संस्कारी मम्मी से चुदक्कड़ बनने का सफर – 1

Sanskari Mom sex story hindi:- एक खूबसूरत शांत और संस्कारी घर की गृहस्थी सँभालने वाली माँ—जिसकी ज़िन्दगी बस परिवार के आस-पास सिमटी हुई थी। हर नज़र में वह एक आदर्श पत्नी और माँ थी— सीधी समझदार और मर्यादा में रहने वाली। लेकिन वक़्त के साथ उसकी ज़िन्दगी में कुछ ऐसे मोड़ आते हैं जो उसके अंदर छुपे हुए एक नए रूप को जगाते हैं। धीरे धीरे वह अपनी पहचान अपनी ख्वाहिशों और अपनी दबी हुई इच्छाओं को समझने लगती है। जो कभी सिर्फ दूसरों के लिए जीती थी, अब खुद के लिए जीना सीख रही है। उसका अंदाज़ बदलने लगता है, सोच बदलने लगती है… और लोग हैरान रह जाते हैं ये देखकर की वही भोली माँ अब कितनी बेख़ौफ़ और अलग हो चुकी है।

Sanskari Mom sex story hindi

यह कहानी है एक औरत के बदलाव की—जहाँ संस्कार और स्वतंत्रता के बीच की रेखा धुंधली हो जाती है और एक नयी पहचान जन्म लेती है। हैलो दोस्तों ये कहानी है मेरी मम्मी की। मेरी मम्मी का नाम रीना है उनकी उम्र 42 साल है। वो एक ऐसी हाउसवाइफ हैं जो अपने घर और परिवार से बेइन्तेहाँ प्यार करती हैं। मम्मी की शादी पापा (विकास उम्र 50) से तब हो गयी थी, जब मम्मी सिर्फ 21 साल की थीं। शादी के बाद भी उन्होंने अपनी पढाई नहीं छोड़ी; वो अब एक पोस्टग्रेजुएट हैं और घर सँभालने से पहले उन्होंने कुछ साल तक एक कॉर्पोरेट फर्म में काम भी किया था।

उन दोनों का एक बेटा है (यानी मैं) जिसका नाम प्रेम है और मेरी उम्र 19 साल है। मैं अभी फर्स्ट ईयर में हूँ। मम्मी की हाइट 5 फुट 7 इंच है और उनका फिगर 34बी-30-34 इतना अट्रैक्टिव है की कोई भी उन्हें देख कर हैरान रह जाये। वो अपने लुक्स को लेकर बहुत कॉन्ससियस रहती हैं और आज भी इतनी यंग लगती हैं की कोई कह ही नहीं सकता की वो एक 19 साल के लड़के की माँ हैं। कॉलेज के दिनों से ही उनकी ख़ूबसूरती के बहुत दीवाने रहे हैं। लेकिन मम्मी हमेशा से बहुत स्मार्ट रही हैं। उन्होंने कभी किसी के साथ सीरियस रिलेशनशिप नहीं रखा।

कॉलेज में उनके कई दोस्त (बॉयफ्रैंड्स) हुआ करते थे जिन्हे वो सिर्फ अपनी ज़रूरतों के लिए यूस करती थीं—जैसे उन्हें शॉपिंग पर साथ ले जाना या उनसे गिफ्ट्स लेना। वो हमेशा से जानती थीं की अपनी ब्यूटी को कैसे हैंडल करना है। पापा एक बैंक में मैनेजर हैं और उनका काम काज हमेशा से बहुत व्यस्त रहा है। पहले हम अपने पुराने घर में रहते थे जो शहर से थोड़ा दूर था। वहां से पापा को बैंक आने-जाने में रोज़ 20-30 किलोमीटर का सफर करना पड़ता था। वो सुबह जल्दी निकल जाते और रात को देरी से लौटते जिस वजह से वो थके-हारे रहते थे।

लेकिन हाल ही में पापा का ट्रांसफर शहर के मेन ब्रांच में हो गया, जो एक बड़े आईटी पार्क के पास था। उसी वक़्त मेरा एडमिशन भी शहर के एक बड़े कॉलेज में हो गया था। हम सब ने मिल कर फैसला किया की अब रोज़-रोज़ इतना लम्बा सफर करना ठीक नहीं है, इसलिए हमने शहर के बीचों-बीच एक नया घर ले लिया और वहां शिफ्ट हो गए। मम्मी ने नए घर को बहुत ही ख़ूबसूरती से सजाया है। वो एक हाउसवाइफ हैं पर उनका कॉर्पोरेट वाला दिमाग हर चीज़ को इतने सटीक ढंग से मैनेज करता है, की पापा को कभी किसी चीज़ की चिंता नहीं करनी पड़ती।

