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आज की रात तुम ही मेरे पति हो- Aaj ki raat tum hi mere pati ho

प्रेषक : साहिल ..

हैल्लो दोस्तों.. में साहिल एक बार फिर से आप सभी के सामने हाज़िर हूँ अपनी एक और आप बीती लेकर और में उम्मीद करता हूँ कि आप सभी को मेरी यह स्टोरी भी पिछली स्टोरी की तरह आपको बहुत पसंद आएगी। तो में अब सीधा अपनी स्टोरी पर आता हूँ अब में दिल्ली में एक नौकरी करने लगा था तो वहाँ पर मैंने रूम भी ले लिया था जैसा कि आपको पता है कि में शुरू से ही शर्मीले स्वभाव का हूँ और इसी वजह से में अपने रूम पर भी बस रात को आना खाना खाना और सो जाना और सुबह उठकर फिर से ऑफिस चले जाना.. बस यह ही मेरी दिनचर्या रहती थी। उस घर में तीन रूम थे.. एक रूम में मकान मालिक और उनकी पत्नी रहती थी जो बहुत अधेड़ उम्र की थी.. दूसरे रूम में एक आदमी कोई 48 साल का होगा वो रहता था और तीसरे में में मेरा रूम गली के बिल्कुल सामने था और सामने वाले घर में दो बहुत ही सुंदर सी मेरी हम उम्र लड़कियों को अक्सर में जाते देखता था.. लेकिन वो कौन है में नहीं जानता था और शायद उनकी माँ जिसकी उम्र 36 साल के आस पास थी.. लेकिन उसका शरीर इतना गठीला और भरा पूरा था और अक्सर गली के लड़को से में उसके चर्चे करते सुनता था।

फिर जब कभी भी में रात को छत पर बैठता तो वो बहुत लोगों के दिलो पर छुरियां चलाती हुई चलती थी और जब भी मटक मटक कर चलती और उसके कुल्हे तो क्या बताऊँ दोस्तों क्या कहर थे? फिर एक दिन में रात को ऑफिस से आया तो वो दोनों लड़कियां मेरे पीछे गली में आ रही थी और जब मैंने पीछे मुडकर देखा तो अंधेरी गली में वो एक दूसरे में खोई हुई थी और एक लड़की दूसरी के कभी गले में लटकती तो कभी गाल पर किस कर लेती। तभी मैंने सोचा कि बच्ची होगी कोई बात नहीं.. ल्रेकिन जब में रूम पर आकर गेट बंद करने लगा तो उसने उस लड़की के गालों पर फिर से किस किया और उसी वक्त मैंने उन्हे देखा और उस दूसरी लड़की ने मेरी और देखकर झूट मूठ गुस्सा उस लड़की पर दिखाते हुए बोली कि तू अपनी बदमाशियों से कभी भी बाज नहीं आएगी अजीब सी स्माईल दी और झट से भागकर सामने वाले घर में घुस गई। फिर में खाना खाकर अपने रूम का दरवाजा खोलकर लेपटॉप पर फिल्म देख रहा था.. तभी मुझे सामने वाले घर की छत से लड़कियों की आवाज़ आई और फोन की लाईट दिखाई दी। तो मैंने सोचा कि यह वही लड़की है और मैंने उस पर ट्राई मारने की सोची मैंने अपने फोन की लाईट को ओन ऑफ किया।

