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पहला सेक्स का अनुभव – Part 4

मई ज़ोर ज़ोर से चाचा का लंड चूस रही थी और आपना मूह आयेज पीछे कर रही थी. थोड़ी हे देर मे चाचा की सिसकारी तेज हो गयी, और उन्होने मेरा सिर ज़ोर से पाकर लिए और सिसकारी भराते हुए बोले” नीते बिटिया और तेज, और तेज चूसो. बस पानी निकालने ही वाला है.”

मैने चूसना तेज कर दिया . अचानक चाचा का लंड मे सुरसूराहट से होने लगी और उनका लंड और भी कस कर टाइट हो गया. चाचा ने भी कमर हिलनी शुरू कर दी, और अचानक उनके मूह से आनंद भारी छ्चीख निकली “ है रानी बिटिया , मैं एयेए रहा हूँ , और तेज चूसो, और तेज, और तेज, और तेज”. मैने चूसना तेज किया .

अचानक चाचा के लंड ने इक जटका खाया ओर चाचा के मूह से इक सिसकारी निकल गयी “ है नीता , लो मैं गया” और इसी के साथ चाचा के लंड से जैसे वीर्या का फुवरा छ्छूट पड़ा. उनके लंड से वीर्या की पहली धार निकल कर सीधे मेरे गले के नीचे उतार गयी. चाचा का लंड जटके लेता रहा और उनके लंड से वीर्या के फुवरे छ्होट ते रहे. मैं जात से सारा वीर्या पे गयी. लंड के पानी का स्वाद इतना अच्छा था की क्या बताउन. मैं तो लंड को ज़ोर ज़ोर से चूस्टी रही , और लंड का सारा पानी चूस चूस कर पे गयी. धीरे धीरे लंड का तनाव ख़त्म हो गया और वो सिकुड कर छोटा होने लगा.

मैने लंड को आपने मूह से बाहर किया , और उपर चाचा की ओर देखा की चाचा तो आँखें बंद किए, आनंद के सागर मे गोते लगा रहे थे. उनके चेहरे पर वो चमक थी जो मैने आज तक नही देखी थी. मुझे बहुत अच्छा लगा , की मैने आपने चाचा को इतना मज़ा दिया.

थोड़ी देर के बाद चाचा ने आपनी आँखें खोली और मेरे को आपनी बाँहो मे लेकर कस लिया . उनकी आँखें गीले हो गयी थी . वो मुझे प्यार से चूमते हुए बोले “ नीता तुम मेरे जीवन की सब से प्यारी बेटी हो. आज तक मुझे जिंदगी मे इतना मज़ा नही आया. तुम्हारी मा ने भी कभी मेरा लंड आपने मूह मे नही लिया. चूसने की तो बात ही क्या है. आज जिंदगी मे किसी ने पहली बार मेरा लंड चूसा है, और मुझे इतना मज़ा दिया है. मैं तो जैसे तुम्हारा गुलाम हो गया हू. आज के बाद मैं वोही करोंगा जो तुम कहोगी. ई लव यू नीता, ई रियली लव यू.”

मैं गंगना कर चाचा से चिपक गयी, और उनके होठों को चूमते हुए बोली “ चाचा क्यों शर्मिंदा करते हो, आप तो मेरे सब से प्यारे चाचा हो. आप को खुश करना और खुश रखना तो मेरा फ़राज़ है. आआप जब भी कहेंगे, मैं हमेशा आपके लंड की इसी तरहा की सेवा करने को त्यआर हूँ.”

चाचा बहुत खुश हुए और मुझे ज़ोर से आपने साथ चिपका लिया. थोड़ी देर के बाद मैं बोली “ चलो चाचा अब मुझे आपनी गोद मे बिठा लो, ताकि मैं आप को केक खिला सकूँ और आप भी मुझे केक खिला सको. अब आप का लंड तो सिकुड कर छोटा हो गया है , इसलिए उस से हमें कोई दिक्कत ना होगी, और मैं आराम से आपके गोद मे बैठ सकती हूँ.”

