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एक हिन्दू पहलवान एक मुस्लिम चुदासी औरत 1

प्यारे साथियो आपके लिए एक अंतरजातीय सेक्स कहानी लाया हूँ Antarvasna Kamukta Hindi sex Indian Sex Hindi Sex Kahani Hindi Sex Stories Antarvasnasex.net भाइयो मेरा मकसद सिर्फ़ मनोरंजन करना और करवाना है किसी की भावनाओं को ठेस पहुँचाना नही आशा करता हूँ आप इस कहानी को सिर्फ़ मनोरंजन की दृष्ट से ही देखेंगे .

ये सच्ची घटना है,मेरी माँ और हमारे मकान मालिक, पप्पू के बीच हुए सेक्स की. मैं पहले अपने माँ, और बाप के साथ कोलकाता में रहता था. मेरा बाप एक राजनितिक पार्टी का कार्यकर्ता था, और माँ स्टेट बॅंक ऑफ इंडिया में काम करती थी. मेरी माँ एक बेहद खूबसूरत पंजाबी औरत थी, उसका कद लगभग 5’5” था, फिगर 37द-31-38 थी.

उसके लंबे बाल थे जो उसकी कमर तक पहुँचते थे, वो गोरे गदराए बदन, सुडोल बाहों और वक्ष की मालकिन थी. सेक्स में मेरी रूचि तब हुई जब मैं 14 साल का था. स्कूल में दोस्त लोग सेक्स की बातें करते और जैसी किताबें पढ़ते.

कुछ दोस्त अपने माँ-बाप के सेक्स की बातें करते, मैं भी अपने माँ-बाप के सेक्स देखने की कोशिश करता, पर मेरे माँ-बाप के बीच सेक्स बहुत ही कम होता था. कभी कभी महीने में एक दो बार वो लोग सेक्स करते, उसमें भी उनका सेक्स कभी 5-7 मिनिट से ज़्यादा नही चलता था.

मेरा एक दोस्त था विजय, वो अक्सर अपने बाप मुकेश और उसकी सेक्रेटरी उर्मिला के सेक्स के किस्से सुनाता. मेरी भी बहुत इच्छा होती अपनी माँ को सेक्स करते देखने की. पर मेरे बाप को सेक्स में कोई रूचि नहीं थी, बात तब की हैं जब में 12 साल का था, माँ की उम्र तब 39 साल थी.

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पार्टी के चक्कर में मेरे बाप का एक लोकल नेता से झगड़ा हो गया और उसकी पहुँच बहुत उपर तक थी. बदला लेने के लिए उसने माँ का ट्रान्स्फर मुर्शीदाबाद के डोंकल इलाक़े में करा दिया. अब माँ के पास और कोई चारा नहीं था, वैसे भी घर उसी की सेलरी से चलता था, इसलिए वो नौकरी भी नहीं छोड़ सकती थी.

बाप ने कोशिश की ट्रान्स्फर रुकवाने की, पर कुछ ना हुआ. फिर उन्होने फ़ैसला किया मैं और मेरी माँ डोंकल चले जाएँगे, क्यूंकी यही एक रास्ता बचा था. डोंकल बांग्लादेश की सीमा से बस 5 किमी दूर था, ये पूरा मोमडन इलाक़ा था, यहाँ की 95% जनसंख्या हिंदू थी, 5% हिंदू थे, जो की सब दलित थे यहाँ माहौल बहुत कन्सर्वेटिव था.

कोलकाता में तो माँ स्लीव्ले ब्लाउस वाली ट्रॅन्स्परेंट साड़ियाँ पहनती थी. यहाँ वो साड़ियाँ नही पहन सकती थी, ऐसे माहौल में साड़ी पहनती तो पूरा बाज़ार पागल हो जाता. इसलिए माँ अब सलवार कमीज़ पहनने लगी, पर उसके टाइट सलवार कमीज़ में भी उसके गदराए बदन को देख के लोग उसको घूरते थे.

यहाँ घर ढूँढने में भी दिक्कत थी, माँ के बॅंक मॅनेजर ने बॅंक के पास ही अज़ीम गंज इलाक़े में एक घर ढूँढ दिया. घर का मालिक एक पहलवान था, उसकी डोंकल में बहुत बड़ी मिठाई की दुकान थी, सभी होटेलों में उसी की दुकान से मिठाई जाता था. उसकी दुकान भी घर के पास ही थी.

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उसका नाम पप्पू था, वो एकदम जैसा दिखता था, उसका कद 6 फुट, बदन हटटा-कॅटा, चौड़ी छाती, थोड़ा काला रंग था. उसने मूछें नहीं रखी थीं, पर वो लंबी दाढ़ी का मालिक था. वो हमेशा पठानी कुर्ता पाजामा या कुर्ता लुंगी पहनता था. कभी कभी सर पे टोपी भी पहन लेता था.आप ये कहानी डॉट नेट पर पढ़ रहे है।

मिठाई की दुकान चलाने के साथ साथ वो पहलवानी भी करता था, और अखाड़े में कुश्ती करता था, इसलिए वो सांड जैसा दिखता था. उसका घर काफ़ी बड़ा था, नीचे वो खुद रहता था, उपर का फ्लोर हमें किराए पर दे दिया. उसने शादी नहीं की थी, उसकी उम्र लगभग 47 साल की थी.

वो लोकल मुनिसिपल काउन्सिल का काउन्सिलर भी था, इसलिए थोड़ी गुंडागर्दी भी करता था, मैने कई बार उसे फोन पे गाली गलोच करते सुना था, पर माँ और मेरे साथ बहुत प्यार से बात करता था. मुझे खिलोने या चॉक्लेट देता, माँ को हसाने की कोशिश करता. इसका एक कारण था, मैने देखा वो माँ को बहुत अजीब नज़र से घूरता था, माँ के बदन और उसकी मटकती गाँड को निहारता.

वो उसको उसी नज़र से देखता जिस नज़र से एक ठरकी आदमी एक खूबसूरत औरत को देखता है. शायद माँ को भी ये बात पता थी, इसलिए वो उससे ज़्यादा बात नहीं करती थी, हालाँकि वो कभी कभी अपनी बातों से माँ को हंसा देता था. उसे शायरी भी आती थी, इसलिए वो उसको गालिब के शेर सुनाता.

कहानी जारी है …..