नमस्कार दोस्तों, मेरा नाम पूनम है और मैं उत्तराखंड की रहने वाली हूँ। जब मैं 20 साल की थी तब मेरी शादी मेरे घर वालों ने मुंबई के एक बिजनेसमैन आरुष गुप्ता से करा दी थी। तभी से हम मुंबई में रहते हैं।
मुझे और मेरे पति को अफसोस, कोई औलाद नहीं हो सकती थी क्योंकि मेरे पति का स्पर्म काउंट थोड़ा लो था। तो वो कभी बाप नहीं बन सकते। ये बात मुझे भी शादी के बाद ही पता चली। मेरे घर वाले भी ये बात सुनकर बहुत परेशान हुए। पर किस्मत के आगे किसी की कहाँ चलती है।
2 साल तक हमने कोशिश की अलग-अलग प्रोसीजर्स से, पर कुछ बात नहीं बनी।
मुझे बहुत दुख था क्योंकि मैं हमेशा से एक पूरा परिवार चाहती थी। पर बिना चिल्ड्रन के परिवार तो अधूरा ही होता है। मेरे हस्बैंड आरुष ने भी ये चीज नोटिस की और मुझे समझाने की कोशिश की। आखिर में हमने सोचा कि क्यों ना चाइल्ड अडॉप्ट कर लिया जाए।
हमने फिर एक लड़की जिसकी उम्र उस समय 12 साल थी, उसे अडॉप्ट कर लिया और उसका नाम रखा शिवानी।
समय निकलता चला गया और मैंने भी शिवानी को पाल-पोसकर बहुत प्यार से बड़ा किया। आरुष भी बिजनेस के सिलसिले में बाहर रहते थे। इसी बीच मेरी और मेरी बेटी शिवानी की दोस्ती बहुत अच्छी हो गई थी। मेरी उम्र इस वक्त 30 थी और शिवानी की 20 साल।
कोई भी हमें देखता तो माँ-बेटी नहीं समझता। सबको ऐसा लगता कि हम बहनें हैं। हम हर चीज आपस में शेयर करते थे।
मैं एक हाउसवाइफ हूँ तो घर पर ही रहती थी। फाइनेंशियली कोई प्रॉब्लम नहीं थी क्योंकि आरुष अच्छा-खासा कमा लेते थे। पर मैंने कोई मेड नहीं रखी थी क्योंकि मुझे घर का काम करना अच्छा लगता था।
शिवानी ने भी मुंबई के ही एक कॉलेज में एडमिशन ले लिया और उसकी पढ़ाई चल रही थी। शिवानी को मैंने कपड़ों में और विचारों में बहुत छूट दे रखी थी। तो वो हमेशा मॉडर्न कपड़े ही पहनती थी जो कि आजकल नॉर्मल हैं। जैसे कि क्रॉप टॉप, डीप नेक टॉप्स, शॉर्ट्स आदि। उसका बॉडी टोन गोरा होने की वजह से उस पर सब सूट भी करता था।
रोज़ की तरह आज भी शिवानी कॉलेज के लिए निकली थी। मैं घर की साफ-सफाई कर ही रही थी कि मुझे शिवानी के रूम में उसका फोन दिखा। शायद वो फोन ले जाना भूल गई थी आज कॉलेज।
शिवानी और मेरे बीच में बहुत ट्रस्ट था इसलिए मैंने कभी उसका फोन चेक नहीं किया। और शायद इसीलिए उसने कभी फोन में लॉक भी नहीं लगाया। मेरा फोन चार्ज पर था तो मैंने सोचा शिवानी के फोन में सॉन्ग्स चला देती हूँ। मुझे सॉन्ग्स सुनते-सुनते काम करने की आदत थी। मैंने फोन ओपन किया तो उसमें ऊपर अननोन नंबर से मैसेज था।
अननोन नंबर: थैंक्स फॉर यस्टरडे। आज भी उसी टाइम पर आना।
मैं सोच में पड़ गई कि ये कौन है। मैंने क्यूरियोसिटी में वो चैट खोली तो उसमें 2 ही मैसेज थे, जो कि आज के थे।
1st मैसेज जो कि शिवानी का था: गुड मॉर्निंग
और 2nd मैसेज जो अभी आया था: थैंक्स फॉर यस्टरडे। आज भी उसी टाइम पर आना।
मुझे शक हुआ कि ऊपर की बाकी चैट्स डिलीट की हुई हैं। मुझे सरप्राइज हुआ कि शिवानी ने ऐसा क्यों किया। उसने मुझसे ये बात क्यों छुपाई। वो तो मुझसे कुछ नहीं छुपाती। और ये अननोन नंबर कौन है। क्या उसका कोई बॉयफ्रेंड तो नहीं?
