सॉरी दोस्तों! बहुत दिनो बाद कहानी स्टार्ट कर रहा हूँ। मै बहुत ज्यादा बिज़ी था लेकिन अब वादा करता हूँ कि कहानी को पूरा करूंगा। तो पिछले भाग मे आपने पढ़ा कि मेरी दीदी मुझसे चुदवाने आई और मैंने भी बड़ी चालाकी से उनको कोई शक नहीं होने दिया। पर मै उनको चोदने से पहले अपना लंड उनके मुह मे देकर चुसवाना चाहता था पर वो मना कर रही थी। तो मैंने उनको बोल दिया कि बिना मुह मे दिये मै आपको नही चोदूंगा । अब पढ़िये आगे।
अगर आपने पिछला भाग नहीं पढ़ा है तो पहले वो पढ़िये ==> बड़ी बहन को चोदने की तलब भाग – 3

दी ने मुझे घूरते हुए देखा जब मैंने उसको अपना लंड मुँह में लेने को कहा. दी ने मुझे मना किया तो मैंने उसको साफ़ बता दिया की बिना उसके मुँह में गए मेरा लंड उसकी चूत में नहीं जायेगा. तो उसके पास अब कोई ऑप्शन नहीं था. इस बात से दी को थोड़ी दिक्कत सी हुई फिर हंस कर उसने कहा-
दी: अरे नाराज़ क्यों हो रहा है? मैं तो बस इसलिए कह रही थी की तुम्हारा फर्स्ट टाइम है. तो कही मेरे मुँह में ही ना निकल जाये. और उसने मेरी तरफ टौन्टिंग वाली स्माइल की. इसको सुन कर तो मेरी झांटे फायर हो गयी. दिल में आया की अब तो पहले अपने लंड का पानी उसके मुँह में निकाल कर उसको पिलाता हूँ और फिर उसको चोदूंगा. तब इस साली को पता चलेगा. पर वक़्त की नज़ाक़त (कायरा का मूवी टाइम और वीडियो कैमरा की बैटरी टाइम) को देख कर मैं अपनी जुबां की बात को पी गया. फिर थोड़ी मुस्कान के साथ कहा “नहीं निकलेगा दी इतना तो भरोसा है मुझे अपने इस्पे.” (और फिर अपना लंड उसके होंठो के सामने हिलाने लगा)
में: अब जल्दी भी करो कही मेरे रूममेट्स ना आ जाये. उनके हिसाब से तो आज यहाँ प्रियंका चोदने वाली थी. पर यहाँ पे तो… इसलिए अब जल्दी भी करो.
दी: ओके. –
ये बोल कर उसने मेरे लंड को अपने हाथ में लिया और उस पर अपनी जुबां घूमने लगी. आह… आह… क्या मस्त एहसास था. फिर मैंने थोड़ा प्रेस करके अपने लंड को उसके मुँह में डाला जिसको अब वो अंदर-बाहर कर रही थी. उसको ऐसे चूसता हुए देख मैं जोश में आ गया और थोड़ी पोजीशन को ठीक करके उसके मुँह को ही चोदने लगा. पूरा गीला लंड बाहर निकाल के वापस उसके मुँह में डाल कर उसके गले तक उतारता. कई बार तो सांस न आने की वजह से वो झटपटाती और खांसती भी. उसके आँखों से आंसू भी निकल आये. मैंने देखा की मजबूरी इंसान से क्या-क्या करवाती है. आज मेरी शादी-शुदा फॉरेन रिटर्न दी को ये मजबूरी मेरा लंड चुसवा रही थी. कुछ देर बाद फिर मुझे होश आया और अपना लंड बाहर निकाल के दी को खड़ा किया. फिर मैं उसके बूब्स को देखने लगा.
दी: क्या देख रहे हो कभी बूब्स देखे नहीं क्या?
