विधवा बहू रूपाली की प्यास ससुर ने बुझाई

Sasur bahu ki chudai story hindi:- वो हवेली आज भी वैसे ही सुनसान थी जैसे की वो पिछले 10 साल से थी। आसमान में चाँद पूरे नूर पे था और हर तरफ चांदनी फैली हुई थी। उसके बावजूद हवेली के गलियारे अँधेरे में डूबे हुए थे। दूर से कोई देखे तो इस बात का अंदाज़ा तक नहीं हो सकता था के इसमें कोई ज़िंदा इंसान भी रहता है। आँगन में सूखी घास बबूल की झाड़ियां खुला हुआ बड़ा दरवाज़ा, डाल पे बोलता हुआ उल्लू, हर तरफ मनहूसियत पूरे जोश पर थी। पूरी हवेली में 25 कमरे में जिसमें से 23 अँधेरे में डूबे हुए। सिर्फ 2 कमरों में हलकी सी रौशनी थी। एक कमरा था ठाकुर शौर्य सिंह का और दूसरा उनकी बहु रुपाली का। हवेली में फैले हुए सन्नाटे की एक वजह 2 दिन पहले हुई मौत भी थी।

Sasur bahu ki chudai story hindi

मौत हवेली की मालकिन और ठाकुर शौर्य सिंह की बीवी सरिता देवी की जो एक लंबी बीमारी के बाद चल बसी थी। उस रात हवेली में मौत का खौफ हर तरफ देखा जा सकता था। मरने से पहले बीमारी में दर्द की वजह से उठी सरिता देवी की चीखें जैसी आज भी हर तरफ गूँज रही थी। मगर हमेशा यही आलम न था। इस हवेली ने खूबसूरत दिन भी देखे थे। हवेली को शौर्य सिंह के परदादा महाराजा इंद्रजीत सिंह ने बनवाया था। न तो आसपास के किसी रजवाड़े में ऐसी हवेली थी और न ही किसी का इतना सम्मान था जितना इंद्रजीत सिंह का था। परंपरा अगली कई पीढ़ियों तक बनी रही। हर तरफ इंद्रजीत सिंह के कुल पर लोक गीत गाये जाते थे। जो भी हवेली तक आया कभी खाली हाथ नहीं गया।

जो भी गुज़रता हवेली के दरवाज़े पे सर झुकाके जाता जैसे वो कोई मंदिर हो और यहाँ भगवान बसते हों। आज़ादी के बाद महाराजा की उपाधि तो चली गयी मगर रुतबा और सम्मान वही रहा। लोग आज भी हवेली में रहने वालो को महाराज के नाम से ही पुकारते थे। और यही सम्मान शौर्य सिंह ने भी पाया जब उनका राजतिलक किया गया। और फिर एक दिन पड़ोस के रजवाड़े की बेटी सरिता देवी को बहु बनाकर इस हवेली में लाया गया। शौर्य सिंह को सरिता देवी से 4 औलाद हुई। 3 बेटे और एक बेटी। सबसे बड़े बेटे पुरुषोत्तम की शादी रुपाली से हुई और वही अपने पिता जी ज़मीन जायदाद की देखभाल भी करता था। दूसरा बेटा तेजवीर सिंह अपने बड़े भाई का ही साथ देता था पर ज़्यादा वक़्त अय्याशी में गुजारता था। तीसरा बेटा कुलदीप सिंह अब भी विदेश में पढ़ रहा था। और सबसे छोटी थी सबकी लाड़ली कामिनी। 3 भाइयों की दुलारी और घर में सबकी प्यारी शौर्य सिंह की एकलौती बेटी।

हवेली में हर तरफ हसी गूंजती रहती थी। आनेवाले अपनी झोलियाँ भरके जाते और दुआ देते के कुल का सम्मान सदा ऐसे ही बना रहे और शायद होता भी यही मगर एक घटना ने जैसे सब बर्बाद कर दिया। वो एक दिन ऐसा आया के शौर्य सिंह से उसका सब छीनके ले गया। उनका सम्मान खुशियां दौलत और उनका सबसे बड़ा बेटा पुरुषोत्तम सिंह। एक शाम पुरुषोत्तम सिंह घर से गाडी लेके निकला तो रात भी लौटके नहीं आया। ये कोई नयी बात नहीं थी। वो अक्सर काम की वजह से रात बाहर ही रुक जाता था इसलिए किसी ने इस बात पर कोई ध्यान नहीं दिया। मुसीबत सुबह हुई जब खबर ये आयी के पुरुषोत्तम की गाडी हवेली से थोड़ी दूर सड़क के किनारे खड़ी मिली और पुरुषोत्तम का कहीं कोई पता नहीं था। गाडी में खून के धब्बे साफ़ देखे जा सकता थे। तलाश की गयी तो थोड़ी ही दूर पुरुषोत्तम सिंह की लाश भी मिल गयी। उसके जिस्म में दो गोलियां मारी गयी थी।

