साली बनी पूरी घरवाली – 3

Sali ki chudai jiju se:- फिर ज़ारा मेरे और क़रीब आ गयी और अपना कुरता हल्का सा ऊपर उठाया और मेरे सर को अपने कुर्ते के अंदर दाल दिया ये लड़की क्या करने लगी है अब?  मैं थके थके मन के साथ सोचने लगा. साहिल मैं अभी अपना राइट ब्रैस्ट निकालूंगी ब्रा से, आप तीन मिनट तक चूस सकते है लेकिन ख्याल रहे के हाथ नहीं लगा सकते आप। ये ज़ारा क्या कह रही थी. ज़ारा मुझे कभी साहिल नहीं कहती थी, ये पहली दफा शायद उसने मेरा नाम लिया था.

पार्ट 2 => साली बनी पूरी घरवाली – 2

Sali ki chudai jiju se

मेरी तो हालत इतनी ख़राब थी उठ भी नहीं पा रहा था. वो खुद थोड़ा नीचे आ गयी और एक हाथ अपना राइट ब्रैस्ट ब्रा से बहार निकाल दिया, मेरा सर उसके कुर्ते कर अंदर था और मैं ब्रा भी देख रहा था और ब्रैस्ट भी लेकिन मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी के कुछ करू. मैंने आंखें बंद कर ली और सब कुछ भूल कर किसी तरह दर्द से बहार आने की कोशिश में सक्कों के साथ लेटना ही मुनासिब समझा. तीन मिंट के बाद ज़ारा ने मेरा सर अपने कुर्ते से निकाल दिया और ब्रैस्ट को वापस ब्रा में डाला और अपने आप को ठीक करने लगी.

देखो मैंने आप का ख्याल रखा और ऑफर किया था लेकिन आपने मौके से फायदा नहीं उठाया ज़ारा ने हँसते हुए मुझे कहा.

उस को मेरी तकलीफ का शायद कुछ ज्यादा एहसास नहीं था. मेरी आंखे आधी खुली थी और मुझे नींद सी आने लगी थी।

इतने में मुझे ज़ारा की आवाज़ आयी “आप ये बात बस याद रखियेगा आपकी ये बॉल्स मेरी है और जब आप बात नहीं मानेगे सजा इनको मिलेगी”.

मैं सिर्फ यहाँ से निकल जाना चाहता था, इसलिए मैं उठा और जाने की तैयारी करने लगा। लेकिन मेरे नीचे वाक़ई बहोत दर्द शुरू हो गया था.

ज़ारा हम जा रहे है तैयार हो जाओ मैंने दो टूक अल्फाज़ में कहा और पेंट वापस पहन ली और खड़ा हो गया लेकिन दर्द मेरे लिए मुसीबत बन गया. सही तरीके से खड़ा भी नहीं हो पा रहा था.

आप अगर अपने आप को डिस्चार्ज कर लो तो आराम आ जायेगा ज़ारा किसी डॉक्टर की तरह मुझे मश्वरा दे रही थी.

दफा हो जाओ मैं ग़ुस्से में आ गया हमारे दरमियान अब कुछ पर्दा नहीं रह गया था और ये मेरी बीवी भी नहीं थी. समझ नहीं आ रहा था के ये मुझसे चाहती क्या है.

अगर आपने दोबारा इतनी ज़ोर से मुझे कुछ कहा तो मैं इस की सजा आपकी बॉल्स को दूँगी ज़ारा काफी सीरियस अंदाज़ में कह रही थी.

मै थोड़ा डर भी गया था क्योकि अगर वाक़ई दोबारा मेरी बॉल्स इसके हाथ में आ गयी तो ये डेफिनाटेली मुझे मार देगी.

ज़ारा तुम चाहती क्या हो आखिर?  मैं झुंझुला के बोला

“आप हर वो काम करेंगे जो मैं कहूँगी और कोई सवाल नहीं पूछेंगे”.

ज़ारा की बात सुन कर मेरा हाथ उसको मारने के लिए उठने ही वाला था के वो उठ कर खड़ी हो गयी और ये देख के मैं थोड़ा पीछे हो गया.

