Home / धमाकेदार चुदाई / विजय और उसकी पत्नी

विजय और उसकी पत्नी

प्रेषक : अनिल
दोस्तो मेरा नाम अनिल है और मेरी उम्र 34 साल हे मेने इंजिनियरिंग करने के बाद कानपुर में अपने परिवार के साथ रह रहा हु. मे अपनी पहली स्टोरी लिख रहा हु। यह स्टोरी एक रियल स्टोरी है बस नाम मेने चेंज किये हे. बात उन दीनो की हे. मेरी शादी हो चुकी थी लेकिन मेरी पत्नी सेक्स का मज़ा नही दे पा रही थी उसे सेक्स मे
मज़ा नही आता था। मे अपने लंड के  लिय तडपता रहता था सोचता था. “या खुदा दी तूने एक चूत वो भी चुद्वाती नही. तडपा के रखा इतने साल…तुझे मुझ पर दया आती नही..कर दे खुदा एक उपकार किसी चूत से मिला दे।
मेरे खड़े हुए लंड को कोई तो सहारा दे..”खैर यारो उपर वाले ने मेरी सुन ली. मेरे दोस्त को मेरा मददगार बना कर भेज दिया उसका नाम विजय था उसकी शादी हो चुकी थी 2 बच्चे भी थे  उसकी पत्नी सावले रंग की सलोनी होठ तो गजब के थे देखते ही नशा चड जाय। उसे देख कर मेरा लंड खड़ा होने लगता था लेकिन सारी इच्छाए मन मे ही दब जाती थी. सपने मे सोचता था काश वो मिल जाए तो उसे जाने नही दूँगा रात भर चोद के ठंडा होऊंगा. मे ओर विजय दोनो ही एक ही उम्र के थे।बात उस समय की हे जब उसकी बेटी का बर्थ डे था. और विजय ने ज़रूर आने को कहा. मैने हरिद्वार जाने का मन बना लिया था. विजय हरिद्वार मे रहता हे. रात को बर्थ डे मनाकर डिनर के बाद सभी बच्चे सो गए थे. विजय कि पत्नी विजय ओर मे हम तीनो एक बेड पर बेठ कर बाते कर रहे थे. हम रात 1:30 बजे तक बाते करते रहे. हम मदहोश हुये जा रहे थे सारी बाते हो रही थी. मैने भी बताया की मे कैसे अपनी किस्मत को कोस रहा था मुझे नही पता था की किस्मत जागने वाली हे।  तीनो एक ही डबल बेड पर सो गए. लेटते ही नींद आ गई।
अभी आधा घंटा ही हुआ होगा नींद खुल गई…………आह..ह..ह…..हह……………. आ………..ह……हह…………… अहह……….ओह………हह………………….ऑश………हह………हह की आवाज़ आ रही थी। विजय ओर उसकी उसकी पत्नी एक दूसरे से लिपटे हुये चुदाई का किस्सा पढ रहे थे।

