Sexy Bahu Komal Ki Sasur se Chudai:- अब तक अपने इस Sasur bahu sex story में पढ़ा.. कोमल चाहती थी कि बाबूजी खुद पहल करें, लेकिन बनवारी लाल कोमल को बस देखता रहता था लेकिन वह कोई पहल नही कर रहा था। कोमल ने फिर एक प्लान बनाया। उसने ने अपनी सबसे मूलयवान सम्पति अपनी भारी गांड को गर्व पूरक निहारा और मन ही मन बोली “अब देखती हूँ कैसे कण्ट्रोल करते है बाबू जी”. अब कोमल ने एक लेग्गिंग पेहेन ली और एक राउंड नैक टी-शर्ट पेहेन ली अब वो हमले के लिए पूरी तरह तैयार थी. अब पढ़िये आगे..
Last Part => सेक्सी बहू कोमल की चुदाई का सपना – 3
Sexy Bahu Komal Ki Sasur se Chudai

कोमल रसोई में गयी और चाय बना कर बाबू जी के पास पहुंची, कोमल को लेग्गिंग में देख कर बनवारीलाल गश खा कर गिरते गिरते बचा उसकी, जांघें लेग्गिंग में समां नहीं पा रही थी। कोमल के चलने से उसकी मांसल गांड का हर मूवमेंट लेग्गिंग से नुमाया हो रहा था. बनवारीलाल पागल सा मुँह फाड़े उसे देखने लगा, उसकी दशा को देख कर कोमल अंदर ही अंदर ख़ुशी से झूम उठी और उसने खांसते हुए कहा-
कोमल “बाबू जी चाय”.
कोमल की आवाज सुनकर बनवारीलाल की बेहोशी टूटी और उसने चाय थाम ली, चाय देकर कोमल चली गयी और कुछ देर बाद कोमल कप लेने आयी, तो देखा की बनवारीलाल आँखे मूंदे बैठा हुआ है। वो कुछ देर वही खड़ी रही पर बाबू जी यु ही पड़े रहे. असल में तो बनवारीलाल को कोमल के आने का एहसास हो गया था लेकिन वो आगे की भूमिका बनाने के लिए नाटक कर रहा था। कोमल ने कहा..
कोमल – बाबू जी क्या सोच रहे हो?
बनवारी लाल – कुछ नहीं बहु.
कोमल आज बाबू जी को छेड़ने के मूड में थी, इसलिए फिर बोली..
कोमल – बाबू जी आप जरूर कुछ सोच रहे हो! प्लीज मुझे भी बताइये न.
बनवारी लाल जैसे सोच रहा था, कहानी उसी दशा में बढ़ रही थी इसलिए उसने कहा..
बनवारी लाल – रहने दो बहु तुम्हे बुरा लग जायेगा?
नहीं प्लीज बताइये न – कोमल ने लड़ियाते हुए कहा.
नहीं बहु मान जाओ तुम बुरा मान जाओगी – बनवारी लाल ने फिर चाल चली.
नहीं आपको बताना पड़ेगा मैंने कभी आपकी बात का बुरा माना है क्या? – कोमल ने कहा.
वो दरअसल तुम्हे लेग्गिंग में देख कर मुझे उस दिन की याद आ गयी थी – बनवारी लाल ने गंभीर मुद्रा में कहा.
कोमल – किस दिन की याद?
वो उस दिन बाथरूम वाली याद – बनवारी लाल ने कोमल की आँखों में झांकते हुए कहा.
बनवारी लाल के मुँह से बाथरूम की बात सुनते ही कोमल का चेहरा शर्म से लाल हो गया और उसके मुँह से निकला.
कोमल – हे भगवान.. बाबू जी आप तो बहोत बेशरम है अभी तक वो बात भूले नहीं.
