सेक्सी बहू कोमल की चुदाई का सपना – 6

Sasur bahu ki chudai ki hot sex story:- होली की घटना के बाद से कोमल अपने ससुर से थोड़ा दूर दूर रहने लगी, आखिर उसके ससुर ने उसे ऊपर से पूरा नंगा देख लिया था वो भी उसकी सहमति से। इस कारण कोमल बहुत शर्मिंदा महसूस कर रही थी. इस बात को बनवारीलाल भी नोट कर रहा था की बहु हिचक रही है, लेकिन उसके लिए तसल्ली की बात ये थी की बहु गुस्सा नहीं थी. चार दिन तक ऐसे ही लुका छिपी चली रही, फिर बनवारीलाल ने सोचा की शुरुआत उसे ही करनी पड़ेगी, क्योकि औरत स्वभाव से ही इन मामलों में आगे नहीं बढ़ती। तो रात को उसने छत से बहु को फ़ोन किया.

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बाबू जी का फ़ोन आता देखते ही कोमल की दिल की धड़कने बढ़ गयी, कुछ देर पहले ही सुशील (कोमल का पति) से गरमा गरम बाते हुई थी, तो वह पहले से सेक्सी मूड में थी. कोमल ने फ़ोन पिक किया.

कोमल – हाँ बाबू जी?

बनवारी लाल – बहु क्या कर रही हो? सोइ नहीं थी क्या?

कोमल – नहीं बाबू जी ऐसे ही गाने सुन रही थी.

बनवारी लाल – क्या दिन भर गाने सुनती रहती हो, थोड़ा घूमा फिरा करो, शरीर के लिए अच्छा होता है.

कोमल – बाबू जी रात को कहाँ घूमूँ.

बनवारी लाल – अरे रात को खाने के बाद घूमना जरुरी होता है और जगह की कोई कमी है इतनी बड़ी छत पड़ी है चलो ऊपर आ जाओ.

कोमल – ऊपर? ऊपर तो आप है.

बनवारी लाल – तो मैं हूँ से क्या मतलब? मैं कोई बहुत हूँ?

कोमल – नहीं वो बात नहीं है पर..

बनवारी लाल – तो फिर क्या बात है? जो कहना है साफ़ साफ़ कहो डरती क्यों हो?

कोमल – छत पर तो अंधेरा भी है.

बनवारी लाल – अँधेरा है तो क्या हुआ? अपना घर है कोई जंगल जाना है क्या? चलो आओ थोड़ा वाकिंग कर लो.

कोमल – बाबू जी आप तंग तो नहीं करोगे न?

बनवारी लाल – क्या? मैं तुम्हे तंग करता हूँ क्या?

कोमल – वो उस दिन! होली वाले दिन कितना तंग किया था.

बनवारी लाल – पगली वो तो त्यौहार था, फिर यहाँ खुले में कोई कुछ करेगा क्या? तुम तो फालतू में ही डर रही हो.

कोमल – सच्ची सच्ची बताइये, आपका कोई भरोसा नहीं.

बनवारी लाल – अरे बहु मुझ पर भरोसा नहीं करोगी, तो शहर में किस पर करोगी?

कोमल – नहीं आप बदमाश है, अगर कोई बदमाशी की तो पूरा मोहल्ला देख लेगा.

बनवारी लाल – बहु तुम डरपोक हो, यहाँ खुली छत पर कुछ हो सकता है क्या? चलो ऊपर आ जाओ.

कोमल – पहले आप कसम खाइये, की आप खुले में कोई बदमाशी नहीं करोगे, फिर ही मैं आउंगी.

बनवारी लाल – अरे भाई तुम्हारी कसम खाता हूँ, खुले में नो बदमाशी, नो लफड़ा, चलो अब जल्दी आ जाओ.

कोमल ने ससुर को कसम से बांध लिया, तो कुछ ज्यादा ही दिलेर हो गयी और ससुर के सबर का इम्तेहान लेने होली के दिन वाली कातिलाना ड्रेस पहन के छत पर चल दी. बहु को होली वाले ऑउटफिट में देख बनवारीलाल को एक बात उसी समय कन्फर्म हो गयी, की बहू को अभी भी ठरक चढ़ी हुई है और अंदर से चुल्ल बहुत उठ रही है। आखिर ठरक चढ़े क्यों न! उस दिन बनवारीलाल ने कोमल के अंगूरी बदन के साथ अपनी कामिनी कला का भरपूर इस्तेमाल किया था.

