जुम्मन चाचा से चिकन के बदले चूत मरवाई

New Latest Hindi Sex Story:- हेलो दोस्तों मेरा नाम ममता है. मैं अभी 24 साल की हूं और पिछले साल ही मेरी शादी हुई थी. शादी के बाद मेरी चूचियां और गांड थोड़ी बड़ी हो गयी और कमर और ज़्यादा चिकनी और मदमस्त हो गयी. लोग मुझे देख कर आहें भरने लगते है. शादी के बाद आज साल भर बाद मैं अपने मायके आयी हुई थी. मेरे घर पर माँ पापा भैया भाभी और मैं थी. भाभी आज शाम को चिकन बनाने की प्लान बनायीं हुई थी. पापा कुछ काम कर रहे थे और मम्मी उनका हाथ बंटा रही थी. भाभी चिकन लाने को भैया को बोली पर भैया भी कहीं निकल रहे थे और रात को लेट से आने वाले थे.

New Latest Hindi Sex Story:- Jumman Chacha se chudai

तब भाभी ने मम्मी से बोला तो मम्मी बोली की अभी तो काम कर रही हूं अभी समय लगेगा. तब मैं भाभी से बोली की मैं खुद जा कर ले आती हूँ मैंने चिकन की दुकान देखि हुई थी. मेरे गाँव में एक ही चिकन की दुकान थी और वो थी जुम्मन चाचा की. उनका पोल्ट्री फार्म भी था.

मैं जब घर से निकलने लगी, तब मम्मी मुझसे बोली: दुकान से ही चिकन लेकर चली आना, उधर पोल्ट्री फार्म की तरफ मत जाना.

मम्मी ने मुझे कभी भी बाहर अकेली जाने नहीं दिया था. क्यूंकि गाँव का माहौल ठीक नहीं था. लड़के कहीं भी लड़कियों को छेड़ने लगते थे और कुँवारी लड़कियां भी कम नहीं थी, वो भी बड़े मज़े लेती थी. मैं कहीं बिगड़ न जाऊ इसलिए मम्मी हमेशा मुझे डांट कर समझा कर घर पर रखती थी. मैं मम्मी से ठीक है कह कर चली गयी.

दोपहर के 3 बज रहे थे और ठंड का टाइम था. हलकी-हलकी ठण्ड पड़ रही थी तो मैं एक साड़ी पहन कर चली गयी. जब दूकान पर पहुंची तो देखा की वहां पर एक बच्चा बैठा हुआ था.

तो मैं उससे बोली की जुम्मन चाचा कहाँ है?

उसने बोला वो पोल्ट्री फार्म में है, आपको वहीँ पर चिकन मिलेगी यहाँ पर अभी खत्म है.

मैं जुम्मन चाचा को बचपन से ही जानती थी तो सोची की उनके पास से ही जा कर चिकन ले आउ. यही पास में पोल्ट्री फार्म था तो मैं चली गयी.

जुम्मन चाचा मुझे देखते ही मेरे पास आये और मेरे लाल-लाल सेब जैसे गालों को बचपन की तरह मसलते हुए बोले: अरे मेरी ममता बिटिया कितनी सायानी हो गयी है तू और आज साल भर बाद दिखी है. कितनी सुन्दर और प्यारी लग रही है तू.

मैं शर्मा गयी. फिर वो मुझे अंदर लेकर गए और बैठने को बोला और बोले: बोल आज क्या चाहिए तुझे? आज तेरे लिए सब कुछ फ्री है.

जुम्मन चाचा बहुत ही हसमुख थे. वो आज भी पहले की तरह लग रहे थे. उनका बलिष्ठ शरीर और सुरमयी आँख, सर पर सफ़ेद टोपी और कुरता और नीचे एक लुंगी पहने हुए थे. जुम्मन चाचा एक कसाई थे.

मैं उनसे मुस्कुराते हुए और शरमाते हुए बोली: आप मुझे फ्री में क्यों देंगे? मैं आपको पैसे देकर जाउंगी. और मम्मी मुझे बोली है की 1 किलो चिकन लेकर आउ.

जुमन चाचा मेरे पास बैठे और मेरी कमर में हाथ डाल कर बोले: अरे मेरी बिटिया रानी तेरी मम्मी मेरे से ही चिकन ले जाती है और वो भी फ्री.

