Jeth Bhabhi ki hindi sex story:- हैलो दोस्तों मेरा नाम सावित्री है. मेरी लाइफ में कई मर्द आये है और लगभग सबने मुझे बिस्तर पर सुलाया है और ऐसे ही मैं अपने जेठ की कुँवारी दुल्हन बनी थी. तो आइये मै आपको बताती हूँ कि ये सब कैसे हुआ। यह घटना कोई 13 साल पहले की है. तब मेरी नयी नयी शादी हुई थी. दिल में बहुत अरमान लेकर मै ससुराल आयी थी. मेरे ससुराल में मेरे पति, जेठ जेठानी, दो देवर और सास थे. मेरी सास ज्यादातर वक़्त अपने मंदिर में ही बिताती थी. पूजा पाठ में अपना वक़्त गुजरती थी. मेरी जेठानी अभी पेट से थी. कोई 5th महीना चल रहा था उनका. जेठ जी गाँव की खेतीबाड़ी और जमीन की रखवाली करते थे और मेरे पति शहर में बिज़नेस करते थे. काफी अच्छी फैमिली मिली थी मुझे, सब बहुत केयरिंग थे. दोनों देवर जान निचोड़ थे मुझपे.
Jeth Bhabhi ki hindi sex story
पर दोनों मेरे पति के पास ही शहर में पढाई कर रहे थे. शादी के दो दिन बाद पति को बिज़नेस में प्रॉब्लम आयी. वो सब छोड़ के शहर चले गए, दोनों देवर को भी साथ लिए गए. घर पे मै अकेली. नयी नयी शादी हुई थी और उधर मेरी जेठानी का 6वां महीना चलने लगा. तो उनके घरवाले उन्हें मायके ले गए. अब घर पर सिर्फ मैं, माँ जी और जेठ जी थे. यु ही कुछ 15-20 दिन चले गए. पति का कारोबार अभी भी मुसीबत में था. मेरी सास के कहने पर मैं एक तांत्रिक से मिलने गयी.
मेरी सास और मैं उनसे मिले मुझे देखने के बाद तांत्रिक बोला अपनी कुंडली लेके आओ. हम दोनों अगली शाम उनसे मिले तो उन्होंने कहा की मेरी बुरी नजर है उनके घर पे और मैं शादी के बाद असंतुष्ट रहती हूँ. इसका बुरा प्रभाब मेरे पति की किस्मत पर पड़ रहा है. उनसे मेरी सास ने उपाए पूछा तो उन्होंने कहा इसे शारीरिक सुख दो. इसके पति से कहो इससे मिलन करे. बस यही उसकी प्रभाव को कम करेगा. मैं शर्म और गिल्ट से रोती हुई वापिस आ गयी. उस रात मेरी सास ने पति को बहुत समझाया पर मेरे पति को इन सब में भरोसा नहीं था और वो साफ़ बोल दिए की वो बिज़नेस ठीक करके मुझे शहर ले जायेंगे.
ऐसे ही कुछ दिन बाद फिर खबर आयी की पति की बिज़नेस मे उलझने बढ़ती जा रही है. मैं खबर सुन कर बहुत उदास हुई और रोने लगी. मैंने खुद को कमरे में बंद कर दिया. फिर शाम को जेठ जी खेत से वापिस आये और मेरे पास आये.
उन्होंने बोला बहु रानी इतना उदास मत हो बिज़नेस में उतार चढ़ाव आते रहते है.
मैं उनकी बात सुन कर और रो पड़ी.
मैंने कहा: जेठ जी मै उदास हूँ क्यों की इस सब की जिम्मेदार मैं हूँ.
जेठ जी ने कहा: मुझे सब पता है बहु रानी, पर क्या तुम इस बारे में कुछ करना चाहती हो?
मैंने कहा: क्या जेठ जी क्या कर सकती हूँ?
वो मेरे पास आये और मेरे हाथ को अपने लंड के ऊपर रख दिए. मैंने झट से हाथ हटा दिया.