में: देखे तो है पर तुम्हारे अब तक नहीं देखे. बहुत ही कम भाइयों को ये मौका मिलता है अपनी सिस्टर के शरीर से उसकी ब्रा को हटाने का.
(और मैंने ब्रा को निकाल फेंका)वाह! क्या मस्त गोर मुलायम बूब्स थे. बिना ब्रा के सपोर्ट के भी अभी तक टाइट थे. शायद दी उनको रोज़ मेन्टेन करती होंगी. मैं सीधे अपने मुँह में एक बूब को दबा के उसको चूसने लगा जैसे कोई भूखा बच्चा अपनी माँ को लिपट जाता है वैसे ही. दी भी मेरे बालों को सहला रही थी. आह चूसो इसको आह पूरे पी जाओ. – मैंने फील किया की दी यहाँ आयी तो मजबूरी में थी पर एन्जॉय तो वो भी कर रही थी). मैंने उसको चूसते हुए अब उसके लिप्स को चूसने लगा. एक दम वाइल्ड वाली स्मूचिंग करते हुए मैंने उसको बेड पे पटक दिया. मैं हर पोजीशन कैमरा के एंगल को ध्यान में रख कर दी को उसमे रखता. सिचुएशन ये थी की मैं नीचे से और दी ऊपर से नंगी थी. तो मैंने खड़े हो कर अपने बाकी के कपडे निकाल दिए और दी की सलवार को भी उतार दिया. दी ने अपनी आँखें बंद कर ली थी. अब वो बस पैंटी में थी जो गीली हो चुकी थी. ये देख कर मेरे चेहरे पे स्माइल आ गयी और मैं से ये बोझ हट गया की दी मुझसे आज जबरन या मजबूरी में चुदेगी.
में: आँखें क्यों बंद कर दी तुमने?
दी: मुझे शर्म सी आ रही है.
में: तो क्या तुम पूरी चुदाई में आँखें बंद रखोगी?
दी: नहीं जब तुम उसको मेरे अंदर डालोगे तब तुम्हारे हर धक्के के साथ मेरी शर्म भी जाती रहेगी.
में: हम्म पर इसके पहले एक और काम बाकी है –
और मैं दी की पैंटी को खींचने लगा). वो सुख जो फॉरेन में तो कॉमन है. पर इंडिया में बहुत कम औरतों को ये नसीब होता है. तुम्हे जीजू से मिला ये पता नहीं पर आज तुम इसकी हक़दार हो.
दी (आँखें खोल कर): क्या?
में: तुम्हारी चूत की चुसाई.
और मैं झुक कर दी की चूत के लिप्स को चूसने लगा. मैं उसकी चूत के दाने (क्लाइटोरिस) को भी मुँह में लेकर चूसने लगा. दी तो जैसे स्वर्ग में चली गयी थी. वो मेरे बालों को सहलाने लगी.
दी: आह आह भाई चूस अच्छे से. तेरे जीजू ने तो कभी इसका स्वाद नहीं चखा. आह कब से मेरी ख्वाहिश थी की कोई चूसे इसको. आज वो पूरी हो गयी. आहआहह सुन कर मैं और भी जोश में आ गया और दी की चूत में अपनी जुबां डाल कर उसको चोदने लगा. और कुछ देर में दी की चूत भी अच्छे से गीली हो गयी और दी ने कहा-
दी: अब मैं काम पे आजा भाई. अब रहा नहीं जाता. डाल दे अंदर.
में: ओके दी.
और मैं खड़ा हो कर पास के ड्रावर से कंडोम निकाल के ले आया. – मुझे पता था की दी मुझको कंडोम पहनने से रोकेगी. क्यूंकि मैंने उसको मैसेज में अपने भाई से बिना कंडोम के सेक्स की शर्त रखी थी.)
दी: पूरी तैयारी पहले से की है तूने लगता है.
में: हां दी वो रखना पड़ता है. एक तो प्रेगनेंसी का खतरा नहीं रहता और अपनी भी सेफ्टी. आज कल की लड़कियों का क्या भरोसा?