और कोमल दौड़ कर रसोई की और भागी और भागने से उसकी गांड ऐसे जल्दी जल्दी थिरक रही थी जैसे की लांचर से एक के बाद एक मिसाइल चूत रही हो. कोमल की गांड की थिरकन को देख कर बनवारीलाल बुदबुदाया “बहु तेरी ये हाहाकारी गांड कुछ भी भूलने नहीं देगी”. कोमल ने रसोई के पास पहुंच कर पलट कर देखा की बनवारीलाल एक तक उसकी गांड को निहार रहा था, जिससे कोमल के चेहरे पर हलकी सी मुस्कान आ गयी। इस चंचल चितवन ने बनवारीलाल के लंड को पूरी तरह रिचार्ज कर दिया। बनवारीलाल उठा और मन ही मन बोला “ये सबसे सही वक्त है मोके पर चौका मारने का”.
बनवारीलाल ने अपनी धोती ऊपर की ओर बांधी अपने लंड की सेट किया और रसोई की और चल दिया. कोमल रसोई में पहुँचते पहुँचते हाफने लगी और प्लेटफार्म पकड़ कर खड़ी हो गयी, उसका पूरा बदन कांप रहा था। कोमल प्लेटफार्म पर झुकी हुई थी, इसलिए उसकी गांड पीछे को उठ गयी थी. इधर बनवारीलाल जब रसोई में पहुंचा तो बहु की उभरी गांड को देखते ही उसका लंड टनटना गया, उसने लुंगी में लंड सेट कर सीधा सामने की तरफ किया और सीधा लंड की कोमल की गांड से भिड़ा दिया और झट से उसकी कमर पकड़ ली. गांड पर बाबू जी के लंड का एहसास होते ही कोमल भी अंदर तक गणगना गयी।
बनवारीलाल ने उसके कान के पास आ कर कहा- बहु गुस्सा हो गयी क्या? –
कोमल कुछ नहीं बोली तो बनवारीलाल ने फिर पूछा. गुस्सा हो गयी हो? इसलिए हम बार बार बोल रहे थे की मत पूछो.
मैं गुस्सा नहीं हूँ – कोमल ने धीरे से कहा.
बनवारी लाल – तो भाग कर क्यों आ गयी? –
ऐसा कहते कहते बनवारीलाल ने अपना हाथ टी-शर्ट के अंदर डाल दिया और कोमल के मिलायम चिकने पेट को सहलाने लगा.
कोमल – आप ऐसी बाते करोगे तो मैं क्या करती.
बनवारी लाल – तुमने ही तो जिद की थी सो मैंने मन की बात कह दी.
ये कह कर बनवारीलाल ने कोमल की सुनहरी गर्दन पर अपने होंठ रख दिए, गर्दन कोमल का बहोत संवेदनशील अंग था, सो वो बनवारीलाल के होंठ लगते ही उसकी सिसकारी निकाल गयी.
अह्ह्ह.. बाबू जी क्या कर रहे हो? – कोमल ने सिसकते हुए कहा.
बहु आज होली है सुबह से सबसे होली खेली हो हमसे नहीं खेलोगी क्या? – कहते कहते बनवारीलाल ने हाथ ऊपर सरकाये और कोमल के दोनों चुचों को पकड़ लिया। चूचियों पर ससुर के हाथ लगते ही कोमल को एक दम करंट लगा और उसकी सांसे तेज चलने लगी. इधर बनवारीलाल बहु की चूचियों पर हाथ लगते ही धन्य हो गया, उसका लंड और भी सख्त हो गया और वो हौले हौले चूचियां सहलाने लगा। जिससे कोमल के पूरे बदन में काम तरंग बहने लगी पर वो फिर से बोली..
कोमल – बाबू जी प्लीज मत कीजिये.
