ससुराल मे पहली होली मे सारे मर्दों ने चोदा – 2

Sasural me paahli holi ki chudai:- पिछले पार्ट मे आपने पढ़ा कि ससुराल मे मेरी पहली होली थी और मुझे नही पता था कि मेरे ससुराल मे होली पर क्या होता है। होली के दिन जो मैंने देखा मुझे देखकर यकीन ही नही हुआ। मेरे ससुर, पति, जेठ, देवर सब मिलकर घर की औरतों को नंगा कर रहे थे और उनके बूब्स मसल रहे थे। मेरे ससुर ने मुझे बोला कि होली पर हमारे घर मे ऐसा ही होता है, अगर तुम चाहो तो तुम भी जॉइन कर सकती हो। फिर उन्होने अपना बेहद लंबा और मोटा गधे जैसा लंड मेरे हाथ मे पकड़ा दिया। मई भी उत्तेजना मे उनका लंड मुठियाने लगी। अब पढ़िये आगे..

ससुराल मे पहली होली मे सारे मर्दों ने चोदा – 1

Sasural me pahli holi ki chudai

Sasural me pahli holi ki chudai

मेरे पति का अपनी माँ की चूचियों को मसलना या फिर छोटे जेठजी का मेरी चूचियों दबाना इन् सभी अनुभव ने मुझे उत्तेजित कर दिया था और पापाजी का विशालकाय लंड हाए मै तो बस उसे देख कर ही दीवानी हो गयी उसकी। पापाजी ने एक बार फिर से पूछा बोलो सिमरन तुम अपनी होली अपने परिवार से साथ रंग-बिरंगी और यादगार बनाना चाहती हो या अपने कमरे में आराम करोगी? पर अब भी मैं सब सुनकर चुपचाप खड़ी थी। तो पापा जी ने मेरे पति को बोला, जा इसे अपने कमरे मे ले जा, शायद इसे हमारा होली मनाने का तरीका ठीक नहीं लग रहा है।

पर जैसे ही मेरे पति आगे बढे मैंने हलकी आवाज़ मैंने बोला जी पापा जी मैं तैयार हूँ।

मेरी हाँ सुनकर पापा जी के चेहरे पर मुस्कान आ गई पर उन्होंने कहा।

पापाजी- ऐसे नहीं तेज आवाज़ में बोलो और सबको सुनाई दे।

मै- पापाजी मै तैयार हूँ अपने परिवार के साथ होली मनाने के लिए।

पापाजी- आज न कोई पापा जी न मम्मी जी और ना कोई किसी का पति-पत्नी। सब बस मर्द और औरत तो तुम भी जोर से बोलो हां मानोहर लाल मैं होली मनाने के लिए तैयार हूँ।

अब थोड़ी हिम्मत करके मैंने बोला हां मानोहर लाल मैं अपने परिवार के साथ रंग बिरंगी यादगार होली मनाने के लिए तैयार हूँ।

पापा जी बोले यह हुई न दिलेरी वाली बात पापा जी आगे बढे और मुझे अपनी गोद में उठा लिया और आँगन में पड़ी चारपाई की तरफ जाने लगे। मेरे शरीर का वजन उनके लंड पर भी पड़ रहा था मानो मैं उनके लंड पर बैठी हूँ। चारपाइ के पास पहुँचने के बाद पापा जी ने मुझे नीचे उतार दिया और घर के सारे लोगो को पास बुलाया। तो वक़्त आ गया है मैदान में उतरने का पर पहले राउंड के विनर है राजेश और हमारे परिवार की न्यू सदस्य सिमरन।

हालाँकि मुझे पता नहीं था कैसी प्रतियोगिता हो रही है और मैं उसमें विनर कैसे आ गयी।

मुझसे रहा नहीं गया मैंने बगल में खड़ी छोटी भाभी से पूछा किस प्रतियोगिता की बात हो रही है?

तो भाभी ने बोला अभी हम सब जो छुप रहे थे उसमें तुम सबसे आखिर में पकड़ी गई और तुम्हे ढूंढने वाले बड़े जेठ गीत है इस तरीके से तुम दोनों पहले राउंड के विनर हो।