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छत पर आ कर कोमल, बाबू जी के साथ घूमने लगी, दोनों पास पास चल रहे थे। कहते है औरत और मर्द आग और पेट्रोल के समान होते है, इस लिए शास्त्रों में साफ़ निर्देश दिया है की जवान औरत को अपने पति के साथ भी एकांत में नहीं रहना चाहिए, क्योकि काम कभी भी हावी हो सकता है. साथ साथ चलते हुए दोनों इधर उधर की बाते कर रहे थे। बनवारीलाल जानबूझ कर सुशील से जुडी बाते कर रहा था, जिससे बहु कुछ हिट में आ जाये और उसका असर भी हुआ। कुछ देर बाद कोमल की आवाज में भारीपन आने लगा, उसकी आवाज में चंचलता आ गयी और वो ससुर से ज्यादा चिपक कर चलने लगी.

थोड़ी देर वाक के बाद बनवारीलाल ने नीचे चलने को कहा और खुद पहले जाने लगा, घर की सीढ़ी, जहां छत पर मिलती है, वह टावर (सीढ़ियों से छत तक जाने वाला कमरा) बना था और उसमे छत की ओर दरवाजा लगा था. कोमल पीछे से आयी थी, इसलिए इसने दरवाजा बंद किया, दरवाजा बंद करके कोमल जैसे ही पलटी बनवारीलाल ने उसे झट से अपनी बाहों में पकड़ लिया और इसके रसीले होंठ चूसने लगा. बनवारीलाल के हाथ भी हरकत में आ गए और उन्होंने कोमल की चूचियों पर कब्ज़ा कर लिया।

इस अचानक हमले से कोमल हड़बड़ा गयी, पर अपने आप को छुड़ा नहीं पायी, बाबू जी लगातार उसके होंठो को चूसते रहे और बारी बारी से उसकी दोनों चूचियों से खेलने लगे. कुछ देर बार जब साँस लेने के लिए बनवारीलाल ने होंठ छोड़े तो कोमल बोल उठी..

कोमल – बाबू जी छोड़िये आपने कहा था की खुले में बिलकुल तंग नहीं करोगे.

बनवारी लाल – बहु यहाँ खुला कहा है? अच्छे से देख यहाँ चारो तरफ से बंद है.

कोमल ने देखा तो सच मुच वो टावर के अंदर थी, जो चारो तरफ से बंद था.

कोमल – लेकिन अपने कहा था की आप बदमाशी नहीं करोगे! ये गलत है.

बनवारी लाल – नहीं बहु बिलकुल गलत नहीं है, मैं अपनी कसम कभी नहीं तोड़ता और बनवारीलाल फिर से कोमल की कमसिन जवानी लूटने लगा, उसकी हरकतों से कोमल भी गर्माने लगी थी। उसकी चूचियाँ तन गयी और पुरे बदन में करंट दौड़ने लगा। लोहा गरम देख बनवारीलाल ने भी चोट मारने की सोची. वो एक बार फिर बहू की टी-शर्ट उतारने लगा, पर कोमल विरोध करते हुए बोली.

कोमल – बाबू जी कपडे मत उतारिये मुझे ये अच्छा नहीं लगता.

बनवारी लाल अब ज्यादा समझने बुझाने की फेर में नहीं था, तो उसने भावनाओ का सहारा लेना ठीक समझा हाथ आये माल को छोडना सरासर बेवकूफी थी, तो उसने अपना पासा फेंका.

बनवारी लाल – ठीक है बहु, मेरी तो जिंदगी बिलकुल बेरंग थी, मैंने सोचा तुम मुझे कुछ सुकून दे सकोगी पर मेरी तो किस्मत ही ख़राब है.

हालाकि बनवारीलाल ने ये ऐसे ही कह दिया था, अगर बहु नहीं मानती तो भी वो उसे आसानी से जाने नहीं देता, लेकिन इस बात का बहु पर तुरंत असर पड़ा..

कोमल – मैंने तो सिर्फ इतना ही कहा की कपडे मत उतारिये.

बनवारी लाल – चॉकलेट का रेपर बिना उतारे खाने से कोई स्वाद आता है क्या? फिर बिना देखे रहा भी तो नहीं जायेगा.

