साली बनी पूरी घरवाली – 2

Sali ki chudai kahani ke पिछले पार्ट मे आपने पढ़ा कि कैसे हम मियां बीवी उसके मायके मे साली के लैपटाप पर पॉर्न मूवी देखते है। फिर जब मै अगली बार अपने ससुराल गया, तो मेरी साली मुझसे टकरा गयी और चाय उसके ऊपर गिर गयी। तो उसने मेरे सामने ही अपने ऊपर के 2 बटन खोल दिये, मै हैरान हो गया, कि उसने ऐसा क्यू किया। उसके बाद भी जब मै अपनी वाइफ़ को लेकर घर जा रहा था तो वो मुझे अजीब नज़रों से देख रही थी। अब पढ़िये आगे..

Last Part – साली बनी पूरी घरवाली – 1

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खैर नया वीक शुरू, तो काम फिर शुरू और मैं फिर मसरूफ हो जाता है. मैं लंच के बाद ऑफिस में बैठा था, के फ़ोन पर किसी का एसएमएस आया. मैंने एसएमएस पढ़ा तो दिल जैसे ड्रम की तरह धड़कने लगा. मैसेज क्या था पूरा बम “मूवी अच्छी थी साइज बताऊँ तो बिकिनी ले आओगे?”.

नंबर अननोन था, लेकिन ये मैसेज मुझे समझ आ गया था, के कहाँ से आया था। बिकिनी के ट्रेड मार्क के साथ ये ज़ारा ही हो सकती थी. लेकिन ये क्यों इस तरह कर रही थी, मैंने तो कभी उसको कोई ग़लत इंटेंशन से नहीं देखा था. मैं सर पकड़ कर बैठ गया और मैसेज दोबारा पढ़ा. मैसेज का पहला जुमला था “मूवी अच्छी थी”. ज़ारा को मूवी के बारे में किसने बताया, ये क्या हो रहा था? ज़ोया नहीं बता सकती थी ये बात, तो मूवी की बात ज़ारा को कैसे पता चली. jija sali ki chudai ki kahani

खैर मैंने मैसेज डिलीट किया और नंबर अननोन था, तो ब्लॉक नहीं कर सकता था. घर में अगर कोई ऐसा वैसा मैसेज आ जाता और ज़ोया देख लेती, तो सब कुछ ख़तम हो जाता. मैं ऑफिस से निकला, मैं काम नहीं कर पा रहा था सही से. गाडी ड्राइव करना शुरू की, लेकिन मैं इसी गुत्थी को सुलझाने में लगा हुआ था और फिर अचानक सब क्लियर हो गया. मैंने हार्ड ब्रेक मारी, जो शायद मुझे नहीं मारनी चाहिए थी क्योकि रोड काफी बिजी था. लेकिन मेरा लक था के पीछे कोई नहीं आ रहा था. मैंने गाड़ी को साइड पर खड़ा किया और दो तीन गहरी साँसे ली. क्योके अब मुझे सब कुछ समझ आ गया था, के इसमें कसूरवार कौन था.

तो जनाब वो मैं खुद ही था, मूवी का ज़ारा को इस तरह पता चला था, के जिस रात मैंने और ज़ोया ने वो मूवी देखि थी. उस रात डीवीडी राइटर से मूवी नहीं चल रही थी और मैंने वो पूरी मूवी लैपटॉप में कॉपी करदी थी. लेकिन लैपटॉप वापस करते वक़्त, मैं वो मूवी डिलीट करना तो भूल ही गया था और मुझे यक़ीन था के ज़ोया ने ज़ारा से लैपटॉप ये कह कर लिया होगा के “लैपटॉप तुम्हारे साहिर भाई को चाहिए” सो ज़ारा सोच रही होगी, के मैंने ये मूवी शायद जान बूझ कर उसके लैपटॉप में रखी थी.

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मसला समझ आ गया था और मैं काफी रिलैक्स हो गया था. अब मसले का हल निकालना बाक़ी था, मैंने दोबारा गाडी स्टार्ट की और घर की तरफ चल पड़ा. घर पहुंचा, तो देखा के ज़ारा घर आयी हुई है, वो तो कभी भी नहीं आती हमारे घर, पर आज कैसे आ गयी और वो भी अकेली???