मेरे मन में बहुत सारे सवाल आ रहे थे। पर उनका जवाब सिर्फ वही आकर दे सकती थी।
पूरे दिन मेरे मन में यही सवाल खाए जा रहा था कि ये कौन है जिससे मेरी बेटी बातें करती है। और उसने चैट क्यों डिलीट की। सोचते-सोचते शाम हो गई और शिवानी के आने का भी टाइम हो गया।
शिवानी घर आई।
शिवानी: हाय मॉम।
मैं: हाय बेटा, कैसा रहा कॉलेज?
शिवानी: बढ़िया रहा मॉम। क्या हुआ, कुछ टेंशन में लग रही हो? कुछ बात है क्या?
मैं: नहीं बेटा, कुछ नहीं। तुम हाथ-मुँह धो लो, मैं कुछ नाश्ता लगा देती हूँ।
शिवानी: ठीक है मॉम।
हमने डाइनिंग टेबल पर बैठकर थोड़ा चाय-नाश्ता किया। मेरे मन में आ रहा था कि पूछ लूँ कि कौन था। पर फिर सोचा कि अभी पूछना सही नहीं रहेगा। मैं अपने लेवल पर ही थोड़ा और छान-बीन करती हूँ। हाँ ये सही रहेगा।
रात हो गई और हम दोनों अपने-अपने रूम में चले गए। रात को मैंने करीब 2 बजे उठकर शिवानी के कमरे में जाकर उसका फोन चेक करने की सोची। तो मैं अपने रूम से चुपके से उसके रूम में गई। वो गहरी नींद में सो रही थी। तो मैंने चुपके से उसका फोन लिया और वापस अपने रूम में आ गई ताकि आराम से चैट पढ़ सकूँ।
मैंने फोन में चैट पढ़ना स्टार्ट करी स्टार्टिंग से। और चैट कुछ इस तरह थी।
शिवानी: हाय रघु।
अननोन (रघु): हाय शिवानी।
शिवानी: आई लव्ड आवर डे टुडे। द वे यू ग्रैब्ड माई हैंड। (मुझे आज का दिन बहुत पसंद आया, जिस तरह से तुमने मेरा हाथ पकड़ा था)
रघु: मुझे भी अच्छा लगा। तुम्हारे साथ टाइम स्पेंड करना अच्छा लगता है।
शिवानी: मुझे भी बेबी। आई लव यू सो सो मच।
रघु: आई लव यू टू बेबी।
शिवानी: अच्छा कल मूवी देखने चलोगे क्या मेरे साथ?
रघु: हाँ अगर तुम दिखा रही हो तो चल सकते हैं।
शिवानी: ओहो। मैं ही दिखा रही हूँ। चलो मैं टिकट बुक कर देती हूँ ऑनलाइन। कॉलेज से बंक मारकर मूवी चलेंगे कल।
रघु: ठीक है। तुम मुझे कॉलेज के बाहर से पिक कर लेना।
शिवानी: ओके बेबी।
रघु: ठीक है बाय।
(फिर कुछ नॉर्मल सी चैट थी जो रिलेवेंट नहीं थी)
मैं पहले तो शिवानी का फोन वापस उसके रूम में रखकर आ गई। फिर वापस अपने रूम में आकर सोचने लगी कि शायद ये शिवानी का बॉयफ्रेंड होगा। उसने मुझे बताया नहीं होगा क्योंकि वो डर रही होगी कि मुझे बताएगी तो मैं उससे डाँटूंगी। खैर कोई बात नहीं। लड़का डिसेंट लग रहा है। पर उसने शिवानी को टिकट बुक करने को क्यों बोला। क्या वो खुद टिकट बुक नहीं कर सकता क्या। इतना तो उससे करना चाहिए। खैर कल शिवानी का पीछा करती हूँ। देखती हूँ कि कौन लड़का है, कैसा दिखता है। और मैं फिर सो गई।
अगले दिन सुबह-
