Jija sali ki mast chudai story:- ज़ोया को मैंने ये कह तो दिया था, के हम अपनी दिल की ख्वाहिशें पूरी कर लेनी चाहिए बेबी से पहले और उसी वक़्त से ही मेरे मन में काफी चीज़ें चलना शुरू हो गयी थी. जो जो फैंटसीज मैंने अपनी कम उम्र में सोची थी, मैं उन्हें दोबारा सोचने लगा के वो बातें अपनी ज़ुबान पर लाऊं के नहीं. पाता नहीं ज़ोया क्या सोचेगी, हस्बैंड और वाइफ के दरमियान एक रेस्पेक्ट का रिश्ता भी होता है. अगर हम इतना ज्यादा ओपन हो जाते है एक दूसरे के साथ तो या तो हम बहुत ही एक दूसरे के क़रीब आ जायेंगे या फिर काम बिलकुल उलट भी हो सकता है. यानि हम एक दूसरे से बहुत दूर भी जा सकते है.
Jija sali ki mast chudai story

ऑफिस में भी मेरे मन में यही बातें घूमती रही और दो दिन तक मैं काफी इस बारे में सोचता रहा और सच कहूँ तो मेरा दिल नहीं माना के में अपनी वाइफ को, जो इतनी यंग और खूबसूरत हो और मै उससे ऐसी बातें करू. लेकिन मन शैतानी होता है और कुछ न कुछ मेरे अंदर था जो मुझे ऐसा करने को मजबूर कर रहा था के मैं ये अपनी वाइफ से शेयर करू.
वीकेंड आ गया और हम लोग मेरे इनलॉस के घर चले गए, हमें खाने पर इन्वाइट किया गया था और मेरे सास और ससुर दोनों ही काफी अच्छे लोग थे। बहुत आव भगत करते थे. मेरी वाइफ की दो और बहने और एक भाई है, बहने दोनों छोटी है और पढ़ रही है। नाइन्थ और फर्स्ट ईयर में और भाई बीए कर रहा है. हम लोग अक्सर खाना खाने के बाद कैरमबोर्ड खेला करते है और चाय का दौर चलता है फिर कुछ टीवी प्रोग्राम्स पर बात करते है और अपने घर की तरफ वापिस.
लेकिन इस दफा काफी लेट हो गए, कैरम खेलते हुए इसलिए मेरी सास ने हमें रोक लिया और अगले दिन जाने को कहा. मैंने भी सोचा के चलो आराम से नाश्ते के बाद चले जायेंगे. उन्होंने हमें हमारे साले का कमरा दे दिया वहां पर दो सिंगल बेड्स थे, लेकिन क्योकि कमरा बाहर था, इसलिए वो हमें दे दिया गया. मै कपडे बदल कर कमरे का जायजा लेने लगा। ज़ोया कपड़े बदलने चली गयी, कुछ किताबे बुक शेल्फ में, मुझे इंटरेस्ट की नज़र आयी, एक किताब निकालकर देखने ही वाला था, की दो सीडी किताब से निकल के नीचे गिर गए. सीडी ब्लेंक थे तो मुझे कुछ कुछ समझ आने लगा के इन सीडी में क्या हो सकता है, क्यूंकी सीडी का कवर ब्लेंक था बुक्स के बीच में छुपाई गयी थी और कमरा भी साले साहब का था।
मैंने दोनों सीडी वापस रख दी और किताब को देखे बगैर ही वापस शेल्फ में रख दिया. थोड़ी देर में ज़ोया भी आ गयी और हम दोनों सोने की तैयारी करने लगे। वाइफ हमेशा मायके में ज्यादा पुरसकून और आराम महसूस करती है, इसलिए शायद ज़ोया ने फिर वही टॉपिक यानि बेबी प्लानिंग का टॉपिक शुरू किया.
ज़ोया – सुनिए मैंने सोचा के आप ठीक कह रहे है मेरे दिल में तो सिर्फ एक खवाहिश है के मैं सिंगापुर देख लू उसके बाद बेबी प्लान करेंगे.
मेरे मन में तो खैर ये बात आयी नहीं के ज़ोया भी कुछ सोच रही होगी और सिंगापुर तो हम बेबी के साथ भी जा सकते थे, मेरा तो मन कही और ही था.
