Saural me holi par ghar me gang bang:- पिछले पार्ट मे आपने पढ़ा कि मेरे ससुराल मे होली पर सब मिलकर सामूहिक चुदाई करते है। उसके कुछ रुल्स और राउंड होते है। पहले 2 राउंड मे सब औरतों ने मर्दों के लंड चूसे और दूसरे राउंड मे मर्दों ने औरतों की चूत की चुसई और चटाई की। अब तीसरे राउंड की बारी थी और तीसरे राउंड मे घर की औरतें मर्दों से चुदने वाली थी। अब पढ़िये आगे…
ससुराल मे पहली होली मे घर के सारे मर्दों ने चोदा – 3
Saural me holi par ghar me gang bang

इस राउंड के लिए घर के अंदर से अभी के लिए एक-एक चारपाई लायी गयी और सभी पर गद्दे डाले गए। पापा जी ने सीटी बजाई और सभी लेडीज को इशारे से चारपाई पर लेटने के लिए कहा। और हम सब लेडीज चारपाई पर लेट गयी। मेरे चारपाई पर लेटने के बाद छोटे जेठजी मेरे सामने चारपाई के बगल में खड़े थे और फिर छोटे जेठ जी आगे बढे अपने दोनों पैरों के घुटने मोड़ कर मेरे सामने बैठ गए। मेरी नंगी चूत का ऊपरी हिस्सा उनके आँखों के सामने था। छोटे जेठजी ने एक हाथ मेरे जांघों पर रखा और जांघों को सहलाने लगे और उनका हाथ मेरी जांघों को सहलाते हुए मेरी चूत पर पहुँच गया। वह मेरी चूत को सहलाने लगे और दोनों हाथों से मेरी जांघों को अलग-अलग किया।
अब मेरी पूरी नंगी चूत उनके आँखों के सामने थी, छोटे जेठजी ने अपना हाथ हटाया और झुक कर मेरी चूत चाटने लगे और अपने एक हाथ से मेरी चूचियों को मसलने लगे। मै भी शराब के नशे में थी, छोटे जेठ जी की हरकतों से मेरा शरीर गरम होने लगा था। जेठजी बोले सिमरन क्या सॉफ्ट चूत हैं तुम्हारी uffffffffffff ।
”मै भी आह उफ़ के आवाज़ें निकाल रही थी। वह चूत की चुसाई इस तरह से कर रहे की मुझे बहुत मज़ा आ रहा था। जेठ जी ने अपना दूसरा हाथ भी मेरी चूचियों पर रख दिया अब दोनों हाथों से मेरी चूचियों को दबा रहे थे। मेरी चूत को चाट रहे थे कुछ देर ऐसे ही चलता रहा, मुझे लगा छोटे जेठजी मेरी चूत चाट कर ही मेरी चूत का पानी निकाल देंगे। पर जेठजी आगे बढ़े, अब मेरी नाभि को चूमते हुए मेरी चूचियों पर आ गये। अपने दोनों हाथों से मेरी एक-एक चूचियों को निचोड़ रहे थे और निप्पल्स को मुंह में डाल कर चूस रहे थे।
ऐसा लग रहा था मानो बरसों के भूखे हो। दांतों के निशान पूरे चूचियों पर नज़र आ रहे थे। मै मस्त हुई जा रही थी छोटे जेठ जी ऊपर आ गए उनका चेहरा बिलकुल मेरे सामने था और उनके शरीर का वजन मेरे ऊपर था। छोटे जेठ जी मेरे होठों को चूमने लगे जिसमें मैंने भी उनका साथ दिया और मेरे होठ भी जेठ जी के होठों से मिलकर एक दूसरे को जबरदस्त चूमते जा रहे थे।
मैंने अपना एक हाथ जेठ जी के सर पर रख लिया और दूसरा हाथ उनके पीठ पर था हम एक दूसरे के होठो को चूमते जा रहे थे। बीच बीच में जेठ जी अपनी जीभ मेरे मुंह के अंदर डालते हैं और मैं भी अपनी जीभ उनकी मुंह के अंदर डाल देती थी। यह बताना मुश्किल था की कितनी देर पर हम दोनों एक दूसरे को काफी देर तक चूमते रहे।
