Sasur bahu ki chudai xxx story:- अब तक अपने इस Sasur bahu hindi sex story में पढ़ा कि बनवारी लाल ने अपनी बहू कोमल को होली का रंग लगाने के बहाने नंगा कर दिया। फिर वो अच्छे से बहू कि बूब्स पर अच्छे से रंग लगाया और बहू के संतरों को अच्छे से दबाया। बहू भी मदहोश हो गयी थी। उसे कुछ भी होश नही रहा था कि ससुर जी क्या कर रहे है। फिर जैसे ही बनवारी लाल ने बहू कि चूत और गांड पर रंग लगाना शुरू किया तो बहू कि तंद्रा टूटी और फिर उसने अपनी टी-शर्ट उठाई और नंगी ही अपने कमरे में भाग गयी। बनवारी लाल उसको नंगी भागते देखता रहा, बहु की गांड की हर थिरकन के साथ उसका लंड भी झटके खा रहा था. फिर वो भी रसोई से निकला और बाथरूम की और चल दिया. अब आगे..
Last Part => सेक्सी बहू कोमल की चुदाई का सपना – 4
Sasur bahu ki chudai xxx story

बनवारी लाल अपने कमरे में जाकर बैठ गया और जो कुछ अभी हुआ उसको याद करने लगा। वो खुश था की जो कुछ भी अभी हुआ वो उसके आगे की यात्रा में मील का पत्थर साबित होगा. वो एक एक घटना को याद करने लगा, पहला तो बहु खुद कह रही थी बाबू जी धीरे दबाइये न इसका मतलब था की बहु के अंदर बहोत आग है, बस सुलगाने की जरुरत है जिसमे तो बनवारी लाल एक्सपर्ट था. फिर दूसरा आज उसने जी भर कर बहू की चूचियां चूसी थी। चूचियां नारी का बहोत सम्वेदनशील अंग होती है, दुनिया की हर वो औरत जो पूर्ण विकसित वक्षस्थल की स्वामिनी है, वो मर्द द्वारा उनको सहलाना मसलना और उनसे खेलना पसंद करती है.
बनवारी लाल जानता था की जो सुख आज बहु ने चूचि मर्दन और चुसन से हासिल किया है, वो उसे फिर ससुर के पास आने को मजबूर करेगा. तीसरी और सबसे बड़ी उपलब्धि थी के कोमल का अपनी टी-शर्ट उतारने के लिए तैयार हो जाना, औरत का चारित्रिक पतन सिर्फ एक बार होता है उसके बाद दोबारा जो कुछ होता है वो सिर्फ काम वासना की ललक होती है। अगर औरत एक बार किसी पराये मर्द के नीचे लेट गयी, तो उसी समय उसका सब कुछ लुट जाता है, फिर वो दोबारा न भी जाये तो लुटी चीज वापिस नहीं आती.
इसलिए ऐसी औरत फिर सोचने लगती है, की जो खोना था वो तो खो गया अब तो सिर्फ पाना ही पाना बाकि है और वो बारम बार पतन कि तरफ चली जाती है. बनवारी लाल निश्चिन्त था की एक बार बहु अपने आप टी-शर्ट उतारने के लिए राजी हो गयी है, तो वो आगे फिर कभी भी उसे ऊपर से तो नंगी कर ही लेगा। अब उसे ऐसा कुछ करना था, जिससे कोमल पेटीकोट उतारने के लिए भी राजी हो जाये. क्योकि अगर एक बार बहु नीचे भी हाथ धरने दे दे, तो मौज ही मौज है, फिर तो रोज उसका फौलादी लंड, बहु की मखमली चूत की गहराईयों की सैर करेगा. Sasur bahu ki chudai xxx story
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फिर बनवारी लाल कोमल के कातिल जिस्म को याद करके आगे का रोडमैप बनाने लगा, कोमल के जिस्म की याद आते ही उसका मुसल फिर अंगड़ाइयां लेने लगा, तो उसने अपने लंड को मुठियाते हुए कहा “बस बेटा थोड़ा और सबर कर ले फिर तेरे भी अच्छे दिन आ जायेगे”.
