Mummy aur chachi ka raaz:- मेरा नाम आर्यन है. मैं 19 साल का हूं और अभी कॉलेज में स्टडी कर रहा हूँ हमारी फॅमिली एक-दम जॉइंट फॅमिली है जिसमे मेरे पापा-मम्मी, चाचा-चाची और दादा-दादी सब एक साथ रहते है. हम कसिन्स को मिला के टोटल 5 बच्चे है. मैं सबसे बड़ा हूँ मेरी एक छोटी बहन है जो 15 साल की है और अभी स्कूल में पढ़ती है. मेरे चाचा के दो लड़के है – एक 12 साल का और एक 8 साल का दोनों स्कूल जाते है. हमारे घर का माहौल हमेशा अच्छा रहता है – दादी-दादा के संस्कार चाचा-पापा की मस्ती और हम बच्चों की शैतानी सब मिल कर घर को एक-दम अलाइव बना देते है. फेस्टिवल्स और फॅमिली फंक्शन्स में तो और भी मज़ा आता है सब मिल जल कर एन्जॉय करते है.
पापा का एक किराने का दुकान है जो हमारे एरिया में काफी पुराना और मशहूर है. दिन भर पापा दुकान पे बिजी रहते है और घर आ कर फॅमिली के साथ टाइम स्पेंड करते है. चाचा एक प्राइवेट कंपनी में अकाउंटेंट है. उनका काम भी बहुत रिस्पांसिबिलिटी वाला है इसलिए उनका रूटीन थोड़ा फिक्स रहता है.
मेरी मम्मी का नाम अनीता है. उनकी उम्र करीब 42 है. मम्मी एक-दम घरेलु और संस्कारी टाइप की लेडी है. सुबह 5 बजे उठ कर सबसे पहले घर के मंदिर में पूजा करती है. उनका ड्रेसिंग स्टाइल ज़्यादातर साड़ी है. लेकिन मम्मी साड़ी ऐसे पहनती है की उनका फिगर और भी निखर कर सामने आता है. मम्मी का फिगर अप्प्रोक्स 36-30-38 का है जिसमे उनकी कमर और कमर के ऊपर का कर्व एक-दम नैचुरली सेडक्टिव लगता है. लेकिन उनकी शक्ल और बिहेवियर इतना शरीफ और संस्कारी है की कोई उन्हें देख कर बस “आइडियल बहु” ही कहे.
मेरी चाची का नाम सुलेखा है. उनकी एज 38 है और वो भी एकदम धार्मिक औरत है. रोज़ सुबह मम्मी के साथ मिल कर घर के मंदिर में आरती करती है और व्रत-उपवास भी रखती है. चाची भी हमेशा साड़ी पहनती है कभी-कभी सलवार सूट. उनका फिगर मम्मी से थोड़ा स्लिम है अप्प्रोक्स 34-28-36 लेकिन उनके तेज़ आँख और हमेशा मुस्कुराता हुआ चेहरा उन्हें अलग ही चार्म देता है. Mummy aur chachi ka raaz
मम्मी और चाची दोनों घर में अपने-अपने रोल्स में एक-दम परफेक्ट है – एक तरफ वो पूजा-पाठ भजन घर की मर्यादा और दूसरी तरफ अपने सुन्दर और सेक्सी फिगर के वजह से हर जगह नोटिस होती है. घर वाले तो उन्हें बस शरीफ और संस्कारी बहु मानते है लेकिन उनकी नेचुरल ख़ूबसूरती और शरीर की अदा देख कर कोई भी आदमी दिल से दीवाना हो जाए. एक दिन सुबह मैं कॉलेज के लिए तैयार हो रहा था. बैग कंधे पे डाल कर हॉल में आया तो देखा मम्मी पापा से बात कर रही थी. पापा नाश्ता कर रहे थे और मम्मी उनके पास खड़ी थी. मम्मी ने प्यार से कहा मैं और सुलेखा आज शाम को एक सत्संग सभा में जाना चाहते है. अच्छे प्रवचन होते है वहां. आप हमे बस का किराया और कुछ पैसे दे दीजिये.