अब हम दोनों अलग हुए छोटे जेठ जी मेरी ऊपर बैठ गए उनके शरीर का वजन अब मेरे कमर पर था। जेठजी मेरे कमर से पीछे हटे। एक लम्बी किश होने से मैं तेजी से साँसे ले रही थी, उन्होंने मेरा एक हाथ पकड़ कर अपने लंड पर रखा और उसे आगे पीछे करने लगे।
जेठजी बोले उफ्फ्फ अब ये लंड तेरी चूत में डालूंगा सिमरन ahhhhhhhhhhh लेगी मेरा लंड अंदर उफ्फ्फ्फफ्फ्फ्फ़।”
वह अपने लंड को मेरी चूत पर मारते हैं और मेरे के चूत के लिप्स को अपने लंड से सहलाते हैं। धीरे से जेठजी अपना लंड मेरी चूत में डालते हैं। अंदर आधा लंड घुसाने के बाद वह मेरे पैरों को अपने कंधे पर सपोर्ट देते है और फिर वह पूरा अंदर तक चूत में अपना लंड डालते हैं।
फिर वो मेरी चूत को चोदने लगते हैं। जेठजी “उफ्फ्फफ्फ्फ़ सिमरन तेरी चूत तो कितनी टाइट हैं फिर भी पुरे लंड को खा गयी ufffffffffffff ये ले मेरा लंड। और लगातार अपना लंड मेरी चूत में डालकर चोद रहे थे। मेरे मुँह से सिसकारियां निकलती हैं जेठजी चूत चोदे जा रहा थे और चूत में अपना लंड पेलते जा रहा थे। लंड मेरे चूत में पेलते पेलते वह मेरी की चूचियों को मुँह में लेते है और चूसने लगते है।
वहाँ मेरे साथ साथ बाकियो की चुदाई हो रही थी, पर हम एक दूसरे के आग़ोश में थे और बड़ी मस्त चुदाई चल रही थी” अब मुझे किसी की नहीं पड़ी थी। लगभग 8-10 मिनट उस मुद्रा में चोदने के बाद जेठजी को अब मुझे डोगी स्टाइल में चोदना था।
जेठजी- चल सिमरन अब डोगी में चोदूँगा तेरी चूत। जैसे आप बोलो “मैं डोगी स्टाइल में चली जाती हूं और जेठ जी अपना लंड मेरी चूत में डालते हैं। फिर मेरी कमर को पकड़कर चूत को चोदने लगते हैं। फिर से थप थप की आवाज़ें आती, जैसे जैसे मेरी गांड जेठ जी की जांघों से टकराती। फिर जेठजी नीचे से मेरी की चूचियां पकड़ लेते है मानो किसी गाय का दूध निकाल रहे हो और मुझे चोदते जा रहे थे”
उफ्फ्फफ्फ्फ़ जेठजी मेरे घोड़े, क्या घुड़सवारी करते हो आप आह्ह्ह्हह्ह्ह्हह मै आपकी घोड़ी हूँ आह्ह्ह्हह।” अब हम दोनों ने पोजीशन बदल ली। जेठजी नीचे लेट जाते है और मै उनके ऊपर आ जाती हूं मेरी गांड उनकी जांघों पर आ जाती है और वो अपने लंड को मेरी चूत में डालकर मुझे अपने लंड से ही ऊपर धक्का देते है बार बार लगातार मै उनके ऊपर -नीचे उछल रही थी।
पूरी चारपाई हिल रही था मानो टूट जाएगी, हम दोनों बड़ी मस्ती में ऐसे चुदाई करते जा रहे थे।
“उफ्फ्फ्फ़ जेठजी क्या चोदते हो ahhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhhh मेरी चूत से पानी छूटने वाला है ई आई uffffffffffffffffffff आह्ह्ह्ह।” इतना कहते ही थोड़ी देर में मेरे चूत का पानी झरने लगता हैं। पर जेठजी तो अब तक झरने का नाम नहीं ले रहा थे।
