Bhai bahan ki jabardast chudai story:- पिछले पार्ट मे आपने पढ़ा कि कैसे भाई ने मेरे बूब्स को चूसने को बोला और मैंने permission दे दी। फिर भाई ने मेरे बूब्स को छुड़ा और दबाया, और मै बहुत ज्यादा गरम हो गयी थी। जब मै गलती से भाई कि गोद मे बैठी तो उसका लंड मेरी चूत पे टच हुआ और उसी टाइम मै झड़ गयी। और थक के सो गयी, शाम मे उठी तो मुझे डर लग रहा था। भाई-बहन सेक्स स्टोरी अब आगे-
पिछला पार्ट ==> मुझे अपने भाई से चुदना है – 3
Bhai bahan ki jabardast chudai story

मैं अपनी चूत सहलाने लगी और तभी अचानक से दरवाज़े पर देखा तो एक-दम से डर गयी. मैंने एक-दम से अपनी चूत को छुपा लिया. देखा तो मुझे यकीन ही नहीं हुआ. मेरा भाई आरव दरवाज़ा बंद कर नंगा खड़ा था. उसका लंड बिलकुल तना हुआ था. मैं वैसे ही गरम थी, ऊपर से भाई को पहली बार ऐसे देख मेरे पसीने छूटने लगे.
मैं: भाई? ये क्या?
आरव: आपने गलत किया दीदी.
मैं सोच में पड़ गयी.
मैं: मैंने क्या किया?
आरव: आज सुबह आपको इतना मज़ा मिला. फिर आपके उठने से पहले मैंने सारा गेम सेट कर दिया की आप बीमार हो. लेकिन इतना करने के बाद भी मुझे क्या मिला? आपको तो सजा मिलनी चाहिए.
मैं समझ गयी. मैं एक-दम से बेड से उठ के आरव के पास गयी और घुटनो पर बैठ गयी. बैठते साथ ही सीधे भाई के लंड को बिना पकडे मुँह में लिया और चूसने लगी.
आरव: आह दीदी आप तो बहुत समझदार हो. आह शीईईईईईईई.
मैंने उसकी गांड को पकड़ के आगे खींच लिया. इससे आरव का लंड मेरे मुँह में और भी अंदर तक जाने लगा. उसे इतना मज़ा आने लगा की उसने मेरे सर को पकड़ लिया और मुझे महसूस हुआ की वो मेरे सर को अपनी और खींच रहा था. मैंने उसकी गांड को छोड़ दिया और उसे अपनी मर्ज़ी से करने दिया. आरव को भी समझ आ गया की मैंने allow कर दिया, इसलिए उसने और भी अच्छे से मेरे बालों को पकड़ लिया. पकड़ते ही मेरे सर को और अपनी कमर को साथ ही अंदर-बाहर करने लगा.
मुझे बहुत पसंद आया उसका ऐसे बढ़ना. मैं तो चाहती थी की वो मुझे अपनी गर्लफ्रेंड की तरह ट्रीट करे. कुछ ही देर में उसकी स्पीड बढ़ने लगी और मैं भी मज़े में उसका लंड चूसते रही. पूरे रूम में आरव की आह आह ओह उम्म और मेरे चूसने की लप लप लप की आवाज़ भर गयी. मुझे इतना मज़ा आ रहा था की मुझे कोई परवाह नहीं थी की पास वाले रूम से पापा मम्मी न सुन ले. कुछ ही देर में आरव के पैर कांपने लगे.
आरव: अह्ह्ह्ह दीदी मेरा आ रहा है. आह आह अहह.
वो छूटने वाला था पर मैंने उसे लंड निकालने नहीं दिया. उल्टा उसकी पूरी कमर को हग कर लिया. वो एक और बार ज़ोरों से काम्पा और एक और आह की आवाज़ करते हुए मेरे मुँह में अपने गरम माल की पिचकारी छोडने लगा. मैं मज़े से उसके लंड को चूस के रस निकालती रही और हर घूँट के साथ उसका माल निगलती रही. मुझे लग रहा था अब आरव का माल बढ़ने लगा था और पहले से ज़्यादा झटके देता था.