ज़ोया मेरे पास आयी और कहा – ज़ारा आयी है दो दिन के लिए, उसका कोई प्रोजेक्ट है और उसकी फ्रेंड हमारे घर से क़रीब रहती है इसलिए वो यहाँ रह कर प्रोजेक्ट पूरा करना चाहती है, भाई छोड़ कर गया है उसको.

मैंने आहिस्ता आवाज़ में और हलकी मुस्कराहट के साथ कहा “अच्छी बात है” और ज़ोया वापस किचन चली गयी, मैंने ऊपर देखा और दिल ही दिल में कहा “या खुदा अभी तो मैं मसला समझा ही हूँ थोड़ा टाइम तो दे के कोई हल निकाल सकूं”.

शायद अल्लाह को अभी कुछ और ही आज़माइश देनी मंज़ूर थी. मैं जूते उतारने लगा और मैं सोच में गुम हो गया, के क्या करू और कैसे ये सब कुछ सँभालु. ज़ारा भी शायद किचन में थी, वो मुझे अभी तक सलाम करने भी नहीं आयी थी और मैं भी चाह रहा था के मेरा उससे कम से कम सामना हो. अभी मै कोई प्लान नहीं बना पाया था, वक़्त भी तो नहीं मिला था. ज़ारा ग़लत कर रही थी, लेकिन शायद उसमे क़सूर मेरा था. क्योकि उसके ख्याल में पहल मैंने की थी और मुझे इस ग़लती को ठीक करना था. ज़ोया ने टेबल पर खाना लगा दिया था और मैं हाथ धो कर जैसे ही निकला तो ज़ारा सामने खड़ी थी और तौलिया उसके हाथ में था। मुझे देख कर वो मुस्कुरायी, लेकिन कुछ कहा नहीं और चली गयी.

ओह मेरे भाई ये क्या ड्रामा चल है आशिकी 3? नहीं नहीं नहीं मेरा मन काफी कुछ सोच रहा था. मैं टेबल पर बैठ गया, मेरे एक तरफ ज़ोया और दूसरी तरफ ज़ारा बैठ गयी. आज खाने में पराठे और आलू चटनी लौकी और काल के मुर्ग़ छोले थे. मुझे तो सब चीज़े ही पसंद थी, लेकिन आज चूंकि मैं अपनी फिटिंग में नहीं था, इसलिए खाने पर ध्यान कम था. ज़ोया अपनी बहन से बाते कर रही थी, दोनों आमने सामने थी और मैं बीच में था तो कभी कभी मैं भी हूँ हाँ कर देता था.

थोड़ी देर बाद ही मैंने महसूस किया, के टेबल के नीचे मेरे पैर पर किसी ने पैर रखा हो। मैंने फ़ौरन ज़ोया की तरफ देखा, लेकिन वो ज़ारा से बातें कर रही थी. फिर मैंने ज़ारा की तरफ देखा तो वो बाते कम और हाँ और हूँ ज्यादा कर रही थी, यानि उसका मन कही और था और वो ज़ाहिर है के मेरे पैर के ऊपर था. मैंने अपना पैर हटा लिया और जल्दी खाना ख़तम करने लगा. ये लड़की तो किसी चीज़ से डर ही नहीं रही थी और जल्दी के चक्कर में मुझे खाते टाइम धसका लगा और खू खू करते आंखों में मेरी आंसू आ गए. ज़ोया ने कहा रुको मैं पानी लाती हूँ वो उठ कर किचन में गयी और जैसे ही किचन के अंदर गयी, ज़ारा तेज़ी से अपनी कुर्सी से उठी और मेरी कुर्सी की तरफ आयी।

मैं नहीं चाह रहा था, के वो ज्यादा क़रीब आये. लेकिन मेरे सोचने से पहले ही वो इतना क़रीब आ गयी के उसका राइट ब्रैस्ट मेरे कंधे को छूने लगा, मैं थोड़ा से अपनी जगह से हट गया और ज़ारा की आँखों में ग़ुस्से से देखा, लेकिन वो खुदा की बंदी पर जाने क्या सवार था, मुझे कोई डर या शर्म नज़र नहीं आ रही थी उसके चेहरे पर। इतने में ज़ोया पानी ले कर आ गयी और ज़ारा उसको देखते ही मेरी कमर पर हलके हलके हाथ मारने लगी. jija sali ki chudai ki kahani

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“जीजू तेज़ क्यों खा रहे है बाजी ने खाना बहुत अच्छा बनाया है, आज हम सब के लिए हो जायेगा” ज़ारा ने मेरे तरफ देख के कहा और ज़ोया की हंसी निकल गयी.

