Sexy Bahu Komal Sasur se chudi:- अब तक आपने इस ससुर बहू हिंदी चुदाई सेक्स स्टोरी में पढ़ा कि बनवारी लाल गलती से बाथरूम मे घुस जाता है जहां उसकी बहू कोमल नहा रही होती है। फिर वहाँ बनवारी लाल बहू कि बॉडी को टच करता है लेकिन बहू उसे नहीं रोकती है, वह भी मज़े ले रही होती है। फिर अचानक बहू को याद आता है और वो बनवारी लाल को रोकती है। अब बनवारी लाल बहू को नंगी देखने के बाद कोमल को चोदना चाहता था। उसके लिए वह प्लान बनाने लगता है, अब पढ़िये आगे..
सेक्सी बहू कोमल की चुदाई का सपना – 1
Sexy Bahu Komal Sasur se chudi

कोमल अपने रूम में जाकर कपडे बदलती है और मोबाइल में गाना लगा कर बिस्तर पर लेट जाती है मोबाइल पर रोमांटिक गाना चल रहा था। कोमल को नींद नहीं आ रही थी, उसे सुबह की घटना याद आ गयी. सुबह जब बनवारी लाल नाश्ता कर रहा था, उस समय कोमल वहाँ पोछा लगाने आ गयी। उसे ध्यान नहीं था की उसने बहुत लो कट ब्लाउज पहना है. कोमल और बनवारी लाल आपने सामने थे, पोछा लगाते लगाते अचानक उसकी नजर बनवारी लाल की तरफ उठी तो वो भौचक रह गयी। उसका ससुर एक टक उसकी चूचियों को घूर रहा था, जो लगभग आधी बाहर निकली हुई थी. कोमल का चेहरा शर्म से लाल हो गया और वो पोछा अधूरा छोड़ कर ही भाग गयी।
उस सीन को याद कर कोमल सोचने लगी, हे भगवान बाबूजी कितनी भूखी नजरों से मेरी चूचियों को देख रहे थे, ऐसी भूख तो उसके बेटे सुशील की नजरों में भी नहीं दिखी. बनवारी लाल कुछ देर तक छत पर घूमता रहा वो प्लानिंग कर रहा था की क्या बोलेगा और साथ ही साथ अपने अंदर हिम्मत भी बटोर रहा था. फिर आखिर उसने बहु का नंबर डायल कर दिया, फोन पर गाना बजना बंद हो गया और बेल्ल बजने से कोमल की तन्द्रा टूटी.
उसने सोचा सुशील का फ़ोन आया होगा, दरअसल सुशील कभी कभी देर रात फ़ोन किया करता था और फ़ोन सेक्स कर लिया करता था। कोमल ने हाथ बढ़ा कर मोबाइल उठाया और स्क्रीन पर बाबू जी का नंबर देख कर चौंक गयी. वो मंद मंद मुस्कुराने लगी की उसका सोचना सही निकला ससुर जी की नींद भी हराम हो चुकी है। कोमल ने फ़ोन पिक किया और बहुत हो सेक्सी आवाज में बोली..
कोमल – हेलो.
बनवारी लाल – हेलो बहु.. हाँ हम बाबू जी बोल रहे है, सो गयी थी क्या?
कोमल – अरे बाबू जी आप नही सोयी नहीं हूँ.
बनवारी लाल – तो क्या कर रही थी नींद नहीं आ रही क्या?
कोमल – नहीं ऐसे ही गाने सुन रही थी, आप बोलिये न कहाँ से फ़ोन कर रहे हो?
बनवारी लाल – मैं तो छत पर हूँ.
कोमल – क्या बात है नींद नहीं आ रही क्या?
बनवारी लाल – क्या बताये बहु नींद तो उड़ गयी है.
बनवारी लाल के मुँह से ऐसा सुनकर कोमल अंदर ही अंदर समझ जाती है की ससुर की नींद क्यों उड़ गयी है लेकिन फिर पूछती है की..
कोमल – नींद क्यों नहीं आ रही बाबू जी? आपकी तबियत तो ठीक है न?
बनवारी लाल – बहु तबियत तो ठीक है लेकिन बुढ़ापे में नींद कहाँ आती है.
कोमल – अच्छा बताइये फ़ोन क्यों किया?