पापा मम्मी से इतना प्यार करते हैं की उन्होंने अपने बैंक की सेविंग्स से जो एक छोटा सा इन्वेस्टमेंट किया था, उसका नाम भी मम्मी के नाम पर रखा है। अब नए शहर में मेरा कॉलेज और पापा का बैंक दोनों पास हैं और मम्मी घर की रानी बन कर सब संभाल रही हैं। मम्मी के लिए राहत की बात यह थी की अब उन्हें मेरे लिए टिफ़िन बनाने के लिए सुबह-सुबह 6 बजे नहीं उठना पड़ता था। पहले जब हम दूर रहते थे तो मुझे लोकल बस से कॉलेज जाना पड़ता था, इसलिए मम्मी को हर हाल में सुबह 7 बजे तक लंच तैयार करना ही होता था।

मेरे लिए भी यह किसी वरदान से कम नहीं था। सच कहूं तो मुझे उस लोकल बस से कॉलेज जाना बिलकुल पसंद नहीं था। बस स्टॉप से लेकर कॉलेज तक हर रोज़ सीनियर्स मुझे परेशान करते थे और बुलइंग का शिकार होना पड़ता था। मैं उस माहोल से बहुत तंग आ चुका था। अब शहर के पास शिफ्ट होने का मतलब था की मेरे पास कॉलेज जाने के लिए बहुत सारे ओपशंस हैं। कई सारी बस हैं और रास्ता भी छोटा है जिसकी वजह से अब मैं उन सीनियर्स की बुलइंग से आसानी से बच सकता हूँ। मम्मी भी खुश हैं की अब उन्हें थोड़ा सुकून मिला है और मैं भी नए माहोल में खुद को ज़्यादा सेफ महसूस कर रहा हूँ।

नए घर में शिफ्ट होने के बाद मम्मी ने एक बात बहुत ध्यान से नोटिस की—यहाँ के घर गाँव की तरह दूर-दूर नहीं बल्कि एक दूसरे के बहुत करीब थे। हमारे घर की एक तरफ तो बहुत ही पॉश और बड़े-बड़े बंगलोस थे जिनमे ऊँची कंपाउंड वाल्स बनी हुई थीं। लेकिन हैरानी की बात यह थी की हमारे घर के पीछे और रोड के दूसरी तरफ का नज़ारा बिलकुल अलग था। वहां का माहौल किसी बस्ती या स्लम जैसा लगता था। बहुत ही छोटे-छोटे घर एक दूसरे से चिपके हुए बने थे और उनके बीच में निकलने के लिए बस पतली-पतली गलियां थीं।

मम्मी के बैडरूम में एक बहुत सुन्दर बालकनी है लेकिन जब वो वहां से बाहर देखती हैं तो सामने का नज़ारा उन्हें थोड़ा अजीब लगता है। उनका बालकनी ठीक एक ऐसे घर के सामने खुलता है जहाँ देख कर लगता है की वहाँ कुछ कंस्ट्रक्शन वर्कर्स रहते हैं। इतने पॉश एरिया के ठीक पीछे इस तरह की बस्ती होना मम्मी के लिए थोड़ा नया और अनकंफरटेबल सा था क्यूंकि हमारा नया बैडरूम बालकनी से उन सब चीज़ों के एकदम करीब था। मम्मी ने जब पहली बार यह घर देखा था, तभी उन्होंने पापा को इस बस्ती के बारे में बताया था। उन्हें थोड़ा अजीब लग रहा था, पर तब ब्रोकर ने उन्हें समझाया की यह सब ज़्यादा दिन तक नहीं रहेगा।

Mummy ki chudai gair mardo ke sath

ब्रोकर का कहना था की जल्द ही एक लोकल बिल्डर इस पूरी ज़मीन को खरीद लेगा और यहाँ बड़े-बड़े विलाज बनेंगे। उसने वादा किया था की कुछ ही वक़्त में यह एरिया शहर की सबसे प्राइम लोकेशन बन जायेगा। लेकिन पहले दिन जब मैं वहां गया तो उन लोगों को देख कर मैं काफी डर गया था। वहां सावले रंग के मज़बूत शरीर (मस्कुलर बॉडी) वाले आदमी घूम रहे थे। वह लोग बहुत ज़ोर-ज़ोर से बातें कर रहे थे, उनमे से कइयों ने तो ऊपर कपडे भी नहीं पहने थे (हाफ नेकेड)। सबसे अजीब बात यह थी की जब हम वहां से गुज़र रहे थे या बालकनी से देख रहे थे, तो वह लोग लगातार हमें ही घूर रहे थे।