चाचा मुझे चूमते हुए बोले “ अरे पगली, यह लंड है. जब इसे पास मे तुम्हारी चुत की खुश्बू आएगी तो यह झट से फिर खड़ा हो जाएगा. मुझे अल्टिमेट्ली तो आपना लंड तुम्हारी चुत के छेद मे डालना ही पड़ेगा, तभी तुम मेरी गोद मे बैठ कर केक खा सकोगी. इसलिए आयो मैं तुम्हारी चुत को आपने मूह से थोड़ा चूस कर गीला कर ही देता हूँ, ताकि तुम्हे दिक्कत ना हो.”

मान तो मेरा भी बहुत कर रहा था, पर ऐसे ही थोड़ा नखरा और आक्टिंग कर रही थी. चाचा तो मेरे मूह मे आपना पानी निकल कर मज़ा ले भी लिए थे, पर मैं तो वासना की आग मे जैल जा रही थी. इसलिए चाचा की बात को झट से पकड़ते हुए बोली” आप तीएक कह रहे हैं चाचा. बताइए आप मेरी चुत को आपने मूह से कैसे गीला करेंगे”.

चाचा ने कहा “ नीता बिटिया , आओ और मेरी गोद मे बैठने के लिए आओ. “ मैं चाचा के गोद मे उनके मूह की ओर से खड़ी हुई. मैं बैठने वाली ही थी की चाचा ने मुझे खड़ा ही रहने को कहा. अब मैं चाचा के मूह के सामने खड़ी थी. मेरी दोनो टाँगे चाचा के कमर के दोनो तरफ थी. मेरा मूह चाचा की ओर था , और इस तरहा खड़े होने से मेरी चुत सीधी चाचा के मूह के सामने आ गयी. चाचा ने मेरे दोनो हाथ आपने कंधों पर रख कर मुझे झुक जाने को कहा. अब हालत यह थी की मेरी चुत बिल्कुल चाचा के मूह के सामने थी. चाचा बेड पर बैठे थे और मैं चाचा की आयेज खड़ी थी. चाचा ने केक का एक टुकड़ा निकाल कर मेरी चुत के उपर चुपर दिया . मेरी चुत मे केक के करीम की ठंडी लगने से सिहरन जैसे हुई. मेरी चुत केक से पूरी वाइट हो गयी थी. चाचा ने आपनी जीब थोड़ी से बाहर निकली, और मेरी चुत को दोनो हाथों से थोड़ा खोल कर , चुत की फांकोन के बीच लगाया. चुत के अंदर चाचा की जीब का स्पर्श होते हे जैसे मेरे पुर बदन मे बिजली की एक लेहायर दौड़ने लगी. यह एक अजीब सा एहसास था. मेरी चुत मे आज पहली बार किसी ने जीब से टच किया था. मैं तो आनंद से पूरा गंज्ना गयी. चाचा ने पूरी जीब बाहर निकल कर मेरी चुत के अंदर फेरना शुरू कर दिया, साथ ही चाचा केक भी खाते / चाट ते जा रहे थे. चाचा ने दोनो हाथों से मेरी चुत का मूह खोल दिया , जिस से मेरी चुत का अंदर का लाल लाल हिस्सा सॉफ नज़र आने लगा. मेरी चुत से ताप ताप मदन रस ( चुत का अमृत) तपाक रहा था, जिसे चाचा चाट चेट की आवाज़ के साथ चाट रहे थे. माझे की अधिकता से मेरी आँखें बंद होने लगी. ऐसा लग रहा था की जैसे मैं आपने रूम मे नही बल्कि स्वराग मे खड़ी हूँ. शायद स्वराग मे भी इतना मज़ा नही होगा जितना इस टाइम मुझे मिल रहा था. चाचा ज़ोर ज़ोर से मेरी चुत को चाट रहे थे , और मेरी चुत से बहता हुआ मदन रस पे रहे थे.

चाचा ने चुत को चूस्टे चूस्टे , आपनी जीभ को गोल किया और मेरी चुत के चीड़ के उंड़दर डाल दिया. मैं तो मज़ेह के मारे उच्छल ही पड़ी. चाचा के जीभ मेरी चुत मे गुस गयी थी, और चाचा आपने मूह को अंदर बाहर कर रहे थे , जिस से मेरी चुत मे जीब अंदर बाहर हो रही थी. चाचा मुझे जीभ से ही चोद रहे थे. यह एक ऐसा माझा था की जिसे मैं बयान नही कर सकती.

