पति नही था तो ससुर जी ने चूत की आग बुझाई

Sasur bahu chudai desi xxx story:- मेरा नाम संगीता है. मै डेलि इस साइट पर hindi sex stories पढ़ती हूँ। आज मै आपको अपने ससुर से चुदाई की कहानी बताने जा रही हूँ। ये बात तब की है जब मेरी नयी नयी शादी हुई थी। मेरे पति का नाम प्रत्युष है। प्रत्युष जी से मेरी शादी हुए अभी सिर्फ दो हफ्ते हुए थे की उनका ट्रांसफर मुंबई हो गया और वो वहाँ पहले चले गए. वो कुछ दिन बाद सेटल होकर मुझे बुलाने वाले थे.

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अब मैं अपने घर में अकेली ही थी, घर में मै और मेरे ससुर जी थे. सासु माँ का देहांत होकर अभी दो वर्ष होने को थे. एक दिन देर रात की बात है, मैं अपने कमरे में बैठ कर अपने पति की याद में मरे जा रही थी. मेरी चूत में खुजली होने लगी थी. तो मैंने प्रत्युष जी को कॉल किया. उन्होंने मेरे साथ फ़ोन सेक्स करना शुरू किया. मैं भी उनकी सुन-सुन के अपनी चूत मे उंगली करने लगी. मैंने अपने ब्लाउज और ब्रा के हुक को खोला और बूब्स को ढीला किया और अपनी साड़ी को उठा कर अपनी चूत में उँगलियों से अंदर-बाहर करने लगी.

मेरा पानी अभी निकला नहीं था और मैं गरम होने ही वाली थी की तभी वहाँ ससुर जी आ गए. उन्होंने मुझे ऐसी अवस्था में देख लिया. मैंने जैसे ही उन्हें देखा मैंने अपने आप को रोका और कपडे ठीक करने लगी. मैं शर्म से पानी-पानी हो गयी. थोड़ी देर बाद ससुर जी ने मुझे कमरे में बुलाया. मैं डरते-डरते उनके कमरे में चली गयी.

ससुर जी ने कहा: मैं समझ सकता हूं पति के न होने पर पत्नी शारीरिक सुख हो तरसती है.

फिर ससुर जी मेरे करीब आये और मेरी दोनों कंधो को पर अपने हाथ रखे और कहने लगे-

ससुर जी: चिंता मत करो आज मैं तुम्हे कुछ मज़े दिलाता हूँ.

मैंने कहा: मैं समझी नहीं.

फिर ससुर जी ने कहा: मुझे सब पता है बहू कि तुम कितनी बड़ी चुदक्कड़ हो, तुमने आते ही अपने देवर यानि मेरे छोटे लड़के से भी चुदवा लिया। पति से तो चुदवा ही रही थी।

मै डर गयी कि ससुर जी को ये सब कैसे पता चला।

ससुर जी: डरो मत हमारे परिवार में सब को आज़ादी है. तुम जो चाहो कर सकती हो. जाओ दरवाज़ा बंद करो.

मैंने फिर दरवाज़ा बंद किया. ससुर जी बेड पर बैठे और मुझे उनकी जांघ पर बैठने को कहा. मैं हिचकिचाते हुए बैठ गयी. उन्होंने मुझे कमर से पकड़ा और सहारा दिया. फिर उन्होंने मेरा पल्लू नीचे किया और ब्लाउज का हुक खोला. मैंने अपनी आँखें बंद कर दी. उन्होंने पीछे से ब्रा का हुक खोला और वैसे ही अपने एक हाथ से बूब्स दबाने लगे. पहले वो एक और फिर दोनों बूब्स दबाने लगे. जैसे वो बूब्स दबा और सहला रहे थे उससे पता चलता था की उन्हें औरतों के बारे में कितना अच्छे से पता था.

सिर्फ बूब्स दबाने भर से कुछ मिनटों में मुझे ससुर जी ने गरम कर दिया. अभी तो मेरे कपडे उतरे भी नहीं थे पर उनके छूने से अलग ही मज़ा आने लगा. मैं आँखें बंद करके वो महसूस कर रही थी. कुछ देर बाद ससुर जी ने मुझे खड़ा किया और मेरे कपडे उतारने लगे. ब्लाउज ब्रा नीचे फेंक दी उन्होंने. फिर साड़ी और पेटीकोट उतारा और पैंटी में बेड पर लेटने को कहा. मैं पैंटी में बेड पर लेट गयी. उन्होंने भी अपने ऊपर के कपडे उतारे और मेरे बाजु में आके बैठ गए.

