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सोनल जी की चुदाई (Sonal ji ki chudai)

सोनल जी की चुदाई

मेरा नाम आशु है और मैं ६ फीट का एक साधारण सा नौजवान हूँ, स्टील-सिटी भिलाई में रहता हूँ! आप लोगों ने भिलाई स्टील प्लांट का नाम तो जरुर सुना होगा, यहाँ पर स्टील प्लांट की पूरी कालोनी बनी हुई है और घर बहुत ही सलीके के साथ बने हुए हैं !

बात उन दिनों की है जब मैं एक प्राइवेट कंपनी में मार्केटिंग जॉब करता था। मुझे अपने कस्टमर से उनके ऑफिस और शॉप पर जाकर मिलना पड़ता था और पूरे दिन फ़ील्ड का काम करना पड़ता था, लेकिन शनिवार को सिर्फ ऑफिस में बैठना पड़ता था और थोड़े बहुत काम फ़ोन से ही करने होते थे!

वो एक सुहानी सुबह थी, मेरे ऑफिस में कम लोग ही आये थे, हम दो दोस्त ही उस समय फ़ोन पर कस्टमर से बात करने हुए मौसम का मजा ले रहे थे ! मैंने एक कस्टमर को फ़ोन लगाया और उसके हेलो बोलने से पहले ही बड़े आत्मविश्वास से कहा,” राजेश सर ! क्या हाल चाल है !”

यहाँ पर कोई राजेश नहीं रहते हैं ! एक खनकती हुई आवाज़ सुनाई दी !

यह जादुई आवाज़ मेरे दिल में उतर गई,”माफ़ कीजिये मैडम ! मैंने शायद कोई गलत नंबर लगा दिया है !”

लेकिन उसने कुछ नहीं कहा। मैंने फिर कहा- मैडम मैंने जानबूझकर आपको फ़ोन नहीं लगाया है, गलती से लग गया है !

अब वो बोली- कोई बात नहीं !

मुझे लगा उसकी आवाज़ में एक उदासी है और वो शायद किसी से मेल-जोल नहीं रखना चाहती। लेकिन मुझे तो अब उससे और बात करने का मन कर रहा था और वो कोई जवाब भी नहीं दे रही थी।

“सॉरी मैडम मैंने आपको परेशान किया, लेकिन मैं बस एक बात कहना चाहता हूँ कि आपकी आवाज़ बहुत मीठी है ! अगर आपको मेरी बात बुरी लगी हो तो मैं फिर भी आपसे माफ़ी नहीं मांगूंगा क्योंकि मैंने कोई गलत बात नहीं कही है !

अब वो बोली- मैं अजनबी से बात नहीं करती हूँ !

मैंने कहा- मैडम मेरा नाम आशु कपूर है और मैं भिलाई स्टील प्लांट में काम करता हूँ, आपसे फ़ोन-फ्रेंडशिप करना चाहता हूँ, यह एक शुद्ध मित्रता होगी जिसमें कोई बुराई नहीं। अगर आपको मैंने कोई गलत बात की तो आप फिर मुझसे बात मत करना, मैंने अपना पासा फेंका।

वो थोड़ी देर शांत रही, फिर बोली- जी नहीं मुझे कोई दोस्ती नहीं करनी ! और उसने फ़ोन रख दिया !

मैंने कालर आईडी से उसका नंबर देखा फिर फ़ोन लगाया, बहुत देर तक घंटी बजती रही लेकिन उसने फ़ोन नहीं उठाया ! मैंने भी उसका नंबर लिख कर रख लिया कि १-२ दिन बाद फिर से कोशिश करूँगा !

इस तरह अगले २-३ दिन मेरे दिमाग में उसकी वो आवाज़ घूमती रही और मैं उसके कल्पना में खोया रहा- “वो कितनी सुंदर होगी, उसका फिगर कैसा होगा, उसके वक्ष कितने गोल गोल और बड़े होंगे” और यही सोच-सोच कर मैंने २-३ बार मुठ मार लिया !

अब मैंने सोच लिया जो भी हो जाये उस लड़की को देखना है और किसी भी तरह फ़ंसाना है ! इस तरह मैं अगले शनिवार का इन्तजार करने लगा और सोच लिया कि उसी समय ही फ़ोन करूँगा ताकि उससे ही फ़ोन पर बात हो सके !

आखिर शनिवार का दिन आ गया, मैं ठीक १० बजे ऑफिस पहुच गया ताकि उससे बात हो जाए। उस समय ऑफिस में कोई नहीं आया था, मैंने उसका नंबर लगाया, मेरे दिल की धड़कन और फ़ोन की घंटी जोर जोर से बज रही थी ! बहुत देर रिंग बजती रही लेकिन किसी ने फ़ोन नहीं उठाया। मेरा मन मायूस हो गया, मैं क्या क्या सोच के आया था और अब उससे बात भी नहीं हो पा रही है !

