मेरा open-minded परिवार-1

Family me chudai sex story:- हेलो दोस्तों कैसे हो आप सब? उम्मीद करता हु होर्नी ही होंगे सब, तभी तो यहाँ आये हो. चलिए इस कहानी को शुरू करते है. तो दोस्तों कहानी मेरे परिवार की है जहाँ हम जॉइंट फॅमिली में रहते है. पहले आपको सभी के बारे में जानकारी दे दू.

Family me chudai sex story

मैं कपिल मुंबई में एक कॉलेज में पढ़ता हु. मेरी बॉडी टाइप तो अब क्या बताऊ? किसी नार्मल लड़के को आप इमेजिन कर लो, बस वैसा ही थोड़ा पतला टाइप. मेरे डैड दीपक 40 साल के एक-दम हंसमुख किस्म के इंसान है. मेरी माँ सविता 38 साल की बिलकुल सुन्दर थोड़ी मांसल बॉडी और अक्सर स्लीवलेस टाइप कपडे पहनने वाली लेडी है. वो काफी सुन्दर है. अगर आपको कहु तो आप मेरी माँ को एक्ट्रेस “रश्मि देसाई” से कम्पेर कर सकते हो. काफी मिलती जुलती फिगर और सूरत है.

फिर आते है मेरे चाचू अभिनव 39 साल के और बिलकुल पापा के नेचर के जैसे. मेरी चाची सोनम 37 साल की, जो फिगर में तो मेरी माँ के मुताबिक थोड़ी कम है. लेकिन उनका साइज़ एकदम मस्त है। परफेक्ट साइज जिसे कहते है वैसा समझ सकते हो आप. यहाँ मैं अगर कहु तो आप मेरी चाची को एक्ट्रेस “नुशरत भरुचा” से कम्पेर कर सकते हो, तो आपको एक आईडिया आ जायेगा. उनकी एक बेटी दिव्या जो मुझसे 2 साल बड़ी है और फाइनल ईयर में है. वो भी काफी गोरी है और अपनी मम्मी के पर ही गयी है. सुन्दर और पटाखा है. हम सब के बीच आपस में काफी प्यार है और सभी आपस में मिल कर हंसी-ख़ुशी रहते है.

इसी तरह हमने वेकेशन में कही बाहर जाने का प्लान बनाया और प्लान के हिसाब से हम मनाली चले गए. वहाँ हमने एक 4 स्टार होटल में 2 रूम्स लिए. एक हमारे लिए और एक चाचा-चाची और दिव्या के लिए. हम पहुंचे अपने-अपने रूम में रेस्ट किया और फिर डिनर के लिए हम नीचे गए. वहाँ ज़्यादा लोग नहीं थे क्यूंकि हम वीक डेस पर गए थे. एक टेबल पे सभी लोग बैठ कर खाना खा रहे थे. मैं और दिव्या यहाँ-वहाँ घूम रहे थे और पेस्ट्रीज और मिठाई खा रहे थे. टेबल पर सभी खुश थे और काफी डिस्कशन चल रही थी. Family me chudai sex story

सोनम: यार कितना अच्छा लग रहा है न.

सविता: हां इतने सालों बाद हम सब कही साथ निकले है.

दीपक: यस डार्लिंग! ये सब हम दोनों भाइयों ने तुम दोनों के लिए प्लान किया है.

अभिनव: यस! तुम दोनों घर का इतना ख़याल रखते हो. बच्चो का ख़याल रखते हो और पता नहीं कितने काम करते हो.

सोनम: सिर्फ 1 बच्चे का ख़याल थोड़ी रखते है हम. 3 बच्चो का ख़याल रखना बहुत मुश्किल काम है.

सविता: 3 बच्चे?

सोनम: हां 3 ना! मेरी दिव्या फिर मेरे पति जिनके नखरे बच्चो से कम नहीं है और इनका वो जो कभी भी मूड में आ जाता है.

सविता: शीईईईई सोनम. तू भी न!

अभिनव: क्या सोनम? ये बातें सब के सामने?

सोनम: हां तो सविता तू भी तो तीनो का ख़याल रखती ही होगी न? आफ्टर आल हम सब एडल्ट्स ही है. इसमें शर्माने वाली क्या बात?

