Mummy aur chachi ka raaz 2:- पिछले पार्ट मे आपने पढ़ा कि मेरी मम्मी और चाची सत्संग मे जाने के लिए निकली थी। मेरे कॉलेज मे आज छुट्टी हो गयी थी तो मै घर वापस आ रहा था। रास्ते मे मैंने मम्मी और चाची को किसी आदमी के साथ कार मे जाते हुए देखा। फिर मुझे पता चला कि वो तो मेरे पापा के दोस्त है। फिर मै उनके पीछे गया ये देखने कि मम्मी और चाची उनके साथ कहा जा रही है। मै जब उनके पीछे उनके फार्म हाउस पहुंचा तो जो मैंने देखा उसे देखते ही मै चौंक गया। अब पढ़िये आगे..
अगर आपने इससे पहला पार्ट नही पढ़ा है तो पहले वो पढ़ ले..
संस्कारी मम्मी और चाची निकली बड़ी चुदक्कड़-1
अंदर हॉल में मम्मी और चाची सोफे पर बैठी थी. और उनके सामने सिर्फ महेश अंकल ही नहीं बल्कि पापा के और कुछ दोस्त भी बैठे थे – सुरेश अंकल अनिल अंकल विनोद अंकल और राजेश अंकल. ये सभी हमेशा घर आते-जाते रहते थे.
पर अब उन सब को एक जगह देख कर मुझे समझ नहीं आ रहा था की ये सब यहाँ कर क्या रहे थे. मम्मी ने आज क्रीम ऑफ-वाइट कॉटन साड़ी पहनी थी जिसमे रेड और ब्लैक मधुबनी स्टाइल का बॉर्डर था. साड़ी का फैब्रिक हल्का और सॉफ्ट था जो उनके फेयर स्किन पर और भी निखरा हुआ लग रहा था. रेड पोल्का डॉट ब्लाउज डीप नेक लाइन के साथ उनके भरे और हॉट सीने को और उभार रहा था. साड़ी का पल्लू मम्मी ने एक-दम नीटली संभाला हुआ था. लेकिन जब भी वो हल्का सा सरकता तो उनकी पतली कमर और गोल नाभि चमक जाती थी.
इस साड़ी लुक में मम्मी एक-दम ट्रेडिशनल और ग्रेसफुल लग रही थी. पर उनके कर्व्स और स्माइल में एक छुपा हुआ सेडक्टिव चार्म था. जिससे नज़र हटाना मुश्किल कर रहा था.
चाची ने आज ब्राइट पिंक साड़ी पहनी थी जिसका हल्का ट्रांसपेरेंट फैब्रिक उनके डस्की स्किन टोन पर और भी खूबसूरत लग रहा था. साड़ी के अंदर उनका ग्रीन स्लीवलेस ब्लाउज टाइट फिटिंग था जो उनके 34-28-36 फिगर को और हाईलाइट कर रहा था. बैठते वक़्त साड़ी के प्लेट्स थोड़ी ऊपर हो गयी थी जिसमे उनकी टोंड जाँघों का कर्व हल्का सा नज़र आ गया. उस मोमेंट में उनका लुक इतना सेंसुअल था की मेरी नज़र उनपे टिक कर रह गयी. Mummy aur chachi ka raaz 2
दोनों ने सिन्दूर बिंदी और चूड़ियां पहनी थी बिलकुल एक संस्कारी बहु की तरह. लेकिन उनकी सजावट देख कर मुझे कभी समझ नहीं आया की ये दोनों सत्संग के लिए नहीं बल्कि कुछ और ही ख़ास वजह से इतनी सज-धज कर घर से निकलती थी. उनका पूरा लुक ऐसा था जैसे वो किसी मंदिर के लिए जा रही हो पर असल बात तो सीक्रेट महफ़िल के लिए दोनों घर से झूठ बोल कर निकली थी. इतने में विनोद अंकल ने मम्मी की तरफ देख कर बोला भाभी जी… आज तो आप बिलकुल फूल जैसी खिल रही हो देख के मैं मीठा हो गया.”
मम्मी शर्मा के हलकी सी मुस्कान दे दी पर उस शर्माने में भी एक अलग ही जलवा था जो समझना मुश्किल था. तभी महेश अंकल ने चाची की तरफ देख कर हंस कर बोला “रेखा भाभी… आज तो आपने इस साड़ी में बिजली गिरा दी है. संभल के वरना हम जैसे आदमियों को करंट लग जायेगा.”
