Bhai bahan ki chudai सेक्स कहानी के पिछले भाग में आपने जाना, कि कैसे मेरे और आरव के बीच सेक्सुअल रिलेशन बढ़ने लगे थे. भाई ने मेरी चूत में पहली बार अपनी ऊँगली डाल कर मुझे चरम सुख दिया. जिससे खुश हो कर मैंने उसे मेरी चूत में जब कभी मन हो ऊँगली डालने की इजाज़त दे दी. उधर मेरे दिमाग में आईडिया आया. अब आगे-
पिछला पार्ट => मुझे अपने भाई से चुदना है – 5
मैं: चल आज तुझे कुछ सिखाती हु.
आरव: क्या दीदी?
मैं: पहले ये बता तू मेरी चूत के साथ कैसे खेलता है?
आरव ने मेरे पैर फैलाये और चूत चाटने लगा.
मैं: हां अब एक चीज़ कर, आज उल्टा कर, मतलब तुझे नीचे की और बैठना नहीं है. उलटे होकर मेरे पेट पर बैठ जा.
उसने मेरी बात मानी और पेट पर बैठ गया, मेरी और पीठ करके.
मैं: हां अब आगे झुक और चूत पर जा.
उसने वैसे ही किया और वापस चाटने लगा.
आरव: वाह दीदी. ये तो नया और मज़ेदार आईडिया है. अब से ऐसे ही करेगे?
मैं: रुक जा अभी पूरा नहीं बताई.
आरव: इसके आगे क्या?
मैं: अब तो वैसे ही अपनी कमर को मेरी मुँह की और ला.
आरव मेरे से हाइट में छोटा था इसलिए थोड़ा एडजस्ट करने में टाइम लगा. पर वो अपनी कमर को जैसे-तैसे मेरे गले तक ले आया.
मैं: अब कमर उठा और अपना लंड मेरे मुँह में डालने की कोशिश कर.
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उसने ऐसा ही किया. उसने कमर उठायी और उसका कड़क लंड मेरे होंठो के सामने लटकने लगा. जैसा मैंने कहा उसकी हाइट कम थी इसलिए पूरी तरह से नहीं आ रहा था, तो मैंने सर उठा कर मुँह आगे ला दिया. ऐसा करते ही आरव का लंड मेरे मुँह में आ गया.
मैं: अब बस. ऐसे ही अब तू मेरी चूत चाट और एक ही साथ मैं तेरा लंड चूसूंगी.
आरव: वाओ दीदी आप तो कमाल हो.
मैं: इसको बोलते है 69 पोजीशन.
आरव: है सुना था कहीं.
फिर आरव बिलकुल देर न करते हुए मेरी चूत पर टूट पड़ा. वहां मैं भी उसके लंड को चूसने लगी. इस पोजीशन में आरव की जीभ और भी चूत के अंदर तक जा रही थी. मेरे बदन में ज़ोरो की बिजली दौड़ रही थी, पर मेरे मुँह में आरव का लंड होने के कारण आवाज़ बाहर नहीं जा रही थी. फिर मैंने अपनी टांगें फैला दी और ऊपर उठा दी, ताकि आरव का मुँह मेरी चूत के बिलकुल नीचे तक जाये. और ऐसा ही हुआ. टांग उठाते ही आरव का जीभ मेरे छेद में जाने लगा, जिससे मैं और पागल होने लगी. इधर आरव भी अपनी कमर हिलाने लगा, जैसे मुझे चोद रहा हो. मैंने खुद से चूसना कम कर दिया और आरव को अंदर-बाहर करने दिया. उसने तो बता ही दिया था की वो मुझे चोदना चाहता था और मैंने भी उसका पूरा साथ दिया.
नकली ही सही वो मुझे चोद रहा था. हम दोने ही बहुत एन्जॉय कर रहे थे. कुछ देर में आरव काफी ज़ोर-ज़ोर से मेरे मुँह पे उछलने लगा. उसने चूत चाटना छोड़ मेरी दोनों जाँघों को टाइट से पकड़ लिया और ज़ोरो से चोदने लगा. मैं समझ गयी की वो झड़ने वाला था. मैंने भी वापस से उसका लंड चूसने लगी.
