Jawan Beti ko baap ne choda:- नमस्कार दोस्तों मैं विक्रम अपने जीवन की एक सत्य और न भूलने वाली घटना लेके आया हूँ. उम्मीद करता हूं की आप सभी लोगों को पसंद आएगी और आप सभी लोग मुझे अच्छे से समझेंगे की ये सब कैसे और क्यों हुआ. तो दोस्तों कहानी शुरू करते है.
ये बात 2019 की है. पहले मैं अपनी फैमिली के बारे में बता दू. मेरा नाम विक्रम है और अभी मेरी उम्र 48 साल है. मेरी वाइफ नेहा उसकी उम्र 45 साल है और मेरी बेटी कविता उसकी उम्र 24 साल है. जैसा की मैंने बताया की ये स्टोरी 2019 की है तो आप उसी से हम सब की उम्र का अंदाज़ा लगा सकते है. बात ये लगभग नवम्बर 2019 की है. जब मैं अपनी वाइफ नेहा की चुदाई करता था. तो मुझे एक दिन ऐसा लगा की कोई हमको बालकनी की विंडो से देख रहा था. जैसा की मेरा – फ़र्स्ट फ्लोर पर है और मेरे और बेटी के बैडरूम की बालकनी कॉमन है. तो मुझे समझने मे देर नहीं लगी की उसके सिवाय कौन होगा. मुझे बहुत अजीब लगा और गुस्सा भी बहुत आया. लेकिन मेरे मन में बेचैनी सी होने लगी. मैंने ये बात किसी को नहीं बोली. ऐसा तकरीबन एक महीने तक चला. जब भी मैं अपनी वाइफ के साथ चुदाई करता मुझे विंडो पर लगता की वो थी. तो मैं और खुल के चुदाई करता और मुझे पता नहीं क्यों ये सब अच्छा लगता. मैं ये सोच के की वो देख रही है तो वाइफ की और ज़बरदस्त चुदाई करता. बीवी मेरे को कहती हमेशा क्या खा के आते हो. लेकिन मुझे अब ये कन्फर्म करना था की मेरी बेटी ही वहाँ होती थी या मेरा वहम था.
Baap Beti ki chudai story hindi me
फिर एक दिन घर पर कोई नहीं था. तो मैंने विंडो के ऊपर बालकनी में एक हिडन कैमरा लगवा दिया और उसका कनेक्शन मेरे लैपटॉप और मोबाइल में करा लिया. फिर एक दिन मैंने चुदाई के बाद रिकॉर्डिंग चेक की तो मेरा शक यकीन में बदल गया. मेरी बेटी ही होती थी वहां. मेरा दिमाग हिल गया. मेरी समझ में नहीं आ रहा था की क्या करू? कभी तो एक बाप का गुस्सा आता की देखो मेरी बेटी क्या कर रही थी. और कभी एक मर्द की हवस की मुझे चुदाई करते एक जवान कमसिन लड़की देख रही थी. मैं चुदाई और खुल के करने लगा. ये सब चलता रहा. इस बीच मेरे अंदर के बाप पर हवस भरा मर्द हावी होता जा रहा था. जब घर पर कोई न होता तो मैं उसके रूम में जाके उसके क्लॉथ चेक करता. उसकी ब्रा और पैंटी को सूंघता अपने लंड पर रगड़ता. अब मुझे उसमे एक बेटी नहीं जवान लड़की दिखने लगी जिसे मैं अपने बिस्तर मे रगड़ना चाहता था. मेरे दिल और दिमाग के साथ-साथ मेरे लंड पर भी वो हावी हो चुकी थी. कैसे भी करके मैं उसको पाना चाहता था.
