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पहला सेक्स का अनुभव – Part 1

हेलो दोस्तों मेरा नाम स्नेहा है और मेरी उमरा 20 साल है. चाचा का नाम राजाइंडर उमरा 50 और मा का नाम लक्ष्मी. हम मुंबई में रहते थे. ये कहानी तब की है जब मेरी मा का यूटरस हटाने का ऑपरेशन हुआ था. डॉक्टर की लापरवाही से मा का सारा शरीर परलयज़ेड हो गया था.चाचा बहुत रोए थे मा को इस हालत में देख के. उन्होने डॉक्टर पर केस भी किया और कोर्ट से हम जीत भी गये. मा को बहुत डॉक्तोरो से दिखाया मगर मा का हालत नही सुधरा. हमने उनके लिए एक मैड रख दी जो उनके सारे काम कराती थी. बेड पर ही बैठे बैठे वो सस्यू पॉटी कराती थी. मैड ज़्यादा काम कराती थी. कभी कभी चाचा या मुझे भी सॉफ करना पड़ता था.

चाचा का पोज़िशन सबसे खराब रहता. उन्हे ऑफीस भी देखना पड़ता था और घर भी. मा भी चाचा के साथ रोटी थी. सच काहु तो चाचा का सेक्स लाइफ भी ख़त्म हो गया क्यूकी डॉक्टर ने माना किया था की कोई भी प्रेशर नही पड़ना चाहिए कमर पर वरना प्राण जा सकता ही. वैसे भी मा को कमर के नीचे कोई एहसास नही रहता था. फिर दिन बीत ते गये.

मैं बड़ी होती गयी. चाचा मुझे अक्सर आपने बदन से लगा के शाबासी देते थे. पहले मुझे अच्छा नही लगता था मगर धीरे धीरे मैं भी एंजाय करने लगी. चाचा मुझे प्यार करने के बहाने आपने छाती से लगते और मेरा नया नया चुचि दबा देते. वो दिखावा तो यही करते थे के जैसे वो मुझे प्यार कर रहे हो पर मैं जानती थी की वो उनकी सेक्स की फ्रस्ट्रेशन है. मैं भी जवान हो रही थी तो इतना तो समझ मुझमे आ ही रही थी.

कभी मेरे पीछे खड़े हो कर आपना खड़ा लंड मेरे चूतड़ से सतने लगते. कभी मेरे झुकने पर मेरा छाती देखने लगते. कभी मुझे ज़ोर से भींच लेते, जिस से मेरी कश्मीरी आपल जैसी कड़ी चुचिया चाचा के सिने से छिपकती. ऐसा करने से मुझे बहुत मज़ा आता, शायद चाचा को भी मज़ा आता होगा इसीलिय वो भी मुझे अक्सर ज़ोर से भिच लेते और मैं कसमसा कर रह जाती. मगर उस उमर में जब चुचि नया नया हो रहा हो तब कोई उसे छुए या दबाए तो कितना दर्द जोता है ये एक लड़की ही बता सकती है. वेसे मुझे उसे दर्द के साथ साथ माझा भी आता था जो की ईटन आजीब और मधुर था की मैं बता नही सकती.

कभी कभी मैने ये भी महसूस किया की चाचा मुझे नहाते वक़्त खिड़की से देखने की कोशिश कर रहे हो, मगर मैं कभी उन्हे ऐसा करते पकड़ नही पाई. चाचा जब ये हरक़त करते तो मुझे पता नही क्या हो जाता था. मैं चाह कर भी उन्हे माना नही कर पाती थी मगर बाद में मुझे खुद पर और चाचा पर बहुत गुस्सा आता था. अब ये सारी हरकते मुझे नागवार गुजर रही थी. पर साथ ही साथ मुझे इसमे इक अजीब सा आनंद भी आता था जो की मैं बयान नही कर सकती.

