अब तक अपने इस sasur bahu sex story में पढ़ा.. लोहा गरम देख बनवारीलाल ने एक बार फिर उसके हाथ को अपने लंड के ऊपर रखना चाहा तो कोमल तुरंत उठ गयी और कपडे पहनने लगी। बेचारा ससुर उठा और बाथरूम की और चल दिया. बनवारीलाल बाथरूम ने जाकर अपनी गर्मी निकालने के बाद बिस्तर पे जाकर लेट गया और सोचने लगा की आखिर बहु किस मिटटी की बनी हुई है को अपने आप को कण्ट्रोल कर लेती है दोनों बूब्स एक साथ चूसने से तो सिर्फ एक बार चूसने में ही उसकी साली मोहिनी ने खुद ब खुद अपनी टांग उठा ली थी.अब आगे..
Part 7 => सेक्सी बहू कोमल की चुदाई का सपना – 7
इधर कोमल धम से बिस्तर पर लुढ़क गयी, उसका पूरा शरीर जल रहा था लेकिन वो बहोत शर्म महसूस कर रही थी की आज पहली बार वो खुद अपने बेड पर एक पराये मर्द के साथ थी। उसे एक एक घटना याद आने लगी की कैसे बाबू जी उसको अपना लंड पकड़ा रहे थे और कैसे वो बाबू जी के लंड पर अपनी चूत पटक रही थी।
हे भगवान् ये मुझे क्या हो रहा है कैसे मैं इतनी बेशरम हो जाती हूँ।
और एक बार फिर उसकी चूत में खुजली होने लगी और उसका हाथ अपने आप वहाँ पहुंच गया. उधर जब बाबू जी को कोमल का अपने लंड पर चूत पटकना याद आया तो उन्हें अपनी साली मोहिनी की याद आ गयी वो भी गरम होने पर ऐसे ही बनवारी लाल के लंड पर अपनी चूत पटकती थी. मोहिनी शांति से चार साल छोटी थी जब बनवारी लाल की शादी हुई थी तब शांति 22 और मोहिनी 18 साल की थी लेकिन शकल और फिगर में मोहिनी शांति से बीस नहीं बल्कि बाइस थी.
जैसा उसका नाम था वैसी ही वो मन को मोह लेने वाली थी। बनवारी लाल ने जब से मोहिनी को देखा तभी से वो उसके रूप और जिस्म का दीवाना हो गया था। वैसे भी दुनिया भर के जीजाओं के लिए उनकी सालिया सबसे सॉफ्ट टारगेट होती है और सालिया भी जानती है की जीजा साली का रिश्ता कुछ अलग तरीके का होता है इसलिए वो जीजा की छेड़ छाड़ का बुरा नहीं मानती. बनवारी लाल भी ससुराल जाता तो मोहिनी को छेड़ने का कोई मौका नहीं छोड़ता, कभी उसके बूब्स को दबा देता तो कभी उसकी गांड पर हाथ फेर देता। मोहिनी भी शर्मा के भाग जाती, लेकिन हमेशा सतर्क रहती के माँ या दादी न देख पाए।
धीरे धीरे बनवारी लाल से लिप टु लिप किश करना भी शुरू कर दिया. उसका ससुराल सिर्फ पांच किलोमीटर के फासले पर था, इसलिए वो कई बार अकेले भी चला जाता। जब वो अकेला आता तो मोहिनी कुछ ज्यादा ही चहकने लगती और पूरा समय अपने जीजू के आगे पीछे घूमती रहती। शायद उससे भी जवानी संभालना मुश्किल हो गया था. क्योकि बात अब यहाँ तक पहुंच गयी थी की अगर ससुराल में कोई नहीं होता तो बनवारी लाल मोहिनी के चूचे भी चूसने लगा था। उसके हाथ मोहिनी के पूरे भूगोल को नाप चुके थे और कई बार वो मोहिनी की पैंटी के अंदर भी हाथ डाल चुका था.