दीपक: बात तो सही है भाभी आपकी. सविता नहीं कह रही लेकिन मैं आपको बताता हु की सविता भी आपकी तरह तीनो बच्चो का ख़याल रखती है (सब हसने लगे)।

अभिनव: बहुत अच्छी बात है.

सोनम: वैसे मनाली का प्लान आप दोनों भाइयों में किसका था?

अभिनव: क्यों पसंद नहीं आया?

सविता: नहीं तो. किसने कहा? मुझे तो बहुत अच्छा लगा.

सोनम: अरे किसका भी हो आईडिया कमाल का है. और ऐसे ठन्डे-ठन्डे मौसम में तो सेक्स करने का मज़ा ही आ जाये. क्यों जी? (चाचू को पूछते हुए)।

अभिनव: हां मज़ा क्यों न आये. लेकिन बच्चे भी है न. बस दिव्या को तुम सुला दो फिर तो हमारे मज़े ही मज़े जान.

सोनम: ऐसे नहीं यार. इतना दूर आये है. इतने पैसे खर्च किये है और बस ऐसे बच्चो की वजह से छुप-छुप के करके मूड खराब कर दे?

सविता: वैसे आईडिया बुरा नहीं है. ऐसे ठन्डे मौसम में तो सारी रात करने का मज़ा ही अलग होता.

दीपक: बच्चे बड़े हो रहे है. लेकिन आप दोनों की ठरक है की ख़तम ही नहीं होती?

सोनम: क्यों देवर जी? आप दोनों को करने की इच्छा न हो तो बता दो. हम दोनों अपना इंतेज़ाम खुद ही कर लेंगे. क्यों सविता?

सविता: हां बिलकुल और आप शायद जानते नहीं हो. लेकिन फेमेल्स की नीड्स 30 साल के बाद बढ़ जाती है और वैसे भी सेक्स तो हर कोई करता है. उसमे क्या है? बस डालो निकालो और हो गया. अरे इसे तो एक्स्प्लोर करना चाहिए. अलग-अलग जगहों पे. Family me chudai sex story

सोनम: अलग-अलग पोजीशन में नए-नए तरीके. छोड़ सविता. इनको ये सब नहीं समझेगा. आप तो जैसे भी खुश करते हो मुझे मैं उसी में खुश हु (चाचू को हग करते हुए)।

सविता: हां मैं भी हमेशा खुश होती हु आप से. हम तो बस अपनी-अपनी इच्छाएं बता रहे थे.

अभिनव: हम क्यों नहीं करना चाहेंगे भला? वैसे आप दोनों ये सोचो की कपिल और दिव्या भी है हमारे साथ. अब उनके लिए अलग रूम तो नहीं ले सकते न.

सोनम: हां बात तो सही है. बच्चे ज़रूर है लेकिन बच्चे इसी उम्र में आधी-आधी चीज़े सीखते है और फिर अनजाने में गलती कर देते है.

सविता: कॉलेज में तो कुछ सिखाते है. यहाँ-वह दोस्तों से अधूरी चीज़े सीखते है. बात तो सही है और इस उम्र में उन्हें नहीं समझायेंगे तो आगे जा कर बड़ी मुसीबत से बच सकते है.

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दीपक: हां आप दोनों के पास इसका कोई प्रैक्टिकल सलूशन है तो बताओ. वरना हमारा प्लान बनाओ की बच्चो के रहते हुए हम सब कैसे सेक्स कर सकते है?

सोनम: हम सब? (एक्टिंग में शॉक रिएक्शन देते हुए) देवर जी आपको साथ में सेक्स करना है? की-की!

दीपक: अरे मेरा मतलब था की आप दोनों भी कर सको और हम दोनों भी. अपने-अपने कमरे में.

सोनम: ओह्ह तो ठीक है. वरना मैं तो इस नए आईडिया को मान ही लेती (हँसते हुए).

सविता: शीईईईई सोनम. तुझे हर टाइम मस्ती ही सूझती है?

अभिनव: अरे भाभी इसकी तो आदत है. आधा टाइम मस्ती करेगी उससे भी ज़्यादा वक़्त सेक्स की बातें.

