मुझे अपने भाई से चुदना है – 3

Bhai se chudai ki sex story:- हेलो फ्रेंड्स. पिछले पार्ट में अपने पढ़ा के मै अपने भाई को प्यार करने लगी थी और चाहती थी कि किसी भी तरह वो मुझे चोद दे। फिर कैसे मैंने अपने भाई के साथ इन्सेस्ट रिलेशन की शुरुआत की. अब पढ़िये आगे-

पिछला पार्ट ==> मुझे अपने भाई से चुदना है – 2

Bhai se chudai ki sex story

Bhai se chudai ki sex story

अगली सुबह मैं नहा के निकली और जैसे आदत बनी थी आरव के सामने ही पैंटी पहन के टॉवल हटा के टॉपलेस हो गयी. हमारा रिलेशन तो शुरू हो चुका था. लेकिन पता नहीं क्यों हम दोनों नज़रें नहीं मिला पा रहे थे. मैंने ब्लैक ब्रा पहन ली. वो ब्रा थोड़ी टाइट स्टाइल वाली थी जिससे मेरी बड़ी सी क्लीवेज बन गयी थी. मैं बेड पर बैठ गयी जहाँ आरव मोबाइल देख रहा था और बाल झाड़ने लगी.

मैंने देखा आरव बार-बार मेरी टाइट ब्रा से बाहर आ रहे गोरे-गोरे बूब्स की तरफ देख रहा था. मुझे हलकी सी शर्म अब भी आ रही थी. लेकिन फिर मैंने सिमी की बात याद करी जहाँ उसने मुझे आरव के लंड के बारे बताया था. इससे मैं फिर से गरम होने लगी और शर्म कम होने लगी. देर न करते हुए मैं आगे बढ़ी. मैंने धीमी सी आवाज़ में पुछा-

मैं: आरव?

आरव: हां दीदी?

मैं: क्या चाहिए?

वो शर्मा सा गया.

मैं: क्या हुआ?

हलकी सी आवाज़ में उसने मेरे बूब्स की ओर इशारा करके कहा-

आरव: वो ले लु?

मैंने भी अपने बूब्स की और इशारा किया और पुछा-

मैं: ये चाहिए?

आरव: हां दीदी.

मैंने यु ही थोड़ा दरवाज़े की और नज़र दौड़ाई की कहीं मम्मी पापा आस-पास तो नहीं. कन्फर्म होने के बाद मैंने अपने दाहिने कंधे का ब्रा स्ट्राप उतार दिया और अपने राइट बूब को बाहर निकाल लिया. भाई की आँखों में चमक आ गयी. मैंने उसे मुस्कुराते हुए उसके सर को हलके से पकड़ अपनी और खींचा और अपने बूब पे लगा दिया. आरव ने जैसे ही अपने होंठ मेरे निप्पल पे लगाए मेरे पूरे शरीर में करंट दौड़ गया और मैं सिसकी ले उठी.

आरव: क्या हुआ दी?

मैं: कुछ नहीं बाबू तू कर.

ये सुनते ही भाई मेरे निप्पल्स को अपने कोमल से होंठ में दबा के चूसने लगा. मेरे रोंगटे खड़े हो गए और मैंने उसके सर को ज़ोर से पकड़ के बूब्स पे दबा दिया. आरव बिलकुल भूखे बच्चे की तरह मेरे निप्पल चूस रहा था. कभी-कभी वो पूरे बूब को ही अपने मुँह में डाल लेता. मैंने आँखें बंद कर ली और उसके हर चूसने पर उछाल जाती.

मैं: आह आरव उम्म शहहहहह धीरे भाईईई सीयसहहह आउउउउउच.

इस बीच मैं भी गरम हो चुकी थी. मैंने अपना लेफ्ट स्ट्राप उतार के लेफ्ट बूब भी निकाल लिया. फिर आरव के दाहिने हाथ लेके अपने लेफ्ट वाले पर रख दिया. हाथ में आते ही आरव लेफ्ट बूब को दबाने लगा. मैं पूरा पागल होने लगी. मैंने आरव के सर को छोड़ दिया और पीछे झुक के बैठ गयी. आरव मेरी और झुका था और मैं पीछे गिर न जाऊ इसलिए पीछे हाथ से सपोर्ट रखा था. बस इसी पोजीशन में मेरा भाई मेरे बूब्स से खेले जा रहा था और मैं बस सर ऊपर कर आँखें बंद कर मज़ा ले रही थी.

