विधवा बहू की चूत की प्यास | Sasur bahu ki chudai story

Sasur bahu ki chudai story:- हेलो दोस्तो। मै प्रियंका एक बार फिर से लेकर आई हूँ आपके लिए एक बेहतरीन सेक्स स्टोरी। ये स्टोरी एक ससुर और बहू की चुदाई की है। तो दोस्तो अपने लंड और चूत को थाम लो और शुरू हो जाओ मज़े लेने के लिए। चलिये स्टोरी शुरू करती हूँ।

Vidwha Bahu ko sasur ne choda

Sasur bahu ki chudai story

हैलो फ्रेंड्स मेरा नाम प्रियंका है और मैं 32 साल की हूँ मेरी हाइट 5 फुट 5 इंच है और बदन भरा हुआ है. मेरा फिगर 36-32-38 है. रंग मेरा ठीक-ठीक गोरा है. ये कहानी मेरे और मेरे ससुर के बीच हुई चुदाई की है. चलिए बताती हूं कैसे मैं अपने ही ससुर से चुदी. मेरी शादी 26 साल की उम्र में सुमित के साथ हो गयी. सुमित बहुत अच्छे थे और अच्छी फॅमिली से थे. उनके घर में किसी चीज़ की कमी नहीं थी. घर में सुमित के अलावा उनके मम्मी-पापा ही थे. शादी के बाद सुमित ने मुझे बहुत प्यार दिया. मेरे सास-ससुर भी मुझे बहुत प्यार करते थे. सुमित मुझे सेक्सुअली भी पूरी तरह संतुष्ट करते थे. वो दिखने में भोले-भाले थे लेकिन बिस्तर में बहुत वाइल्ड थे. और मेरी तरह हर लड़की यहीं चाहती है की उसका हस्बैंड बिस्तर में उसकी कमर-तोड़ चुदाई करे.

लेकिन किस्मत को शायद मेरी ख़ुशी मंज़ूर नहीं थी. हमारी एक फैक्ट्री है. एक दिन वहां से फ़ोन आया की मशीन में सुमित का हाथ आ गया और उसको हॉस्पिटल लेके गए. जब तक हम हॉस्पिटल पहुंचे सुमित की डेथ हो गयी थी. शादी के 4 साल बाद मेरे सुमित मुझे छोड़ कर चले गए. मुझे गहरा सदमा लगा. बहुत दिनों तक मैं चुप-चाप बैठी रही. मैं ढंग से कुछ खाती-पीती नहीं थी. फिर मेरे सास-ससुर ने मुझे समझाया और मुझे फैक्ट्री जाने को कहा. उनके कहने पर मैं फैक्ट्री जाने लगी. धीरे-धीरे मेरा काम में ध्यान लगने लगा और सुमित की जुदाई का दुःख कम हो गया. मैं फिर से नार्मल हो गयी और बिज़नेस संभाल लिया अच्छे से. Sasur bahu ki chudai story

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औरत की एक कमज़ोरी होती है और वो होती है उसकी चूत. सुमित की जुदाई के दुःख से तो मैं उभर गयी लेकिन इस चूत का क्या करती? अब रात-रात भर मेरी ये चूत मुझे तड़पाने लगी. मैं सुमित के बारे में सोच कर अपनी चूत सहलाती, लेकिन जिस चूत को लंड की तगड़ी चुदाई की आदत लगी हो वो ऊँगली से संतुष्ट कैसे होती. मैं बाहर मुँह भी नहीं मार सकती थी क्यूंकि मैं नहीं चाहती थी की घर की इज़्ज़त पर कोई दाग लगे. फिर पिछले साल मैंने कुछ देखा. रात का वक़्त था और अचानक से मेरी नींद खुल गयी. मुझे सुसु आयी थी तो मैं बाथरूम की तरफ चल पड़ी. तभी मुझे अपने सास-ससुर के कमरे से कुछ आवाज़ आती सुनाई दे रही थी. वो लोग कुछ बात कर रहे थे. मैंने सोचा इतनी रात को ये लोग क्या बात कर रहे थे. मुझे लगा कहीं कोई गड़बड़ न हो गयी हो तो मैं उनके रूम की तरफ बढ़ी.

