ससुराल मे पहली होली मे सारे मर्दों ने चोदा

Holi me sasural me sabse chudi:- हेलो दोस्तों मैं सिमरन , अभी मै 27 साल की हूं – मै स्टोरी लिखने जा रही हूं जिसको लगभग 2 साल हो चुके है जब मेरी ससुराल की पहली होली थी और तब मेरी शादी को 9-10 महीने हुए थे। दोस्तों स्टोरी थोड़ी लंबी हो सकती पर एकदम मजेदार है। तो अपने अपने लंड हाथ मे ले लें और चूत मे उंगली करने के लिए तैयार रहें। तो कहानी शुरू करती हूँ।

Holi me sasural me sabse chudi

Holi me sasural me sabse chudi

मेरे ससुराल में सास-ससुरजी, मेरे पति के 2 बड़े भाई, बड़े जेठजी रंजीत, उनकी पत्नी रेखा, उनके 2 बच्चे है मानव और आराधना,  छोटे जेठजी राजेश जिनको घर में सब राजू बुलाते है और उनकी पत्नी रूपा। घर में सबसे छोटे मेरे पति ऋषभ और मै सिमरन। हमारी एक जॉइंट फॅमिली है। मै अभी अपने जवानी के चरम पर हूं। एक गदरायी और गोरे जिस्म की महिला, दिखने में बहुत सुन्दर, अच्छे कद काठी की लगभग 5 फुट 6 इंच हाइट, पर सीधी साधी घरेलु महिला। मेरी सेक्स लाइफ शादी के बाद शुरू हुई है और पति के साथ ठीक चल रही थी।

हमारा अपना एक कपड़ो का कारखाना है जो ससुरजी, छोटे जेठ और मेरे पति सँभालते है। वहीं बड़े जेठजी जल विभाग में अफसर लेवल पर है। सारी लेडीज घर संभालती है। घर में सब नार्मल है, ससुर जी कड़क मिज़ाज के है पर समझदार भी, उनकी बात को घर में कोई मना नहीं करता। हमारा बड़ा सा घर गाँव के एक छोर पर है। घर के चारो तरफ बाउंड्री बनी हुए है ताकि कोई अजनबी अंदर न आ जाये और घर के पीछे हमारे बड़ा सा खलिहान है जिसमे खेती होती है और उसी में थोड़ी सी जगह में बगीचा है। सो कुल मिलाकर गाँव में हमारा समृद्ध परिवार है।

तो दोस्तों होली से करीब 4-5 दिन पहले घर के सारे मर्द सलून गए और वो सब कुछ करा आये जिससे वो अच्छे और स्मार्ट देखे। उन सबके वापस आने पर मैंने अपने पति से पूछा,

मै- बाकि सबका तो ठीक है पापाजी को भी सलून जाने का शौक है मुझे पता नहीं था।

मेरे पति ने जवाब दिया पापाजी ही नहीं कल मम्मी और भाभी के साथ तुमको भी ब्यूटी पार्लर जाना है।

अगले दिन घर की सारी लेडीज ब्यूटी पार्लर गयी। हम सब ने भी अपने आप को खूबसूरात बनाने में कोई कमी नहीं की, पर सबसे अजीब मुझे तब लगा जब वहाँ की एक लेडीज मेरे पुरे बॉडी की मसाज कर रही थी और वह मेरी पैंटी निकालने लगी, तो मैंने उसे रोक दिया और पूछा ये क्या कर रही हो? तो उसने जवाब दिया मुझे तो बस हेयर रिमूव करना है और ये तो आपके पैकेज में ही है। आपके साथ की सारी लेडीज ने भी हेयर रिमूव कराये है। ये सब सुनकर मै सोचने लगी क्या ये जरुरी है? पर मैंने भी उस लेडी को मना नहीं किया। उसने मेरी पैंटी निकाल कर मेरी चूत के आस-पास वाली जगह की सारे हेयर रिमूव कर दिया। भले ही वो एक लेडीज थी फिर मुझे शरम आ रही थी।

शाम तक हम सारी लेडीज घर आ गयी और घर का सारा काम करके रात हम सब अपने-अपने कमरों में सो गए। उसके 2 दिन बाद होली थी। होली की सुबह मै थोड़ी देर से सो कर उठी, मेरे पति कमरे में नहीं थे। मै फ्रेश होकर किचन में गयी, बड़ी भाभी ने पहले से ही नास्ता बना रखा था। मुझे देखकर भाभी स्माइल करते हुए बोली नास्ता कर ले और ऊपर छत्त पर कपडे सुख गए है जा कर ले आना।