चाची ने पलक झुका कर बस एक शरारती सी नज़र उनकी तरफ डाली जैसे उन्हें टीज़ कर रही हो. मैं ये सब खिड़की से देख कर एक-दम कंफ्यूज हो गया. घर पे ये दोनों कभी ऐसे रियेक्ट नहीं करती थी पर यहाँ… जैसे उनका एक अलग ही रूप था. इतने में सुरेश अंकल हाथ में दारु की बोतल लेकर आ गए. सब एक्सपेक्ट कर रहे थे की कोई अंकल बोतल खोलेंगे पर मेरी मम्मी ने खुद बोतल ली और अपने नरम हाथो से उसकी सील तोड़ दी. उसके बाद चाची ने बड़े ही आराम से सब के लिए पेग बनाने स्टार्ट कर दिए. मुझे अपनी आँखों पर विश्वास ही नहीं हुआ – जो माँ और चाची घर पे पूजा-पाठ और व्रत करती थी आज वो दोनों खुद शराब सर्व कर रही थी.
पहला पेग सब ने आराम से पिया. थोड़ी ही देर में सब अंकल थोड़ा खुलने लगे हंसी–मज़ाक और थोड़ी नॉटी बातें शुरू हो गयी. विनोद अंकल मम्मी को देख कर बोले “भाभी जी आपने तो दारू में भी अपनी मिठास घोला है… एक सिप लेने से लगता है जैसे आप ही के होंठ चूम लिए हो.” मम्मी ने सर झुका लिया पर उसकी आँखों की हलकी सी शरारत भरी चमक मुझे दूर से भी नज़र आयी. चाची पहले थोड़ा मुस्कुरायी फिर झुक कर अपने गिलास से चुस्की ली और महेश अंकल की तरफ नज़र मिलायी.
माँ और चाची जो घर पर संस्कार की मूर्ति बनती थी अब उनका ये रूप अंकल के सामने एक-दम अलग ही खेल दिखाने वाला था. सभी अंकल के दो-दो पेग हो चुके थे. हंसी–मज़ाक और शरारत भरी बातें अब थोड़ी नॉटी लाइन लेने लगी थी. विनोद अंकल मम्मी के पास आ कर उनका गिलास भरते हुए बोले “अरे भाभी जी ज़रा सीधा करके गिलास पकड़िए… वरना आपके हाथ की नरमी में पूरा शराब बह जायेगा.”
उनकी ऊँगली मम्मी के हाथ को हलकी सी ब्रश कर गयी. मम्मी ने थोड़ा सांस लेटे हुए मुस्कान दी और आँख झुका ली. सुरेश अंकल तब चाची की तरफ बढे उनके गिलास में पेग डालते हुए बोल पड़े “भाभी आप तो पेग बनाते-बनाते हमें भी पी लेने पर मजबूर कर देती हो.” चाची हंसी दबा गयी और अपना पल्लू थोड़ा सीने पर एडजस्ट करते हुए उनका गिलास वापस पकड़ा दिया. इतने में महेश अंकल ने अपने गिलास में एक छोटी सी टेबलेट डाली. वो टेबलेट फ़िज़्ज़्ज़्ज़्ज़ करके घुल गयी. उन्होंने सीधा चाची की तरफ देख कर आँख मारी. चाची पहले तो थोड़ा एक्ट करते हुए पलके झुका गयी फिर हलकी सी मुस्कान दे दी.
