मुझे अपने भाई से चुदना है – 9

Bhai bahan ki hawas bhari chudai:- सेक्स स्टोरी के पिछले पार्ट में अपने जाना कैसे मैंने यानि रूपाली ने अपने भाई के सामने टॉपलेस होके कपडे बदलने के लिए मम्मी को मनाया. अब मै बिना किसी डर के भाई के सामने ही अपने कपड़े बादल सकती थी। भाई भी इस बात से खुश था और हमने इस खुशी को एंजॉय करने के लिए खूब एक दूसरे को चाटा और चूसा। अब आगे पढ़िए-

पिछला पार्ट => मुझे अपने भाई से चुदना है – 8

Bhai bahan ki hawas bhari chudai

अगले दिन हमने वैसे ही किया जैसा सोचा था. नहाने के दौरान मैंने हमेशा की तरह आरव से टॉवल माँगा. जैसे ही वो देने आया मैं आधी अपने को ढकने के बजाये अपने बूब्स को एक हाथ से ढक के बाहर आ गयी. नीचे सिर्फ पैंटी थी. मैंने देखा मम्मी डाइनिंग टेबल पर बैठी सब्ज़ी काट रही थी. मुझे ऐसा करते देख कुछ पल के लिए मम्मी की आँखें बड़ी हो गयी. फिर मायूसी से सर झुका लिया. हम दोनों मन ही मन खुश होने लगे जैसे की कोई जंग जीती हो. नहा के बाहर आके मै भाई के सामने हमेशा की तरह पहले पैंटी पहनी और फिर टॉवल हटा दिया.

मम्मी गुस्से में मुझे देख रही थी पर कुछ बोल नहीं पा रही थी. आखिर में उठ कर किचन में चली गयी. मैंने इसी मौके का फ़ायदा उठाया और पैंटी वापस उतार के नंगी हो गयी. फिर भाई के ऊपर लेट गयी. भाई ने भी मुझे पकड़ लिया और हम किश करने लगे. उधर भाई ने मेरी गांड को पकड़ लिया और दबाने लगा. इससे मेरी चूत उसके लंड पर दबने लगी और घिसने लगी. मैं भी पूरी गरम हो गयी और गांड को ऐसे हिलाने लगी जैसे उससे चुद रही हूँ थोड़ी देर में भाई ने किश करना छोड़ दिया.

मैं: क्या हुआ छोड़ क्यों दिया? किश कर न मुझे भाई.

फिर आरव ने हलके से कान में कहा: दीदी प्लीज चोदने दो न.

हम दोनों एक-दुसरे को देखने लगे और मैं एक-दम से उठ के चली गयी. आरव बड़ा मायूस हो गया. लेकिन उसे क्या मालूम मेरा प्लान क्या था. उसने सोचा मुझे बुरा लगा पर मैं दरवाज़े की और गयी और दरवाज़ा बंद कर दिया. आरव की आँखों में चमक आने लगी जैसे वो वापस ज़िंदा हो गया हो. दरवाज़ा बंद करते ही मैं बेड पर गयी और आरव के बगल में लेट गयी.

मैं: आरव…

आरव: बोलो दीदी.

मैं: चोद मुझे.

आरव एक-दम से झूम उठा.

आरव: सच में दीदी?

मैं: हां आज जो मर्ज़ी कर मेरे साथ, मैं तैयार हूँ.

ये सुनते ही वो पागल एक-दम कूद के बेड पर खड़ा हो गया और अपनी पैंट टी-शर्ट उतार के नंगा हो गया. मुझे थोड़ी सी घबराहट हो रही थी. पर मेरे मन मे एक ही बात चल रही थी की माँ चुदाने गया डर, आज मैं अपने भाई से चुदूंगी.

आरव: दीदी इसे खड़ा कर दो न अच्छे से.

ये कहते ही भाई मेरे मुँह पर बैठ गया. मैंने मुँह खोल के रख दिया और भाई ने अपना लंड मेरे मुँह में डाल दिया. मुँह में लेते ही मैं अपने भाई का लंड चूसने लगी.

आरव: आह दीदी आज तो इसे ज़बरदस्त खड़ा कर दो. आज तो पूरा घुसाना है एक-दम से खड़ा कर दो.

भाई की बातें सुन के मैं भी गरम होने लगी और उसकी पूरी गांड को एक हाथ से घेर के मुँह के पास और भी ले आई. इससे उसका लंड और भी मुँह के अंदर चला गया. साथ ही मैं दुसरे हाथ से अपनी भीगी हुई चूत सहलाने लगी. वो फिर अपनी कमर को हिला कर लंड को अंदर-बाहर करने लगा.