उधर कोमल अपने कमरे में आ कर बुरी तरह हांफ रही थी, अभी भी उसे ऐसा लग रहा था जैसे बाबू जी उसकी चूचियां चूस रहे है। वो सोचने लगी हे भगवान् क्या क्या करते है बाबू जी? कही बूब्स को काटते है तो कही कितने प्यार से निप्पल के ऊपर जीभ चलाते है, तो कही घुड़ियों को दांत में रख कर धीरे धीरे चबाते है पता नहीं कहा से सीखा है ये सब..?
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फिर कोमल मन ही मन बोली – बाप इतना सयाना है और बेटा बिलकुल भोंदू, झल्ले को कुछ भी नहीं आता, कम से कम जिंदगी में बाप से कुछ तो सीख लिया होता. कोमल इन बातो को याद कर गरम हो रही थी पर उसे हैरानी भी हो रही थी की कैसे उसने बाबू जी की इतना सब कुछ करने दिया। ससुर तो बाप समान होता है आज के पहले जो कुछ हुआ वो अकस्मात हुआ था, लेकिन आज तो उसने अपने ससुर के कहने पर अपनी टी-शर्ट ही उतार दी और तो और वो खुद कितनी बेशर्मी से बोल रही थी. बाबू जी जोर से मत काटिये धीरे कीजिये – उसे अपने ऊपर शर्म आने लगी। आखिर वो एक इज्जतदार घर की बेटी और एक संस्कारी घर की बहु थी.
उसने सोचा चलो मैं तो कच्ची उम्र की हूँ, लेकिन बाबू जी तो सयाने है, वो भी बच्चो जैसे चपर चपर दूध पीने लगे थे। फिर अपनी चूचियों को सहलाते हुए मन ही मन बोली “ससुर का भी क्या दोष, मर्द कोई भी हो इनके जोश से बचके कहा जायेगा. अचानक कोमल को याद आया की उसके पति सुनील के अलावा उसकी चूचियों से खेलने वाले बाबू जी, पहले पराये मर्द नहीं बल्कि दूसरे है.
इसके पहले उसके एक टीचर पटेल सर, ने उसे बेवकूफ बना कर उसके नए नए चुचों से मनमानी की थी और वो घटना कोमल के सामने चल चित्र की तरह घूमने लगी.
बात तब की है जब कोमल 12th में थी, साल का आखरी समय था, कोमल प्रेक्टिकल का एग्जाम दे रही थी किसी दूसरे स्कूल की लेडी टीचर निर्देशक बन कर आयी थी। निर्देशक ने एक बार पूरी क्लास का दौरा किया सबसे सवाल किये और चली दी. कोमल का एग्जाम कुछ खराब हो गया था, क्योकि वो ढंग से जवाब नहीं दे पायी, पटेल सर बैठ कर कुछ लिखा पढ़ी कर रहे थे। एग्जाम के अंत में सर ने कोमल और पिंकी को रोक लिया और एक लिस्ट दिखाई जिसमे से उन दोनों को 50 में से 10 नंबर मिले थे. Sasur bahu ki chudai xxx story
कोमल के पेरो तले से तो जमीन ही खिसक गयी, वो दोनों सर के पास रोई पर सर ने कहा की ये नंबर मैडम ने दिए है रो धो कर जब वो दोनों वहाँ से चल दी, तो कुछ दूर जाने के बाद सर की आवाज आयी। उन्होंने पिंकी को बुलाया और फिर पिंकी और पटेल कुछ देर तक आपस में बाते करते रहे. जब पिंकी लौटी तो वो खुश दिखाई दे रही थी. कोमल पूछ बैठी..
कोमल – क्या बात है अचानक खुश क्यों हो रही है?
पिंकी – सर हमे पास करने को तैयार हो गए है.
कोमल – वेट.. लेकिन कैसे! अचानक क्यों बदल गए?
पिंकी – बदल नहीं गए कल हम दोनों को 11 बजे लैब में बुलाया है.
कोमल – लेकिन स्कूल की तो छुट्टी है फिर लैब में क्यों बुलाया है?
पिंकी – तेरी पूजा करने को बुलाया है.
कोमल – मतलब? मैं कुछ समझी नहीं?
पिंकी – सुन! पटेल सर की बीवी दूसरे शहर में काम करती है सर यहाँ अकेले पड़े रहते है, इसलिए बोले है की दोनों थोड़ा एन्जॉय करा दो, तो अभी भी पास करा सकता हूँ.
कोमल – क्या? तू पागल तो नहीं हो गयी है क्या अनाप शनाप बोल रही है.