मैंने हलकी मुस्कराहट के साथ कहा – अगर तुम्हारी खवाहिश है तो मैं ज़रूर लेकर जाऊँगा तुम्हे सिंगापुर. लेकिन वहाँ तो हम बेबी के साथ भी जा सकते है, मेरा तो मतलब था के कोई ऐसी चीज़, जो हमें बेबी के आने बाद कर न सके.
ज़ोया – ऐसी कोनसी चीज़ हो सकती है जो बेबी आने के बाद हम न कर सके?”.
ज़ोया के चेहरे पर सवालिया निशान था, जैसे उसे कोई ये पजल सुलझाने में मुश्किल हो रही हो.
मैं – ज़ोया एक मेरी खवाहिश है तो सही, लेकिन सुन के कही तुम नाराज़ न हो जाओ.
ज़ोया के चेहरे पर एक रंग आ कर चला गया और थोड़ी सी परेशानी नज़र आयी, तो मैं फ़ौरन बोल पड़ा – अरे यार इतनी भी परेशानी की बात नहीं है.
अच्छा तो क्या बात है आप अभी बताओ मैं नाराज़ नहीं होंगी – ज़ोया ने किसी बच्चे की तरह ज़िद करते हुए कहा.
यार मेरी यंग एज में खवाहिश थी के मैं अपनी वाइफ को इरोटिक मूवी दिखाऊ, लेकिन आज तक मैं तुम्हारे साथ कोई भी मूवी नहीं देख सका हूँ –
मैंने काफी सोच समझ के बात एक हलके टॉपिक से शुरू की. मेरी बात सुन कर ज़ोया के चेहरे पर सुर्खी और डर दोनों नमूदार हुए लेकिन वो इस बात को कण्ट्रोल करने लगी और हलकी फूली साँस के साथ मुझ से कहा के – आप क्यों ऐसी चीज़े दिखाना चाहते है ये कोई अच्छी चीज़ तो नहीं है.
मैं एक्सपेक्ट कर रहा था के ज़ोया अपसेट हो जाएगी, क्योकि हमने कभी ऐसी बात नहीं की थी – यार बात अच्छे बुरे की नहीं सिर्फ दिल की खवाहिश ही है, मुझे पता था के तुम्हे अच्छी नहीं लगेगी ये बात, इसलिए पहले ही मैं थोड़ा झिझक रहा था तुमसे कहने में.
ज़ोया शायद समझ नहीं पा रही थी के क्या कहे तो मैंने उसे दिलासा दिया – ज़ोया तुम ही तो मेरी सब कुछ हो इससे ज्यादा मुझे कुछ नहीं चाहिए ये तो छोटी छोटी दिल की खवाहिशे है जो वैसे ही दिमाग में आयी थी.
ज़ोया को थोड़ा हौसला हुआ तो उसने आराम से कहा – मैं सोचूंगी इस बारे में लेकिन आप ऐसी चीज़े पहले कब देखते थे?
मुझे समझ आने लगा के मेरा पूरा कच्चा चिट्ठा खुलने वाला है, अगर मैंने इस बात को यहाँ नहीं रोका. तो मुझे बात थोड़ी सी घुमानी पड़ी – ज़ोया मर्द और औरत की सेक्स नीड थोड़ी सी डिफरेंट होती है, मर्द ज्यादा सेक्स की तरफ attract होते है और औरते कम, ये नेचुरल है. देखो अगर एक मिसाल दूँ तो नाराज़ मत होना.
मैं कुछ देर ज़ोया का रिस्पांस देखने के लिए रुका ज़ोया मुझे सुन रही थी – हाँ कौन सी मिसाल? ज़ोया ने आहिस्ता से पुछा.
बुक शेल्फ में जो किताबे रखी है उनमे से एक किताब में लगता है के कुछ ऐसी इरोटिक मूवीज शायद मौजूद है.
ज़ोया ने फ़ौरन पुछा – क्या मतलब इरोटिक मूवी?
“हाँ” मैंने आराम से जवाब दिया.
ज़ोया ने कहा के – ये कैसे हो सकता है और आप को कैसे पता?