7-8 बड़े-बड़े झटके देने के बाद आरव पूरा थक गया. उसकी सांसें चढ़ी हुई थी और पैर में कमज़ोरी की कारण कांप रहा था. मैं उसके लंड से आखरी बूँद तक निकालती रही और सारा खा गयी. फाइनली उसका लंड उतर गया. वो मेरे सर को वैसे ही पकडे रहा और मैं भी नीचे बैठी रही.
आरव: दीदी तुम तो एक दिन मार ही डालोगी. यहीं से मेरी जान निकाल दोगी एक दिन.
मैं: धत पागल! ऐसे नहीं बोलते.
मैं उठ खड़ी हुई और हम दोनों बेड पर सोने के लिए जाने लगे. मैंने नोटिस किया की बेड तक आने तक आरव ने मेरी गांड पे हाथ रखा हुआ था. वो बेड पर जा कर बैठ गया पर मैं बाहर खड़ी रही. उसकी गांड पे हाथ रखने वाली हरकत से मेरे दिमाग में कुछ आने लगा.
आरव: दी क्या हुआ? आओ सो जाये.
मैं मुस्कुराने लगी और कुछ तय किया. मैंने आरव की और देखा और अपनी पैंटी उतार दी. ऐसे तो वो मुझे टॉपलेस रोज़ ही देखता था और एक बार ऐसे भी देखा था. पर आज पहली बार मेरी मर्ज़ी से मुझे उसके सामने नंगी देख कर वो जम गया.
आरव: दीदी?
मैं: हां भाई! आज से तू मुझे जितना मर्ज़ी नंगा देख. मुझे कोई दिक्कत नहीं.
मैं: सच में दी? तुम्हे कोई प्रॉब्लम नहीं? या मेरे लिए?
मैं बेड पर उसके पास आके कहा: हां. तू घबरा मत. मैं जो कर रही हूं तेरी ख़ुशी के लिए कर तो रही हूँ लेकिन इसमें मेरी भी मर्ज़ी है. तुझे जब मैं करे मुझे नंगा देखने का मुझे बताना. मैं खोल दूँगी.
आरव: पक्का?
मैं: हां बाबा. चाहे तो तू खुद ही मेरे कपडे उतार देना ठीक? मैं कुछ नहीं बोलूंगी.
आरव: थैंक यू दीदी. आप बहुत प्यारी हो.
मैं: आई लव यू टू.
हम दोनों हसने लगे. मैं सोने को जा ही रही थी की आरव ने कहा-
आरव: वैसे दीदी आप क्या देख रही थी मोबाइल पर?
मैं: अरे हां! देखेगा?
आरव: 12 बजने में अब भी 1 घंटा है. देख लेते है फिर सो जायेंगे.
मैं: चल ठीक है.
मैंने फिर से सिमी की दी हुई इन्सेस्ट वीडियो चलायी और हम दोनों ध्यान से देखने लगे. कुछ देर बाद हम दोनों गरम होने लगे. मैं अपनी चूत सहलाने लगी. उधर आरव का हाथ भी उसके लंड की और जाने लगा. देखते ही एक सीन आया जहाँ भाई ने उसकी बहन को नंगा किया और उसकी चूत चाटने लगा. उसकी बहन झटपटाने लगी.
आरव: ऐसा भी करते है क्या?
मैं: हां जैसे मैं तेरा चूसती हूं वैसे लड़कियों को भी मज़ा आता है ऐसे कोई चूसे तो.
आरव: ओह मुझे लगा आप जो ये सहला रही हो ऐसे ही करते है बस.
मैं: ऐसे भी कर सकते है पर इसमें वैसा मज़ा नहीं आता. वैसे ही जैसे तू अभी अपना लंड से खेल रहा है और तुझे अच्छा तो लग रहा होगा. लेकिन थोड़ी देर पहले मैंने जब तेरा चूसा कैसा लगा?