पिंकी – न मैं पागल हुई हूँ न अनाप शनाप बोल रही हूँ, न मुझे फेल होना है, ना 12th में दोबारा बैठना है.
कोमल – तो क्या इसके लिए इज्जत बेच देगी? तू होश में तो है न?
पिंकी – इज्जत विज्जत बेचने की कोई जरुरत नहीं है, सर सर्फ ऊपर ऊपर से ही करेंगे, मैंने साफ़ साफ़ बात कर ली है.
कोमल – पिंकी तू पागल हो गयी है, एक बार फिर सोच ले.
पिंकी – मैंने सब सोच लिया है, मुझे अपना साल बर्बाद नहीं करना तू भी सोच ले साल बर्बाद करना है या थोड़ा सा दूध मसलवाना है? बस सर थोड़ा किसिंग विस्सिंग करेंगे और हाथ फेर लेंगे.
कोमल – सॉरी मुझे कुछ नहीं करना, तेरी सलाह तुझे मुबारक! मैं ऐसी वैसी लड़की नहीं हूँ.
पिंकी – मैं भी वैसी लड़की नहीं हूँ, लेकिन हालात आदमी को मजबूर कर देते है, फेल हो गयी, तो पिता जी घर में बिठा देंगे, कल सुबह जाने से पहले फ़ोन करुँगी, तब तक अच्छी तरह से सोच लेना.
दोनों अलग अलग हो गए और उसके बाद से तो कोमल के दिमाग के फ्यूज उड़ गए। हे भगवान् सचमुच फेल हो गयी, तो फिर खुद से ही बोली, सचमुच क्या फेल तो तू हो चुकी है. रात भर वो सो नहीं पायी और फिर जब सुबह पिंकी का फ़ोन आया..
पिंकी – बोल लेने आउ क्या?
कोमल – पिंकी सारा स्कूल बंद है, कही सर जबरदस्ती करने लगे तो?
पिंकी – पगली तू चिंता मत कर, सर से पहले ही बात हो गयी है, सिर्फ ऊपर ऊपर का मजा लेंगे, स्कूल में प्रिंसिपल भी रहेंगे और चोकीदार भी होगा और हम दो है, कोई अकेले तो होंगे नहीं.
कोमल – कही सर ने किसी को बता दिया तो? हम बदनाम हो जायेगे.
पिंकी – ऐसे कैसे बता देंगे? हमसे ज्यादा तो उनका नुकसान है, खुद बदनाम होंगे नौकरी भी जाएगी और शायद बीवी से भी हाथ धोना पड़ेगा, समझी तू बिलकुल टेंशन मत ले.
कोमल – ठीक है पिंकी मैं पूरी तरह तेरे भरोसे हूँ, बस सर हद से ज्यादा न बढे.
पिंकी – तू टेंशन मत ले यार कूल डाउन, मैं सब संभाल लुंगी.
और फिर हम दोनों लैब में पहुँच गयी. कोमल को देख कर पटेल की आँखे चमक उठी, उसे यकीन नहीं था की कोमल मान जाएगी। कोमल को दरवाजे पर खड़ा कर पिंकी अंदर चली गयी और कुछ देर सर से बात की और फिर वापिस आ कर कोमल से बोली.
पिंकी – सुन मैं यहाँ दरवाजे पर खड़ी हूँ, तू अंदर जा और साले को थोड़ा एन्जॉय करा दे और डरना बिलकुल भी मत.
कोमल सर झुकाये टेबल के पास पहुंची ही थी के पटेल तुरंत खड़ा हुआ और उसको पकड़ कर दिवार से सटा दिया और लपक कर कोमल के होंठो पर अपने होंठ रख दिए और वो किसी भूखे भेड़िये की तरह कोमल के होंठ चूसने लगा और सर के हाथ कोमल के नए नवेले बूब्स पर पहुँच गए। वो कोमल की चूचियों को जोर जोर से मसलने लगा, तो कोमल बोल उठी..
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सर दर्द हो रहा है जोर से मत करिये.
सॉरी डार्लिंग अब धीरे करूँगा – सर ने कहा
और फिर बारी बारी से कोमल की चूचियों को दबाने लगा. कोमल के होंठ तो वो एक पल के लिए भी नहीं छोड़ रहा था। सर की इस हरकत से कोमल की सांसे तेज़ चलने लगी, चेहरे पर खून उतर आया हलाकि ये सब कोमल की अनिच्छा से हो रहा था, लेकिन कुदरत के भी कुछ नियम होते है.