आखे खुली की खुली रह गई चारो ओर मादकता छाई हुई थी मेरा लंड भी जोरो से उफान मारने लगा. मैने विजय की ओर देखा वो जी जान से चोदने मे लगा था थोड़ी देर हुई उसने लंड निकाला ओर आरू (पत्नी का नाम )के मुह मे दिया आरू उसे मस्ती मे लेकर चूसने लगी. उसका लंड 3.5”का था। विजय का पानी निकल गया था आर आरू शांत नही हुई थी. विजय से नज़रे मिली आखो मे ही उसने आरू को चोदने के लिय कहा आरू एक दम गर्म थी।
मैने उसके हाथो मे अपना 7”का मोटा लंड पकड़ा दिया लंड को पकड़ते ही वो चीख उठी कितना बड़ा ओर मोटा हे. मुझ पर मस्ती छाने लगी. मैने उसे बाहो मे कस लिया उसके होटो पर अपने होट रख कर जोरो से चूसने लगा बहुत ही हॉट थी वो आज पहली बार अहसास हुआ उसके नर्म होंठो का वो भी मुझे सहयोग कर रही थी. हाथो से उसके बोब्स दबा रहा था और वो मुह से आवाज़े निकाल रही थी।
ऊहह…उउउफफफ्फ़….ओर ज़ोर से अनिल चोद डालो मेरी चूत प्यासी हे…………मैने उसके दोनो बोब्स को बारी बारी से चूस रहा था. वो आँखो को बंद करके मादक आवाज़ को निकाले जा रही थी. जैसे जन्मो की प्यासी हो उसके बोब्स को चूसते हुए उसके पेट नाभि पर किस लेते हुए उसकी चूत को चूसने लगा था और वो मस्ती मे आकर खा जाओ मेरी चूत को. आआअहह आआअहह….पीईईई जाअ”आआओ.” वो किसी मदहोश जानवर की तरह चिल्ला रही थी अपने पुरे  बदन को तोड़ कर दोहरा किए जा रही थी “ऊवू एससस्स… ऊवू… उन्न्ञनह… उहगग्गघह!” उसके हाथ मेरे पूरे बदन से लिपटे जा रहे थे।
रंग मे मस्ती भर रहे थे तभी मेने अपने लंड को उसके मुह मे दिया ओर खुद उसकी चूत  चाटने लगा हम 69 पोज़िशन मे थे मे अपनी जीभ से उसकी चूत मे अंदर बाहर कर रहा था वो चिल्लाये जा रही थी अचानक उसका टेंपरेचर बड गया था….आअहह विजय का फिर से खड़ा होने लगा था उसने मुझसे कहा अब तुम चूत मे घुसाओ मैं गांड मे अपना लंड दूगा. आज विजय भी  मेरे लंड को देख कर उसकी तारीफ करना नही बुला था बोला यार आज दोनो मिलकर आरू की बरसो की प्यास बुझा देगे।
मैने अपना लंड उसकी चूत पर रगड़ना चालू कर दिया वो बड़ी सेक्सी आवाज़ निकालने लगी. मे  भी मस्त हो गया था मेरे मुह से भी हॉट बाते निकल रही थी. हाँ रानी अपनी चूत को इस लंड के लिए हमेशा खोले रखना….लो मज़ा….. लो राणिीईईईईईई उपर से बोल रहे थे।
और मे नीचे से उनका पुरा लंड लेने के लिए ज़ोर लगाते हुए बोल रही थी, “ ओओह मेरे राजा चोद दो….. अपनी बिना झांटो वाली इस बुर्र्र्र्र्र्ररर कूऊऊऊ और छोड़ूऊऊऊ फर्रर्र्र्ररर डूऊऊओ इस साली चूत को….. बडी चुदासी हो रही थी…… सुबह से……..साथ साथ गिरना ….. हाँ अब…. मैं चुदाई का मज़ा लेने लगा. नीचे से गांड को उचका उचका कर चुदाई में भरपूर सहयोग करने लगी। है मेरे चोदु सनम तुम्हारा लंड बडा जानदार है ना जाने कितनी बार चुद चुकी हों पर लगता है पहली बार चुद रही हूँ…. मारो राजा धक्का….और जोर से पुरा डाल दो अपना लंड…… मेरा लंड अंदर बाहर हो रहा था उधर विजय ने मुहं मे फिर निकाल दिया था ओर आज पूरा पानी पी गई।
मेरा लंड पूरे जोरो पर चोदता जा रहा था और आरू मस्त हो रही थी मारो राजा और ज़ोर से…… थक गये हो तो बताओ मे उपर आकर चोद दु……. इस भोसड़ी को….. ओह अब मैं नहियीईईईईईईईईईईईई रुक्कककककककक सकती ऑश……..हह……..ह आ……..हह लूऊऊ गइईई ओह राजा तुम भी जाऊऊऊ” वो नीचे से झडने के लिए बेकरार हो रही थी और मे उपर से दनादन धक्के- पर -धक्के मार रहा थे। कमरे में चुदाई का संगीत बज रहा था. मे विजय से कह रहा था विजय चोद चोद कर इसे इतना मज़ा दूँगा की मुझसे चुदे बिना रह ही नही पायेगी….. ओह मेरी आरू जान एक बार फिर साथ-साथ झडेगे……ओह अब तुम भी आआअजाओ………” कहते हुए मे उसकी चूत की गहराई में झड गया और वो भी साथ-साथ खल्लास हो गयी….. मे उसकी छाती से चिपक गया कुछ पल तो ऐसा लगा की उसकी चूत मे मेरा लंड को फसा लिया है।
विजय ये देख कर मुस्कुरा रहा था. बोला आज तुमने इसकी प्यास बुझा दी. थोडी देर हम उसी तरह चिपके रहे “वा उपर वाले तुने कमाल कर दिया, मेरे प्यासे लंड को मालामाल कर दिया, तेरे दरबार मे देर हे मगर अंधेर नही सुना था आज दीदार भी कर लिया, या खुदा आज मालामाल कर दिया.” ।
धन्यवाद