मैं भी हलके से मुस्कुराया लेकिन ज़ारा की तरफ नहीं देखा, दोनों बहने बैठ कर खाना खा रही थी मैंने जल्दी खाना ख़तम किया और दोनों को कहा के मैं बहार से आता हूँ किसी को आइस क्रीम चाहिए और ज़ाहिर है के दोनों ने ही आइस क्रीम के लिए हाँ कर दी. पर मैं एक्चुअली कुछ वक़्त सकून का चाह रहा था, के कुछ प्लान कर सकूं. बाहर आ कर मैं सीधा कैफ़े चला गया, “ब्लू पाई” कैफ़े के नाम से थोड़ी ही दूर है हमारे घर से वाकिंग 10 मिनट की है.

मैं वाक करता और सोचता हुआ वहां पहुंचा और चाय आर्डर की और बैठ कर सोचने लगा के ये सब क्या हो रहा है. चाहता तो ज़ोया तो सब बता देता, लेकिन अभी उसको अपने भाई का ग़म था के वो गंदी मूवी देखता है और अब उसको अपनी बहन का भी ग़म लग जाये अच्छा नहीं लगेगा. इसलिए ज़ोया को बताना फ़िलहाल मुनासिब नहीं लगा. दूसरी तरकीब ज़ारा को समझने की थी, मैंने सोचा के चलो दो दिन की ही बात है इसी दौरान ज़ारा को सब बता दूंगा और शायद मामलात अपनी जगह पर वापस आ जायेगे. ज़ारा अभी बिलकुल यंग है और उसकी मंगनी की बात चल रही है और ऊपर से वो अपने बहनोई से चक्कर चलाने का सोच रही है.

“नो नो नो” मैं ऐसा नहीं होने दे सकता, अगर ज़ारा थोड़ी भी और आगे बढ़ी तो ये किसी के लिए भी अच्छा नहीं होगा. आई लव माय वाइफ इसलिए मुझे किसी और की ज़रुरत भी नहीं थी. सोचा के ज़ारा से फ़ोन पर बात करना ज्यादा मुनासिब रहेगा. ये सोच के मैंने वापिस जाने का इरादा किया, कैफ़े से दो आइस क्रीम कप लिए और वाक करते हुए घर आ गया. मेरे दिल में था के अगर ज़ारा कुछ करती भी है, तो मुझे उसका रिस्पांस नहीं करना और जब फ़ोन पर मैं बात क्लियर कर दूंगा तो होपफ़ुल्ली सब अपनी जगह वापस आ जायेगा .घर आया तो ज़ोया टीवी देख रही थी और ज़ारा शायद दूसरे कमरे में थी. मैंने आइस क्रीम ज़ोया के हाथ में दी और टीवी देखने लगा.

“ज़ोया कल कही शॉपिंग पर ले जाओ ज़ारा को, पहली दफा आयी है हमारे घर” मैंने टीवी देखते हुए ज़ोया को कहा.

“हाँ लेकिन हम सोच रहे थे के परसों जाये, कल मुझे कोमल के घर जाना है उन्होंने बुलाया था पिछले हफ्ते और ज़ारा को भी अपनी दोस्त के घर जाना है कल परसों आप हाफ डे ले सकते है क्या?”

ज़ोया ने तो पूरी दो दिन की प्लानिंग बता दी थी. (कोमल मेरे दोस्त की वाइफ थी और हम फॅमिली फ्रेंड है और तो हमारे घर से कोई बीस मिनट की ड्राइव पर रहते है). मुझे ये अच्छा भी लगा और अगर दिन मसरूफ गुज़रेगा तो किसी और चीज़ के होने का इमकान भी कम होगा. तो मैंने हाफ डे लेने की हामी भर दी. थोड़ी देर टीवी देखा और मैं सोने चला गया ज़ोया अपनी बहन से बाते करने में लग गयी और शायद काफी देर से कमरे में आयी. मेरी आंख खुली लेकिन मैं फिर सो गया.

