Bhai Bahan ki chudai ki hot story के पिछले पार्ट मे आपने पढ़ा कि अब हम भाई बहन पूरी तरह से खुल चुके थे। अब हम एक दूसरे के प्राइवेट पार्ट को चूमने चाटने भी लगे थे। कभी मै भाई का लंड मुंह मे लेकर उसको मज़ा देती तो कभी भाई मेरी चूत को चाटकर मुझे स्वर्ग कि सैर करा देता। बस अब उसका लंड ही मेरी चूत मे जाना बाकी था। अब पढ़िये आगे..
पिछला पार्ट ==> मुझे अपने भाई से चुदना है – 4
Bhai Bahan ki chudai ki hot story

दो हफ्ते हो गए. मेरा आरव के सामने नंगे घूमना. उधर आरव का मुझे कभी भी कहीं भी छूना, ये सब आम बातें हो गयी. कभी-कभी वो यु ही खेल में मेरा टॉप और पैंट उतार कर मुझे नंगा कर देता. कहता था ऐसे ही रहो. मैं भी ख़ुशी से नंगी रहती, जब तक वापस पहनने को न बोले. कभी कहता ‘आपको नंगा देखना है’ तो मैं भी कपडे उतार देती. और वो मुझे देख के मुठ मारता.
मैं ये सब बिलकुल भी माइंड नहीं करती और बस अपना काम करती. झड़ने वाला होता तो वो मुझे बुला लेता और मैं नीचे बैठ जाती. फिर वो मेरे मुँह में सारा माल निकाल देता और मैं मज़े से निगल जाती. उसके लिए मैंने घर पे ब्रा पैंटी पहनना छोड़ दिया. मम्मी ने मुझे एक-दो बार टोका भी. आरव की वजह से मेरे बूब्स बड़े होने लगे थे और निप्पल्स खड़े रहते थे इसलिए बाहर से दिखता था. मिनी स्कर्ट हो तो हवा से कई बार उड़ जाती थी, तो मेरी गांड और चूत दिख जाती थी.
मम्मी कहती थी की भाई की नज़र खराब हो जाएगी. उनको क्या पता था की उनका बेटा अपनी प्यारी दीदी को रोज़ नंगा देखता था. मैंने आरव को समझा दिया था की मुझे टच करने से पहले आस-पास देख ले. कुछ दिनों तक मम्मी परेशान थी क्यूंकि मैं नहीं मानी और टाइट और शार्ट ड्रेसेस पहन के घर में घूमती थी. क्लीवेज दिखाने वाला टॉप डालती थी. कभी मम्मी के सामने भाई से टॉवल लाने को कहती थी और आधा बदन बाहर निकाल के उससे टॉवल लेती थी. हालाकि ये सब हमारा खेल था ये दिखाने के लिए की भाई पर असर नहीं हो रहा था.
क्यूंकि मैंने पहले ही कहा था नोर्मल्ली हमें थोड़ी छोटी मॉडर्न ड्रेसेस पहनने की आज़ादी थी. इसलिए ये परेशानी ज़्यादा दिनों तक नहीं चली. कुछ ही दिनों में भाई की और से कोई रिएक्शन नहीं आने की वजह से मम्मी भी इन सब चीज़ों में नार्मल हो गयी. बिना ब्रा पैंटी के रहने का फ़ायदा ये भी हुआ की नार्मल बातें करते वक़्त भी वो मेरी टी-शर्ट ऊपर करके दोनों बूब्स निकाल लेता और खेलता रहता. कभी मेरे शॉर्ट्स को जाँघों तक नीचे उतार के मेरी चूत सहलाता. मैं भी उसे खेलने देती.
इस बीच कभी गरम हो गया, तो बातें रोक के नीचे आ जाता और भूखे जानवर की तरह चूत चाटने खाने लगता. मैं भी उसे जी भर के चूत का पानी निकाल के पीने देती, दिन में जितनी बार वो चाहे. अब वो इतना एक्सपर्ट हो गया था की मेरी चूत का रस बिलकुल आम-रस के गिलास की तरह गटक जाता. इधर मेरे चूसने की वजह से आरव का लंड भी बड़ा और हार्ड होने लगा था. मैं जब-तब जहाँ अकेला मिले भले ही 2 मिनट के लिए मम्मी नज़रों के सामने से हटती. फिर तुरंत आरव के सामने घुटनो पर बैठ के उसका पायजामा नीचे खींचती. उसके बाद उसका बढ़ता हुआ सख्त लंड मुँह में डाल के चूसने लगती.