हवेली में तो जैसी आफत ही आ गयी। परिवार के लोग तो पागल से हो गए। किसी को कोई अंदेशा नहीं था के ये किसने किया। पहले तो किसी की इतनी हिम्मत ही नहीं हो सकती थी के शौर्य सिंह के बेटे पे हाथ उठा देते और दूसरा पुरुषोत्तम सिंह इतना सीधा आदमी था की सबसे हाथ जोड़के बात करता था। उसकी किसी से दुश्मनी हो ही नहीं सकती थी। उसके बाद जो हुआ वो बदतर था। शौर्य सिंह ने बटे के क़ातिल की तलाश में हर तरफ खून की नदियां बहा दी। जिस किसी पे भी हल्का सा शक होता उसकी लाश अगले दिन नदी में मिलती। सबको पता था के कौन कर रहा था पर किसी ने डर के कारण कुछ न कहा। यही सिलसिला अगले 10 साल तक चलता रहा। शौर्य सिंह और उनके दुसरे बेटे तेजवीर सिंह ने जाने कितनी लाशें गिरायी पर पुरुषोत्तम सिंह के हत्यारे को न ढूंढ सके। हत्यारा तो न मिला लेकिन कुल पर कलंक ज़रूर लग गया। जो लोग शौर्य सिंह को भगवान समझते थे आज उनके नाम पे थूकने लगे। जिसे महाराज कहते थे आज उसे हत्यारा कहने लगे। और हवेली को तो जैसे नज़र ही लग गयी। जो कारोबार पुरुषोत्तम सिंह के देखरेख में फल फूल रहा था डूबता चला गया। शौर्य सिंह ने भी बेटे के ग़म में शराब का सहारा लिया।

यही हाल तेजवीर सिंह का भी था जिसे पहले से ही नशे की लत थी। कर्ज़ा बढ़ता चला गया और ज़मीन बिकती रही। हैवेली का 150 साल का सम्मान 10 सालों में ख़तम होता चला गया।।

रुपाली अपने कमरे में अकेली लेटी हुई थी। नींद तो जैसे आँखों से कोसो दूर थी। बस आँखें बंद किये गुज़रे हुए वक़्त को याद कर रही थी। वो गुजरे 20 साल, जब पुरुषोत्तम सिंह की बीवी बन कर उसने इस हवेली में पहली बार कदम रखा था। पिछले 13 सालों में कितना कुछ बदल गया था। गुज़रे सालों में ये हवेली एक हवेली न रहकर एक वीराना बन गयी थी। रुपाली पास के ही एक जमींदार की बेटी थी। वो ज़्यादा पढ़ी लिखी नहीं थी और हमेशा गाँव में ही पली बढ़ी थी। भगवान में उसकी श्रद्धा कुछ ज़्यादा ही थी। हमेशा पूजा पाठ में मगन रहती। न कभी बन सवरने की कोशिश की और न ही कभी अपने ऊपर ध्यान दिया।

उसकी ज़िन्दगी में बस 2 ही काम थे। अपने परिवार का ख्याल रखना और पूजा पाठ करना। पर जब शौर्य सिंह ने उसे पहली बार देखा तो देखते ही रह गए। वो सादगी में भी बला की खूबसूरत लग रही थी। ऐसी ही तो बहु वो ढूंढ भी रहे थे अपने बेटे के लिए। जो उनके बेटे की तरह सीधी साधी हो पूजा पाठ करती हो और उनके परिवार का ध्यान रख सके। बस फिर क्या था बात आगे बढ़ी और 2 महीनो में रुपाली हवेली की सबसे बड़ी बहु बनकर आ गयी। उसके जीवन में पुरुष का संपर्क पहली बार सुहागरात को उसके पति के साथ ही था। वो कुंवारी थी और अपनी टांगें ज़िन्दगी में पहली बार पुरुषोत्तम के लिए ही खोली।

पर उस रात एक और सच उस पर खुल गया। सीधा साधा दिखनेवाला पुरुषोत्तम बिस्तर पर बिलकुल उल्टा था। उसने रात भर रुपाली को सोने न दिया। दर्द से रुपाली का बुरा हाल था पर पुरुषोत्तम था के रुकने का नाम ही नहीं ले रहा था। वो बहुत खुश था के उसे इतनी सूंदर पत्नी मिली और रुपाली हैरत में अपने पति को देखती रह गयी। यही समस्या अगले 3 साल तक उनकी शादी में आती रही। पुरुषोत्तम हर रात उसे चोदना चाहता था और रुपाली की रति क्रिया में रूचि बस नाम भर की थी। वो बस नंगी होकर टाँगे खोल देती और पुरुषोत्तम उसपर चढ़कर धक्के लगा लेता। यही हर रात होता रहा और धीरे धीरे पुरूहोत्ताम उससे दूर होता चला गया।

रुपाली को इस बात का पूरा ज्ञान था के उसका पति उससे दूर जा रहा है पर वो चाहकर भी कुछ न कर सकी। पुरुषोत्तम बिस्तर पे जैसे एक शैतान का रूप ले लेता और वो उसके आक्रामक अंदाज़ का सामना न कर पाती। उसके लिए इन सब कामों की ज़रुरत बस बच्चे पैदा करने के लिए थी न की ज़िन्दगी का मज़ा लेने के लिए। धीरे धीरे बात यहाँ तक आ पहुंची के दोनों बिस्तर पे नंगे होते पर बात नहीं करते थे। और फिर एक दिन जब पुरुषोत्तम की हत्या का पता चला तो रुपाली की दुनिया ही लूट गयी। वो इतनी बड़ी हवेली में जैसे अकेली रह गयी और पहली बार उसे अपने पति की कमी का एहसास हुआ। उसके बाद जो हुआ वो उसने बस एक मूक दर्शक बन के देखा।

