Bhai bahan sex story अब आगे- अगर आपने इस भाई बहन की सेक्स स्टोरी के पिछले पार्ट नही पढे है तो पहले वो पढ़िये, क्यूंकी आपको मज़ा तभी आएगा जब आप शुरुआत से पढ़ेंगे।
पिछला पार्ट => मुझे अपने भाई से चुदना है – 6
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एक-दोपहर को मैं और भाई छत पे धुले कपडे पसार रहे थे. गीले कपडे झाड़ते-झाड़ते मेरी वाइट टी-शर्ट हलकी सी भीग गयी. इस वजह से मेरे बूब्स और निप्पल्स दिख रहे थे. आरव की नज़र एक-दम से पड़ गयी.
आरव: दीदी आपके निप्पल्स दिख रहे है.
मैं: तो क्या हुआ? कौन सा पहली बार देख रहा है. चल नीचे नहीं तो तेरे अलावा आस-पास वालो की भी नज़र पड़ जाएगी. फिर ये साले अंकल भी मेरा बूब्स चूसने को मांगेंगे.
आरव: अच्छा ऐसा क्या?
मैं: हां जब देखो इनकी नज़र मम्मी के क्लीवेज पर रहती है. अब तेरे प्यार की वजह से मेरे बूब्स भी बड़े होने लगे है. तो इस सालो की नज़र मेरे पे पड़ने लगी है.
आरव: बाप रे मम्मी पर भी?
मैं: और क्या. मम्मी है ही ऐसी माल. उनकी कॉलेज की फोटोज देखि है? आज कॉलेज वाले रूप में होती तो अपनी दीदी की तरफ देखता ही नहीं.
आरव: ऐसा?फिर आरव कुछ सोचने लगा.
आरव: दीदी मैं क्या सोच रहा था मम्मी तो पहले से ही मॉडर्न, छोटे कपडे पहनने का वैसे भी allow है. और आपने कहा की वो आपसे ज़्यादा सेक्सी थी तो उनको बताये क्या?
मैं: मतलब? क्या बताना है?
आरव: यही हमारे बारे में बता दे, तो शायद मान जाये. फिर हम खुल के प्यार कर सकते है.
मैं: जान से मार देंगी मम्मी.
आरव: सही में दीदी? एक बार ट्राई करो न, जब उनको पता चलेगा की हम आलरेडी करते है तो क्या कर सकेगी? आज नहीं तो एक साल बाद मान जाएगी शायद.
मैं भी थोड़ी देर के लिए चुप हो गयी. पता नहीं क्यों लगा की बात में दम तो है. मैं भी छुप-छुप के करने से थक चुकी थी.
मैं: मुझे नहीं लगता इतना आसान है.
आरव: देखो न ट्राई करके.
ये कहते ही उसने मुझे पीछे से पकड़ लिया और एक हाथ नीचे मेरी शॉर्ट्स के अंदर और एक से मेरे लेफ्ट बूब को पकड़ के मसलने लगा. हमारे दोनों ओर कपड़ों की लाइन्स थी तो बाहर से कुछ नहीं दीखता, इसलिए मैंने भी करने दिया.
मैं: किचन के बाद क्या अब छत में भी नंगा करेगा?
आरव: कसम से दीदी! मैंने उस दिन भी बोला था की मैं चाहता हूं आप सारा दिन घर में नंगी घूमो, और मैं जब मर्ज़ी आपको छू सकू. वो भी मम्मी के सामने.
मैं: होता नहीं है क्या? तू टॉवल देने आता है न मम्मी के सामने?
आरव: वो तो नाटक है की मुझे आपको देख के कुछ नहीं होता. मैं आपको देखूंगा भी और खेलूंगा भी. ऐसा कुछ करो न और ये सब मम्मी को पता हो.
मैं: अच्छा मम्मी के सामने सब कुछ करना है? कैसे ज़रा बताइये जनाब? ये आपका ख्वाब कैसे पूरा होगा?
उसने मुझे छोड़ के एक-दम से सामने घुमाया और ज़ोर से जकड लिया. फिर एक-दम मेरे होंठो के सामने आके धीरे से कहा-
आरव: हां दीदी! मुझे आपको मम्मी के सामने प्यार करना है. मैं तो बोलता हूं मम्मी को बता दो. ज़्यादा से ज़्यादा डाँटेगी कुछ दिन बात नहीं करेंगी फिर मान जाएँगी. हम मना लेंगे.