मैं थोड़ा सा उठ कर बैठ गया और ज़ोया को अपने पास बुलाया और कहा – देखो मैं ग़लत भी हो सकता हूँ लेकिन मुझे ऐसा लगता है वो किताब जो नज़र आ रही है निकाल कर लाओ – मैंने सामने मोटी सी नीली किताब की तरफ इशारा करते हुए कहा जिसमे मुझे वो सीडी नज़र आयी थी.
ज़ोया उठ कर बुकशेल्फ गयी और वो किताब निकाल कर मेरे पास ले आयी. मैंने कहा “खोलो” उसने किताब के पेजेज आगे पीछे करने शुरू किये और जल्द ही उसको वो सीडी मिल गयी.
ज़ोया – लेकिन आपको कैसे पता के ये सीडी इरोटिक मूवीज है, इन पर तो कुछ नहीं लिखा है?
मुझे ऐसा लगता है ट्राई करके देखे? – शायद ज़ोया नहीं चाहती थी के ये सीडी ऐसी वैसी हो घर की इज़्ज़त की बात थी. इसलिए शायद उसको शर्मिंदगी हो रही थी.
मैंने सिचुएशन को संभाला – ज़ोया ये कोई बुरी बात नहीं है, हो सकता है के इसमें कुछ भी न हो. अच्छा रुको मैं अपनी बहन का लैपटॉप लाती हूँ. भाई के लैपटॉप का पासवर्ड मुझे मालूम नहीं है – ज़ोया को कुछ हौसला हुआ तो वो लैपटॉप लाने पर राज़ी हो गयी और वो लैपटॉप लेने चली गयी.
थोड़ी देर के बाद दोबारा कमरे का दरवाज़ा खुला और ज़ोया के हाथ में एक ब्लू कलर का लैपटॉप था – देखो इसमें सीडी चल जाएगी? – ज़ोया ने लैपटॉप मेरे हाथ में देते हुए पूछा.
मैंने लैपटॉप की साइड्स चेक की लेकिन कोई सीडी ड्राइव नहीं थी – नहीं यार इसमें तो सीडी ड्राइव ही नहीं है ऐसा करते है के लिविंग रूम में चलते है सब लोग तो अपने कमरों में है, डीवीडी प्लेयर पर लगा कर देखते है – मैंने तरकीब बताई.
क्या आप पागल हो गए है अगर कोई भी लिविंग रूम में आ गया तो मुसीबत हो जाएगी – और मैं भी रियलिटी की दुनिया में वापस आ गया के मेरे सास और ससुर का घर था, अगर थोड़ी भी नज़र किसी की पड़ जाती तो इज़्ज़त तो चली गयी थी हम दोनों की..
अचानक मेरी नज़र ज़ोया के भाई के लैपटॉप पर पड़ी लैपटॉप के साथ एक एक्सटर्नल डीवीडी राइटर, केबल के साथ attach था और अब हमारा काम बन गया था. मैंने एक्सटर्नल डीवीडी राइटर की यूएसबी केबल ज़ोया की बहन के लैपटॉप के साथ attach की और लैपटॉप ऑन किया. लैपटॉप ऑन हो गया कोई पासवर्ड नहीं था इस लिए सीधा डेस्कटॉप लोड हो गया। मैंने “माय कंप्यूटर” में जा कर देखा के डीवीडी राइटर शो कर रहा है नहीं और DVD का आइकॉन था. सो इंतज़ार की घड़ियाँ ख़तम और मैं अभी डीवीडी डालने वाला था के मेरे मन में एक तरकीब आयी और मैंने ज़ोया को कहा – ज़ोया अगर ये सीडी वही हुई जो मैं समझ रहा हूँ तो तुम मेरे साथ मेरी पसंद की इरोटिक मूवीज देखोगी? सिंपल सी शर्त है मेरी..
Jija sali ki chudai
ज़ोया को मैं देख रहा था के वो कुछ एक्साईटेड हो गयी थी, इस सारे सीडी को चलाने की प्रोसेस के दरमियान. थोड़ी देर में ज़ोया ने कहा – और अगर ये वो सीडी न हुई तो ?