”पापा ने मुस्कुराते हुए तुरंत हाँ कर दी “हां अनीता सत्संग जाना अच्छी बात है. तुम दोनों जाओ.” उन्होंने जेब से कुछ नोट निकाल कर मम्मी के हाथ में दे दिए. मेरे लिए ये एक नार्मल सी बात थी क्यूंकि मम्मी और चाची ऐसे सत्संग सुनने के लिए हर महीने एक दो बार जाती रहती थी. कभी-कभी सुबह से प्रोग्राम में जाती तो सीधा शाम को दोनों आती थी. दादी हमेशा खुश होती थी और बोलती थी “दोनों बहुएं घर की इज़्ज़त बढाती है भजन-सत्संग में जाती है कितना अच्छा लगता है. ”मुझे भी ये सब बिलकुल नार्मल लगा. बस कॉलेज निकलने से पहले मैंने उनकी तरफ देखा और सोचा की मेरी मम्मी और चाची वाक़ई घर की शान है – सीधी-साधी धार्मिक और संस्कारी औरतें. Mummy aur chachi ka raaz
उस दिन मैं कॉलेज गया तो पता चला की कैंपस ऑलमोस्ट खाली है. पूरे क्लास में सिर्फ 7-8 स्टूडेंट्स ही आये थे. पता चला की फेस्टिवल चल रहे है इसलिए ज़्यादातर बच्चे बंक कर गए. मैंने भी सोचा “अब यहाँ बोर होने से अच्छा घर ही चला जाऊ.” लेकिन प्रॉब्लम ये थी की उस वक़्त मेरे रूट की बस ही नहीं चल रही थी. मैं सोच में था की अब घर कैसे जाऊ. तब मैंने डीसाइड किया की थोड़ा आगे तक पैदल चल कर ऑटो ढूंढ लेता हु. मैं रोड के किनारे-किनारे चल रहा था धुप भी तेज़ थी और ट्रैफिक भी कम था. तभी मेरी नज़र आगे गयी… और मैं एक-दम रुक गया. मुझे दूर से दो औरतें दिखाई दी. पहले मुझे लगा की शायद गली के लोग है. लेकिन ध्यान से देखा तो मेरी आँखें फट गयी. “अरे… ये तो मम्मी और चाची है!” मैं एक-दम कंफ्यूज हो गया. “पर… ये लोग यहाँ क्या कर रही है?” मेरे दिमाग में सवाल उठने लगे. मैं धीरे-धीरे चल रहा था सोच रहा था की उनके पास जा कर पूछू भी या नहीं. Mummy aur chachi ka raaz
मैं बस उनके करीब ही पहुँचने वाला था की अचानक मैंने देखा मम्मी और चाची दोनों एक अंकल के साथ जा कर उनकी कार में बैठ गयी. और फिर वो कार सीधा चल दी. मैं एक-दम शॉक में आ गया. “ये क्या… ये लोग किसी अंकल के साथ कहीं जा रही है? लेकिन सत्संग तो यहाँ से बिलकुल उल्टा डायरेक्शन में होता है!” मैंने ध्यान से देखा वो अंकल अभी थोड़ी देर पहले एक मेडिकल शॉप से बाहर निकले थे. तब मेरे मन में ख़याल आया की शायद उस मेडिकल वाले को पता हो की वो अंकल कहाँ रहते है. मैं बिना सोचे समझे सीधा उस मेडिकल स्टोर की तरफ चल पड़ा. मैं धीरे से मेडिकल शॉप के अंदर गया.
तभी सुना—वहां काउंटर पर काम करने वाला लड़का सेठ जी से कह रहा था “एक्स्ट्रा डॉटेड कंडोम खत्म हो गए सर.” सेठ ने थोड़ा हैरान होते हुए कहा “अरे इतना जल्दी कैसे खत्म हो गए?” वो लड़का बोला “अभी जो कस्टमर आये थे… उन्होंने ही लास्ट के दो पैकेट ले लिए.” सेठ हंसी दबा कर बोला “हां लगता है आज कुछ बड़ा प्रोग्राम है. फ्लावोरड कंडोम और वियाग्रा की गोलियां भी ले गया है.” ये सुन कर मैं एक-दम कंफ्यूज हो गया. “क्या ये लोग किसी और के बारे में बात कर रहे है? या फिर…?” तभी एक और अंकल जो आलरेडी काउंटर के पास खड़े थे हंस कर बोले “कौन? वो वाइट शर्ट वाला? जो अभी गाडी लेकर गया था?” Mummy aur chachi ka raaz
सेठ जी ने तुरंत हां में सर हिला दिया “हां वही.” वो तीसरे अंकल थोड़ा हंसी रोक नहीं पाए और बोले “साले के साथ दो-दो माल थी… उफ़ क्या लग रही थी दोनों! लगता है आज जम कर चुदने वाली है.” मेरी सांसें एक पल के लिए रुक गयी. “दो-दो माल? मतलब मम्मी और चाची की बात कर रहे है क्या…?” मैं शॉक में उनकी बातें सुन रहा था पर दिल मान नहीं रहा था. वो तीखी बात सुन कर एक और अंकल जो वहां दवा लेने आये थे थोड़ा गुस्से में बोल पड़े क्या बकवास कर रहे हो तुम लोग? ज़रा ध्यान से बात करो.