फिर उन्होंने अपना एक हाथ मेरी पैंटी के अंदर सीधा डाल दिया. अब उनकी उँगलियों का जादू चला. उनकी उँगलियाँ सीधे मेरी चूत पर सहलाने लगी. उन्होंने ऐसे सहलाया जैसे एक लड़की की चूत के कोने-कोने से वो वाकिफ थे. और हो भी क्यों न अपनी पूरी ज़िन्दगी चूत और चुदाई का एक्सपीरियंस जो होगा. उनकी उँगलियों की चुदाई से ही मैंने अपना पानी पैंटी में उनके हाथ पे निकाला. फिर भी गीली चूत पर उनके गीले हाथ नहीं रुके. मैं अपनी चूत और गांड उठा-उठा कर मज़े ले रही थी.

कुछ देर बाद वो मेरे सामने नंगे हो गए और मुझे लंड चूसने को कहा. उनका लंड भी बड़ा था. उनका बड़ा लंड देख कर मैं समझ गयी की कहाँ से मेरे पति और देवर जी को विरासत मिली थी. मैं घुटनो के बल बैठ गयी और उनका लंड पकड़ कर हिलाने लगी. उनके लंड से एक ज़बरदस्त मरदाना खुशबु आयी जिससे मैं मदहोश हो गयी. मैंने उनका लंड चूसना शुरू किया और करीब 10-15 मिनट तक चूसा.

जब उन्हें लगा की उनका निकल जायेगा उन्होंने मुझे रोक लिया. कुछ देर बाद ससुर जी ने मुझे एक टेबल के पास खड़ा किया और मुझे झुकाया. फिर पीछे से उन्होंने मेरी चूत पर थूक गिराया और अपना लंड सेट किया. कुछ ही धक्को में उनका पूरा लंड मेरी चूत में था और उन्होंने चुदाई शुरू की. मेरी चुदाई ससुर जी करने लगे. ससुर जी मेरी चूत थोड़ी बेरहमी से ही मारने लगे. मैं उन्हें रोकने लगी पर उन्होंने मेरे दोनों हाथ पीछे पकडे और नीचे से लंड से चुदाई करने लगे.

मैं चिल्ला उठी: ससुर जी धीरे कीजिये. ही मैं मर जाउंगी. प्लीज ससुर जी प्लीज.

ससुर जी: ये क्या अभी तो शुरुआत है. तुम इतना भी नहीं ले सकती तो मेरे प्रत्युष को कैसे खुश करोगी? उसका तो अभी जवानी वाला लंड है. चुप रहो और चुदाई का मज़ा लो.

मैंने दर्द सहा और ससुर जी के सामने कुछ न बोल पायी. ससुर जी ने 15-20 मिनट तक चुदाई की और मेरी गांड पर सारा अपना माल निकाला. मैं बाथरूम में धोने लगी तो ससुर जी पीछे से आये और मुझे पूरे शरीर पर जगह-जगह टच करने लगे. वो कभी बूब्स दबाते तो कभी गांड पर तमाचा मारते. कभी चूत में ऊँगली करते तो कभी मुँह में उँगलियाँ डाल कर अंदर-बाहर करते. उनकी हरकतों में एक dominance था और एक मरदाना फीलिंग थी.

पता नहीं अपनी जवानी में तो उन्होंने कितनी लड़कियों की चूत का भोंसड़ा बनाया होगा. उस रात ससुर जी नंगे सो गए. पर मैं आधी रात को अपने कमरे आके नंगी सो गयी. सुबह देर से आँख खुली तो देवर जी कमरे में ही थे. मुझे नंगा देख कर उन्होंने भी अपना चांस मारा. वो मेरे पास आये और सुबह-सुबह वापस मुझे गरम करने लगे.

वो भी अपने कपडे उतार कर नंगे हो गए और मिशनरी जो उनकी favourite पोजीशन है उसमे मेरी चूत चुदाई 20 मिनट तक की.फिर उन्होंने कहा: मैं पिता जी से मिलके आ रहा हूँ कल फिर फाइनली आपने अपने ससुर जी के साथ चुदाई कर ही डाली. हम दोनों हंस दिए और इस तरह मेरी चुदाई में एक और एक्सपीरियंस शामिल हो गया. फिर मैं कुछ हफ्ते बाद अपने पति के साथ मुंबई चली गयी. वहाँ मेरी चुदाई मेरे दो जेठ जी ने की. दोनों ने मिल के कैसे मेरी चूत गीली की आप अगले पार्ट में ज़रूर पढ़िए.

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