मुझे अब भी ठीक से समझ में नहीं आया पर मैं चुपचाप सबके साथ खड़ी थी।

पापा जी बोले प्रतियोगिता को आगे बढ़ाते हैं पर प्रतियोगिता के सारे नियम मै सबको एक बार फिर से समझा देता हूँ। अगली प्रतियोगिता से सब बिना कपड़ों के रहेंगे पूरी प्रतियोगिता ख़त्म होने तक। प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए हमेशा एक जोड़ी बनानी होगी पर वह जोड़ी पति पत्नी की नहीं होगी। जोड़ी बनाने का फैसला पर्ची निकाल कर किया जाएगा। हर जोड़ी में एक मर्द और एक औरत होगी और आखिर में जो मर्द और औरत प्रतियोगिता में सबसे आगे होगा वह मर्द और औरत सात दिनों के लिए हनीमून पर साथ जायेंगे। ये होगा प्रतियोगिता में सबसे अव्वल आने का प्राइज़।

पापा जी ने बड़े जेठ जी को बोला राजेश जा और सबके नाम की पर्चियां ले आ।

बड़े जेठ जी घर के अंदर गए और दो कांच के जार ले आये एक जार में घर के सारे मर्दों के नाम लिख कर डाल दिए। दूसरे जार में घर की सारी औरतों के नाम लिख पर्ची डाल दी।

पापा जी बोले सब खड़े क्यों हो जल्दी से अपने कपडे निकालो और घर के पीछे बने पूल पर चलना है वहाँ आएगा असली मजा।

घर के सभी सदस्य पने कपडे निकालने लगे पापाजी तो पहले से बिना कपड़ो के थे। वहीं बड़ी भाभी और मेरे पति जो सिर्फ अंडरवियर में थे उन्होने उसे भी निकाल दिया। मम्मीजी भी अपने बचे कपडे निकाल रही थी। दोनों जेठ और छोटी भाभी ने भी अपने कपडे निकाल दिए। मै अभी तक अपनी साड़ी खोल रही थी। तब पापाजी ने रेखा भाभी को इशारा किया मेरी मदद करने के लिए, तो दोनों भाभी आगे आयी और मेरे कपडे उतारने लगी।

मै अभी भी शर्मा रही थी, पहली बार अपने पति के आलावा कोई और मुझे बिना कपड़ो के देखेगा। दोनों भाभी ने जल्द ही मेरे कपडे निकाल दिए। अब सबकी नज़रे मुझ पर थी। मै शर्माती हुई अपने एक हाथ से चूत को ढकने की कोशिश कर रही थी।

पापाजी चलो पूल पर चलते है छोटी भाभी ने मेरा हाथ पकड़ा और सब बिना कपड़ो के घर के पीछे बने पूल पर चल दिये। जब हम सब घर के पीछे वाले हिस्से पर पहुंचे तो मैंने देखा के एक टेम्पररी स्विमिंग पूल बना रखा था। हालाँकि वहां मेरा जाना बहुत ही कम होता था तो मुझे पता नहीं चला की यह सब कब और कैसे बना – और साथ ही होली खेलने के लिए अलग-अलग रंग और खाने पीने इंतजाम भी कर रखा था।

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पापा जी ने सबको एक साथ खड़ा किया और बोले घर के सभी मेंबर की सहमति से हम सब होली यही मनाएंगे और जैसा की हमारे परिवार की रिवाज है आज बस मर्द और औरत न कोई पति और पत्नी इन सब को ध्यान में रखते हुए, प्रतियोगिता का दूसरा राउंड स्टार्ट करते हैं, पर उससे पहले प्रतियोगिता के पहले राउंड में सबसे आगे है रंजीत बड़े जेठजी और घर की नयी मेंबर सिमरन। प्रतियोगिता के इस दूसरे राउंड में एक मर्द और औरत की जोड़ी बनेगी, जिसका फैसला वहां पर कांच की दो जार थी एक जार में सभी लेडीज के नाम लिखी हुई पर्ची थी और दूसरे जार की पर्ची में मर्दों के नाम लिखे हुए थे।

तो दोनों जार से एक-एक पर्ची निकाली जाएंगी और जिस भी मर्द और औरत का नाम आएगा उनकी जोड़ी बनेगी। अगर पर्ची निकलने पर पति पत्नी की जोड़ी बनती है तो वह नहीं माना जाएगा और पर्ची वापस रख कर दोबारा पर्ची निकाली जाएगी। और अलग-अलग प्रतियोगिताओं के लिए नयी जोड़ी बनेगी और आखिर में जो मर्द और औरत सबसे आगे होंगे वह प्रतियोगिता के विनर होंगे।

अब दोनों जार में से पर्चियां निकाली गई पहली जोड़ी मेरे पति और छोटी भाभी, दूसरी बार में पर्ची निकालने पर छोटे जेठजी और मम्मी जी की जोड़ी बनी। तीसरी बार में बड़े जेठ जी और मेरा नाम आया और आखरी जोड़ी मे पापा जी और बड़ी भाभी का नाम आया।