“तो तो” मैं कुछ सोच कर बोलने वाला था लेकिन मन में कुछ आ नहीं रहा था, ज़ोया मेरी हालत देख कर हंस पड़ी और मुस्कुराते हुए कहा – तो फिर मूवीज मैं पसंद करूंगी” और हंस पडी.
ज़ोया के मुंह से ये अलफ़ाज़ सुन कर मुझे ज़ोया से पहले से भी ज्यादा प्यार हो गया, क्योके उसने मेरी खवाहिश का ख्याल रखा था. जो के शायद जीज खवाहिश नहीं थी “आई लव यू” मैंने कहा और उसको अपने से लिपटा लिया. चलो सीडी ट्राई करते है – मैंने कहा और डीवीडी राइटर को ओपन किया और सीडी डाल कर बंद कर दिया। डीवीडी प्लेयर के चलने की आवाज़ आ रही थी और थोड़ी देर में आइकॉन ने डिस्प्ले किया के ये मूवी की सीडी है अब देखने था के किश चीज़ की मूवी है. ज़ोया मेरे पीछे बैठी अपना चेहरा मेरे कंधे पर रख कर लैपटॉप की स्क्रीन देख रही थी – ये आखिर किश चीज़ की मूवी है? –
ज़ोया भी शायद बेसबर हो रही थी. पता नहीं शायद मूवी प्लेयर डाउनलोड करना पड़ेगा. विंडोज मीडिया प्लेयर नहीं चला पा रहा है इस मूवी को – तो मैंने वीएलसी प्लेयर डाउनलोड किया और इनस्टॉल करने के बाद दोबारा कोशिश की के मूवी को चलाऊँ लेकिन कोई प्रॉब्लम आ रही थी और बार बार डीवीडी राइटर बंद हो रहा था. तो मैंने पूरी मूवी को हार्ड ड्राइव पर कॉपी करना शुरू कर दिया, ज़ोया बोर होने लगी थी क्योकि उस को कुछ भी होता नज़र नहीं आ रहा था. खैर कोई सात मिनट के बाद कॉपी सीडी कॉपी हो गयी तो मैंने दोबारा VLC प्लेयर के साथ रन किया और इस दफा वो रन हो गयी और टाइटल देख कर ही समझ आ गया के ये किश चीज़ की मूवी थी.
ज़ोया की आंखों में कुछ शर्म सी नज़र आने लगी, वो स्क्रीन देख तो रही थी लेकिन थोड़ी थोड़ी देर के लिए. ये मूवी इंग्लिश थी और दो मर्द और दो औरतें और सब बगैर कपड़ों के किसी बीच पर थे, जिस पर और भी लोग थे, लेकिन सब बिकिनी में घूम रहे थे. खैर मैंने पूरी मूवी तो अभी नहीं देखनी थी सिर्फ पॉइंट प्रूव करना था. मैंने लैपटॉप बंद कर दिया और ज़ोया से कहा – मै ठीक कह रहा था न. ज़ोया थोड़ी एक्साईटेड हो रही थी, ये सब प्रोसेस में मुझे बोली -लैपटॉप खोलो न थोड़ी सी देर देख ले सब लोग तो वैसे भी सो गए होंगे.
मेरे चेहरे पर मुस्कराहट आ गयी, मेरी तो दिली खुवाहिश यही थी, लेकिन अपने इनलॉस के घर में पूरी मूवी नहीं देखना चाहता था. खैर ज़ोया के लिए मैंने दोबारा मूवी चालू कर दी और हम दोनों देखने लगे। मूवी में कोई स्टोरी नहीं थी, कुछ लोगों की videos बनायीं गयीं थी, जो बीच पर घूम रहे थे. ज़ोया ने मुझ से पुछा – क्या ऐसी जगह होती है, जहाँ लोग बीच पर कुछ नहीं पहनते है?
“हाँ यूरोप में बहुत से ऐसी बीचेस है – मैंने फ़ौरन अपनी नॉलेज शेयर की.
हम कब जाएंगे वहां? ज़ोया ने शरारती अंदाज़ में पूंछा.
जब तुम बिकिनी पहन कर दिखाओगी – मैंने भी माहोल को बरक़रार रखने की कोशिश की.
