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पापा और मम्मी की चुदाई

प्रेषक : देव …

हैल्लो दोस्तों.. मेरा नाम देव है और में उत्तरप्रदेश के इलाहाबाद शहर का रहने वाला हूँ। दोस्तों मैंने AntarVasnaSex.Net पर कई सेक्सी कहानियाँ पढ़ी है और में वैसी ही अपनी एक सच्ची कहानी आप सभी को सुनाने जा रहा हूँ और में उम्मीद करता हूँ कि यह कहानी आपको बहुत अच्छी लगेगी। यह कहानी मेरी माँ की चुदाई की है और अब में थोड़ा अपना और अपने परिवार का परिचय भी आप सभी से करा देता हूँ। दोस्तों में एक अच्छे स्वभाव का लड़का हूँ और में एक इंजिनियरिंग स्टूडेंट भी हूँ और में अपने परिवार से थोड़ा दूर रहकर अपनी पढ़ाई कर रहा हूँ और जब भी में अपने घर पर जाता हूँ तो अपनी माँ को देखकर मुठ मारता हूँ और बहुत खुश होता हूँ लेकिन जब में अपने हॉस्टल में रहता हूँ तो मेरा यहाँ पर सिर्फ एक ही सहारा होता है.. AntarVasnaSex.Net जिस पर में सेक्सी आंटी की कहानियाँ बहुत रूचि से पढ़ता हूँ और बहुत मज़े करता हूँ।

मेरा परिवार उत्तरप्रदेश के इलाहाबाद शहर में रहता है। मेरी माँ एक बहुत अच्छी ग्रहणी है और मेरे पापा एक बहुत बड़े बिजनेस मेन और वो अपने कामों में हमेशा व्यस्त रहते है। मेरी उम्र 20 साल है और मेरी माँ की उम्र 39 साल है और मेरे पापा की उम्र 45 साल है। दोस्तों में एक जरूरी बात आप सभी को बताना चाहता हूँ कि मेरी माँ की उम्र 39 साल जरुर है लेकिन वो अब भी दिखने में एकदम सेक्सी लगती है और मेरी माँ के बूब्स का साईज़ 36 है उनकी लम्बाई 5.6 है और वो एकदम मस्त पटाखा लगती है। वो एक ऐसी औरत है.. जिसे देखकर सबका दिल उसे चोदने का होता है और उनका नाम ज्योति है और दोस्तों ज्योति का सबसे सेक्सी शरीर का हिस्सा उसकी गांड है और उसकी गांड को एक बार देखने के बाद तो कोई भी बिना मुठ मारे नहीं रह सकता। हमारी कॉलोनी के सभी लड़के उन्हे पीछे से हमेशा घूरते है।

दोस्तों अब में आपका ज्यादा समय खराब ना करते हुए अपनी कहानी शुरू करता हूँ। दोस्तों एक कम उम्र के लड़के की तरह में भी 11वीं के बाद से ही लड़कियों से ज़्यादा शादीशुदा औरतों में ज्यादा रूचि लेने लगा था और में अपने पड़ोस में और अपने रिश्तेदारों की औरतों, आंटियों और दूसरी औरतों के बूब्स और गांड पर नजरे रखने लगा था। दोस्तों वैसे मुझे मेरी मामी बहुत सेक्सी लगती थी और एक बार में गलती से उनके बूब्स भी देख चुका हूँ लेकिन उन्होंने मुझसे कुछ भी नहीं कहा.. क्योंकि उनकी अभी कुछ समय पहले ही शादी हुई है और वैसे भी वो यह बात जानती है कि यह एक घटना थी और फिर वो एक नई नवेली दुल्हन की तरह हर रोज बहुत सजधज कर निकला करती थी और साथ में बहुत सारा मेकअप, चूड़ियाँ, बिंदी और हमेशा मुझे उनकी गांड देखने पर मजबूर करती थी और वो बहुत सेक्सी लगती थी। तो उस दिन के बाद से मैंने सिर्फ़ अपनी माँ को देखना शुरू किया.. क्योंकि मुझे उनके बराबर में कोई भी नहीं दिखती थी और में हमेशा उनके नाम की रोज मुठ मारा करता था और जब भी वो टावल पहन कर नहाने के बाद बाथरूम से बेडरूम तक जाती थी। दोस्तों में उनको इस हालत में देखकर पागल सा हो जाता था और मेरा लंड एकदम तनकर खड़ा हो जाता था। फिर मुझे जब भी सही मौका मिलता तो में माँ के पास जाकर लेट जाता था और वो भी मुझे एक माँ की तरह गले लगा लेती थी और जब भी वो अकेली दोपहर में सोती थी तो में चुपके से उनके पास जाकर उनकी गांड और बूब्स पर हाथ रख देता था और घंटो तक उनके जिस्म के हर एक हिस्से का अहसास लेता रहता था और कभी कभी तो में उनके पास में लेटकर मुठ भी मारता था लेकिन उनको पता नहीं चलता था.. क्योंकि मेरी माँ बहुत गहरी नींद में सोती है लेकिन अब मेरा मन ज्योति को चोदने का होने लगा था और अब में अपनी हवस को कंट्रोल नहीं कर पा रहा था लेकिन मेरे पास कोई और तरीका भी नहीं था उसे अपनी समस्या को बताकर सेक्स करने का? वैसे वो सेक्स करने के लिए एक बहुत अच्छी औरत थी। फिर जब में लास्ट गर्मी की छुट्टियों में अपने कॉलेज से घर गया.. तब मेरी किस्मत खुल गई और मुझे एक बहुत अच्छा मौका मिला। हमारे घर पर कुछ मेहमान आए हुए थे और इसलिए मुझे अपना रूम मेहमानों को देना पड़ा और मुझे खुद को माँ और पापा के साथ उनके बेडरूम में सोना पड़ा।