उसकी बातें सुन के मुझे अचानक सब कुछ मुमकिन लगने लगा. ऊपर से उसकी सांसें मेरे होंठो को गरम कर रही थी. बात करते-करते वो पीछे हाथ मेरी शार्ट में घुसा के मेरी गांड दबाने लगा. मैं गरम होने लगी. अचानक वो चुप हो गया और एक-दम से मुझे किश करने लगा. मैं भी देर करते हुए उसका साथ देने लगी. 2 मिनट किश करने के बाद आरव ने मेरे पीछे से हाथ निकाला और नीचे से मेरे टॉप के अंदर हाथ डाल के के लेफ्ट बूब दबाने लगा. मैं पूरी गरम हो चुकी थी. किश तोड़ के मैंने हाथ ऊपर किया और कहा-
मैं: उतार.
आरव ने 2 सेकंड में मेरी टॉप उतार दी और शॉर्ट्स नीचे खींच दिया. मैं पहली बार दिन के उजाले में छत पर नंगी खड़ी थी. मैं भी तुरंत आरव का टी-शर्ट और शार्ट उतार दिया. हम दोनों नंगे वापस किश करने लगे. थोड़ी देर में भाई ने मुझे पीछे घुमा के अपने से चिपका लिया और राइट हाथ को आगे लाके मेरी चूत सहलाने लगा. इधर लेफ्ट हाथ से मुझे घेर के मेरा राइट बूब दबाने लगा. साथ ही मुझे गले पर किश करता. मैं मछली की तरह तड़प रही थी. मैंने भी अपना हाथ पीछे ला कर उसका लंड पकड़ लिया और अपनी गांड में रगड़ने लगी.
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वो धीरे-धीरे चोदने की तरह हल्का-हल्का धक्का मारने लगा. मुझे और भी मज़ा आने लगा. थोड़ी देर में भाई ने मेरी चूत सहलाते हुए अचानक से मेरी चूत में दो ऊँगली डाल दी. मैं एक-दम से सिसकी ले उठी. उसने इंतज़ार ही नहीं किया और मेरी चूत में ऊँगली अंदर-बाहर करने लगा. मेरी सांसें और भी चढ़ने लगी. मैं और पागल होने लगी.
मैं: आह आह आरव आई लव यू मेरे भाई.
वो स्पीड बढाता गया और मैं चीखती रही. उसने एक हाथ से मेरे बूब को नोच रखा था और दुसरे हाथ की दो उँगलियों को मेरी चूत में रेलगाड़ी की तरह अंदर-बाहर कर रहा था. मैं आँखें बंद करके बस चीख रही थी. कुछ देर में मैं झड़ने पे आ गयी.
मैं: आई निकल रहा है आरव…
सुनते ही भाई ने मुझे अचानक से छोड़ दिया. मैं कुछ समझ पाती इससे पहले भाई ने मुझे अपनी और घुमा लिया और नीचे बैठ के मेरी चूत पे टूट पड़ा. वो भूखे शेर की तरह मेरी चूत चाटने-काटने लगा. मैंने भी टांगें फैलाई और उसके सर को पकड़ के चूत में घुसाने लगी.
मैं: आहाह आअह आआस्षुऊ मेरे भाई खा ले भाई खा ले मेरी चूत और चाट और चाट आअह्ह्ह.
फाइनली मेरे पैर कांप उठे और एक-दम से चूत फव्वारा छोडने लगी. आरव बिना हिले मेरी चूत से निकले एक-एक फव्वारे को पीता रहा. 7-8 झटकों के बाद मैं एक-दम कमज़ोर पड़ गयी. मैं आरव के कंधो पर सपोर्ट लेके खड़ी रही. मेरी सांसें पूरी चढ़ी हुई थी. मैं शांत होने का और बदन में थोड़ी ताकत आने का वेट कर रही थी और आरव मेरी चूत को चाट के साफ़ करने में लगा हुआ था. फिर वो उठा और हमने हग किया. अब मेरी बारी थी. मैं नीचे बैठ गयी और भाई खड़ा लंड मुँह में लेके चूसने लगी. थोड़ी देर में वो मेरे मुँह में झड़ गया और एक अच्छी दीदी की तरह मैंने अपने भाई का सारा माल निगल लिया. फिर मैं उठी और उससे कहा-
मैं: आई लव यू भाई. तू मुझे बहुत खुश रखता है.
आरव: आप भी, दीदी एक बात पूछू?
मैं: हां बोल.
आरव: मेरी बीवी बनोगी? पहली बार लाइफ में किसी ने मुझे प्रोपोज़ किया. मैं बहुत खुश हुई.
मैं: अच्छा. तो अभी क्या हु?