कोमल – लेकिन फिर आप आगे बढ़ने लगते है.

बनवारी लाल – आगे मतलब?

कोमल – आगे मतलब? आप नीचे जाने लगते है, जो मुझे बिलकुल पसंद नहीं, होली के दिन भी आप वही पहुंच गए थे.

बनवारी लाल – लेकिन तुमने मना किया तो रुक गया था के नहीं? तुम्हारी मर्जी के बिना मैं एक कदम भी आगे नहीं बढूंगा.

और बनवारीलाल फिर से बहु के ऊपरी कपडे उतारने लगा, इस बार बहु भी कुछ नहीं बोली, एक पल में ही कोमल एक बार फिर बनवारीलाल के सामने अधनंगी खड़ी थी. फिर बनवारीलाल ने भी अपनी लपलपाती जीभ निकाली और बहु के निप्पल के चारो ओर घूमाने लगा। उसकी जीभ के चुचि को छूते ही कोमल गनगना गयी और उसके मुँह से सिसकारियां निकलने लगी. जब बनवारीलाल ने चूचियों को चूसना चालु किया तो कोमल अपने आप को रोक नहीं पायी और खुद बा खुद बनवारीलाल के बालो को अपने हाथो से सहलाने लगी।

बनवारीलाल चूसते चूसते दांत भी गाड़ने लगा, करंट कोमल की छाती से निकल कर उसकी चूत तक पहुँचते ही वो बेहाल हो गयी और खुद बड़बड़ाने लगी..

हाँ बाबू जी खा जाओ इनको ये आपके लिए ही है, खूब मसल डालो इनको, बहुत परेशान करती है ये मुझे.

बनवारीलाल भी ताल मिलाते हुए बोला – बहु अब तो तुम्हारी परेशानी खत्म, इनकी देखभाल अब मैं करूँगा जब भी ये तुम्हे तंग करे तो मुझे बता देना, मैं इनकी खूब खबर लूंगा.

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और फिर तो टावर के नीचे तूफ़ान आ गया, बनवारीलाल बहु की कमर के ऊपर जर्रे जर्रे पर अपने होंठो से मोहर लगाता चला गया, जैसे बहु पर अपनी मिलकियत की घोषणा कर रहा हो. कोमल भी बेसुध सी पड़ी बिछी जा रही थी। आधे घंटे के बाद जब कोमल अपने कमरे में पहुंची, तो उसकी दोनों चूचियां बाबू जी के दांतो के निशानों से भरी हुई थी.

दो दिन छोडके तीसरे दिन बनवारी लाल ने फिर बहु को बुलाने की सोची, एक तो वो नहीं चाहता था की बहु को जो आदत पड़ी है वो छूटे, क्योकि ऐसे में कोमल फिर ठंडी हो सकती थी और दूसरा अब उसे खुद को कण्ट्रोल करना भी मुश्किल हो रहा था। तो उसने तीसरे दिन रात को बहु को फ़ोन करके फिर ऊपर आने को कहा और इस बार छत न बोल कर सीधे टावर में बुलाया. कोमल के लिए ये धरम संकट की स्तिथि थी क्योकि आज के पहले उसके और बाबू जी के बीच जो भी एनकाउंटर हुए थे, वो यकायक बन पड़े थे उसमे कोमल का दोष सिर्फ इतना था की वो बनवारी लाल को कठोरता से रोक नहीं पायी और चुपचाप रह गयी. लेकिन आज की बात अलग थी, आज उसका ससुर उसे सीधे ही टावर में आने को बोल रहा था, अगर वो जाती तो इसका मतलब वो खुद अपने शरीर को अपने ससुर को परोसने जा रही है, आखिर इतनी बेहया वो कैसे ही सकती थी.

अंत: उसने फैसला किया और वो कमरे में ही रहेगी, जब काफी देर तक वो नहीं आयी, तो बनवारी लाल ने एक बार फिर से फ़ोन किया.

कोमल – हाँ बाबू जी.

बनवारी लाल – बहु आओ न मैं तुम्हारा इंतजार कर रहा हूँ.

बाबू जी मैं नहीं आउंगी – कोमल ने धीरे से कहा.

बनवारी लाल – क्यों नहीं आओगी? क्या बात हो गयी?