कुछ देर बाद आरव मेरा लेफ्ट वाला बूब पकड़ के चूसने लगा. ऐसा लगा जैसे फिर से शुरू हुआ हो. बिलकुल नए से रोंगटे खड़े होने लगे और सिसकियाँ आने लगी. दुसरे बूब को चूसते वक़्त आरव ने मुझे कमर से पकड़ लिया. उसके मज़बूत हाथ ने मेरी पूरी कमर को घेर लिया और मैं आगे आके उसकी बाहों में चिपक गयी. मुझे ये मोमेंट बहुत सेक्सी लगा. अब वो मुझे पूरा टाइट से हग करके बूब्स चूस रहा था. इसी बीच कुछ ऐसा हुआ जिससे मेरे पूरे बदन में बिजली दौड़ गयी. जैसे ही उसने मुझे हग किया, मैं उसके कड़क लंड पर बैठ गयी.

मैंने पैंटी पहनी थी इसलिए लंड की गर्माहट पूरी तरह से पता चल रही थी. मैं एक-दम से उछल गयी.

आरव: क्या हुआ दीदी. लगा क्या?

मैं: नहीं बाबू कुछ नहीं हुआ.

वो वापस चूसने लगा. पर इस बार हग करते वक़्त मैं उस पर भारी पड़ गयी और वो बेड पर गिर पड़ा और मैं उसपे. इससे मेरा लेफ्ट बूब उसके मुँह पर दब गया. पर उसने चूसना अब भी नहीं छोड़ा. मैं वैसे ही पड़ी रही. भाई ने मेरे राइट बूब को छोड़ लेफ्ट को ही दोनों हाथो से पकड़ लिया और और ज़ोरों से चूसने लगा. वो ऐसे दबा-दबा के चूस रहा था जैसे उसे दूध मिल रहा हो.

मैंने देखा तो राइट वाला बूब लाल पड़ गया था और जिस तरह से आरव बाएं वाले को दबा रहा था, मुझे दर्द होने लगा था. पर ये दर्द मुझे दीवाना कर रहा था. यहाँ मेरी पैंटी गीली होने लगी थी. मुझसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था अब. मैंने अपनी पैंटी में हाथ डाला और अपनी चूत को सहलाने लगी. मैंने एक हाथ से आरव के बालों को पकड़ रखा था और दुसरे से चूत रगड़ रही थी. क्यूंकि मैं आरव के ऊपर ही लेटी थी, मेरे पेट पे उसका लंड लगा हुआ था जिससे मैं और गरम हो रही थी. मैं चूत को रगड़ती रही और वहां आरव भी मेरे निप्पल्स को काटने लगा. फिर मैं भी ज़ोरों से रगड़ने लगी.

मैं: आआह उउउउउह भाईईई धीरे उफ्फ्फ्फ़ आआअह्ह्ह्ह. भईईई आआआअह्हह्ह्ह्ह स्स्सस्स्स्शह्ह्ह आआआआआखिर

मेरा बदन ज़ोरो से मचला और एक ज़ोर का गरम पानी का फुवारा मेरी चूत से फटने लगा. मैंने आरव के बालों को इतने ज़ोरों से पकड़ लिया की उसने बूब्स चूसना बंद कर दिया.

मैं: AAAAAAAAAAHHHHHH, आआआआआ अअअअअअअअमाइन ज़बरदस्त छटपटाते हुए पानी छोड़ती रही. पर मैंने चूत रगड़ना नहीं छोड़ा.