जी दीदी मै ले आउंगी और रेखा भाभी किचन से बाहर चली गयी। मैंने भी नास्ता किया और छत पर कपडे लेने चली गयी। जब मै छत पर पहुंची तो देखा नीचे आँगन में पापाजी बहुत गुस्से में थे सारे लोग चुपचाप खड़े है और उन सब को पापाजी तेज आवाज में डांट रहे थे। मै ये सब देखकर डर गयी की अब क्या हो गया की पापाजी नाराज़ हो गए और सबकी क्लास लग रही है। आज तो होली है कम से कम आज तो कोई गड़बड़ न होती पर हुआ क्या है मुझे भी पता नहीं था।

मैं यह सब देख ही रही थी की बाकियों की नजर मुझ पर पड़ी तो बिना कुछ बोले चुपचाप नीचे आ कर उन सबके साथ खड़ी हो गयी। पापा जी सभी को डाँट रहे थे, मै बहुत डरी हुयी थी। पापाजी तेज आवाज में बोले सब चले जाओ मेरी नजरों से दूर और अगर मैंने किसी को देख लिया तो मुझसे बुरा और कोई नहीं होगा। मैं चुपचाप वहां से मुड़ कर अपने कमरे की तरफ चल दी। मैं अपने कमरे के पास पहुंची ही थी की रूपा भाभी ने मुझसे बोला-

कहाँ जा रही हो?

मैं बोली अपने कमरे में दीदी।

रूपा भाभी ने बोला अगर पापाजी ने देख लिया तो अच्छा नहीं होगा कहीं और जाकर छुप जाओ।

दीदी की बातें सुनकर मैं डर गई की ऐसी भी क्या बात है जो की मैं अपने कमरे में नहीं जा सकती। मैं सोचती हुई ऊपर छत पर बने कमरे जिसमें अनाज की बोरियां रखी थी वहाँ जाकर बैठ गई। मैंने देखा छोटी भाभी भी छत पर आ रही हैं। मैं उनको आवाज़ लगाती हूँ और अपने पास बुला लेती हूं और क्या हुआ बाकि सारी बातें भी पूछ लुंगी, पर वो छत की दूसरी तरफ चली गई। मैं जिस कमरे थी उसे कमरे की खिड़की से पूरा आंगन नजर आ रहा था। पापा जी आंगन में पड़ी चारपाई पैर बैठे थे। मैं उदास थी आज होली थी और सुबह सुबह घर का माहौल ख़राब हो गया। आंगन में पापा जी को अकेले बैठे देख कर लगा थोड़ी देर में पापा जी का गुस्सा शांत हो जाएगा।

अब कुछ देर तक घर में ऐसे ही सन्नाटा फैला रहा। मैं कमरे में चुपचाप बैठी थी। तभी किसी के घर के अन्दर से चीखने की आवाज आयी, मै जल्दी से खिड़की की तरफ भागी, मैंने देखा पापाजी आँगन में खड़े थे। मेरे पति और राजेश जी रेखा भाभी को घसीटते हुए घर के अंदर से आँगन की तरफ ले आ रहे थे। वहीं रेखा भाभी भी अपने आप को बचने के कोशिश कर रही थी और साथ ही बोल रही थी छोड़ दो मुझे पर उनकी सुनने वाला कोई नहीं था।

Sasural me holi par pahli chudai

(रेखा भाभी घर की बड़ी बहु) मेरे पति और राजेश जी, रेखा भाभी को लेकर पापाजी जी के सामने छोड़ दिया और दोनों बिना कुछ बोले थोड़ा पीछे खड़े हो गए। रेखा भाभी पापाजी की सामने फर्श पर पड़ी थी, उनकी साड़ी खुल गयी थी। रेखा भाभी अपनी साड़ी को समेटते हुए अपनी चूचियों को छुपाने लगी। पापाजी आगे बढ़े और भाभी के सामने बैठ गए। भाभी अपनी साड़ी ठीक कर रही थी। तो पापाजी ने उनकी हाथ पकड़ ली और बोले बस कर इसकी क्या जरुरात है अब तो तू हमारे साथ है और दूसरे हाथ से भाभी की साड़ी वापस खींचने लगे। भाभी बिना कुछ बोले बस वहीं पड़ी थी और पापाजी अपने दो बेटो के सामने अपनी घर की बड़ी बहु की साड़ी खींच रहे थे।