खून में सनी तलवार जैसे हवेली में आम बात हो गयी थी। कोई किसी से बात नहीं करता था। अगले दस साल तक यही सन्नाटा हवेली में छाया रहा और इन सबका सबसे बुरा असर उसकी सास सरिता देवी पर हुआ जो बिस्तर से जा लगी। हर तरह की दवा की गयी पर उनकी बीमारी का इलाज न हो सका। और 10 साल बाद उन्होंने दम तोड़ दिया। उस रात रुपाली अपनी सास के पास ही थी। घर में और कोई भी न था। ठाकुर शौर्य सिंह शराब के नशे में कहीं बाहर निकल गए थे। दूसरा बेटा तो कई दिन तक घर न आता था और बेटी कामिनी अपने भाई कुलदीप के पास विदेश में थी। नौकर तो कबके हवेली छोड़के भाग चुके थे। बस एक वही थी जो अपनी सास को मरते हुए देख रही थी वहीँ उनके पास बैठे हुए।

सरिता देवी ने उसका हाथ पकड़ा हुआ था जब उन्होंने आखरी सांस ली पर उससे पहले उन्होंने जो कहा उसने रुपाली को हैरत में डाल दिया। मरने से ठीक पहले सरिता देवी ने उसकी आँखों में देखा और उससे एक वादा लिया के वो इस हवेली की खुशियां वापस लाएगी। रुपाली की समझ में नहीं आया के कैसे पर एक मरती हुई औरत का दिल रखने के लिए उसने वादा कर दिया। फिर सरिता देवी ने जो कहा वो रुपाली की समझ में बिलकुल नहीं आया। उनके आखरी शब्द अब भी उसके दिमाग में गूँज रहे थे –

बेटी औरत का जिस्म दुनिया में हर फसाद की सबसे बड़ी जड़ है और ऐसा हमेशा से होता आया है। महाभारत और रामायण तक इसी औरत के जिस्म की वजह से हुई। पर इस जिस्म के सहारे फसाद ख़तम भी किया जा सकता है” और इसके बाद सरिता देवी कुछ न कह सकी।।। उसकी सास की कही बात का मतलब अब उसे समझ आ रहा था। मरती हुई उस औरत ने उससे एक वादा लिया और ये भी बता गयी के उस वादे को पूरा कैसे करना है। कैसे इस पूरे परिवार को एक साथ फिर इस हवेली की छत के नीचे लाना है। ये बात अगर आज से दस साल पहले रुपाली ने सुनी होती तो शायद वो अपनी सास को ही थप्पड़ मार देती पर इन 10 सालों में जो उसने देखा था उसके कारण भगवन से उसकी श्रद्धा जैसे ख़तम ही हो गयी थी।

रुपाली अपने बिस्तर से उठी और कुछ सोचती हुई खिड़की तक गयी। खिड़की से बाहर का नज़ारा देखकर उसका रोना छूट पड़ा। आज जो आँगन कब्रिस्तान जैसा लग रहा है कभी इसी आँगन में देर रात तक महफ़िल जमा होती थी। नाच गाना होता था। हसी गूंजा करती थी। उसने अपने आंसू पोंछते हुए खिड़की पर परदे डाल दिए और दरवाज़ा अंदर से बंद कर दिया। फिर उसने पलटके कमरे में लगे बड़े शीशे में अपने आप को देखा। वो 33 साल की हो चुकी थी। पिछले 10 साल में उसने सिर्फ और सिर्फ दुःख देखे थे पर इन सबके बावजूद जो एक चीज़ नहीं बदली थी वो था उसका हुस्न। वो आज भी वैसे ही खूबसूरत थी जैसे आज से 13 साल पहले जब दुल्हन बनकर इस कमरे में पहली बार आयी थी।

हाँ उस वक़्त थोड़ी दुबली पतली थी और अब उसका पूरा जिस्म गदरा गया था। तब वो एक लड़की थी और आज एक औरत। कमरे में ट्यूब लाइट की सफ़ेद रौशनी फैली हुई थी और नीले रंग की साडी में उसका रूप ऐसा खिल रहा था जैसे चांदनी में किसी झील का पानी। रुपाली ने अपना हाथ अपने कंधे पे रखा और साडी का पल्लू सरका दिया। दुसरे ही पल शर्म से खुद उसकी अपनी आँखें झुक गयी। पहली बार आज उसने अपने आपको इस नज़र से देखा था। ये नज़र तो उसने अपने ऊपर तब भी नहीं डाली थी जब वो शादी के जोड़े में तैयार हो रही थी। उसने धीरे से अपनी नज़र उठायी और फिर अपने आप को देखा।

नीले रंग का ब्लाउज और उसमें क़ैद उसके 36 साइज की छातियां और नीचे उसकी गोरी नाभि। उसके होंठो पे एक हलकी सी मुस्कराहट आयी और उसने टेढ़ी होकर अपनी छातियों को निहारा। जैसे दो पर्वत सर उठाये खड़े हों। गौरव के साथ और नीचे उसकी नाभि जैसे धुप में साफ़ सफ़ेद चमकता कोई रेगिस्तान। उसने अपना एक हाथ अपने पेट पे फिराते हुए अपने दायी तरफ के स्तन पे रखा और जैसे अपने आप ही उसके हाथ ने उसकी छाती को दबा दिया। दुसरे ही पल उसके शरीर में एक लहर सी दौड़ गयी और उसके घुटने कमज़ोर से होने लगे। पहली बार उसने अपने आप को इस अंदाज़ में छुआ था और आज जो महसूस कर रही थी वो तो तब भी महसूस न किया था जब यही छातियां उसके पति के हाथों में होती थी। जब वो इनको अपने मुंह में लेके चूसा करता था। रुपाली ने जैसे एक नशे की सी हालत में अपने ब्लाउज के बटन खोलने शुरू कर दिए। उसे 10 साल से किसी मर्द ने नहीं छुआ था और 10 साल में न ही कभी उसके जिस्म ने कोई ख्वाहिश की पर आज उसकी सास की कही बात ने सब कुछ बदल दिया।