आप को दर्द हो रहा है?  ज़ारा ने मेरे ग़ुस्से को नज़र अंदाज़ करते हुए पुछा.

ज़ाहिर है दर्द तो हो रहा था वो बेड पैर बैठ गयी और मुझे क़रीब बुलाया मैं दरवाज़े के क़रीब था. मैं क़रीब नहीं जाना चाहता था और वो समझ गयी.

मै आपका दर्द कम करना चाहती हूँ ज़ारा ने आहिस्ता से कहा।

तो मैं क़रीब गया. उसने मेरी पेंट की ज़िप खोलनी चाही तो मैं फ़ौरन दूर हो गया और वो ग़ुस्से में आ गयी.

अगर आप अब हटे तो अच्छा नहीं होगा ज़ारा के चेहरे पैर ग़ुस्सा था.

अब मैं और भी डर रहा था के आगे उसने दोबारा बॉल्स को पकड़ के दबाया तो मै तो गया काम से. तो मैं डरते हुए उसके पास गया वो बेड पैर बैठी हुई थी. उसने आराम से मेरी पेंट की ज़िप खोली और अंदर हाथ डाला मेरी अंडरवियर के पी होल से हाथ अंडरवियर के अंदर डाला और बॉल्स को खिंच कर बहार निकाल लिया.. मेरी हलकी सी कराह निकल गयी मुँह से क्योकि तकलीफ में थी मेरी बॉल्स. तो उसने बहोत हलके हल्के से सहलाना शुरू कर दिया और दोनों हाथों से मसाज देना शुरू किया तो हल्का से आराम महसूस होने लगा। लेकिन आराम नहीं मिल पा रहा था मेरी शकल पर तकलीफ अभी तक थी. ज़ारा मसाज हलके हलके कर रही थी और फिर उस ने अपना कुरता उतर दिया

“ज़ारा ये क्या?” मैं सख्ती से बोल ही रहा था के ज़ारा ज़ोर से बोली “खामोश” और मैं छुप हो गया.

ज़ारा ख़ामोशी से मेरी बॉल्स का मसाज कर रही थी, लेकिन इस वक़्त वो सिर्फ ब्रा में थी और मैं अब उसको देख कर एक्साईटेड होने लगा था. थोड़ी देर में मेरा लंड खड़ा हो गया. लेकिन वो अंडरवियर के अंदर ही था. ज़ारा ने ये बात महसूस कर ली थी

“आप तैयार है तो डिस्चार्ज हो जाओ आराम आ जायेगा” वह मुझे इंस्ट्रक्शंस दे रही थी “आप उलटे हाथ से इसको बहार निकालो”

मैं इसकी बात क्यों मानु मेरी समझ नहीं आ रहा था. लेकिन अभी मैं बहस करने की पोजीशन में नहीं था. मैंने उलटे हाथ से अपना लंड अंडरवियर से बहार निकाल दिया. डिस्चार्ज आपको खुद होना पड़ेगा मैं डिस्चार्ज नहीं कर सकती लेकिन डिस्चार्ज आप मेरी क्लीवेज पर होंगे  ज़ारा वो बाते कर रही थी जो मैं कभी अपनी टीन एज में सोचा करता था. लेकिन ये तो हक़ीक़त में मुझे इंस्ट्रक्शंस दे रही थी.

ज़ारा 32सी का पर्पल ब्रा पहने हुए थी. मैंने अपने लंड को रब करना शुरू किया वो हार्ड हो तो रहा था लेकिन बॉल्स में दर्द की वजह से काफी टीज़ कर रहा था. ज़ारा मेरी आंखों में देख रही थी और दोनों हाथों से अपने दोनों ब्रैस्ट दबा रही थी और मैं लंड रब किये जा रहा था के किसी तरह डिस्चार्ज हो जाऊं और सकूं मिले. लेकिन मै डिस्चार्ज की तरफ नहीं जा रहा था ज़ारा समझ गयी थी मेरी हालत, तो वो बेड पर खड़ी हो गयी और इस दफा उसने अपन लेफ्ट ब्रैस्ट ब्रा से बहार निकाल दिया.