आरव: आआह आह आह दीदी दीदीदीइइइइइ आआआह्ह्ह्हह्ह…
फाइनली भाई एक-दम से कमर को उठा लिया और अपने गरम-गरम माल का फव्वारा मेरे मुँह में छोडने लगा. मैंने उसके लंड को मुँह में रखा ही था, साथ में उसके लंड को पकड़ भी लिया और मुठ मारती रही. इससे हर झटके में वो बहुत सारा माल फेंक रहा था और मैं चुप-चाप मेरे मुँह में गिरने दे रही थी. फाइनली 5-6 झटकों बाद आरव रुक गया और मेरे ऊपर गिर पड़ा. मेरा मुँह आधा मेरे भाई के माल से भर गया था. मैं पहली बार लेटे हुए निगल रही थी, इसलिए थोड़ा मुश्किल हो रहा था. पर फिर एक-दम से निगल लिया. काफी मज़ेदार था ये एक्सपीरियंस.
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आरव तो बेहाल भरी सांसें लेता हुआ मेरे पेट पर सोया हुआ था. उसमे ताकत नहीं बची थी. मुझे पता था वो मेरी चूत नहीं चाट पायेगा, इसलिए मैं खुद से अपनी चूत सहला के पानी निकालने लगी. तभी आरव ने मेरा हाथ पकड़ के हटा दिया. वो दोबारा उठा और मेरी चूत में ऊँगली डाल दिया और चाटने लगा. उफ्फ्फ मैं इम्प्रेस हो गयी और ऊँगली डालते ही मचलने भी लगी. आरव मेरी चूत को चाटता रहा और ऊँगली ज़ोर-ज़ोर से अंदर-बाहर करता रहा. इधर मैं पागलों की तरह कभी तकिये को नोच रही थी, कभी अपने बूब्स को दबा रही थी. मेरी सांस चढ़ने लगी और झड़ने के करीब आ गयी.
मैं: आरव मेरा निकलने वाला है.
ये सुनते है आरव ने ऊँगली की स्पीड को बढ़ा दिया और मुँह से मेरी चूत को पूरी तरह से ढक लिया.
मैं: आआह आरूऊऊऊ आआह्ह्ह आअह्ह्ह अह्ह्ह्हह आरूऊऊऊ.
मैं पानी का फव्वारा छोडने लगी. आरव ने एक भी मौका नहीं छोड़ा. उसने अपने मुँह से मेरी चूत को दबा रखा था. मेरी चूत से निकलने वाले, हर एक फव्वारे को अपने मुँह में लेके निगल रहा था. उसके चूसने निगलने में उसके दांत मेरी चूत में घुस रहे थे. इससे मुझे और मज़ा आ रहा था और गज़ब पानी छोड़ रही थी. आखिर मैं भी खाली हो गयी और मेरा कांपता हुआ बदन बेड पर गिर पड़ा. उफ़ ऐसा मज़ा हमने पहली बार लिया था.
हम दोनों एक-दुसरे पर पड़े रहे. मुझे मेरे ऊपर आरव का नंगा गरम बदन का टच बहुत अच्छा लग रहा था. मैं चाहती थी वो ऐसे ही मेरे ऊपर चढ़ा रहे. पर वो उठ गया और पास में सीधे हो कर लेट गया.
आरव: दीदी आज बहुत मज़ा आया.
मैं: हां आरव मुझे भी. मैं जानती तो थी कैसे करते है पर तेरे साथ पहली बार करके बहुत मज़ा आया. मेरे लिए भी नया एक्सपीरियंस था.
आरव: अच्छा है. एक नयी चीज़ सीख ली. अब से तो ऐसे ही होगा.
मैं: अच्छा? कब बोला मैंने की रोज़ करना है?
आरव: वो आपको जो भी पसंद आया है वो हम फिर रोज़ करते है तो ये भी होगा न? नहीं करना है क्या?
मैं (हसने लगी): अरे बुद्धू मज़ाक कर रही हूँ बिलकुल करना है. वरना क्यों करने बोलती? जब मौका मिलेगा हम ये करेंगे और तुझे भी कुछ सूझे तो मुझे बताना. ट्राई करेंगे.
आरव: ओके दीदी.
हमने थोड़ी और बातें की. पर कुछ ही देर में हमें नींद आने लगी. हमारा शरीर इतना थक गया था की फैन की हवा जैसे एक मखमल पंख की तरह हमारे जिस्म को छु रही थी. पता नहीं कब हमें नींद आ गयी और हम नंगे ही सो गए. अगले दिन शाम में करीब 5 बजे मैं कॉलेज से लौटी, तो देखा रूम बंद था. पर लॉक नहीं था. मैं धीरे से अंदर गयी तो आरव अपना लंड निकाल के आँखें बंद करके मुठ मार रहा था. मैं धीरे से अंदर गयी और उसे देखने लगी. उसका लंड अब बड़ा होने लगा था. ये देख मैं गरम होने लगी. खड़े-खड़े मेरी हाथ मेरी चूत पे चले गए.
