20 साल की कामवाली की चुदाई – 1

Kamwali Naukrani ki chudai:- मेरी कामवाली का नाम अंजलि है, उसका फ़िगर यही कोई 32-28-32 होगा. उसके बाल काफी बड़े और घने थे और वो हमेशा बालों को पोनी करके आती थी. कपड़ों में वो अधिकतर टॉप और जीन्स या कुर्ती या जीन्स पहन के आया करती थी. मैंने कभी उसको गन्दी नज़र से नहीं देखा था. पर एक दिन वो वाइट टी-शर्ट और ब्लू जीन्स पहन के आयी थी. उस दिन उसने अंदर ब्लैक कलर की ब्रा पहनी थी जिसमे वो बहुत ही सेक्सी लग रही थी.

Kamwali Naukrani ki chudai

कहानी शुरू होती है इस वाकिये से-एक दिन मैं अपने रूम में रेडी हो रहा था और सिर्फ टॉवल में था. वो हमेशा मेरे रूम में नॉक करके आती थी या तभी आती थी जब मैं रूम नहीं होता था. उस दिन रूम का दरवाज़ा ठीक से लॉक नहीं था और उसको लगा शायद मैं रूम में नहीं हूँ. उसने दरवाज़ा खोला और मैं टॉवल निकाल के अंडरवियर पहन ही रहा था की उसने मुझे देखा. फिर मेरे लंड को घूर के और मुँह नीचे करके गेट बंद करके दुसरे रूम की सफाई करने चली गयी. उस दिन के बाद से वो मुझसे आँखें मिलाने में कतराती थी और मुझसे सहमी-सहमी रहती थी.

मैं जब भी घर होता था तो मुझसे दूरी बना के रखती थी. एक दिन मुझे दोपहर में कुछ काम था तो मैं घर जल्दी आ गया. मैं लिफ्ट से ऊपर जा रहा था और वो अगले फ्लोर से लिफ्ट मे चढ़ गयी. हम दोनों ने एक-दुसरे की आँखों में देखा और तुरंत नज़रें हटा ली. जैसे ही उसका फ्लोर आया वो हड़बड़ाहट में निकलने लगी और गिरते-गिरते बची. मैंने उसका टॉप पकड़ लिया ताकि वो गिरने से बचे और उसको पीछे की तरफ खींच लिया. उसका टॉप पकड़ते वक़्त मेरे हाथ उसकी मुलायम स्किन से टच हुए और ऐसा लगा की किसी ने मुझे 440 वाल्ट का झटका दे दिया हो.

उस टच से हम दोनों के बीच कुछ तो ज़रूर हुआ जो हम दोनों को समझ आ गया की बात इससे आगे बढ़ेगी.

मैंने उसे पुछा “तू ठीक है न?”

अंजलि: जी भैया! बस लेट हो रहा था दुसरे घर जाने में तो इसलिए जल्दबाज़ी में गिरते-गिरते बची. थैंक यू आपने मुझे पकड़ लिया वरना सीधे मुँह के बल गिरती.

मैं: कोई बात नहीं! थोड़ा ध्यान से चला कर! मैं नहीं होता तो कौन पकड़ता?

जाते वक़्त मैंने हलके से उसकी कमर पे हाथ फेर दिया जिससे वो थोड़ी सहम गयी और बिना कुछ बोले चली गयी. अब जब भी वो मुझे दिखती तो मैं उसे स्माइल पास कर देता और वो भी काम करते वक़्त मुझे तिरछी नज़र से देखती रहती. मुझे अब समझ आ गया था की अब बस मुझे सही मौके की ज़रुरत थी उसको पेलने के लिए. एक दिन मेरे घर वालो को सुबह कहीं जाना था और वो मुझे बोल के गए थे की तू घर पे रहे तो कामवाली जब भी आये उनको गेट खोल देना. मैं आधी नींद में था तो हां-हु करके वापस सो गया. गर्मियों का टाइम था तो मैं सिर्फ मै बॉक्सर में सोता था.

कुछ देर बाद घर की डोर बेल बजी और मुझे उठ गेट खोलना पड़ा. जैसे मैंने गेट खोला और देखा अंजलि आज फिर वही वाइट टॉप और ब्लू जीन्स पहन के आयी थी. उसको इस तरह से देख के मेरा तुरंत खड़ा होने लगा.

अंजलि: अंदर आ जाऊ या मुझे गेट पे ही ताड़ते रहोगे?