सोनम: हां तो मुझे मज़ा आता है.

सविता (चाची का साथ देते हुए): वैसे आईडिया बुरा तो नहीं था सेक्स साथ करने का.

सोनम: है ना? आफ्टर आल कोई तो साथ देने वाला मिला.

दीपक: तुम दोनों पागल हो गए हो? यहाँ एक तो आपस में करने का ही प्लान नहीं बन पा रहा है और तुम लोग चारो साथ करने का प्लान बनाने लगे.

सविता: मतलब आपको इस बात पे कोई ऐतराज़ तो नहीं है? यही समझे हम?

अभिनव: आप दोनों का समझ नहीं आता कब सीरियस बातें करते हो कब मज़ाक.

सोनम: अरे बाबा मज़ाक ही है. चिल करो. ये decide करो की हमे क्या करना है?

सविता: एक आईडिया है! देख ऐसा करते है. पहले मैं कपिल को तुम्हारे कमरे में भेज दूँगी. वहाँ दिव्या और कपिल मस्ती करते-करते सो जायेंगे. तब मैं और दीपक कर लेंगे. फिर 3-4 घंटे बाद तुम लोग बच्चो को हमारे कमरे में भेज देना. तब तुम लोग कर लेना सेक्स.

सोनम: 3-4 घंटे? जीजू कौन सा चवण-प्राश खा के चढ़ते हो?

दीपक: ऐसी कोई बात नहीं है. कोई चवण-प्राश वगैरा की ज़रुरत नहीं पड़ती.

सविता: मेरे कहने का मतलब. उसी में जितनी बार चाहे इतनी बार कर सकते है न. Multiple times you know.

सोनम: ओह्ह ऐसे. मैंने सोचा की 3-4 घंटे मतलब दोनों भाइयों की पावर एक जैसी है क्या?

सविता: मतलब? इनका 3-4 घंटे कंटिन्यू चल जाता है काम? फ्यूल टैंक ख़तम नहीं होता?

सोनम: अरे मतलब तुम्हारी तरह ही. ब्रेक लेकर थोड़ी-थोड़ी देर में.

दीपक: हां तुम लोग आपस में कैसे करते है वो भी डिसकस कर लो न.

अभिनव: हां और किसका कितना बड़ा है कितना मोटा है वो भी कर लो बात. तुम लोग भी न सच्ची. सेक्स पे बात आयी तो शुरू ही हो जाते हो.

सोनम: हेहे हम तो बस भावनाओ में बह जाते है.

सविता: भावनाओ में नहीं. ठरक की प्यास में!(सभी हसने लगे)।

सोनम: चलो फिर तय रहा. सविता तुम लोग कपिल को भेज देना. फिर तुम्हारा हो जाये तो कॉल कर देना. हम दोनों बच्चो को तुम्हारे रूम में भेज देंगे. लेकिन हां उससे पहले कपडे पहनना मत भूलना Family me chudai sex story

सविता: ना हम तो बिना कपड़ो के ही बैठेंगे बच्चो के सामने.

सोनम: हां फिर तुम ही बच्चो को जवाब देते बैठना पूरी रात. ये लुल्ली बड़ी क्यों है क्या है न वो क्यों नहीं है.

दीपक: यार भाभी आपकी इमेजिनेशन को मानना पड़ेगा. आप कौन सी बात से कहा पहुँच जाती है न?

सोनम: हेहे कभी साथ बैठ कर देखो हमारी इमेजिनेशन कहाँ-कहा जाती है.

अभिनव: चलो-चलो अब चलते है अपने-अपने कमरे में.(सभी हम बच्चो को आवाज़ लगाते हुए)।

सविता: कपिल बेटा चलो रूम में.

सोनम: दिव्या बेटा खा लिया तो चलो अब सोने.

और इसी तरह हम सब अपने अपने कमरे में चले गए.

प्लान के हिसाब से हम सब अपने-अपने कमरे में चले गए थे.

दीपक: कपिल बेटा अब नाईट सूट पहन लो और सोने की तैयारी करो.

कपिल: ओके पापा.