अब जोड़ियां बन चुकी थी, अब बारी थी प्रतियोगिता के अगले राउंड की। जिसमे सभी मर्द पूल के अंदर खड़े होंगे और पानी उनके पैरो के घुटने तक होना चाहिए और घर की सारी लेडीज अपने जोड़ीदार के लंड को चूसेंगी और जो लेडीज अपने जोड़ीदार के लंड का पानी पहले निकाल देगी वो इस राउंड की विनर होगी। वही जेन्ट्स में जिसके लंड का पानी सबसे लास्ट में निकलेगा, वो विनर होगा। मैने अपने पति के लावा कभी किसी दूसरे मर्द का लंड नहीं चूसा था, वो भी बस एक या दो बार पर उनके काफी मनाने के बाद, क्यूंकि मुझे अच्छा नहीं लगता था।

मैंने अपनी नज़रे घुमा कर जेठ जी के लंड को देखा, उनका लंड मेरे पति के लंड से मोटा और लम्बा था, पर अब मैं इस प्रतियोगिता का हिस्सा थी। हालाँकि मुझे वापस जाने का मौका पापाजी ने दिया पर अब यहाँ मै अपनी मर्ज़ी से आयी थी। मैंने अपने आप को शांत रखा एक गहरी सांस ली और कहा जो होगा सो होगा। पापा जी ने गले में सीटी पहन रखी थी। उन्होंने सीटी बजाई और घर के सारे मर्द पूल अंदर जाकर खड़े हो गए। सबसे पहले मेरे पति, फिर राजू, उनके साइड में बड़े जेठ जी और सबसे आखिर में पापा जी।

एक बार फिर पापा जी ने सीटी बजाई, सभी लेडीज पूल के अंदर अपने जोड़ीदार के सामने आकर खड़ी हो गई। मेरी नज़र बड़े जेठ जी से मिली उनके चेहरे पर मुस्कराहट थी और तीसरी बार सीटी बजाते ही प्रतियोगिता शुरू। सारी लेडीज अपने घुटनों पर बैठ गई और बिना किसी झिझक के अपने जोड़ीदार का लंड अपने हाथ में लेकर मसलने लगी। मैं भी अपने घुटनों पर बैठ गई, मैंने अपने हाथ से जेठ जी के लंड को पकड़ा और हलके हलके आगे पीछे करने लगी।

मेरी हरकतों और मेरे हाथ के स्पर्श से जेठजी का लंड खड़ा होने लगा और जल्द ही अपने पूर्ण स्वरुप में आ गया। उनका लंड बड़ा और मोटा था, मैंने बाकियों की तरफ देखा बड़ी भाभी के दोनों हाथो ने पापाजी की जांघों को पकड़ रखा है और लंड के ऊपरी हिस्से को अपने मुंह में लेकर आगे पीछे कर रही थी। पापा जी का विशालकाय लंड अपने चरम पर आ रहा था। उनके लंड को देख कर एक पल के लिए मैं अपने आप को खुश किस्मत मान रही थी। उनका लंड तो जेठ जी से भी बड़ा है।

पापाजी के लंड के आगे का हिस्सा ही बस मुंह में लेते ही भाभी जी का पूरा मुंह भर गया और बाकि लंड तो बाहर ही था पर बड़ी भाभी लंड को बड़े आराम से सहज होकर चूस रही थी। अब मेरी बारी जेठ जी के लंड को मुंह में लेने की थी। यही मैंने लंड के आगे की परत को अपने हाथों से पीछे सरकाया और जेठ जी के लंड का गुलाबी सुपाड़ा मेरे सामने था। मै हल्का आगे झुकी और अपनी होठो से जेठ जी के लंड को छुआ मेरे पुरे शरीर में सनसनाहट फैल गई, फिर हलके से उनके लंड के आगे का हिस्सा अपने मुंह में ले लिया और आगे पीछे करने लगी। जेठ जी भी हरकत में गए, उनके मुंह से भी हलकी सी आह आह की आवाज़ निकली। मैंने अपनी आँखें ऊपर की तरफ घुमाई और देखा उनकी नज़रे भी नीचे झुकी मेरी हरकतों को देख रही है। कुछ देर तक बस ऐसे ही उनके लंड के आगे वाले हिस्से को अपने मुंह में रखकर चूस रही थी। तभी जेठजी ने एक हल्का सा झटका दिया और उनका लंड मेरे मुंह मे अंदर थोड़ा और अंदर चला गया।

