Maa ko bhikhari ki rakhail banaya 2:- पिछले पार्ट मे आपने पढ़ा कि कैसे एक भिखारी को मैंने माँ के मज़े लेने के लिए उकसाया और वह माँ से अपना नाड़ा खुलवाने के बहाने उनके पास गया, अब पढ़िये आगे. कुछ कोशिश के बाद, माँ ने नाडा खोल ही दिया और जैसे ही नाडा खुला, वैसे ही भिखारी की धोती उसके पैरों में जा गिरी. और उसका लंड माँ के चेहरे से टकरा गया. जिससे माँ हडबड़ाके उठी और बाथरूम से बाहर आके दरवाजा लगा दिया. और आवाज से समझ मे आ रहा था. भिखारी मूतने लगा है।
माँ को भिखारी की रखैल बनाया – 1
भिखारी – धन्यवाद मालकिन. आज आप नहीं होती तो पता नहीं क्या होता.
माँ का चेहरा एकदम लाल हो गया था. न ही माँ भिखारी से नज़रें मिला रही थी. नीचे गार्डन करे ही उन्होंने जवाब दिया.
माँ – हम्म. फिर भिखारी दुकान से निकलके मेरे पास आया.
मैं – मजा आया? भिखारी – बेटा क्या ही बताऊँ. क्या कोमल गाल थे साली के.
मैं – मालकिन से सीधे साली.
भिखारी – क्या करूँ बेटा?
मैं – हम्म समझ मे आ रहा है.
बाबा के जाने के बाद मैं जैसे ही गोडाउन में गया. तो माँ उनकी नाक ढके हुए बाथरूम से बाहर आ रही थी. मैंने कुछ कहा नहीं. माँ के जाने के बाद जब मैंने बाथरूम में जाके देखा तो.
मैं – ये बाबा तो बोहोत चालू है, साले ने पानी भी नहीं डाला.
बाबा ने मूतने के बाद बाथरूम ऐसे ही छोड़ दी और जब माँ गयी. तो उन्हें उसके मूत की बदबू आई। तभी वो जल्दी से बाहर आ गयी. फिर कुछ देर बाद माँ दुबारा बाथरूम में गयी और अब जो मैंने देखा मुझे यकींन नहीं हुआ. माँ ने उसकी मूत पे पानी डालके बाथरूम साफ़ करी. अगले हफ्ते फिर उसको माँ ने खाना दिया और जाते टाइम। Maa ko bhikhari ki rakhail banaya 2
भिखारी – बेटा आज कुछ हो सकता है.
मैं – बाबा थोड़ा सबर करो.
भिखारी – बेटा सबर ही तो नहीं होता.
मैं – रुको कुछ सोचता हूँ.
मेरे दिमाग में एक आईडिया आया. जो मैंने बाबा अच्छी समझा दिया.
भिखारी – मालकिन कुछ काम मिल सकता है. खाने का बंदोबस्त हो जाया करेगा.
माँ – बाबा आपको खाना दे तो देती हूँ. फिर काम वो भी इस उम्र में.
भिखारी – मालकिन आप तो सिर्फ रविवार को देती हो. बाकि पुरे हफ्ते मुझे बोहोत दिक्कत होती है, खाने का बंदोबस्त करने में. उपर से मेरा पोता, वो अभी भर्ती है, उसके लिए पैसे भी जुटाने है. कुछ काम और रहने के लिए झोपडी मिल जाती तो बड़ी मेहेरबानी होती. उससे कुछ पैसे भी कमा लेता.
मैं – क्या हुआ माँ?
माँ ने मुझे सारी बात बताई.
मैं – माँ हमारे गोडाउन के पीछे, बाथरूम के पास एक रूम है न, वो इन्हे दे देते है. वैसे भी खाली ही है और ये थोड़ी बोहोत दुकान में भी मदद कर दिया करेंगे. इससे आपका काम भी थोड़ा आसान हो जायेगा.
माँ – लेकिन बेटा तेरे पापा को क्या बोलेंगे.