ये सब देख कर मै हैरान थी तभी मेरे पति और राजेश जी आगे बढ़े और भाभी की साड़ी खींच कर उनसे अलग कर दूर फेक दी। रेखा भाभी अब ब्लाउज और पेटीकोट में थी। अब पापाजी अपने हाथो से भाभी के गालों को धीरे-धीरे सहला रहे थे, भाभी ने भी कोई विरोध नहीं किया। पापाजी का हाथ भाभी के गालों से होते हुए उनके छाती पर पहुंच गया, पापाजी ने हलके से भाभी की चूचियों को दबा दिया। भाभी ने भी अपनी नज़रे चुराते हुए पापाजी को तिरछी नजरों से देखा।

पापाजी बोले देख राजेश मन बहुत हो रहा है इसका पर कुछ बोल नहीं रही है। मै ये सब कुछ दे रही थी पर समझ नहीं आ रहा रहा की ये सब क्या हो रहा है। छोटे जेठजी आगे आ कर जबरजस्ती भाभी का ब्लाउज निकालने लगे और शायद ब्लाउज का एक बटन टूट गया और राजेश जी ने अपनी ताकत लगाकर अपने दोनों हाथो से ब्लाउज को अलग-अलग कर दिया, जिससे ब्लाउज की बचे हुए बाकि बटन भी टूट गयी। इसी बीच में राजेश जी भी भाभी की चूचियों को दबा रहे थे। ब्लाउज खुलते ही भाभी की बड़ी बड़ी चूचियों आज़ाद हो गयी। राजेश जी अभी भी चूचियों को दबा रहे थे, की पापाजी ने रोक दिया। राजेश बस कर और जा कर बाकियों को ले आ इसे मै देखता हूँ। राजेश जी ने पापाजी की बात सुनी और पीछे हट गए। भाभी की ब्लाउज खुल गयी थी हालाँकि भाभी ने ब्रा पहन रखी थी और उनकी चूचिया अभी भी ब्रा के अंदर थी। मेरे पति और राजेश जी वह से चले गए पापा जी चुपचाप भाभी के सामने बैठे थे और उनकी नज़रे रेखा भाभी की बड़ी-बड़ी चूचियों पर थी।

पापाजी ने भाभी को खड़ा किया, पापाजी भाभी के गोल चक्कर लगाने लगे, उनकी नज़रे भाभी के गदरायी जिस्म पर थी। जैसे ही पापाजी भाभी के सामने आये हल्की सी चपेट भाभी की चूचियों पर लगा दी, उनकी चूचियों में हलचल हुयी, दोनों आपस में एक दूसरे टकराती तो कभी एक दूसरे से दूर हो जाती। अब थोड़ी हलचल भाभी ने भी की और एक आह भरी सिसकारी ली। पापाजी ने भी भाभी की आह का जवाब देते हुए बोले। आए हाए ये हुई न बात और एक तेज सी चपेट भाभी की चूचियों पर फिर से लगा दी। भाभी ने फिर से आह भरी सिसकारी ली चपेट लगने की आवाज तो मेरे पास तक आयी थी।

पापाजी भाभी के करीब गए इतना शायद दोनों एक दूसरे की साँसों को महसूस कर सकते थे। पापाजी ने एक हाथ भाभी की गांड पर और दूसरा हाथ उनके कमर पर रखा। भाभी को अपनी बाहों में जकड लिया, एक हाथ जो उनकी गांड पर था उससे गांड दबाने लगे। फिर उनके चेहरे के अलग अलग जगह पर किश किया और फिर उनके होठो पर किश करने लगे। भाभी ने भी कोई विरोध नहीं किया वो भी पापाजी को किश कर रही थी उनका भी एक हाथ पापाजी की पीठ पर था। दोनों एक दूसरे को किश करने में व्यस्त थे। मै ये सब देख रही थी, मेरे पूरे शरीर में तेज सनसनी महसूस कर रही थी और उत्साहित भी थी।

