Holi par Sasur bahu ki chudai:- ससुरजी बहू सेक्स स्टोरी मे होली के दिन कामिनी को सुसराल मे उसके ससुरजी ने बाथरूम मे पकड़ लिया। फिर उसकी ऐसी चूत चोदी कि कामिनी की चूत गनगना गयी। क्या हुआ कैसे हुआ पढ़ें इस स्टोरी मे।
दोस्तो, मैं आपकी दोस्त नैना आपके एक और sasur bahu ki sex story लेकर आई हूँ।
Holi par Sasur bahu ki chudai

ये स्टोरी है कामिनी की।
कामिनी एक गरीब परिवार मे पैदा हुई थी, लेकिन वह संयोग से उसे एक खाते-पीते घर की बहू बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ।
स्टोरी मे आगे बढ़ेंगे पर उससे पहले कामिनी के घर के बाकी सदस्यों का intro करवा देती हूं।
कामिनी का पति था जयवीर। और ससुरजी का नाम था श्यामलाल।
कामिनी की ननद का नाम रानी था, जो नाम से ही नहीं काम से भी रानी थी।
रानी होली मनाने अपने मायके आई हुई थी और उसका पति भी साथ आया था.
रानी के पति यानी कामिनी के ननदोई का नाम था कांतिलाल।
और कामिनी का छोटा देवर, जिसका नाम था नारंग।
मार्च का महीना शुरू हुआ था और होली का दिन आ पहुंचा था।
होली की सुबह उठते ही सबने होली की पूजा की।
पूजा करने के बाद सब अपने-अपने कमरे मे सोने के लिए चले गए।
कामिनी के सुसराल मे, ये रिवाज था कि होली के दिन कोई किसी के साथ कैसी भी मज़ाक कर सकता था, किसी कि बात का कोई ना तो बुरा मान सकता था ना ही किसी को रोक सकता था।
तो अगले दिन जब रंग खेलने का दिन था, कामिनी जल्दी ही 6 बजे के करीब उठ गई।
उनके घर मे वही सबसे पहले उठा करती थी, नहा धोकर वही सबको जगाती थी।
उसे लगा था कि आज शायद ही जल्दी कोई उठेगा।
लेकिन उसको ये नही मालूम था कि उसके ससुरजी श्यामलाल उठ चुके है।
श्यामलाल के साथ ही उसका लंड भी जाग उठा था, और पाजामे मे तम्बू बनाए हुए था।
वैसे तो श्यामलाल की पत्नी को गुजरे 2 साल हो चुके थे, लेकिन श्यामलाल को कभी चूतों की कमी महसूस नहीं हुई।
घर से बाहर श्यामलाल कई औरतों और लड़कियों के साथ अपना चुदाई का खेल जारी रखे हुए था।
यहाँ तक कि श्यामलाल ने अपनी समधन यानि कामिनी की माँ को भी चोद लिया था, जब वो कामिनी के के पास कुछ दिनो के लिए रहने आई थी।
खैर, वो बात तो अब पुरानी हो गई थी।
आज जबसे श्यामलाल उठा था, उसका हथियार था कि बैठने का नाम ही नहीं ले रहा था।
श्यामलाल बार-बार अपने बाबूलाल हाथों से adjust करता हुआ घर मे इधर उधर घूम रहा था।
तभी श्यामलाल की नज़र कामिनी बहू पर अटक गयी।
कामिनी की मटकती चाल, ठुमकती कमर, और उछलते बूब्स और जब वो चल रही थी तो किसी काम की देवी को भी मात दे रही थी।
कामिनी को ऐसे देख श्यामलाल का मन डोल गया था। सुबह से वैसे ही उसके लंड ने उसे परेशान किया हुआ था और अब बहू को ऐसे देख श्यामलाल के मन मे बहू कामिनी की चूत चुदाई करने का ख्याल आने लगा। अब वो सोचने लगा कि बहू को आखिर कैसे अपने नीचे लाये। तभी उसकी नजर टेबल पर रखे होली के रंगों पर पड़ी। रंगो को देखकर श्यामलाल के चेहरे पर शैतानी मुस्कान तैर गई।
उसने दोनों हाथों मे रंग लिया और कामिनी की ओर बढ़ चला।
कामिनी नहाने की तैयारी कर रही थी, और जब तक श्यामलाल रंग लेकर उसके पास आता, कामिनी नहाने के लिए बाथरूम मे घुस गयी। कामिनी ने बाथरूम मे जाते ही साड़ी और ब्लाउज उतार फेंके। अब वह ऊपर से पूरी तरह नंगी थी और नीचे उसने बस पेटीकोट पहना था। कामिनी ने बाथरूम की कुंडी लगाने की जरूरत नही समझी, क्यूंकी उसने सोचा की सब सो रहे है। तो बाथरूम की कुंडी खुली थी और अंदर कामिनी नहाने के लिए नंगी हो रही थी।