उस वक़्त कमरे में सिर्फ मैं और पापा थे और मम्मी वाशरूम में थी. तो मैंने वही अपनी जीन्स और टी-शर्ट उतारी. मम्मी ने आलरेडी मेरा नाईट सूट निकाल रखा था. इतने में मम्मी वाशरूम से बाहर आयी और उन्होंने एक मस्त पर्पल कलर की सिल्क नाइटी पहनी थी जो शोल्डर्स से बिलकुल पतली स्ट्रिप थी और स्लीवलेस टाइप. बाल खुले और नाइटी घुटनों के ऊपर तक थी. वैसे तो मम्मी हमेशा ही खूबसूरत लगती है.

सविता: कपिल बेटा चाची का मैसेज आया था की कपिल को उनके कमरे में भेज दे. उन्होंने एक्स्ट्रा बेड मंगाया है तो तू और दिव्या वही सो जाना. और दिव्या भी तुझे याद कर रही थी. तो जाओ और सो जाओ.

मैं मम्मी की बात मान कर चाचू के कमरे में चला गया. तो मैंने देखा की चाची ने और दिव्या ने सेम टू सेम पिंक कलर की सिल्क नाईट पैंट और शर्ट पहनी हुई थी. और चाचू तो बस बेड पे सपोर्ट लेकर बैठे हुए थे. सोनिका: कपिल बेटा आ जाओ.

दिव्या: मम्मी कपिल इस वक़्त यहाँ?

अभिनव: दिव्या बेटा तुम लोग नीचे कितनी मस्ती कर रहे थे. और इतने अच्छे लग रहे थे साथ में. तो हमने सोचा तुम्हारी यही उम्र है मस्ती करने की. तो इसी बहाने मस्ती हो जाएगी और फिर सो जाना तुम दोनों.

सोनिका: देखो तुम्हारे लिए एक्स्ट्रा बेड्स नीचे लगा दिए है. तुम दोनों नीचे सो जाओ.

कपिल: ओके चाचू. थैंक यू सो मच. हाय दिव्या.

दिव्या: कपिल तुझे ये नाईट ड्रेस कैसी लगी? मेरी और मम्मी की सेम टू सेम.

कपिल: आप दोनों बहुत मस्त लग रहे हो. और तो और दिव्या तेरा फेस कितना मिलता है चाची से.

सोनिका: मेरी बेटी है न. शकल सूरत तो मिलेगी ही बेटा.

अभिनव: तुमने अकेले बेटी पैदा की है? तुम्हारी अकेले की बेटी है?

सोनिका: नहीं तो इसमें आपका बहुत बड़ा (बोलते-बोलते रुक गयी और realize किया की हम वही थे). आपका बहुत बड़ा साथ है न (स्माइल करते हुए).

खैर ये तो बातें होती रही और हमने थोड़ी देर टीवी देखा और फिर नाईट लैम्प्स चालु रख कर हम अपनी अपनी जगह सोने चले गए. अब ऐसा था की एक साइड से अगर आप देखो तो चाचू सबसे लेफ्ट में फिर चाची, फिर नीचे चाची की पास वाली जगह पे दिव्या और उसके बाजु में मैं. Family me chudai sex story

तो मैं और दिव्या थोड़ी देर अपने अपने फ़ोन पर टाइम पास करने लगे. ये तो थी हमारी बात. ऊपर चाचू और चाची का बेड पर क्या सीन चल रहा था वो बताता हु. वैसे तो दोनों ने एक ही ब्लैंकेट डाल रखी थी. फिर चाची और चाचू एक-दुसरे की तरफ फेस करके लेटे हुए थे. फिर चाचू ने चाची के कमर पे हाथ रखा और उनकी शर्ट के अंदर हाथ डाल कर उनकी नाभि के साथ खेलने लगे. वही पर चाची ने भी चाचू के चेस्ट पे हाथ घूमाना शुरू किया. दोनों गरम तो थे ही आखिर-कार नीचे इतनी सारी बातें और प्लानिंग जो हुई थी.