उसकी रिकॉर्डिंग्स में वो हमारी चुदाई देख के अपनी चूत और बूब्स रगड़ती. अब मैं एक ऐसे मौके की तलाश में था की उससे बात कर सकू. मुझे डर भी बहुत लग रहा था लेकिन मेरे डर के ऊपर उसकी जवानी भारी पड़ रही थी. कुछ महीने बाद लगभग मार्च का महिना था तो मेरी वाइफ अपने ऑफिस काम से मुंबई जाने को निकली. वो 8 दिन बाद आने वाली थी. क्यूंकि ऑफिस के काम के बाद वो अपनी माँ से मिल के आने वाली थी जो की मुंबई में ही रहती है. उसकी फ्लाइट इवनिंग की थी. तो मैं और कविता उसको एयरपोर्ट ड्राप करके घर आ गए थे. फिर खाना खाने के बाद मैं अपने रूम में था और मैंने फिर वो रिकॉर्डिंग्स टीवी पर लगायी और उसको आवाज़ दी. बेटी मेरे रूम में आयी.
बेटी: हां पापा बुलाया?
मैं: हां यहाँ आके बैठो (और मैंने उसको बेड पर बिठाया अपने बराबर में). फिर मैंने देर न करते हुए टीवी पर वो रिकॉर्डिंग्स प्ले कर दी.
मैं: ये सब क्या है?
कैमरा की क्लैरिटी इतनी थी की वो क्लियर दिखाई दे रही थी की अंदर झाँक के अपनी चूत को रगड़ रही थी. रिकॉर्डिंग देखते ही उसकी गाड़ फट गयी और वो रोने लगी और कांपने लगी. बस उसके मुँह से एक ही वर्ड निकल रहा था-
बेटी: सॉरी पापा सॉरी पापा.
मैं: ये सब देखती है तू. कब से देख रही है?
बेटी: सॉरी पापा प्लीज माफ़ कर दो.
मैं: सीधे से बता कब से देख रही है?
बेटी: बस एक बार देखा था.
मैं: चुप कर! झूठ बोलती है. 6 महीने से तो मैं देख रहा हूँ तुझे देखते हुए.
वो और ज़ोर से रोने लगी और कांपने लगी. मुझे लगा की कहीं इसकी तबियत खराब न हो जाये. फालतू में कोई लफड़ा हो जायेगा. फिर मैंने उसको पानी दिया. वो रो रही थी तो उसका फेस लाल हो गया था और वो कांप रही थी. मैं उसके जिस्म को निहार रहा रहा. वो नंगी टांगें आज उसने शॉर्ट्स पहन रखा था. उसकी चिकनी टांगें मुझे पागल कर रही थी. उसमे मुझे बेटी नहीं बस एक कमसिन लड़की दिख रही थी जिसे मैं रगड़ना चाहता था. चोदना चाहता था.
मैं: डरो नहीं पानी पियो बेटा.
फिर मैंने उसको पानी पिलाया और उसकी पीठ पर हाथ सहला रहा था.
बेटी: पापा सॉरी मैं ऐसा कभी नहीं करुँगी.
मैं: अच्छा सच बता कब से देख रही थी? बेटी (डरते हुए):
पापा 1 साल से.
मैं: क्या बात करती है! तू इतनी बड़ी हो गयी थी क्या 1 साल पहले की तुझे समझ आ रहा था की क्या कर रहे है हम? वो कुछ न बोली बस शर्माने और डरने की मिली जुली रिएक्शन दे रही थी. मैंने बार-बार पुछा तो बोली-
बेटी: हम्म समझ आता था.
मैं: क्या?
बेटी: की आप लोग सेक्स कर रहे है.
मैं: तुझे किसने बताया ये सब?
वो कुछ न बोली. तो मैंने उसको बोला-
मैं: देख मेरे से खुल के और सच-सच बात कर समझी? मैंने अब तक तेरी माँ को नहीं बोला तू डर मत.
बेटी: पापा वो मेरी फ्रेंड्स बात करती है.
मैं: क्या बात?
बेटी: वही सेक्स की बात.