मैने दोनो हाथों से चाचा का सर कस कर पकड़ लिए, और चाचा का सिर को आपनी चुत की तरफ खींचने लगी जिस से मेरी चुत मे खूब अंदर तक चाचा की जीभ जा सके. चाचा को साँस लेने मे दिक्कत हो रही थी, पर वो उंसकी परवाह ना कर के ज़ोर ज़ोर से मेरी चुत चूस रहे थे और जीभ से चोद रहे थे. मेरे मूह से आन्नंद भारी आह आह आह निकल रही थी. मुझे इतना मज़ा आ रहा था की मैं बयान नही कर सकती. अचानक चाचा ने मेरी चुत मे से जीभ बाहर निकली और मेरे चुत के दाने ( क्लिट) को आपने होठों मे ले लिया और चुत के दाने को चूसने लगे.

“ है चाचा मार गयी.” मेरे मूह से निकल पड़ा. कूट के दाने को चूसने मे तो इतना माझा था की चुत की जीभ से चुदाई और चुत की चूसैई भी उंसके सामने कुछ ना थी. मेरी तो जैसे शेयरर की जान ही निकल गयी, ऐसा लग रहा था की माझे की अधिकता से मैं तो मार ही जाऊंगी.

मुझे ऐसा लग रहा था की जैसे मेरी चुत से कुछ निकल ना चाहता है. मेरा ऑर्गॅज़म पास आ रहा था. मैने जिंदगी मे कभी , ऑर्गॅज़म का अनुभव नही लिया था तो समाज नही आ रहा था की मुझे क्या हो रहा है. मैं चाचा से बोली “ है चाचा बहुत मज़ा आ रहा है, मैं मार जौऊनगी. मुझे छोड़ दो. मेरी चुत से कुछ निकालने वाला है. है चाचा शायद मुझे पेशाब आ रहा है, मुझे छोड़ दो वरना आपके मूह पर ही पेशाब निकल जाएगा.” चाचा तो पुर अनुभवी खिलादे थे वो समाज गये की मेरा पानी छूटने वाला है. चाचा ने चुत के दाने की चूसा और भी तेज कर दी.

अच्चानक मुझे लगा की जैसे मेरे अंदर से कोई , तूफान सारे बंधन तोड़ कर निकल रहा हो. “ है चाचा , मैं मार गयी. मुझे कुछ हो रहा है.” यह कह कर मैं इक दम से चाचा के सर को ज़ोर से कस लिया और मेरी चुत ने जिंदगी मे पहली बार पानी चोद दिया. मेरा ऑर्गॅज़म इतना तेज था की मेरे शरीर से जैसे जान ही निकल गयी. मुझे खड़ा रहना मुश्किल हो गया. मैने दोनो हाथ चाचा के कंधे पर रख कर आपने शरीर को संभाला. मेरी चुत से मदन रस निकल रहा था , जिसे चाचा ज़ोर ज़ोर से चाट रहे थे, और मैं मस्ती के सागर मे हिलोरे ले रही थी.

थोड़ी देर के बाद मेरा मज़ा कुछ कन हुआ , तो मैने आपनी आँखें खोली. और प्यार से चाचा के और देखा. चाचा मेरी नज़रों मे नज़रें डाल के मुझे देख रहे थे और मुस्कुराते हुए बोले” नीत बेटा ! कैसा लगा. कुछ मज़ा भी आया के नहीं,” मैं शर्मा गयी और झट से चाचा के गोद मे बैठ कर आपना सर चाचा के सीने मे छुपा लिया. चाचा ने प्यार से मेरा चेहरा उपर को उठाया और मेरे होठ चूम कर बोले “ क्या बात है जवाब नही दिया. अच्छा नही लगा क्या. वैसे बेटी तेरा चुत रस तो मुझे बहुत ही स्वादिष्ट लगा. मुझे तो बहुत अच्छा लगा. तू आपनी तो बता?”. मैं चाचा से कस कर लिपट गयी और शरमाते हुए चाचा के कान के पास आपना मूह ले जा कर बोली “ है चाचा आपने तो आज मुझे मार ही दिया था. इतना मज़ा तो मुझे जिंदगी मे कभी नही आया. मुझे इतना अच्छा लग रहा था की मैं बयान नही कर सकती. थॅंक यू सो मच चाचा.”