आरव: सच में दीदी तब तो जन्नत दिख रहा था.
मैं हसने लगी: बस ऐसी ही बात हम लोग की भी होती है.
वो कुछ देर चुप सा हो गया.
मैं: क्या हुआ नहीं समझ आया?
थोड़ी देर चुप रहने के बाद उसने कहा-
आरव: आज मैं सहलाऊँ आपका?
ये बात सुनते ही मैं जम गयी. एक-दम से बदन में से बिजली दौड़ गयी और धड़कने तेज़ हो गयी. आज शायद मेरा लकी दिन था. आरव ने मेरी मुस्कराहट को हां समझ लिया और मेरी चूत छु ली. चूत पर हाथ रखते ही मेरी सिसकी निकाल गयी और रोंगटे खड़े हो गए. मैं बिलकुल शर्मा गयी और मुँह दूसरी और घुमा लिया.
वो अँधेरे में न दिखने के कारण पूरी चूत में हाथ फेर रहा था. इस चक्कर में वो यहाँ-वहां ऊँगली डाले जा रहा था. कभी थाइस में कभी फूलो के बीच में. बीच में ऊँगली जाते ही मैं उछल पड़ी और उसका हाथ पकड़ लिया. मेरी सांसें तेज़ हो गयी.
आरव: नहीं करू?
मैंने कुछ नहीं बोला बस हाथ को धीरे से हटा लिया और आँखें ज़ोरों से बंद करके रखी. आरव फिर से उँगलियाँ फेरने लगा. पर अब उसे मेरी कमज़ोरी मिल गयी थी. वो मेरे चूत के बीच में सहलाने लगा और इधर मैं पागल होने लगी. मैं बिलकुल सीधी लेट गयी और आरव के मेरी चूत के साथ खेलने से अपनी टांगें और ज़्यादा फैला दी. जितना वो रगड़ता उतना मैं उछलती होंठ काटती और तकिये को नोचती काटती. ये जान करके भी की पास वाले रूम में ही मम्मी-पापा सोये थे मुझसे बर्दाश्त नहीं हुआ और आह उउउउह आआअह की आवाज़े मेरे मुँह से निकलने लगी.
ऊँगली को सहलाते हुए अब वो पूरे हाथ से सहलाने लगा और मैं जल बिन मछली की तरह तड़पने लगी. मुझे पसीने आने लगे. सहलाते हुए वो पूरा हाथ चूत से लेता हुआ नीचे गांड तक ले जाता और कभी ऊपर आके मेरी चूत के ऊपर थोड़ी से बालों के साथ खेलता. कुछ देर बाद वो रुक गया. मैंने आँखें खोली तो वो मेरे पैरों के बीच में जाके बैठ गया और झुक कर मेरी चूत की तरफ आ गया. मैं समझ गयी वो क्या चाहता था. उसने मुझे देखा पूछने के लिए. मैंने बस उसे देखा और सिमी की बातों को याद करने लगी. फिर मैं एक-दम से लेट कर आँखें बंद कर ली. आरव समझ गया और एक-दम से चूत के बीचो-बीच जीभ डाल दी.
जीभ लगते ही मैं सिसकी ले उछल पड़ी और उसके बालों को पकड़ लिया. आरव ने थोड़ा वेट किया और दोबारा जीभ चलाने लगा. इस बार वो रुका नहीं. एक-दम से टूट पड़ा और चाटता रहा.
मैं: आआअह्ह्ह उउउउउउ भईई अह्ह्ह स्स्सस्स्स्स धीरीई आआह खा जायेगा क्या आआआउउउउ.
मैं छटपटाती रही पागलों की तरह. उफ्फ्फ क्या फीलिंग थी. बदन का कोई कोना नहीं था जहाँ रोंगटे न खड़े हो. आरव मेरी जाँघों को और फैला चुका था और भूखे शेर की तरह पूरी चूत को मुँह में लेके चूस रहा था. ठीक जैसे मैं उसका माल निकालने के लिए कर रही थी. मुझे समझ आ रही थी की उसे मेरी चूत बहुत पसंद आयी. उसके ऐसे चूसने की वजह से कुछ ही देर में मैं झड़ने पे आ गयी. निकलने के पहले मैंने चिल्ला दिया.