उनका वो घूरना और उनका रॉ अंदाज़ देख कर मुझे और मम्मी दोनों को थोड़ा डर महसूस हो रहा था। घर का ‘हाउस वार्मिंग’ (गृह प्रवेश) बहुत अच्छे से हो गया। अगले ही दिन शाम को जब मैं कॉलेज से वापस आया तो मम्मी ने फैसला किया की वह बाहर मेन जंक्शन तक जाएँगी। उन्हें घर के लिए कुछ ग्रोसरी का सामान लेना था और एक नया सिम कार्ड भी खरीदना था, क्यूंकि हमारे नए घर में उनके पुराने सिम के नेटवर्क बहुत कम आ रहे थे। मम्मी उस दिन बहुत ही खूबसूरत लग रही थीं। उन्होंने एक टाइट ग्रीन कुर्ती और वाइट लेग्गिंग्स पहनी हुई थी और उसके ऊपर एक सेमि-ट्रांसपेरेंट (हल्का जालीदार) वाइट दुपट्टा डाला था।

जब वह अपनी एक्टिवा स्कूटर पर बैठी तो उनकी लेग्गिंग्स उनके टाइट थाइस पर एकदम चिपक गयी थी। जब वह स्कूटर चला रही थीं तो उनका दुपट्टा हवा से थोड़ा सरक गया था जिस वजह से उनका फिगर काफी ज़्यादा हाईलाइट हो रहा था। मैं उनके पीछे स्कूटर पर बैठा था और उनके कन्धों को पकड़ा हुआ था। कुछ ही मिनट में हम जंक्शन पहुँच गए। शाम का वक़्त था, इसलिए जंक्शन पर काफी भीड़ थी क्यूंकि लोग अपने-अपने कामों से वापस लौट रहे थे। मम्मी ने ग्रोसरी स्टोर के ठीक सामने स्कूटर रोका। मैं स्कूटर से उतर गया और मम्मी ने वहां साइड में स्कूटी पार्क कर दी।

जब मम्मी स्कूटी पार्क करके स्टोर की तरफ बढ़ी तो वहां लोगों के बीच हलकी-हलकी काना-फुंसी शुरू हो गयी। आस-पास खड़े लगभग सारे मर्द उन्हें ही घूर रहे थे। मम्मी को थोड़ी शर्म और ऐम्बर्रास्मेंट महसूस हो रही थी। हलाकि उनके लिए यह सब नया नहीं था क्यूंकि वो हमेशा से ही इतनी अट्रैक्टिव रही हैं की लोग उन्हें देखते ही हैं, लेकिन यह जगह उनके लिए एकदम नयी थी। उन्होंने उन सारी नज़रों को इग्नोर करने की कोशिश की जो उन्हें सर से लेकर पाँव तक स्कैन कर रही थीं। वो जल्दी से स्टोर के अंदर गयीं अपना ज़रुरत का समान उठाया और पेमेंट करने के लिए काउंटर पर पहुंचीं। स्टोर का ओनर भी उन्हें एक गन्दी मुस्कराहट के साथ देख रहा था, लेकिन मम्मी ने उसे भी पूरी तरह नज़र-अंदाज़ किया। वो बस जल्दी से वहां से निकलना चाहती थीं।

ग्रोसरी स्टोर से निकल कर मम्मी ने थोड़ा राहत महसूस की लेकिन उनकी मुश्किल अभी खत्म नहीं हुई थी। वह इधर-उधर नज़रें दौड़ा कर कुछ ढूंढ़ने की कोशिश कर रही थीं। फिर उन्होंने मेरी तरफ देख कर पूछा:

मम्मी: “प्रेम मुझे एक नया सिम भी खरीदना है, क्या तुम्हे यहाँ आस-पास कोई मोबाइल स्टोर दिखाई दे रहा है?

वह जंक्शन की भीड़ और लोगों की उन गन्दी नज़रों के बीच थोड़ा असहज तो थीं पर फ़ोन नेटवर्क का इशू इतना ज़्यादा था की उन्हें नया सिम लेना ही था। मैंने भी उनके साथ मिल कर भीड़ में किसी मोबाइल शॉप की तलाश शुरू कर दी।

मैंने जंक्शन के आखिर में इशारा करते हुए कहा “मम्मी वहां एक दुकान है।”

वहां एक बोर्ड लगा था जिसपर “रोहन मोबाइल सर्विस” लिखा था।

मम्मी ने कहा “चलो वहां चलते हैं उम्मीद है नया सिम मिल जायेगा।”

दुकान बाहर से छोटी थी पर अंदर से काफी बड़ी और साफ़-सुथरी थी काउंटर के पीछे शेल्फ में नए मोबाइल फ़ोन्स सजे हुए थे। पर दुकान पर कोई नहीं था।

मम्मी ने निराश होकर कहा “लगता है यहाँ कोई नहीं है प्रेम। अब शायद कल शहर ही जाना पड़ेगा।”

तभी पीछे से एक ज़ोर दार आवाज़ आयी “हे प्रेम! क्या सरप्राइज है!”