इतने में हलकी सी आवाज़ हुई और आरव एक-दम से चौंक उठा और लंड को चादर से ढक लिया.
आरव: दीदी… तुमने तो डरा ही दिया. मुझे लगा मम्मी है. दरवाज़ा खुला था?
मैं: हां जी मम्मी आती तो क्या होता? खैर छोड़ कर जो कर रहा था.
आरव: पहले दरवाज़ा बंद कर दो.
मैं: क्यों?
आरव: अरे दीदी मज़ाक मत करो. मम्मी बाहर लिविंग रूम में ही है.
मैं: अच्छा?
फिर मुझे एक शैतानी सूझी. मैंने वहीँ खड़े-खड़े अपनी टी-शर्ट उतार दी. मैं ब्लैक ब्रा और जीन्स पहने खड़ी थी. पर इससे कुछ नहीं हुआ, क्यूंकि ये सब नार्मल था. फिर मैंने जीन्स उतार दी. इससे आरव की आँखें बड़ी होने लगी. इससे पहले वो कुछ बोलता मैंने अपनी ब्रा खोल के बेड पर फेंक दी.
आरव: दीदी ये क्या कर रही हो? मम्मी आ जाएगी.
मैं: अच्छा? उस दिन किचन में मुझे नंगा करते हुए याद नहीं आया मम्मी आ जाएगी?
ये कह कर मैंने पैंटी भी उतार दी और दरवाज़े के सामने एक-दम से नंगी खड़ी रही. मेरी भी गांड फट रही थी. भाई मुझे रोज़ ही नंगा देखता था, पर ऐसा डेरिंग देख के उसने भी चादर हटा के अपना लंड बाहर निकाल लिया और मुठ मारने लगा. इधर मैं भी गरम हो गयी और मैं भी नीचे बैठ गयी और अपनी चूत में ऊँगली करने लगी. हम दोनों एक-दुसरे को देख कर मुठ मार रहे थे, ये जानते हुए की मम्मी लिविंग रूम में ही थी. पर जब चूत में आग लगी हो तो कोई फर्क नहीं पड़ता की पकडे जाओ या नहीं.
हम दोनों हर मिनट अपना मुठ का स्पीड बढ़ाते रहे और फिर मैं एक-दम से झड़ पड़ी. झड़ते वक्त मेरे मुँह से हलकी चीख निकल गयी. मैंने मुँह दबा लिया और पानी छोड़ती रही. नीचे पूरे टाइल पर मेरा पानी फ़ैल गया. मैं जैसे-तैसे उठी और भाई का लंड पकड़ कर हिलाने लगी. कुछ ही देर में वो भी झड़ने पे आ गया और मैं उसके लंड को मुँह में लेके चूसने लगी. भाई साथ ही माल छोडने लगा. मैंने बड़े चाव से चूस-चूस कर एक-एक बूँद अपने मुँह में भर लिया. भाई बेहाल होकर बेड पर गिर पड़ा. यहाँ मेरा मुँह पूरा मेरे भाई के माल से भर गया. मैंने उसे नहीं निगला बल्कि मुँह में भर के घूमाती रही और कपडे पहनने लगी.
ये देख भाई ने पुछा- आरव: अभी तक खायी नहीं?मैंने मुस्कुराते हुए इशारे में न कहा.
आरव: ऐसे ही लेके घूमोगी?
मैंने फिर हां पर इशारा किया और रूम से बाहर चली गयी. मैं काफी देर भाई के माल के साथ जीभ से खेलते रही. फिर एक-दम से निगल लिया. फिर मैं नहाने चली गयी. कुछ दिन हमारा 69 भी आम बात हो गयी. इसके अलावा और भी पोजीशन जैसे कभी-कभी आरव बेड पर खड़ा होकर मेरे मुँह में लंड डाल के आगे पीछे करता. कभी-कभार जब आरव लेटता हो तो मैं उसके मुँह पर बैठ जाती. और आरव बड़े चाव से मेरी चूत खाता. कई दफा हम मम्मी के पीछे भी करते थे. मम्मी किचन में हो या टीवी देख रही हो, तो आरव धीरे से मेरे बूब्स पे हाथ रख का दबाता रहता. मैं भी उसके लंड को छूती.
इसके बाद कुछ नया हुआ. पढ़िए अगले भाग में.
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