ऐसे ही एक दिन बनवारी लाल अकेले ही ससुराल पहुंचा और दरवाजे पर मोहिनी उसे देखते ही खिल उठी अंदर पहुंचने पर पता चला की सास ससुर दोनों दूसरे गाँव गए है। मोहिनी के अकेले होने की बात से बनवारी लाल भी मस्त हो गया और फिर शुरू हुई नोच घसोट दस मिनट में ही मोहिनी का कुरता जमींन पर पड़ा था और ब्रा कुर्सी पर. बनवारी लाल मोहिनी के कच्चे निम्बू पर टूट पड़ा, उसने काट काट का पूरी चूचि लाल कर दी। मोहिनी सिर्फ सिसकारियां ले रही थी, बनवारी लाल आज खाली नहीं जाना चाहता था, उसने अपनी पेण्ट खोली और नाग फनफनाता हुआ बाहर आ गया.
बनवारी लाल का हथियार देखते ही मोहनी की सांसे थम सी गयी, 8 इंच लम्बा और बेहद मोटा, वो भूरे रंग का घोडा पछाड़ सांप की तरह दिख रहा था। मोहिनी आज पहली बार किसी जवान मर्द का लंड देख रही थी आज के पहले उसने बच्चो की लुलियाँ ही देखि थी. उसे पता नहीं था की जवान मर्द का लंड इतना बड़ा होता है, बनवारी लाल ने लंड मोहिनी के हाथ में थमा दिया। हाथ में लंड आते ही मोहिनी के पुरे शरीर में झुरझुरी दौड़ गयी। बनवारी लाल फिर उसे चूमने लगा, मोहिनी अभी भी सिर्फ लंड पकड़े हुए थी कुछ कर नहीं रही थी तो बनवारी लाल बोला..
बनवारी लाल – बस पकड़ के रखोगी क्या?
मोहिनी – तो क्या करू?
बनवारी लाल – खेलोगी नहीं इससे?
मोहिनी – ये कोई खिलौना है क्या – मोहिनी शरमाते हुए बोली.
बनवारी लाल – लडकिंयां जब जवान हो जाती है तो इससे ही खेलती है.
मोहिनी – छी.. मुझे नहीं खेलना कितना खतरनाक खिलौना है.
बनवारी लाल – तो क्या हुआ तुम्हारे जैसी दिलेर लड़की को टु खतरों से खेलना चाहिए.
मोहिनी – जी नहीं मैं कोई दिलेर विलेर नहीं हूँ.
बनवारी लाल – अच्छा थोड़ा इसे सहला तो दो बेचारा कब से तुम्हारा प्यार मांग रहा है.
मोहिनी – अच्छा दीदी प्यार नहीं देती क्या इसको?
फिर वो धीरे धीरे हाथ चलाने लगी.
बनवारी लाल – दीदी की छोडो इसे तुम पसंद हो एक दिन ये कह रहा था की हमारे साथ धोखा हो गया अगर पहले तुम्हे देख लेते तो तुम्ही से ब्याहते.
मोहिनी – ओह्ह्ह.. बड़े आये मेरी दीदी भी हजारो में एक है.
बनवारी लाल – मगर जानू तुम तो करोडो में एक हो, तुम जन्नत का टुकड़ा हो इस धरती पर.
मोहिनी – ज्यादा माखन मत लगाइये और फिर मोहिनी ने जोर से लंड दबा दिया जिससे बनवारी लाल की चीख निकल गयी..
बनवारी लाल अब और आगे जाना चाहता था, तो वो मोहिनी के कंधो पर हाथ रख कर उसे निचे बैठाने लगा मोहिनी कुछ समझी नहीं और उसकी तरफ देखने लगी। बनवारी लाल ने उसे बैठने को कहा तो वो घुटनो के बल बैठ गयी अब बनवारी लाल का मुसल ठीक उसके मुँह के सामने था.
बनवारी लाल – इसे मुँह में लेकर चुसो.
मोहिनी – क्या? ये कोई मुँह में लेने की चीज है ये तो गन्दी चीज है.
बनवारी लाल – कौन बोला तुम्हे की ये गंदी चीज हैं सब चूसते है इसे तुम्हारी दीदी भी चूसती है.
मोहिनी – झूठ मत बोलिये वो ऐसा क्यों करेगी.