तो उधर अंधेरे में से भी ऐसा ही कुछ सिग्नल मिला और फिर मेरी हिम्मत थोड़ी बड गई। मैंने फिर से ऐसा ही किया और वहाँ से दोबारा से जवाब आया मैंने सोचा कि लगता है कि मामला सेट हो जाएगा। ऐसी हरकतों में बहुत वक्त गुजर गया और में सो गया। फिर सुबह उठते ही मुझे उनका ध्यान आया और में जल्दी से उठा और छत की और देखा तो में हैरान हो गया वहाँ पर वो लड़कियां तो नहीं थी.. लेकिन वो हसीन आंटी जरुर थी। तो मैंने सोचा कि यह ऐसे ही खड़ी होगी और फिर में अपने काम में लग गया। मैंने कपड़े उतारे और तोलिया लपेटकर आँगन में घूमने लगा.. कभी ब्रश करता तो कभी नहाने जाता.. लेकिन मैंने बिल्कुल भी गौर नहीं किया कि वो आंटी तब तक वहीं पर खड़ी होकर मुझे घूरती ही रही जब तक कि में तैयार होकर ऑफिस नहीं चला गया.. लेकिन मेरे मन में एक बार भी यह ख्याल नहीं आया कि रात को वहाँ पर वो आंटी भी हो सकती थी? खैर और अब यह रोज की आदत हो गई। में रात को सोता और वही फोन की लाईट दिखती और फिर सुबह वो आंटी खड़ी नज़र आती। मैंने उसके बारे में और पता किया तो पता लगा कि वो पंजाब से है और उसका पति एक कम्पनी में मेनेजर है जो कि अक्सर कम्पनी के कामों के लिए बाहर जाता रहता है और मैंने यह भी सुना कि वो अंकल बहुत चुदक्कड है क्योंकि गली के लड़के कहते है कि जब रात को वो दोनों जब भी कभी सेक्स करते है तो उनकी सिसकियों की आवाज़ बाहर गली तक आती है और आंटी तो थी ही माल.. लेकिन उसका पति जब उसकी इतनी ठुकाई कर देता है तो मेरी दाल कहाँ से गलेगी? फिर में बहुत उदास हो गया.. लेकिन फिर भी दिल नहीं माना तो मैंने फिर से कुछ डोरे डालने की सोची। तो एक दिन सुबह सुबह उठा तो वो मुझे घूर रही थी.. में बाथरूम में नहाने गया और तोलिया लपेट कर बाहर आया.. तभी अचानक से जानबूझ कर मैंने अपना टावल नीचे गिरा दिया और मैंने नीचे जानबूझ कर कुछ भी नहीं पहना था और यह दिखाया कि यह काम गलती से हुआ और किसी ने नहीं देखा होगा.. लेकिन जब उसकी तरफ नज़र मिलाई तो वो हँसी और चली गई.. मेरे तो अब भी कुछ समझ में नहीं आया।

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फिर एक दिन बाद ही एक जनवरी थी और में शाम को ऑफिस से जल्दी आ गया यह सोचकर कि नया साल रूम पर ही कोई ब्लूफिल्म देखकर मनाऊंगा.. लेकिन घर पर आया था और देखा कि वो आंटी हमारे ही आगंन में मेरी मकान मालकिन के साथ बैठी है मैंने उन्हे नमस्ते किया तो मकान मालकिन ने बताया कि आज उनकी शादी की सालगिरह है और उन्हे घर में कुछ सजावट करनी है और सभी सामान तो वो ले आई है.. लेकिन अकेले यह सब करना मुमकिन नहीं होगा क्योंकि अंकल रात को नहीं आने वाले थे वो कहीं बाहर थे और उन्हें कल सुबह 10 बजे तक आना था तो आंटी ने मुझे मदद के लिए पूछा और मैंने हाँ कर दी.. क्योंकि मुझे लगा कि आज कुछ उम्मीद है शायद कोई मौका मिल जाए। फिर मैंने जल्दी से कपड़े बदले और लोवर डाला। खाना खाने को आंटी ने पहले से ही मना कर दिया था और वो बोली कि मेरे यहीं पर खा लेना।