कराची में बिकिनी नहीं मिलती है और ना ही मैं पहनुंगी – ज़ोया ने थोड़ा नाराज़ होते हुए कहा और मै हंसने लगा –
चलो अब सो जाते है – मैंने थके हुए अंदाज़ में कहा मुझे वाक़ई नींद आनी शुरू हो गयी थी.
ज़ोया ने भी मेरी बात से एग्री किया और हम दोनों सोने की तैयारी करने लगे.
मैंने डीवीडी राइटर दोबारा वापस हटाया और सीडी को दोबारा बुक के अंदर रखा और ज़ोया को दे दिया जो उसने वापस बुक शेल्फ में रख दी. मैंने लैपटॉप बंद करके वापस ज़ोया को दिया, ज़ोया लैपटॉप रखने चले गयी और मैं अपने बिस्तर में लेट गया और सोचना लगा के ये बातें तो हमने पहले कभी नहीं की एक दूसरे के साथ और मै खुश था, के चलो हमारी बात तो इस बारे में शुरू हुई है अब कही न कही तो ये बात ज़रूर हो जाएगी मैंने ज़ोया को भी कभी इतना ओपन नहीं देखा था.
रूटीन की ज़िन्दगी फिर से शुरू हो गयी और हमारी बात वही पर कुछ दिनों के लिए रुक गयी, जॉब से घर खाना पीना और फिर अगले दिन की तैयारी.
दो वीक के बाद ज़ोया ने कहा के मुझे अम्मी के घर छोड़ आओ, एक दिन के लिए, वहां पर रिश्ते की बात चल रही थी ज़ोया की बहन के लिए जो फर्स्ट ईयर में थी. वो लोग डिस्कस करना चाहते थे.
तो मैं उसको ले कर चला गया और ड्राप करके अगले दिन आने का कह कर वापस आ गया. अपने सुसराल का ख्याल आया तो फिर मेरा मन वही बातें सोचने लगा. ज़ोया नहीं थी इस लिए मेरा मन कुछ ज्यादा ही तेज़ काम कर रहा था. मैंने बात को आगे बढ़ाने का सोचा और मैंने सोचा के जब जोया आएगी तो हम दोनों मिल कर कोई मूवी डीसाइड करेंगे. मैंने पहले से कुछ एडल्ट मूवीज की साइट देखनी शुरू की ये सोचने लगा के मूवी किसी स्पेसिफिक टॉपिक पर होनी चाहिए, सिंपल इरोटिक मूवी शायद इतनी इंटरेस्टिंग न हो. ढूंढते ढूंढते मुझे एक मूवी नज़र आयी जो के काफी इंटरेस्टिंग थी, सिनेमा हाउस पर चल चुकी थी, लेकिन इरोटिक की केटेगरी में आती थी।
ऐसा मुश्किल है के कोई मूवी इस तरह की हो और सिनेमा पर चले. मैंने और सर्च की इस मूवी के बारे में और मैंने जितना इस मूवी के बारे में पढ़ा, मुझे कहानी अच्छी लगने लगी, नाम था इसका “फिफ्टी शेड्स ऑफ़ ग्रे” मुझे लगा के ये वो मूवी हो सकती है जो हम दो बैठ कर देख सकते है. तो मूवी सेलेक्ट हो चुकी थी और मैं ज़ोया के आने का इंतज़ार करने लगा. अगले दिन मैं अपने सुसराल पहुचा ज़ोया ने कहा के एक घंटे तक चलते है, जब तक आप चाय पी लो। मैं सब से मिलने के बाद जा कर ड्राइंग रूम में बैठ गया और चाय का इंतज़ार करने लगा.