बनवारी लाल – पगली इससे लड़का लड़की दोनों को मजा आता है चलो पहले इसको किश करो –
मोहिनी पहले से ही लंड हाथ में पकडे पकडे बहोत गरम हो चुकी थी, सो बिना ज्यादा आना कानि किये सुपाडे पर किश कर दी, फिर बनवारी लाल ने कहा की और करती रहो तो वो पुरे सुपाडे के चारो और चूमने लगी. वो खुद भी बहोत गरम हो चुकी थी। जवान मर्द का लंड किसी भी जवान लड़की को ललचाने की कुव्वत रखता है जब बनवारी लाल ने देखा की साली साहिबा लंड में रूचि ले रही है तो उसने धीरे से कहा “जानू मुँह में लेके चुसो खूब मजा आएगा”.
मोहिनी खुद भी गरम तासीर की लड़की थी इसलिए उसने सुपाड़े को अपने मुँह के हवाले कर लिया। मोहिनी को एक अजीब सा गर्व का एहसास हो रहा था, मर्द अपनी जिस मर्दानगी पर घमंड करता है आज वो मर्दानगी उसकी गिरफ्त में थी। उसकी हर खुशी अब उसके रहमो करम पर थी, तो जीजू को खुशियों के सैलाब में डूबने के लिए वो जोर जोर से उनका लंड चूसने लगी. मोहिनी जिस जोश से अपने प्यारे जीजू का लंड चूस रही थी वैसी उम्मीद बनवारी लाल को भी नहीं थी। जिस मोहिनी का वो खवाबो में मुँह चोदता था आज वो साक्षात उसका लंड चूस रही थी। इस सीन ने बनवारी लाल को अति कामुक बना दिया, उसकी गोटियों में वीर्य उबाल मारने लगा, उसने मोहिनी के सर को पकड़ा और अपनी कमर चलाने लगा.
ये एक स्वाभाविक क्रिया भी है की अक्सर स्खलन से पहले मर्द सेक्स को खुद हेंडल करने लगता है अब मोहिनी लंड चूस नहीं रही थी, बल्कि बनवारी लाल उसका मुँह चोद रहा था. जब बनवारी लाल उत्तेजना के चरम शिखर पर पहुंचा टु वो लम्बे लम्बे झटके लगाने लगा और फिर एक लम्बे झटके के साथ उसने अपना लंड मोहिनी के गले तक उतार दिया और उसके गले में अपनी मलाई भर दी.
एक बार जब जीजा साली के बीच हया की दीवार टूटी तो फिर दोनों ठरकी बन गए। बनवारी लाल दो महीनो की छुट्टी आया था, इन दो महीनो में उसने करीब एक दर्जन बार मोहनी को अपना लंड चुसवाया था। मोहिनी की जो बात बनवारी लाल को दीवाना बना गयी थी वो थी उसकी लंड चूसने की कला. मोहिनी बड़े शौक और चाव से लंड चूसती थी और उसके दूसरी तरफ उसकी बहन शांति को लंड चूसना पसंद नहीं था। बड़ी मिन्नतें करने के बाद वो जरा सी देर के लिए लंड अपने मुँह में लेती थी, कही बोलती उबकाई आ रही है तो कही बोलती उलटी हो जाएगी।
हलाकि ये अलग बात है की कभी उलटी हुई नहीं. आम भारतीय पत्नियों की तरह जब शांति लंड चूसती तो उसका मुँह देख कर ऐसा लगता जैसे कोई सजा भुगत रही हो। लेकिन मोहिनी पूरी मस्ती के साथ जीजा का लंड चूसती थी। जब लंड उसके मुँह में होता तो उसके चेहरे के भाव ऐसे होते जैसे किसी बच्चे को उसका मन पसंद खिलौना मिल गया हो. सबसे बड़ा बोनस पॉइंट ये था की उसको बनवारी लाल की मलाई खाना भी पसंद था, जो शायद विदेशी लड़कियों भी ज्यादा पसंद नहीं करती। कहते है की अगर कच्ची उम्र में लड़की को लंड का स्वाद मिल जाये तो फिर उसकी संभालना मुश्किल हो जाता है.
वही हाल मोहिनी का था जब भी बनवारी लाल उसके पास होता तो वो खुद ही उसका लंड निकाल लेती और जब तक वो दोनों एकांत में होते वो लंड से खेलती रहती। बनवारी लाल के शरीर का ये अंग अब मोहिनी की कमजोरी बन गया था. इधर बनवारी लाल पर भी दीवानगी छाई हुई थी, यहाँ तक की उसने एक दो बार मोहिनी को अपने साथ भाग चलने को भी कहा, पर मोहिनी ने मना कर दिया क्योकि वो कामाग्नि में जल जरूर रही थी, पर अपनी सगी बहन का घर बर्बाद नहीं करना चाहती थी.
