बाप जैसे ससुर के लंड की सवारी की

Vidhwa Bahu ki chudai sasur se:- विजेंद्र राव अपने गाँव ही नहीं पूरे कस्बे के जाने माने व्यक्तित्व वाले इंसान थे. सभी उन्हें राव जी कह कर पुकारते और उनका रुतबा तो क्या ही था. वो एक अच्छे इंसान भी थे और इसकी एक मिसाल ये थी, की जब से वो गाँव में मुखिया के लिए चुनाव मे खड़े होने शुरू हुए थे. आज तक उनको कोई नहीं हरा पाया था। वो हमेशा बहुमत से जीत हासिल करते.

Vidhwa Bahu ki chudai sasur se

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गाँव में लगभग हर कोई उनको पसंद करता क्योकि कही न कही किसी न किसी तरीके से वो उनमे से हर किसी की कोई न कोई मदद तो कर ही देते थे. गाँव में कुछ घर थे जो उनको पसंद नहीं करते थे, पर वो उनके दूर के रिश्ते में लगते थे. सबका यही मानना था के सत्ता हासिल करने के चक्कर में और जैसा के आप जानते है आज कल भाई भाई का दुश्मन ज्यादा है.

पर इसका राव जी पर कोई असर नहीं पड़ता, वो फिर भी उन घरो को खुश करने का कोई मौका चोदते नहीं थे. राव जी के पास सब कुछ था पर अभी हाल ही में उनके बेटे का एक रोड एक्सीडेंट में देहांत हो गया था. इस दर्द ने उनको जैसे जिंझोड़ कर रख दिया था. उनके घर में राव जी के साथ उनकी धर्म पत्नी सरिता देवी और बहु कविता ही बची थी, जो अब एक विधवा हो चुकी थी. राव जी जब भी कविता की तरफ देखते तो उनको बस अपने बेटे की याद आ जाती. हालांकि उससे ज्यादा उनको कविता की दशा का ज्यादा दुःख होता.

वो जानते थे, की अभी इस उम्र में उसका इस तरह से दुःख सहना बिलकुल ठीक नहीं है. इसीलिए उन्होंने मन ही मन कविता की शादी किसी और के साथ करवाने का सोच लिया था. कविता उनके लिए एक सगी बेटी से भी बढ़ कर थी और कविता भी राव जी को अपने सगे पिता से बढ़ कर मानती थी. उन दोनों मे खासा सत्कार था, एक दूसरे के प्रति, जैसे ससुर बहु न होकर बाप बेटी हो. Vidhwa Bahu ki chudai sasur se

राव जी ने कुछ दिन तक प्रतीक्षा करी और फिर एक दिन अपनी पत्नी और कविता के साथ, कविता की दूसरी शादी करने का अपना ख्याल आगे रखा. राव जी की बात सुनकर कविता खासी निराश हुई. उसका कहना ये था की वो अब इस घर में आ चुकी है, अगर वो इस घर से जाएगी तो बस अपनी अर्थी पर ही जाएगी. राव जी भी कविता की बात समझ रहे थे और वो ये जानते थे की कविता कभी दूसरी शादी के लिए नहीं मानेगी.

कुछ दिन और ऐसे ही बीत गए और समय का असर कविता पर साफ़ साफ़ नजर आने लगा था. उसकी शक्ल जैसे मुरझा सी गयी थी. वो खुश तो होती थी, पर बस ऊपर से दिखाने के लिए और राव जी ये बात अच्छे से समझ रहे थे. एक दिन राव जी ने कविता से अकेले में बात करने और उसे एक बार फिर दूसरी शादी के बारे में सोचने की बात करने का सोचा. वो शाम का वक्त था और वो एक पिता की हैसियत से कविता के कमरे में दाखिल हुए.