फिर मैने एक दिन मा से सब कह दिया, “मा चाचा मुझे बहुत गंदे तरीके से छूटे हैं. मुझे अच्छा नही लगता.” वैसे मुझे अच्छा लगता था. मा ने कहा, “बेटी उनसे नफ़रात ना कर. देख वो हमारे लिए इतना कर रहे है. अगर उन्होने दूसरी शादी कर ली तो तुम कहा रहोगी और मैं कहा रहूंगी. उनका मन भी तो बेचैन होता होगा. मगर मैं उनकी इच्छा पूरी नही कर सकती. जल्दी से तेरी शादी हो जाए और टू ससुराल चली जाए बस यही दुआ है. मगर बेटी तू कुछ ऐसा ना कारिओ की बदनामी हो.”

इसका असर ये हुआ की मैं भी चुप चुप कर चाचा के टच का मज़ा लेने लगी बुत इनोसेंट्ली.वो मुझे आपने गोद में बैठते और मुझे उनका खड़ा लंड जो मेरी गान्ड में चुभता मुझे अच्छा लगता. वो बात करते करते मेरी छ्चाटी च्छू देते थे. मेरा बदन गंगना जाता था. मैं भी कभी कभी उनका लंड दबा देती जैसे ग़लती से छुआ हो. चाचा कभी टाय्लेट से बिना टवल के नंगे निकल जाते जिसे मैं देख के भाग जाती, मगर उनका खड़ा लंड मुझे अक्सर याद आता रहता. जब मैं रात को सोने के लिए लेट जाती तो मुझे देर रात तक नींद नही आती और सपने मे भी मुझे अक्सर चाचा का कला और मोटा मोटा लंड ही दिखाए देता रहता, और मुझे ऐसे मीठे मीठे सपनो का आनंद आता था.

वैसे मोम तो अक्सर बेड पर ही पड़ी रहती जिसका फ़ायदा हम बाप बेटी जाम कर उठा रहे थे. वक्त गुज़राता गया और मैं अतरवा साल मे कदम रखने वाली थी और उस दिन मेरा 18 त जानम दिन था, और उस दिन ग्रांड पार्टी का प्रॉमिस किया था चाचा ने. मैने उन्हे माना कर दिया की मेरी मा तो बीमार पड़ी है इस लिए मैं कोई ग्रांड पार्टी नही करूँगी, मा को अजीब लगेगा ओर बुरा भी तो चाचा ने कहा की चलो कोई बात नही हम दोनो ही मिल कर मेरा जानम दिन माना लेंगे, चाचा की इस दो आराती बात सुन कर मैं कुछ दर भी गयी और मेरे दिल मे कुछ सुरसुरी सी भी होने लगी. मेरा मन एक दम चाचा के लंड की तरफ चला गया. पता नही चाचा के मन मे क्या है और वो कैसे मेरा जानम दिन मानना चाहते थे. पर उस दिन ऐसी घटना हुई जिसने मेरा जीवन ही बदल दिया.

मई चाचा का बेसब्री से इंतज़ार कर रही थी,ठीक 8पीयेम को दूर बेल बाजी. मैं दौर कर दरवाजा खोली हमेशा की तरह चाचा से लिपट गई, चाचा ने भी मुझे चिपका लिया.चाचा से लिपट कर नखरा कर बोली,”आज इतनी देर क्यू करदी, जाइए मैं आप से नही बोलती,”,चाचा मेरी चूटर पर थपकी मार कर बोले,,”अरेरेरे मेरी रानी बीत्या तो नाराज़ हो गई,अछा लो अभी नाराज़गी दूर किय देता हू,”