”माहौल एक पल के लिए सीरियस हो गया. मैं भी चुप-चाप अपना एक्टिंग करता हुआ काउंटर पर गया और बोला “भैया सर दर्द की कोई दवा दे दो.” मुझे दवा मिल गयी और मैं साइड हो कर वेट करने लगा. धीरे-धीरे सब लोग अपना काम करके निकल गए. तभी मेडिकल शॉप के सेठ जी ने अपने PC पर CCTV कैमरा का प्लेबैक खोला. मेरी आँखें खुल गयी स्क्रीन पर वही मोमेंट दिख रहा था. रोड के कार्नर पर मम्मी और चाची साफ खड़ी हुई दिख रही थी. थोड़ी देर बाद वही वाइट शर्ट वाला अंकल आया उनसे बात की और फिर तीनो गाडी में बैठ कर चले गए. सेठ जी ने वीडियो देख कर अपने आप से ही बोला “साली दोनों तो सच में एटम बम है… जिसने भी फसाया उसका दिन बन गया.” मेरी सांसें अटक गयी. Mummy aur chachi ka raaz
कैमरा में जो वाइट शर्ट वाला आदमी था उसका चेहरा ज़ूम हुआ… और मैं शॉक में रह गया. वो और कोई नहीं बल्कि पापा के पुराने दोस्त— महेश अंकल थे. महेश अंकल की बात करू तो वो पापा के सबसे करीब दोस्त है. हमारा उनके घर से पुराना रिश्ता है इसलिए उनका आना-जाना हमारे घर पे आम बात है. मैं भी उनको बचपन से जानता हूं उनकी प्रजेंस घर में बिलकुल फॅमिली मेंबर जैसी होती है. लेकिन अभी मेडिकल शॉप पर जो सुना और देखा… उससे मेरा दिमाग घूम गया. कंडोम वियाग्रा… और वो भी महेश अंकल के साथ मम्मी और चाची? ये सोच कर मेरा होश उड़ गया.
मुझे समझ ही नहीं आ रहा था की मैं अपनी आँखों और कानो पर विश्वास करू या नहीं. कुछ पल के लिए तो मेरा दिमाग बिलकुल काम करना बंद हो गया. मैंने अपने आप को समझाने की कोशिश की – “नहीं आर्यन तू गलत सोच रहा है… ये सब मुमकिन ही नहीं. मम्मी और चाची तो इतनी धार्मिक पूजा-पाठ में डूबी रहती है. संस्कारी औरतों की मिसाल है दोनों. और महेश अंकल… वो तो पापा के इतने करीब दोस्त है फॅमिली के जैसे. वो ऐसा कुछ कर ही नहीं सकते.” लेकिन दिल कहीं न कहीं मान नहीं रहा था.
जितना मैं अपनी सोच को दबाता उतना ही अंदर शक की आग भड़कती जा रही थी. मैं कह रहा था की अगर ये सब बस ग़लतफहमी है तो खुद आँखों से देख लेना ही बेहतर होगा. तभी मुझे याद आया – जिस तरफ कार गयी थी वहीँ तो उनका फार्महाउस है. वहां हम लोग पहले भी घूमने गए थे मैं वो जगह अच्छी तरह जानता हूँ बस ये याद आते ही मेरी बेचैनी और बढ़ गयी. मैंने तुरंत एक ऑटो रोका ड्राइवर को एक्स्ट्रा पैसे दिए और बोला – “सीधा उस तरफ चलो” मेरा दिल तेज़ धड़क रहा था आँखें सिर्फ एक ही चीज़ देखना चाहती थी सच.
मैंने फार्महाउस के थोड़ी दूर ऑटो रोक कर ऑटो वाले को बोला “तू यहीं रुक मैं दो मिनट में आता हु.” फिर मैं धीरे-धीरे पैदल चल कर महेश अंकल के फार्महाउस की तरफ बढ़ा. वहां पहुँच कर जो सबसे पहली चीज़ मैंने देखि उसने मेरे होश उड़ा दिए – वहीँ कार फार्महाउस के बाहर खड़ी थी जो मैंने मेडिकल स्टोर के सामने देखि थी. मेरे दिल की धड़कन तेज़ हो गयी. अब शक और पक्का लगने लगा. मैंने वापस मुड़ कर ऑटो वाले को पैसे दिए और उसे भेज दिया ताकि मुझे कोई देख न ले. फिर मैं दबे पाँव संभल कर उनके फार्महाउस का गेट थोड़ा सा खोल कर अंदर घुस गया.
हर एक कदम के साथ मेरा दिल ज़ोर से धड़क रहा था. मैं चुपके से एक बड़ी खिड़की के पास गया और धीरे से झांक कर अंदर देखा… और जो मैंने देखा उसने मेरी सांसें रोक दी. मैंने क्या देखा, वो आपको पता चलेगा कहानी के अगले पार्ट में.
संस्कारी मम्मी और चाची निकली बड़ी चुदक्कड़-2
Mazedar Family sex stories
- रंडियों का परिवार
- एक चुदक्कड़ परिवार की कहानी
- ससुराल के मोटे लौड़े
- अब्बू ने लिया मेरी कुँवारी फुद्दी का मज़ा
- मौसा जी ने खोला मेरी चूत का द्वार