उसने जीजू को कह दिया की “जीजू मैं दीदी को धोखा नहीं दे सकती बाकी आप बेफिक्र रहो आप जो चाहोगे आपको वो सब मिलेगा ये मोहिनी का वादा है”
फिर बनवारी लाल वापस ड्यूटी पर चला गया, लेकिन उसका दिल तो मोहिनी के पास ही रह गया, ड्यूटी के समय वो सिर्फ मोहिनी के सपने ही देखता रहा की कैसे मोहिनी का उद्धघाटन करेगा। 6 महीनो बाद वो फिर घर आया तो 2 दिन तक 6 महीनो की गर्मी शांति पर उतारता रहा और फिर ससुराल जा पहुंचा। ससुराल में मोहिनी ने जी भर कर सेवा की पर लंड चुसाई से ज्यादा कुछ करने का मौका ही नहीं मिल पाया। जबकि बनवारी लाल के दिल का हाल ये था की “ये दिल मांगे मोर”..
लगभग एक हफ्ते बाद सुबह सुबह मोहिनी बनवारी लाल के घर चली आयी, वो घर में बोलकर आयी थी की कॉलेज से दीदी के घर जाउंगी और शाम तक लौटूंगी लेकिन वो सुबह ही बनवारी लाल के घर आ गयी घर में बनवारी लाल के आलावा कोई नहीं था, सब एक रिश्तेदार की शादी में गए हुए थे और बनवारी लाल को शाम को जाना था. ऐसे मोके पर मोहिनी को देख बनवारी लाल का दिल बल्लियों उछल गया। उसने आज ही किला फतह करने की ठान ली। बनवारी लाल वैसे तो जानता था को मोहिनी ज्यादा न नुकुर नहीं करेगी, लेकिन वो किसी तरह की हिचक शर्म की सम्भावना को बिलकुल ख़तम कर देना चाहता था.
उसके पास मिल्ट्री कोटे की ब्लैक डॉग स्कॉच पड़ी थी, वो उसको निकल लाया और साथ में ले आया शरबत जो घर में ही पड़ा था। मोहिनी शराब को देख कर घबरा गयी और बोली..
मोहिनी – दारु क्यों ले आये हो?
बनवारी लाल – दारु नहीं ये मूड फ्रेशनर है बहोत मॅहगी वाली है, स्पेशलय तुम्हारे लिए खरीदी है.
मोहिनी – क्या? पागल तो नहीं हो गए हो मैं दारु पिऊँगी?
बनवारी लाल – अरे इससे नशा नहीं चढ़ता समझी.. बस थोड़ी पी लेना फिर एन्जॉय करेंगे..
मोहिनी – नहीं एक बून्द भी नहीं मुझे घर भी जाना है.
बनवारी लाल – तुम्हे मुझपर भरोसा है के नहीं? जब बोल रहा हूँ की कुछ नहीं होगा फिर क्यों हल्ला मचा रही हो और घर तो शाम को जाओगी.
मोहिनी – आप समझते क्यों नहीं लड़कियां दारु पीती है क्या?
बनवारी लाल – फिर दादू दारु चिल्ला रही हो जब बोल दिया है की नशा नहीं होता तो बस जरा सा शरबत में मिला कर पी लेना मेरा बना बनाया मूड मत ख़राब करो.
फिर बनवारी लाल ने अपने लिए एक लार्ज पेग बनाया और मोहिनी को शरबत में लगभग डेढ़ पेग मिला कर दे दिया, मोहनी जीजा के सामने मजबूर हो गयी या शायद वो भी इस अनुभव को पा लेना चाहती थी या शायद बनवारी लाल के लिए वो किसी भी हद को पार करने को तैयार थी। धीरे धीरे दोनों पीने लगे मोहिनी बहुत शर्मिंदा महसूस कर रही थी. लेकिन बनवारी लाल के चेहरे पर एक कुटिल मुस्कान थी, क्योकि वो जानता था की मोहिनी आज वैसी नहीं लौटेगी जैसी आयी थी.
पढ़ते रहिये.. क्योकि ये हिंदी सेक्स स्टोरी अभी जारी रहेगी.
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