ज़्यादातर बस कुछ ही मिनट का टाइम मिलता था, इसलिए थोड़ा चूस के छोड़ देती. पर 3-4 बार अच्छा टाइम मिलने की वजह से उसका माल खा कर ही छोड़ा. सिर्फ मैं ही नहीं कभी आरव को भी ऐसा लगता की मम्मी पापा 5 मिनट के लिए बिजी है तो तुरंत मेरे पास आता. फिर मेरी टॉप उठा के मेरे बूब्स चूसने लगता. कभी मेरे शॉर्ट्स नीचे खिसका के चूत चाटने लगता. और कभी मुझे सर से पकड़ कर नीचे खींच लेता और लंड मेरे मुँह में डाल देता. मैं ख़ुशी से चूस देती.
एक शाम की बात है मम्मी जब मार्किट गयी थी. मैं किचन में मैगी बना रही थी, मेरे और भाई के लिए. तभी भाई पीछे से मुझे जकड लिया और बूब्स दबाने लगा.
मैं: लगता है मम्मी दुसरे कमरे में है.
आरव: कमरे में नहीं बाहर गयी है. कितने दिन बाद मौका मिला.
मैं: साले! सारा दिन में कम से कम 10 बार दूध से लेके चूत सब चूसता है. मम्मी की नज़र हटती नहीं की मुझे नंगा कर देता है और कहता है आज मौका मिला.
आरव: अरे वो तो छोटा मोटा 1-2 मिनट का मौका मिलता है. उससे कहाँ आग बुझती है?
ये कहते हुए वो और ज़ोर से मेरे बूब्स दबाने लगा और मैं गरम होने लगी. मैंने फिर धीरे से उसके कान में कहा-
मैं: अच्छा और रात भर जो खेलता है मेरे बदन के साथ? और बदले में तेरा आइस क्रीम खाती हु? वो?
आरव (मेरे कान में): वो तो है लेकिन उसके लिए रात होने का वेट करना पड़ता है.
कान में फुसफुसाते जाते ही मेरी सांस चढ़ने लगी.
मैं: तो क्या सारा दिन चाहिए?
आरव: हां दीदी! मैं आपको सारा दिन प्यार करना चाहता हु.
मैं: अच्छा? पर उसके लिए तो मुझे सारा दिन नंगे रहना पड़ेगा.
आरव: मैं तो चाहता हूं मेरी प्यारी दीदी सारा दिन नंगी रहे. नंगी ही घर में घूमे, काम करे, खाये पिए, खाना बनाये.
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ये कहते हुए उसने मेरा टॉप ऊपर खींच लिया. मैंने भी साथ देते हुए हाथ ऊपर कर दिए और आरव ने मेरा टॉप उतार कर साइड में फेंक दिया. मैं अब टॉपलेस थी और नीचे बस ब्लैक शार्ट पहना था. फिर आरव ने मुझे अपनी और घुमाया और मुझे किश करने और बूब्स दबाने लगा. मैंने भी पूरा साथ दिया. हम पूरे मदहोश होकर किश कर ही रहे थे की उसने मुझे एक-दम से गोद में उठाया और किचन स्लैब पर बैठा दिया. मैं बहुत इम्प्रेस हुई. ऊपर बिठाते ही आरव मेरे बूब्स पर टूट पड़ा और ज़ोर से मेरा राइट निप्पल चूसने लगा और लेफ्ट वाला नोचने लगा.
मैं: आअह्ह्ह्हह आए आह आरव यस यस आउउउउच , बेबी और कर और चूस सारा दूध पी जा मेरा बाबू.
हज़ारो बार कर चुके थे ये सब हम पर आज कुछ अलग ही मज़ा आ रहा था. मेरी बात सुनते ही उसने राइट निप्पल को दांत से पकड़ा और काटने लगा. मैं उसके बालों को पकड़ के नोचने लगी.
मैं: आआह्ह्ह्ह माआ उउउउउ सीईईईईईईई होऊ मार डाल मुझे सससससस आआआअह्ह्ह्ह.