सिमरन चलो अब फिर से आ जाओ मेरे नीचे। अब मै चारपाई पर लेट जाती हूं और जेठजी मेरी गांड को ऊपर उठाते हैं और अपना लंड अंदर चूत में डाल कर पेल देते है हैं। अब वह मेरे बॉडी पर थे और मुझे बाहों में जकड कर चूत चोदे जा रहे थे। अब जेठजी चोदते-चोदते एकदम से टाइट हो जाते हैं।
मै समझ जाती हैं वह अब वह झड़ने ही वाले हैं। जेठ जी ने मुझ पर अपनी पकड़ ढीली कर दी और मै नीचे चारपाई पर आ गिरी। वो घुटने मोड़ कर बैठ जाते हैं और मेरी चूत की चुदाई कर रहे होते हैं और फिर एकदम से जब उनके लंड का पानी निकलता है तो मेरी चूत से बाहर निकाल कर सारा पानी मेरी चूत की ऊपर डाल देते हैं”
अह्ह्ह्हह्हह मेरा पानी छुट गया simrannnnnnnnnnn”
Sasural me chudai ki story
हम दोनों अब थक गए थे ऐसे ही एक दूसरे के आग़ोश में थोड़ा टाइम रहते हैं पर इस बार नहीं पता चलता की किस लेडिस की चूत ने सबसे आखिर मे पानी छोड़ा या मर्दों में अभी तक कौन चुदाई कर रहा है। मैंने देखा मेरे पति और बड़ी भाभी दोनों ने हम दोनों से पहले ही अपना पानी निकाल दिया था। दोनों चारपाई पर लेटे बाकियो को देख रहे थे। बड़े जेठ जी और पापा जी को देखकर चौक गयी वह दोनों अभी भी चुदाई कर रहे थे। पर जल्दी ही बारी बारी से उन दोनों के लंड ने भी पानी छोड़ दिया।
प्रतियोगिता का ये राउंड भी ख़त्म हो चुका था, हम सब अपने जोड़ीदार से साथ चारपाई पर ही लेटे थे। पापा जी भी चारपाई पर बैठ गए और इस राउंड के विनर का बताया। सबसे पहले मेरे पति ने बड़ी भाभी की चूत का पानी निकाला था। इस राउंड के मर्दों में विनर मेरे पति थे। वहीं लेडीज में सबसे लास्ट में छोटी भाभी की चूत का पानी निकला था, तो इस राउंड की विनर छोटी भाभी थी। प्रतियोगिता का तीसरा राउंड ख़त्म हो चुका था, मर्दों में अब भी सबसे आगे जेठ जी थे और वही लेडीज में मै थी।
घर के सारे लोग एक साथ बैठे शराब का एक-एक पेग सबने पी लिया, मैंने भी। मुझ पर शराब का नशा चढ़ता जा रहा था, पर फिर भी मैं सब कुछ अच्छे से देख और समझ सकती थी। हम सब ने चुदाई वाले राउंड से पहले पूल में होली खेली थी, तो हमारे शरीर पर रंग लगे हुए थे। प्रतियोगिता के अगले राउंड से पहले पापा जी ने बड़े जेठ जी को पानी की मोटर चालू करने के लिए कहा और हम सबको बोला सब नहा कर अपने शरीर पर लगे रंग को ठीक से साफ़ कर लें।
थोड़ी देर बाद हम सब यही मिलते हैं, पर बड़े जेठ जी ने पापा जी की बात काट दी और बोले किसी को कहीं जाने की जरुरत नहीं है हम सब यही नहाएंगे और एक दूसरे पर लगे रंग को साथ मिल कर साफ करने में मदद करेंगे। सबको बड़े जेठजी की बात ठीक लगी, अब हम सब पूल के बगल में खाली जगह पर एक साथ खड़े हो गए जेठ जी ने अपने हाथ में पाइप ली। जिसमे मोटर से पानी आ रहा था और हम सब पर पानी की बौछार करने लगे।
