हिल रही थी. “राहुल… अब बर्दाश्त नहीं होता… अंदर डाल दे अपना लंड… मुझे चोद दे आज.”

मैं उठा अपना अंडरवियर उतारा. मेरा लंड बिलकुल खड़ा था. आंटी ने देखा तो आँखें बड़ी कर ली “उफ्फ्फ… कितना बड़ा है तेरा… ये तो अंदर जाके फाड़ देगा मेरी चूत को.”

मैंने उनके पैर फैलाये लंड को उनकी चूत पर रगड़ा. गीली होने की वजह से स्लिप हो रहा था. एक धीरे से धक्का मारा. आंटी चिल्लाई “आह्हः… धीरे बेटा… – मैंने धीरे-धीरे अंदर धकेलना शुरू किया. पूरा अंदर जाने पर आंटी ने ज़ोर से सिसकारी भरी “आआह्ह्ह्हह… पूरा अंदर डाल दे. अब मत रुकना… ज़ोर से पेल.

”मैंने स्पीड बढ़ा दी. ज़ोर-ज़ोर से धक्के मारने लगा. उनकी चूचियां उछल रही थी. मैंने दोनों हाथो से पकड़ कर दबाया आंटी तड़प उठी “हां बेटा… ऐसे ही… आंटी को चोद दे… पूरा सुख दे.” उन्होंने अपने पैर मेरी कमर पर लपेट लिए धक्के और गहरे लेने लगी. रूम में आवाज़े गूँज रही थी थप-थप सिसकारियां और बेड की चर्र-चर्र.थोड़ी देर बाद आंटी ने बोला “अब मुझे ऊपर आने दे… मैं राइड करुँगी.” मैं नीचे लेट गया आंटी मेरे ऊपर चढ़ गयी.

लंड को हाथ से पकड़ कर चूत में डालने लगी और बैठ गयी. मेरा लंड उनकी चूत के अंदर जा चुका था. फिर उछलने लगी – ऊपर-नीचे. चुचे मेरे मुँह के सामने उछल रहे थे. मैं पकड़ कर चूसने लगा ज़ोर से काट भी लिया. आंटी ज़ोर-ज़ोर से मोअन कर रही थी “आह्हः… कितना मज़ा आ रहा है… तेरा लंड अंदर तक पहुँच रहा है… और ज़ोर से उचलू क्या?” वो स्पीड बढ़ा रही थी चूत से पानी टपक रहा था बेड पर. मैं नीचे से धक्के दे रहा था. आखिर में आंटी चिल्लाई “राहुल… मैं झड़ रही हु… आआह्ह्ह्हह!”

उनका बदन कांप गया चूत से गरम पानी निकलने लगा. मैं भी कण्ट्रोल नहीं कर पाया ज़ोर से अंदर ही झड़ गया. पूरा माल उनके अंदर भर दिया. आंटी मेरे ऊपर लेट गयी सांसें तेज़ चल रही थी. थोड़ी देर बाद वो उठी मुस्कुरा के बोली “बेटा आज तो बहुत मज़ा आ गया” मुझे भी काफी मज़ा आया. मैं और आंटी एक-दुसरे की बाहों में लिपट के लेट गए. फिर थोड़ी देर में हम दोनों उठे. मैं आज घर से ही काम करने लगा. उस दिन सबके आने से पहले हमने काफी एन्जॉय किया.

नेक्स्ट डे मैंने उनकी गांड भी मारी. उनकी गांड काफी टाइट थी. लेकिन धीरे-धीरे लंड सेट हो गया और बहुत मज़ा आया उनकी गांड मारने में. अब लोगों को कहानी कैसी लगी मुझे अपना फीडबैक दे

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