श्यामलाल दोनों हाथो मे रंग लेकर आया और सीधा बाथरूम का दरवाजा धकेल दिया, दरवाजे मे कुंडी नही लगी थी तो दरवाजा खुल गया।
अचानक दरवाजा खुलने और सामने ससुरजी को खड़ा देख कामिनी के होश उड़ गए। उसने तुरंत अपनी छाती पर दोनों हाथ रखे और दूसरी तरफ घूम गयी।
इससे पहले वो कुछ समझ पाती श्यामलाल ने उसे दबोच लिया और उसके मुलायम गालों पर रंग मलते हुए ‘हैप्पी होली बहू’ … ‘हैप्पी होली बहू’ कहने लगा।
कामिनी की पीठ श्यामलाल के सीने से चिपकी हुई थी।
श्यामलाल का लंड कामिनी की गांड की दरार के बीच जा फंसा था।
गांड की फाँको मे ससुरजी के मोटे मूसल का अहसास पाकर कामिनी के बदन मे सनसनी दौड़ गई।
यह पहली बार था, जब उसके ससुरजी का जिस्म उसके बॉडी से चिपका था। कामिनी डर ससुर के बदन के टच से रोमांचित हो उठी और उसके अंदर कामुकता की एक लहर दौड़ पड़ी जो उसको पागल बनाने लगी।
ससुरजी के लंड का अपनी गांड की दरारों मे होने का एहसास और उनके मर्दाना शरीर की खुशबू से कामिनी मदहोश होती जा रही थी। श्यामलाल ने एक हाथ से बहू की कमर को कसके पकड़ा था जिससे बहू की गांड पर उसके लंड का दबाव बना हुआ था और दूसरे हाथ से वह बहू के गालों पर रंग मल रहा था।
धीरे-धीरे से वो कामिनी की गांड मे धक्के लगाने की कोशिश कर रहा था।
कामिनी ‘नहीं-नहीं’ करते हुए अपना चेहरा इधर-उधर हिला रही थी।
अब श्यामलाल का हाथ कामिनी की कमर से सरकता हुआ नीचे की ओर जाने लगा।
श्यामलाल का हाथ धीरे-धीरे कामिनी के पेटीकोट के नाड़े को टटोलता हुआ नीचे जा पहुंचा।
फिर नाड़ा मिलते ही एक झटके के साथ उसने उसे खींच दिया।
उधर दूसरा हाथ, जो कामिनी के चेहरे पर था, धीरे से श्यामलाल ने अपने हाथ को बहू के बूब्स पर रख दिया।
वो अपने सख्त हाथ से कामिनी के चूचे मसलने लगा।
नीचे से उसका हाथ पेटीकोट का नाड़ा खोल सीधे कामिनी चूत पर सहलाने लगा था।
इस दोहरे वार से कामिनी अब अपना आपा खोने लगी थी।
उसे होश भी नहीं रहा कि उसका घाघरा कब का नीचे गिर चुका था।
इतने मे श्यामलाल ने बीच की एक उंगली कामिनी की चूत की फांकों के बीच अंदर कर दी।
चूत मे उंगली जाते ही कामिनी के अंदर एक तूफान सा उठने लगा।
वो अब चुदासी सी होने लगी।
उसके हाथ अपने आप ही उसके ससुरजी के सिर को पकड़ने लगे।
श्यामलाल यह देख जोर से अपने मर्दाना हाथों से उसकी चूचियों को मसलने लगा।
कामिनी की वासना भी अब भड़क उठी थी।
लेकिन इससे पहले वो कुछ करती, श्यामलाल ने उसे अपनी तरफ घुमाकर उसके होंठों पर होंठ रख दिये और बेतहाशा उनको चूसने लगा।
कामिनी की कमर बहुत कमसिन थी लेकिन उसकी तरबूज़ों और गांड का आकार उसे सम्पूर्ण कामुक नारी बनाता था।
श्यामलाल ने कामिनी को कमर से पकड़कर गोद मे उठा लिया।
कामिनी समझ नहीं पा रही थी कि ये सब क्या और कैसे होता जा रहा है।
जिस ससुरजी को उसने ढंग से देखा भी नहीं था, आज उसका लंड उसकी चूत मे जाने के लिए तैयार हो चुका था।
कामिनी ने भी अपनी टांगों को ससुरजी की कमर पर लपेट लिया। अगले ही पल उसे श्यामलाल के लंबे मोटे लंड का एहसास अपनी चूत की दीवार पर हुआ।
कामिनी को चूत ससुर जी के लंड के एहसास से पनिया गयी। श्यामलाल ने देर ना करते हुए अपने हाथ पर थूका और लंड के सुपाड़े पर थूक चुपड़ दिया।
फिर उसने लंड को कामिनी बहू की चूत के मुंह पर रखा और उसकी कमर को पकड़ कर एक करारे झटके के साथ बहू की चूत मे अपना गधे जैसा लंड उतार दिया।
एक झटके मे ही श्यामलाल का औज़ार कामिनी की चूत की गहराई मे जा घुसा।
इस हमले से कामिनी की जान हलक मे आ गई- उईईईई … इस्सससससस… ऊई माँ मर गईईई … ऊईईईई माआ आआ!