जब वो अंदर घुसे तो उनकी आँखे तो मानो जैसे सन्न हो गयी और उनका शरीर जैसे अकड़ सा गया. सामने कविता एक दम नग्न अवस्था में अपने बेड पर पड़ी थी, वो अपनी चूत में उंगली कर रही थी. राव जी को अपने कमरे में देख कविता ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी और वो बस राव जी की तरफ यु ही निहारती रही और अपनी चूत में उंगली करती रही. राव जी उलटे पाँव कविता के कमरे से वापिस लौट आये, पर जिस तरह से वो गए थे उस तरह से वापिस नहीं आ पाए. अब उनके मन में एक अलग ही हलचल सी मच गयी थी, कविता के कमरे में यूं उनका जाना और सामने उसे नग्न अवस्था में देखना और सबसे ज्यादा तो कविता का उन्हें देख कर कोई रिएक्शन न देना और उनकी आँखों इस तरह से देखना. राव जी अपने कमरे आ कर बेड पर लेट गए और इस बारे में सोचने लगे. Vidhwa Bahu ki chudai sasur se

तभी दरवाजे पर एक दस्तक हुई. उसके सामने कोई और नहीं कविता ही खड़ी थी. वो इस बात से दंग रह गए, क्योकि जिस अवस्था में उन्होंने कविता को बेड पर देखा था, उसी अवस्था में वो अब उनके कमरे के दरवाजे पर खड़ी थी. अपनी बेटी जैसी बहु की इस तरह एक दम नंगी देख कर राव जी जैसे अवाक से रह गए. इससे पहले की वो कुछ कर पाते कविता आगे बढ़ गयी और पलक झपकते ही वो उनके ऊपर थी और उसके होंठ राव जी के होंठो को चुम रहे थे.

कविता की इस हरकत का राव जी के पास भी कोई सवाल या जवाब नहीं था. क्योकि शायद कही न कही वो भी कविता की दशा को समझ चुके थे. बस यही बात सोच कर उन्होंने अपने आप को आगे बढ़ाया और वो भी कविता को चूमने लगे. राव जी की तरफ से प्रतिक्रिया मिलती देख, कविता का हाथ फ़ौरन उनकी धोती में घुस गया और उनके लंड पर जा लगा. राव जी का लंड भी अब पूरा सख्त हो चुका था.

तभी कविता ने चुंबन तोडा और एक झटके के साथ राव जी का लौडा धोती से बाहर निकाल लिया. कविता ने अपना हाथ पर थोड़ा थूक लिया और उनके लौड़े पर मल दिया. अगले ही पल वो राव जी के ऊपर आ गयी और उसने अपनी चूत राव जी के लोडे के मुँह पर टिका दी. इससे पहले की राव जी कुछ सोच या समझ पाते उससे पहले की कविता नीचे को हो गयी. राव जी का लौडा उनकी चूत में समाने लगा. इसी दौरान कविता के मुँह से एक ऐसी आहह निकल गयी की मानो जैसे उसकी सदियों की तम्मना पूरी हो गयी हो.

राव जी लंड बहु कविता की चूत में पूरा समां चुका था. कविता ने बिना देर किया और उठक बैठक करना शुरू कर दिया और एक पूरी गति के साथ अपनी चूत में अपने ससुर कर लौडा लेकर चोदने लगी. राव जी भी जैसे अपनी कमसिन बहु कविता की टाइट चूत को अपने लंड पर महसूस करके धन्य हो गए. ये बस 2-3 मिनट ही चला और कविता आहें भरती हुई झड़ने लग गयी. कविता की चूत इतनी गरम थी की राव जी भी अपने आप को रोक न सके और उनके लंड ने भी उलटी करना शुरू कर दिया. Vidhwa Bahu ki chudai sasur se

कुछ देर तक कविता ऐसे ही राव जी के साइड पर पड़ी आहें भरती रही और फिर उठ कर उनकी नजरो में देखा और शर्मा गयी. वो ऐसे ही नंगी उस कमरे से भाग गयी. समय ने जैसे कविता की सुन ली थी उसके चेहरे की रंगत कुछ ही दिनों में लौट आयी. राव जी और कविता के बीच दो रिश्ते बने एक था बाप बेटी का और एक था पति पत्नी का.

उसके बाद कविता ने एक बेटे को भी जन्म दिया. राव जी की पत्नी सरिता देवी सब जानती थी पर वो अपनी बेटी की ख़ुशी से खुश थी. साथ उसके बाद उनके परिवार में खुशिया लौट आयी. अगर आपको यह ससुर बहु सेक्स स्टोरी अच्छी लगी हो तो प्लीज कमेंट लिखियेगा.

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