फिर पहली रात तो सब कुछ ठीक ठाक था लेकिन दूसरी रात कुछ ऐसा हुआ.. जो मैंने कभी सपने में भी नहीं सोचा था। दोस्तों उस रात में बहुत गहरी नींद में सोया हुआ था लेकिन करीब रात के एक बजे बेड ज़ोर ज़ोर से हिलने और मुझे माँ की मोनिंग करने की आवाजे सुनाई देने से मेरी नींद खुली और में बहुत चकित था कि मेरे माँ, बाप इतने पागल भी हो सकते है कि अपने 20 साल के बेटे को पास में सुलाकर चुदाई कर रहे है लेकिन शायद मेरी माँ थी ही इतनी सेक्सी कि पापा इतने सालों बाद भी माँ को चोदे बिना नहीं रह सकते थे और वो उनके जिस्म के आदी हो चुके थे। फिर मैंने धीरे धीरे अपना चेहरा मम्मी, पापा की तरफ घुमाया.. उस समय कमरे में एक छोटा सा बल्ब जल रहा था लेकिन फिर भी उसकी रोशनी में मुझे उनके नंगे बदन साफ साफ दिख रहे थे और मैंने धीरे से अपनी आखों को खोलकर देखा कि माँ की सलवार और पेंटी उनको घुटनो तक उठी हुई है और उनका कुर्ता बूब्स के ऊपर तक उठा हुआ है। मेरे पापा मेरी माँ के ऊपर चड़े हुए है और उनकी भी अंडरवियर नीचे घुटनो पर थी और उनका लंड मेरी माँ की चूत में था। दोस्तों ये कहानी आप AntarVasnaSex.Net पर पड़ रहे है।

दोस्तों शायद यह मेरी लाईफ का अब तक का सबसे अच्छा सीन था.. मेरी माँ की चूत पर थोड़े थोड़े बाल थे और पापा अपना लंड धीरे धीरे अंदर बाहर कर रहे थे.. उन्होंने अपने दोनों हाथ को फ्री कर रखा था और अपने दोनों हाथों से माँ के बूब्स को दबा रहे थे और बीच बीच में बूब्स को चूस भी रहे थे और मेरी माँ अपने दोनों हाथों से उनकी जांघो को पकड़कर लंड के मज़े ले रही थी और मोन कर रही थी और मुझे वो दोनों बहुत जोश में लग रहे थे.. क्योंकि ऊपर से पापा लंड को धक्का देते और नीचे से मेरी माँ अपनी चूत को धक्का देकर उनके लंड को बराबर जवाब दे रही थी। फिर कुछ 4 से 5 मिनट के बाद पापा का वीर्य भी निकल गया और पापा ने अपने धक्के धीरे कर दिए और जब पूरा वीर्य उनकी चूत में चला गया तो लंड अपने आप ही छोटा होकर बाहर आने लगा और पापा उनके पास में लेट गये। माँ उस वक़्त तक ऐसी ही आधी नंगी लेटी हुई थी लेकिन मुझे यह पता नहीं चला कि मेरी माँ की चूत ने पानी छोड़ा या नहीं लेकिन वो मुझे देखने पर पूरी तरह से संतुष्ट लग रही थी। तभी एकदम से माँ मेरी तरफ घूमी और चेक करने लगी कि कहीं में जाग तो नहीं गया और उसने मुझे उनकी चूत की तरफ घूरते हुए पकड़ लिया और फिर वो जल्दी से अपने कपड़े सही करती है और आँखे बंद करके लेटी रही।