श्यामलाल ने तुरंत अपने होंठों से कामिनी के होंठों को बंद कर दिया। फिर वह उसके होंठों को चूसने लगा। कामिनी को ऐसा लग रहा था जैसे उसकी चूत मे किसी ने गरम सरिया घुसा दिया हो। श्यामलाल अब बिना रुके अपनी बहू को अपने खड़े लंड पर कुदा रहा था। हर धक्के मे कामिनी की के मुंह से आआह निकल जा रही थी। हर धक्के के साथ कामिनी को ऐसा लग रहा था कि ससुर जी का खूंटा उसकी चूत मे बोरिंग कर रहा हो।
श्यामलाल बिना रुके उसे खड़े-खड़े गोद मे उठाए चोद रहा था। कुछ ही देर मे कामिनी बहू भी पूरी गरम हो गयी, उसकी चूत ने भी अब रस छोड़ना शुरू कर दिया था। लेकिन श्यामलाल नहीं रुका।
कामिनी की चूत के रस ने श्यामलाल के लंड को गीला कर दिया।
अब वो और जोर-जोर से उसको चोदने लगा।
अब श्यामलाल शायद बहू को गोद मे उठाए चोदते हुए थकने लगा था तो अब वो कामिनी को वो उसी पीजोशन मे अपने लंड पर बैठाये हुए अपने कमरे की ओर बढ़ गया।
कामिनी की चूत मे ससुरजी का खूंटा फंसा था और वह अपने पैरों को श्यामलाल की कमर पर जकड़े हुए थी। श्यामलाल ने उसे अपने कमरे मे ले जाकर अपने पलंग पर ला पटका, फिर उसके पैरों को खोला। उसके पैरों को फैलाकर ऊपर किया और फिर अपना पूरा लंड बाहर निकाल लिया। उसके सामने कामिनी की गुलाबी कोमल चूत थी जो पूरी खुल चुकी थी।
बहू की फैली चूत पर श्यामलाल ने अपनी जुबान लगा दी। इस हमले की कामिनी ने कल्पना तक नहीं की थी। उसकी चूत पर पहली बार किसी का मुंह लगा था और वो भी अपने ससुर जी का मूछों वाला। श्यामलाल अब अपनी खुरदुरी जीभ से कामिनी की चूत को चाटने लगा। कामिनी की चुदी हुई चूत पर ससुरजी की खुरदुरी जीभ अब ऐसा तूफान मचा रही थी कि कामिनी मदहोशी मे पागल होने लगी।
ससुरजी की खुरदुरी जीभ की चटाई को वो ज्यादा देर बर्दाश्त नहीं कर पाई और जोर-जोर से झड़ने लगी। उसकी चूत से ऐसी धार निकली जैसे कोई फव्वारा खोल दिया हो। बहू की चूत का सारा रस श्यामलाल ने चाट कर साफ कर दिया। श्यामलाल ने एक एक बूंद को चाट लिया। कामिनी का शरीर अब शांत हो गया था और वो हांफने लगी थी, अब वह अपनी सांसों को समेटने की कोशिश करने लगी।
कुछ देर रुककर, श्यामलाल ने फिर से जुबान का खेल अपनी बहू की चूत मे स्टार्ट किया। ससुरजी के वार से फिर से कामिनी की आह्ह निकली। अब श्यामलाल की जुबान उसकी चूत के और अंदर तक जाने लगी। उसकी चूत की एक-एक नस टटोलती श्यामलाल की जुबान के साथ वह अब मस्ती मे नाचने लगी थी और कमर को झटके दे देकर अपनी चूत को ससुरजी के मुंह पर दबा रही थी।
कामिनी की चूत एक बार फिर से श्यामलाल के होंठों पर कामरस बरसाने लगी। अब श्यामलाल ने अपने लोहे जैसे कडक हो चुके औज़ार को बहू की चूत के द्वार पर टिका दिया और एक जोर से झटका मारा। इस ताकतवर धक्के के साथ एक बार फिर से कामिनी की चीख निकल गई। कामिनी ने खुद ही अपने होंठों पर हाथ रखकर अपनी आवाज को बंद करने की कोशिश की।