मम्मी पीछे मुड़ी तो देखा दो हट्टे-कट्टे नौजवान अंदर आ रहे थे। एक तुरंत काउंटर के पीछे चला गया और दूसरा मेरी तरफ बढ़ा। उन्हें देख कर मेरा चेहरा पीला पड़ गया और मेरे होठों पर एक डर से भरी मुस्कराहट आ गयी। मम्मी हैरान थी की यह लोग मुझे कैसे जानते हैं।

इससे पहले की वो कुछ पूछती मैंने जल्दी से कहा:”मम्मी यह समीर है मैंने काउंटर वाले की तरफ इशारा किया। “और यह विक्रम है। यह दोनों मेरे कॉलेज के सीनियर्स हैं।”

मम्मी के चेहरे पर एक प्यारी सी स्माइल आ गयी वो खुश थीं की चलो कोई तो जान-पहचान वाला मिला। वो काउंटर के पास जा कर उत्साह से बोली “चलो शुक्र है कोई तो मिला यहाँ। मुझे अपने फ़ोन के लिए मदद चाहिए एक नया सिम चाहिए। क्या मैं अपना नंबर पोर्ट करा सकती हूँ?”

लेकिन जो बात मैंने मम्मी को नहीं बताई थी वो यह थी की समीर और विक्रम मेरे कॉलेज के सबसे खतरनाक सीनियर्स हैं। वह दोनों जूनियर्स की रैगिंग करने के लिए बदनाम हैं और मुझे तो उन्होंने कई बार निशाना बनाया है। समीर वहां के एक बाहुबली और अमीर नेता का बेटा है जो कॉलेज में सबको बुली करता है। यहाँ तक की टीचर्स भी उससे डरते हैं। मम्मी उन्हें “हेल्पफुल” समझ रही थीं पर मैं जानता था की हम गलत जगह फंस गए हैं। Mummi ki chudai ki kahani

“ओह तो आप प्रेम की मम्मी हैं। यह भी कोई पूछने वाली बात है हम अपने प्यारे प्रेम की मम्मी की मदद ज़रूर करेंगे समीर ने एक कमीनी मुस्कराहट के साथ कहा।

उसकी नज़रें मम्मी के चेहरे पर टिक ही नहीं रही थीं। टाइट कुर्ती में मम्मी का अट्रैक्टिव फिगर देख कर वो हैरान था। उसने कभी नहीं सोचा था की प्रेम की माँ इतनी हॉट होगी।

“आंटी क्या आप यहाँ अपना नंबर लिख सकती हैं? मुझे एक फोटो और आईडी प्रूफ भी चाहिए होगा उसने काउंटर से एक नोटबुक मम्मी की तरफ बढाई।

“हाँ क्यों नहीं।” मम्मी ने कहा और काउंटर की तरफ थोड़ा झुक कर नंबर लिखने लगीं।

उनके झुकते ही उनका दुपट्टा थोड़ा सरक गया जिसे देख कर समीर की आँखें फटी की फटी रह गयी। उसने मौका देख कर चुपके से अपने मोबाइल का कैमरा ऑन कर लिया और रिकॉर्डिंग करने लगा। मम्मी के गले में लटकता मंगलसूत्र देख कर उसकी नियत और ख़राब हो रही थी। पीछे खड़ा विक्रम भी मम्मी को ऊपर से नीचे तक गंदे तरीके से स्कैन कर रहा था। वाइट लेग्गिंग्स में मम्मी के कर्व्स काफी हाईलाइट हो रहे थे।

वो मेरे पास आया और मेरे कान में धीरे से फुसफुसाया “तूने कभी बताया नहीं की तेरी मम्मी इतनी हॉट हैं।”

यह सुनते ही मेरे पूरे शरीर में एक थरथराहट दौड़ गयी और मैं शर्म से नीचे देखने लगा।

“तो आंटी आप लोगो ने यहाँ नया घर लिया है?” विक्रम ने बात आगे बढाई।

“हाँ वही हमारा घर है। मुझे पता नहीं था की प्रेम के दोस्त पास ही रहते हैं वरना मैं आप लोगो को भी हाउस वार्मिंग पर बुलाती। यह लीजिये मेरी डिटेल्स मम्मी ने नोटबुक समीर को वापस दी जिसने बड़ी होशियारी से अपना फ़ोन छुपा लिया।

“कोई बात नहीं आंटी। अब तो आप हमें जानती हैं। आप हमें कभी भी बुला सकती हैं न।” विक्रम ने यह कहते हुए मेरे कंधे को ज़ोर से दबाया।

“ठीक है आंटी। तो क्या आपके पास फोटो और आईडी प्रूफ भी है?” समीर ने पूछा जबकि वो वीडियो सेव करके विक्रम को भेज रहा था।

मम्मी अपना पर्स चेक करने लगीं। “ओह। सॉरी लगता है मैं गलत पर्स ले आयी हूँ। मेरे पास अभी फोटो और आईडी नहीं है उन्होंने निराशा से समीर की तरफ देखा। “मेरी ही गलती है। मुझे आने से पहले चेक कर लेना चाहिए था वो खुद को ही कोसने लगीं।