मैं उठी। ब्रश किया। नहाई। और फिर पूजा-पाठ करने के लिए बैठ गई। पूजा करके मैंने शिवानी को भी उठाया। वो भी फिर उठी और मुझे गुड मॉर्निंग किस किया।
शिवानी: गुड मॉर्निंग मम्मी।
मैं: गुड मॉर्निंग बेटा।
फिर मैं भी खाना बनाने में लग गई।
और शिवानी रोज़ की तरह योगा और एक्सरसाइज करने लग गई। शिवानी एक साल से रोज़ सुबह कॉलेज जाने से पहले योगा और एक्सरसाइज करती थी। उसकी बॉडी में भी इसीलिए बहुत चेंजेस आए हैं। और वो बहुत हॉट दिखने लग गई है। पहले मैंने उससे इतना देखा नहीं था ध्यान से। पर अब जब मैंने उसकी उसके बॉयफ्रेंड के साथ चैट देखी तो मेरे मन में आया कि देखते-ही-देखते कितनी बड़ी हो गई है मेरी बेटी। इसका बॉयफ्रेंड तो खुशकिस्मत होगा। हाहा।
शिवानी का पेट फ्लैट था। पर उसके ब्रेस्ट्स और हिप्स में अच्छा उभार था। 20 साल की लड़की का जैसा होना चाहिए उससे काफी अच्छी बॉडी थी शिवानी की। मुझे प्राइड फील हो रहा था कि ये मेरी बेटी है। भले ही अडॉप्टेड ही सही पर मेरी परवरिश में कितनी सुंदरता निखरी है इसकी।
ऐसे ही शिवानी के कॉलेज जाने का टाइम हो गया। उससे पहले मैंने उसका फोन चेक किया पर जैसा गेस्ड उसने चैट डिलीट की हुई थी।
शिवानी: मैं जा रही हूँ मॉम कॉलेज।
मैं: ओके बेटा। बाय। (मन में- हा हा मुझे पता है कौन सा कॉलेज जा रही है। मैंने चैट पढ़ जो ली तुम्हारी रात को। और मैं हँसने लगी)
शिवानी: क्या हुआ मॉम, हँस क्यों रही हो?
मैं: कुछ नहीं। ऐसे ही कुछ बात याद आ गई थी।
शिवानी: हाहा। ओके बाय।
शिवानी फिर अपनी स्कूटी लेकर कॉलेज के लिए निकल गई। और मैंने भी कुछ दूरी रखकर अपनी कार में उसका पीछा किया।
कार में शिवानी का पीछा करते-करते मैं कॉलेज के बाहर तक पहुँची। वहाँ मैंने देखा एक लड़का शिवानी के पीछे स्कूटी पर बैठ गया। और दोनों फिर वहाँ से निकल गए मॉल के लिए। मॉल पहुँचकर उन्होंने पार्किंग में अपनी स्कूटी लगाई और मैंने भी कार कुछ दूरी पर पार्क की और उनका पीछा करने लगी।
फिर लिफ्ट से वो ऊपर गए और मैं दूसरे लिफ्ट से ऊपर गई जहाँ थिएटर हॉल था। वहाँ पहुँचकर उन्होंने टिकट बुक कराई और मैंने भी उसकी 2 सीट पीछे टिकट बुक करा ली। फिर हम मूवी देखने लगे।
दोनों नॉर्मल से ही बैठे थे। कुछ खास हुआ नहीं मूवी के बीच। बस दोनों आपस में कुछ बातें करते। देखते-ही-देखते इंटरमिशन आ गया। और रघु अपनी सीट से उठकर बाहर चला गया, शायद पॉपकॉर्न और ड्रिंक्स लेने। ये देखने के लिए मैंने उसका पीछा किया। शिवानी अपनी सीट पर ही बैठी थी।