उनके रूम का दरवाज़ा थोड़ा खुला था तो अंदर जाने से पहले मैंने बाहर खड़े रह कर अंदर देखा. अंदर देखते ही मैं हैरान हो गयी. मेरे ससुर अंदर पूरे नंगे थे और सासु माँ को चुदाई के लिए बोल रहे थे. ससुर जी का लंड काफी तगड़ा था जो सुमित के लंड से भी बड़ा ही था. उसको ससुर जी ने पकड़ा हुआ था. लेकिन सासु माँ उनको मना कर रही थी. फिर ससुर जी के बार-बार मिन्नतें करने पर सासु माँ ब्लोजॉब के लिए मानी. ससुर जी ने फिर किसी रंडी की तरह सासु माँ का मुँह चोदा और उनको अपना पानी पिला दिया. फिर वो दोनों सो गए. मैं भी अपने कमरे में आ गयी. मेरी आँखों के सामने वहीँ सीन बार-बार घूम रहे थे. कभी मुझे ससुर जी के लंड का ध्यान आता तो कभी जैसे वो सासु माँ का मुँह चोद रहे थे उसका ध्यान आता.

ये सोच-सोच कर मेरी चूत में खलबली सी मच रही थी. मेरी चूत गीली होने लगी और मेरा हाथ अपने आप ही मेरी चूत पर चला गया. फिर मैंने अपनी पैंटी में हाथ डाला और अपनी चूत को रगड़ने लगी. मैं अपनी चूत के दाने को ज़ोर-ज़ोर से मसलने लगी और चूत में ऊँगली अंदर-बाहर करने लगी. ये सब करते हुए आज पहली बार मुझे सुमित का नहीं बल्कि ससुर जी का ख़याल आ रहा था. उनके लंड को इमेजिन करते हुए मैं चूत में ऊँगली करती रही और आखिरकार मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया. उस सारी रात मैं सो नहीं पायी. आज पहली बार मैंने उस बन्दे को सोच कर फिंगरिंग की थी जिसको अभी तक मैं अपना बाप मानती थी. मैं इस कश्मकश में थी की ये गलत था या सही. मेरे दिमाग में बार-बार ये आ रहा था की क्यों न मैं ससुर जी से अपनी चूत की प्यास बुझवा लू. क्यूंकि वैसे भी सासु माँ उनको कुछ करने नहीं दे रही थी. Sasur bahu ki chudai story

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लेकिन ये भी आ रहा था की ऐसा रिश्ता अपने ही ससुर के साथ सही होगा या नहीं. सोचते-सोचते कब सुबह हो गयी मुझे पता ही नहीं चला. फिर मैं उठी और नहा कर फैक्ट्री जाने के लिए तैयार हो गयी. जब मैं अपने कमरे से बाहर आयी तो ससुर जी सामने सोफे पर बैठ कर चाय पी रहे थे. उन्होंने सफ़ेद कुरता-पजामा पहना हुआ था. मैं उनके पास गयी और उनके पैर छूने लगी. तभी मेरा ध्यान उनके पाजामे की तरफ गया. मेरी आँखें उनके लंड को पाजामे में देखने की कोशिश कर रही थी. मुझे ऐसा लग रहा था जैसे मैं उनके पैर छूने के लिए नहीं बल्कि उनका लंड चूसने के लिए नीचे बैठी थी. फिर मैं जल्दी से खड़ी हुई और बाहर जाने लगी. तभी ससुर जी बोले-

ससुर जी: बेटी ब्रेकफास्ट तो करके जाओ.

मैं: नहीं पापा आज भूख नहीं है, मैं फैक्ट्री जाके कर लूंगी.

ससुर जी: चलो ठीक है.