मुझे इसकी उम्मीद नहीं थी, तो मैं तुरंत अपने मुंह से उनका लंड निकाल कर पीछे हो गयी। मैंने देखा छोटी भाभी रूपा मेरे पति का लंड को बड़े आराम से चूस रही थी और आगे पीछे कर रही थी और वही बड़ी भाभी पापाजी के लंड को आधे से ज्यादा अपने मुंह के अंदर लेकर चूस रही थी। मैं यह देख कर हैरान थी एक बार फिर मै आगे झुकी और जेठ जी के लंड को अपने मुंह में ले लिया। थोड़ी हिम्मत करके मैंने उनके लंड को अपने मुंह मे गहराई में लेने की कोशिश की।

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मैंने महसूस किया जेठ जी का एक हाथ मेरे सर पर है जेठ जी ने दोबारा एक धक्का दिया, मैंने फिर से पीछे हटने की कोशिश की पर जेठजी ने मेरे सर पर पकड़ बना रखी थी तो मैं पीछे नहीं हट सकी। मैंने एक हाथ से जेठ जी का लंड पकड़ रखा था और जेठजी ने धक्का दिया तो मेरा संतुलन बिगड़ गया मैंने तुरंत अपना हाथ उनके लंड से हटा कर दोनों हाथों से जेठजी के जांघों को पकड़कर अपना संतुलन ठीक किया। बताना मुश्किल था की लंड का कितना हिस्सा मेरे मुंह के अंदर था। जेठ जी ने एक बार फिर धक्का दिया शायद उनका पूरा लंड मेरे मुंह के अंदर जा चुका था और जल्दी जल्दी बड़े जेठजी मेरे मुंह मे अपना लंड डालने लगे। मै अपने गले तक उनके लंड को महसूस कर सकती थी, अपने सर को पीछे खींचने की कोशिश की पर जेठजी जी पहले से तैयार थे, उन्हें मुझे पीछे होने का मौका नहीं दिया और मेरे सर को पकड़ रखा था।

वह अपना लंड मेरे मुंह में डालकर चोदने लगे, मै दर्द से तड़प उठी मानो मेरे गला फट जाएगा, मैं अपने दोनों हाथ जेठ जी की जांघों पर मारने लगी और फिर जेठजी ने जैसे पकड़ ढीली की मैंने तुरंत अपने मुंह से उनका लंड निकाल लिया और झुक कर खांसने लगी। तेजी से साँसे लेने लगी, शायद पहली बार में ही मेरी हिम्मत जवाब दे रही थी की लंड को मैं दोबारा न ले सकूँगी। मेरे आँखों से आंसू आ रहे थे मैंने आपने आपको संभाला और आँखों से आंसू साफ़ किए। फिर जेठ जी के लंड को अपने हाथों से ही आगे पीछे करने लगी शायद जेठ जी को अब थोड़ा रहम आ गया। थोड़ी देर तक मै अपने हाथो से ही जेठ जी के लंड को सहलाती रही और आगे पीछे कर रही थी जेठ जी भी मेरा साथ दे रहे थे मैंने सर घुमाया और देखा पापा जी का पूरा लंड बड़ी भाभी के मुंह में समां चुका है।

उनकी गर्दन की फैली हुई नसें मै देख सकती थी, वही छोटी भाभी मेरे पति के लंड को मुंह में लेकर चूस रही थी, दूसरी तरफ मम्मी जी भी जेठजी के लंड को बड़े मजे से चूस रही थी। सारी औरतें लंड चूसने में लगी थी। जेठ जी ने मेरे गालों पर हल्का सा थपथपाया और जब मैंने उनकी तरफ देखा तो उन्होंने इशारे से दोबारा अपना लंड मेरे मुंह में डालने के लिए कहा।

मैं उनके लंड के आगे वाले हिस्से को अपने मुंह में डालकर आगे पीछे करने लगी, कुछ देर तक यही करने के बाद जेठजी ने दोबारा एक धक्का दिया, उनका आधा लंड मेरे मुंह में था। इस बार मै तैयार थी और मुझे ज्यादा परेशानी नहीं हुई उनका आधा लंड मुंह में लेकर अंदर बाहर करने लगी। जेठजी ने एक और धक्का दिया और फिर से उनका पूरा लंड मेरे मुंह में घुस गया और तेज धक्को से मेरे मुंह को चोदने लगे। जल्दी से मैंने अपने सर को पीछे खिंच लिया पर उनके लंड का आगे का हिस्सा अभी भी मेरे मुंह में ही था। मै बार बार उनके पुरे लंड को मेरे मुंह के अंदर लेती और अपने सर को वापस खींच लेती जिससे मुझे ज्यादा परेशानी नहीं हो रही थी।