घर के सभी लोग शराब के नशे में थे, पानी की बौछारों से भीग रहे थे। मौसम एक दम मस्त था, सब डांस भी कर रहे थे वहां पर साबुन शैम्पू पहले से ही था, तो सब एक दूसरे के शरीर पर साबुन लगा रहे थे। छोटे जेठ जी एक बार फिर से मेरे पास आये उनके हाथ में शैम्पू की बोत्तल थी। उन्होंने शैम्पू अपने हथेली में निकालकर मेरे शरीर पर रगड़ने लगे और बोले रंग मैंने लगाया है तो इसे हटाऊँगा तो मैं ही। अभी कुछ देर पहले छोटे जेठजी से मैं दुरी बनाने की कोशिश कर रही थी। पर उसने मेरी अभी जमकर चुदाई की थी और अब मेरे शरीर पर लगे रंग को साफ कर रहा था।
अब मुझे उससे कोई परहेज़ नहीं था, छोटे जेठ जी मेरी चूचियों पर शैम्पू लगाकर उसे मसलने लगे। साथ ही मेरे शरीर के बाकि अंगो पर भी शैम्पू लगाकर अपना हाथ घुमा रहे थे। मैने भी उनके हाथ से शैम्पू की बोत्तल लेकर शैम्पू उनको लगा दिया और अपने दोनों हाथो को उनके शरीर पर घूमने लगी। हम दोनों होली रंगों से नहीं बल्कि शैम्पू से होली खेल रहे थे।
बड़े जेठ जी हम सब पर पानी की बौछार करते रहे और छोटे जेठजी ने मेरे शरीर पर पुरे शैम्पू लगा लगा कर शैम्पू की बोतल खाली कर दी। मेरे शरीर का शायद ही कोई हिस्सा बचा था जहा छोटे जेठजी ने शैम्पू न लगाया हो और फिर उन्होंने ही वहाँ पड़ी बाल्टी में बार बार पानी लेकर मेरे शरीर पर लगे शैम्पू को हटाया।
मैं काफी देर से बिना कपड़ों के थी और पानी में बार बार भीगते रहने से मुझे अब ठण्ड लगने लगी थी, मैं बाकियों से अलग हटकर चारपाई के पास आकर अपने शरीर पर लगे पानी को टॉवल से साफ़ किया और उससे ही अपने आप को ढक लिया। मै वहीं बैठ गई बाकियों की मस्ती अभी भी चालू थी पर थोड़ी देर बाद सभी भी मेरे पास आ गए और वह पर रखी चारपाई पर बैठ गए।
पापाजी ने सबके लिए पेग बनाया। सबने अपना अपना पेग का गिलास खाली कर दिया, आज से पहले मैंने कभी शराब नहीं पी थी पर मै अभी शराब को सरबत की तरह पी रही थी। मुझे अब तेज नशा होने लगा था और ठण्ड से थोड़ी राहत मिली। पापाजी बोले प्रतियोगिता अब अगले राउंड की बारी है, मैं सोचने लगी अभी कितनी और कितना देर ये सब चलेगा और प्रतियोगिता के लिए क्या रहा गया है। एक बार फिर से दोनों जार में से पर्चियां निकाली गई पहली जोड़ी में मेरे पति और मेरा नाम आया पर हम पति-पत्नी थे तो पर्चियां वापस जार में रख गई और दुबारा पर्चियां निकाली गई। इस बार पहली जोड़ी बड़े जेठजी और छोटी भाभी का नाम आया, दूसरी बार पर्ची निकालने पर छोटे देवर राजू और मम्मीजी का नाम आया, तीसरी बार में पापाजी और सिमरन यानि मेरा नाम आया और आखरी जोड़ी मेरे पति और बड़ी भाभी का नाम आया। इस राउंड के लिए जोड़ियां बन चुकी थी।
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