आरव: आह दीदी और चूसो दीदी और ज़ोर से चूसो आह आअह्ह्ह उहह. 5 मिनट तक चूसने के बाद फाइनली उसने अपना लंड निकाला. उसका लंड मेरे थूक से बिलकुल चमक रहा था. उतरते ही भाई पैरों के पास चला गया. जाते ही उसने मेरी जांघें पकड़ी और दोनों और फैला दी. साथ ही ऊपर उठा दी. मेरी धड़कने बढ़ने लगी. फिर भाई अपने लंड को मेरी चूत के बिलकुल करीब ले आया. जैसे ही उसने अपने लंड को मेरी चूत में टच किया मेरी सिसकियाँ निकल गयी और मैंने ज़ोर से आस-पास के बिस्तर को पकड़ लिया.

फिर वो अपने लंड से मेरी चूत को रगड़ने लगा. मैं गरम होकर पसीने से भीगने लगी. मेरी सांसें और चढ़ गयी. अब बस कभी भी वो पल आ सकता था. रगड़ते हुए जैसे ही मेरी चूत के छेद में भाई का लंड लगा वो अंदर करने लगा.

मैं: आह्ह्ह्ह भाई उफ़!

मैं पूरी मचल गयी और चीख उठी. पहली बार था इसलिए पूरी तरह से अंदर नहीं गया. सिर्फ लंड का टॉप ही अंदर गया. इधर मेरी चूत भी टाइट थी. पर फिर भी थोड़ा सा ही सही भाई का लंड का एक इंच भी घुसने पर ही मुझे लगा आज मेरा सपना पूरा हो गया. भाई ने फिर और अंदर किया. इस बार और भी मेरी चूत को चीरता हुआ अंदर जाने लगा.

मैं: उममम भाई धीरे!

अब मुझे दर्द होने लगा और मेरी आँखों से पानी आने लगा. मैंने आरव के बाज़ुओ को ज़ोर से पकड़ लिया. रोकना चाहती थी पर ये पल खोना नहीं चाहती थी. इसलिए मैं दर्द को सहती रही. भाई लंड को अंदर करता रहा और फाइनली एक ज़ोर के धक्के से मेरे भाई का लंड मेरी चूत को चीरता हुआ अंदर फिट हो गया. मैं एक-दम से चीख उठी.

मैं: आह्ह्ह!

आरव: सॉरी दीदी आपको लगी क्या? निकाल दू?

मैं: नहीं-नहीं ठीक है, पहली बार थोड़ा दर्द होता है, बस कुछ देर रुक जा. मेरी चीख बाहर तक चली गयी.

मम्मी: रूपाली? क्या हुआ चिल्लाई क्यों?

हम दोनों एक पल ले लिए डर गए. फिर मैंने कुछ सोचा.

मैं: नहीं मम्मी कुछ नहीं, छिपकली था चला गया अंदर. ये कह कर हम दोनों मुस्कुराने लगे. मेरा दर्द भी कम हो गया और मम्मी भी कुछ बड़बड़ाते हुए चली गयी. मैंने भाई को इशारा कर दिया की वो आगे बड़े. उसने धीरे-धीरे लंड को बाहर निकाला और वापस अंदर किया. इसी तरह वो अंदर-बाहर बहुत धीरे-धीरे करने लगा. मैं: आहह आरव आई लव यू बाबू. करते रह .भाई ने फिर स्पीड बढ़ाना शुरू किया. मैंने नज़र मारा तो देखा भाई के लंड पर खून दिख रहा था. मैं ये देख के बहुत खुश हुई की मेरी सील मेरे अपने भाई ने तोड़ी. यहाँ आरव स्पीड बढाने लगा और मुझे और भी मज़ा आने लगा.

मैं: आह उउउउउ आआ उउउउउ यस बाबू करो करो और करो दीदी को और प्यार करो.

मेरी बातें सुन कर आरव और गरम होने लगा. धीरे-धीरे मेरी चूत से फ़च फ़च फ़च की आवाज़ आने लगी. फिर वो थोड़ा रुक गया और मेरे ऊपर लेट गया. लेटते ही वो फिर से मुझे चोदने लगा. मेरा दर्द पूरी तरह से जा चुका था. अब बस मज़ा ही आने लगा. मुझे चोदते हुए भाई मुझे किश करने लगा और हाथो से दोनों बूब्स को पकड़ के दबाने नोचने लगा. मैं बता भी नहीं सकती वो पल कितना मज़ेदार था. मेरी तो सील टूटी ही पर मेरा भाई भी आज मर्द बन गया था. मैं भी उसके गांड को पकड़ के अंदर करने लगी ताकि उसका लंड मेरी चूत की और गहरायी तक छुए.

अब भाई मुझे ज़ोर-ज़ोर से चोदने लगा. ठप ठप की आवाज़ के साथ बेड का भी ढब-ढब आवाज़ आने लगी.

आरव: आअह्ह्ह दीदी तुम कमाल ही दीदी. क्या चूत है तुम्हारी एक-दम टाइट मज़ा आ गया दीदी.

मैं: मेरी जान मैंने तेरे लिए ही बचा के रखी थी. मेरी चूत आज से तेरी है.

