अब तक अपने इस Indian sasur bahu sex stories में पढ़ा कि बनवारी लाल अपनी साली मोहिनी को चोद रहा था, बनवारी लाल का लंड मोहिनी की चूत की रमा करने में लगा था, मोहिनी को भी अब चुदाई का भरपूर मज़ा मिलने लगा था और वह भी कमर उछाल उछाल कर चुदाई का बराबर मज़ा ले रही थी. बनवारी लाल एक रेसर के जैसे मोहिनी की चूत मे दना दन धक्के लगा रहा था, लेकिन कसी हुई चूत के आगे वो भी बेबस हो गया और तेज चीख के साथ भरभरा के झड़ने लगा और उसी समय मोहिनी भी जिंदगी में पहली बार स्वर्ग पहुंची और बनवारी लाल से छिपकली की तरह चिपक गयी. अब पढ़िये Sasur bahu ki sensual sex story hindi आगे..
पार्ट 9 यहाँ पढ़ें =>सेक्सी बहू कोमल की चुदाई का सपना – 9
Sasur bahu ki sensual sex story hindi
मोहिनी के उद्घाटन को याद करते करते बनवारी लाल का एक बार फिर खड़ा हो गया, वो उसे मसलते हुए सोच रहा था की बहु को कैसे तैयार किया जाये। अपने लंड के देखते देखते उसे एक चीज याद आयी की कोई भी औरत जब पहली बार उसका अफगानी लंड देखती है तो कुछ देर के लिए वो मोहित सी हो जाती है. अचानक उसके दिमाग में एक आईडिया आया की किसी बहाने से कोमल बहू को अपने लंड के दर्शन करवाएगा और कुछ इस तरह से करेगा की लगे की अनजाने में हुआ है और इसी के साथ उसने कोमल के लिए लिंग दर्शन समारोह आयोजित करने का निर्णय लिया.
दूसरे दिन सुबह ही वो घर से काफी दूर की दुकान से देसी वियाग्रा ले आया, बनवारी लाल का विचार था की जब वो बहु को लंड दिखाए तो उसका लंड पुरे शबाब में हो क्योकि आखिर अंग्रेज भी कह गए है की पहला इंम्प्रेशन ही लास्ट इम्प्रेशन होता है. वो शाम तक दिमाग लडाता रहा की किस मोके पर बहु को लंड दिखाना चाहिए पर कोई सही आईडिया दिमाग में नहीं आ रहा था। शाम को एक और व्यवधान आ गया, बहु को ये खबर मिली की सुनील अगले हफ्ते 3 दिन के लिए आ रहा है, क्योकि उसकी कंपनी का काम इसी शहर में था इसलिए सिर्फ 3 दिन के लिए आ रहा है.
रात को जब बनवारी लाल कोमल के रूम ने पहुंचा तो वो अंदर से बंद था, उसने दवाजा खटखटाया पर अंदर चुप्पी थी, कमरे के बाहर शोर मचाना बेकार था, इसलिए वो छत पर चला गया और वहाँ से कोमल को फोन लगाया, घंटी की आवाज सुनते ही बहु समझ गयी की बाबू जी बेचैन बैठे है लेकिन फ़ोन तो उठाना ही थी.
कोमल – हाँ बाबू जी?
बनवारी लाल – बहु दरवाजा क्यों बंद है दरवाजा तो खोलो?
कोमल – नहीं बाबू जी वो आ रहे है मैं नहीं खोलूंगी।
शायद उसका पतिव्रता धर्म जाग गया था, या पाप बोध बाहर आ गया था, या स्वाभाविक डर उभर आया था.
बनवारी लाल – बहु सुनील तो अगले हफ्ते आएगा, अभी से क्यों डर रही हो? बस थोड़ा सा कर लेने दो.
कोमल – नहीं बाबू जी मेरी छाती पर पहले से ही आपके दांतो के निशान है, जिन्हे मिटने में हफ्ता लग जायेगा और फिर अगर और बन जायेगे तो मैं जवाब नहीं दे पाऊँगी.
बनवारी लाल – अच्छा तो ठीक है मुँह में नहीं लूंगा, थोड़ा हाथ से खेल लेने दो.
कोमल – नहीं मतलब बिलकुल नहीं, अब जब तक आपका बेटा वापिस नहीं चला जाता तब तक मम्मी जी की छाती से खेलिए।
Komal bahu ki chudai ki kahani
और कोमल ने फ़ोन काट दिया, उसे डर था की कही वो ज्यादा देर बात करती रही तो कमजोर न पड़ जाये। बेचारा बनवारी लाल अतृप्त रह गया. दूसरे दिन से कोमल बनवारी लाल से दूर दूर रही, सुनील के आने वाले दिन की पहली वाली रात, बनवारी लाल बहोत ज्यादा परेशान था उसने छत पर पहुंच कर बहु को फ़ोन किया..
कोमल – हाँ बाबू जी नींद नहीं आ रही क्या?
बनवारी लाल – बहु प्लीज पांच मिनट के लिए आ जाने दो बहोत मन कर रहा है.