अगले 5 मिनट तक भाई ने मेरे बूब्स के साथ जी भर के खेला. फिर वो उठा. मैंने देखा तो मेरे बूब्स बिलकुल लाल हो गए थे और निप्पल्स पे दर्द हो रहा था. पर मुझे मज़ा आया. आरव ने फिर मुझे नीचे उतारा और नीचे बैठ गया. मैंने तुरंत पुछा-
मैं: आरव मम्मी?
उसने कुछ नहीं कहा और एक-दम से मेरे शार्ट को कमर से पकड़ कर घुटनो तक उतार दिया. मुझे हलकी सी घबराहट हुई की कहीं मम्मी न घुस आये पर इतनी गरम भी हो चुकी थी की परवाह नहीं थी. आरव के लिए काफी नहीं था. उसने मुझे देखा और मुस्कुराया. मैं समझ गयी की कोई शैतानी सूझी थी पर जब तक जान पाती उसने मेरे शॉर्ट्स को पकड़ कर पूरा नीचे तक उतार दिया. फिर पैरों से बाहर निकाल के कोने में फेंक दिया. मैं किचन में पहली बार नंगी खड़ी थी.
आरव: कैसा लग रहा है दीदी?
मैं: साले तू बहुत शैतान हो गया है.
आरव: बस ऐसे ही देखना है आपको सारा दिन वो भी रोज़.
मैं थोड़ी शर्मा गयी.
मैं: मम्मी आ गयी तो?
आरव: संभाल लेंगे.
पता नहीं क्यों मुझे उसपे पूरा भरोसा हो गया. इसलिए मैं चुप हो गयी और भाई एक-दम से में चूत को चूसने लगा. आरव का मुँह लगते ही मेरे रोंगटे खड़े हो गए और मैंने जांघ और भी फैला दी. आँखें बंद करते हुए लग रहा था की छोटा भाई नहीं बल्कि कोई बड़ा मर्द हो. उसकी हर चुस्की के साथ मेरी सिसकी निकलने लगी.
मैं: आआआहहह उउउउउउ आरव तू तो बड़ा हो गया है आआआह्ह्ह्ह मममममम उउउउउआआआ आआआहहह.
इस बीच अचानक से आरव ने बिना बताये एक ऊँगली मेरी चूत में घुसा दिया. मैं एक-दम से उछल गयी.
मैं: आआह आरव?
उसने एक न सुनी और ऊँगली अंदर डाल के ही वापस चूत चाटने लगा. इस नए कारनामे से मैं बिलकुल पागल होने लगी मचलने लगी. कुछ देर बाद आरव ऊँगली अंदर-बाहर करने लगा और साथ ही चाट रहा था. मैं दुनिया भर की सिसकियाँ ले रही थी.
मैं: ऊई माआ आरव आई लव उउउउ आअह्ह्ह्ह आह्ह्ह्ह आउउउउउउउ. धीरे आरव स्स्स्सस्स्स्स आआआह्ह्ह्ह.
मैं एक-दम से झड़ने पे आ गयी. आरव ने ऊँगली की स्पीड बढ़ा दी. मुझसे और बर्दाश्त न हुआ और मैं गरम पानी का ढेर सारा फव्वारा छोडने लगी. पानी निकलने के बाद भी आरव ज़ोरों से ऊँगली मेरी चूत में अंदर-बाहर करता रहा और मैं उछल-उछल के पानी छोड़ती रही. फाइनली पानी ख़तम हुआ और मेरा पूरा बदन कांपने लगा. मैं कमज़ोर होकर गिरने लगी तो आरव ने खड़े होकर पकड़ लिया. मैं पसीने से तर-बदर हो गयी. मुझमे बिलकुल ताक़त नहीं थी और वही आरव की बाहों में पड़ी रही.
इतने में दरवाज़ा खुलने की आवाज़ आयी. मम्मी आ गयी थी. मैं जैसे-तैसे खड़ी हुई. मेरे पैर अब भी कांप रहे थे. उसी हालत में मैं कपडे ढूंढने लगी. उधर आरव दरवाज़े पर मम्मी को किसी भी तरह रोकने दौड़ा. दरवाज़े पे जाते ही मम्मी भी एक-दम से दरवाज़े पर आ गयी. आरव ने देर न करते हुए दरवाज़ा घेर लिया.