चाचा कुश हो गये और बोले “ चल अब केक खाते है.” मैं केक की प्लेट की तरफ हाथ बदाया तो चाचा बोले. “ बेटी मैने पहले ही बताया था की गोद मे बैतोगी तो लंड तुम्हारे पेट मे लगता है, इस लिए पहले लंड को आपनी चुत के अंदर थोड़ा गुस्वा लो ताकि तुम मुझसे आराम से चिपक सको.”

मई बोली “ चाचा आप का लंड तो पानी चोदने के बाद , सिकुड कर छोटा सा हो गया था. अब वो हमारे हग करने मे क्या दिक्कत देगा.” चाचा ने मेरा हाथ पाकर कर आपने लंड पर रख दिया, तो मैं यह देख कर हैरान हो गयी की चाचा का लंड तो पहले की तरह अकड़ कर खड़ा था, और पहले से भी ज़्यादा टाइट था. चाचा मुझे चूमते हुए बोले “ बेटी, तुम्हारी चुत चूस्टे चूस्टे, मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया है. चलो अब मैं इसे तुम्हारी चुत मे गुसा देता हू ताकि तुम मेरे गोद मे आराम से मुज से चिपक कर बैईः सको.”

मई तो त्यआर ही थी. चाचा ने कहा “ नीता बिटिया, गोद मे बिठा कर लंड डालूँगा तो आसानी से नही जाएगा. तुम बेड पर लेट जाओ, मैं तुम्हारी चुत को थोड़ा और गीला कर देता हूँ, क्योंकि तुम्हारा यह पहली बार है. तुम्हे अच्छा लगेगा.”

मई चाहती तो थी की जल्दी से चाचा आपना लंड मेरी चुत मे डाल दे, पर आक्टिंग करते हुए बोली “ है चाचा आपका लंड तो बहुत ही मोटा और लंबा है. दर्द तो नही होगा? कहीं मैं मार तो ना जाऊंगी?”

चाचा प्यार से मेरे गालों पर हाथ फेर कर बोले “ धात पगली बेटी, आज तक कोई लड़की कभी लंड के गुसने से मारी है क्या? अरे दुनिया की सभी लड़कियाँ चुत चुद़वति है. ऐसा होता तो सभी मार ना जाती. चल जल्दी से बेड पर लेट जा. अब रुका नही जा रह है. इक सेकेंड भी रुकना मुश्किल हो रहा है. चल मैं तेरी चुत मे लंड डाल डून.”

मई आराम से बेड पर लेट गयी और आपनी टाँगों को फैला दी. चाचा ने मेरे उपर आते हुए, आपने एक हाथ से मेरी चूची को पाकर लिया और आपना मूह मेरी चुत की तरफ ले गये. मैने आपनी आँखें बंद कर ली. चाचा ने आपने दूसरे हाथ की उंगलियों को मेरी चुत की दारद मे चलाया. मेरी चुत तो बहुत ही गीली हो गयी थी. फिर चाचा ने उंगलियों मे मेरी चुत के दाने को पाकर लिया और आपने मूह को मेरी चुत पर रख कर चूसना शुरू कर दिया और साथ ही एक हाथ से मेरी चूची और दूसरे हाथ से मेरी चुत के दाने को मसलने लगे.

मैं ज़ोर ज़ोर से आवाज़ निकालने लगी.”आआआआः चाचा मुझे छोड़ दो, अब बस करो ना बर्दाश्त नही हो रहा है.” चाचा बोले, “अभी तो कुछ किया ही नही, अभी तो असली खेल बाकी है.” कहते कहते उन्होने एक बार फिर मेरे चुत के उपर किस कर दिया. मैं बिस्तर से उपर उछाल गयी. चाचा बोल रहे थे, “कितने दीनो बाद देख रहा हू तेरा उँचुद़ा छूट. तू मुझे शादी के रात वाली तेरी मा की याद दिला रही है. वो भी ऐसे ही चुत का बाल सॉफ करके आई थी और उसका चुत भी तेरे जैसा ही था. मगर अभी बहुत छोटा छेद होगा तेरा. इसे थोड़ा चौड़ा कर्मा पड़ेगा.”