इसको चूसो जब तक मैं छोड़ने के लिए न कहूँ,  मैं अभी कोई बहस नहीं करना चाहता था. सामने ब्रैस्ट देखि और मुँह में ले लिया. ज़ारा की ब्रैस्ट वाक़ई मस्त थी, काफी फर्म और सख्त भी. मैंने निप्पल पर चूसना शुरू किया और उस ब्रैस्ट की खूबसूरती में गुम हो गया. थोड़ी देर में ही मुझे ज़ारा की आवाज़ आयी

“छोड़ दो”

मैं अभी छोड़ने की पोजीशन में नहीं था. शायद मैं अपने पीक पर पहुँच गया था. तो मैंने कहा दो मिंट रुक जाओ।

तभी अचानक उसने ब्रैस्ट वापस खिंच ली और अभी आंख भी नहीं खोल पाया था के उसने बॉल्स को फिर से पकड़ लिया.

“नहीं नहीं प्लीज नहीं मैं यह नहीं बर्दाश्त कर पाऊंगा.. ज़ारा प्लीज जो कहोगी मैं करूगा अभी ये छोड़ दो प्ल्ज़्ज़”

स्लप्प्प्प  अह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह्हह पलज़्ज़ज़्ज़ज़ अह्ह्ह्हह ओह्ह्ह्हह्ह. स्लप्प्प्प  अह्हह्ह्ह्ह प्ल्ज़ नो नो ना ओह्ह्ह्हह्ह अह्ह्ह्हह. स्लप्प्प्प  अह्ह्ह्हह्ह्ह्ह प्ल्ज़ नहिई ग़लती हो गयी प्लीज जो आह. स्लप्प्प्प  ओह्ह्ह्हह्ह प्ल्ज़ जाने दो आआआआ मर्डरर ग्याआ अह्हह्ह्ह्ह. स्लप्प्प्प  ओह्ह्ह्हह्ह्ह्हह अह्ह्ह्हह्ह्ह्हह छहोड़द्ध दो पलज़्ज़ज़्ज़ज़्ज़ज़.

मैं बेड पर गिर पड़ा और मैं दर्द की शिद्दत से निढाल हो कर सो गया और मेरी आँख लग गयी और कितनी देर तक सोता रहा कुछ पता नहीं चला. जब मैं उठा जो दो घंटे गुज़र गए थे तकलीफ कम हो गयी थी. थोड़ा उठ कर देख तो ज़ारा मोबाइल फ़ोन कर चैटिंग कर रही थी और मुझे उठता देख कर बोली

“आप कैसा फील कर रहे है?”

“मैं ठीक हूँ” मैंने आहिस्ता से कहा.

सच बात ये थी के मैं थोड़ा डर गया था मुझे लगता था के ये लड़की कुछ पागल हो गयी है और मैं इस कमरे में मरना नहीं चाहता था.

ज़ारा चले क्या काफी लेट हो गए है

मैं बस निकलना चाहता था होटल से और घर जाना चाह रहा था.

ठीक है चले लेकिन पहले एक बात क्लियर कर लेते है ज़ारा काफी कॉंफिडेंट थी और शायद वो जानती थी के क्या कह रही है.

हाँ बोलो  मैंने बेज़ार से लहजे में कहा

“मेरा आपसे कोई ऐसी रिलेशनशिप नहीं है जिससे बाजी को इफ़ेक्ट पड़े आप मेरी बात मानेगे और जिस तरह कहूँगी बिलकुल वैसे ही करेंगे न ज्यादा न कम”

ज़ारा वही बात कह रही थी जो रूम में आते ही उसने कही थी. पहले ही मान लेता तो इस मुसीबत से न गुज़रता.

मैंने थोड़ी देर रुक कर पूछा  ज़ारा तुम चाहती क्या हो?

ज़ारा ने मुझे सिंपल सा जवाब दिया  आप मेरे ओबीडियन्ट (आज्ञाकारी) रहे.