विक्रम अपना व्हाट्सप्प चेक करने में बिजी था और उसने समीर की भेजी हुई रिकॉर्डिंग देखने मे। उसने मेरे सामने ही वीडियो खोला जिसमे मम्मी का डीप क्लीवेज साफ़ दिख रहा था। मैं दंग रह गया पर कुछ बोल नहीं पाया। विक्रम एक कमीनी मुस्कराहट के साथ बोला “कोई बात नहीं आंटी फोटो का टेंशन मत लीजिये समीर बहुत बड़ा कैमरामैन है। है ना प्रेम?” Hot mom sex story hindi

मैं बस शर्म से सर झुका कर रह गया। समीर ने बात आगे बढाई “फोटो तो ठीक है आंटी पर आईडी के बिना सिम पोर्ट करना मुश्किल है। एक काम करते हैं मैं आपको अभी के लिए अपना एक पर्सनल अल्टरनेट सिम दे देता हूँ। आप इसे यूस कीजिये और हम आज शाम को आपके घर आ कर आईडी कलेक्ट कर लेंगे क्या ख्याल है?”

विक्रम ने तुरंत हाँ में हाँ मिलायी “हाँ यह सही रहेगा। सिम मिडनाइट तक एक्टिवेट भी हो जायेगा।”

मम्मी थोड़ा हिचकिचाई उन्हें महसूस हो रहा था की दोनों लड़के उन्हें अजीब तरीके से घूर रहे हैं। उन्होंने कहा “नहीं मैं आप लोगो को परेशान नहीं करना चाहती मैं कल तक वेट कर सकती हूँ।”

“अरे इसमे परेशानी कैसी आंटी? हम अपने प्यारे प्रेम की मम्मी के लिए इतना तो कर ही सकते हैं समीर ने एक गन्दी मुस्कराहट के साथ कहा।

विक्रम ने बीच में ही बोल दिया “जाने से पहले क्यों न हम एक यादगार फोटो खींचें। इस सरप्राइज मीटिंग की याद में?”

समीर काउंटर से निकल कर तुरंत मम्मी के बगल में खड़ा हो गया। इससे पहले की मम्मी कुछ समझ पातीं विक्रम ने अपना फ़ोन मेरी तरफ बढ़ा दिया। समीर ने बिना किसी वार्निंग के अपना हाथ मम्मी की कमर पर लपेट लिया और उन्हें अपनी तरफ ज़ोर से खींच लिया। मम्मी शॉक में थीं उन्होंने कभी नहीं सोचा था की कोई उनके साथ ऐसी बदतमीज़ी करेगा। समीर की उँगलियाँ उनकी कमर के फोल्ड्स को दबा रही थीं। “स्माइल कीजिये आंटी उसने दोबारा कहा। मम्मी के होठों पर एक हलकी और सहमी हुई मुस्कराहट आयी वो शर्म के मारे मेरी तरफ देख भी नहीं पा रही थीं। Hottest mom sex stories

मैंने जल्दी से कुछ फोटोज खींची और फ़ोन विक्रम को पकड़ा दिया। समीर ने मम्मी को छोड़े बिना ही फ़ोन लेकर फोटो देखि। “देखिये आंटी कितनी सुन्दर फोटो आयी है।” मम्मी का चेहरा शर्म से लाल हो गया था। समीर ने नोटिस किया की मैं उसके हाथ की तरफ देख रहा हूँ जो मम्मी की कमर पर था।

उसने मुस्कुरा कर अपनी दो उँगलियों से मम्मी की कमर को हल्का सा दबाया। इस अनएक्सपेक्टेड मूवमेंट से मम्मी के पूरे शरीर में रोंगटे खड़े हो गए। उनके मुँह से एक हलकी सी सिसकी निकली। वो बेहद ऐम्बर्रेस्ड थीं पर कुछ बोल नहीं पायीं।

समीर ने फ़ोन विक्रम को दिया और बोला “आंटी आपसे मिल कर बहुत अच्छा लगा। हम शाम को मिलते हैं आपके हाथ का खाना खाने का इंतज़ार रहेगा।”

जाने से पहले उसने एक बार फिर मम्मी की कमर को थोड़ा ज़ोर से दबाया। मम्मी ने राहत की सांस ली जब उसने उन्हें छोड़ा। वो बिना मुझसे बात किये तेज़ी से स्कूटर की तरफ बढ़ीं। स्कूटर स्टार्ट करते वक़्त उनके हाथ काँप रहे थे और उनका पूरा शरीर एक अजीब थरथराहट से गुज़र रहा था। उन्हें खुद पर शर्म आ रही थी की उनके बेटे के सीनियर्स ने उन्हें उनके बेटे के सामने ही इस तरह से एफेक्ट कर दिया।

मैंने घबराते हुए पूछा “क्या हुआ मम्मी?”