बनवारी लाल – बस तुमसे सॉरी बोलना था.
कोमल – मुझसे किस बात के लिए सॉरी बाबू जी?
बनवारी लाल – वो उस दिन बाथरूम वाली बात के लिए मुझे लगता है तुम उस दिन से मुझसे नाराज हो.
कोमल – जी वो जी मैं नाराज नहीं हूँ बाबू जी वो तो मेरी गलती थी मुझे दरवाजा खुला नहीं रखना था.
बनवारी लाल – हाँ बहु लेकिन मैं भी तो बहक गया और गलती कर बैठा, पता नहीं तुमको वैसे देख कर मैं अपने होशो-हवास खो बैठा था, मेरे दिमाग ने बिलकुल काम करना बंद कर दिया था, इसलिए मैं माफ़ी चाहता हूँ.
कोमल – प्लीज बाबू जी आप माफ़ी मत मांगिये मैं आपसे नाराज नहीं हूँ.
बनवारी लाल – कोई बात नहीं बहु दरअसल दरवाजा खुलते ही मैंने जो देखा उससे मेरी आँखे ही चौंधिया गयी थी, मुझे तो ऐसा लगा की जैसे कोई स्वर्गलोक की अप्सरा मेरे सामने आ गयी है, बड़ी मुश्किल से जब मैंने अपने आप को संभाला तो तुमने और भी बड़ी गलती कर दी.
बनवारी लाल अब अपनी चाल चलने के मुड़ में आ गया था इस लिए बातो को अपने हिसाब से मोड़ रहा था.
कोमल – बाबू जी मैंने दोबारा कोनसी गलती की?
बनवारी लाल – बहु तुम पलट कर घूम जो गयी थी.
कोमल – जी वो तो मैं शर्म के मारे पलट गयी थी.
बनवारी लाल – बहु तुम्हारे पलटने ने ही तो सारा बखेड़ा खड़ा करवा दिया तुम्हारे पीछे वाला हिंसा तो ऐसा है की अगर कोई मुर्दा भी देख ले तो उठ कर बैठ जाये, अगर कोई हिजड़ा भी देख ले तो जोर जबरदस्ती करने लगे अगर कोई देवता भी देख ले, तो स्वर्ग से नीचे उतर आये। फिर मैं तो एक आम मर्द हूँ.
बनवारी लाल अब खुला खेल खेलने पर उतर आया था, उधर कोमल भी समझ रही थी की ससुर उसका पीछे वाला हिस्सा यानि उसकी गांड की बात कर रहे है लेकिन वो अनजान बनकर बोली..
कोमल – बाबू जी आप क्या बोल रहा है मुझे कुछ समझ नहीं आ रहा.
बनवारी लाल – बहु अब मैं तुम्हे कैसे बताऊं? अगर तुम गुस्सा न होने का वादा करो तो मैं समझाऊँ?
कोमल – इसमें गुस्सा होने वाली क्या बात है? मुझे कुछ पता न हो तो घर वाले ही बतायेगे.
बनवारी लाल जानता था की बहु सब समझ रही है लेकिन नाटक कर रही है आखिर नए ज़माने की पढ़ी लिखी बहु को लाइन पर लाना इतना आसान काम भी नहीं था। लेकिन बनवारी लाल ये भी जानता था की सेक्स की भूख सबको सताती है, इस रास्ते पर संतरी से लेकर मंत्री सब एक हो जाते है.
बनवारी लाल – बहु मैं कोई जेब में छुपाने वाली चीज की बात नहीं कर रहा, मैं गांड के बारे में बात कर रहा हूँ.
ससुर के मुँह से सीधे अपनी गांड का नाम सुनते ही कोमल के बदन में सनसनी मच गयी, उसके दिल की धड़कन बढ़ गयी और कोमल की सांसे जो जोर ज़ोर से चलने लगी। उधर बनवारी लाल को भी बहू की सांसों की आवाज सुनाई दे रही थी, यानि की उसका तीर निशाने पर लगा था.
कोमल – हे भगवान् आप क्या बोल रहे है?