दी: तो तुझे मैं तेरी गर्लफ्रेंड जैसी चालु दिखती हूं जो तुझे मुझे फ़क करने के लिए कंडोम चाहिए हम्म?
में: अरे ऐसी बात नहीं. मुझे लगा तुम इसके लिए इंसिस्ट करोगी इसलिए मैंने पहले निकाल दिया. क्यूंकि कही आपको प्रेगनेंसी ना रह जाये.
दी: बुद्धू प्रेगनेंसी को रोकने के लिए टेबलेट्स भी आती है. और बिना कंडोम के चुदवाने में ही असली मज़ा आता है दोनों को. और मुझे तेरे लंड से ज़्यादा उसके पानी में इंटरेस्ट है.
में: मतलब?
दी: तू पहले डाल फिर बताती हु.
और दी ने खुद मेरा लंड पकड़ के अपनी चूत के गेट पे रखा. तो मैंने भी देर ना करते हुए उसको अंदर धक्का लगाया. चूत गीली होने की वजह से लंड अंदर जा रहा था पर चूत के दबाव से लगा की दी इस साइज को फर्स्ट टाइम ले रही थी. दी तकिये को दबाते हुए अपने होंठ भींच रही थी. उसके चेहरे पे साफ़ दिख रहा था की ये साइज उसके लिए नया था. और वो अनकंफर्टबले लग रही थी.
में: दी तुम्हे तकलीफ हो रही हो तो निकाल दू क्या? अभी आधा ही गया है.
दी: तू रुक मत और इसको जल्दी ख़तम कर.
तो फिर मैंने भी और ज़्यादा ना सोचते हुए बाकी का लंड भी अंदर प्रविष्ट कर दिया. पूरा अंदर लेते ही दी हांफने लगी. कुछ देर तक मैं ऐसे ही रहा. जब दी थोड़ी कम्फर्टेबले हुई और मुझे हलकी स्माइल देकर उसने मुझे सिग्नल दिया. तो मैंने धक्के लगाने शुरू किये. शुरू में सलौली मैं अपने लंड को आधा ही बाहर और अंदर करने लगा. और हर धक्के के साथ दी की आह निकल जाती. दी के चेहरे पे सेक्स की मस्त फीलिंग दिख रही थी. अब ये दी की एक्टिंग थी अपनी मजबूरी छुपाने की या फिर वो सच में सेक्स को एन्जॉय कर रही थी ये तो दी ही जाने. पर जैसे दी अपनी गांड उठा कर मेरे लंड के धक्को के साथ अपनी टोनिंग कर रही थी वैसे तो वो मज़े में ही लग रही थी. मेरी कमर को पकड़ते हुए जब लंड चूत के अंदर की तरफ जाने को होता तब वो मेरी कमर को अंदर की और दबाती जिससे मेरा लंड उसकी बच्चे-दानी तक पहुंचे और उसके छूने पे उसको और मस्त फीलिंग आये. दी अपने होंठ भींच के मेरी चुदाई को एन्जॉय कर रही थी. ये इस सब से मैं अच्छे से कह सकता हूँ दी को यकीन हो गया था की उसको आज उसके भाई से जब चोदना ही था तो क्यों ना सही तरीके से चुदा जाये.