और चाचा बिस्तेर पर बैठ कर मेरी टाँगे चोदी कर के मेरी चुत मे उंगली डालने लगे. मैं वर्जिन थी ना तो मेरी चुत मैं दर्द होने लगा. चाचा की उंगली मेरी चुत मे आधी ही घुस रही थी और बड़ी टाइट चल रही थी. चाचा मेरी चुत मे उंगली डाल रहे थे और मुझे दर्द हो रहा था. फिर चाचा ने आपनी उंगली निकल ली और उसे चाटने लगे, “नीता तेरी चुत का रस तो बड़ा मीठा है रे.” मैने लाज़ के मारे उनके सीने मे आपना मूह चुपा लिया.

फिर उन्होने आपना मुँह मेरे चुत पर रख दिया और चुत का होंठ चूसने लगे. मेरे मुँह से बार बार चीख निकल रही थी. अगर मा ने नींद की गोली नही खा ली होती तो परॅलिसिस में भी दौड़ते उपर चली आती. चाचा मस्ती में मेरी चुत चाटने लगे. उन्हे मैं माना कर रही थी फिर भी चाचा ने आपनी दो उंगली मेरी चुत मे घुसा दी और और मैं फिर चीख पड़ी.

चाचा मेरे होठ चूसने लगे और उंगलियाँ अंदर बाहर करने लगे चाचा की दो दो उंगली अंदर बाहर होने से मुझे बहुत दर्द हो रहा था, लेकिन थोड़ी देर बाद मुझे मज़ा आने लगा अब चाचा उठे और अलमारी से एक्सट्रा टाइम कॉंडम का डिब्बा निकल लाए और बोले, “आज रात को तुझे खूब चोदूँगा.” मैं हैरान हो गयी , चाचा तो शायद मेरा जनमदिन मानने की पहले से ही त्यारी किए बैठे थे. मैं मस्त थी और उनके लिए त्यआर थी.

और फिर चाचा ने मेरी टाँगे चोदी की और मेरी चुत पे तेल लगा दिया, बोले, “इस से मेरा लंड तेरे चुत मैं थोड़ा आसानी से चला जाएगा.” मैं दर्द के दर से और काँपने लगी. इच्छा हुवा की बिस्तर से उठ कर भाग जौ. पर मज़ाह इतना आ रहा था की बयान नही कर सकती, वैसे भी चाचा ने मुझे आपने नीचे ही दबा रखा था. फिर आपने लंड पे भी तेल लगा लिया और आपना लंड मेरी चुत के मुँह पे रख दिया. फिर धीरे से मेरी चुत मे धक्का दिया. लेकिन लंड अंदर नही गया तो चाचा ने मेरे होठ आपने मूह मे डाल लिए ताकि मेरी चीख ना निकले. और एक ज़ोर का धक्का मेरी चुत मे मारा. मैं चीख नही सकी और तड़प कर रह गयी चाचा का मोटा लंड 7इंच का था जो अब मेरे उँचुद़े चुत के अंदर था..

अभी उनका दो इंच लंड अंदर जा चुका था. अब वो थोड़ा थोड़ा उसे हिलने लगे. मेरा दर्द कुछ कम हुआ तो चाचा ने ज़ोर का धक्का मारा और पूरा लंड चुत को चीराता हुआ 5 इंच अंदर चला गया. मुझे बहुत दर्द हो रहा था और मैं चाचा को धक्का देने लगी आपने उपर से हटाने के लिए. मैं तड़पने लगी तो चाचा वैसे ही रुक गये. मेरी चुत की सील टूट चुकी थी और थोड़ा सा खून मेरी चुत से निकल रहा था . लेकिन मुझे दिखाई नही दे रहा था, वो तो मुझे बाद मे पता चला.