मैं: आरव हट… आआह्ह्ह्ह. और मैं ज़ोरों से गरम पानी का फव्वारा छोडने लगी.
आरव बैठे देखता रहा और मैं चूत रगड़-रगड़ के पानी निकालती रही. पूरे बदन में कपकपी और मुँह से बस आअअअअ आअअअअ करते-करते फाइनली मैं बेहाल होकर गिर पड़ी. थोड़ी देर में आंख खुली तो आरव मेरे पेट को सहला रहा था.
मैंने थकी हुई आवाज़ में कहा: क्या हुआ आरव. क्या देख रहा है?
आरव: आपने मेरे मुँह में क्यों नहीं छोड़ा? आप करते हो न मुझे भी दो.
मैं: लेकिन शायद ये तुझे न पसंद आये और पहली बार था न इतना सारा नहीं ले पाता.
आरव: पसंद न पसंद मेरी प्रॉब्लम है और करने दोगी तो ही दूसरी बार होगा. फिर तीसरी फिर आदत हो जाएगी न.
मैं: अच्छा बाबा सॉरी. नेक्स्ट टाइम.
आरव: नेक्स्ट टाइम क्यों?
मैं: बाबू और अब और नहीं होगा मेरे से.
उसने नहीं सुना और वापस मेरी जांघों के बीच चला गया. पर उसने चूत को नहीं रगड़ा बल्कि आस-पास लगे पानी को चाटने लगा. पहले मेरी चूत को चाट के साफ़ किया. फिर पेट जांघ और बाकी जगह. ख़तम करके मेरे पास लेट गया.
आरव: क्या बोल रही थी दीदी? अच्छा तो है. नमकीन सा.
मैं मुस्कुराने लगी.
आरव: और हां. ये जो भी किया हमने ये भी अब से मुझे रोज़ करना है.
उसने पहली बार मुझसे पुछा नहीं बल्कि एक आर्डर दिया जो मुझे बहुत अच्छा लगा. मैंने हलकी सी आवाज़ में उसके सर पे हाथ रख के कहा: तेरी मर्ज़ी. मैं मना नहीं करुँगी. नंगा तो कर ही सकता है तो ये भी कर लेना.
आरव: ठीक है दी. अब सो जाओ. बहुत रात हो गया. 12 का बोल के 1:30 बज गया.
और हम ऐसे ही पहली बार एक-दुसरे के साथ नंगे सो गए. अगले दिन मेरी आँखें खुली तो एक-दम फ्रेश फील हो रहा था. लगा जैसे बिलकुल सुकून वाली नींद हुई थी. नज़र घुमाया तो देखा आरव नहा के आया था क्यूंकि बदन पर पानी की बूँदें थी. वो नंगा ही अलमारी से अंडरवियर ढूंढ रहा था. पहनने के बाद उसने देखा मैं भी उठ गयी थी.
आरव: गुड मॉर्निंग दीदी.
मैं: गुड मॉर्निंग भाई.
आरव: नींद हो गयी?
मैं: हां एक-दम फ्रेश लग रहा है. पर उठने का बिलकुल मैं नहीं है.वो एक-दम से पास आया और मेरी चादर हटा दी. मैं बिलकुल नंगी थी. वो चूत के पास आया और चूत पर किश किया.
मैं शर्मा गयी: ये क्या था?
आरव: गुड मॉर्निंग किश. अब उठ जाओ.
मैं मुस्कुराते हुए उठी और हम दोनों अपने कॉलेज चले गए. इस दिन से मेरा अपने भाई आरव के सामने नंगे रहना और उसके मेरी चूत के साथ खेलने की शुरुआत हुई. आगे अगले भाग में.
अगला भाग पढ़े: मुझे अपने भाई से चुदना है – 5
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