बनवारी लाल – बहु तुम्हारी कसम मैं सच बोल रहा हूँ, पीछे से तुम्हारी गांड देखने के बाद, मैं पूरी तरह से सम्मोहित हो गया था। उसके बाद जो कुछ मैंने किया वो मैंने नहीं बल्कि तुम्हारे पुरुष मोहनी नितंबों ने करवा दिया.
ससुर की खुल्लम खुल्ला गरम बातो से कोमल को नशा सा आने लगा, उसका हाथ अपने आप अपनी पेंटी के अंदर चला गया। पैंटी के अंदर उसका कुआ पूरी तरह से तन कर खड़ा था, कोमल बरबस ही उससे खेलने लगी.
कोमल – हे भगवान् बाबू जी आप बहुत चालाक हो, एक तो सब कुछ कर लिए और दोष भी मुझे दे रहे हो सारे मर्द एक जैसे ही होते है.
बनवारी लाल – बहु तुम्हार बात बिलकुल सही है, सब मर्द एक जैसे होते है लेकिन औरते एक जैसी नहीं होती.
कोमल – क्यों औरतों में अलग क्या होता है?
बनवारी लाल – अलग अलग नहीं होता, अलग अलग सा होता है, अब देखो न मैंने अपनी पूरी जिंदगी में ऐसा पिछवाड़ा नहीं देखा जैसा तुम्हारा है। सच में मेरा बेटा बहुत किस्मत वाला है जिसको दुनिया का सबसे नायाब खजाना मिला है.
कोमल ससुर की बात सुनकर मायूस सी हो गयी, सुशील ने तो आज तक उसकी गांड को चूमा चाटा नहीं था, न कभी उसकी गांड की तारीफ की थी इस लिए हड़बड़ी में उसके मुँह से निकल गया.
कोमल – जिसको खजाने से मतलब ही नहीं, उसकी बात न कीजिये.
बनवारी लाल समझ गया की सुशील कोमल के हुस्न की कदर नहीं कर रहा है ये तो उसके लिए सुनहरा मौका है.
बनवारी लाल – बहु तुमने अपना दुःख घर में कभी बताया ही नहीं वर्ना..
कोमल – मैं बता के क्या करती वो तो वह मुंबई में रहते है.
बनवारी लाल – तो क्या हुआ? यहाँ घर वाले तो है कोई न कोई हल निकाल लेते और घर की बात घर में ही सुलझ जाती.
कोमल – उनके बिना कैसे सुलझ जाती?
बनवारी लाल बाबू जी का मतलब समझ कर बहुत गरम हो गयी थी और जोर जोर से अपने काजू दाने को मसलने लगी.
बनवारी लाल – क्यों बहु मुझ पर विश्वास नहीं है क्या? मुझे कमजोर समझ रही हो? घर के अंदर ही सब कुछ टेंशन फ्री हो जायेगा.
कोमल – मैं समझी नहीं आप क्या कह रहे है?
बनवारी लाल – मैं तो कह रहा हूँ की खजाने की सेवा हम कर देंगे, अगर तुम्हे एतराज न हो तो? वैसे भी जवानी का बोझ कोई उठाने वाला मिल जाये तो सफर आसान हो जाता है
.बाबू जी का खुला ऑफर सुनते ही कोमल गनगना गयी और इतनी जोर से दाने को मसली की उसका पानी छूट गया और उसके मुँह से जोर की चीख निकल गयी. कोमल की प्रेम गुफा से पानी का सैलाब निकल आया, जिसमे उसकी सारी उंगलियां गीली हो गयी थी। कोमल को ऐसा लगा जैसे उसके अंदर से कोई झरना छूट पड़ा हो। बाबू जी के साथ बाते करने पर जैसा एहसास उसे हुआ था, वैसा तो सुशील के साथ फ़ोन सेक्स में भी नहीं हुआ था.
वो सोचने लगी कैसे बाबू जी खुल्लम खुल्ला उसकी गांड के बारे में बोल रहे थे जैसे अपनी बहु से नहीं, बल्कि अपनी गर्लफ्रेंड से बात कर रहे हो। वो सोचने लगी पता नहीं ये निगोड़ी गांड और क्या क्या गुल खिलवाएगी? क्योकि इससे पहले भी उसकी गांड के साथ कई किसे जुड़े थे, जो उसे अचानक याद आने लगे.