यहाँ गर्मी थी तो, मैं बालकनी की तरफ चला गया – यहाँ हवा चल रही थी. मैं ऊपर से लोगों को आते जाते देख रहा था और चाय का इंतज़ार भी कर रहा था. क्योकि तलब महसूस हो रही थी चाय की, मैंने सोच के बता दूँ के मैं बालकनी में हूँ। ऐसा न हो के कोई चाय ले कर पुरे घर में ढूँढे, फिर मैं आवाज़ लगाने के लिए मुड़ा ही था ,के किसी से ज़ोर से टकरा गया. तो ज़ोया की छोटी बहन जारा चाय लेकर आयी थी, जारा ही के रिश्ते की बात चल रही थी और लड़के वाले अभी मंगनी करना चाहते थे और शादी तीन साल के बाद. Jija ne sali ko choda
मेरी टक्कर से चाय का कप तो उसके हाथ से निकल गया और चाय की एक लकीर उसकी कमीज पर छोडते हुए उसके बायीं तरफ जा गिरी। मैं थोड़ा बोखला सा गया. पहले तो मैं एक्सपेक्ट नहीं कर रहा था, के कोई मेरे पीछे होगा और दूसरा उसके कपड़े देख कर मेरी समझ नहीं आया क्या करू। जारा ने भी फ़ौरन अपने आप को संभाला, उसकी कमीज पर कालर के पास चाय गिरी थी, उसने कप उठाया साइड पर रखा और अपने आप को देखने लगी का कहाँ कहाँ चाय गिरी है. फिर कमीज के ऊपर दो बटन खोल के साफ़ करने लगी, तो मैंने फ़ौरन अपना चेहरा दूसरी तरफ कर लिया.
ये अजीब सी बात थी के जारा मेरे सामने क्यों इस तरह बटन खोलकर सफाई कर रही थी. अभी मैं ये सोच ही रहा था के जारा की हलकी सी आवाज़ में कहे गए इस जुमले ने मुझे चौंका दिया “ज़ाहिर है वही देखेंगे ज्यादा कपडे वाली पसंद नहीं है शायद बिकिनी वाली ज्यादा अच्छी होती है. मेरा सर फ़ौरन उसकी तरफ घुमा लेकिन वो हंसती हुई वहां से निकल गयी और मैं वही पर जम सा गया के ये हो क्या रहा है. बिकिनी वाली बात तो मैंने ज़ोया को कही थी. ये बात जारा को कैसे पता चल गयी. ज़ोया ये बात अपनी बहन को नहीं बता सकती ये इम्पॉसिबल था, क्योकि ये हस्बैंड और वाइफ के दरमियान की बात थी, तो अगर ज़ोया ने ये बात नहीं बताई तो जारा ने ये बात क्यों की?
मैं काफी परेशान सा हो गया था, क्योकि ये मेरा सुसराल था मैं किसी भी सूरत यहाँ कुछ ऐसा नहीं करना चाहता था, जिसकी वजह से मेरी इज़्ज़त ख़राब हो या ज़ोया को ज़रा भी दुःख हो. मैं काफी अपसेट हो रहा था और चाहता था के ज़ोया जल्दी घर चले.
मैंने आवाज़ दी – ज़ोया चले घर का कुछ सामान भी लेना है लेट हो जाएंगे.
ज़ोया की आवाज़ आयी – हाँ बस रेडी हूँ आ रही हूँ.
शायद चाय के गिरने का किसी को पता नहीं था, मैं तो बालकनी से हट गया था, शायद जारा ने ही सफाई कर दी होगी. मैं जाने के लिए नीचे आ गया, वैसे तो जब हम जाते है, तो सब लोग ही दरवाज़े तक, सी ऑफ करने आते है. ज़ोया ने कुछ सामान का बैग लिया और दरवाज़े पर आ गयी और मैंने सबको बाय कहा। ज़ोया कार की तरफ चली गयी और मैं अपने ससुर से हाथ मिला कर सास की तरफ देखा, तो जारा मेरी सास के पीछे खड़ी थी. अभी तक उसने वही कमीज पहनी हुई थी और कमीज के दो बटन खुले हुए थे उसने अपना एक हाथ दूसरे पर और दूसरा हाथ उन दो बटन्स पर रखा हुआ था.
मेरी नज़र उस पर पड़ी तो, वो कुछ अजीब सी मुस्कराहट दे रही थी. मेरी नज़र पड़ते ही उसका हाथ हलके हलके दूसरे से तीसरे बटन की तरफ आया और उसने वो भी खोल दिया, लेकिन हाथ से दबा कर रखा उसके चेहरे पर कुछ अजीब सी मुस्कराहट थी, जो मैंने पहले कभी नहीं देखि थी. आखिर ये हो क्या रहा था मैं थोड़ा घबरा सा गया था इस सब सिचुएशन से और सबसे मिलते ही सीधा कार की तरफ चला गया और मैं और ज़ोया वापस घर की तरफ रवाना हो गए.