उन्होंने बात टालते हुए कहा “कुछ नहीं बेटा। बस पहिया एक छोटे पत्थर पर चढ़ गया था।”

वो बहुत ज़्यादा शर्मिंदा थीं। घर वापस आते वक़्त हम दोनों के बीच एक लफ्ज़ की भी बात नहीं हुई। एक अजीब सी ख़ामोशी थी जो बहुत चुभती हुई लग रही थी। घर पहुँचते ही मम्मी ने जल्दी से ग्रोसरी बैग्स उठाये और किचन की तरफ चली गयीं शायद वह मुझसे नज़र मिलाने से बच रही थीं। मैं भी बिना कुछ बोले सीधा अपने कमरे में चला गया। मैंने अपना फ़ोन निकाला तो देखा की कुछ नोटिफिकेशन्स आये हुए हैं। जब मैंने फ़ोन खोला तो मेरा दिल बैठ गया। Maa ki chudai ki hindi sex story

वह नोटिफिकेशन्स कॉलेज के एक ‘फेसबुक ग्रुप’ से थे जहाँ सिर्फ लड़के ही जुड़े हुए थे। समीर ने वहां दो फोटोज पोस्ट की थीं: पहली फोटो में वह मम्मी को पकडे हुए खड़ा था और साथ में विक्रम भी था। दूसरी फोटो तो उससे भी ज़्यादा भयानक थी—उसमें वह मम्मी की कमर को ज़ोर से दबा रहा था। मम्मी के होठ थोड़े खुले हुए थे और आँखें आधी बंद थीं जैसा समीर ने उन्हें उस वक़्त कैप्चर किया था। वह फोटो किसी ‘एडल्ट मूवी’ के सीन जैसी लग रही थी जिसमे एक्ट्रेस दर्द या मज़े में हो। पोस्ट का कैप्शन लिखा था: “प्रेम की मम्मी के साथ। आज रात प्रेम के घर पर डिनर एन्जॉय करेंगे। पिक्चर कर्टसी: प्यारा प्रेम।”

यह देख कर मेरे होश उड़ गए। पूरे कॉलेज के लड़कों के बीच मम्मी की ऐसी फोटो सरकुलेट हो चुकी थी और सबको पता चल गया था की वह लोग आज हमारे घर आने वाले हैं। जैसे ही मम्मी और मैं दुकान से निकले समीर और विक्रम ज़ोर-ज़ोर से हसने लगे थे। समीर ने बड़े कमीनेपन से कहा था “भाई मुझे यकीन नहीं हो रहा आज का दिन कितना लकी है! इस लूसर प्रेम की मम्मी इतनी हॉट है? वाह! क्या माल है!” वह बार-बार उस वीडियो को देख रहा था जो उसने चोरी-छुपे बनाया था।

विक्रम ग्रुप मे कमेंट कर रहा था “देख रहे हो लड़कों के कमैंट्स? आज तो पूरा कॉलेज उन्हें देख कर पागल हो जायेगा।। शायद प्रेम भी।” दोनों हंस हंस कर मम्मी के बारे में गन्दी बातें कर रहे थे। समीर वीडियो को रीप्ले कर रहा था और मम्मी की सिसकियों का मज़ा ले रहा था।

अभी वो अपनी दुकान पर ही थे, तभी दुकान में दो नए लोग दाखिल हुए—कैलाश और उसकी पत्नी सुमन। कैलाश (उम्र 55) दिखने में एक बहुत ही साफ़-सुथरा और वेल-ग्रूम्ड आदमी है जिसने अच्छे कपडे पहने हैं और घनी दाढ़ी रखी है। बाहर से वह एक टैक्सी ड्राइवर लगता है लेकिन उसका असली काम बहुत गन्दा है—वह एक हाई-क्लास पिंप है। समीर और विक्रम उसके पुराने ग्राहक (क्लाइंट्स) हैं। वह अपनी टैक्सी का इस्तेमाल लड़कियों को चुपचाप इधर-उधर लाने ले जाने के लिए करता है। उसकी पत्नी सुमन (उम्र 50) काफी हट्टी-कट्टी और भरे शरीर की है। वह मोबाइल शॉप के बगल में ही एक लेडीज बुटीक और ब्यूटी पार्लर चलाती है। लेकिन उसका असली काम अपने पति की मदद करना है।

वह पार्लर में आने वाली सीधी-साधी लेडीज और हाउसवाइव्स को पहचानती है और उन्हें फँसाने का काम करती है। उसके पार्लर के पीछे कुछ ऐसे हिडेन कमरे हैं जहाँ अमीर लोग और नेता आते हैं।

कैलाश ने एक शरारती मुस्कराहट के साथ पूछा “हे गाइस क्या चल रहा है? लगता है आज कोई बड़ी मछली हाथ लगी है?”

