घर का मज़ा -5

Ghar ka maza 5:- पिछले भाग मे आपने पढ़ा कि कैसे मैंने दीदी को चोदा और मेरे से एक बार चुदने के बाद दीदी मुझे पूरे वीक तक इग्नोर करती रही। फिर आखिरकार वो मेरे पास आई और मुझसे माफी मांगने लगी। अब पढ़िये आगे..

अगर आपने इससे पहला भाग नहीं पढ़ा तो यहाँ पढ़ें.. घर का मज़ा 4

दीदी: मुझे माफ़ कर दे. मैंने तुझे इग्नोर किया. इन दिनों में तुझसे दूर रही तो मुझे तेरी कमी खली.

मैं: अरे दीदी आप ये क्या बोल रही हो?

दीदी: उस रात जो हुआ मैं डर गयी थी. मैं नशे में थी और मुझे माफ़ कर दे (इतना बोलते हुए वो रोने लगी).

मैं: अब रो क्यों रहे हो आप? माफ़ी मत मांगो मेरी भी गलती है. वैसे जब आपने बोला आई लव यू मुझसे रहा नहीं गया.

दीदी (आँखें पोंछते हुए): क्यों नहीं रहा गया?

मैं: दीदी मैं आपसे बहुत प्यार करता हूँ लेकिन भाई-बहन के बीच में ऐसा रिश्ता पॉसिबल होगा मुझे लगा नहीं था. पर अब ये रिश्ता अच्छा लगने लगा.

दीदी: तो तू क्या चाहता है की ये नया रिश्ता जो शुरू हुआ है वो खत्म न हो?

मैं इस बात का रिप्लाई नहीं दे पाया. मैं कुछ सोच ही रहा था तभी दीदी ने मुझे लिप किस कर दिया और मेरी गोद में आ गयी. किस में मैं उनका साथ दे रहा था. मेरा एक हाथ उनकी पीठ पर और दूसरा हाथ उनके बूब्स के ऊपर था. उनका हाथ मेरे शॉट्स के ऊपर से मेरे लंड को सहला रहा था.

कुछ समय पहले तक मैं इस टाइप की स्टोरीज पढता था. कभी लगा नहीं था की मैं भी ये सब कर पाउँगा. ऐसे ही किस करते-करते मैंने उनका टॉप और उन्होंने मेरे शॉर्ट्स उतार दिए. लगे हाथ मैंने उनकी ब्रा भी उतार दी थी. अब वो ऊपर से और मैं नीचे से पूरा नंगा था. अब मैं किसिंग के साथ साथ अपने हाथो से उनके बूब्स दबाता और वो मेरा लंड रगड़ती. दोनों गरम हो रहे थे. मेरा लंड भी पूरा तन्न गया था. फिर दोनों ने बचे हुए कपडे भी उतार दिए. दोनों किसिंग में इतने बिजी थे की दुनिया की कोई सुध-बुध ही नहीं थी. Ghar ka maza 5

फिर मैंने उनको लिटाया और उनकी गर्दन पे किस करने लगा. उसके बाद बूब्स दबा के चूसे. बूब्स चूसने के बाद नाभि में किस किया और उनकी चूत के पास आके चूत चाटने लगा. दीदी भी मज़े से सॉफ्ट मोअन्स कर रही थी. चूत चटाई से उनकी चूत गीली ही रही थी. इसी बीच मैं अपने दोनों हाथ से उनके बूब्स भी दबा रहा था. चूत चटाई के दौरान मैं उनकी चूत चाटता फिर अपनी जीभ उनकी चूत के अंदर-बाहर करता और फिर उनकी चूत को चूसता. दीदी इन सब के मज़े ले रही थी.

दीदी: आह उम् गौरव मज़ा आ रहा है.

अब इतनी चटाई से दीदी ज़्यादा ही एक्साइटेड हो गयी थी की वो झड़ने वाली थी.

