Maa ko bhikhari ki rakhail banaya:- हाय दोस्तों मेरा नाम रवि है, मै अपने माँ बाप का एकलौता लड़का हूँ। मेरी एज 19 साल है। मेरे पापा की एज 46 साल है. और एक गली में उनकी एक किराने की दुकान है.. जिसमे वो रिटेल और होलसेल दोनों करते है. मेरे पापा ज्यादा पढ़े लिखे नहीं है. इसलिए हिसाब किताब में माँ उनकी मदद कर देती है.. क्युकी माँ ने BA तक पढ़ाई की है जबलपुर के पास होने से हमे लगता ही नहीं के हम गाँव में रहते है क्युकी शहर जैसी सारी सुविधा है। बीए तक कॉलेज भी है जिसमे शादी के बाद माँ ने पढ़ाई करी। अब आते है स्टोरी की हेरोइन की तरफ.
मेरी माँ सिमरन. इनकी एज है 44। मेरी माँ का कितना गदराया बदन है और सजने सवरने का तो क्या ही कहने. वैसे मेरे मन में माँ के लिए कुछ नहीं था. जब तक एक इंसिडेंट नहीं हुआ. जिसने मेरी नज़र बदल दी। जैसा की अपन जानते है गाँव में लोग जल्दी सो जाते है. वैसे ही आज से 1 महीने पहले की बात है. रात के 9:30 हो रहे थे. रात को पापा जब भी खाना खाने आते तो माँ ही दुकान संभालती. और उसी टाइम वो दिन का हिसाब भी कर लेती. और दुकान बंद करके आ जाती. वैसे तो 9 तक ही आ जाती. लेकिन उस रात जैसा मैंने कहा की 9:30 हो गए थे. पापा ने कहा देखके आ माँ को इतनी देर क्यों हो गयी. मैं भी घर से निकल गया. और जैसे ही मैं गली से मुड़ा मुझे किसी के लड़ने की आवाज आ रही थी. और जब मैंने देखा तो एक औरत माँ के साथ लड़ रही थी. और दो उसके साथ खड़ी थी. देखने में तीनो ही लोअर क्लास सी लग रही थी.
औरत – इतना महंगा कोई देता है क्या.
माँ – देखिये ये इतने का ही है. अगर आपको महंगा लग रहा है तो कहीं और दुकान से ले लीजिये.
औरत – दूसरी दुकान से ही लुंगी. तेरी जैसे से नहीं.
माँ – मेरी जैसी से क्या मतलब है आपका.
औरत – साली तेरी जैसी जो गदराया बदन है तेरा सब पता है कहा से आया. महंगे सामान के साथ क्या क्या देती है.
माँ – देखिये तमीज़ से बात करिये. नहीं लेना है तो मत लीजिये. बकबास मत करिये.
माँ कभी भी ग्राहक से बहस या ऊँची आवाज में बात नहीं करती थी. क्युकी पापा ने कहा था ग्राहक से आराम से बात करनी चाहिए. तभी दुकान चलती है. इसीलिए माँ उनसे अभी भी तमीज़ से बात कर रही थी. लेकिन वो औरत अब कुछ ज्यादा ही आगे बढ़ने लगी थी. Maa ko bhikhari ki rakhail banaya
औरत – हां सब पता है, देख चूचियां कितनी बड़ी हो रही है पता नहीं किस किस से दबवाती होगी.
माँ – देखिये मैं आपसे तमीज़ से बात कर रही हूँ न. तो आप भी..
दूसरी औरत – तमीज़ तू डाल तेरी मोटी गांड में.. समझी रंडी..
माँ – देखिये आप ज्यादा बोल रही है.. मैं सरपंच को बता दूंगी. फिर जानती है न आपका क्या होगा.
दूसरी औरत – साली छिनाल की तो. तीनो औरतें काउंटर उठाके दुकान के अंदर चली गयी.. दूसरी औरत – लानिया(तीसरी औरत) इसके दोनों हाथ पकड़. लानिया ने माँ के दोनों हाथ पीछे से पकड़ लिए..माँ (घबराते हुए) – ये ये आप क्या.. दूसरी औरत – साली सरपंच से बोलेगी.. ये बोलने. (चटाक). ये भी बोलना (चटाक)। मैं (गुस्से में) – इनकी इतनी हिम्मत. मैं जैसे ही बाहर को निकला, तो मेरा ध्यान मेरे हाथ पे गया जो जीन्स के उपरसे ही लंड को मसल रहा थे.. फिर न जाने क्यों मैं दुबारा चुप गया. पहली औरत – साली हमसे जुबान लड़ाएगी – चटाक) ये ले (चटाक) चारों थप्पड़ इतनी तेज़ थे की गली गूंज उठी. लेकिन उस वक़्त सुनने के लिए कोई नहीं था. और माँ की आँखों से आँसू तक झलक पड़े. माँ(रोते हुए) – रुको मारो मत. तुम्हारे हाथ जोड़ती हूँ. तीसरी औरत – साली रंडी अब आई ना लाइन पे. इधर आ मुझे भी तो जरा हाथ साफ कर लेने दे. (चटाक) पहली औरत – हम ये सब सामान लेके जा रही हैं. (माँ के लेफ्ट गाल पे हाथ फिराते हुए) कीमत कम तो नहीं है.. हूँ तो ये ले(चटाक). फिर वो तीनो सारा सामान लेके चली गयी. Maa ko bhikhari ki rakhail banaya
और मैंने 5 मिनट इंतज़ार किया। फिर मै दुकान पर गया।
मै – माँ आपके गाल लाल क्यों हो रहे है.. और काजल भी बिखर गया है..