कैलाश और सुमन उस वक़्त से मम्मी को देख रहे थे जब वो पहली बार मोबाइल शॉप में दाखिल हुई थीं। असल में सुमन अपने बुटीक से बाहर निकल कर अपना इंट्रोडक्शन देना चाहती थी, लेकिन कैलाश ने उसे रोक दिया। कैलाश अपनी टैक्सी में बैठा सब कुछ देख रहा था। जैसे ही मम्मी और मैं वहां से निकले कैलाश गाडी से उतर कर दुकान के अंदर आया।

सुमन ने आँख मारते हुए पूछा “और क्या बातें हो रही थी तुम लोगों के बीच? मैं कसम खा सकती हूँ की एक ही चीज़ होगी। उस औरत का नाम क्या है?” वह ज़ोर से हंसी।

उसने लो-कट वाइट टैंक टॉप पहना हुआ था जिस वजह से उसका फिगर काफी हाईलाइट हो रहा था। उसके बुटीक का काम तो बस एक दिखावा था। समीर ने मुस्कुरा कर कहा “कुछ नहीं कैलाश चाचा हम तो बस कॉलेज की बातें कर रहे थे।”

लेकिन विक्रम ने बात खोल दी “वह हमारे जूनियर प्रेम की मम्मी हैं आंटी। अभी यहाँ शिफ्ट हुए हैं। प्रेम उन्हें हमसे मिलवा रहा था की अगर कोई मदद चाहिए हो तो।

“सुमन ने विक्रम के पास आ कर मज़े लेते हुए कहा “झूठ मत बोलो। क्या प्रेम इतना बेवक़ूफ़ है की उन्हें तुमसे मिलवाएगा? तुमने उन्हें क्या ‘हेल्प’ ऑफर की?”

समीर ने अपना मोबाइल खोला और सुमन को वही रिकॉर्डिंग और फोटोज दिखाई जो उसने चोरी से बनायीं थीं। “यह देखिये। क्या माल है! एकदम कुत्तिया लग रही है उसने बिना किसी शर्म के कहा।

विक्रम ने उत्साह में बोला “मैं तो बस शाम का इंतज़ार कर रहा हूँ उनसे मिलने के लिए।”

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सुमन वह वीडियो देख कर काफी इम्प्रेस हो गयी। उसके दिमाग में लालच आ गया। उसने सोचा की मम्मी जैसी एक घरेलु हाउसवाइफ की उसके ‘स्पेशल ग्राहकों’ (क्लाइंट्स) के बीच बहुत डिमांड होगी। उसने हैरानी से पूछा “रात की मीटिंग? तुम लोग क्या कह रहे हो?”

समीर ने जब सब बताया तो सुमन बोली “नहीं नहीं। जल्दबाज़ी में कुछ ख़राब मत करना। क्या तुम उसे सिर्फ एक बार एन्जॉय करना चाहते हो या जब मर्ज़ी तब? थोड़ा सब्र रखो लड़कों। यह काम सुमन आंटी पर छोड़ दो। भरोसा रखो वह तुम्हारी भी होगी और मेरे ग्राहकों की भी।” उसने लड़कों की तरफ देख कर आँख मारी और कहा “तुम लोग डिनर पर जाओ। हो सकता है आज रात डिनर पर मम्मी से मिलने कुछ बिना बुलाये पडोसी भी पहुँच जाएं।”

घर पहुँचने के बाद मम्मी काफी परेशान थीं। वह किचन में स्लैब का सहारा लेकर खड़ी थीं और उनकी सांसें तेज़ चल रही थीं। उन्हें समीर की उस बदतमीज़ी पर गुस्सा तो था ही पर साथ ही उन्हें इस बात की शर्म महसूस हो रही थी की उनका शरीर उस वक़्त कैसा रियेक्ट कर रहा था। उन्होंने खुद को समझाया “नहीं मुझे यह सब नहीं सोचना चाहिए। वह सिर्फ प्रेम के दोस्त हैं और उन्होंने बस एक फोटो ही तो ली है”।

शाम के 6 बज चुके थे और किचन में अँधेरा होने लगा था। मम्मी को याद आया की समीर और विक्रम किसी भी वक़्त आते ही होंगे और उनके पास खाना बनाने का वक़्त नहीं है। उन्होंने तुरंत पापा को नए सिम से फ़ोन मिलाया।

पापा: “हेलो कौन बोल रहा है?”