आग को जानबूझ कर छुओ या धोखे से वो जलती ही है, कोमल इस अवस्था में थी की जिंदगी में पहली बार कोई मर्द उसके बदन से खेल रहा था। इसका असर उसके शरीर पर भी पड़ने लगा, क्योकि शरीर की अपनी अलग एक भाषा होती है. मर्द के पहले स्पर्श से उसके बदन में काम तरंगे उठने लगी और उसके निप्पल सख्त हो गए और उसकी जांघो पे गूस बम्प्स उभर आये। सर कुछ लम्बे थे, इसलिए उन्हें परेशानी होने लगी थी तो उन्होंने कोमल को अपनी कुर्सी पर बैठा दिया और उसके संतरों पर टूट पड़े.
कुछ देर ऊपर से खेलने के बाद पटेल कोमल का ब्लाउज ऊपर करने लगा, तो कोमल ने उसके हाथ रोक दिए.
कोमल – सर नहीं ऊपर से ही करिये.
पटेल – बस बेबी थोड़ी देर की ही बात है, ज्यादा कुछ नहीं करूँगा.
कोमल – नहीं सर सिर्फ ऊपर ऊपर की ही बात हुई थी.
पटेल – ऊपर का मतलब था सिर्फ कमर से ऊपर, अगर उनको आँखों से देख भी नहीं पाया तो क्या मतलब – और पटेल फिर ब्लाउज ऊपर करने लगा.
कोमल – नहीं सर.. मैं ऐसा नहीं करने दूंगी, आपको जो करना है ऊपर से ही कीजिये।
कोमल की ऐसी जिद देख पटेल गुस्से में बोला..
पटेल – कोमल तुम्हारे लिए नौकरी दांव पर लगा रहा हूँ और तुम इतने नखरे कर रही हो, तुम्हे पता है अभी फाइनल लिस्ट बननी है और बोर्ड में भेजने से पहले प्रिंसिपल के साइन और सील लगवाना है, अगर कही प्रिंसिपल ने मैडम की ओरिजिनल लिस्ट दिखाने को कह दिया तो मेरी नौकरी चली जाएगी। मैं अपना कैरियर दांव पर लगा रहा हूँ और तुम मुझे इतनी अकड़ दिखा रही हो। अगर ज्यादा दिक्कत है तो चली जाओ और पिंकी को अंदर भेज दो.
सर की बात सुन कर कोमल कुछ बोल नहीं पायी और चुप चाप वही खड़ी रही, पटेल समझ गया की अब काम बन जायेगा तो वो फिर ब्लाउज खोलने लगा और इस बार कोमल ने कोई विरोध नहीं किया. बहार आते ही कोमल के कबूतर फड़फड़ाने लगे और पटेल अवाक् सा खड़ा हो कर कोमल के बूब्स देखने लगा, जैसे सामने कोई खजाना पड़ा हो. जब उसे होश आया तो अगले ही पल कोमल की एक चूचि उसके मुँह के अंदर थी, अपनी चूचि सर के मुँह के अंदर जाते ही, कोमल ऊपर से नीचे तक सिहर उठी, आज तक उसने सिर्फ छोटे छोटे बच्चों के मुँह में औरत की चूचि देखि थी।
आज पहली बार बार वो किसी जवान मर्द के मुँह में चूचि देख रही थी और वो भी अपनी खुद की चूचि. उसके शरीर में फिर एक बार काम वासना बढ़ने लगी, उधर पटेल सर चूचि पर ऐसे पिले पड़े थे, जैसे भूख से बिलबिला रहा कोई बच्चा हो। कहते है वासना का कोई अंत नहीं होता, एक पूरी होती है तो दूसरी मुँह उठा कर खड़ी हो जाती है. यही हाल पटेल का भी था ऊपर कब्ज़ा हो चुका था, तो नीयत नीचे जाने लगी और उसका हाथ कोमल की मखमली जांघो में घूमने लगा।
कोमल खुद बेखुदी के आलम में थी, इसलिए उसे कुछ पता ही नहीं चल रहा था की सर की गाडी दूसरे रास्ते चल दी है. उसे होश तब आया जब सर उसकी पैंटी खींचने लगे, कोमल तुरंत बोल उठी – सर ये आप क्या कर रहे हो छोड़िये उसे.