वो बोले: सोच लो और चले गए।
मै उस रात सो नहीं पायी. रात भर जेठ के लंड के एहसास ने मुझे सोने नहीं दिया. दो महीने से सुहाग रात नहीं मनाई थी. मैंने ठान लिया की उसी रात को यह किस्सा ख़तम कर दूंगी. रात को खाने के बाद मैंने जेठजी को अपने कमरे में आने का इशारा दिए. वो आके मेरे पास बैठ गए.
वो बोले: कुछ कहना है?
मैं सर झुका कर बैठी रही. उन्होंने फिर से मेरे हाथ को अपने लंड पे रखा तो मैंने मसल दिया.
वो खुश होकर बोले और कुछ कहने की जरुरत नहीं है.
और मेरे ब्लाउज से मेरे बूब्स पकड़ के निचोड़ दिए. जिससे मैंने सिसकी भर ली.
फिर बोले: तुम तैयार हो जाओ?
मैंने कुछ नहीं कहा तो बोले: अगर तुम्हे हिचक है तो बाद में करेंगे और उठ कर जाने लगे.
मैं भाग कर उनके सामने गयी. उनके सामने अपनी पल्लू हटा के ब्लाउज और ब्रा निकाल दी. वो मेरे मुम्मो को ऐसे देख रहे थे जैसे कोई बच्चा अपने खाने को देखता है. मैं शर्म से उनके गले लग गयी. वो मेरी गांड को पकड़ के मसले और मेरी साडी उतार दी और पेटीकोट भी. मैं बस एक रेड पैंटी में खड़ी अपने मुम्मो को छिपा रही थी. उन्होंने अपने कपडे उतार के मुझे बेड पे लिटा दिया. मेरी पैंटी भी निकाल दी.
फिर बोले: आज रात भर तुम बस चीखोगी और गूंज हर कोई सुनेगा.
फिर वो मेरे मुम्मो को बारी बारी से मुँह में लेके चूसने कांटने लगे. मैं बस बिस्तर पे छटपटा रही थी. बेडशीट को हाथों में जकड रही थी.
वो मुझ पर से उठे और बोले: बहुरानी टांगें फैलाओगी न.
मैं शर्म के मारे लाल हो गयी. उन्होंने मेरी टांगें चौड़ी की और चूत में लंड रगड़ने लगे. मैं बस आंखे बंद करके सिसकी लेने लगी. तभी उन्होंने मेरी चूत में जबरन लंड घुसेड़ दिया और मैं उनसे लिपट गयी. बहुत कोशिश करी आवाज न करने की लेकिन इतना दर्द पहली बार महसूस किया था. आँखों से आंसू रूक ही नहीं रहे थे. जेठ जी मुझे बच्ची की तरह बाँहों में भर के चूमने लगे और लंड को अंदर ही रहने दिया. मैं शांत हुई तो धीरे धीरे अंदर बाहर करने लगे.
मैं फिर चीखी तो मेरे मुँह में होठ लगा दिए.
फिर कान में बोले: दर्द हो रहा है तो रोक दूँ??
मैं बस बोली की आज मत रुकिए मैं सब सह लुंगी और उन्हें हाँ कर दी.
उस रात उन्होंने जम कर मेरी ठुकाई करि. कुछ सुबह के 6 बजे मेरी नींद टूटी तो हम दोनों बेड पर नंगे थे. मैंने उनकी बॉडी देखि तो लालच में उन्हें हग कर दी.
उन्होंने मेरी गांड को दबाया और बोले: दिन भर मैं यहीं रहूँगा तुम्हारे पास.
मैंने कहा: तो माँ जी??
जेठजी ने कहा उन्होंने माँ से बात कर ली है और फिर मुझे बिस्तर पे खींच लिए और मेरे मुम्मो को दांतों से जोर से कांट दिए. मैं चिल्ला पड़ी और साथ ही लंड को चूत में जोरो से ठोकने लगे मेरी चीख 10 मिनट तक चलती रही. मेरी आवाज सुनके माँ जी ने डोर खटखटाया. जेठजी ने मुझे नंगी ही लंड पे बिठा के बेडशीट लपेट ली और डोर खोल दिया. मैंने शर्म से आंखे बंद कर दी थी.