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सबह होते ही रूटीन शुरू मैंने नहा धो कर नाश्ता किया, आज ज़ारा भी किचन में ज़ोया की हेल्प कर रही थी। नाश्ते के बाद चाय पी रहा था के ज़ारा तैयार हो कर आ गयी.

ज़ारा से मैंने कहा “भाई तुम सुबह सुबह कहाँ चल दी?” अभी ज़ारा जवाब देती ज़ोया की आवाज़ आयी किचन से

“सुनिए ज़ारा को फ्रेंड के घर जाना आप छोड़ देना आप को रस्ते में पड़ेगा”.

मैंने झिझकते हुए कहा “अच्छा ठीक है” मुझे डर था के ज़ारा और मैं अगर अकेले होंगे तो ज़रूर कुछ और भी होगा, जिस तरह ज़ारा मेरी तरफ एप्रोच कर रही थी. मुझे लगता था के कही मेरे और ज़ोया के बेबी से पहले मेरा और ज़ारा का बेबी न आ जाये. लेकिन ये opportunity भी हो सकती थी ज़ारा से बात करने के लिए, मुझे पांच दस मिनट ही तो चाहिए थे ज़ारा से बात करने के लिए. मैंने ज़ारा की तरफ देखा तो वो हलकी मुस्करा रही थी, यानि जैसा शायद वो चाहती थी वही हो रहा था. लेकिन मैं भी अब नार्मल फील कर रहा था के जब मैं ज़ारा को सब बता दूंगा, तो चीज़े सब बेहतर हो जाएगी और ज़ारा की अकल खुद-बी-खुद ठिकाने आ जाएगी.

ज़ोया को खुदहाफिज़ कह के मैं बहार निकला और ज़ारा को आवाज़ दी के मैं गाडी में हूँ आ जाओ. थोड़ी देर में ज़ारा आ कर बैठ गयी

“हाँ भाई तो कहाँ जाना है आप को?” मैंने गाडी स्टार्ट करते हुए ज़ारा से पुछा.

आप चलो मैं बता दूँगी, ज़ारा ने हलके से जवाब दिया वो काफी रिलैक्स थी.

मैंने गाडी निकाली और मैं रोड पर आ गया और ऑफिस की तरफ ड्राइव शुरू की, मैं जरा धीरे चला रहा था ताकि ज़ारा को रास्ता पहचानने में मुश्किल न हो. पर थोड़ी देर ड्राइव के बाद भी उसने कुछ नहीं कहा के कहाँ जाना है तो मैंने दोबारा पूछा, “ज़ारा तुम्हे रास्ता याद है न?”

जी याद है! ज़ारा ने इतने वसूक़ से कहा के मैंने सोचा के इसको वाक़ई पता है कहाँ जाना है और मैं खामोश हो कर ड्राइव करने लगा.

आप को बिकिनी पसंद है? अचानक ज़ारा की आवाज़ आयी और मेरे हाथ थोड़ी देर के लिए कांप गए. लेकिन मैंने अपने आपको काबू किया और तेज़ी से सोचने लगा के क्या रिप्लाई करना चाहिये

“देखो ज़ारा! मैंने उसकी तरफ अपना चेहरा किया और बात शुरू करने लगा था, लेकिन उसकी अदा देख कर हैरान रह गया. उसने अपना उल्टा हाथ सर पर रखा था जो बालों से होता हुआ नीचे की तरफ हलके हलके आ रहा था और फिर वो हाथ नीचे आते हुए ब्रैस्ट के ऊपर आकर रुक गया, मेरी नज़र अब उसकी आंखों से हाथ के उसके हाथ पर चली गयी और वो भी मेरी नज़रों से खेल रही थी. जैसे ही मैंने उसके हाथ की तरफ देख तो उसने अपने ब्रैस्ट को हाथ से हलके से दबाया. मेरी नज़र फ़ौरन उसकी आंखों की तरफ गयी तो उसने लेफ्ट आंख मार दी.