फिर मैं घर से निकल गयी. अगले दो दिन तक मैं फैक्ट्री में घर में जहाँ भी थी मेरे दिमाग में एक ही बात चल रही थी. और वो बात ये थी की अपने ससुर से ऐसा रिश्ता बनाना ठीक होगा या नहीं. फिर आखिरकार मैंने सोचा की घर की इज़्ज़त घर में ही रखने का यहीं तरीका था. मैंने सोचा की मैं उनको सेड्यूस करने की कोशिश करुँगी. अगर तो उनका रिस्पांस पॉजिटिव आया तो मैं उनके लंड पर चढ़ जाउंगी. लेकिन अगर नहीं आया तो पीछे हट जाउंगी. मैंने सोच तो लिया की ससुर जी को सेड्यूस करुँगी लेकिन कैसे करुँगी ये नहीं पता था. संडे के दिन मेरी ऑफिस से छुट्टी होती है तो मैंने सोचा उसी दिन इस काम की शुरुआत करती हूँ मैं घर में हर तरह के कपडे पहनती थी मुझे कोई रोक-टोक नहीं थी किसी चीज़ के लिए. Sasur bahu ki chudai story

ससुर बहू की चुदाई स्टोरी

संडे वाले दिन मैंने टाइट लेग्गिंग्स और कुर्ती पहनी. मेरी कुर्ती का गाला थोड़ा डीप था जिसमे से झुकने पर अच्छी खासी क्लीवेज नज़र आ रही थी. और लेग्गिंग्स में तो जाँघों और गांड की शेप नज़र आ ही रही थी. सुबह का वक़्त था और ससुर जी ड्राइंग रूम के सोफे पर बैठे चाय पी रहे थे. मैं भी वहां जाके उनके पास बैठ गयी. मैं सोफे की सीट पर नहीं बैठी बल्कि नीचे फर्श पर बैठ गयी ताकि उनकी नज़र सीधे मेरे डीप गले पर पड़े. और हुआ भी ऐसा ही. जब मैं वहां बैठी तो कुछ ही देर में ससुर जी ने मेरी क्लीवेज नोटिस की. लेकिन ख़ुशी तो इस बात की थी की वो क्लीवेज को लगातार देख रहे थे. अब ये मुझे कैसे पता चला? दरअसल हमारे सोफे सेट के सामने ही शीशा लगा हुआ है. जब ससुर जी का ध्यान मेरी क्लीवेज पर था तब मैं उनको सामने लगे शीशे में देख पा रही थी.

फिर जब ससुर जी की चाय ख़तम हुई तो मैं जल्दी से कप उठाने के लिए उठी. कप उठाने के टाइम पर मैंने झुक कर ससुर जी के सामने अपनी गांड कर दी. मुझे यकीन है की मेरी सेक्सी गांड को कोई नज़र-अंदाज़ नहीं कर सकता और ससुर जी ने भी गांड ज़रूर देखि होगी. फिर जब मैं किचन की तरफ जा रही थी तो ससुर जी का ध्यान मेरी तरफ ही था. मेरे ससुर जी सुबह-सुबह योग करते है हॉल में बैठ कर. सबसे पहले सासु माँ उठती है और नहा-धो कर मंदिर चली जाती है. अक्सर इन दोनों की मंदिर और योग की टाइमिंग सेम रहती है. इसी चीज़ का मैंने फ़ायदा उठाया.

जब सासु माँ मंदिर चली गयी तो मैं जल्दी से उनके रूम के बाथरूम में घुस गयी. मैंने जल्दी से अपने कपडे उतार दिए और नंगी हो गयी. मुझे पता था की ससुर जी नहाने के लिए आने वाले थे इसलिए मैंने कुण्डी नहीं लगायी. मैं चाहती थी की वो मुझे नंगी देखे. दोस्तों जैसा मैंने चाहा था वैसे ही हुआ. जैसे ही ससुर जी रूम में आये मैंने हल्का शावर ऑन कर दिया और नीचे खड़ी हो गयी. मैंने बहुत कम स्पीड में शावर छोड़ा था ताकि आवाज़ न हो. तभी ससुर जी ने दरवाज़ा खोला. मैंने जान-बूझ कर दूसरी तरफ मुँह किया हुआ था और अनजान बनी हुई थी. ससुर जी मुझे नंगी देखने के बाद भी वहां से नहीं गए.

ये देख कर मैं खुश थी. फिर मैं जान-बूझ कर दरवाज़े की तरफ घूमी और उन्हें देख कर चिल्लाने लगी और अपनी चूत और बूब्स छुपाने लगी. ससुर जी भी सॉरी बोलते हुए आँखें बंद करके बाहर निकल गए. फिर जब उन्होंने पुछा की मैं उनके बाथरूम में क्या कर रही थी तो मैंने कहा की मेरे बाथरूम में पानी ब्लॉक हो गया था. इसी तरह मैं हर रोज़ कुछ न कुछ करने लगी. ससुर जी मुझे देख तो रहे थे लेकिन आगे नहीं बढ़ रहे थे. और मुझे समझ नहीं आ रहा था की मैं क्या करू. फिर एक दिन मुझे मौका मिला.