माँ जी ने बोली: धीरे कर पड़ोस सुन लेगा तो जिंदगी भर तू ही संभालेगा इसे क्यों की तेरी बीवी और भाई दोनों चले जायेंगे.
जेठजी हँसके बोले: माँ यह भी मजे ले रही है न और डोर बंद कर दिया.
मैंने पूछा: ऐसे क्यों कहा की मैं भी मजे ले रही हूँ.
जेठ बोले: नहीं ले रही हो? तो मैं जाता हूँ.
मैं बोली: अरे अरे आप गुस्सा हो गए तो कैसे चलेगा.
फिर जेठ ने मुझे उलटी कर दी और गांड में थप्पड़ मारने लगे.
वो मेरे कान में बोले अभी इसकी सील तोडूंगा और तेल डाल के लंड रगड़ने लगे. मैंने मुँह पे हाथ रख दिया और कुतिया बन गयी. उन्होंने मेरे दोनों चुत्तड़ चौड़े किये और बस ऊपर से ही लंड रगड़े.
मैं बोली: डालोगे नहीं.
वो बोले: एक बार प्यार से कह दो.
मैं मुस्कुराके बोली: जेठजी मुझे पीछे से डालो.
तभी उन्होंने मेरी गांड पे थप्पड़ मारके लंड पेल दिया. मैंने दोनों हाथो से अपने मुँह को बंद कर दिया. लेकिन आवाज दबी ही नहीं दर्द भी वैसे हो रहा था. कुछ 10-15 स्ट्रोक्स के बाद लंड अच्छे से अंदर गया और फिर दर्द कम हुआ. कुछ देर बाद जब हम दोनों थक गए और जेठजी मेरे ऊपर ही निढाल हो गए. फिर रात भर वो मेरे जिस्म को काट कर खाने लगे और मैं बस मजे लेने लगी. पूरी रात मैं बस जेठ जी के प्यार का लुफ्त उठा रही थी. करीबन रात के 2 बजे तक हम प्यार करते रहे.
अगली सुबह मैं जब उठी तो जेठ जी घर पे नहीं थे. मैंने बहुत ढूंढ़ने के बाद जब माँ जी से पूछा तो वो बोली की जेठजी खेत में गए है.
फिर मुझे छेड़ते हुए बोली: अपने जेठ को इतना मत ढूंढ कोई सुन लेगा तो. तेरे पति का फ़ोन आया था हालत सुधरने लगी है वो जल्द ही आ जायेगा.
मैं यह सुनके खुश हो गयी और दोपहर को खाना लेकर खेत में गयी. जेठजी को खाना देते वक़्त जेठजी बात नहीं कर रहे थे.
मैं: क्या हुआ? आप गुस्सा है?
जेठ: नहीं तो.
मैं: तो बात नहीं कर रहे है?
जेठ: कुछ नहीं सुबह छोटे का फ़ोन आया था, वो जल्द ही तुम्हे लेने आ रहा है.
मैं: तो आप इस बात से नाराज़ है?
जेठ: नहीं मैं क्यूँ नाराज़ हूँगा मैं तो खुश हूँ.
मैं: (उनकी आँखों में नमी थी) ठीक है आप शाम को घर आइये.
मैं ये बोल कर वापिस आ गयी. रात को डिनर के बाद जेठ जी से मैंने बात की तो वो मुझसे दूर जाने लगे और अपने कमरे में चले गए. मैं उनके पीछे पीछे उनके कमरे में गयी.
जेठ: बहु तुम चली जाओ, तुम्हारा पति जल्द ही आने वाला है.
मैं: (उनके सामने सारे कपडे उतार कर सिर्फ अंडरवियर में जाके उनकी गोद में बैठ गयी) एक ही रात में मन भर गया और उनका लंड मसलने लगी.
जेठ: तुमसे तो कभी मन भरता ही नहीं पर मैंने जो किया तुम्हारे पति के लिए किया.