बाहर रघु पॉपकॉर्न काउंटर जाकर खाने-पीने की चीजें लेने लगा। तभी उसके फोन पर कॉल आया। उसने अपना कॉल उठाया और किसी से फोन पर बात करने लगा। मैं उसके पीछे ही खड़ी थी तो सारी बातें मुझे सुनाई दे रही थीं। रघु के करीब मैं इसलिए जा सकती थी क्योंकि वो नहीं जानता था कि मैं शिवानी की माँ हूँ।
(ऑन-कॉल)
रघु: नहीं भाई कहाँ बिजी। बस मूवी देखने शिवानी के साथ आया हूँ।
रघु: अरे नहीं भाई। अपने पास कहाँ इतने पैसे होते हैं। ये तो शिवानी ही देती है। उसी के फोन से अभी पेमेंट करके पॉपकॉर्न और ड्रिंक्स लेने आया हूँ।
रघु: हाहाहा पागल है क्या भाई। तू तो मुझे जानता ही है। मुझे उससे कोई प्यार-व्यार नहीं है। मैं तो बस उसके पैसों की वजह से उसके साथ हूँ। पूछ मत भाई। अंधा पैसा है उसके पास। और मेरे प्यार में मैंने उससे लट्टू कर दी है। दीवानी है मेरी। तो इससे शक भी नहीं होता। बस मैं थोड़ा झूठा आई लव यू बोल देता हूँ और उससे पैसे निकलवाता रहता हूँ। भोली है बेचारी।
हाँ तेरे लिए भी देखता हूँ ऐसी कोई। टेंशन मत ले। चल रखता हूँ फोन। बाय।
(कॉल एंडेड)
मेरी तो पीछे खड़े हुए पैरों तले मानो जमीन खिसक गई हो। मुझे शॉक लगा। कि मेरी बेटी इसके जाल में कैसे फँस गई। ये तो मेरी बेटी को बस लूट रहा है उससे झूठा प्यार का नाटक करके। नहीं। मैं ऐसा नहीं होने दे सकती। मुझे कुछ करना होगा।
रिसेप्शनिस्ट: मैम ऑर्डर।
(मैं सोच से बाहर आती हुई)
मैं: हाँ। नो थैंक यू।
रघु जा चुका था वापस हॉल में और मैं यहाँ भूत बनी खड़ी हुई थी। मैं भी फिर अंदर गई अपनी सीट पर। और रघु की कॉल पर हुई बातों के बारे में सोचने लगी कि मेरी बेटी इतनी भोली कैसे हो सकती है। वो इस लड़के के जाल में कैसे फँस गई। सोच-सोच में ही मूवी निकल गई। और सब एग्जिट करने लगे।
हम लिफ्ट के पास पहुँचे ही थे। रघु और शिवानी मेरे आगे खड़े थे और मैं थोड़ी दूरी बनाकर पीछे खड़ी थी। लिफ्ट खुली और रघु और शिवानी लिफ्ट में एंटर हुए। फिर रघु ने शिवानी को कुछ बोला और वो लिफ्ट के बाहर आ गया। शिवानी लिफ्ट में नीचे चली गई पार्किंग में। और मैंने देखा रघु मेरी तरफ ही आ रहा है।
मैं डर गई और इमरजेंसी एग्जिट की तरफ से बाहर गई।
रघु भी मेरे पीछे-पीछे वहाँ आ गया। और मेरा हाथ पकड़कर मुझे पास में ही स्टोर रूम में ले गया। स्टोर रूम में काफी अँधेरा था।
मैं: छोड़ो मेरा हाथ। क्या कर रहे हो तुम?
रघु: कब से देख रहा हूँ कॉलेज से ही तुम हमारा पीछा कर रही हो। कॉलेज से मॉल आ गई और मॉल से मूवी थिएटर। सच-सच बताओ कौन हो तुम?
मैं बहुत डर गई कि मेरी चोरी पकड़ी गई।
मैं: नहीं ये क्या बोल रहे हो। ऐसा कुछ नहीं है। ये बस एक कॉइन्सिडेंस (इत्तिफाक) है।
रघु: चुतिया समझा है क्या मुझे?