मम्मी: “मैं हूँ। यह मेरा नया टेम्पररी नंबर है। मेरा पुराना नंबर अभी पोर्ट नहीं हुआ”।

मम्मी ने पापा को बताया की प्रेम के कुछ कॉलेज के दोस्त डिनर पर आ रहे हैं और उन्हें हेल्प चाहिए। उन्होंने पापा से रिक्वेस्ट की की वह आते वक़्त रेस्टोरेंट से फ्राइड राइस और चिकन करी लेते आएं। पापा थोड़े हैरान थे की इतनी शार्ट नोटिस पर मेहमान आ रहे हैं पर उन्होंने हाँ कर दी और कहा की वह आधे घंटे में पहुँच जायेंगे। मम्मी ने डाइनिंग टेबल पर कटलरी सेट की और उनका मूड थोड़ा बेहतर होने लगा। वह गुनगुनाते हुए अपने बैडरूम की तरफ गयीं जो ग्राउंड फ्लोर पर था। प्रेम अपने कमरे में था और कहीं दिखाई नहीं दे रहा था। आईने के सामने खड़े होकर उन्होंने अपना हुलिया चेक किया। उनकी टाइट ग्रीन कुर्ती और वाइट लेग्गिंग्स बिलकुल सही थीं, उन्होंने बस थोड़ा मेकअप टच-उप किया और अपने बाल सँवारे।

इस बार उन्होंने सावधानी बरतते हुए अपने दुपट्टे को दोनों कन्धों पर सेफ्टी पिंस से अच्छे से फिक्स कर लिया ताकि वह दोबारा न सरके। तभी अचानक डोर बेल बजी। मम्मी के पूरे शरीर में एक थरथराहट दौड़ गयी। उन्हें उम्मीद नहीं थी की वह लोग इतनी जल्दी आ जायेंगे। पिछले आधे घंटे में उन्होंने जो थोड़ा बहुत कॉन्फिडेंस इकठा किया था वह डोर बेल की एक ही आवाज़ में गायब हो गया और उनका दिल तेज़ी से धड़कने लगा। मम्मी डर के मारे अपने बैडरूम में बैठी थीं। प्रेम का कहीं पता नहीं था। डोर बेल बजने पर उनका शरीर कांपने लगा। उन्होंने हिम्मत जुटा कर दरवाज़ा खोला तो सामने समीर या विक्रम नहीं बल्कि एक उम्रदराज़ जोड़ा खड़ा था।

माँ की चुदाई की हिन्दी सेक्स स्टोरी

कैलाश ने फॉर्मल कपडे पहने थे और सुमन ने एक डिज़ाइनर ब्लैक स्लीवलेस ब्लाउज और रेड सेमि-ट्रांसपेरेंट साडी पहनी हुई थी।

“हेलो। आपके इस नए इलाके में स्वागत है। मैं सुमन हूँ और यह मेरे पति कैलाश सुमन ने बड़े ही मिलनसार अंदाज़ में कहा। मम्मी ने राहत की सांस ली और उन्हें अंदर बुलाया। सुमन ने नोटिस किया की मम्मी बहुत घबराई हुई हैं और उन्होंने मज़े लेते हुए कहा “आप इतनी टेंशन मे क्यों लग रही हैं? हम कोई चोर नहीं हैं।”

मम्मी ने शरमाते हुए कहा “नहीं दीदी वह मैं किचन में काम कर रही थी इसलिए।” सुमन ने उन्हें सोफे पर बैठाया और अपना इंट्रोडक्शन दिया की उसका जंक्शन पर एक बुटीक और ब्यूटी पार्लर है। मम्मी ने बताया की वह एक हाउसवाइफ हैं और उनके पति जो की एक बैंक में मैनेजर हैं शहर में होते हैं।

सुमन ने मम्मी की ख़ूबसूरती की तारीफ करते हुए कहा “मैं तो चाहूंगी की आप जैसी हॉट कस्टमर मेरे पार्लर में आये।” मम्मी यह सुनकर शर्मा गयीं।

जब मम्मी किचन में कोल्ड ड्रिंक्स लेने गयीं तो कैलाश और सुमन की नज़रें उनके फिगर पर ही थीं। कैलाश ने धीरे से कहा “हमें यह किसी भी कीमत पर चाहिए रमेश जी इसके लिए कुछ भी देंगे।” सुमन ने इशारा किया की वह जल्दबाज़ी न करे।

मम्मी ट्रे लेकर वापस आयीं और जैसे ही उन्होंने ट्रे टेबल पर रखी डोर बेल फिर से बज उठी। वह तेज़ मैटेलिक आवाज़ सुनकर मम्मी के चेहरे का रंग उड़ गया और वह फिर से कांपने लगीं। सुमन ने उन्हें छेड़ते हुए कहा “कौन है दरवाज़े पर? क्या आपके पति के आने का वक़्त हो गया? चलिए उनसे भी मिल लेते हैं।”

डोर बेल की वो तेज़ मैटेलिक आवाज़ सुनकर मम्मी का दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़कने लगा। उनका पूरा शरीर काँप रहा था। उन्होंने एक गहरी सांस ली और खुद को सँभालने की कोशिश की ‘शांत हो जाओ रीना। अब तो तुम अकेली नहीं हो उन्होंने खुद से कहा। लेकिन उन्हें क्या पता था की असली खेल तो अब शुरू होने वाला है। Sanskari Mom sex story का अगला पार्ट जल्द आएगा।

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