फिर हम जल्दी से उनके घर पर पहुंचे उनका बहुत ही सुंदर घर था.. वो मेरे आगे आगे गांड को मटका कर चल रही थी और में उनकी मोटी गांड को हिलते देखकर पागल होता जा रहा था। फिर अन्दर आकर पहले आंटी ने मुझे कोल्डड्रिंक पिलाई और कुछ खाने को दिया.. उसके बाद हम घर को सजाने में लग गये। में लड़ियां लगा रहा था और वो नीचे से मेरी मदद कर रही थी और में बीच बीच में उनकी बड़े बड़े बूब्स पर भी निगाह डाल लेता था। इस उम्र में भी उनका फिगर कयामत था.. 36- 26- 38.. सच में कोई नहीं मान सकता था कि उनकी शादी को इतने साल हो चुके है। फिर मैंने धीरे धीरे उनसे बातें करनी शुरू की तो पता लगा कि उनके दो लड़के है और दोनों बंगलोर में रहते है और वो ही यहाँ पर अकेली रहती है। तो में स्टूल पर खड़ा होकर एक उँची सी जगह पर एक पोस्टर लगाने की कोशिश कर रहा था। तभी अचानक से आंटी के हाथ से स्टूल लड़खड़ा गया और में उनके बिल्कुल ऊपर जा गिरा.. गिरते गिरते वो तो सोफे पर जा गिरी और में पास में रखे बेड से टकरा गया और मेरे घुटने पर बहुत ज़ोर से चोट लगी.. लेकिन खून नहीं आया। में जल्दी से उठा और पूछा कि क्या आंटी आप ठीक तो है? तो वो बोली कि में तो बिल्कुल ठीक हूँ.. लेकिन जब में उठकर चला और एकदम से लंगड़ाया तो आंटी ने मुझसे कहा कि शायद तुम्हे बहुत चोट लगी है? तो मैंने उनकी बात को हँसी में टालना चाहा.. लेकिन वो बोली कि नहीं तुम्हे चोट लगी है मुझे दिखाओ। तो उन्होंने मुझे बेड पर लेटाया और मेरा लोवर ऊपर करके देखने लगी.. मेरे घुटने के ऊपर बहुत दर्द हो रहा था तो वो बोली कि में बाम लेकर आती हूँ.. लेकिन मैंने मना कर दिया तो वो बोली कि तुम चुपचाप लेटे रहो। तुम्हे चोट लगी है। फिर वो दूसरे कमरे में जाकर बाम ले आई और लोवर को थोड़ा ऊपर करके लगाने लगी.. लेकिन बार बार लोवर नीचे आ जाता था। तभी उन्होंने मुझे लोवर को निकालने को कहा। तो में डर गया क्योंकि मैंने नीचे कुछ भी नहीं पहना था और फिर उनके बार बार कहने पर मैंने शरमाते हुए उन्हे बताया कि मैंने नीचे अंडरवियर नहीं पहना है। तो वो बहुत ज़ोर से हंसकर बोली कि कोई बात नहीं तुम यह टावल लपेट लो.. तो मैंने टावल लपेट लिया और वो मेरे पास में बैठकर बाम लगाने लगी और फिर उनके हाथ मेरे शरीर से स्पर्श होते ही मेरे शरीर से कपकपी छूट गई और मैंने अपनी दोनों आँखे बंद कर ली। फिर वो धीरे धीरे घुटने से लेकर मेरी जांघो तक बाम मसल रही थी और मेरे पूरे शरीर में करंट दौड़ रहा था और अब मेरा लंड भी टाईट होने लगा था जिसकी वजह से टावल ऊपर उठ गया था और में शरम के मारे उनसे नज़र नहीं मिला पा रहा था.. लेकिन मजे में उन्हे मना भी नहीं कर पाया और मैंने जिझक में मना भी किया.. लेकिन वो नहीं मानी और वो धीरे धीरे बाम मसल रही थी। मेरे लंड में तनाव आ चुका था और जिसे वो भाँप चुकी थी।

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फिर वो भी चोरी चोरी मेरी तरफ देखती.. लेकिन मैंने उन्हे दिखाने के लिए दोनों आखें बंद कर रखी थी और धीरे धीरे उनका चेहरा लाल होने लगा था और चेहरे के भाव भी बदल गये थे और धीरे धीरे बीच बीच में उनका हाथ मेरे लंड को स्पर्श कर जाता.. लेकिन मैंने कोई विरोध नहीं किया और यह दिखाया कि में सो गया हूँ। तो उनकी थोड़ी हिम्मत बड़ी और उन्होंने धीरे से मेरे लंड के ऊपर से टावल हटाया और बहुत अच्छे से उसे घूरा और चोरी से मेरी तरफ नज़रे घुमाई.. लेकिन मेरी आखें बंद थी। फिर उन्होंने मेरे लंड को पकड़ लिया और आराम आराम से उसकी चमड़ी को ऊपर नीचे करने लगी.. फिर उन्होंने धीरे से अपने चहरे को मेरे लंड के पास किया और आराम से लंड को सूँघा और एक किस करके मुहं में ले लिया। मेरे तो पूरे शरीर में जैसे आग ही लग गई। वो उसे मुहं में लेकर ज़ोर ज़ोर से चूसने लगी और अब मुझे सब कुछ बर्दाश्त से बाहर हो रहा था। तो में अचानक से उठकर खड़ा हुआ और नाटक करते हुए बोला कि आंटी आप यह आप क्या कर रही हो? तो वो बोली कि तुम बस कुछ मत बोलो और मुझे करने दो में बहुत दिनों से प्यासी हूँ। तो मैंने पूछा कि क्यों लेकिन अंकल है ना आपकी प्यास बुझाने के लिए? तो वो बोली कि हाँ वो बहुत अच्छे से बुझाते है.. लेकिन अक्सर उनके पास अपने दूसरे कामों की वजह से मेरे लिए बहुत कम समय होता है.. लेकिन मेरी प्यास ही इतनी है कि बुझती ही नहीं और मेरी बहुत दिनों से तुम पर नज़र थी। आज मौका भी है और वक़्त भी।