ये देख के तो मेरा दिमाग घूम गया ये फर्स्ट ईयर की लड़की मुझे टीन अगर समझ रही थी. फेरारी की रफ़्तार से भाग रही थी “मुझे आप से बात करनी है” इससे पहले के मैं ये बात बोलता. ज़ारा ने खुद ही मुझे कह दिया

“और मुझे भी तुमसे बात करनी है” मैंने भी सख्त लहजे में कहा

“किसी होटल ले चलो?” ज़ारा का मश्वरा मुझे आग लगा गया.

तुम्हें अकल है ज़रा भी के तुम क्या कर रही हो? मैं तुम्हारे साथ कोई रिश्ता नहीं बना सकता? तुम्हारी मंगनी होने वाली है और मैं अपनी वाइफ से खुश हूँ मैंने एक साँस में ही सब कह दिया.

आप होटल चलिए मुझे बैठ के कुछ बात करनी है ज़ारा ने इसरार किया शायद उसने मेरी बात का कोई असर नहीं लिया था.

मै तुम्हारे साथ होटल नहीं जा सकता मैंने साफ़ साफ़ लहजे में उसको बता दिया.

आप चलिए मैं सच में बात करना चाहती हूँ घर पर ये बात नहीं कर सकती वो इसरार कर रही थी.

तुम्हारा दिमाग़ ख़राब है अगर किसी को पता चला के हम लोग होटल गए थे, तो जानती हो क्या होगा? मैंने उसको समझाते हुए कहा.

कुछ नहीं होगा आप चलिए वरना ये सिलसिला ऐसे ही चलता रहेगा। ज़ारा ने काफी मज़बूत लहजे में कहा.

ये लड़की तो मुझसे भी तीन चार साल बड़ी लग रही थी, मेरी समझ नहीं आ रहा था के क्या करू. मैं ड्राइव करते हुए शहर से बहार एक होटल में आ गया. वहाँ एक कमरा लिया और ज़ारा को लेकर सीधा कमरे में आ गया। ज़ारा कमरे में आ कर रिलैक्स होने लगी और मैंने ऑफिस फ़ोन किया और दो दिन की छुट्टी बुक करवा ली। मैं ये मामला अब खत्म करना चाहता था. फ़ोन रख कर मैं जैसे ही पलटा ज़ारा बिलकुल मेरे पीछे खड़ी थी और अभी मैं कुछ समझ पाता के उसने अपना हाथ मेरी दोनों टांगों के बीच में डाला और मेरी बॉल्स को दबोच लिया, जिससे मेरी चीख निकली क्योकि काफी ज़ोर के साथ उसने मेरी बॉल्स दबायी हुई थी.

मैं इस हमले से बोखला गया और दर्द की शिद्दत से मुंह से टूटे फूटे अल्फाज़ निकलने लगे थे “ज़ारा यी यी तू आ आह अअअअअ ये क्या आए आए ये क्या कर रही हो अअअअअअ आ आ” बड़ी मुश्किल से मैंने जुमला पूरा किया.

मैं खड़ा नहीं रह सकता था दर्द बढ़ रहा था, मेरा चेहरा लाल होने लगा था, लेकिन ज़ारा मेरी बॉल्स को नहीं छोड़ रही थी वो मुझे बोलने नहीं दे रही जैसे ही कुछ बोलने की कोशिश करता था वो और ज़ोर से बॉल्स को दबा देती थी. आखिर उसने मुझे इशारा किया बेड पैर बैठने का मैं कोशिश कर के बैठने लगा. पर दर्द बढ़ रहा था, लेकिन ज़ारा बॉल्स को मज़बूती से दबोचे हुए थी. दो मिनट गुज़रे तो मैं दर्द से निढाल होने लगा, तो ज़ारा की आवाज़ आयी “अब हम बात करेंगे और जो मैं कहूं वो बात आप को माननी पड़ेगी”.