कोमल – कोई बात नहीं है बस मैं आना नहीं चाहती.

बनवारी लाल – बहु प्लीज.. ऐसा मत करो अब मैं तुम्हारे बिना रह नहीं सकता, प्लीज आ जाओ न.

कोमल – बाबू जी जो हो रहा है वो गलत है! पाप है.

बनवारी लाल – कोई पाप नहीं है! तुम जानती हो पाप किसे कहते है और पुण्य किसे कहते है.

कोमल – वो सब मुझे नहीं पता, मुझे तो बस इतना पता है की ये रिश्ता पाप है.

बनवारी लाल – कोमल शाष्त्र कहते है “परहित सरिस धरम नहीं भाई और परपीड़ा सैम नहीं अधमाई” अर्थार्त जिससे दूसरे को सुख मिलता हो वो धर्म है और मैं जानता हूँ, हमारी दोस्ती से हम दोनों को ख़ुशी मिलती है दिल को करार आता है.

कोमल – बाबू जी मैं शास्त्र वगेरा नहीं जानती, बस इतना जानती हूँ की ये सब गलत है, इसलिए मैं नहीं आउंगी.

बनवारी लाल – नहीं बहु तुम ऐसा नहीं कर सकती, तुम मुझे यु अधूरा नहीं छोड़ सकती, क्योकि तुम्हारे साथ के बगैर अब मेरा जींवन अधूरा है!

और बनवारी लाल आशिकों के तरह प्रेमलाप करने लगा, कोमल के इस फैसले से बनवारी लाल को अपनी सारी योजना धरी की धरी नजर आ रही थी, क्योकि कहाँ तो वो सोच रहा था की अच्छे दिन आने वाले है और कहाँ सितारे एक झटके में ही गर्दिश में आ गए थे. लेकिन बनवारी लाल एक पक्का फौजी था और उसने मुसीबत की परिस्तिथियों में भी दुश्मन को नेस्तोनाबूत करना सीखा था और फिर कोमल तो बेचारी कोमलंगनी अबला थी और बनवारी लाल को अपना मॉस चखाकर आदमखोर बना चुकी थी। Sasur bahu ki chudai ki hot sex story

बनवारी लाल के तरकश में अभी कई तीर बाकी थे. काफी सोचने के बाद उसने पहला अस्त्र निकाला, जिसका नाम था “इमोशनल अत्याचार”।

दूसरे दिन सुबह वो किसी मजनू की तरह उदासी से बैठा रहा और शाम को बाजार की और चल दिया और देर रात तक वो जब घर नहीं आया, तो शांति ने कोमल से कहा की उन्हें फ़ोन करके पूछो की कहा हो.

बहु ने फ़ोन किया..

बनवारी लाल – हाँ मैं बोल रहा हूँ.

कोमल – बाबू जी कहा हो खाना खाने का समय हो गया है.

बनवारी लाल – मुझे आने में देर हो जाएगी और मैं खाना खा कर आऊंगा।

और उसने फ़ोन काट दिया. उसके बाद बनवारी लाल सीधा देसी शराब के ठेके पर पहुंचा, वैसे तो उसने पीना कई सालों से छोड़ दिया था और पीता भी इंग्लिश था, लेकिन आज उसने देसी शराब पी ताकि जल्दी चढ़ जाये और कुछ दारु की बदबू भी आती रहे। आखिर घर में पता भी तो चलना चाहिए की वो पी कर आया है. पीने के बाद उसने उसी हाते में चिकन खाया और घंटे भर में घर पहुँच गया। घर में जैसे ही कोमल ने दरवाजा खोला तो बदबू का एक तेज झोंका उसकी नाक से टकराया और वो नाक पर हाथ रखते हुए पीछे हट गयी.

हलाकि हमारे फौजी भाई को कोई कोई खास नहीं चढ़ी थी, लेकिन उसने लड़खड़ाने की शानदार एक्टिंग की और हिलता डुलता सीधे अपने कमरे में घुस गया। सास बहु दोनों इस नज़ारे को देख, दोनों एक दूसरी का मुँह देखने लगी. दूसरे दिन फिर रात को बनवारी लाल देसी शराब पीके आया, आज उसने घर में ही एक रोटी खाई और देवदास की तरह गुमसुम सा अपने कमरे में चला गया।

बनवारी लाल की ये हालत देख शांति बड़बड़ाने लगी “ये इनको क्या हो गया है बड़ी मुश्किल से तो इनकी पीने की आदत छुड़ाई थी, अब फिर शुरू हो गए इस बुढ़ापे में तो दारु पूरा शरीर खोखला कर देगी। पता नहीं क्या टेंशन आ गयी है इनको? भगवान् जाने इस घर को किसकी नजर लग गयी है”.