एक एक करके ब्लाउज के सारे बटन खुल गए और अगले ही पर वो सरक कर नीचे ज़मीन पे जा गिरा। ब्रा में अपनी छातियों को देखकर रुपाली एक बार फिर शर्मा सी गयी पर अगले ही पल नज़र उठाकर अपने आपको देखने लगी। सफ़ेद रंग की ब्रा में उसकी बड़ी बड़ी छातियां जैसे खुद उसपर ही क़यामत ढा रही थी। ब्रा उसकी छातियों पे कसी हुई थी और आधे स्तन ब्रा से उभरकर बाहर आ रहे थे। जैसे किसी गिलास में शराब ज़रुरत से ज़्यादा डाल दी गयी हो और अब छलक कर बाहर गिर रही हो। रुपाली अपना एक हाथ कमर तक ले गयी और ब्रा के हुक को खोलने की कोशिश करने लगी। जैसे ही खुद उसके हाथ का स्पर्श उसकी नंगी कमर पे हुआ उसे फिर अपने घुटने कमज़ोर होते से महसूस हुए।

धीरे से ब्रा का हुक खुला और अगले ही पल उसके दोनों स्तन आज़ाद थे। दो पर्वत जो 33 साल की उम्र होने के बाद भी ज़रा नहीं झुके थे। आज भी उसी अकड़ से अपना सर उठाये मज़बूत खड़े थे। रुपाली को खुद अपने ऊपर ही गर्व महसूस होने लगा। उसके दोनों हाथों ने उसकी छतियो को थाम लिया और धीरे धीरे सहलाने लगे। उसके मुंह से एक ठंडी आह निकल गयी और पहली बार उसे अपनी टांगो के बीच नमी का एहसास हुआ और उसका ध्यान अपने शरीर के निचले हिस्से की तरफ गया। उसकी टाँगे मज़बूती से एक दुसरे से चिपक गयी जैसे बीच में उठती ख्वाहिश को पकड़ना चाह रही हो और छातियों पर उसकी पकड़ और सख्त हो गयी जैसे दबाके बरसो से दबी आग को बाहर निकलना छह रही हो।

उसने फ़ौरन अपनी साडी को पेटीकोट से निकाला और बिस्तर की तरफ उछाल दिया। फिर उसके हाथ पेटीकोट को ऐसे उतारने लगी जैसे उसमें आग लग गयी हो। थोड़ी ही देर बाद उसका पेटीकोट भी बिस्तर पर पड़ा था और और वो सिर्फ एक पैंटी पहने अपने आप को निहार रही थी। और तब उसे एहसास हुआ के उसने पिछले 10 साल में अपने ऊपर ज़रा भी ध्यान नहीं दिया। पैंटी ने उसकी चूत को तो ढक लिया था पर दोनों तरफ से बाल बाहर निकल रहे थे। वजह ये थी के 10 साल में उसने एक बार भी नीचे शेव नहीं किया था। पति के मरने के बाद कभी ज़रुरत ही महसूस नहीं हुई। जब वो अपनी आर्म्स के नीचे के बाल साफ़ करती तो बस वही रुक जाती – कभी चूत की तरफ ध्यान ही न जाता।

यही सोचते हुए उसनी अपनी पैंटी उतारी और पहली बार अपने आपको पूरी तरह से नंगी देखा। शीशे में नज़ारा देखकर रुपाली के मुंह से सिसकारी निकल गयी। उसे अपनी पूरी जवानी कभी एहसास न हुआ के वो इतनी खूबसूरत है। कभी पूजा पाठ से ध्यान ही न हटा। जैसे आज उसने अपने आपको पहली बार पूरी तरह नंगी देखा हो। उसका लम्बा कद साइज के बड़े बड़े भारी स्तन पतली कमर और भारी उठी हुई गांड। दो लंबी लम्बी सफ़ेद टांगें और उनकी बीच बालों में छिपी उसकी चूत। वो पलटी और अपनी कमर से लेके अपनी गांड तक को निहारा। वो जो देख रही थी वो किसी भी मर्द को पागल कर देने के लिए काफी थी। ये सोचते हुए वो मुस्कुरायी। बस एक चीज़ से छुटकारा पाना है और वो थे उसकी चूत को छिपा रहे लम्बे बाल।

उसने अपना एक हाथ उठे हुए बालों पे फिराया और चौंक पड़ी। बाल गीले थे। उसका हाथ टैंगो के बीच आया तो एहसास हुआ के खुद अपने आपको देखर उसकी चूत गीली हो चुकी थी। जैसे ही उसने अपनी चूत को थोड़ा सहलाया उसके घुटने जवाब दे गए और वो ज़मीन पे गिर पड़ी। आज पहली बार उसने जाना के चूत गीला होना किसे कहते हैं और क्यों उसका पति उसे चोदने से पहले लंड पे तेल लगाता था। क्यूंकि कभी भी उसकी चूत गीली नहीं होती थी और इसलिए उसे लंड लेने में तकलीफ होती थी। रुपाली ने ज़मीन पे पड़े पड़े ही अपने घुटने मोड और टाँगे फैलाई। चूत खुलते ही उसे एक की ठंडक का एहसास अपनी चूत पे हुआ। हाथ चूत तक आया और फिर धीरे धीरे ऊपर नीचे होने लगा। उसकी आँखें आनंद के कारण बंद होती चली गयी और मुंह से एक लंबी आह निकल गयी।