आज दी को देख कर मुझे बचपन में पढ़ी हुई ग्रेविटी की बात याद आ गयी. की ग्रेविटी इस वर्ल्ड की एक सबसे बड़ी सच्चाई है. आप ज़मीन पे खड़े रह कर हवा में कुछ भी उछालो फिर वो लोहे का टुकड़ा हो कागज़ का पलाइन गोल्ड की रिंग या डायमंड वो लास्ट में तो आता नीचे ज़मीन पर ही है. अब वो चीज़ चाहे औरत फेंके मर्द फेंके कोई बुद्धा या बच्चा वो नीचे ही आ कर रुकेगी. सेक्स भी बिलकुल इस ग्रेविटी की तरह सच है. अब वो एन्जॉय के तौर पर किया जाये या मजबूरी में दोनों लोग एन्जॉय तो करते ही है. मज़ा तो दोनों को ही आता है. फर्क सिर्फ इतना है की कुछ लोगों के चेहरे पे वो दिखता है और कुछ लोग उसको छुपा लेते है. और छुपाने में एक्सपर्ट ज़्यादातर गर्ल्स ही होती है इन मामलो में. तो यहाँ पे दी ने कुछ छुपाया नहीं और वो खुल कर एन्जॉय कर रही थी. दी तो मस्त हो कर फुल एन्जॉय कर रही थी. पर मेरा ध्यान दी की चुदाई के साथ क्लॉक पे भी था. अक्सर लोग मनचाही चूत मिलने पर सब कुछ भूल कर उस चूत की सेवा में लग जाते है. पर मेरा ये प्लान टाइम मैनेजमेंट के ऊपर ही बना था.
और मैं तो कहता हूं यही नहीं कोई भी ऐसा प्लान आप बनाते हो अपनी घर की औरत जैसे दी भाभी साली या फिर माँ आदि को अपने लंड के नीचे लाने के लिए तो उसमे टाइम मैनेजमेंट बेहद ज़रूरी है. एक बार टाइम मिक्स और सही प्लान के साथ आपने उनकी चूत मार ली और वीडियो बना ली. तो फिर अच्छे चांस है की आप फ्यूचर में उनकी चूत फिर से और आराम से ले सकोगे. तो इसी वजह से मुझे अपनी इस शार्ट फिल्म की हीरोइन को अच्छे से शूट करना था. फिर मैंने दी को मिशनरी पोजीशन (रूटीन पोजीशन दी लेती हुई और मैं ऊपर से डाल रहा हु) से चेंज करके दी को खड़ा किया.
दी: क्या हुआ?
में: पोजीशन चेंज करते है. चलो डोगग्य स्टाइल में करते है.
ये सुन कर दी के चेहरे पे हलकी सी मुस्कान आ गयी. मानो जैसे मैंने उसके मैं की बात कर दी हो. दी ने अपना मोबाइल टेबल से उठा कर तकिये के नीचे डाल दिया. और घोड़ी/कुतिया की पोजीशन में आ गयी.मैंने उसके पीछे आ कर अपने लंड को पीछे सेट किया और उसकी प्यारी गुलाबी चूत में पेल दिया. इस पोजीशन में सच में मज़ा आता है. और इसी पोजीशन में दी को चोदने लगा. कुछ देर बाद दी ने अपना मोबाइल तकिये के नीचे से निकाल कर उसकी चुदाई को फ्रंट कैमरा से रिकॉर्ड करने लगी. पहले उसने अपने आप का फेस फिर हमारी चुदाई को और फिर मेरे फेस को ज़ूम करते हुए वीडियो रिकॉर्डिंग की. दी ने छोटी सी क्लिप रिकॉर्ड करके मोबाइल को वापस रख दिया.
में: दी ये वीडियो क्यों बनाया? किसी ने देख लिया तो?
दी: कोई नहीं देखेगा. मैं इसको हाईड करके अपनी पर्सनल पेन ड्राइव में रख लूंगी. और जब तेरी याद आएगी इसको देख लूंगी टॉयलेट में बैठ कर. हर रोज़ थोड़ी ना भाई का लंड लेने को मिलेगा.
में: हम्म पर जब याद आये तब तुम मुझे बुला लेना. मैं आ जाऊंगा तुम्हारी चूत की सेवा करने.