दोस्तों में बहुत डर गया था और मुझे लगा कि कल सुबह मेरी शामत है लेकिन तभी मुझे लगा कि माँ मुझसे नाराज़ होने की जगह खुद मुझसे शर्मिंदा है इसलिए वो कुछ बोले बिना ही सो गयी। फिर माँ तो सो गयी लेकिन मुझे नींद कैसे आ सकती थी.. क्योंकि दोस्तों कुछ देर पहले मैंने अपनी सपनों की रानी को चुदते हुए देखा है और वो नजारा अब बार बार मेरी आखों के सामने आ रहा था। फिर में माँ की तरफ लगातार देखता रहा और मुझे विश्वास हो गया कि वो सो चुकी है लेकिन जल्दबाजी में उनकी सलवार पूरी तरह से टाईट नहीं हुई थी और मुझे उनकी पेंटी साफ साफ नजर आ रही थी और यह मेरे लिए एक बहुत अच्छा मौका था और मैंने धीरे से सही मौका देखकर अपनी उंगलियाँ उनकी सलवार के अंदर घुसा दी और धीरे से पेंटी की इलास्टिक को थोड़ा सा हटाकर पेंटी में हाथ घुमाने लगा लेकिन मेरे ऐसा करने से भी मुझे कोई भी हलचल महसूस नहीं हुई और मुझे इससे थोड़ी हिम्मत मिली और में धीरे धीरे उनकी पेंटी और सलवार नीचे करने लगा और अपने हाथ को चूत तक ले आया। मुझे उनकी चूत एकदम मुलायम फूली हुई और साफ सुथरी.. शायद मेरे ख्याल से वो बहुत सालों से चुद रही थी इसलिए मुझे वो थोड़ी ज्यादा खुली हुई भी महसूस हुई।

फिर मैंने धीरे से अपना एक हाथ उनकी गांड के नीचे ले जाने की कोशिश की और जिन्दगी में पहली बार मैंने अपनी माँ के गोरे बदन को छुआ था। में धीरे धीरे उनकी गांड को भी सहला रहा था और में अपने दूसरे हाथ से उनकी चूत को छूने लगा लेकिन जैसे ही मैंने उनकी चूत को छुआ कि माँ ने चादर से अपने आप को ढक लिया और दूसरी तरफ मुहं कर लिया लेकिन मैंने जोश में आकर उनकी नंगी गांड से चादर को थोड़ा सा उठाकर उनकी टाईट गांड और चूत को महसूस करने लगा और फिर कुछ देर के बाद मैंने माँ की गांड को देखते हुए एक बार मुठ मार ली और मेरे उस दिन मुठ मारने के बाद जो मुझे आराम मिला.. वैसा अहसास मुझे पहले कभी नहीं हुआ था। फिर सुबह में बहुत लेट उठा और जब माँ से मिला तो उनकी आँखो में शरम थी ना कि मेरे लिए गुस्सा.. उनका शर्मिंदा होना और थोड़ा पुराने ख़याल का होना मेरे लिए फायदेमंद निकला। वो इन सब कामों में अपनी ग़लती मान रही थी और माँ की इसी सोच से मैंने उन्हे फंसाने का फायदा उठाया और बाद में मैंने उन्हे अपने साथ सेक्स करने को भी मजबूर कर लिया और एक दिन मैंने उन्हें चोद भी दिया। अब वो बड़े आराम से मुझसे चुदवाती है ।।

धन्यवाद …

4 comments

  1. yar tum apni ma ko randi bana diya

  2. Bhut maza aya yaro land or boor pe to masti KA jam hi are koi to mujh ko mile jiski boor chod. Saku hi ri pyari pyari boor mil jao to thankyou bolu

  3. Eyes do harm
    ​*काँटों* का तो नाम ही

    *बदनाम* है…
    *चुभती* तो *निगाहें* भी है…

    और…..
    *काटती* तो *जुबान* भी