ये सुनते ही मैंने उसको अंदर खींचा और गेट को लॉक किया. उसकी नज़र मेरे बॉक्सर पे अटकी हुई थी. मैंने उसके फेस को दोनों हाथो से पकड़ा और दबा के स्मूच करने लगा. वो उत्तेजित हो गयी और मेरी कमर पे चढ़ गयी और अपनी टांगें जकड कर मुझे किश करने लगी. किश करते-करते मैंने अपना हाथ उसके टॉप में डाल दिया और उसकी पीठ को सहलाने लगा. वो किश करते-करते अपनी उँगलियाँ मेरे बालों मे फिराती रही. अब मैंने उसकी ब्रा का हुक खोला और उसकी ब्रा टॉप से निकाल दिया. उसके मोसम्बी जैसे बूब्स वाइट टॉप से अलग ही दिख रहे थे. वो अभी भी मेरी कमर पर ही थी, जब मैंने उसकी ब्रा टॉप से निकाली. अब मैंने उसको वहीँ लिविंग रूम के सोफे पे पटका और उसके टॉप को निकाल के फेंक दिया. उसके बूब्स न ज़्यादा बड़े थे न ज़्यादा छोटे एक-दम परफेक्ट साइज के थे और काफी सॉफ्ट थे.

मैं उन पर टूट पड़ा और दोनों को जंगली भेड़िये की तरह चूसने लगा. वो मेरा सर पकड़ के बार-बार मुझे स्मूच करने अपनी और खींचती रही. अब मैं उसके पास ही लेट गया, उसे स्मूच करते हुए मैंने एक हाथ से उसके बूब्स को दबा रहा था और दुसरे हाथ से उसकी जीन्स के ऊपर से उसकी चूत को सहला रहा था. मेरे हर स्पर्श पे वो मेरी बाहों में और ज़्यादा आने लगी, जैसे की वो वहीँ रहना चाहती हो. मैंने धीरे-धीरे उसकी जीन्स के बटन को खोला और हटा के वहीँ डाइनिंग रूम में फेंक दिया. वो रेड पैंटी में गज़ब दिख रही थी और उसकी जांघें एकदम दूध जैसी गोरी थी.

मैंने अपना हाथ उसकी पैंटी में डाला तो वो किश करते हुए ही सिसकारी मारने लगी.

अंजलि – “आह भैयाआआआआ! ये आपने क्या कर दिया? मैंने पागल हो रही हूँ.”

ये सुनते ही मैंने उसकी चूत में ऊँगली डाली और वो ठिठुर गयी.

भैयाआआआ! मैंने आपसे पहले सिर्फ 2 बार ही किया है. आप प्लीज आराम से करियेगा.

मैंने अपनी ऊँगली उसकी गीली चूत में धीरे-धीरे घुसाना चालु की और वो हर स्ट्रोक में मदहोश होने लगी. मैंने धीरे-धीरे अपना पेस बढ़ाया और वो अपने कूल्हे उठा उठा कर हिलाने लगी. अब मैंने उसको अपनी बाहों में लेके किश करने लगा और साथ-साथ उसकी चूत में ऊँगली करने लगा. उसको इतना मज़ा आने लगा की वो मुझे और मज़े से किश करने लगी. मैंने ये देख कर अपनी स्पीड बढ़ा दी और उसे और ज़ोर-ज़ोर से फिंगरिंग करने लगा. वो किश करते हुए सिसकारियाँ मारने लगी और कहने लगी:

भैया! प्लीज और करिये रुकिए माआट्ट्ट्ट. आअह्ह्ह बहुत मज़ा आ रहा है. भैयाआआआ!!!!! और करिये और तेज़! मैं आपकी दासी बन के रहूंगी. प्लीज रुकना मत!

ये सब सुन के मैंने अपनी जान लगा दी और उसे इतनी तेज़ फिंगरिंग करने लगा की उसका पूरा पानी बाहर निकल जाये. जैसे ही वो ओर्गास्म की तरफ पहुँच रही थी उसने मेरा फेस पकड़ा और मेरे लिप्स को चूसने लगी.

अंजलि: भैया! मज़ा आ रहा है. आह्ह्ह और करो आहह आहह. प्लीज रुकना मत. मेरा पानी निकल रहा है. आह्ह्ह और करो आहह. उफ़ निकल गया आहह…

और एक ज़ोर की चीख के साथ उसने अपना सारा पानी वहीँ सोफे पे निकाल दिया. उसके चेहरे जो पसीना चमक रहा था उससे साफ़ समझ आ रहा था की उसने कभी भी ये एक्सपीरियंस नहीं किया था. मेरा हाथ पूरा उसके पानी से भीगा हुआ था और एक-दम थक चुका था. मैंने उस हाथ की उँगलियों को उसके मुँह पे डाला ताकि वो चाट के साफ़ कर पाए. उसने तुरंत मेरे उँगलियों को पूरी शिद्दत से चाट-चाट के साफ़ किया. आगे क्या हुआ वो अगले पार्ट में पढ़िए.

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