मैने अपनी नज़रे उठाकर जेठजी को देखा और जब हमारी नज़रे मिली तो मेरी नज़रों में अपनी जीत की ख़ुशी थी और फिर मैं उनके लंड को अपने मुंह में अंदर बाहर करने लगी। काफी देर तक बड़े जेठजी मेरे मुंह में अपना लंड घुसकर मेरा मुख चोदन करते रहे।

मैं भी अब उनका साथ दे रही थी। छोटे जेठ जी के लंड का पानी निकल गया और और मम्मी जी और छोटे जेठ जी दोनों इस राउंड से बाहर हो गए थे। मैंने भी जेठ जी के लंड का पानी जल्दी से निकाल कर आज़ाद होना चाहती थी और मैंने अपनी पूरी कोशिश की उनके लंड को अपने मुंह में तेज़ी से आगे पीछे आगे पीछे करने लगी।

जल्दी ही मैं थक गई और देर तक ऐसा करने के बाद भी जब जेठ जी के लंड का पानी नहीं निकला। अपना मुंह उनके लंड से निकाल कर तेज साँसे लेने लगी और मैंने देखा मेरे पति के भी लंड का पानी निकल गया और छोटी भाभी लंड के पानी को पी गयी। अब इस राउंड में मै और बड़ी भाभी थी, तभी बाकियों ने आवाज़ लगाई जल्दी करो जल्दी से इन दोनों का पानी निकालो हम दोनों को उकसाने लगे। एक बार फिर मैंने अपनी सांसों को संभाला और जेठ जी के लंड को अपने मुंह में ले कर चूसने लगी। उनके लंड को मुंह मे आगे पीछे करने लगी। मै पूरी कोशिश कर रही थी, उनका लंड मेरे गले में समां जा रहा था, कोशिश जारी थी तभी पापा जी के लंड ने भी अपना पानी छोड़ दिया और भाभी लंड एक एक बूँद पानी पी गई।

मैं लगातार कोशिश कर रही थी, तभी जैसे ही पापा जी के लंड ने पानी छोड़ा, बड़ी भाभी मेरे तरफ घूम गई और अपना हाथ मेरे सर पर रखा और मेरा सर को अपने पति के लंड पर दबा दिया। जेठ जी का पूरा लंड मेरे गले की गहराई चला गया, मैंने पीछे हटने की कोशिश की पर भाभी ने अपनी पकड़ मजबूत बनाये रखी थी। कुछ देर ऐसे ही पकडे रखी, फिर अपनी उँगलियों से मेरे बालों को पकड़कर बेरहमी से मुझे पीछे खिंचा। मैं पीछे आ गई मैंने भाभी को नाराज नजरों से देखा, मेरी साँसे तेज थी और मेरे आँखों में आंसू थे।

तभी बड़ी भाभी ने जेठ जी का लंड पकड़ा और अपने ही मुंह में घुसा लिया और लंड पर आगे पीछे करने लगी, मैं अपने घुटनों पर बैठी, भाभी को लंड चूसते हुए देख रही थी। कुछ देर तक लंड चूसने के बाद भाभी रुकी, लंड मेरी तरफ कर दिया। मैं अब तक संभल चुकी थी तो मैंने भी जेठ जी का लंड अपने मुंह में भर लिया और चूसने लगे जेठजी ने भी धक्का दिया और अपने लंड को आगे पीछे करने लगे। अब मैं समझ गयी जल्द ही पानी निकलने वाला है। जेठ जी ने अपनी स्पीड बढ़ायी और मेरा तेज़ी से मेरा मुंह चोदने लगे और उनके लंड का पानी निकल गया। मैंने पीछे हटने की कोशिश की पर जेठजी ने दोनों हाथों से मेरे सर को पकड़ रखा था तो उनके लंड का पानी मेरे गले से होते हुए मेरे अंदर चला गया। जब उन्होंने मेरे सर को छोड़ा मेरी आँखों लाल हो गई थी और आंसू आ गए थे। मैं थक गई थी, मैंने अपने शरीर को ढीला छोड़ा और पानी में एक डुबकी लगाई।

वहीं बगल में बड़ी भाभी मेरी हालत समझ गयी उन्होंने मुझे सहारा देकर खड़ा किया और हम दोनों पूल से बाहर आए। प्रतियोगिता का दूसरा हिस्सा भी ख़त्म हो चुका था, हम सब खड़े थे।

ससुराल मे पहली होली मे घर के सारे मर्दों ने चोदा – 3

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