बनवारी लाल – बहु होली में तो लोग दुश्मन को भी गिले शिकवे भूल गले लगाते है फिर मैं तो तुम्हारा अपना हूँ मुझे होली नहीं खेलने दोगी क्या? –
और फिर बनवारीलाल ने कोमल के दोनों निप्पल्स को अपनी उँगलियों में फसा लिया और उन्हें धीरे धीरे ट्विस्ट करने लगा. उसकी इस हरकत से बहु बुरी तरह गरम होने लगी, लेकिन वो एक संस्कारी लड़की थी इसलिए ये सब उसे अच्छा लाग्ने के बाद भी उसका मन इसे स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं था.
कोमल – बाबू जी छोड़िये न मुझे जाने दीजिये.
बनवारी लाल – बहु त्यौहार में ऐसे जिद नहीं करते, बस थोड़ा सा त्यौहार मना लेने दो.
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बनवारीलाल जानता था की बहु गरम हो रही है और थोड़ी देर में खुद चुप हो जाएगी, अब उसने कंधे से लेकर गले तक को चाटना शुरू कर दिया। कोमल के लिए इस तीन तरफा हमले को झेलना मुश्किल होता जा रहा था. नीचे गांड में ससुर के लंड ने तबाही मचा रखी थी और चूचियां बाबू जी के हाथो के कब्जे में थी और गर्दन और कंधे पे बनवारीलाल के होंठ और जीभ हलचल मचाये हुए थे। कमसिन उम्र और अल्हड जवानी इन सबको संभाल नहीं पायी और कोमल की आँखे बंद होने लगी. कुछ देर तक यु ही बहु की चूचियों की घुंडियों से खेलने के बाद बनवारी लाल को लगा की ऐसे में वो चूचियों को अच्छी तरह से मसल नहीं पा रहा है, तो उसने अब चूचियों को पूरे पंजे में जकड लिया और निप्पल्स को अपनी उँगलियों के बीच फसा लिया.
अब जब वो चूचियों को दबाता तो साथ ही साथ गांड भी दब जाती, जिससे कोमल को भी दोहरा मजा मिलने लगा। बाबू जी दबा तो चूचियां रहे थे, लेकिन करंट बहु की चूत तक पहुंच रहा था। कोमल को ऐसा लग रहा था जैसे उसके लव टनल में एक के बाद एक लहर उठ रही है. अचानक बनवारी लाल ने कुछ जोर से मसल दिया तो कोमल सिसक पड़ी “ऊई माँ सीईईईईईई.. बाबू जी दर्द हो रहा है धीरे दबाइये न”.
कोमल के मुँह से धीरे दबाइये सुन कर बनवारी लाल अंदर से खुश हो गया, जो बहु थोड़ी देर पहले छोड़िये छोड़िये बोल रही थी अब वो धीरे दबाने को बोल रही है.
सॉरी बहु अब धीरे करूँगा – ऐसा कह कर बनवारी लाल ने कोमल के खुले कंधे पर अपने दांत हलके से गाड़ दिए.कोमल के लिए ये बिलकुल नया अनुभव था वो बोली –
बाबू जी काट क्यों रहे हो?
बनवारी लाल – बाबू ये काटना नहीं तुम ही बताओ दर्द हुआ क्या?
कोमल – जी नहीं दर्द तो नहीं हो रहा लेकिन कोई दांत भी गाड़ता है क्या?
बनवारी लाल प्यार से पुकारते हुए बोला – बहु ये लव बाईट है – और फिर बनवारी लाल बहु के पूरे कंधे और गर्दन पर लव बिट्स बनाने लगा. अक्सर मासाहारी जीव जैसे शेर चीते कुत्ते भालू आदि आपस में खेलते हुए ऐसे ही काटते है। बनवारी लाल भी ये सिद्ध कर रहा था की वो एक मासाहारी है और मॉस अगर कोमल जैसी जवान जिस्म का हो तो फिर बात ही क्या। फिर अचानक बनवारी लाल ने बहु की टी-शर्ट उतारनी शुरी की तो कोमल ने कहा..
कोमल – बाबू जी ये क्या कर रहे हो?
बनवारी लाल – बहु जरा गुलाल लगाना है.