अब ससुर जी ने जोरदार धक्के लगाना चालू कर दिया था। फिर कुछ पल बाद श्यामलाल ने अपना पूरा लंड बाहर निकाला और पूरी ताकत के साथ लंड को को बहू रानी की चूत अंदर पेल दिया। वो लगातार ऐसे ही लंड बाहर निकालता और जोरदार धक्के के साथ अंदर ठेल देता, इससे ठप-ठप की आवाज आने लगी। ऐसी जबरदस्त चुदाई से कामिनी की चूत ने फिर से रस बरसाना शुरू कर दिया।
आह्ह … आह्ह … की आवाजों के साथ कामिनी बहू फिर से झड़ने लगी। लेकिन श्यामलाल घनघोर चुदाई मे लगा था और दनादन अपना लंड बहू रानी की चूत मे अंदर बाहर कर रहा था।
आधे घंटे की पलंगतोड़ चुदाई के बाद श्यामलाल ने कामिनी को अब पलट दिया। अब वो पीछे से उसकी चूत मारने लगा। कामिनी को आज एक अलग ही मज़ा मिल रहा था कि कैसे उसके पति के पिता उसे चोद रहे हैं। पिता जी का लंड उसके पति के लंड से बहुत मोटा और लंबा था, जैसे किसी गधे का हो।
श्यामलाल कामिनी बहू की दमदार चुदाई फुल स्पीड मे कर रहा था। कुछ ही देर मे कामिनी फिर खाली हो गई। आज कामिनी की चूत रस बरसा बरसाकर थक चुकी थी। इतने मे ही श्यामलाल ने भी अपने लंड से वीर्य की लंबी धार छोड़ी जो कामिनी की चूत को भरने लगी।
दोनों के बदन बुरी तरह से कांप रहे थे। श्यामलाल अब उसी पोजीसन मे कामिनी की पीठ पर लेट गया। दोनों ससुर बहू अपनी अपनी सांसों पर काबू करने की कोशिश कर रहे थे। कुछ देर मे श्यामलाल का लंड मुरझाकर चूत से बाहर आ गया। ससुरजी के लंड का रस और बहू की चूत के रस का मिश्रण चूत से बाहर टपकने लगा।
श्यामलाल ने अपने लंड से उस रस को पौंछा, फिर अपने कपड़े पहने। उसने कामिनी बहू को खड़ी करके अपनी ओर किया और उसकी आंखों मे देखा। मुस्कराते हुए श्यामलाल ने अपनी मूंछों पर ताव दिया, फिर उसके होंठों को चूम लिया।
श्यामलाल बोला- बहू, तुम बहुत अच्छी हो! बहुत खूबसूरत हो। हैप्पी होली जान!
इतना बोलकर श्यामलाल बाहर निकल गया।
कामिनी उसे जाते हुए देखती ही रह गई।
लेकिन कामिनी आज अंदर से बहुत खुश थी।
आज पहली बार उसकी इतनी दमदार उसकी चुदाई हुई थी। कुछ देर तक तो वो ससुरजी से हुई दमदार चुदाई के ख्यालों मे ही खोई रही। फिर उसने अपने कपड़े ठीक किए। तभी उसे ख्याल आया कि उसकी चुदाई तो खुले मे ही हो गई! क्योंकि रूम का दरवाजा खुला हुआ था। उसने दरवाजे के बाहर आकर झांक कर देखा, कि किसी ने देखा तो नही?
फिर किसी को वहाँ ना पाकर वो जल्दी से भागती हुई बाथरूम मे घुस गई।
अंदर जाते ही उसे फिर से वही पल याद आने लगे।
उसकी चूत ने फिर से पानी छोड़ना चालू कर दिया।
उसने अपनी चूत को झुक कर देखा तो वो पावरोटी की तरह फूल गई थी।
चूत को ऐसी हालत मे देख उसके चेहरे पर हंसी आ गई।
वो अब खुद से ही शर्माने लगी।
कुछ देर बाद वो स्नान करके बाहर आ गई और किचन मे चली गई।
वो सोचने लगी कि आज होली है, और दिन की शुरुआत बहुत अच्छी हुई है। आज का दिन बहुत ही अच्छा जाएगा।
कामिनी को आज एक नये और अनुभवी लंड की सौगात मिल गई थी।
यह लंड उसकी चूत की गर्मी को बखूबी शांत कर सकता था।
इन्हीं ख्यालों मे वो मन ही मन मुस्कराने लगी।
फिर उसने एक ग्लास दूध गर्म करके पीया, और फिर सबको उठाने चली गई।
आपको ये ससुर बहू की चुदाई कहानी कैसी लगी अपनी राय कमेट बॉक्स मे जरूर देना।
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