हाथ थोड़ा और नीचे आया तो वो जगह मिली जहाँ उसके पति का लंड अंदर घुसता था। जगह मिली तो एक अंगुली अपने आप ही अंदर चली गयी। जोश में रुपाली ने गर्दन झटकी तो शीशे में फिर खुद पे नज़र पड़ी। नीचे कालीन पे पड़ा उसका नंगा जिस्म जैसे दुनिया की सबसे खूबसूरत चीज़ लग रहा था। बिखरे बाल मुड़ी कमर छत की तरफ उठे हुए स्तन जोश और एक की ठंडी हवा के कारण सख्त हो चुके निप्पल्स। खुली हुई लंबी टांगें, गीली खुली हुई उसकी चूत और उसकी चूत को सहलाता उसका हाथ। इस नज़ारे ने खुद उसके जोश को सीमा के पार पहुंचा दिया और फिर जैसे उसकी चूत और हाथ में एक जंग छिड़ गयी। मुंह से लंबी आह निकलने लगी और बदन अकड़ता चला गया।

जब जोश का तूफ़ान ठंडा हुआ तो रुपाली के जिस्म में जान बाकी न रही थी। उसने अपने आपको इतना कमज़ोर कभी महसूस न किया था। बदन में जो लहर उठी थी आज से पहले कभी न उठी थी। उसकी चूत से पानी निकल कर उसकी गांड तक को गीला कर चुका था। उसने फिर अपने आप को शीशे में निहारा तो मुस्कुरा उठी। आज जैसे उसने अपने आप को पा लिया था। वो थोड़ी देर वैसे ही पड़ी अपने नंगे जिस्म को देखती रही और फिर जब उठने की कोशिश की तो दर्द की एक लहर उसके सर में उठी। अपने सर पे हाथ फेरा तो 2 बातों को एहसास हुआ। एक के उसने जोश में अपना सर ज़मीन पे पटक लिया था जिसकी वजह से सर में दर्द हो रहा था और दूसरा चूत सहलाते गर्मी इतनी ज़्यादा हो गयी थी के चूत से बाल तक तोड़ लिए थे जो अभी भी उसकी उँगलियों के बीच फंसे हुए थे।

उसने अपने सर को सहलाया और अचानक उसकी हंसी छूट पड़ी। आज उसे पता था के उसे क्या करना है।। रुपाली यूँ ही ज़मीन पे काफी देर तक नंगी ही पड़ी रही और उसे पता ही नहीं चला के कब उसकी आँख लग गयी। जब नींद खुली तो सुबह के 5 बज रहे थे। उसने कल रात ही सोच लिया था के उसे क्या करना है और कैसे करना है। अब तो बस सोच को अंजाम देने का वक़्त आ गया था। उसने उठकर अपने कपडे पहने और बाल ठीक करके नीचे आयी। घर में अभी भी हर तरफ सन्नाटा था। वो खामोश कदम रखते अपने ससुर के कमरे तक पहुंची। दरवाज़ा खुला था। वो अंदर दाखिल हो गयी।

ठाकुर शौर्य सिंह नशे में धुत सोये पड़े थे। शराब की बोतल अभी तक हाथ में थी। एक नज़र उनपर डालकर रुपाली का जैसे रोना छूट पड़ा। एक वक़्त था जब शौर्य सिंह का शौर्य हर तरफ फैला था। हर कोई उन्हें इज़्ज़त की नज़र से देखता था उनका अदब करता था। शराब को कभी उन्हें कभी भी हाथ न लगाया था। और आज उसी इंसान से हर कोई नफरत करता है हर तरफ उसके नाम पे थूका जाता है। रुपाली ने अपने ससुर के हाथ से शराब की बोतल लेके एक तरफ रख दी। अगर हवेली की इज़्ज़त को दोबारा लाना है तो सबसे पहले उसे अपने ससुर को इस 10 साल की लंबी नींद से जगाना होगा, ये बात वो बहुत अच्छे से जानती थी। एक शौर्य सिंह ही हैं जो सब कुछ दोबारा ठीक कर सकते हैं और अभी तो एक सवाल का जवाब उसे और चाहिए था के उसके पति को मारने की हिम्मत किसने की थी। किसकी जुर्रत हुई थी के हवेली की खुशियों पे नज़र लगाए।

रुपाली बाहर बड़े कमरे में रखे सोफे पे आके बैठ गयी। उसे इंतज़ार था घर के एकलौते नौकर भूषण का। भूषण ने अपनी सारी ज़िन्दगी इसी हवेली की सेवा करते गुज़र दी थी और बुढ़ापे में भी अपने ज़िन्दगी के आखरी दिनों में हवेली का वफादार रहा। उसने वो सब देखा जो हवेली में हुआ पर कभी गया नहीं। यूँ तो अब वो ही हवेली का सारा काम करता था पर अब उसके कामों में एक काम और जुड़ गया था। 24 घंटे नशे में धुत ठाकुर का ख्याल रखना। उसके दिन की शुरुआत भी ठाकुर की जगाने और उनके नहाने का इंतज़ाम करने से ही होती थी।