मैंने फिर से फ़ोन लगाया, अगर अब किसी ने फ़ोन नहीं उठाया तो मैं फिर कभी भी फ़ोन नहीं लगाऊंगा …………. अभी दो ही रिंग गए थे कि किसी ने हेलो कहा और फ़ोन में वो ही खनकती हुई आवाज़ थी ! मैंने पहचान लिया- हेलो मैडम मैं आशु कपूर बोल रहा हूँ, हमारी पिछले हफ्ते आपस में बात हुई थी और मैंने आपको फ़ोन फ्रेंडशिप ऑफर किया था ! जी, आपने मुझे पहचाना ……….?

आपको मैंने पहले ही कहा था ना कि मुझे आपसे कोई फ्रेंडशिप नहीं करनी और आपको मालूम भी है मेरी उम्र क्या है, हो सकता है मेरी उम्र ५० साल हो ! तो भी आप मुझसे फ्रेंडशिप करना चाहोगे?

मैंने तो सोच लिया था, जो भी हो जाये इस खनकती आवाज़ का दीदार तो जरुर करूँगा। मैंने भी पासा फेका “मैडम मैंने तो पहले ही कहा था कि सिर्फ दोस्ती करना चाहता हूँ और दोस्ती में उम्र नहीं देखी जाती !”

वो बोली- ठीक है लेकिन हम लोग सिर्फ फ़ोन पर ही बात करेंगे और कभी भी कुछ गलत बात तुमने की तो मैं फिर तुमसे बात नहीं करुँगी!

मैंने कहा- मैडम, आप मुझसे दोस्ती करके मायूस नहीं होंगी, यह मेरा वादा रहा !

इस बार वो मंद मंद मुस्कुराते हुए बोली- देखते हैं ! और यह बार बार मैडम क्यों कह रहे हो ! मेरा नाम सुनालिया है और तुम मुझे सोनल कह सकते हो और हाँ मेरी उम्र ५० साल नहीं है !

तो फिर कितनी है? मैंने झट से पूछा।

वो हंसी और बोली- अभी नहीं बताऊंगी !

ठीक सोनल जी ! मेरे लिए यही काफी है कि मेरी आपसे दोस्ती है !

फिर मैंने अपने बारे में सब कुछ बताया और यह भी बताया कि मेरी अभी शादी नहीं हुई है और मेरे घर वाले मेरे लिए लड़की देख रहे हैं!

सोनल ने बताया कि उसकी शादी हुए अभी ६ महीने ही हुए हैं, उसके पति एक गवर्नमेंट ऑफिसर हैं, वो लोग भोपाल के रहने वाले हैं और अभी २ महीने पहले ट्रान्सफर हो कर दुर्ग आये हैं ! क्योकि हमें यहाँ आये ज्यादा दिन नहीं हुए हैं इसलिए हमारी जान पहचान बहुत कम हैं. और मेरे पति पर काम का भार बहुत ज्यादा हैं इसलिए ऑफिस में बहुत समय देना पड़ता है और मैं घर में अकेली बोर होती रहती हूँ !

और इस तरह हमारी दोस्ती बढ़ती चली गई और हम लोग रोज बहुत देर तक बात करते रहते!

बातचीत का यह सिलसिला लगभग १ महीना चला ! एक दिन रोज की तरह सोनल का फ़ोन आया और वो रोने लगी।

मैं बार बार पूछता रहा कि आखिर क्या बात है आप इस तरह क्यों रो रही हो ……… और मैं कोई मदद कर सकता हूँ क्या?

पर वो कुछ बताने को तैयार नहीं थी। फिर मैंने कहा,” अगर आपने अब कुछ नहीं बताया तो मैं आपके घर आ जाऊंगा फिर आप मुझे कुछ मत कहना !”

अब वो बोली- कोई बात नहीं ! मेरे पति को हमेशा काम ही लगा रहता है ! आज उन्होंने मुझे पार्टी में जाने के लिए तैयार रहने को कहा था और मैं पिछले २ घंटो से तैयार हो के बैठी हूँ और अभी फ़ोन करके कहते है कि मैं काम में फंस गया हूँ और मुझे घर आने में बहुत रात हो जायेगी। इसलिए अब पार्टी में नहीं जा सकते और तुम चाहो तो पास के रेस्तरां से फ़ोन से डिनर आर्डर करके मंगा लो ! तुम ही बताओ आशु क्या शादी के बाद लाइफ ऐसी होती है !