आरव: दीदी प्लीज मुझे आपको रोज़ चोदना है. दिन-रात शाम-सवेरे हर वक्त चोदना है.

मैं: आज से तू मेरी चूत का मालिक है. जो जी में आये कर. जितना मन करे जहाँ मन करे मुझे चोद. जैसा मज़ा तू मुझे दे रहा है मैं भी यही चाहती हूं की तू सुबह से रात तक मुझे चोदता रहे बस चोदता रहे.

मेरी बातें सुन के आरव झड़ने पे आ गया.

आरव: आआह्ह दीदी मेरा निकल रहा है. मैं रोकना चाहती थी पर मज़े के आगे हार गयी. फिर इससे पहले मैं कुछ बोल पाती आरव का गरम-गरम मलाई का फव्वारा मेरी चूत में गिरने लगा. मैंने भाई को ज़ोर से गले लगा लिया.

मैं: आह्हः आरव. मेरे भाई की मलाई की पिचकारी से निकली एक-एक बूँद से मेरी चूत भर गयी. और इसी के साथ हमारा भाई-बहिन का रिश्ता आज यहीं ख़तम हो गया. भाई बेहाल होकर मेरे ऊपर गिर पड़ा. हम दोनों को सांसें चढ़ी हुई थी. पहली बार आरव भी इतना ज़ोर का झड़ा था. इधर मैं भी पूरी तरह से बेहाल पड़ी थी. मुझे आज ज़िन्दगी का सबसे बड़ा मज़ा मिला था. भाई का माल अंदर जाने के बाद शरीर में एक अजीब सा सुकून था शांति थी. मैं जैसे बादलों में उड़ रही थी. पंखे की हवा मुझे क्लोरोफॉर्म लग रही थी जिससे मैं बेहोश हुई जा रही थी.

कुछ देर बाद जब थोड़ी सांस उत्तरी तो मैंने भाई को प्यार से पुचकारा और वो बगल में उतर कर सो गया. मैंने महसूस किया की मेरी चूत में हलकी सी जलन हो रही थी. शायद भाई के माल की वजह से या फिर सील टूटने की वजह से. मेरे हाथ-पैर दुःख रहे थे. मैंने भाई की और देखा तो वो बड़ा प्यारा सा बच्चे की तरह सो रहा था. उसे देखने से ये बिलकुल भी नहीं लग रहा था की थोड़ी देर पहले ही इसने अपनी ही दीदी को चोद डाला और उसकी चूत को अपने माल से भर दिया.

अब मुझे उसमे अपना भाई नहीं बल्कि अपना पति दिख रहा था. मेरी आँखों में हलके से आंसू आ गए लेकिन ख़ुशी के. भाई का माल अब ढीला हो कर मेरी चूत से टपक रहा था. सोचा था की उठ के चूत साफ़ करके कपडे पहन के सो जाउंगी. पर इतनी थक चुकी थी की सोचा बाद में करुँगी और सो गयी. मेरी नींद खुली तो देखा शाम हो गयी थी. पास ही बैठा मेरा भाई मेरी और देख के मुस्कुराने लगा.

आरव: हाय दी उठ गयी? नींद अच्छी हुई?

जैसे ही मुझे सब याद आया मैं शर्मा गयी. आरव मेरे पास आया और मुझे एक लिप पे किश करके कहा-

आरव: आई लव यू दीदी.

मैं: आई लव यू टू बाबू.

आरव: चलो उठो! भूख लगी है.

मैं: हां बहुत ज़ोर की लगी है.

बेड से पैर बाहर रखा ही था की चूत में दर्द होने लगा और मैं रुक गयी.

आरव: क्या हुआ दीदी. चोट लगी?

मैं (आरव का कान पकड़ते हुए): सब तेरी वजह से हुआ है.

आरव: अरे मैंने क्या किया? आप ही तो बोल रही थी मज़ा आ रहा है.

मैं हसने लगी: कुछ नहीं वो आज पहली बार हुआ न इसलिए थोड़ा दर्द होगा. धीरे-धीरे ठीक हो जायेगा.

आरव: ओह अच्छा ऐसा डराओ मत.

मैं फिर जैसे-तैसे धीरे-धीरे चलते हुए बाथरूम गयी और फिर से नहाया. नहाने के बाद एक-दम फ्रेश लगने लगा और साथ आज सुबह के सेक्स के वजह से रूप भी खिला-खिला लगने लगा. मैं अंदर से बहुत खुश थी. थोड़ी देर बाद मैं मार्किट से प्रेगनेंसी रोकने के लिए आई-पिल टेबलेट्स का पैक लेके आयी. मुझे पता था अब हमेशा इसकी ज़रुरत पड़ेगी. रात में डिनर के बाद हमने फिर से सेक्स किया. और रात करीब 2 बजे मैं टेबलेट्स खा के सो गयी

आगे क्या हुआ पढ़िये अगले पार्टमे

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