थोड़ी ही देर में रुपाली को नौकर के क़दमों की आहट सुनाई दे गयी।

“अरे बहु आप? इतनी सुबह?” भूषण ने पूछा।“

हाँ वो आपसे कुछ काम था। मेरा कल माँ दुर्गा का व्रत था और आज पूजा के बाद ही मैं कुछ खा सकती हूँ। अभी देखा तो घर में पूजा का सामान ही नहीं है। आप लाल मंदिर जाकर पूजा की सामग्री ले आइये। क्या क्या लाना है मैं सब इस कागज़ पे लिख दिया है” रुपाली ने कागज़ का एक टुकड़ा भूषण की तरफ बढ़ाते हुए कहा। लाल मंदिर हवेली से तक़रीबन 100 कोस की दूरी पे था और भूषण 4-5 घंटे से पहले वापिस नहीं आ सकता था ये बात रुपाली अच्छी तरह जानती थी।

“जैसा आप कहें” भूषण ने कागज़ का टुकड़ा लेते हुए कहा। – पर घर का काम?”

“वो सब मैं देख लुंगी। आप जल्दी ये सब सामान ले आइये”

रुपाली ने उसे जाने का इशारा करते हुए कहा।

बहु की भगवान में कितनी श्रद्धा है। कितना पूजा पाठ करती है और फिर भी उपरवाले ने बेचारी को भरी जवानी में ऐसे दिन दिखाए। ये सोचता हुए भूषण धीरे धीरे दरवाज़े की तरफ बढ़ गया।

बाहर सवेरे को सूरज दिखना शुरू हो गया था। अब वक़्त था ठाकुर को जगाने का। रुपाली अपने कमरे में पहुंची और अपनी ब्रा और पैंटी उतार फेंकी। विधवा होने के कारण उसे हमेशा सफ़ेद साड़ी में ही रहना पड़ता था पर उसमें भी उसका हुस्न देखते ही बनता था। ब्रा न होने के कारण सफ़ेद ब्लाउज में उसकी दोनों छातियां हलकी हलकी नज़र आने लगी थी। रुपाली ने आईने में एक नज़र अपने ऊपर डाली और साड़ी का पल्लू थोड़ा सा एक तरफ कर दिया और ब्लाउज का ऊपर क एक बटन खोल दिया। सफ़ेद ब्लाउज में अब उसकी चूचियां पल्लू न होने के कारण और ज़्यादा नज़र आने लगी थी।

निप्पल तो साफ़ देखा जा सकता था और ब्लाउज का एक बटन खुल जाने के बाद उसका क्लीवेज किसी की भी धड़कन रोक देने के लिए काफी था। अपने आप को देखकर रुपाली फिर मुस्कुरा उठी। वो अभी ठाकुर को जाकर जगाने का सोच ही रही थी के नीचे से शौर्य सिंह की आवाज़ आयी। वो चिल्लाकर भूषण को आवाज़ दे रहे थे। रुपाली ने जल्दी से अपना पल्लू ठीक किया सर पे घूंघट डाला और तेज़ कदमो से चलती नीचे बड़े कमरे में आयी।

“जी पिताजी” उसकी आवाज़ सुन शौर्य सिंह पलटे।

“भूषण कहाँ है बहु”

“जी उन्हें मैंने लाल मंदिर भेजा है। घर में पूजा की सामग्री नहीं है। मेरा कल से व्रत था जो मुझसे पूजा के बाद ख़तम करना है”

रुपाली ने सोचा समझा जवाब दिया।

“हम्म्म। ठीक है”

शौर्य सिंह एक नज़र बहुत पे डाली और कुछ कह न सके पर चेहरे पे आयी झुंझलाहट रुपाली ने देख ली थी।“

आपके नहाने का पानी हमने गरम कर दिया है और बाथरूम में है। आप नहा लीजिये तब तक हम नाश्ता बना देते हैं” रुपाली ने कहा

शौर्य सिंह अब भी नशे में धुत थे ये बात रुपाली से छुपी नहीं। कदम अब भी लड़खड़ा रहे थे।

“ठीक है” कहते हुए शौर्य सिंह वापिस अपने कमरे में जाने के लिए पलटे और लड़खड़ा गए। घुटना सामने रखे सोफे से टकराया और वो गिरने लगे।

रुपाली ने फ़ौरन आगे बढ़के सहारा दिया और इस चक्कर में उसकी साड़ी का पल्लू उसके सर से सरक कर नीचे जा गिरा।

“संभलके पिताजी”

रुपाली ने अपने ससुर के सीने के दोनों तरफ बाहें डाली और उन्हें गिरने से बचाया। शौर्य सिंह का एक हाथ रूपाली की साड़ी के बीच नंगे पेट पे आया और दूसरा उसके कंधे पे। कुछ पल के लिए उसका सीना रुपाली की चूचियों से दब गया। जब संभले तो एक नज़र रुपाली पे डाली। वो अभी तक उन्हें सहारा दे रही थी इसलिए साड़ी का पल्लू ठीक नहीं किया था। शौर्य सिंह ने आज दूसरी बार उसका चेहरा देखा था। पहली बार जब उसे पहली बार उसके बाप के घर देखा था और आज। वो आज भी उतनी ही सूंदर लग रही थी बल्कि उससे कहीं ज़्यादा। और फिर नज़र चेहरे से हटके उसके गले से होती उसकी चूचियों पे ठहर गयी, जो ब्रा से बाहर निकलके गिरने को हो रही थी।