माँ – बेटा वो गर्मी बोहोत है न. चल देर मत कर दुकान बंद कर.
मुझे यकीन नहीं हुआ. माँ ने मुझसे कुछ नहीं कहा. मुझे लगा घर जाके या कल जरूर बतायेंगी. 2 दिन निकलने के बाद भी उन्होंने कुछ नहीं कहा. मुझे समझ नहीं आया क्यों. और तबसे ही मेरा नजरियां बदल गया.. ऐसे ही 2 हफ्ते निकल गए. रह रह के मेरे दिमाग से वो सब जा ही नहीं रहा था. कैसे माँ ने वो सब गालियां. गालियां तो छोड़ो. कैसे उन 2 कौड़ी की औरतों से थप्पड़ तक खा लिए. और कुछ बोला भी नहीं. अब मुझे पता नहीं क्या होने लगा. जब जब मैं वो सीन इमेजिन करता. मेरा लंड एकदम टाइट हो जाता. फिर एक दिन ऐसा हुआ की मैं माँ को एक औरत की तरह देखने लगा.
1 महीने बाद रात 10 बजे. एक भद्दा भिखारी – मालकिन कुछ खाने को दे दो. मैंने और मेरे पोते ने 3 दिन से कुछ नहीं खाया. कुछ दे दो भगवान आपका भला करेगा.
माँ – बाबा मेरे पास खाना नहीं है. चाहो तो ये पैसे ले लो.
भद्दा भिखारी – पैसे नहीं चाहिए मालकिन इतनी रात को कुछ नहीं मिलेगा. कुछ आप ही खाने को दे दो।
माँ – मैं यहाँ कैसे आपको कुछ दे दूँ. है ही नहीं.
भद्दा भिखारी – मालकिन मैं तो झेल लूंगा. लेकिन मेरा पोता उसकी तबीयत ख़राब से बदतर हो रही है. मालकिन दया करो.
मैं आपको बता दूँ. हमारी किराने की दुकान के साथ ही पीछे की तरफ गोडाउन था. जिसमे मैं कुछ काम कर रहा था.
माँ – रवि, बेटा सुनो.
मैं – हां माँ अपने बुलाया.
माँ – हां बेटा घर जाके जरा इन बाबा के लिए कुछ सब्जी और 8-10 रोटी लाओ.
जब मैंने पहली बार उस बाबा को देखा तो मुझे घिन आने लगी. फटी हुई धोती, उपर से पूरा नंगा और जिस्म तो पूछो ही मत कोयले जैसा काला, सर से पूरा गाँजा, बस दाढ़ी थोड़ी वह भी सफ़ेद और इतनी भयानक बदबू के पूछो ही मत. Maa ko bhikhari ki rakhail banaya
माँ – उन्हें क्या घूर रहा है जा.
मैं – हां माँ.
मैंने उसे सब्जी और रोटी लाके दी. फिर वो और उसका पोता ऐसे खाने लगे. जैसे 3 दिन नहीं, सालों से कुछ खाने को न मिला हो. लेकिन मैंने एक बात नोटिस की. जैसे जैसे उस भिखारी का पेट भरने लगा, वैसे वैसे वो मेरी माँ को घूरने लगा. कभी उनके बूब्स, जब घूमती तो उनकी गांड. ऊपर से नीचे, माँ को उसकी ऑंखें स्कैन करने लगी. और जब मैंने उसकी धोती पे ध्यान दिया तो मैं दंग रह गया. इतना बड़ा उभार, जिसे देखके साफ़ समझ मे आ रहा था की उसने धोती के अंदर कुछ नहीं पहना और पता नहीं क्यों, ये देखके मेरा लंड पूरा टाइट हो गया.
मैं – ये क्या हो रहा है. उस भिखारी को मेरी माँ को घूरते हुए देखके मुझे ऐसा फील क्यों हो रहा है.
ऐसे ही 5 दिन बाद वो फिर आया. और वही सब हुआ वो जब तक खाता माँ को घूरता रहता. ऐसे ही 5 दिन और निकल गए. इस बार भी वही हुआ. और अब मैं यही सब सोचने लगा. मेरे दिमाग में गंदे गंदे ख्याल आने लगे. और एक रात मैंने बोहोत भयानक सपना देखा.. सपने में वही काला बदबूदार भिखारी मेरी माँ को उन्ही के बैडरूम के बेड पे उन्हें चोद रहा है और वो भी गलियां दे देके.