कोमल – बिलकुल नहीं आप पागल हो गए हो क्या? कल वो आ रहे है आपको मौका मिला तो आप तो हमारा आज ही कबाड़ा कर देंगे.
बनवारी लाल – कसम से नहीं करूंगा प्रॉमिस.. बनवारी लाल गिड़गिड़ाते हुए बोला.
कोमल – कुछ करना नहीं तो आना क्यों है?
बनवारी लाल – बस ऐसे ही तुमको देखने का मन कर रहा है.
कोमल – अभी आधा घंटा पहले डिनर करते समय देख ही तो रहे थे.
बनवारी लाल – वो भी कोई देखना है मुझे दूसरी तरह देखना है.
कोमल – दूसरी तरह मतलब?
बनवारी लाल – जैसे उस दिन बाथरूम में देखा था।
बनवारी लाल माहौल बनाते हुए बोला.
कोमल – क्या? आप बहोत गंदे हो गन्दी बात करते हो.
बनवारी लाल – बहु प्लीज बस एक बार देख लेने दो दिल को चैन आ जायेगा.
कोमल – कोई चैन नहीं आएगा उल्टा आप चैन खो देंगे.
बनवारी लाल – नहीं नहीं मैं बिलकुल कण्ट्रोल में रहूँगा कसम से.
कोमल – रहने दीजिये मुझे सब पता है जब आप पहली बार बाथरूम में ही कण्ट्रोल नहीं कर पाए तो अब तो आप मुझे परेशान भी करने लगे है अब आप अनकंट्रोल हो जाओगे और फिर तो मुझे भगवान् भी नहीं बचा पाएंगे.
बनवारी लाल – कैसी बात कर रही हो बहु मैंने कभी तुम्हारे साथ जबरदस्ती की है जब और जहा तुमने रुकने को बोला मैं तुरंत रुक गया प्लीज मान जाओ न.
कोमल – नहीं बाबू जी आज मैं कोई रिस्क नहीं ले सकती सॉरी.
बनवारी लाल – अच्छा बहु मैं खिड़की पर खड़ा हो जाता हूँ तुम वही से दिखा दो, प्लीज बहु बच्चे पर रहम करो.
कोमल – ओह..हो.. हो बच्चे वो भी आप! एक नंबर के बिगड़े बच्चे हो.
बनवारी लाल की मिन्नतें करने पर कोमल कुछ पसीज गयी, थोड़ा तो वो खुद भी परेशान थी इतने दिनों से कोई उसकी जवानी देख नहीं पा रहा था अंत मे बोली..
कोमल – बस दो मिनट देखने को मिलेगा वो भी कमरे के बाहर खिड़की से ठीक है.
बनवारी लाल – ठीक है.. मंजूर है..
कोमल – ओके दस मिनट बाद नीचे आ जाना.
बनवारी लाल दस मिनट बाद नीचे पहुंचा और जैसे ही उसने अंदर झाँका उसकी ऊपर की साँसे ऊपर और नीचे की नीचे ही रह गयी. अंदर कोमल बिलकुल नंगी बेड पर थी, उसके बदन का एक एक हिस्सा लाइट में चमक रहा था, वो करवट लेकर लेटी हुई थी। करवट लेकर लेटने से वैसे भी औरत की कमर बल खा जाती है और नितंब और भी चौड़े दिखाई देने लगते है कोमल के नितंब तो वैसे भी भारी भरकम थे, बिलकुल गज गामिनी लगती है. बनवारी लाल एक टक कोमल की गांड को देखने लगा। बहु की नंगी जवानी को देख बनवारी लाल पागल सा हो गया गांड के बीच की दरार भी जान लेने पर उतारू थी। बहू की गांड की दोनों फांके दो खरबूजों के समान लग रही थी, एकदम चिकनी माखन के सामान मुलायम पर ठोस. Sasur bahu ki sensual sex story hindi
बनवारी लाल ने लुंगी से अपना लौडा निकाला और तेजी से मुठियाने लगा, बनवारी लाल के मुँह से सिसकारियां निकलने लगी, सिसकारियों को आवाज सुन कर कोमल समझ गयी की बाबू जी खिड़की पर आ गए है। वो कुछ देर ऐसे ही लेटी रही और बनवारी लाल को अपनी जवानी का जाम दूर से ही पिलाती रही। बनवारी लाल भी चक्षु छोदन कर रहा था, उसका लंड आज फटने पर उतारू था. बनवारी लाल ने सोचा यही खिड़की पर खड़े खड़े माल ना निकला तो एक आध नस फट जाएगी और वो जोर जोर से घस्से मारने लगा। कोमल कुछ देर ऐसे ही लेटी रही और फिर बड़ी नजाकर के साथ बैठ गयी और बैठने से उसके मतवाले चूचे भी अपनी झलक दिखाने लगे.