मैं – माँ पापा तो दिन में यहाँ होते है और दिन में बाबा भीख मांगने चले जाया करेंगे. 8 के बाद तो दुकान पे आप ही होती हो. तब बाबा आ जया करेंगे, क्यों बाबा?
भिखारी – हां मालकिन, यही सही रहेगा.
जैसे तैसे मैंने माँ को मना ही लिया. 4-5 दिन तो कुछ नहीं हुआ.
भिखारी – बेटा कुछ तो जुगाड़ कर, देख तेरी माँ को देखके मेरा लंड बैठने का नाम ही नहीं ले रहा.
तो मैंने भिखारी को फिर एक आईडिया दिया. तो भिखारी दुकान में जाके बिकुल माँ के सामने पहुंचा और एकदम से उसने उसकी धोती उतार दी. जिससे फिर उसका खड़ा लंड माँ की आँखों के सामना था. Maa ko bhikhari ki rakhail banaya 2
माँ (नजर घुमाते हुए) – ये क्या बतमीज़ी है बाबा. ये आप क्या.
भिखारी – मालकिन मेरा पेट बहुत जोर से दर्द कर रहा है. बहुत जोर से लैटरिंग लगी है.
माँ (ऑंखें बंद करते हुए) – तो जाइये मुझे क्यों बता रहे है.
भिखारी बाथरूम की तरफ भागा. इसके बाद जो मैंने देखा मुझे यकीन नहीं हुआ. माँ ने धीरे से भिखारी की गांड की तरफ देखा जब वो भाग रहा था. करीबन 10 मिनट बाद भिखारी ने बाथरूम का गेट खोला. माँ ने देखके एक दम से नजर घुमा ली. मैंने बोला था बाबा को धीरे धीरे जाने के लिए और वो वैसे ही धीरे धीरे आने लगा. और जब मैंने माँ की तरफ देखा तो मुझे फिर यकींन नहीं हुआ. माँ साइड नजर से भिखारी के लंड को देख रही थी. जो भिखारी के चलने की वजह से झूलता हुआ आ रहा था. अब माँ का चेहरा धीरे धीरे गुलाबी होने लगा. जब भिखारी धोती पहन के फिर काम में लग गया. तब तक तो माँ के दोनों गाल लाल हो चुके थे. अब मुझे ये समझ मे तो नहीं आया की माँ को भिखारी का लंड पसंद आने लगा है की नहीं. लेकिन इतना जरूर यकींन हो गया. की जब जब भिखारी का लंड बाहर होगा. माँ उसे जरूर देखेंगी. Maa ko bhikhari ki rakhail banaya 2
मैं जानता था. ये सब धीरे धीरे करना होगा. क्युकी माँ को फंसाना आसान नहीं है. जल्दबाजी में कहीं उल्टा ही न हो जाये. अब मैंने एक हफ्ते का इंतज़ार किया. लेकिन इस बार मुझे कुछ करने की जरुरत ही नहीं पड़ी. बाबा को कब्ज हो गयी थी. उनकी उम्र के हिसाब से गैस भी. तो मैंने सिर्फ इतना कहा. जब भी लैटरिंग जाना हो तो माँ के सामने ही धोती उतारके भागे. और जब भी पदास लगे. तो माँ के आस पास ही पादे. एक दो बार तो माँ ने बाबा के ऊपर गुस्सा किया. यहाँ तक की यहाँ से निकलने की भी धमकी दी. लेकिन धीरे धीरे माँ का रवैया बदलने लगा. अब तो बाबा को जब भी लैटरिंग जाना होता वो माँ के सामने ही नंगा होता. माँ कुछ नहीं कहती बस नजरें घुमा लेती. और जब भी बाबा माँ के आस पास होते और माँ उनकी नाक को पल्लू से ढक लेती. तो मैं समझ जाता बाबा ने पाद दिया है. कब्ज ठीक होने के बाद भी.
अब तो बाबा का ये रोज का हो गया था. वो माँ के सामने दिन में कम से कम एक बार तो नंगा हो ही जाता था. और रोज माँ बाबा के लंड को एक बार तो देख ही लेती थी। एक बार तो बाबा ने वो किया जो मैं सोच नहीं सकता था. एक रात माँ को उपर से जीरे का पैकेट उतारना था. कुर्सी के उपर से भी माँ का हाथ नहीं पहुंचा.