कुछ देर बाद मे मेरा दर्द कम हुआ तो चाचा मुझे चोदने लगे अब मुझे भी थोड़ा थोड़ा मज़ा आने लगा और मैं ज़ोर ज़ोर से बोलने लगी, “ऊहोहूहूऊऊऊऊओोहोहोहोह पप्पपपप्पप्प्प्प्प्प्प्प धीरीईए चूऊऊऊदूऊऊऊऊऊवाहाहहहहहहहहः अहहहहहः पपपपपप ढीईरररेरेरेरेरर चूदोडोदोडोडू मररर्र्र्ररर गाआयईीईई ईईईईईईइइइईईईईईईईई ढीईईरएररर माआररर्र्र्र्र्र्र्र्रररीईरएरेर्रीर गाइिइइईईईईईईईईई” मैं चीखती रही और चाचा मुझे चोदते रहे.

और थोड़ी देर मे चाचा उठे और मेरे चूतड़ के नीचे दो तकिये रख दिए जिस से मेरी चुत अब एकदम उपर आ गयी. चाचा ने मेरी चुत के च्छेद पर थोड़ा सात एल लगाया जिस से मेरी चुत काफ़ी गीली हो गयी . और फिर चाचा ने मेरी दोनो टॅंगो को उपर की और मोड़ा और मेरी दोनो टाँगे आपने कंधे पर रख ली. इस आंगल मे मेरी चुत का मूह पूरा खुल गया और चुत का च्छेद बुल्कुल उपर की आयार चाचा के लंड के सूप़ड़े के बिल्कुल करीब आ गया. चाचा ने आपने लंड का सुपरा मेरी चुत के च्छेद के उपर रखा और प्यार से मेरी चूचियाँ सहलाते होये बोले “ बिटिया रानी अब टुजे जीवन का और जवानी का असली आनंद आएगा. बस अब जी भर कर माझा लो “. ये कहते हुए चाचा मेरे उप्पर आ गये और आपना लंड मेरे चुत मे एक ही धक्के में घुसा दिया. एक पल रुक कर ज़ोर का धक्का मररा जिस से मेरी चुत मे उनका 7इंच का लंड पूरा का पूरा घुस गया. मैं पूरी ताक़त से चिल्लाई, “मैं मार गायईयीईईईईईईईईईई. चाचा चूऊऊऊदूऊऊऊऊऊवाहाहहहहहहहहः अहहहहहः पपपपपप मुझे छोड़ दो.”

उन्होने एक ना सुनी और आपना लंड अंदर तेलते गये और लंड मेरी चुत मे घुस गया और सीधे मेरे अंतिम चोर से जाकर टकराया और मैं तड़प उठी, “आआईयईईईईईइइइइइइई मररर्ररर गाइिइईईईईयी धीरेरेरेरर ढेर्रेरेरेरईईईई दादालडोडोडूऊऊलूओल जन्न्ना आइइइइइई धृेरेरेरेर्रेर्रर.” चाचा फिर एक हाथ से मेरी चुचि दबाने लगे.

चाचा ने मेरी टाँगे उठा कर आपने कंधे पे रख ली और ज़ोर ज़ोर से धक्के देने लगे. और एकदम से मेरे पैरो को जो की उन्होने आपने कंधे पर रखे थे को उतार डियै और मेरी टॅंगो को आपनी कमर से लिपटा दिया. मेरी टाँगे चाचा की कमर पर बुरी तरह से कस गयी अब चाचा का लंड मेरी चुत से सिर्फ़ 2 इंच ही निकल रहा था और 5इंच लंड अंदर ही आप्पर नीचे हो रहा था.

मुझे बहुत दर्द हो रहा था और मज़ा भी आ रहा था. मैं सिसकते सिसकते बोली, “चाचा बाहहहहहहहार निकल लो” चाचा बोले, “ अरे नीता बिटिया रानी, अभी तो मज़ा आने लगा है. कितने दीनो बाद एक कुँवारा उँचुद़ा चुत मिला है.” ज़ोर ज़ोर से धक्के देने लगे. मैं हर धक्के के साथ अहहहहहहहहह अहह कर रही थी क्योंकि हर बार उनका लंड मेरे बच्चेड़ानी के अंतिम चोर से टकरा रहा था और चाचा बहुत तेज तेज धक्के दे रहे थे.

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2 Comments
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