मैं थोड़ी शरमाते हुए बोली: अच्छा मम्मी फ्री में क्यों ले जाती है? वो तो मुझे कभी नहीं बताई.

जुमन चाचा कुछ छिपाते हुए और हँसते हुए बोले: अरे सब बातें नहीं बताई जाती मेरी बिटिया. तू बोल अभी तुझे चिकन दे दू?

मैं उनके दाढ़ी पर हाथ फेरते हुए बोली: नहीं चाचा मुझे तो अब जानना है की आप मम्मी को फ्री में क्यों चिकन देते है?

उन्होंने मेरी कमर में हाथ डालते हुए मुझे अपने पास खींच लिया और मैं उनके सीने से चिपक गयी. वो मेरे चेहरे के पास अपने दाढ़ी वाले चेहरे को ला कर बोले-

चाचा: लगता है आज मेरी बिटिया सब कुछ जानना चाहती है.

मेरी चूचियां उनके सीने से चिपकी हुई थी और उनकी गरम-गरम साँसे मेरे चेहरे पर महसूस हो रही थी. मेरे अंदर भी अब आग सुलगने लगी थी. न जाने क्यों मैं उनकी आँखों में देखती चली जा रही थी. कुछ देर तक मैं कोई विरोध न की. तब वो अपने हाथ को मेरी नंगी कमर पर चलाने लगे और मेरी आँखें बंद होने लगी. फिर उन्होंने अपने मोठे होंठो को मेरे पतले-पतले होंठो पर रख कर उन्हें चूसना शुरू कर दिया. मैं कुछ समझ नहीं पा रही थी की क्या करू? ऐसा लग रहा था की आज मेरी सुहागरात हो और मेरे पति मेरे होंठो को चूस रहे हो.

थोड़ी देर बाद मैं भी उनकी दाढ़ी से खेलते हुए उनके होंठो को चूसने लगी और मैं उनकी बाहों में पूरी तरह से समा गयी. उन्होंने अपने हाथ को आगे बढ़ाते हुए मेरी चूचियों को दबाना शुरू कर दिया. मैं मदहोश होने लगी. फिर उन्होंने मेरे सदी के पल्लू को नीचे गिराया और मेरी ब्लाउज के भीतर क़ैद चूचियों को मसलने लगे. फिर जुम्मन चाचा उठे और मुझे अपनी बाहों में लेकर अंदर आये जहाँ मुर्गिया ही मुर्गिया थी. पास में कुछ पुआल रखे हुए थे. उस पर मुझे लिटाया और मेरे नंगी नाभि को चूमते हुए ऊपर की तरफ आये. फिर ब्लाउज को खोल कर मेरी चूचियों को चूसने लगे.

मेरी गोरी-गोरी दूध जैसी चूचियों को बड़े ही प्यार से चूस रहे थे और अपने एक हाथ को नीचे ले जा कर मेरी मुलायम चूत को मसल रहे थे. फिर जुम्मन चाचा उठे और अपने कुर्ते को निकाल दिए. उनका शरीर देख कर मैं कांप गयी. वो मेरे पापा की उम्र के थे और उनसे बहुत ही ज़्यादा बलिष्ठ और ताकतवर थे. फिर उन्होंने अपनी लुंगी को खोला तो उनका फनफनाता हुआ बड़ा सा लंड मेरे सामने आ गया. उनके लंड के ऊपर कोई चमड़ी नहीं थी. मैं अपने पति के लंड को देखि थी. उस पर चमड़ी थी पर इनका लंड का टोपा साफ़ नज़र आ रहा था आगे से सफ़ेद और पीछे काला.

उन्होंने मेरे मुँह के पास अपने लंड को लाया तो मैं चूसने से इंकार करने लगी. उसमे से बहुत ही अजीब गंध आ रही थी. फिर उन्होंने बड़े प्यार से मेरे माथे को सहलाया, तो मैं मुँह खोल कर हलके से उनकी टोपी को टच की. बड़ा ही अजीब लगा. फिर उन्होंने मेरे खुले मुँह में अपने लंड को बुरी तरीके से डाल दिया. बहुत ही मुश्किल से आधा ही लंड मेरे मुँह में आ पा रहा था. मुझे खांसी आ गयी और वो लंड को निकाले. फिर मैं उनके लंड को हाथ में पकड़ के उन्हें देखते हुए बड़े प्यार से चूसने लगी. कुछ देर चूसने के बाद चाचा नीचे आये और मेरी साड़ी को कमर तक उठा कर पैंटी को निकाल दिए.