दोनों एक दूसरे को किश करते रहे फिर पापाजी ने अपने एक हाथ भाभी की कमर से हटा कर भाभी के चूचियों को दबाने लगे। भाभी उह! आह! की आवाज़ से पापाजी को और उत्साहित कर रही थी मैने रेखा भाभी को हमेशा एक गंभीर और समझदार औरत समझा, पर भाभी ये सब कर रही है पापाजी से साथ। अभी ये सब चल ही रहा था की छोटे जेठ जी और मेरे पति घर के अंदर से सासु माँ को पकड़ कर ले आये। मुझे लगा पापा जी और भाभी दोनों रंगे हाथ पकड़े जायेंगे। पर मम्मी जी भी वही भाभी वाले नखरे कर रही थी और पापाजी और बड़ी भाभी दोनों ने बाकियों को अनदेखा कर एक दूसरे को किश कर रहे थे। नीचे आँगन में पापाजी-मम्मीजी , बड़ी भाभी मेरे पति बड़े-छोटे दोनों जेठ जी वहीं पर थे। पापाजी ने छोटे जेठ जी को बोला बाकि दोनों को भी ले आ। दोनों जेठ जी वहाँ से चले गए। अब पापाजी ने बड़ी भाभी की ब्रा निकाल दी उनकी चूचिया आज़ाद हो गयी और भाभी के निप्पल को चूसने लगे। वहीं मेरे पति जो भी मम्मी जी के पीछे खड़े थे अपने दोनों हाथो से उनकी चूचियों को पकड़ कर मसलने लगे और अपने पुरे शरीर को मम्मीजी की पीठ और गांड पर रगड़ने लगे ये सब से देख कर अब मै गरम होने लगी थी।

Holi par ghar me sabse hui chudai

अब मै जिस कमरे में मै थी उस कमरे का किसी ने दरवाजा खटखटाया और आवाज दी दरवाजा खोलो। साथ ही बड़े जेठ जी ने आवाज दी देख राजू रूपा वहाँ दूसरी तरफ है और एक बार फिर दरवाजा खटखटाया और आवाज दी दरवाजा खोलो। मै एकदम से आवाज सुनकर घबरा गई और खिड़की से दूर हटकर हलके कदमो से दरवाजे के पास दिवार से सटकर खड़ी हो गई। किसी ने दरवाजा पर एक जोर का धक्का दिया। दरवाजा काफी पुराना और जर्जर हालत में था, एक-दो बार धक्का देने से खुल गया। दरवाजा खुलते ही छोटे जेठजी अंदर आ गए और हम दोनों की नज़रे मिली मै तुरंत घूम कर कमरे के अंदर भागी। कमरे में अनाज की बोरिया रखी थी जिसमे मेरा पैर फंस गया और मै उन बोरियो पर गिर गई।

मैं खुद को संभालती उससे पहले ही छोटे जेठजी मेरे ऊपर आ गए उनका शरीर मेरे ऊपर था और जेठजी के दोनों हाथ मेरे चूचियों पर थे। यहाँ तक की मै अपने गांड के ऊपर जेठजी का लंड अच्छे से महसूस कर सकती थी। अब सिचुएशन ये थी की मेरा चेहरा जमीन की तरफ था और मेरे ऊपर जेठजी थे। जेठजी के दोनों हाथ मेरे चूचियों पर उनका लंड मेरी गांड पर रगड़ रहा है। मैने पूरी कोशिश की जेठजी को हटाने और वो भी मुझे अपने काबू में करने की कोशिश कर रहे थे। वो लगातार मेरे चूचियों को दबा रहे थे और मै किसी मछली की तरह छटपटा रही थी। पर उन्होंने अपनी पकड़ मजबूत कर रखी थी और पकड़ को मजबूत करने के लिए उन्होंने अपना एक हाथ मेरे चूचियों से हटा कर मेरे पेट पर कर लिया।

बड़े जेठजी भी वहीं थे उन्होंने आवाज दी राजू छोड़ दे उसको। पर छोटे जेठजी कहाँ सुनाने वाले थे वो मेरे चूचिया मसल रहे थे, पर बड़े जेठजी ने एक बार फिर आवाज दी राजू छोड़ दे सिमरन को इस बार छोटे जेठजी ने बड़े जेठजी की सुन ली और मेरे चूचियों और कमर पर से हाथ हटाकर कर थोड़ी दूर खड़े हो गए। मैने भी खुद को संभाला और जल्दी जल्दी अपने कपडे ठीक करने लगी। बड़े जेठजी बोले राजू जा रूपा को लेकर नीचे आँगन में जा, मै सिमरन को लेकर आता हूं। छोटे जेठजी चले गए।

थोड़ी देर तक सन्नाटा था पर अभी जो छोटे जेठजी ने किया मै घबराई हुई थी मेरी सांसे तेज होई थी, मै अभी भी उनकी दोनों हाथ मेरे चूचियों और कमर पर महसूस कर सकती थी। तभी बड़े जेठजी ने पूछा सिमरन तुम ठीक हो न? मैंने बस कैसे भी हां में अपना सर हिला दिया। तो जेठजी बोले चलो नीचे सब आंगन में है और पापाजी ने सबको वहाँ पर आने के लिए बोला है। मै सब पहले से ही देख रही थी नीचे आँगन में क्या हो रहा है और वहाँ जाने के बाद क्या होगा पर जाना तो पड़ेगा।