और रघु ने मुझे दीवार पर धक्का दिया। अब मैं दीवार के सहारे पीठ के बल खड़ी थी और रघु ने अपने दोनों हाथों से मेरे दोनों हाथों को ऊपर की ओर पकड़ लिया। और बिल्कुल मेरे करीब आ गया। उसकी साँसें मुझे मेरे फेस पर फील हो रही थीं। उसने बहुत मजबूती से मुझे पकड़ा था, तो मैं हिल भी नहीं पा रही थी।
मैं: सचमुच। तुम्हें कोई गलतफहमी हुई है। छोड़ो मुझे।
रघु: सच-सच बता कौन है तू। और क्यों मेरा पीछा कर रही थी।
ये कहते हुए रघु पूरा मुझसे चिपक गया। मेरे बूब्स उसकी चेस्ट पर क्रश होने लगे। मुझे लगा ये कुछ कर ना दे इसलिए मैंने उससे सच बोलने का फैसला किया।
मैं: मैं… मैं… मैं तुम्हारा नहीं, मैं शिवानी का पीछा कर रही थी। मैं शिवानी की मॉम हूँ।
रघु: हाहाहा। हाहाहा। क्या मजाक किया है। शिवानी की मॉम इतनी जवान हो ही नहीं सकती।
मैं: नहीं। मैं सच बोल रही हूँ। शिवानी मेरी अडॉप्टेड डॉटर है।
रघु: झूठ। मुझे तुझ पर विश्वास नहीं।
मैं: मैं प्रूफ कर सकती हूँ। मेरे पास फोटोज हैं फोन में।
रघु: ठीक है दिखाओ।
मैं: पहले मेरे हाथ तो छोड़ो।
रघु: नहीं तुम भाग गई तो।
मैं: नहीं भागूँगी। प्रॉमिस। छोड़ो मेरे हाथ।
रघु ने मेरे हाथ तो छोड़ दिए। पर मुझे उल्टा घुमा दिया। अब मेरी गाँड और बैक उसके फ्रंट बॉडी से टच हो रही थी। उसने अपने हाथों से मेरी कमर को कसकर जकड़ लिया। उसके कठोर हाथ मेरी मुलायम सी कमर को जब छुए तो मेरे अंदर एक करंट सा दौड़ गया।
मैं: आह। क्या कर रहे हो ये तुम?
रघु: तुझे पकड़ रहा हूँ ताकि तू भागे ना। चल अब बता फोटोज अगर सच बोल रही हो तो।
मैं: आह। छोड़ो मुझे। इतना कसकर मत पकड़ो।
इतना कहते ही उसने मुझे और कसकर पकड़ लिया। मेरा मुलायम पेट और नाभि उसके पंजों में था। और मैं छूटने की कोशिश कर रही थी। इससे हुआ ये कि मेरी गाँड उसके लंड पर और रगड़ने लगी। जिससे उसका लंड खड़ा हो गया। वो मुझे मेरी गाँड पर फील हो रहा था साड़ी के ऊपर से।
मैं: आह्ह। औउचhhh
रघु: क्या हो गया? बताओ फोटोज। और एक कामिनी सी मुस्कान दी।
मैंने फिर उससे अपने फोन में मेरे और शिवानी के पुराने घर के फोटोज दिखाए।
मैं: देख लो। अब तो यकीन हुआ। अब छोड़ो मुझे।
रघु: ठीक है। छोड़ रहा हूँ।
पर रघु ने छोड़ने से पहले, कसकर मुझे पकड़कर एक शॉट लगाया। उसका लंड मुझे मेरी ऐस क्रैक में फील हुआ।
मैं: औउच। उम्मम। बदतमीज।
रघु: अब बताओ पीछा क्यों कर रही थी हमारा?
वो मुझे आप करके भी नहीं बोल रहा था। ना ही मुझे इज्जत दे रहा था। ये जानने के बाद भी कि मैं शिवानी की मॉम हूँ।
मैं: मैंने तुम्हारी सारी बात सुन ली है कॉल पर। और मैं मेरी बेटी को तुम्हारे जैसे लड़के के साथ एक पल भी और नहीं रहने दूँगी।
रघु: हाहा। वो अब मेरे प्यार में फँस चुकी है। तुम कुछ नहीं कर पाओगी।
मैं: अच्छा। वो मेरी बेटी है। तुम देखो आज ही तुमसे रिश्ता खत्म करवाती हूँ उसका।
रघु: ट्राई करके देख ले। वैसे कुछ उखाड़ नहीं पाएगी तू।
और रघु फिर स्टोर रूम से बाहर चला गया। और मैं यहाँ अकेली खड़ी रही। जो कुछ हुआ उसके बारे में सोचने लगी। मुझे रघु पर बहुत गुस्सा आ रहा था। और अपनी बेटी की भी चिंता हो रही थी।
पर ना जाने क्यों इन सब के बावजूद मेरी पैंटी गीली हो गई थी। मैंने नीचे हाथ लगाकर देखा तो मेरी चूत से बहुत पानी आ रहा था। क्या ये रघु की वजह से? नहीं नहीं। ऐसा मैं सोच भी कैसे सकती हूँ। पर ऐसा एहसास पहले मुझे कभी नहीं हुआ। जैसे उसने मुझे कसकर पकड़ रखा था और उसकी पैंट में वो… नहीं नहीं। ये मैं क्या सोच रही हूँ। ये गलत है।
और मैंने ये ख्याल अपने मन से हटाया और घर की ओर निकल गई।