मेरी चूत रसीली हो चुकी थी और बहुत ही ज़्यादा पानी छोड़ कर गीली हो गयी थी. मेरी चूत पर हलके-हलके बाल थे और अंदर से बिलकुल गुलाबी लाल थी. चाचा ने मेरी चूत पर थूक दिया और उसे और ज़्यादा गीली करने लगे. फिर अपने लंड को रगड़ते हुए मेरे चूत में डालना शुरू कर दिया. मेरी तो आँखें बंद थी और प्राण कहीं अटके हुए थे. लंड अंदर घुसता जा रहा था और मेरी सांस अटकती जा रही थी. चाचा ने बहुत ही ज़ोर का धक्का मारा और लंड को मेरी चूत में उतार दिया. मेरे पति का इतना बड़ा लंड नहीं था, इसलिए उनका लंड थोड़ी तकलीफ दे रहा था.

लंड अंदर जाते ही मेरी चीख निकल गयी. चाचा थोड़ी देर रुके और मेरे गाल और बाल को सहलाते हुए मेरे होंठो को चूमे. फिर मेरी चूचियों को दोनों हाथो से सहलाया तो मैं थोड़ी शांत हुई. तब चाचा आगे-पीछे करके मेरी चुदाई करना शुरू कर दिए. थोड़ी ही देर में मैं अपनी गांड उठा-उठा कर उनके लंड को अपनी चूत में लेने लगी. बड़े मज़े से मै अपनी चुदाई करवा रही थी. पास में मुर्गिया बड़े गौर से हमें चुदाई करते हुए देख रही थी और पक पक की आवाज़ निकाल रही थी. इधर जुम्मन चाचा मेरी चूत में लंड ठोकते हुए ठप ठप की आवाज़ निकाल रहे थे. मेरी पायल की छन छन की आवाज़ बहुत ही ज़्यादा माहौल को कामुक बना रही थी.

फिर जुम्मन चाचा ने मुझे कुतिया बना कर पीछे से चोदा और उसके बाद मुझे अपनी गोद में लेकर चोदे. फिर चोदते हुए वो जब झड़ने को हुए तो उन्होंने अपने लंड को बाहर खींचा और बाहर झड़ गए. मैं अचेत पड़ी रही. फिर वो अपने कपडे पहने और मुझे वैसे ही छोड़ कर चिकन बनाने लगे. थोड़ी देर बाद मैं उठी और अपने आप को ठीक की और उनके पास गयी. उन्होंने चिकन बना रखा था. चाचा ने मुझे अपनी गोद में खींचा और मेरे होंठो को चूमते हुए मेरी चूचियों को मसल दिया.

फिर वो बोले: तेरी माँ चिकन के लिए यही करती थी.

मैं थोड़ी नाराज़ हुई और फिर चाचा की तरफ देख कर उनके होंठो पर किश करके बोली: माँ फ्री के चिकन के लिए कभी भी आपसे चुदाई नहीं की थी. आपका इतना तगड़ा लंड है की कोई भी औरत आपसे चुदने को बेताब होगी.

बात सुन कर उन्होंने मुझे कस के अपने गले से लगाया और मेरे गाल और होंठ को चूम लिया और फिर उन्होंने मुझे जाने दिया. मैं घर आयी तो मम्मी मुझसे पूछी की इतनी देर क्यों हुई. तब मैंने उन्हें बता दिया की मैं दूकान पर बैठी थी, चिकन खत्म थी तो वहां का शॉप कीपर चिकन लाने चला गया था. तब मम्मी मान गयी. शाम को चिकन बनायीं और हम सभी ने खा कर खूब एन्जॉय किया. पर मेरी चूत में अब दर्द हो रही थी. मुझसे चला नहीं जा रहा था. ऊऊफफफफफ ये मीठा दर्द.

Read more sasur bahu sex stories

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Scroll to Top