कोमल – ऐसे ही ऊपर से लगा लीजिये न.
बनवारी लाल – नहीं बहु ऐसे नहीं.. तुम हाथ तो ऊपर करो.
कोमल – नहीं बाबू जी मुझे शर्म आती है, आप ऊपर से ही लगा लीजिये.
बनवारी लाल – बहु ये गलत बात है पूरे मोहल्ले वालो के साथ तुमने होली खेली और मेरे साथ खेलने को मना कर रही हो?
कोमल – हाय राम मैंने कब मोहल्ले वालों के साथ होली खेली?
बनवारी लाल – अच्छा.. मैंने खिड़की से सब देखा है! कैसे वो सक्सेना का लड़का तुम्हारी छाती के अंदर हाथ डाल कर रंग लगा रहा था.
कोमल – वो तो है ही कमीना.. मुझे औरतों ने पहले ही बता दिया था की वो बदमाश है, लेकिन मैं उसे देख नहीं पायी और फिर मैंने उसे डांटा भी था.
बनवारी लाल – और वो मिश्रा जी का दामाद वो भी तो तुम्हे पीछे से पकड़ कर मसल रहा था, कितनी देर तक उसने तुम्हे मसला था.
कोमल – उसके बारे में तो मुझे पहले से ही कुछ पता नहीं था, अचानक उसने पकड़ लिया, मैंने छुड़वाने की बहोत कोशिश की पर वो मुझसे ज्यादा ताकतवर था कमीना पक्का हरामी है, न जाने मिश्रा जी ने कहा से ऐसा ठरकी दामाद ढूंढ लिया.
बनवारी लाल – जब सबने तुम्हारे साथ होली खेली है तो मुझे क्यों रोक रही हो? ये तो वही बात हुई की सबको बांटा पर हमको डांटा.
क्या बाबू जी.. मैंने क्या बांटा सबको? – कोमल ने हैरानी से पूछा.
बनवारी लाल – वो वो खुशियां.. त्यौहार की खुशियां सबको बांटी अब मुझे मना कर रही हो।
कहते हुए बनवारी लाल ने एक बार फिर टी-शर्ट उतरनी शुरू की तो कोमल ने मजबूरन हाथ ऊपर कर दिए ताकि टी-शर्ट निकल जाये. अब कोमल कमर के ऊपर पूरी नंगी थी बनवारी लाल झुका और बहु की पूरी पीठ पर चुम्बन करने लगा और वो बीच बीच में दांत भी गड़ा देता था. उसकी इस हरकत से कोमल एक बार फिर गर्माने लगी। अचानक बनवारी लाल ने उसे कंधे से पकड़ कर घुमा दिया, अब बनवारी लाल की आँखों के सामने जो नजारा था, वो देख बनवारी लाल सांसे लेना ही भूल गया।
उसके सामने दुनियां की सबसे खूबसूरत करगिरि थी. कोमल के चूचे गजब के सेक्सी थे, ऐसा लग रहा था जैसे मक्खन के दो गोले हो और उनके ऊपर काले अंगूर लगा दिए हो। बनवारी लाल एक टक उनको देखने लगा. कोमल की आँखे बंद थी, कुछ देर तक जब एक दम सन्नाटा रहा, तो कोमल ने धीरे से थोड़ी सी आँख खोली तो देखा बाबू जी पगलाए से उसकी चूचियों को निहार रहे थे। उसने फिर आँखे बंद की और पूछा
कोमल – “बाबू जी हो गयी? होली अब मैं जाऊं?”.
कोमल की आवाज सुनते ही बनवारी लाल की तन्द्रा टूटी और उसने कहा “बस एक मिनट बहु” और आगे बढ़ कर बहू की एक चुचि को अपने मुँह में भर लिया और फिर तो बनवारी लाल को ऐसी खुमारी चढ़ी की वो जोर जोर से चुचि चूसने लगा. उसकी इस हरकत ने ठंडी पड़ती बहु में फिर से आग भरनी शुरू कर दी और कोमल के मुँह से सिसकारियां निकलने लगी.