मैं जवाब देने की पोजीशन में नहीं था, दर्द की शिद्दत ज्यादा हो गयी थी और मेरे मुंह से सिर्फ “हूँ हूँ निकल रहा था” के अचानक ज़ारा ने बॉल्स को मज़ीद दबा दिया और मेरी आँखें पूरी खुल गयी. “हाँ बोलो” ज़ारा ने कहा।

मैंने ने सख्ती से कहा “हाँ हाँ हाँ प्लीज छोड़ दो” मैं तक़रीबन रोने वाला हो गया था और उसने अचानक अपना हाथ हटा दिया और मेरी बॉल्स तो छोड़ दी मुझे ऐसा सकून मिला के जैसे दो घंटे रनिंग के बाद आराम मिला हो, मेरी सांस फूल रही थी. ज़ारा ने मुझे पानी दिया और मुस्कुराते हुए मेरे सामने बैठ गयी मुझे ग़ुस्सा आ रहा था. वो मेरी इज़्ज़त की धज्जियां उड़ा रही थी मैं इतने ज्यादा ग़ुस्से में था के अगर ये घर में होती तो दो थप्पड़ मारता और घर से निकाल देता. ज़ारा मेरे सामने बैठी हुई थी और मेरी समझ में नहीं आ रहा था के बात कहाँ से शुरू करू.

फिर थोड़ा सबर आया तो मैंने बात शुरू की “ज़ारा ये सब क्या है?”

“आप को अच्छा लगा?” उसने उल्टा मुझ से ही सवाल कर दिया.

क्या? अच्छा लगा तुम्हारा दिमाग़ ख़राब है? तुम अपनी उम्र देखो और हरकते देखो! मैंने ग़ुस्से से जवाब दिया.

लेकिन आप ही को तो ये पसंद है, ज़ारा ने थोड़े सवालिया अंदाज़ में कहा।

“तुम पागल हो क्या? ये तुमने कहा से अंदाज़ा लगाया के मुझे तुम्हारी ये हरकते पसंद आएगी” मैं उसको समझाने लगा. देखो ज़ारा मैं रिलेशनशिप में हूँ और बहोत खुश हूँ. मैं अपनी वाइफ से बहोत ज्यादा खुश हूँ और मैं तुम्हारे साथ कोई रिलेशनशिप नहीं बना सकता।

मैंने बिलकुल साफ़ साफ़ मामला क्लियर कर दिया था और अब मैं सोच रहा था, के वीडियो वाली बात भी मुझे क्लियर कर देनी चाहिए. मगर उससे पहले ही ज़ारा बोल पड़ी –

मैं आपके साथ रिलेशनशिप नहीं बनाना चाहती, मैं सोहैल को चाहती हूँ (सोहैल जिससे ज़ारा की मंगनी होने वाली थी).

ये सुन कर मैं थोड़ा खुश भी हुआ और हैरान भी “तो फिर तुम क्या चाहती हो” मैं अपनी हैरानी में पूछ ही बैठा.

मै आपको बता नहीं सकती, समझा सकती हूँ वो बोली.

देखो मैं यहाँ पर तुम से बात करने आया था, ड्रामा करने नहीं मेरी एक लाइफ, फॅमिली है। तुम अभी टीन एज में हो. कण्ट्रोल करो अपने आप को  मैंने सख्ती से समझाया और अपना मुँह दूसरी तरफ कर लिया.

ज़ारा उठी और मेरे पहलु में आ कर बैठ गयी और आराम से बोली “आप ने वादा किया था के मेरी बात मानेगे” जुमले मुकमल होते ही उसने दोबारा मेरे बॉल पकड़ लिए.

इस दफा उसके हाथ में बॉल्स की ग्रिप कुछ ज्यादा ही अच्छी आ गयी थी और उसने इतना प्रेशर डाला के मैं मेरे मन सिर्फ एक बात सोच रहा था, के इस किसी तरह ये मेरी बॉल्स को छोड़ दे.

मै सिर्फ आप के साथ वक़्त गुज़ारना चाहती हूँ और आप को मेरी हर बात माननी पड़ेगी।

वो कह रही थी लेकिन मेरा दिमाग सिर्फ अपनी बॉल्स की तरफ था और मेरे अल्फाज़ नहीं निकल पा रहे थे. च छोड़ छोड़ आह छोड़ दो प्लीज…-

मैं किसी तरह उसको समझा रहा था. ज़ारा का इरादा क्या था पता नहीं लेकिन मेरी हालत उसने ख़राब कर दी थी

“मैं आपको दिखाना चाहती हूँ के मेरी क्या खवाहिश है लेकिन अब मैं आपको छोड़ नहीं सकती थोड़ा दर्द बर्दाश्त करो” ज़ारा कह रही थी और मैं सिर्फ दर्द की कैफियत में सुन सकता था.