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storyबेचारी कोमल एक दम सीधी खड़ी चुपचाप सास का लेक्चर सुनती रही अब वो कैसे बताती की बाबू जी की टेंशन वो खुद है. तीसरे दिन शांति जब पूजा घर में थी, बनवारी लाल फिर घर से निकल गया, बनवारी लाल के हाव भाव देखते ही कोमल समझ गयी की बाबू जी आज फिर पीने जा रहे है, अब वो खुद टेंशन में आ गयी थी, उस पर तीन तरफ़ा दबाव था। एक तो सास कह रही थी के शराब बाबू जी के शरीर को खोखला कर देगी, दूसरा वो कह रही थी के घर को किसकी नजर लग गयी और तीसरी टेंशन खुद उसके शरीर की मांग थी.

पिछले दो बार से बाबू जी ने उसकी चूचियों पर जो कहर ढाया था, उसके बाद उसकी दोनों चूचियां उसके बस में नहीं रह गयी थी। उसकी चूचियां अंदर से बार बार “बाबू जी बाबू जी पुकार रही थी” उसे जल्द ही कुछ फैसला करना था. इधर बाबू जी जिस तरह से दीवानापन दिखा रहे थे, उससे कोमल के दिल में भी शायद कही न कही प्यार के अंकुर निकल आये थे। उसके दिल के किसी कोने में बाबू जी ने कब्ज़ा कर लिया था, बाबू जी को गए आधा घंटा हो गया था।

आखिर कोमल, बाबू जी के इस अस्त्र की गर्मी से पिघल गयी और फ़ोन उठाया और बाबू जी का नंबर डायल किया. मोबाइल की घाटी बजते ही बाबू जी ने देखा की छम्मकछल्लो का नंबर है, तो सेरियस होकर बोला..

बनवारी लाल – हाँ बोलो क्या है?

कोमल कुछ देर शांत रही और फिर बोली – बाबू जी क्यों मुझे इतना परेशान कर रहे हो? ये पीना क्यों चालू कर दिया?

बनवारी लाल – तुम्हे इससे क्या मै क्या कर रहा हूँ, तुम तो ऐश से रहो – बाबू जी ने रूखी आवाज में कहा.

कोमल – पीना जरुरी है क्या? अपने शरीर का ख्याल रखिए.

बनवारी लाल – क्या करना इस शरीर का? जब ये कुछ सुख नहीं दे सकता, बस अब तो शराब ही जिंदगी का सहारा है.

कोमल – और आपका परिवार उसका कोई ख्याल नहीं.

बनवारी लाल – सब ठीक ठाक तो है, सास आपकी पूजा पाठ में व्यस्त है, बहु अपने आप में मस्त है, इस बुड्ढे के लिए किसी के पास समय नहीं.

कोमल – प्लीज बाबू जी आप शराब मत पीजिये मुझे ये पसंद नहीं.

बनवारी लाल – बहु मैं तुम्हारी पसंद से तो नहीं चल सकता, जैसे तुम मेरी पसंद से नहीं चल सकती, अब बस इस शराब के साथ ही जीना और मरना है.

कोमल समझ गयी की बाबू जी को बातो से नहीं टाला जा सकता, इसलिए उसने समपर्ण करते हुए कहा.

कोमल – मैं हाथ जोड़ रही हूँ आप बिना पिए घर आइये आप जो चाहते है आपको वो मिल जायेगा.

बनवारी लाल – मुझे क्या मिल जायेगा?

कोमल – आप बहोत गंदे है मेरे मुँह से बुलवाना चाहते है.

बनवारी लाल – अरे कुछ पता तो चले क्या मिल जायेगा.

कोमल – मैं टावर में आ जाउंगी बस शरारती कही के!

और कोमल ने फ़ोन काट दिया.

पढ़ते रहिये.. क्योकि hindi desi sex stories अभी जारी रहेगी.

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