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एक दिन सुबह जब ससुर जी योग कर रहे थे तो मैं भी टाइट कपडे पहन कर उनके सामने एक्सरसाइज करने लगी. ससुर जी का ध्यान मेरे जिस्म पर ही था. फिर जब वो जाने लगे तो उनका लंड खड़ा था. मुझे यकीन था की वो ज़रूर कुछ करेंगे. ये सोच कर उनके जाने के 3-4 मिनट बाद मैं उनके कमरे में चली गयी. ससुर जी बाथरूम में थे और उनकी आहह आहह की आवाज़े आ रही थी. मैंने बाथरूम का दरवाज़ा खोल कर झाँका तो वो मुठ मार रहे थे. वो पूरे नंगे थे और उनका मुँह दूसरी तरफ था. मैं मौका न गवाते हुए अंदर गयी और उनके पीछे जाके बोली-

मैं: पापा आप मेरे बारे में सोच रहे हो न?

जैसे ही मैंने ये कहा ससुर जी मुड़े और मुझे देख कर घबरा गए. उनका लंड डर के मारे बैठने लगा. तभी मैंने लंड हाथ में लिया और बोली-

मैं: काम पूरा कीजिये पापा. लाईये मैं आपकी मदद करती हु.

ये बोल कर मैं अपने घुटनो पर बैठी और ससुर जी से नज़र मिलाते हुए उनका लंड मुँह में डाल लिया. फिर मैं उनका लंड मज़े से चूसने लगी. ससुर जी पहले तो हैरान थे लेकिन फिर उनको भी समझ आ गया की क्या हो रहा था. फिर ससुर जी मेरे मुँह में धक्के देने लगे. कुछ देर लंड चुसवाने के बाद ससुर जी ने मुझे खड़ा किया और बैडरूम में ले आये. फिर जल्दी से उन्होंने मुझे नंगा कर दिए और बोले-

ससुर जी: जिस दिन से तेरा ये जिस्म देखा है पागल हो गया हु.

उन्होंने मुझे बेड पर लिटाया और मेरे पूरे बदन को चाटने लगे. उन्होंने मेरी चूत बहुत मज़े लेके चूसी. मैं तो मानो पागल हो रही थी. मेरी चूत की पंखुड़ियों को वो अपने दांतो से खींच कर मुँह में भरते और फिर चूसने लगते. कुछ देर चूत चूसने के बाद वो ऊपर आये और मेरे होंठ चूसने लगे. मैं उनका पूरा साथ दे रही थी. होंठ चूसते हुए उन्होंने अपना लंड मेरी चूत पर सेट किया और एक ही धक्के में पेल दिया. मुझे दर्द हुआ लेकिन मज़ा भी आया. फिर वो मेरी चूत का सुख भोगने लगे और मुझे अपने मोटे लंड का मज़ा देने लगे. वो मेरे होंठ और बूब्स चूसते रहे और नीचे से लंड पेलते रहे. रूम में थप-थप और चाप-चाप की आवाज़े बहुत आ रही थी. मैं भी अपने चरमसुख पर पहुँच चुकी थी.

ससुर जी ने मुझे 20 मिनट चोदा और फिर मम्मी के आने के पहले अपना माल मेरे अंदर भर दिया. अब हम दोनों संतुष्ट हो चुके थे. उस दिन से मैं अपने ससुर की रंडी हूं और वो मेरे भड़वे है.

तो दोस्तो आपको ये छोटी सी ससुर बहू की सेक्स स्टोरी कैसी लगी कमेंट करके ज़रूर बताना।

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6 thoughts on “विधवा बहू की चूत की प्यास | Sasur bahu ki chudai story”

  1. किसी भी आन्टी भाभी या लड़की को सैक्स या सैक्सी बात करनी है मैसेज कर सभी बातें गुप्त रखी जाएगी
    rajeshyogi473@gmail.com
    Massage karna

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