भिखारी – आह्ह्ह मेरी सिमरन रांड. क्या चूत है तेरी..
माँ – आह बाबा आराम से बहुत दर्द हो रहा है।
भिखारी – क्या दर्द? दर्द में ही तो मजा ही है और भिखारी ने माँ के चेहरे पे थूक दिया.
तभी झटके से मेरी नींद टूट गयी. और मैं उठ गया.. मैं – ये क्या था? कैसा सपना था. मुझे अपने नीचे कुछ गीला गीला महसूस हुआ. और जब मैंने चड्ढी उतारके देखि तो मैं सपने में ही झड़ गया था. मैं – ये कैसे हो सकता है? माँ को एक भद्दे भिखारी से चुदता देख मैं झड़ गया. अब मैं उस बाबा का इंतज़ार करने लगा और दो हफ्ते निकल गए. लेकिन वो बाबा नहीं आया. तो मैंने खुद उसे ढूढ़ने की ठानी. लेकिन पूरा गाँव छान मारने के बाद भी वो नहीं मिला. ऐसे ही 1 महीना निकल गया और अचानक एक रात. वो फिर उसके पोते को लेके आया. खाके जैसे ही जाने लगा. Maa ko bhikhari ki rakhail banaya
मैं – बाबा सुनो.. भिखारी – क्या है बेटा.
मैं – आपको तो एक महीने से ज्यादा हो गया. कहीं गए थे?
भिखारी – हां बेटा दूसरे गाँव गया था. क्या करूँ एक ही गाँव से गुजारा नहीं होता.
मैं – वो तो ठीक है, लेकिन एक बात बताओ. आप मेरी माँ को ऐसे घूरके क्यों देखते हो.
मेरी बात सुनके तो भिखारी सटपटा गया.
भिखारी – नहीं बेटा ऐसा कुछ नहीं है.
मैं – झूट मत बोलो. पहले दिन से मैं देख रहा हूँ. और आज भी।
भिखारी – वो, वो बेटा.
मैं – पसंद आ गयी है क्या.. पटाना है?
मेरी बात सुनके तो उसकी ऑंखें फटी की फटी रह गयी.
भिखारी – बेटा ये तुम क्या कह रहे हो.
मैं – बाबा हां या न बोलो.
भिखारी – तुम्हारी कोई चाल तो नहीं है न, मुझे फसाने की.
मैं – मैं आपको क्यों फसाऊँगा.
भिखारी – तो फिर ये सब होगा कैसे?
मैं – वो मुझपे छोड़ दो, आप सिर्फ तो हां या न बोलो.
भिखारी – हाँ।
मै – तो अब जाओ और माँ से बोलो आपको बाथरूम लगी है, बहुत जोर से. लेकिन धोती का नाडा नहीं खुल रहा और कैसे भी माँ से नाडा खुलवाओ.
फिर मैंने भिखारी का नाडा टाइट कस दिया.
भिखारी – मालकिन मालकिन.
माँ – क्या हुआ बाबा.
भिखारी – मालकिन मुझे बोहोत तेज़ मूत लगी है. लेकिन ये नाडा. ये नहीं खुल रहा.
माँ – तो इसमें मैं क्या कर सकती हूँ.
भिखारी – मालकिन हो सके तो खोल दीजिये, मुझसे सहा नहीं जा रहा.
माँ – बाबा ये आप क्या कह रहे है? मैं कैसे खोलूँ.
भिखारी – कृपा करे मालकिन, मेरे पास एक ही धोती है. ख़राब हो जाएगी तो मैं क्या पहनूंगा और उपर से ये दर्द. मुझसे सहा नहीं जा रहा.
माँ – ठीक है बाथरूम में चलिए.
दुकान में कोई नहीं था और बाथरूम पीछे गोडाउन के तरफ थी. मुझे यकीं नहीं हुआ की माँ एक अनजान भिखारी का नाडा खोलने को मान गयी. मान क्या गयी खोलने लगी. करीबन 30 सेकंड हो गए. लेकिन माँ से नाडा नहीं खुला.
भिखारी – क्या हुआ मालकिन.
माँ – बाबा खुल ही नहीं रहा. ऐसा कैसा अपने बांधा है?
भिखारी – मालकिन जल्दी करिए ना, सहा नहीं जा रहा.
माँ – खोल तो रही हूँ.
भिखारी – मालकिन नीचे बैठके खोलिये, तो शायद खुल जाये.
उसके एक बार कहने पे ही माँ नीचे झुकके उसका नाडा खोलने लगी. मैं – मैंने तो ये सब नहीं कहा. साला ये बुड्ढा तो बोहोत तेज़ है. कुछ कोशिश के बाद, माँ ने नाडा खोल ही दिया और जैसे ही नाडा खुला, वैसे ही भिखारी की धोती उसके पैरों में जा गिरी. और उसका लंड माँ के चेहरे से टकरा गया.
आगे क्या हुआ, पढ़िये अगले पार्ट मे
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