मैं: तो आज से उनकी पत्नी के लिए कीजिये क्या पता कैसे फिर मेरी बुरी नजर लग गयी तो.
जेठ: मतलब?
मैं: मतलब जो अनहोनी पहले हुई उसको आपके प्यार ने काट दिया. अभी आप फिर दूर गए और अनहोनी शुरू हो गयी तो.
जेठ – पर?
मैं: (उनके होठो पे ऊँगली रख के) पर वर कुछ नहीं जब तक आपके छोटे भाई नहीं आते. तब तक रातो को मुझे प्यार आपसे ही चाहिए
और अपनी हाथों को उनके बॉक्सर के अंदर डाल के लंड सहलाने लगी. जेठ जी ने मेरी ब्रा चड्डी निकाल दी और गांड पे थप्पड़ मार के बोले: पहले इसे चोदूँगा.
मैं मुस्कुराके बोली: पूरी की पूरी आपकी हूँ और फिर रात भर मै बस सिसकिया ही लेती रही थी. फिर अगली सुबह जेठ जी मुझे बाँहों में लेकर सो रहे थे. मैं उठने लगी तो मुझे फिर अपने पास खींच लिए.
वो बोले: एक बार और हो जाये.
मैं बोली: सुबह हो गयी है जो होगा रात को होगा.
उन्होंने मेरे हाथों में अपना मोटा कड़क लंड थमा दिया. मुझसे रहा नहीं गया और मैं उनके लंड को चूसने लगी.
कुछ 15 मिनट बाद वो झड़ गए और मैं सब कुछ पी गयी.
वो बोले: दोपहर को खेत में खाना लाओगी न?
मैं बोली: हाँ क्यों?
वो बोले: सिर्फ साड़ी डालके आना.
मैं मुस्कुरा दी और हाँ बोलके चली गयी.
दोपहर को मैं खाना लेकर सिर्फ ब्लाउज और साड़ी पहन के गयी तो जेठजी रूठ के बोले: मैंने तुम्हे सिर्फ साड़ी में आने को कहा था.
मैं: शर्म करो जेठजी कोई देखेगा तो मेरी इज्जत चली जाएगी.
जेठ जी: ठीक है पंप हाउस में चलो वही करूंगा तुम्हारी चुदाई.
फिर हम पंप हाउस गए तो जेठजी ने कुंडी लगा दी. तो मैंने ब्लाउज खोला और उनके सामने बैठ गयी. वो एक निवाला मुँह में लेते और दूसरे को हाथ से मेरे एक मुम्मे को मसल देते.
खाना खाने के बाद बोले: मुझे कुछ और खाना है.
मैं पहले से ही जानती थी यही होगा, तो बिना किसी न नुकर के मैंने नंगी होकर साड़ी जमीन पे डाल दी और उसमे टांगें फैला के लेट गयी. मेरी चूत पे छोटे छोटे बाल थे.
जेठजी बोले: आज खा नहीं पाउँगा बस खिलाऊंगा और जेठजी पुरे एक घंटे तक मुझे चोदते रहे और पानी भी मेरे अंदर छोड़ दिया.
वो बोले: रात को मुझे फिर तुम्हे खाना है।
मैं शर्मा के चली आयी वहां से. मैं फिर कपडे समेट कर घर आ गयी. रात को जब वो कमरे में आये तो साड़ी के ऊपर से मेरी चूत मसल के बोले: साफ़ है न.
मैं दर्द से कहरा उठी और बोली: खुद ही देख लो.
फिर उस रात भी जेठजी ने मुझे हर तरह से प्यार दिया.
कुछ 15 दिन तक यह सिलसिला चलता रहा और हर बार मेरी चूत जेठजी के रस से भर जाती थी. फिर मेरे पति के आने के बाद मुझे उनके साथ शहर जाना पड़ा. पर जो भी कहो मै थी तो अपने जेठ की कुँवारी दुल्हन. अब आगे क्या हुआ यह बाद में बताउंगी.
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