सफ़ेद रंग के ब्लाउज में निप्पल साफ़ नज़र आ रहे थे। दुसरे ही पल उन्होंने शर्म से नज़र फेर ली। पर ससुर की नज़र रुपाली से बची नहीं। वो जानती थी के ससुर जी ने वो सब देख लिया है जो वो दिखाना चाहती थी। जब शौर्य सिंह संभले तो उसने अलग हटके अपने साड़ी ठीक करी।

“आप थोड़ी देर यहीं बैठ जाइये। मैं तब तक आपके लिए चाय ला देती हूँ”

कहते हुए उसने ससुर जी को वहीँ बैठाया और किचन की तरफ बढ़ गयी। किचन में जाकर उसने एक प्याली में चाय निकाली और फिर ब्लाउज में से वो छोटी से बोतल निकाली जो उसकी माँ ने शादी से पहले उसे दी थी।

“ये एक जड़ी बूटी है। ये पुरुष में काम उत्तेजना जगाती है। इसे अपने पास रखना। अगर कभी तेरा पति बिस्तर पे तेरा साथ न दे रहा हो तो उसे ये पिला देना। फिर वो तुझे रात भर सोने नहीं देगा” ये बात उसकी माँ ने उसे मुस्कुराते हुए बताई थी। उस वक़्त रुपाली ये बात सुनके शर्म से गड गयी थी और उसका दिल किया था के इसे फेंक दे। पर फिर जाने क्या सोचकर रख ली थी और आज यही चीज़ उसके काम आ रही थी। माँ तो रही नहीं पर उनकी चीज़ आज काम आयी सोचते हुए रुपाली ने आधी बोतल चाय की प्याली में मिला दी।

ठाकुर को चाय की प्याली थमाकर वो उनके नहाने का पानी बाथरूम में रखने चली गयी। वापिस आयी तो ठाकुर चाय ख़तम कर चुके थे।

“हमें तो पता ही नहीं था के आप इतनी अच्छी चाय बनाती हैं बेटी” शौर्य सिंह ने कहते हुए चाय की प्याली नीचे रखी“

शुक्रिया पिताजी” कहते हुए रुपाली चाय की प्याली उठाने को झुकी और शौर्य सिंह का कलेजा उनके मुंह को आ गया। बहु के झुकते ही उसका क्लीवेज फिर उनकी आँखों के सामने एक पल के लिए आया और उन्होंने अपने जिस्म में एक हरकत महसूस की। लंड ने जैसे एक ज़माने के बाद आज अंगड़ाई ली हो। ठाकुर को अपने ऊपर आश्चर्य हुआ। वो हमेशा सोचते थे के अपने काम पे उन्हें पूरा काबू है पर आज उनकी बेटी समान बहू को देखकर उनका जिस्म उन्हें धोखा दे रहा था। उन्हें इस बात का ज़रा भी एहसास नहीं था के ये कमाल उनकी चाय में मिली जड़ी बूटी का था।

रुपाली चाय की प्याली रखकर वापिस आयी तो देखा के ठाकुर उठने की कोशिश कर रहे हैं पर नशे के कारण कदम लड़खड़ा रहे थे। उसने फिर आगे बढ़के सहारा दिया।

“आइये हम आपको बाथरूम तक ले चलते हैं” कहते हुए रुपाली ने ठाकुर को सहारा दिया।

ठाकुर शौर्य बहु का कन्धा पकड़के खड़े हुए। रुपाली ने एक हाथ उनका पेट पकड़कर एक हाथ से उनका दूसरा हाथ पकड़ रखा था जो उसके कंधे पर है। उसके हाथ की नर्माहट और उसके जिस्म की गर्माहट शौर्य सिंह साफ़ महसूस कर सकते थे। अनजाने में ही उनकी नज़र फिर बहू के ब्लाउज पे चली गयी। क्लीवेज तो न दिखा क्यों कि साड़ी पूरी तरफ से चूचियों के ऊपर थी पर इस बात का अंदाज़ा ज़रूर हो गया के ब्लाउज का अंदर बहू की छातियां कितनी बड़ी बड़ी हैं। धीरे क़दमों से दोनों बाथरूम तक पहुंचे। ठाकुर को अंदर छोड़कर रुपाली बाहर कमरे में आयी ही थी के अंदर बाथरूम में ज़ोर की एक आवाज़ आयी।

वो भागकर फिर बाथरूम में पहुंची तो देखा के शौर्य सिंह नीचे गिरे पड़े थे।

“ओह पिताजी। आपको चोट तो नहीं आयी” उसने अपने ससुर को उथाके बिठाया।

“नहीं कोई ख़ास नहीं। पैर फिसल गया था पर मैंने दीवार का सहारा ले लिया इसलिए ज़्यादा ज़ोर से नहीं गिरा।” ठाकुर ने अपनी कमर सहलाते हुए जवाब दिया। “ये कम्बख्त भूषण। इसे पता है के हमें नहलाने का काम इसका है फिर भी सुबह सुबह गायब हो गया” ठाकुर ने गुस्से में कहा।

“गलती हमारी है पिताजी। हमने भेजा था।” रुपाली ने कहा

“फिर भी। उसे सोचना चाहिए था।” ठाकुर ने फिर अपनी कमर पे हाथ फिराया।

“लगता है आपकी कमर में चोट आयी है। हमें दिखाइए” कहते हुए रुपाली ठाकुर के पीछे आयी और इससे पहले के वो कुछ कहते उनके कुर्ते को ऊपर उठाकर कमर देखने लगी।