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फिर दोनों एक-दुसरे को ऊपर से लेकर नीचे तक छूने लगे. चाचू ने चाची के बूब्स को दबाना शुरू किया ब्रा के ऊपर से ही. चाची ने उनका हाथ चाचू की शॉर्ट्स में डाल दिया और उनके अंडरवियर के ऊपर से चाचू के लंड को सहलाने लगी. चाची के चेहरे को अगर कोई देखता तो किसी का भी खड़ा हो जाता. क्यूंकि चाचू ने चाची के सिल्की पैन्ट्स के अंदर हाथ डाल रखा था और पैंटी के ऊपर से चूत सहलाने लगे थे. चाची हलके-हलके अपनी कमर को आगे पीछे कर रही थी.

वैसे ये तो बेड पर सीन चल रहा था. थोड़ी देर बाद मैं फ़ोन यूस करते-करते बोर हो गया तो मैंने दिव्या को मस्ती में गुदगुदी करना शुरू किया. इससे वो ज़ोर से हंस पड़ी. उसकी हंसी की आवाज़ सुन कर चाची एक-दम चौंक गयी और 1 सेकंड में वो सीधा हमारी तरफ पलट गयी देखने के लिए की क्या हुआ. वो साथ-साथ अपनी ब्लैंकेट भी ठीक करने लगी. Family me chudai sex story

सोनिका: क्या हुआ दिव्या? इतना ज़ोर से क्या आवाज़ आयी?

दिव्या: मम्मी वो कपिल मुझे गुदगुदी कर रहा था.

इतना कहते ही दिव्या ने मुझे वापस गुदगुदी करना शुरू किया और इस तरह हम दोनों एक-दुसरे को कुछ देर गुदगुदी करने के बाद और मस्ती करने के बाद थोड़ी देर लेटे रहे.

सोनिका (हमें देखते हुए): क्या हुआ? एनर्जी ख़तम हो गयी दोनों की?

कपिल: यस चाची. अब थक गए.

दिव्या: लेकिन मैं नहीं थकी. हे हे कपिल यू आर दी लूसर.

सोनिका: दिव्या बेटा लड़कियां वैसे भी नहीं थकती. ये तो बस लड़के है की जल्दी थक जाते है. क्यों दिव्या के पापा?

अभिनव: कुछ भी हां. मैं जल्दी थकता हु?

इतने में चाची ने भी ज़ोर से हसना शुरू किया. हमने देखा तो चाचू चाची को गुदगुदी कर रहे थे और चाची खुद को बचाने की कोशिश.

सोनिका: अरे बस कीजिये. बच्चे है, क्या सोचेंगे?

अभिनव: हां जब तुम ऐसी बातें कर रही थी तब याद नहीं आया?

सोनिका: अच्छा अब बहुत मस्ती हो गयी. ओके बच्चो सो जाओ.

दिव्या: ओके मम्मी.

कपिल: गुड नाईट एवरीवन.

फिर कुछ देर बाद चाची का फेस हमारी तरफ ही था और पीछे से चाचू ने चाची को हग कर रखा था. दोनों की बॉडी एक-दुसरे से चिपकी हुई थी. चाची अपना पेल्विस चाची की गांड में दबाते और चाची अपनी गांड पीछे दबाती. ऐसे ही दोनों एक-दुसरे को कपडे के ऊपर से ही रब करने लगे और चाची के चेहरे से साफ़ हवस नज़र आ रही थी नाईट लैम्प्स की हलकी-हलकी रौशनी में. Family me chudai sex story

फिर चाची ने अपना हाथ पीछे लिया और चाचू के शॉर्ट्स को उलटे हाथो से उतारने की कोशिश करने लगी. चाचू ये देख कर खुद ही उन्होंने अपनी शॉर्ट्स और अंडरवियर थोड़ी नीचे कर दी और उनका खड़ा लंड चाची के हाथ में आ गया. चाची कुछ देर उसे हिलाने के बाद उन्होंने अपनी सिल्की पैन्ट्स के ऊपर ही चाचू का लंड अपनी गांड पे सेट किया और चाचू कपडे के ऊपर से ही चाची को अपने खड़े लंड का एहसास दिलाने लगे.