आह्ह्ह.. आह्ह्ह.. बाबू जी ओह माय गॉड आऐ.. शीइईईईईई.. ओह्ह बाबू जी काटो मत प्लीज बाबू जी जोर से मत काटिये धीरे चूसिये.
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हालांकि कोमल का पति सुनील भी उसकी चुचि चूसता था, लेकिन जो कला बनवारी लाल के पास थी वो बेटे में नहीं थी। कोमल मन ही मन बुदबुदायी “बाप बाप ही होता है बेटा कभी बाप नहीं बन सकता”. बनवारी लाल लगभग 15 मिनट तक बारी बारी से कोमल की दोनों चूचियां चूसता रहा और उधर कोमल की चूत से गंगा जमुना की धारा बहने लगी. अचानक बनवारी लाल साँस लेने के लिए सीधा हुआ, बहु यु ही आँखे मूंदे खड़ी थी रति को भी चैलेंज कर देने वाली उसकी सुंदरता बनवारी लाल के सामने थी। बनवारी लाल ने कोमल को गर्दन से पकड़ कर अपनी और खींचा और उसके रसीले होंठो पर अपने होंठ रख कर, कोमल के अधरामृत का रस पान करने लगा.
कोमल अब पूरी तरह से आग का गोला बन चुकी थी, पराये मर्द का चुम्बन उसे और भी रोमांच दे रहा था। कुछ देर बाद जब उसे कुछ होश आया, तो उसने फिर कहा..
कोमल – बाबू जी अब छोड़िये अब तो बहोत होली खेल ली.
बनवारी लाल – बस बहु एक मिनट जरा सा गुलाल तो लगा लू।
फिर बनवारी लाल ने कुर्ते की जेब से गुलाल निकला और कोमल के पूरे बदन पर रगड़ने लगा। पूरे पेट चूचियों गर्दन आदि पर मलने के बाद उसने बहु को पलटाया और उसकी नंगी मखमली पीठ पर गुलाल लगाने लगा. गुलाल का खुरदरापन कोमल को उत्तेजित कर रहा था, उसकी सांसे एक बार फिर तेज हो गयी। फिर अचानक बनवारी लाल ने लेग्गिंग की इलास्टिक में ऊँगली फंसाई और उसे गांड तक नीचे कर दिया। फिर उसने बहु की गांड पर गुलाल लगाना शुरू कर दिया. कहानी पढ़ने के बाद अपने विचार नीचे कमेंट सेक्शन में जरूर लिखे ताकि देसि हिन्दी सेक्स स्टोरी का यह दौर आपके लिए यूँ ही चलता रहे.
ये वही गांड थी जो पिछले कुछ दिनों से उसके सपनो में रोज आती थी, बनवारी लाल एक बार फिर बहक गया और बहु की गांड में उंगली कर बैठा। गांड में ऊँगली का एहसास होते ही बहु को झटका लगा, उसने आँखे खोली तो देखा की उसकी लग्गिंग तो नीचे खिसकी पड़ी है। उसने घबरा कर बाबू जी को धकेला और लग्गिंग ऊपर कर ली.
बाबू जी ये क्या कर रहे थे – कोमल ने कहा.
बनवारी लाल – कुछ नहीं बहु बस थोड़ा गुलाल लगा रहा था.
कोमल – नहीं बाबू जी नीचे बिलकुल नहीं..
और फिर उसने अपनी टी-शर्ट उठाई और नंगी ही अपने कमरे में भाग गयी, बनवारी लाल उसको नंगी भागते देखता रहा। बहु की गांड की हर थिरकन के साथ, उसका लंड भी झटके खा रहा था. फिर वो भी रसोई से निकला और बाथरूम की और चल दिया. पढ़ते रहिये.. क्योकि ससुर बहू की हिंदी सेक्स स्टोरी अभी जारी रहेगी.
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