शौर्य सिंह जैसे हक्के बक्के रह गए। वो मना करना चाहते थे पर बहु ने इंतज़ार ही नहीं किया।“ज़्यादा चोट नहीं आयी पिताजी। हलकी सी खरोंच है” रुपाली ने कुरता फिर नीचे करते हुए कहा।

“हम्म्म्म…” ठाकुर बस इतना ही कह सके।

“आप बैठिये। हम आपको नहला देते हैं वर्ना आप फिर गिर जायेंगे।” रुपाली ने कहा।

ठाकुर उसे मना करना चाहते थे पर शरीर में उठी काम उत्तेजना न चुप कर दिया। रुपाली ने उनका कुरता पकड़के उतारा और ठाकुर ने अपने दोनों हाथ हवा में उठाकर उसकी मदद की। अब जिस्म पे सिर्फ एक धोती रह गयी।

“घूंघट में नहलाओगी? कुछ नज़र आएगा?” ठाकुर ने मुस्कुराते हुए पूछा।

रुपाली ने अपने चेहरे से घूंघर हटा दिया और साड़ी का पल्लू अपनी कमर में पेटीकोट के साथ फंसा लिया। अब उसका पल्लू उसके ब्लाउज के बीच से जा रहा था और एक भी छाती को नहीं ढक रहा था। शौर्य सिंह ने उसका चेहरे को साफ़ इतनी नज़दीक से पहली बार देखा था। उन्होंने उसपे एक भरपूर नज़र डाली और दिल ही दिल में तारीफ किये बिना न रह सके। और फिर नज़र जैसे अपने आप उसकी छातियों से आके चिपक गयी जो अब पल्लू हट जाने कि वजह से ब्लाउज में साफ़ नज़र आ रही थी।

रुपाली ने अपने ससुर के शरीर पे पानी डालना शुरू किया। पानी वो इस अंदाज़ में डाल रही थी के आधा पानी ठाकुर के ऊपर गिरता और आधा उसके अपने ऊपर। थोड़ी ही देर में ठाकुर के साथ साथ वो भी पूरी तरह भीग चुकी थी। उसका ब्लाउज उसकी छातियों से चिपक गया था। अंदर ब्रा न होने के कारन अब उस ब्लाउज का होना न होना एक बराबर था। वो ठाकुर के सामने खड़ी थी जिसकी वजह से उसकी छातियों का भरपूर नज़ारा उसके ससुर को मिल रहा था।

उसने साबुन उठाया और अपने ससुर के सर पे लगाना शुरू किया। शौर्य सिंह का अपने ऊपर काबू रखना मुश्किल हो रहा था। सालों से उन्होंने किसी को नहीं चोदा था और आज एक औरत का जिस्म इतने करीब था। उनकी बहु झुकी हुई उनके सर पे साबुन लगा रही थी। पानी से भीगा ब्लाउज अब जैसे था ही नहीं। उसकी दोनों चूचियां उनके सामने साफ़ नज़र आ रही थी। रुपाली उनके इतना करीब थी के वो अगर अपना मुंह हल्का सा आगे कर दें तो उसके क्लीवेज को चूम सकते थे।रुपाली घूमकर ठाकुर के पीछे आयी और कमर पे साबुन लगाने लगी।

बुढ़ापे में भी अपने ससुर का जिस्म देखकर उसकी मुंह से जैसे वाह निकल पड़ी थी। इस उम्र में इतना तंदरुस्त जिस्म। बुढ़ापे का कहीं कोई निशान नहीं। मजबूत चौड़ी छाती मजबूत कंधे। उसे इस बात का भी अंदाज़ा था के ठाकुर एकटुक उसकी चूचियों को ही घूर रहे थे और यही तो वो चाहती भी थी। अचानक वो आगे को गिरी और और अपनी दोनों चूचियां ठाकुर के कंधो पे रखके दबा दी।

“माफ़ कीजियेगा पिताजी। पर फिसल गया था” कहते हुए तो खड़ी हुई और पानी ड़ालकर साबुन धोने लगी। अचानक उसकी नज़र बैठे हुए ठाकुर की टांगो की तरफ पड़ी और उसकी आँखें खुली रह गयी। उसके ससुर का लंड खड़ा हुआ था ये धोती में भी साफ़ देखा जा सकता था। साफ़ पता चलता था के लंड कितना लम्बा और मोटा है। रुपाली को पहली बार अंदाज़ा हुआ के लंड इतना लम्बा और मोटा भी हो सकता है। उसके पति का तो शायद इसका आधा भी नहीं था। एक बार को तो उसे ऐसा लगा के हाथ आगे बढ़के पकड़ ले। अपने दिल पे काबू करके रुपाली ने नहलाने का काम ख़तम किया और मुड़कर बाथरूम से बाहर निकल गयी।

शौर्य सिंह की नज़र तो जैसे बहु की छातियों से हटी ही नहीं। जब वो नहलाकर जाने के लिए मुड़ी तो उनका कलेजा जैसे फिर उनके मुंह को आ गया। साड़ी भीग जाने की वजह से रुपाली की गांड से चिपक गयी थी और गांड के बीच की दरार में जा फंसी थी। उसकी उठी हुई गांड की गोलाइयों को देखकर ठाकुर के दिल में बस एक ही बात आयी।

“बहुत सही नाम रखा इसके मान बाप ने इसका। रुपाली”।

Read more sasur bahu sex stories

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Scroll to Top