ज़ोया ने नोटिस किया के मैं थोड़ा चुप सा हूँ, तो वो पूछने लगी के क्या बात है आप कुछ ठीक नहीं लग रहे है? तो मैंने टाल दिया, ये कह कर के सर में दर्द है शायद इसलिए.
अब घर चले! घर का सामान बाद में ले आएंगे – ज़ोया ने कहा और मैंने भी इस बात पर इत्तेफ़ाक़ किया और हम घर आ गए.
रात सोने के लिए लेटा और मेरा मन वही बातें सोचने लगा के आज सुसराल में हुआ क्या और जारा का रवैया मेरे मन में घूमने लगा और जब बिकिनी वाली बात मेरे मन में दोबारा आयी तो मैंने सोचा के किसी तरह ज़ोया से पूछना चाहिए के कही उस ने तो कोई बात नहीं कही मज़ाक़ में अपनी बहन को.
ज़ोया हम दोनों मूवी कब देखेंगे यार? – मैंने पूछना शुरू किया.
आज चले? – ज़ोया ने कहा.
अरे यार वो मूवी नहीं, वो दूसरी वाली समझा करो न, जो तुम्हारे घर में देखि थी – मैंने थोड़ा आहिस्ता से कहा तो वो हसने लगी.
ठीक है आज कोई प्लान बनाते है – ज़ोया की इस बात पर मैं खुश हो गया।
लेकिन मेरे मन में जो उलझन थी, वो थी जारा की. मैंने फिर ज़ोया को उस दिन की याद दिलाते हुए पूछा – ज़ोया उसका किसी को शक तो नहीं हुआ था न के हमने वो मूवी देखि थी.
नहीं शायद मैंने तो नहीं महसूस किया, हाँ लेकिन भाई के कमरे से सीडी निकलेगी ऐसा मैंने नहीं सोचा था – ज़ोया कुछ अफसोस ज़र्दा लहजे में बोली.
अरे यार ये अफ़सोस की बात नहीं बल्कि सोचने की बात है के भाई बड़ा हो गया है, और भाई की शादी का वक़्त आने वाला है – मैंने ज़ोया को एक दूसरा एंगल क्या सोचने के लिए और वो थोड़ी खुश हुई. meri kamsin sali ki chudai
हाँ ये तो मैंने सोचा ही नहीं – इस से पहले के ज़ोया भाई की शादी के ख्यालो में ज्यादा आगे चली जाती मैं फ़ौरन उसको वापस ट्रैक पर ले आया.
ज़ोया वो…क्या? यार वो.. मैंने फिर जुमला अधूरा छोड़ दिया.
क्या है बोलो भी – ज़ोया बोली.
बिकिनी कब पहन कर दिखा रही हो? – मैंने ये बात दूसरे तरीके से पूछनी चाही.
मै नहीं पहनती ऐसे कपडे – ज़ोया ने शरमाते हुए कहा.
लगता है अपनी बहनो से मश्वरा करोगी? – मैंने हँसते हुए ज़ोया को उस तरफ ले जाना चाहा जहाँ शायद वो बता पाए अगर उसने बिकिनी का ज़िकर जारा से किया हो.
जी नहीं मैं ऐसी बाते अम्मी के घर नहीं बताती हूँ ये हमारे घर की बात है – ज़ोया ने थोड़ा ग़ुस्सा दिखाते हुए कहा, तो मेरे मन में एक बात तो साफ़ हो गयी के ज़ोया ये बात नहीं कह सकती. मुझे पहले भी यही शक था के ज़ोया ये बात कभी नहीं कहेगी. फिर बिकिनी वाली बात जारा ने कैसे कर दी उसने शायद हमारी बातें सुन ली होंगी, जब हम दोनों ये बाते कर रहे थे उस रात। अब यही एक ऑप्शन था जिस पर सोचा जा सकता था.
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