मैं थोड़ा चुप रहा फिर कहा,” सोनल जी, अगर आप चाहो तो अभी भी पार्टी हो सकती है, बस आपको हाँ कहना है अगर आप इस गरीब के साथ जाना पसंद करें तो और इसी बहाने हम एक-दूसरे को मिल भी सकते है। आखिर एक महीने से हम बात कर रहे हैं और अभी तक एक-दूसरे को देखा तक नहीं है !”

थोड़ी देर वो चुप रही फिर बोली,” ठीक है पर सिर्फ २ घंटे में वापस आना पड़ेगा !”

और उसने अपने घर का पता मुझे बताया और जल्द ही घर आने को कहा |

आखिर एक महीने की मेहनत रंग लाई और मुझे पहली बार उससे मिलने का मौका जो मिल रहा था ! मैंने झट से अपने कपड़े बदले और सोनल के घर की ओर चल पड़ा और अपने दिमाग में सोनल को आभासी तस्वीर बनाने लगा- वो ऐसी दिखती होगी या फिर कैसी होगी ! इसी उधेड़बुन में उसकी कालोनी तक पहुँच गया और उसके घर पहुँचने में कोई दिक्कत नहीं हुई, मैं सोनल के घर के सामने पहुँच गया !

वो एक बहुत बड़ा बंगला था, डरते हुए मैंने कॉल बेल बजाया ……. थोड़ी देर बाद एक औरत ने दरवाजा खोला। उसको देखते ही मेरी आँख फटी की फटी रह गई। वो बहुत गोरी थी और काले लम्बे बाल, तीखी नाक, भूरी आँख ऐसा लग रहा था कि मानो मैं किसी ड्रीम-गर्ल को देख रहा हूँ।

“जी क्या आप आशु हैं?” उसने पूछा !

जी ! मैं ही आशु हूँ !

आइये ! कुछ देर बैठकर चलते हैं ! उसने कहा।

“जी नहीं फिर कभी घर में बैठेंगे, अभी तो चलते है, नहीं तो लेट हो जायेगा।”

ठीक है ! जैसा आप चाहो, चलिए !

मैंने पहले से ही सोच लिया था कि एक अच्छे होटल में ही ले जाऊंगा जिससे मेरा पहला इम्प्रेशन ठीक बने, अब वो मेरी बाइक पर मेरे साथ बैठी थी !

सोनल जी फ्रेंड की तरह बैठिये ! न कि भाई-बहन की तरह ! आप इस तरह दूर दूर बैठी हैं, मैंने कहा!

उसने थोड़ा शरमाते हुए अपना एक हाथ मेरे जांघ पर रखा ! मेरा लंड कोबरा सांप की तरह फनफनाते हुए खड़ा हो गया और मैंने सोच लिया कि कुछ भी हो जाये इसे बिना चोदे नहीं छोड़ना है।

फिर मैंने उसके वक्ष छूने के लिए झटके से ब्रेक मारा और वो मुझसे टकराई।

” आराम से चलाइए ना !” सोनल ने कहा।

मैं तो चाहता ही था कि वो जितना देर तक हो सके मेरे साथ बाइक पर बैठे !

आखिर हम शहर के सबसे अच्छे होटल में पहुंच गए।

बोलिये मैडम, आप क्या खाना पसंद करेंगी, वेज या नॉन वेज ! मैंने कहा।

आप ले कर आये हैं तो जो आपको पसंद है वो ही खिला दीजिये !

फिर मैंने खाने का आर्डर दिया और खाना आने तक हम आम बातें करते रहे। इसी बीच मेरा पैर उसके पैरों से टकराया और मैंने सॉरी कहा, वो सिर्फ मुस्कुराई…… कहा कुछ नहीं।

अब मुझे अहसास हो गया था कि आगे रास्ता साफ़ है, बस धैर्य की जरुरत है।

“आज आपने बहुत ही टेस्टी खाना खिलाया है, मैं भी बाद में आपको ट्रीट दूंगी अपने हाथों से बनाकर !

“कब दे रही है अभी बताइए इसी बहाने आपका साथ मिल जायेगा।”

अगले रविवार को मेरे घर में ! उसने कहा।

लेकिन आपके पति? रविवार को तो वो घर पर ही होंगे?

वो तो शनिवार को ओफ्फिशिअल टूर पर जबलपुर जा रहे हैं ! उसने कहा।

तो फिर शनिवार शाम को ही रखिये न डिनर ! मैंने कहा।

मैं आपको फ़ोन करके बताती हूँ !

ओ के अब चलें !