मै हलके से बोली ठीक है जेठजी! अब वह आगे और मै पीछे चल रही थी। हम दोनों नीचे आँगन में पहुंचे। वहाँ घर के सारे लोग थे, मैंने देखा पापाजी बिना कपड़ो के थे और उनका लंड देखकर मैं चौक गयी। हाय राम ये किसी आदमी का लंड है या जानवर का? कितना मोटा और लम्बा है। मैंने आज तक बस अपने पति का लंड देखा था पर पापाजी का लंड तो मेरे पति से दोगुना बड़ा और मोटा था। मम्मीजी बस पेटीकोट में थी उनकी चूचिया मोटी मोटी थी पर उम्र के साथ थोड़ी ढीली हो गई थी।

बड़ी भाभी तो बस पैंटी में थी वहीं मेरे पति भी बस अपने अंडरवियर में थे।

हम जो अभी अभी आँगन में आये थे दोनों जेठ जी रूपा भाभी और मै पूरे कपडे में थे। छोटे जेठजी अभी बगल में खड़े थे, वह मेरी चूचियों पर झपटे और मसलने लगे। मेरी धड़कन तेज हो गई, बड़ी मुश्किल से मै बोल पायी नहीं मुझे छोड़ दो। इतना सुनते ही पापाजी ने तेज आवाज में बोला राजू छोड़ उसे पीछे हट। पापाजी की तेज आवाज सुन कर सब सख्ते में आ गए। छोटे जेठजी भी तुरंत पीछे हट गए।

पापाजी मेरे पास आये, उनको पास आता देख मै डरी-सहमी थोड़ा पीछे हट गयी, पापाजी मेरे नजदीक आये बड़े प्यार से बोले देख सिमरन किसी को गलत मत समझना। हमारे घर में होली हमेशा से ऐसे ही मनाते है। आज सब बस मर्द और औरत है न कोई पापा-मम्मी, न छोटा-बड़ा सब बराबर। देख मुझे तेरी मम्मी को, ऋषभ भी यही है, सब यहाँ अपनी मर्जी से आये है। तुझसे कोई जबरदस्ती नहीं है अगर तुझे ठीक लगे तो हमारे साथ आ जा नहीं तो जा अपने कमरे में आराम कर। पर अब तू भी घर का हिस्सा है, सबकी नज़रे हम दोनों पर थी और मै सर झुकाये खड़ी थी पर चोर नज़रो से बार बार पापाजी के लंड को देख रही थी। पापाजी फिर से बोले अगर जाना है तो जा, पर जाने से पहले एक बार इससे मिलते जा। आज तक इसने किसी को निराश नहीं किया है।

तभी पापाजी ने मेरा हाथ पकड़ कर अपने खड़े लंड रख दिया और बोले मै इसकी बात कर रहा हूँ। पापाजी के लंड के स्पर्श से मै सख्ते में आ गयी और अपना हाथ पीछे खींचा पर पापाजी भी होशियार निकले मेरे हाथ को मजबूती से पकड़ रखा था। मै अपना हाथ दूर न कर सकी। पापाजी का मोटा लंड तो ठीक से मेरे हथेली में आ भी नहीं रहा था। पापाजी मेरे हाथ को अपने खड़े लंड पर आगे पीछे करने लगे।

मै अपने आप को शांत रखने की पूरी कोशिश कर रही थी पर अंदर ही अंदर बहुत खुश हो रही थी और मै पापाजी के लंड के स्पर्श से मदहोश हुए जा रही थी। पर जब मै मदहोशी से बाहर आयी तो देखा पापाजी ने अपने हाथ तो पीछे कर लिया है और मेरे हाथ खुद ही उनके लंड की लंबाई का नाप ले रहा है यानि की आगे-पीछे कर रहा है। सच तो ये था की जब मै ऊपर वाले कमरे में थी और आंगन में पापाजी बड़ी भाभी को किश कर रहे थे और उनकी मोटी मोटी चूचियों को मसल रहे थे तो ये सब देख कर मै उत्तेजित हो गयी थी। आगे क्या हुआ क्या मै उनके साथ आने को मान गयी, पढ़िये अगले भाग मे।

ससुराल मे पहली होली मे सारे मर्दों ने चोदा – 2

Read more antarvasna sex stories

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Scroll to Top