शादी के पहले की बात थी एक दिन वो अपनी सहेली मधु के साथ बाजार गयी थी दोनों जीन्स पहने हुए थी, छोटा सा बाजार था बाजार की नजर उस पर टिक गयी थी। क्या दूकानदार क्या ग्राहक सब कोमल की गोलमटोल गद्देदार गांड को देख कर आँखे सेक रहे थे.
कोमल – मधु क्या बात है कुछ अपसेट लग रही है?
मधु – कुछ नहीं बस अगली बार से मैं तेरे साथ बाजार नहीं आउंगी.
कोमल – क्यों क्या बात हो गयी.
मधु – देखा नहीं पूरा बाजार तेरी इस निगोड़ी गांड को घूर रहा था.
कोमल – वो तो मैं भी परेशांन थी पर तुझे क्या हुआ?
मधु – क्या हुआ.. ऐसा लग रहा था जैसे तू अकेली ही बाजार आयी है साला एक भी कमीना मेरी तरफ नहीं देख रहा, आइंदा से किसी और को ढूंढ लेना मुझे नहीं करवानी अपनी बेइज्जती.
कोमल – अरे यार छोड़ न तू भी कहा ध्यान देती है.
ऐसे ही एक बार वो क्लास में बैठी थी छमाही परीक्षा का रिजल्ट मिला था उसके बाजू में पिंकी बैठी थी वो दोनों एक दूसरी का रिजल्ट भी देख रही थी. पिंकी जरा चालू टाइप की लड़की थी, उसके बारे में चर्चा थी के स्कूल के कई मेल टीचर्स को वो झूलती रहती है और टीचर्स भी उसके साथ मौका देख कर अपने हाथ साफ़ कर लेते है रिजल्ट देखते देखते अचानक पिंकी बोली..
पिंकी – कोमल तूने एक चीज गौर की?
कोमल – क्या?
पिंकी – जिन सब्जेक्ट्स की टीचर्स फीमेल है उसमे तुझे कम नंबर मिले है और जिन सब्जेक्ट्स के टीचर मेल है उसमे ज्यादा नंबर मिले मालूम क्यों?
कोमल – क्यों?
पिंकी – क्योकि फीमेल टीचर्स तेरी इस गोलमटोल गांड से जलती है और मेल टीचर्स तेरी इस गद्देदार गांड के दीवाने है, इस लिए तुझे खूब नंबर देते है अगर ऐसी लुभावनी गांड मेरी होती तो मैं मेल टीचर्स से अपने पैर दबवा लेती.
कोमल – साली अपना मुँह बंद कर फालतू बकवास करती रहती है.
पिंकी – डार्लिंग सच कह रही हूँ अगर तू तैयार हो जाये तो फाइनल के पेपर पहले ही निकलवा लेंगे.
कोमल – वो कैसे?
पिंकी – बस तुझे थोड़ी अपनी गांड मसलवानी और चटवानी पड़ेगी.
कोमल – हे भगवान् पिंकी तू अपना मुँह बंद कर ले बस.
पिंकी – अरे यार भगवान् नहीं सर लोग चाटेंगे.
कोमल – चुप कर कुतिया.
उधर बनवारी लाल कोमल की तेज तेज चल रही सांसों से ही समझ गया था की बहु जरूर मास्टरबेट कर रही है और जब वो जोर से चीखी तो बनवारी लाल जैसा लुगाई बाज समझ गया की बहु बहुत बुरी तरह से झड़ी है.
दूसरे दिन बनवारी लाल वेट एंड वाच की पालिसी पर चलता रहा और उसने महसूस किया की सब कुछ ठीक है और कोमल भी रोज की तरह ही व्यवहार कर रही है तो उसने फिर बहु का चक्षु चोदन शुरू कर दिया.
अगले दो दिन यूं ही आँख मिचोली चलती रही, एक दिन शाम का समय था कोमल बहु एक बहुत ही पतली साडी पहनी हुई थी, जिसमे उसका कमाल जिस्म पूरी तरह से चिपका हुआ था। साडी भी नाभि से काफी निचे थी. बहु को देख देख कर बनवारी लाल परेशान हो रहा था, क्योकि उसका मुसल बार बार खड़ा हुए जा रहा था। कोमल रसोई में गयी और उसकी सास शांति पूजा कर रही थी, तो बनवारी लाल भी अपनी नयी देवी की दर्शन करने रसोई की और चल दिया.