Sasur bahu ki chudai story in hindi
अब बहु की सुन्दर सेक्सी मननमोहनी सूरत भी थोड़ी थोड़ी दिख रही थी, क्योकि वो अपने ससुर की कमजोरी जानती थी, जब बनवारी लाल का माल उबाल मारने लगा तो उसके मुँह से अजीब अजीब सी आवाजे आने लगी. जिसे सुनकर कोमल समझ गयी की बाबू जी का काम होने वाला है, उसने स्तिथि को शांत करने के लिए हाथ आगे बढ़ाया और लाइट बंद कर दी, इधर बनवारी लाल ने भी खिड़की के पास छटाक भर रबड़ी गिरा दी. कोमल अपने बेड शो के कारण बहोत गरम हो गयी थी और जोर जोर से उंगली करने लगी। थोड़ी देर की कोशिश से ही वो झड़ गयी।
लगभग आधे घंटे के बाद जब उसे पेशाब जाना था तो वो बाहर निकली और जैसे ही खिड़की के पास पहुंची तो उसे अपने पैर में कुछ चिपचिपा सा लगा, उसने बरामदे की लाइट जलाई तो देख कर हैरत में पड़ गयी क्योकि नीचे ढेर सारा वीर्य गिरा पड़ा था.
कोमल – हे भगवान् इतना सारा माल! लगता है तीन चार लोगो का है, फिर खुद ही बड़बड़ाई – नहीं नहीं घर में तो सिर्फ एक ही मर्द है बाबू जी तो फिर लगता है तीन चार बार किये है लेकिन एक बार में तो एक ही बार कर सकते है, सुनील तो रात को एक ही बार करते है तो फिर इतना माल कहा से आया?
कोमल कुछ देर सोचती रही और फिर मन ही मन बोली – लगता है जब से मैं बाबू जी से दूर रह रही हूँ तब से इसे शीशी में इकट्ठा किया होगा और आज गुस्से में यहाँ गिरा दिया. खैर कोई बात नहीं मर्दो को गुस्सा शोभा देता है, उसने फ़ौरन वहाँ साफ़ सफाई की और कमरे में आ गयी। बिस्तर पर लेट कर वो अपने और ससुरजी के सम्बन्धो के बारे में सोचने लगी। उसने तो यु ही बाबू जी को थोड़ी छूट दे दी थी, ताकि बुढ़ापे में उनका मन बहल जाये. लेकिन लगता है बाबू जी थोड़े से मानने वाले नहीं है, उन्हें तो पूरा चाहिए। खिड़की पर अपना माल गिरा कर शायद यही बताना चाहते है की ये माल तुम्हारे लिए है, लेकिन ये कैसे हो सकता है भला मैं सुनील को धोखा कैसे दे सकती हूँ? मुझे बाबू जी को इतने में ही रोकना होगा.
जिस दिन सुनील आया उस दिन तो कोमल बाबू जी के पास भी नहीं आ रही थी। रात को चारो ने एक साथ खाना खाया, कुछ गपशप के बाद बेटा बहु अपने कमरे में चले गए और शांति भी नींद की गोली खा कर सोने चली गयी. उधर बनवारी लाल की आँखों से नींद उड़ चुकी थी, एक तो बहु इतने दिनों से छूने नहीं दे रही थी ऊपर से बहु ने जो अपनी जवानी के जलवे दिखाए थे और उससे सुबह से बनवारी लाल पगला गया था। उसे पता था की आज बहु का बाजा बजना है, आखिर सुनील लगभग 8 महीनो बाद आया था.
आज सुबह से ही कोमल के चेहरे पर एक रहस्यमय मुस्कान थी, जो शायद आने वाली खुशियों को बयान कर रही थी। बनवारी लाल की इच्छा हो रही थी की खिड़की से जाकर बहु का नंगा बदन देखे, लेकिन वो सुनील को इस हालत में नहीं देखना चाहता था, पर उसे कोमल को नंगी देखने में कोई एतराज नहीं था, बल्कि उसे तो वो अपने हाथो से नंगी करना चाहता था, लेकिन अपने बेटे कोई इस अवस्था में देखना उसे ठीक नहीं लगा. वो अनिर्णय स्तिथि में था, शष्त्र कहते है की काम वासना बड़े बड़े ज्ञानियों को भी पस्त कर देती है, फिर बनवारी लाल संसारी था ऊपर से ठरकी. बनवारी लाल खिड़की के पास खड़ा होकर अपने मन से लड़ रहा था लेकिन अंत में मन जीत गया। इसीलिए तो कहा गया है “मन मातंग माने नहीं” बनवारी लाल आगे बढ़ा और खिड़की से आँख लगा दी। अंदर का दृश्ये देखकर बनवारी लाल का कोबरा फुफकार मारने लगा.
पढ़ते रहिये.. क्योकि ये sasur bahu hindi sex stories अभी जारी रहेगी.
Read more sasur bahu sex stories
- मुझे आपका लंड चाहिए बाबूजी
- ससुरजी ने मुझे बाथरूम मे पकड़कर पेला
- विधवा बहू की चूत की प्यास
- बहू की तड़पती चूत की प्यास ससुर ने बुझाई
- मेरे ससुर ने मुझे रंडी की तरह चोदा
- ससुरजी के घोड़े जैसे लंड से चूत फड़वायी