थोड़ी देर ऐसे चलने के बाद चाचू का लंड हो चुका था खड़ा और गीली चाची की चूत. फिर चाचू ने अपना हाथ चाची की पैन्ट्स में डाला पीछे से और इस बार सीधे पैंटी के भी अंदर. चाची की मस्त नरम-नरम गांड को चाचू दबाने लगे और उनकी गांड के बीच की दरार को अपनी एक ऊँगली से रब करने लगे.

चाची से रहा नहीं गया तो चाची सीधी हो गयी. मतलब अब उनका फेस सीलिंग की तरफ था और उन्होंने ब्लैंकेट के अंदर ही सब से पहले अपना हाथ पैन्ट्स में डाल कर अपनी गांड उठा के पैन्ट्स नीचे कर दी. फिर दूसरी बार में उनकी पैंटी भी नीचे करके पैरों से ही उसे उतार दी. फिर चाची चाचू की तरफ पलट गयी और दोनों एक-दुसरे के प्राइवेट पार्ट्स से खेलने लगे.

ये काफी देर तक चला और चाचू और चाची ब्लैंकेट के अंदर ही धीरे-धीरे से सेक्स करने लगे. ये ध्यान रखते हुए की ज़्यादा आवाज़ भी न हो और उन्हें मज़ा भी मिल जाये. खैर कुछ देर बाद बेड पर हलचल ज़्यादा होने लगी थी. दोनों एक-दुसरे को एडजस्ट करने में लगे थे और उसी बीच बेड की साइड से कुछ नीचे गिरा जो दिव्या ने उठाया. दिव्या ने उसे उठाया और मुझे दिखाने लगी. Family me chudai sex story

दिव्या: कपिल ये क्या गिरा?

कपिल: पता नहीं. लाइट्स कम है तो समझ नहीं आ रहा.

फिर मोबाइल की लाइट मार के देखा तो वो ब्लैक पैंटी थी.

दिव्या: कपिल ये तो पैंटी लग रही है.

कपिल: हां.

दिव्या: लेकिन ये ऐसी नेट वाली किसकी है?

कपिल: बेड से गिरी है तो चाची की ही होगी न.

दिव्या: मम्मी मम्मी सुनो.

चाची थोड़ा ब्लैंकेट ठीक करते हुए हमारी तरफ घूम गयी.

सोनिका: यस बच्चा क्या हुआ?

दिव्या: मम्मी ये ब्लैक पैंटी आपकी है? (हाथ में पकड़ कर दिखते हुए)

सोनिका (थोड़ा सा घबराते हुए उन्होंने हाथ आगे बढ़ाया और दिव्या के हाथ से पैंटी ली और अपने पिलो के नीचे रख दी): तुझे कहा से मिली?

दिव्या: वो मम्मी बेड से गिरी, लेकिन आप ऐसी पैंटी पहनती हो? नेट वाली?

सोनिका: शट उप. अभी सो जाओ चुप-चाप. क्यों जाग रहे हो तुम दोनों इतनी देर तक? नाउ नो मोर मस्ती बच्चो समझे?

दिव्या: लेकिन मम्मी आपने पैंटी उतारी क्यों?

सोनिका: वो गर्मी लग रही थी इसलिए (जल्दी-जल्दी में जवाब कैसे देते है ठीक वैसे ही). चल अब सो जा और हमें भी सोने दो.

फिर चाची दूसरी तरफ मुँह करके सोने लगी.

सोनिका: यार ये सविता और दीपक का कब होगा? अब रहा नहीं जा रहा.

अभिनव: हो जायेगा जान. उसके बाद हमारी टर्न होगी तो हम भी इतना टाइम लगाएंगे न. एंड मेरी जान आई विल गिव यू मल्टीप्ल orgasms tonight.

सोनिका: हमेशा जैसे करते हो वैसे ही?

अभिनव: यस माय लव.

सोनिका: आज तो मिनिमम 4 बार करना जान.

अभिनव (शॉक होते हुए): बेबी जान निकालोगी क्या मेरी?

सोनिका: यस जान (स्माइल करते हुए).

तो दोस्तों यहाँ तक की कहानी आपको कैसी लगी मुझे कमैंट्स करके ज़रूर बताये. आपके कमैंट्स से मुझे और स्टोरीज लिखने की प्रेरणा मिलती है. शुक्रिया

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