दीदी: आह भाई रुक जा माँ…

इतना बोलते ही उनकी बॉडी पूरी शेक हुई और वो मेरे मुँह के पास झड़ गयी. ये नज़ारा देखने लायक था. मैं उनका सारा पानी पी गया. उनकी सांस तेज़ थी. फिर वो उठी मुझे एक नॉटी स्माइल दी और अब मुझे लिटा दिया. लिटाने के बाद उन्होंने मेरे लंड को पकड़ा जो की पूरा तन्ना हुआ था और उसमे से थोड़ा प्रीकम ड्रिप कर रहा था. दीदी ने मेरे लंड से वो ड्रिप्पिंग प्रीकम चाटा और झट से पूरा लंड मुँह के अंदर ले लिया. वो मेरे लंड को एक लोल्लिपोप जैसे चूस रही थी. मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. Ghar ka maza 5

वो बीच-बीच में मेरे टट्टों को भी मुँह में ले लेती. दीदी का ये स्वरुप मैं पहली बार देख रहा था. पहली चुदाई मे भी वो ऐसी नहीं थी.

दीदी: गौरव देख तेरी दीदी तेरा लंड चूस रही है. कैसा लग रहा है?

इतना बोलते ही उन्होंने मेरे लंड में थोड़ा सा थूक डाला. फिर लौड़ा हिलाया और दोबारा मुँह मे डाल दिया. आज मैंने पहली बार दीदी के मुँह से लंड सुना था. मुझे अच्छा लगा ये सुन के. इसके बाद उन्होंने मुँह से लंड निकाला और उसको अपनी चूत में सेट किया. फिर वो खुद मेरे लंड के ऊपर बैठ गयी. फर्स्ट ओर्गास्म की वजह से उनकी चूत गीली थी तो लौड़े को चूत में जाने से कोई दिक्कत नहीं हुई. पर फिर भी उनकी चूत टाइट थी. इसके साथ ही वो मेरे से उछल उछल के चोदना स्टार्ट हो गयी. दीदी के मन में कुछ बात चल रही थी. फिर कुछ समय बाद उन्होंने अपने हाथ अपने बालों मे रखे और अपने फेस को सहलाने लगी और चुदते चुदते बोली- Ghar ka maza 5

दीदी: आह बहनचोद भाई चोद मुझे और ज़ोर से. उम्म्म्म भाई शांत क्यों है कुछ तो बोल. आयी.. फ़क मी.

मुझे समझ नहीं आ रहा था की मैं क्या करू या क्या बोलू. तभी मुझे आईडिया आया. फिर दीदी की कमर पकड़ी और अपने हिप्स ज़ोर-ज़ोर से हिला के धक्के मार-मार के चोदने लगा. दीदी बावली हो गयी थी चुदाई से.

मैं: आह दीदी मज़ा आ रहा है. आह आपको ऐसे ही अपनी रंडी बना के चोदूँगा.

दीदी: आआह ऐसे ही. अपनी रंडी बना के चोद भाई मज़ा आ गया. मैं झड़ने वाली हु.

ऐसा बोलते ही दीदी दूसरी बार झड़ गयी. फिर मैंने दीदी को पकड़ा और उल्टा लिटा दिया और चूत मैं लंड पेल दिया. फिर चुदाई करने लगा. ऐसे तो मैंने अपनी फ्रेंड्स – बेनिफिट्स वाली सीनियर को भी नहीं पेला था. ऐसी ताबड़-तोड़ चुदाई के बारे में तो दीदी ने भी नहीं सोचा था की वो मेरे साथ कर पाएंगी. अब इतनी चुदाई के बाद मैं भी झड़ने को हुआ था. तो मैंने अपना लंड बाहर निकाला और दीदी को पलटने को बोला. फिर सारा माल उनके चेहरे में डाल दिया.

ऐसे ही एक-दो राउंड और चुदाई करने के बाद हम दोनों आपस में लिपट के सो गए. मुझे नींद आ गयी थी पर दीदी कुछ सोच रही थी. दीदी ने मेरी तरफ देखा. मैं सो रहा था. उन्होंने मेरा माथा चूमा. दीदी (मन में सोचते हुए): राज की मदद के हाथ से मुझे मेरे भाई का प्यार मिल गया है. अब आगे क्या-क्या और होता है? दीदी और राज के बीच में क्या-क्या हुआ ये मुझे बहुत बाद में राज से पता चला.

सुबह हुई और दीदी मेरे रूम से अपने रूम चली गयी. पर जब वो अपने रूम में जा रही थी तब भाभी ने दीदी को मेरे रूम से बाहर निकलते हुए देख लिया. फिर मैं भी उठा और फ़ोन देखा तो 8 बजे हुए थे और मुझे किसी का मैसेज आया था कि “गौरव क्या आज हम मिल सकते है?”

कौन है जिसका मेसेज था, और भाभी के साथ मेरा सीन क्या हुआ पढ़िये अगले पार्ट मे

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