माँ – रवि बेटा! मै जैसे ही मैं जाने को हुआ बाबा ने मुझे रोक लिया और छुपके देखने को कहा।
भिखारी – क्या हुआ मालकिन. बेटा तो यहाँ नहीं है।
माँ – बाबा वो पैकेट उठाना है.
भिखारी – उसमे क्या है, मैं उतार देता हूँ.
माँ – लेकिन आप कैसे? कहीं गिर गए तो?
भिखारी – आप सिर्फ इस कुर्सी को पकड़के रखिये, बस छोड़िएगा मत.
भिखारी कुर्सी पे चढ़ा. माँ ने झुकके कुर्सी को पकड़ लिया. जिससे माँ का चेहरा बाबा की गांड के बिलकुल सामने आ गया. भिखारी ने हाथ ऊपर करते ही पाद छोड़ दी. जिसकी आवाज मुझे तक आ गयी. माँ के दोनों हाथ तो कुर्सी पकड़े हुए थे. तो माँ ने उनका चेहरा घुमा लिया. लेकिन एक्सप्रेशन से साफ़ पता चल रहा था की माँ को बदबू आ रही है. फिर बाबा ने वो किया जो मैं सोच नहीं सकता था. माँ की नजर न होने का फ़ायदा उठाते हुए भिखारी ने उसकी धोती खोल दी. जिससे उसकी नंगी गांड माँ के चेहरे के सामने आ गयी. लेकिन चेरा घुमा होने की वजह से माँ को पता नहीं चला.
भिखारी – मालकिन ठीक से पकड़िए मेरी धोती खुल रही है.
अब जब माँ ने चेहरा सीधा किया. तो माँ की नाक बाबा की गांड की दरार में थोड़ी सी घुस गयी. और उसी वक़्त बाबा ने दुबारा पाद दिया. पाद इतनी भयानक थी की माँ की आँखों से आँसू झलक पड़े. तो माँ ने कुर्सी छोड़ दी. अब भिखारी सीधा हुआ, कुर्सी छोडने की वजह से और भिखारी के सीधे होने की वजह से बैलेंस बिगड़ा और भिखारी माँ के ऊपर गिर पड़ा, और गिरा भी कैसे, उसका लंड माँ के राइट गाल से चिपक गया.
माँ – बाबा ये आप क्या कर रहे है?
भिखारी – मैं क्या मालकिन, अपने ही कुर्सी छोड़ दी.
माँ – मेरे उपर से उठिये.
जब बाबा उठा तो उसके लंड के छेद से प्री-कम की बून्द माँ के राइट गाल से चिपक गयी. जब भिखारी ने लंड हटाया तो गाल और लंड के छेद पे उस बून्द ने पतले तार का रूप ले लिया. जो माँ के राइट गाल और बाबा के लंड के छेद से चिपका हुआ था. माँ ने कुछ कहा नहीं. बस नजरें नीचे कर ली।
माँ (नजर नीचे करते हुए) – बाबा धोती पहन लीजिये.
भिखारी – हां लेकिन उससे पहले मुझे बाथरूम लगी है.
माँ – तो जाइये.
भिखारी – कैसे जाऊ मालकिन? गिरने की वजह से मेरा पैर मोच गया है. आपको मुझे बाथरूम में ले जाना पड़ेगा.
माँ – क्या मुझे? नहीं! मैं रवि को बुला देती हूँ.
भिखारी – वो घर गया है, तब तक इंतज़ार नहीं कर सकता, मेरा यही छुट जायेगा.
माँ – नहीं नहीं यहाँ नहीं! मैं ले चलती हूँ.
जब माँ ने बाबा को पकड़ा तो बाबा ने उसके हाथ से माँ के पेट को कस लिया. और माँ को लेके बाथरूम के अंदर घुस गया.
आगे क्या हुआ पढ़िये अगले पार्ट मे
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