हर आआह्ह्ह्ह के साथ ढेर सारा गरम पानी. 8-10 झटकों में मेरा सारा पानी निकल गया और मेरा हाथ मेरी पैंटी मेरा पेट और कुछ हद तक बिस्तर भी भीग गयी. फाइनली मैं थक के चूर हो गयी और आरव पर गिर पड़ी. मेरी सांसें चढ़ी हुई थी. मैं बिलकुल बेहाल होकर पड़ी हुई थी और आरव भी मेरा शांत होने के लिए वेट करता रहा. थोड़ी देर में मुझे होश आया तो याद की मैं इतना भरी भरकम शरीर लेके अपने भाई पे पड़ी थी.

मैंने जैसे-तैसे अपने को सरकाया और बगल में लेट गयी. ये मेरी ज़िन्दगी का पहला और सबसे बड़ा झड़ना था. इतना आराम मैंने ज़िन्दगी में कभी फील नहीं किया था. मेरे बूब्स अब भी ब्रा से बाहर थे पर मुझमे बिलकुल भी ताकत नहीं थी कुछ भी ठीक करने की. तो मैं वैसे ही खुले बूब्स और भीगी पैंटी में पता नहीं कब सो गयी. कुछ घंटो में मेरी आँखें खुली तो चारों तरफ अँधेरा था. मैंने फ़ोन चेक किया तो शाम के 6:30 बज गए थे.

बाप रे इतनी देर मैं कभी नहीं सोई. मुझे बहुत फ्रेश लग रहा था. पर साथ ही मेरे बूब्स दर्द कर रहे थे. जैसे-जैसे मैं होश में आयी मुझे सुबह का सारा पागलपन याद आने लगा और मैं मुस्कुराने लगी. मुझे शर्म भी आ रही थी और बहुत अच्छा भी फील हो रहा था. अचानक मुझे याद आया की मैं किस हालत में सोई थी. पर मैंने नोटिस किया की मेरे बदन पे चादर था और मेरे बूब्स भी ब्रा के अंदर थे. पैंटी अब भी गीली थी पर कोई बात नहीं. साथ ही दरवाज़ा भी बंद था.

आरव ने ही किया होगा. मैं ये सोच के खुश हो गयी. लेकिन मम्मी? मैं तो रूम से निकली ही नहीं. न कॉलेज गयी और न सारा दिन कुछ खाया. बहुत तेज़ भूख लगी थी पर डर लग रहा था की मम्मी क्या सवाल करेगी. मैं जैसे-तैसे उठी और कपडे चेंज करके धीरे से दरवाज़ा खोला. देखा तो मम्मी पापा लिविंग रूम में टीवी देख रहे थे और आरव सोफे पर बैठा था. मेरे निकलते ही सारे मेरी और घूरने लगे. मैं कुछ बोलती इतने में मम्मी एक-दम से उठ के मेरी और आयी.

मेरी गांड फट गयी की अब मुझे थप्पड़ पड़ेगा. मम्मी ने पास आते ही मेरे सर और गाल पे हाथ लगाया.

मम्मी: तबियत ठीक है?

पापा: दवा ला दू क्या कुछ?

मम्मी: लगता है बुखार उतर गया.

मुझे समझ नहीं आ रहा था क्या बोलू. इतने में आरव की और देखा तो वो स्माइल किया. मैं समझ गयी ये सारा खेल उसी का रचा हुआ था.

मैं: नहीं मैं ठीक हूं अभी. कल रात थोड़ी देर तक पढ़ रही थी तो सर घूमने लगा.

पापा: इतना क्यों प्रेशर लेना? एग्जाम में टाइम है न.

मम्मी: चल खाना खा ले. सारा दिन से कुछ खाया नहीं है बच्ची ने.

मम्मी मुझे ले गयी. रास्ते में मैंने देखा तो आरव ने मुझे आँख मारी. मैं शर्मा गयी और सर झुकाते हुए किचन में चली गयी. मुझे खाना दिया गया और सारा टाइम मैं सर झुका जो हुआ उसे याद करके शरमाते हुए खा रही थी. पर जितना मैं याद कर रही थी पता नहीं कुछ अजीब सी घबराहट होने लगी थी. खाते ही मैं छत पे गयी और सिमी को कॉल किया.

सिमी: क्या बात है तूने तो कॉलेज आना बंद कर दिया. चुदाई चालु हो गयी क्या?