अपनी पैंट उतारो  ज़ारा ने ये कहा तो मुझे कुछ होश आया और मैंने ग़ुस्से से कहा “ये क्या कह रही हो?

आ आह आए आए ओह ऊई ज़ारा ने पूरी ज़ोर से बॉल्स को दबा दिया और मैंने कहा “ठी ठीकककक ठीक ठीक है”.

मैं जल्दी जल्दी पैंट उतारने लगा, लेकिन पूरी पैंट नहीं उतार सकता था, क्योकि ज़ारा ने मेरी बॉल्स पैंट के ऊपर से पकड़ी हुई थी. मैंने बेल्ट खोली और पैंट का बटन खुल के पैंट थाई तक नीचे कर दी जिससे मेरा वाइट अंडरवियर नज़र आ रहा था.

ज़ारा की आवाज़ आयी “अपने दोनों हाथ ऊपर करो”

मैंने कराहते हुए अपने हाथ ऊपर उठा दिए. ज़ारा ने मेरी बॉल उलटे हाथ से पकड़ी हुई है उसने अपना सीधा हाथ मेरी अंडरवियर के अंदर डाला और मैंने फील किया के वो मेरे लंड पर नहीं बल्कि बॉल्स की तलाश कर रही थी और फिर उसने पैंट के ऊपर से बॉल्स को छोड़ के फ़ौरन सीधे हाथ से अंडरवियर के अंदर से दोबारा पकड़ लिया.

अब पूरी पैंट उतार दो!

 मैं दर्द की शिद्दत से निढाल होने लगा था, ये लड़की थी या कोई ट्रेंड जासूस औरत. मैं जल्दी में अंडरवियर भी उतारने लगा के उसने मुझे रोक दिया.

मैंने सिर्फ पैंट उतारने के लिए कहा था  और फिर उसने बॉल्स को दबा दिया और मैं फिर ज़ोर ज़ोर से “ऊऊओह्ह आहः उह सीईईई प्लीज” कर रहा था.

मैं अब आपकी बॉल्स को पांच दफा स्लैप करूंगी (थप्पड़) हो सकता है के ज़ोर से लगे और तकलीफ भी होगी बर्दाश्त करियेगा। ज़ारा कह रही थी, लेकिन मेरे समझ में कुछ नहीं आ रहा था. मुझे वैसे ही इतना दर्द हो रहा था, के कुछ और सोच नहीं सकता था और फिर मैंने महसूस क्या के उसने बॉल्स को खेंच कर अपने क़रीब किया है..

स्लैप  आह्ह्ह्ह अह्ह्ह लहहहह प्लीज जाने दो अहह..

स्लैप  अअअअअअअ आहहह ह्ह्ह्हू ओह प्ल्ज़्ज़्ज़्ज़ ज़्ज़्ज़.

स्लैप  अअअअअ ओह आ कक्क नो नो प्ल्ज़्ज़ मत मारो छोड़ दो आह.

स्लैप  aaaaaaaaaaa नो आह नो नं नो नो प्प्लललललज़ प्प्लज़ प्ल्ज़ ननो ननो.

स्लैप  अअअअअअअ आआआआआ अहहहह अह्ह्ह अहहह.

मेरी हालत बेहोशी वाली हो गयी थी, मुझे कुछ भी नहीं महसूस हो रहा था, दर्द की वजह से मैं सेन्स लेस हो गया था, जैसे दुनिया ख़तम होती लग रही थी. मेरी आवाज़ साथ छोड़ रही थी और फिर ज़ारा ने मेरी बॉल्स छोड़ दी और मेरी साँस चढ़ गयी। बिलकुल सांस घोड़े की तरह चल रही थी. इतनी तेज़ और इतनी ज़ोर ज़ोर से के कुछ नहीं बता सकता था. मैं राइट करवट पर लेटा हुआ था और अपना मुंह हाथो के दरमियान छुपा कर दर्द कम होने का इंतज़ार कर रहा था.

मैंने महसूस किया के ज़ारा मेरे राइट तरफ आकर बैठ गयी थी. मैंने सर हलके से ऊपर उठाया, तकलीफ मेरे शक्ल पर थी, ज़ारा मेरे चेहरे पर हाथ फेरने लगी. आगे क्या हुआ पढ़िये अगले पार्ट मे।

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