फिर मैंने कहा कि क्यों आज तो आपकी सालगिरह की रात है? तो वो बोली कि कोई बात नहीं आज की रात तुम मेरे पति हो और बस उसके बाद उन्होंने बस हद ही कर दी.. अपने सारे कपड़े उतार दिए और मेरे तो आधे पहले ही उतर चुके थे और बाकी भी उतर गये। फिर वो मुझे ऊपर से नीचे तक बुरी तरह से काटने और चूमने लगी। मेरे होंठ पर, मेरी निप्पल पर, मेरे पेट पर, मेरे लंड पर, मेरी बॉल्स पर। तो मेरे मुहं से बस अह्ह्ह आअहह ही निकल रही थी और में झड़ने लगा तो उसने मेरे लंड को मुहं से बाहर नहीं निकाला और चूस चूसकर मेरे वीर्य की एक एक बूँद को पी गई और उसने मेरे लंड को पूरा निचोड़ दिया.. में चुपचाप लेटा रहा तो वो मेरे पास में आ गई और मेरे बदन को सहलाने लगी और अब मेरी बारी थी.. मैंने उन्हे गरम करना और सक करना शुरू किया तो वो मचलने लगी। में उन्हे किस करता हुआ निप्पल पर काट रहा था.. उसके मस्त मस्त बूब्स को दबा रहा था और उसके मुहं से सिसकियाँ निकल रही थी और अब में थोड़ा और नीचे उनकी चूत पर आ गया। वाह कितनी गौरी दूध जैसी चूत थी उस पर एक भी बाल नहीं था। एकदम चिकनी जैसे कि मेरे लिए ही तैयार की हो और बिल्कुल लाल फांके। तो मैंने धीरे धीरे से उन्हे खोला और अपनी जीभ को जैसे ही उसमे डाली तो उसने अपनी कमर को उठाया और मेरे सर को पकड़ कर अपनी जांघो में दबा दिया.. में उन्हे काटने और बुरी तरह से निचोड़ने लगा वो चूतड़ उछाल रही थी और हाथ पटक रही थी। मेरे हाथ साथ में उसके निप्पल को दबा रहे थे और वो बस ज़ोर ज़ोर से सिसकियां लिए जा रही थी और वो बिल्कुल बेकाबू हो गई। उसने मुझे अपने ऊपर से हटाकर बेड पर वापस लेटाया और दोबारा मेरे लंड को मुहं में ले लिया। बस एक मिनट में ही वो दोबारा तैयार हो गया और उसने बिना कोई देरी करते हुए लंड को चूत पर सेट किया और उस पर सवार हो गई और जैसे ही मेरा लंड उसकी चूत में दाखिल हुआ तो उसने ऐसी सांस ली जैसे कि उसे सूकून मिल गया हो।

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फिर उसने एक के बाद एक ज़ोर ज़ोर से झटके देने शुरू किए और में उसकी कमर को अपने दोनों हाथों का सहारा दे रहा था और वो मेरे लंड पर उछले जा रही थी। फिर कभी वो ऊपर कभी में.. आधे घंटे तक हम ऐसे ही करते रहे। जैसे ही में झड़ने वाला होता में रुककर उसे सहलाने लगता और फिर से शुरू हो जाता.. लेकिन अब उसकी हाफतें हाफतें हालत खराब हो गई थी और अब में झड़ने वाला था.. तो वो बोली कि वो दो बार झड़ भी चुकी है और तीसरी बार उसका होने वाला है। तो मैंने उससे कहा कि कहाँ पर डालूं? तो वो बोली कि अंदर ही आने दो.. तभी तो मेरी चूत की गर्मी मिटेगी.. मेरे शरीर को शांति मिलेगी और बस 4-5 झटकों के बाद ही में उसकी चूत में झड़ गया। फिर हमने खाना खाया और उसके बाद फिर से शुरू हो गये.. इस उम्र में भी उसमे गजब का जोश था.. वो लगातार सुबह 4 बजे तक मेरा पूरा पूरा साथ देती रही। फिर मैंने इस बीच उसकी एक बार गांड भी मारी और हम साथ में भी नहाए फिर हम ऐसे ही पूरे नंगे सो गए। सुबह 8 बजे उठे साथ में नहाए और एक बार फिर मैंने उसकी गांड मारी और उसके पति के आने से आधा घंटा पहले में वहाँ से निकल गया। फिर उसके बाद तो जितने भी दिन में वहाँ पर रहा.. बस मेरी तो किस्मत में रस ही रस रहा ।।

धन्यवाद …