कोमल रसोई के प्लेटफार्म पे आटा गूंध रही थी, बनवारी लाल ने देखा की कुछ आटा बहु के हिप्स पर लगा है, तो उसे मौका मिल गया और वो तुरंत कोमल के पास आया और बोला
“अरे ये क्या लगा है पीछे?” और सीधा उसकी गांड पे हाथ रख कर साफ़ करने लगा.
गांड पर ससुर के हाथ लगते ही कमसिन बहु गनगना गयी और बोली क्या है बाबू जी?
बनवारी लाल – शायद आटा लगा हुआ है मैं झाड़ देता हूँ.
कोमल – गलती से लग गया होगा.
बनवारी लाल – बहु आज क्या सब्जी बना रही हो?
कोमल – अभी कुछ पक्का नहीं है आपको जो पसंद है वो बता दीजिये वो बना दूंगी.
बनवारी लाल – मुझे जो चाहिए वो तुम नहीं खिला पाओगी.
कोमल – आप बोलिये तो सही वही खिला देंगे.
बनवारी लाल – सोच लो फिर बात से मुकरना मत.
कोमल – आप बोलिये तो सही मैं अपनी बात की पक्की हूँ.
तब तक बनवारी लाल कोमल की गांड को सहलाता हुआ उसकी साइड में खड़ा हो गया और कोमल की मोटी मोटी चूचियों को घूरने लगा, जिसे कोमल भी समझ चुकी थी। बनवारी लाल को चुप देख कोमल उसकी और देख कर बोली..
कोमल – बोलिये न क्या खिलाऊँ?
बनवारी लाल ने कोमल की आँखों में देखा और फिर नजरों को निचे कर बहु की चूचियों को देखते हुए बोला..
बनवारी लाल – मुझे तो नॉन वेज खाना है.
कोमल – नॉन वेज तो हमारे घर में पकता नहीं मम्मी मना करेगी.
बनवारी लाल – घर में पकता नहीं तो कच्चा ही खिला दो, कहते हुए बनवारी लाल ने बहु की गांड को जोर से दबा दिया.
कोमल – ऊई माँ.. कोई कच्चा मॉस खाता है क्या बाबू जी?
बनवारी लाल – बहु हम तो फौजी आदमी है, हमे कच्चा मांस खाने की भी आदत है – कहते हुए बनवारी लाल ने एक ऊँगली कोमल की गांड की दरार में डाल दी.
कोमल – पता नहीं आप कैसे कच्चा मांस खा लेते है मैंने तो आज तक ऐसा कोई नहीं देखा.
बनवारी लाल – तुमने अभी दुनिया देखि ही कहा है बहु और एक बात बताऊ?
कोमल – कौनसी बात बाबू जी?
बनवारी लाल – बहु मांस अगर ताजा और कम उम्र का हो तो कच्चा खाने में और भी ज्यादा मजा आता है, एक बार अगर तुम कच्चा खा लोगी तो दीवानी हो जाओगी.
कोमल ससुर की बाते सुनकर अंदर ही अंदर कामाग्नि में जली जा रही थी, आज से पहले उसने कभी सोचा भी नहीं था की वो कभी अपने ससुर से ऐसी बात कर पायेगी। लेकिन समय की बलहारी है की कोमल जैसी सभ्य लड़की अतृप्त काम की शिकार हो रही थी। तभी पूजा रूम से घंटी की आवाज आयी जिसका मतलब था की सास की पूजा ख़तम होने वाली थी.
कोमल – बाबू जी आप जाइये यहाँ से मम्मी आने वाली है.
बनवारी लाल – और हमारा नॉन वेज?
कोमल – मम्मी से परमिशन ले लो वो भी मिल जायेगा.
बनवारी लाल – वो कभी नहीं मानेगी तुम्हे चोरी छुपे ही खिलाना पड़ेगा.
कोमल – हे राम बाबू जी आप मुझसे पाप करवाओगे क्या?
Sasur Bahu ki chudai कहानी जारी रहेगी, पढ़ते रहिये..
सेक्सी बहू कोमल की चुदाई का सपना – 3
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