पटेल प्यार जताता हुआ बोला – बस बेबी सिर्फ एक मिनट के लिए एक बार दर्शन करवादो अपनी गुड़िया के.
कोमल – नहीं सर आप अपनी हदो से पार जा रहे है.
पर पटेल फिर जबरदस्ती करने लगा तो कोमल जोर से मारने लगी, कोमल की आवाज सुन कर पिंकी ने जब अंदर झाँका तो देखा की सर के हाथ कोमल की स्कर्ट के अंदर है और वो उसकी पैंटी खींचने की कोशिश कर रहे है। पिंकी समझ गयी की सर की नियत बिगड़ गयी है, तो वो तुरंत वह पहुँच गयी. पिंकी को अंदर देख सर ने कोमल को छोड़ दिया और कोमल भी फ़ौरन अपने कपडे ठीक करने लगी.
पिंकी ने कोमल से कहा – जा तू दरवाजे पर पहरा दे, मैं थोड़ी देर में आती हूँ.
कोमल जा कर दरवाजे पर खड़ी हो गयी और उसकी नजर लगातार प्रिंसिपल के ऑफिस की और थी कुछ ही देर में अंदर से पिंकी की सिसकारियों की आवाजे आने लगी, पर कोमल ने उस पर कोई ध्यान नहीं दिया क्योकि इस सब में उसका कोई इंट्रेस्ट नहीं था. लगभग दस मिनट बाद अंदर से सर के कराहने की आवाज आने लगी, तो वो चौंकि कि परेशानी तो पिंकी को होनी थी, लेकिन चिल्ला सर रहे है, लेकिन वो चुपचाप बाहर ही देखती रही.
थोड़ी देर बाद सर की गुर्राने की आवाजे आने लगी, तो उसने धीरे से अंदर झाँका। अंदर झाँकते ही कोमल ने जो नजारा देखा, उसे देख उसका कलेजा मुँह में आ गया। सर अंदर पूरे नंगे कुर्सी पर बैठे थे और उनके पैरो में घुटनो के बल पिंकी बैठी थी और वो बिलकुल नंगी थी. सबसे शॉकिंग जो था, वो ये था की सर का लंड पिंकी के मुँह में था और वो उसे बड़े चाव से चूस रही थी। ये दृश्य देख कर कोमल कांप गयी और फिर से बाहर देखने लगी। लेकिन जवानी दीवानी होती है, कोमल का मन नहीं माना तो उसने फिर से अंदर देखा।
अंदर पिंकी लंड को जड़ तक मुँह में ले चुकी थी और गपागप अंदर बाहर कर रही थी. सर भी नीचे से कमर उछाल रहे थे, शर्म के मारे कोमल फिर बाहर देखने लगी और फिर लगभग 15 मिट बाद पिंकी उसके सामने खड़ी थी.
पिंकी – चल बन्नो अब पास होने की चिंता छोड़ दे.
कोमल – तुमने तो बोला था की सर सिर्फ ऊपर ऊपर से ही करेंगे, फिर अंदर जो तूने किया वो?
पिंकी – बन्नो वो तो तेरे से भी वही चाहता था, लेकिन मुझे पता था, तू फेल हो जाएगी पर ये नहीं करेगी इसलिए मुझे अकेले ही उसे संभालना पड़ा.
कोमल – पर तुमने वो कैसे कर लिया? वो बहोत गन्दा था.
पिंकी – कोई बात नहीं यार तुझे पता है मेरा बॉयफ्रेंड भी है तो मुझे आदत है.
कोमल – व्हाट.!
कुछ दिन बाद कोमल को पता चल गया की जो मार्क्स सर ने दिखाए थे, वो नकली लिस्ट थी, उसे बहोत गुस्सा आया, लेकिन रिजल्ट आते ही उसका गुस्सा शांत हो गया. क्योकि पेपर ख़राब होने के बाद भी उसे पचास में से चालीस नंबर मिले थे और पिंकी को अड़तालीस नंबर मिले थे। आखिर उसने सर की सेवा भी तो ज्यादा की थी. पढ़ते रहिये.. क्योकि ये hindi sex stories अभी जारी रहेगी.
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