दी: हम्म्म. (और दी कुछ देर चुप हो गयी)
एक्चुअली दी को इस डोगी में चोदने का एक रीज़न यही था की दी हमारी वीडियो बना कर किडनैपर को (यानि मुझे) प्रूफ के तौर पे भेज सके. और दूसरा रीज़न यही था की डोगग्य स्टाइल में ज़्यादातर लड़कों का जल्दी निकल जाता है पर मोस्टली लड़कियों को इस स्टाइल में चोदना पसंद भी होता है. जिन लड़कों का जल्दी निकाल जाता है वो लड़कियों को अपने लंड के ऊपर बिठा कर चोदते है या फिर वो रूटीन मिशनरी पोजीशन में. पर डोगग्य स्टाइल में चूत की पोजीशन इस तरह से बनती है की वो अंदर आते हुए लंड को जकड सी लेती है और जिससे लंड का पानी दूसरी पोसिशन्स के हिसाब से जल्दी निकल जाता है. तो इस पोजीशन में इसलिए दी को चोदा की अगर जीजू का भी इस पोजीशन में जल्दी निकल आता हो तो मेरी इस पोजीशन में चुदाई को फील करके वो मुझसे फ्यूचर में भी सामने से आ कर चुदे. और तीसरा रीज़न ये है और जो मैन रीज़न है की मैं दी को मुझसे चुदने का रीज़न पूछने वाला था.
पहली वाली पोजीशन में दी और मैं फेस तो फेस होते तो वो शायद बता नहीं पाती. या फिर उसके चेहरे को देख कर मुझे पता चलता की दी ये बनी बनायीं स्टोरी बता रही थी. पर इस पोजीशन में ऐसी कोई भी उसको चिंता नहीं थी. तो मैंने दी को उसकी कमर से पकड़ कर उसकी दिशा को ऐसे चेंज किया की उसका चेहरा मेरे बेड की दीवार के ऊपर लगी नेचर की पेंटिंग के ऊपर पड़े. उसके पीछे मैंने मेरा दूसरा कैमरा सेट किया था. अब बस दी से उसकी कहानी सुन्नी थी और रिकॉर्ड करनी थी और इस खेल को जल्दी से ख़तम करना था.
में: दी अब तो बता दो की ऐसा क्या रीज़न है की तुम्हे मेरे लंड को अपनी चूत में सामना पड़ा?
दी: बात दरअसल यु है भाई की कायरा को हुए कई साल हुए है और मेरे ससुराल वालो को एक वारिस यानि लड़का चाहिए. पर कई बार ट्राई करने पे भी नहीं हुआ. और मुझे लगता है की मेरे पती में ही खोट है
में (मैंने अब दी की चूत में अपने लंड के धक्को की स्पीड को स्लो किया): पर दी तुम्हे आलरेडी एक बेटी है ना जीजू से फिर ये कैसे?
दी: एक्चुअली भाई ये एक सीक्रेट है जो मेरे सिवा किसी को नहीं पता है. मुझे डर लगाता है की तेरे साथ शेयर करू या नहीं.
में: एक औरत की सबसे कीमती चीज़ जो होती है वो तो तुमने अभी मेरे साथ शेयर की हुई है. तो अब ये सीक्रेट से क्यों घबरा रही हो? ट्रस्ट में ये मेरे पास सेफ रहेगा. (और मैंने पूरा लंड निकाल के उसकी चूत में एक ज़ोर से झटका मारा)
दी: ठीक है भाई. बात यु है की फॉरेन में तेरे जीजू को कुछ लॉस हुआ था. तो उनके दोस्त थे फॉरेन के उसने उनकी हेल्प की थी. जीजू को लगा की उसने फ्रेंडशिप में हेल्प की थी. पर हकीकत में उसकी नज़र मेरे ऊपर थी. जब वो घर पे आता तो मुझे पहने हुए कपड़ो में अपनी आँखों से चोदता ऐसा लगाता था.