मैं: तू एक बात सच बताएगी मुझे? वो अब तक कम्फर्टेबल हो गयी थी. उसका रोना बंद हो गया था लेकिन शर्मा रही थी. मैं इसी बीच अपने हाथ से उसकी बैक सहला रहा था.
बेटी: हां पापा पूछो.
मैं: तूने किया है क्या किसी से?
बेटी एक-दम चौंक के: नहीं मैंने नहीं किया. आप ऐसे क्यों पूछ रहे है मुझे शर्म आ रही है पापा.
मैं: देखते हुए नहीं आयी अपनी माँ की चुदाई?
वो चुदाई वर्ड सुन कर एक-दम लाल हो गयी और नीचे ही नज़र करे हुए थी. मेरी बेटी कुछ बोली नहीं.
फिर मैंने कहा: क्या-क्या देखा है तूने अब तक?
बेटी: सब कुछ (और बहुत शर्मा रही थी).
Jawan kamsin beti ki seal baap ne todi
मैं उसकी साइड में बैठा था और अपने एक हाथ से उसके कंधे सहला रहा था. फिर मैंने अपना एक हाथ उसकी जांघ पर रख दिया. मुझसे कण्ट्रोल नहीं हो रहा था. मेरे बगल मे एक कमसिन माल बैठा था कच्ची कली एक-दम.
मैं: क्या सब कुछ देखा ठीक से बोलो न?
बेटी: वही जो आप और माँ कर रहे थे.
मैं: क्या कर रहे थे क्लियर बताओ.
बेटी: मुझे नहीं पता. मुझे शर्म आ रही है आप ऐसे बात न करो.
मैं: अच्छा जब देख के तुम फिंगरिंग करती हो तब शर्म नहीं आती?
बेटी: मैं फिंगर नहीं करती.
मैं: तो क्या करती हो?
बेटी कुछ नहीं बोली बस नीचे देखती रही. वो शर्मा रही थी और उसका चेहरा शर्म से लाल हो रहा था.
मैं: अच्छा शर्मा मत. मैं कुछ नहीं बोल रहा किसी को.
बेटी: पता है मुझे. आपको बोलना होता तो आप बोल चुके होते अब तक माँ को.
मैं: अच्छा एक बात बता.
बेटी: हम्म.
मैं: तुझे देखना अच्छा लगाता है क्या?
बेटी: हम्म.
मैं: और तू फिंगर नहीं करती थी. अपनी चूत रगड़ती थी?
वो चूत वर्ड सुन के चौंक गयी और कुछ न बोली. मैंने दोबारा थोड़ा ज़ोर देके पुछा तो वो बोली-
बेटी: हम्म.
मैं: क्या हम्म ठीक से बता.
बेटी: रब करती थी.
मैं: रब करने में मज़ा आता था क्या?
बेटी: हम्म.
अब मुझे कन्फर्म हो गया था की अब मैं इसके साथ कुछ भी कर सकता था और ये कहीं नहीं बोलने वाली. क्यूंकि जब चूत चुदाई वर्ड्स के साथ अब वो कम्फर्टेबल थी। इस दौरान मैं उसकी जांघ सहला रहा था. लेकिन उसने कोई विरोध भी न किया तो मेरी हिम्मत बढ़ी और मैंने आगे बात करना जारी रखा.
मैं: तुझे क्या अच्छा लगता था?
बेटी: सब कुछ.
मैं: क्या सब कुछ?
बेटी: जो आप लोग करते थे वो.
मैं: मेरा मतलब है चुदाई में क्या अच्छा लगता था?
वो कुछ न बोली तो मैंने फिर पुछा-
मैं: अपनी माँ का नंगा जिस्म अच्छा लगता था क्या?
बेटी: मुझे लेडीज में कोई इंटरेस्ट नहीं है.
मैं: तो मेरा नंगा जिस्म?