आरव: अभी तो गर्लफ्रेंड जैसी हो.
मैं: तो बीवी से क्या फर्क पड़ेगा?
इसके जवाब में जो उसने कहा मैं शॉक और इम्प्रेस दोनों हो गयी.
आरव: दीदी मैं आपको चोदना चाहता हूँ और वो भी पूरे हक़ से जैसे पापा मम्मी को चोदते है.
मैं चुप-चाप खड़ी मुस्कुरा रही थी. मुझे समझ ही नहीं आ रहा था की क्या बोलू. मन तो कर रहा था की अभी लेट जाऊ छत पे और उसे कहु की चोद मुझे. पर पता नहीं क्या मुझे रोक रहा था. Bhai bahan ki chudai
आरव: दीदी? कहाँ खो गयी?
मैं: कुछ नहीं, बस पहली बार किसी ने मुझे प्रोपोज़ किया है.
आरव: तो फिर क्या सोचा?
मैं: पता नहीं भाई. थोड़ा सोचने का टाइम दोगे?
आरव वैसे थोड़ा मायूस हुआ पर फिर भी उसने मेरे गालों को पकड़ के आँखों में देखते हुआ कहा-
आरव: कोई बात नहीं आप सोचो, पर सच बोलता हूं आज तक जो भी अपने मना किया, मैंने दोबारा नहीं पुछा. बस इस टाइम रहा नहीं जाता. पहली बार दोबारा आपसे मांग रहा हूँ मुझे आपको चोदना है. एक बार घुसाने दो.
मैं बस खड़े-खड़े सुने जा रही थी.
मैं: ठीक है मैं सोचूंगी.
ये कहते हुए हमने कपडे पहन लिए और नीचे आ गए. सारा दिन मैं भाई की बातों में खोयी रही. रात को सोते वक्त आरव मेरा बूब्स चूस रहा था. ठीक जैसे एक बच्चे को दूद पिलाते है. ये हमारा रोज़ का था. सोने से पहले आरव बूब्स चूसता था और वैसे ही सो जाता था. उसके सोने के बाद मैं काफी देर तक जागती रही और दो बातें मेरे दिमाग में घूमती रही. एक मम्मी के सामने एन्जॉय करने का और दूसरी और भाई से चुदने का.
दो दिन बाद ही काण्ड हो गया. मैं हमेशा की तरह नहा के टॉवल पहन के रूम में आयी और भाई के सामने ही पैंटी पहन रही थी. मम्मी किसी काम से हमारे रूम में आ गयी. मम्मी की तरफ अचानक से ध्यान जाते ही मेरा एक पैर पैंटी में फंस गयी और मैं लड़खड़ा गयी. इससे मेरा टॉवल खुल के छाती से ऑलमोस्ट उतर गया. मैंने जैसे-तैसे टॉवल को वापस पकड़ लिया.पर ये काफी नहीं था. टॉवल आधे से ज़्यादा गिर चुका था और मेरे हाथ में जो हिस्सा टॉवल का आया उससे सिर्फ मेरा लेफ्ट बूब ढक पाया. बाकी मैं आधी टॉपलेस हो गयी. Brother sister sex
ये देख मम्मी भी घबरा गयी और मुझे पकड़ने के लिए आगे आ गयी. उधर भाई को वैसे बोल रखा था की जब मम्मी सामने हो तो मेरी तरफ न देखे. पर सब कुछ इतना जल्दी हुआ की भाई भी अपनी नज़र मुझसे हटा नहीं पाया. इस बीच में मम्मी ने ये देख लिया की टॉवल गिरते वक्त मेरे भाई ने भी मेरे बूब्स देख लिए. मैं गिरते-गिरते बच गयी. लेकिन मम्मी गुस्से में मुझे अपने कमरे में ले गयी. मैं एक-दम से डर गयी और लगा की अब सब खेल खत्म.
मम्मी अब मेरी ऐसी धुलायी करेगी की मिनी स्कर्ट छोड़ो अब सारा दिन फुल पैंट और फुल टी-शर्ट में रखेगी. फिर पापा को बताएगी. फिर वो अलग गाली देंगे. ये सब सोच मेरे दिमाग में रास्ते भर घूमता रहा. रूम मे पहुँच के मम्मी ने दरवाज़ा लगा दिया. हम दोनों बस चुप खड़े रहे. मम्मी की गुस्से से निकल रही सांसें मुझे सुनाई पड़ रही थी. आगे क्या हुआ अगले पार्ट में जानिये.
Next part => मुझे अपने भाई से चुदना है – 8
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