मम्मी: हट सामने से! खाना बनाना है.
आरव: नहीं जाने दूंगा.
मम्मी: पागल है क्या? हट बोली न.
यहाँ मम्मी को पता ही नहीं था की उसकी बेटी नंगी खड़ी थी. मैंने जल्दी से टॉप तो पहन लिया पर कमज़ोरी की वजह से पैर पैंट में डाल नहीं पा रही थी. बार-बार फंस रहा था.
मम्मी: तुझे हुआ क्या है आज? ऐसे पागलों जैसे हरकत क्यों कर रहा है? मुझे लेट हो रहा है. पापा आएंगे तो चिल्लायेंगे.
आरव: आज खाना तुम्हारा बेटा बनाएगा.
मम्मी: क्या? मैगी बनाया है आज तक?
आरव ने तिरछी नज़रों से देखा तो मैं कपडे पहन चुकी थी.
आरव: हां आज ही बनाया है देखो.
वो हट गया और मम्मी अंदर आ गयी और देखा मैं भी थी.
मम्मी: तू क्या कर रही है यहाँ? और इसको क्या हुआ है आज?
मैं आरव की और मुस्कराते हुए देखा और कहा: हां मम्मी आज कुछ ज़्यादा ही शैतानी कर रहा है तुम्हारा बेटा.
हम दोनों एक-दुसरे को देख के मुस्कुराने लगे.
मम्मी: क्या चल रहा है तुम लोग का?
मैं: कुछ नहीं. मैगी मैंने बनाया है.
मम्मी: जानती हूँ एक चम्मच पकड़ने नहीं आता खाना बनाएगा!
हम दोनों अपनी हंसी छुपा के बैडरूम में चले गए.
मैं: बड़ा दिमाग है तेरे में.
आरव: कहा था न भरोसा रखो.
मैं: सही है! चल मैं थोड़ा आराम कर लू, फिर उठ के डिनर करेंगे.
आरव: हां दीदी तुम काफी थक गयी होगी.
मैं: और क्या तूने जो हालत कर दी मेरी आज.
आरव: तो दीदी कैसा लगा?
मैं: बहुत मज़ा आया! वैसे कहाँ से सीखा?
आरव: सेक्स वीडियो, वही पे देखा.
ये कह कर वो थोड़ा चुप हो गया.
मैं: क्या बात है बोल?
ओह मम्मी के आने की वजह से तेरा लंड नहीं चूस पायी! अब किये देती हु.
आरव: अरे दीदी वो नहीं.
मैं: तो?
थोड़ी देर हिचकिचाने के बाद उसने ऐसा कुछ कहा जिसके लिए मैं तैयार शायद नहीं थी.
आरव: वो एक्चुअली वीडियो में भाई ने बहन के साथ सेक्स भी किया था.
मैं उसका इशारा समझ गयी.
मैं: अच्छा समझी! देख आरव सच बात बोलू तो मैं भी करना चाहती हूं तेरे साथ पर पता नहीं क्यों…
आरव: अरे दीदी इट्स ओके! आप रेडी नहीं हो तो कोई बात नहीं, मैं बस अपनी बात बोल रहा था.
मैं: थैंक यू भाई समझने के लिए और हां कुछ भी करना हो तो सीधे बोलना, होगा या नहीं बाद में देखेंगे.
आरव: ठीक है दीदी.
मैं: और सेक्स का पता नहीं पर जो तूने आज किया न वो तू कर सकता है.
आरव: आपकी चूत में ऊँगली डाल सकता हु? सॉरी दीदी जोश में निकल गया.
मैं हसने लगी.
मैं: वाह तू तो गन्दी बातें करना सीख गया! हां भाई तू जब चाहे मेरी चूत में ऊँगली डाल सकता है. डाल के कैसे भी खेल मैं नहीं रोकूंगी. हां पर थोड़ा धीरे.
आरव: ओके दीदी.
मेरे दिमाग में एक आईडिया आया.
मैं: चल आरव आज तुझे एक चीज़ सिखाती हु. मैंने अपने भाई को क्या सिखाया जानिये अगले भाग में.
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