वो कुछ नहीं बोली बस शर्माती रही. मैंने दोबारा पुछा तो बोली-
बेटी: हम्म.
फिर मैंने वो वो पूछा जिसका मैं बहुत देर से वेट कर रहा था. और उसको अंदाज़ा भी नहीं था की मैं ऐसा भी बोल सकता था या कर सकता था.
मैं: कभी करने का मन करता है तेरा?
वो एक-दम से चौंक गयी और मेरी तरफ देखने लगी घूर-घूर के. लेकिन हमारा चेहरा इतना करीब था की एक-दुसरे की साँसों का एहसास हो रहा था. तो मैंने उसको दोबारा पुछा-
मैं: मुझे अपना दोस्त समझ और बता मन करता है करने का?
बेटी: दोस्त नहीं मैं आपको पापा ही समझूंगी.
मैं: अच्छा फिर बता तो.
बेटी: हम्म करता है (नीचे नज़र करके धीरे से बोली और फेस लाल हो गया).
इसके बाद जो मैंने आगे बोला वो सुन के तो वो कांप गयी और जो वहां माहौल था उसको वर्ड्स में बयान नहीं किया जा सकता.
मैं: करेगी?
वो मेरी तरफ घूर के देखने लगी. अब उसकी आँखों में एक सवाल था की किसके साथ. तो मैंने वापस से कहा उसको-
मैं: करेगी मेरे साथ?
Jawan Beti ko baap ne choda seal todkar
वो ये बात सुन के घबरा सी गयी और कांपने लगी. लेकिन वो कुछ बोल नहीं पा रही थी बस लम्बी-लम्बी सांसें ले रही थी. मैंने बार-बार उससे वही सवाल पुछा लेकिन उसका कोई जवाब नहीं था.
मैं: क्या हुआ तुझे करना तो था तो क्या मेरे साथ नहीं कर सकती? क्या मैं तुझे पसंद नहीं?
बेटी: ऐसी बात नहीं है.
मैं: तो कैसी बात है?
बेटी: आप पापा हो मेरे और हम ये सब बात नहीं कर सकते.
मैं: और जो तुम अपने पापा-मम्मी की चुदाई 1 साल से देख रही थी तब सही था? अपने पापा का लंड देख के चूत रगड़ती थी तब गलत नहीं था?
वो कुछ नहीं बोल रही थी बस नीचे की तरफ ही देख रही थी. मैंने कई बार बोला लेकिन वो कुछ न बोली. एक बार तो मेरा मन किया की ज़बरदस्ती चोद दू उसको. लेकिन थी तो मेरी बेटी. मेरी हवस मेरे ऊपर हावी होती जा रही थी. मुझे अपने सामने बस एक चुदाई का माल दिख रहा था. मैं उसकी टी-शर्ट से दिखते छोटे-छोटे बूब्स को नोचना चाह रहा था उसको पीना चाह रहा था और उसकी वो नंगी टांगें जो शॉर्ट्स से बाहर थी उसको चाटने के लिए बेकरार हो रहा था. मेरे सामने बैठी हुई वो मुझे चुदाई की खान लग रही थी. उसमे मुझे अब बस एक रंडी दिख रही थी जिसको मैं अपने बिस्तर पर ला सकू. जिसको मैं रगड़ सकू जिसकी जवानी को मैं भोग सकू. उससे मैं बस कुछ ही फासले पर था. लेकिन कैसे आगे बढ़ूँ समझ नहीं आ रहा था. मैं कोई गलती नहीं करना चाहता था ताकि बात न बिगड़ जाये. क्यूंकि एक बार अगर बात बिगड़ी तो ये हसीना लाइफ टाइम के लिए हाथ से निकल जाएगी जिसको मैं लंड पर बिठाना चाह रहा था. वो मेरे लंड से बहुत दूर हो जाएगी.
आगे क्या हुआ? क्या मै अपनी बेटी को चोद पाया? पढ़ना अगले भाग मे
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