मेरा दिल ज़ोर–ज़ोर से धड़क रहा था. “ये वही वियाग्रा की गोली थी जो मेडिकल स्टोर वाले कह रहे थे…”ये देख कर मेरा कन्फ़्युशन अब शक में और शक अब पूरी तरह यक़ीन में बदल गया. अब मुझे पूरी तरह यकीन हो गया की यहाँ कुछ और ही खेल चल रहा है. सभी अंकल अब मम्मी–चाची की ब्यूटी और अदाओं की ओपनली तारीफ कर रहे थे. “भाभी जी आपकी आँखों में डूबने का मैं करता है.” “अरे इनकी मुस्कान में ही नशा है यार.” “क्या फिगर बनाया है भगवन ने साड़ी भी तुमसे ही रोशन हो गयी है.” Mummy aur chachi ka raaz 2
मम्मी और चाची दोनों पहले शर्मीला एक्ट कर रही थी लेकिन उनकी आँखों में एक अलग चमक थी जैसे उन्हें ये सब सुन्ना भी पसंद आ रहा था. मैं खिड़की के पीछे खड़ा हर एक बात सुन रहा था. मेरा दिमाग कहता था की भाग जा. लेकिन मेरा दिल चाहता था की और देखु और समझू की आगे क्या होने वाला था. मम्मी ने थोड़ा नखरे वाले लेकिन नॉटी अंदाज़ में कहा “अब बस भी कीजिये कितनी दारु पिएंगे आप लोग? आप लोगों का हैंगओवर भी तो हमें ही संभालना पड़ेगा न.” उनका डायलाग सुन कर सब अंकल एक-दम ज़ोरदार हंसी में फूट पड़े.
अनिल अंकल मम्मी की तरफ देखते हुए बोले “अरे भाभी जी आप संभाल लो तो फिर तो हम चाहे जितना मर्ज़ी पिए. हमें तो कोई टेंशन ही नहीं रहेगी.” उनकी बात में एक-डबल मीनिंग था और मम्मी ने शरमाते हुए पल्लू से मुँह छुपा लिया. तभी राजेश अंकल चाची की तरफ झुक कर बोले “वैसे भाभी आप तो सिर्फ पेग ही नहीं आदमी का दिल भी बना देती हो. आपके हाथ का पेग पी कर लगता है जैसे शराब के साथ थोड़ा प्यार भी मिल रहा हो.” चाची ने उनकी बात पे हलकी सी सुलझी हुई हंसी छोड़ी और उनका गिलास दोबारा भर दिया. उनकी ऊँगली राजेश अंकल के हाथ को बस हलकी सी टच कर गयी और दोनों की आँखों ने एक-दुसरे को समझने वाला इशारा कर लिया. Mummy aur chachi ka raaz 2
माहौल अब पूरे शराबी–मस्ती से आगे बढ़ कर थोड़ा इंटिमेट लगने लगा था. सब अंकल की आँखें मम्मी और चाची के हॉट फिगर पर घूम रही थी. सारी के पल्लू और चूड़ियां अब उनके बहु वाले रूप के साथ एक छुपा हुआ अट्रैक्शन भी दिखने लगी थी. मैंने खिड़की से देखा मम्मी अपना पेग उठा कर सीधा लिप्स से सिप कर रही थी. उनकी लिपस्टिक का निशाँन गिलास पर लग गया था जिसे देख कर अनिल अंकल ने बोला “बस अब तो मेरा मन कर रहा है उसी जगह से पी लू जहाँ आपके होंठो का निशाँन है.”
मम्मी ने आँखों से उन्हें घूर कर देखा लेकिन उनकी आँखों में भी एक मस्ती चमक रही थी. मम्मी ने अब अनिल अंकल का हाथ पकड़ कर बैडरूम की तरफ कदम बढ़ाये पूरे हॉल में एक-दम सन्नाटा सा छ गया. सिर्फ अंकल लोग एक-दुसरे की तरफ स्मिर्क करते हुए देखने लगे. चाची ने पीछे से मुस्कुराते हुए बोला “एन्जॉय करना भाभी.” उनकी आवाज़ में जो छेड़खानी और ताना था उसने मेरी सांसें तेज़ कर दी. मेरा दिमाग अभी भी शॉक में था की मम्मी ऐसे ओपनली अनिल अंकल के साथ बैडरूम जा रही है. Mummy aur chachi ka raaz 2
फिर महेश अंकल ने चाची की तरफ देख कर बोल्ड अंदाज़ में कहा “तो क्या… अब हम भी चले जानेमन?” और उन्होंने अपना हाथ आगे बढ़ाया. चाची पहले थोड़ा नखरे दिखाते हुए मुस्कुरायी. फिर सिन्दूर से सजे हुए सर के पल्लू को थोड़ा संभालती हुई उनका हाथ पकड़ लिया. फिर बिना कुछ कहे वो भी बैडरूम की तरफ चली गयी. इसके आगे क्या हुआ वो अगले पार्ट में पाता चलेगा.
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