मैं: अरे धत! सुन न…

उसके बाद मैंने सुबह का सारा काण्ड उसे बताया.

सिमी: वाह.. रंडी साली तूने मुझे प्रॉब्लम बताने फ़ोन किया है या मुझे गरम करने? मेरी पैंटी गीली हो गयी.

मैं: साली तेरी तो हमेशा गीली रहती है. सुन न मेरी बात.

सिमी: अच्छा बोल-बोल.

मैं: देख मुझे अच्छा तो लगा. पर अजीब सी घबराहट हो रही है. इससे पहले मैं कुछ बोलती सिमी ही बोल पड़ी.

सिमी: यही शक है न की तू जो कर रही है सही है या गलत? मैं भाई के साथ ये सब.

मैं: हाँ कुछ ज़्यादा तो नहीं हो रहा? मतलब जब तक बदन में आग रहती है लगता है भाड़ में जाये दुनिया. पर अब थोड़ा गिल्ट सा लग रहा है.

सिमी: मैं समझ रही हूँ और तू अकेली नहीं है. तुझे क्या लगता है मैं बचपन से लेस्बियन थी? शुरू में मेरे साथ भी ऐसा हुआ था. पर जैसे-जैसे आदत होने लगी मैं और एन्जॉय करने लगी. तूने भी अपना जवाब खुद ही दिया.

मैं: क्या जवाब?

सिमी: तू जब गरम होती है तब मज़ा आता है. और सही में माँ चुदाने गयी दुनिया. तूने कहा न तुझे मज़ा आता है. तो मज़ा ले न. और रही बात भाई की तो आदत हो जाएगी.

मैं: मज़ा तो ठीक है पर बॉयफ्रेंड के साथ दोबारा हो जाता है. पता नहीं आज की तरह भाई के साथ फिर से?

सिमी: देख तूने उसे थोड़ा बहुत कुछ दे दिया है. टॉपलेस रहती है उसके सामने. चुदी नहीं है पर नंगी देख चुका है तुझे. पर घबरा मत. होने दे. तू एक काम कर. पहले तू खुद उसके टच की आदत डाल. तूने अपने बूब्स के साथ खेलने के लिए परमिशन दे दिया है. तो खेलने दे उसे. वो जब भी छुए तू भी एन्जॉय कर. धीरे-धीरे तुझे आदत हो जाएगी.

सिमी: फिर वो जब भी तेरे बूब्स पे हाथ लगाएगा तुझे अच्छा लगेगा. उल्टा तू ही चाहेगी की वो हमेशा तुझे छुए. गारंटी से बोलती हूं तुझे लगता है दोबारा होगा की नहीं? मैं बोलती हूं बहुत जल्दी तू उसके लंड पे नंगी होकर उछल रही होगी और तब लगेगा की घंटा फर्क पड़ता है की कोई देख ले.

मैं चुप-चाप सिमी की बात सुनती रही. उसकी बातों से मैं फिर से गरम होने लगी. मेरी सारी confusion भी दूर हो गयी. लगा मज़ा तो आता है तो क्यों बेकार में मज़ा खराब करू.

सिमी: ओए तू सुन रही है?

मैं: हां समझी. अब थोड़ा क्लियर लग रहा है.

सिमी: बस फिर क्या! जा और मज़े कर यार.

फ़ोन रखते ही मैं ख़ुशी-ख़ुशी नीचे गयी. रूम में आरव नहीं था. इतने में सिमी का whatsapp पर मैसेज आया. कई सारे वीडियो के लिंक्स थे. मैंने खोला तो पाया सारे भाई बहन के सेक्स वीडियोस थे. मैं देखने लगी. देखते-देखते मेरी चूत गीली होने लगी और बचा-खुचा confusion भी हट गया. मैं अपनी चूत सहलाने लगी और तभी अचानक से दरवाज़े पर देखा तो एक-दम से डर गयी. दरवाजे पर ऐसा क्या था? अगले पार्ट में ज़रूर पढ़िए.

अगला पार्ट यहाँ पढ़ें- मुझे अपने भाई से चुदना है – 4

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