दी: जब तेरे जीजू को लॉस हुआ तो जीजू ने उसको डिनर पे बुलाया और अपनी प्रॉब्लम शेयर की. उसने हेल्प करने का वादा किया और मेरी तरफ देखा. दुसरे दिन जब मैं अकेली थी तो वो आया और मुझे ऑफर किया की वो मुझसे सेक्स के बदले उनकी हेल्प करेगा.
दी: मैं चाहती तो उसको बेइज़्ज़त करके निकाल देती. पर मुझे हमारी सिचुएशन का पता था. इसलिए मैंने उसको घर से निकालने के बजाये अपने कपडे निकालना सही समझा.
में: क्या तुम एक पराये आदमी से चुद गयी?
दी: तो और क्या करती? हमारी फाइनेंसियल कंडीशन खराब थी और फॉरेन में कितनी प्रॉब्लम रहती है ये तुम्हे क्या ही पता?
में: ओके. पर तुम्हे यकीन है की कायरा उसकी बेटी है जीजू की नहीं?
दी: वो अक्सर मुझे कंडोम पहन के ही चोदता था. पर कुछ बार उसने मेरी चूत के अच्छे मज़े के लिए और बिना कंडोम के चोदा था. उसी टाइम पे तेरे जीजू भी मुझे चोदते थे और उसी टाइम मैं प्रेग्नेंट हो गयी. और मैंने मान लिया की ये तुम्हारे जीजू का ही है.
दी: पर अब इतने सालों बाद जब फिरसे उसी पोजीशन पे आ खड़ी हूं तब डाउट होता है की तेरे जीजू मुझे बच्चा नहीं दे सकते. पर उनके घर वाले तेरे जीजू का टेस्ट करवाने को तैयार ही नहीं. उनका कहना है की पहली बेटी तो उनके बेटे ने दी तो थी. और वो मेरा दोष निकाल रहे है.
दी: तो फिर मैंने भी पुराणी वाली तरकीब आज़माने का सोचा. अगर फॉरेन में होती तो शायद उसी आदमी से फिर चुदवा लेती. पर यहाँ इंडिया में मुझे कोई अपना चाहिए था जो मेरी हेल्प करे और इसको सीक्रेट भी रखे. और इन सब वजह से मैंने तेरी पसंदगी करि.
दी: भले ही भाई हो पर हो तो एक मर्द ही. तुम्हारे पानी से मैं माँ बन सकती हूँ आज हॉस्पिटल में चेकउप करवाया तो डॉक्टर ने बताया की आज सही वक़्त है चांस लेने का. और इसलिए मैं हॉस्पिटल से सीधा तेरे जीजू के बदले तेरे पास आयी हु.
दी: तो अब बोल बनाएगा मुझे अपने बच्चे की माँ? या फिर मुझे उसके लिए कोई और लंड अंदर लेना होगा?
में: नहीं दी. (दी ने अपनी स्टोरी एक ही सांस में कह दी. अब ये स्टोरी रियल है या मनघडंत ये तो ऊपर वाला ही जाने. पर मेरे लिए ये काफी था की उसकी स्टोरी कैमरा मे रिकॉर्ड हो चुकी होगी.) मैं तुम्हे फिर से माँ बनने में पूरी हेल्प करूँगा. जब चाहो जहा चाहो मैं तुम्हे चोदने को और तेरी चूत को अपना पानी पिलाने को रेडी हु.
दी: थँक्स भाई. तो अब जल्दी से मेरी चूत को अपने रस से भर दे.
में: ओके दी.
मैं भी अब झड़ने वाला था तो पूरा रस उसकी चूत में निकाल दिया. और हम दोनों बेड पे गिर पड़े. इस तरह आज की दी की चुदाई को मैंने इस तरह अंजाम दिया. नेक्स्ट स्टोरी में बताऊंगा की दी की चुदाई के बाद की सिचुएशन को किस तरह से हैंडल किया जिससे उसको कोई शक ना हो. सो फ्रेंड्स ये पार्ट कैसा लगा कमैंट्स में ज़रूर बताइयेगा.
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