ठीक है अब चले मैंने बात ख़तम करने के अंदाज़ में कहा और उठ कर खड़ा हो गया.

ज़ारा भी तैयार थी उसने अपना स्कार्फ़ सही क्या पर्स उठाया और हम दोनों होटल से निकल आये इस वक़्त चार बज चुके थे हम लोग कार में बैठ गए और ड्राइविंग अब घर की तरफ थी.

आप को आज तकलीफ हुई होगी पहली दफा था न इसलिए ज़ारा ने बात शुरू की.

तो मैंने उसकी तरफ देखा “क्या मतलब पहली दफा था? ये आखरी दफा भी था” मैंने दो टूक अल्फ़ाज़ में ज़ारा को वाज़ेह करने की कोशिश की..

आप इस को इस तरह समझ ले के मैं आपकी टीचर हूँ और अगर आप मेरी बात नहीं मानते तो मैं सज़ा दूँगी ज़ारा जो सोच कर बैठी थी वो मुझ से शेयर करने लगी.

लेकिन मुझे ये मंज़ूर नहीं है मैंने ज़ारा को दो टूक अल्फाज़ में कहा.

आप मुझसे वादा कर चुके है बात मानने का आपको मश्वरा दूँ आपको इसको मुसीबत नहीं बल्कि टीज़ और सेंसेशन समझे आप भी एन्जॉय करेंगे” ज़ारा किसी प्रोफेशनल की तरह मुझे समझा रही थी.

अच्छा ठीक है मैं सोचूंगा मैंने बात ख़तम करनी चाही और ड्राइविंग तेज़ कर दी.

हम घर एक साथ नहीं जा सकते थे इसलिए मैंने ज़ारा को घर से दूर छोड़ दिया और ड्राइव करते हुए घर आ गया।

ज़ोया घर पर थी. आते ही वो मेरा ब्रीफ़केस ले कर चली गयी और किचन में खाना निकालने लगी और मैं लिविंग रूम में आ गया ज़ोया मसरूफ थी किचन में और ज़ारा अभी नहीं पोहोंची थी. ज़ोया ने खाना लगा दिया था और मैं वाक़ई भूखा हो गया था खूब डट कर खाना खाया, लेकिन दर्द अभी भी मौजूद था. ज़ोया अपने बारे में बता रही थी के आज कोमल के घर में इवेंट कैसा रहा और फिर घर की कुछ बाते चलती रही.

फिर टीवी शुरू किया प्रोग्राम पर तब्सरा करने लग गयी. थोड़ी देर में ज़ारा आ गयी मै तो उससे आंख नहीं मिल पा रहा था लेकिन वो बिलकुल नार्मल थी और वैसे ही बाते कर रही थी जैसे अमूमन वो करती है. मैं भी नार्मल रहने की कोशिश कर रहा था और ज़ोया को सोने का कह कर कमरे में चला गया और कमरे में जा कर लेट गया और आज के दिन के बारे में सोचने लगा के हुआ क्या है.

सब कुछ मेरे मैं में घूम गया पहले तो काफी ग़ुस्सा आया के ये लड़की मेरे साथ इस तरह कैसे कर सकती है. लेकिन ज़ारा की एक बात शायद मेरे मन में रह गयी. “इसको मुसीबत नहीं बल्कि टीज़ और सेंसेशन समझो आप भी एन्जॉय करेंगे”.

ये तो वो हुआ था मेरे साथ जो मेरी फैंटसीज हुआ करती थी शादी से पहले सिर्फ प्रॉब्लम ये थी के लड़की मेरी सली निकल आयी थी. जो के मेरे लिए सब से ज्यादा मुसीबत वाली बात थी. लेकिन मैं थोड़ा बहोत शायद मुतमइन सा हो गया था और मेरी नाराज़गी और ग़ुस्सा काफी हद तक कम हो गया था.

मैंने लाइट बंद की और सोने के लिए आंखे बंद कर ली अब शायद मेरा ग़ुस्सा एक्साईटमेंट में तब्दील हो चुका था और मैं इत्मीनान से सो गया.

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