चाचा के एक हाथ मे जो पॉली बाग था मुझे दिखा कर बोले “देखो तो क्या लाया हू,”,मई खुश होकर चाचा को चूम ली और ज़ोर से लिपट कर बोली,”ओह चाचा आप कितने अच्छे है,” मैं बाग खोलने लगी तो चाचा बोले,,”अबी नही खोलो, इसमे तेरा ड्रेस है इसे पहन कर जानम दिन का केक काटना, ये तेरा जनमदिन का गिफ्ट है,और हाँ मोम को मत बठाना के मैं लाया हू. तुम रोज़ रोज़ 18 साल की तो नही होने वाली.” मैं बोली “ओह चाचा केवल ड्रेस?मेरा खिलोना नही ले,” चाचा गहरी नॅज़ारो से मुझे देखा और चूटर को आपने तरफ दबा कर सटाया मेरी जाँघ चाचा के जाँघो से चिपक गई हमेशा की तरह. चाचा के लंड मे भी शायद सुरसुरी होने लगी थी. उनका लंड भी श्ययाद खड़ा हो रहा था, और वो मुझे आपनी चुत के पास चुभने लगा था. यह इक अजीब सा एहसास था जो मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था , की मैं उसे ब्यान नही कर सकती. मेरा मन कर रहा था की मैं हमेशा ही इसी तरहा चाचा से लिपट कर खरी रहूं और चाचा का मोटा मोटा लंड मेरी चुत पर चुभता और ठोकर मराता रहे.

मेरी चुत चाचा के लंड से जा टकराई,आँखो मे आँखे डाल चाचा धीरे से बोले,,”नीता कुछ ही देर बाद तू 18 की हो जाएगी तू तो अब जवान हो गई,गुडिओ से तो बचे खेला करते है,” मैं तुनाक कर बोली,,”उूुउऊँ तो मैं किस से खेलूँगी,”,चाचा गांड पर थपकी मार कर बोले,”तू चिंता क्यू कराती है मैं हू ना. बचे किसी और तारहे के खिलोनो से खेलते है और जवान लोग कुछ और तरह के खिलोनो से खेलते है, आज तू जवान हो गयी हर , इस लिए अब तू बचों की तरहा खिलोनो से खलने की बाते ना कर. मैं तुझे जल्दी हे वो खिलोना दूँगा जिस से जवान लड़कियाँ खेलती हैं. यह सुन कर मेरी चुत मे कुछ कुछ होने लगा, मेरे को लगा की जो बातें मेरी सेहेलीयन किया कराती हैं , शायद जल्दी ही मैं भी वो सब जान जौुईंगी. चाचा ने मेरे चूटर की दरार में उंगली चेलते हुए कहा “चलो देर हो रही है तुम जल्दी से खाना बनाओ 8 बाज़ गये है , और हम लोगो को 10 बज़े केक काटना है.”मई किचन मे चली गई,10म्न्ट बाद चाचा किचन मे आय और मेरे पीछे सात कर खड़े होगे.

मई थोड़ा झुक कर सब्ज़ी काट रही थी मेरा गांड उभरा हुवा था,चाचा का लंड गांड के दरार पर महसूस कर लहरा गई. ये पहली बार नही था ऐसा अक्सर होता था,जब मुझे लगता के चाचा किचन में आ रहे है तो मैं जान बुझ कर पहले से ही झुक जाती ताकि चाचा को आपना लंड मेरी गांड पर सतने मे आसानी हो मुझे भी चाचा का लंड जो रोटी बेलने वाला बेलन जैसा लंबा मोटा था,बहुत मज़ा देता. हाँ तो चाचा लंड को मेरी गांड मे सटा कर खड़े हो गये ओर धीरे धीरे से मेरी गान्ड की दरार मे उसे धक्का लगाने लगे. मेरा मन लहरा रहा था. मन कराता था की मैं ऐसे ही खड़ी रहूं ओर आपनी गान्ड पर चाचा के मोटे लंड को महसूस कराती रहू. पर मुझे खाना भी तो बनाना था , उधर मा भी भूखी लेती थी उसे भी खाना देना था, इस लिए मैं देर तक तो ऐसे ही जुक कर खड़ी नही रह सकती थी, अब तो मैं सब्ज़ी भी काट चुकी थी तो जुक कर खड़े रहने का कोई बहाना भी नही था. मैं मजबूरी मे इक ठंडी सास भराते हुए , बड़े ही बे मन से सीधी हुई ओर स्टोव पर कुक्कर रखने लगी. सीधी खड़ी होने से मेरी गान्ड पर से चाचा का लंड भी हट चक्का था. चाचा का माझा भी हट गया तो वो भी धीरे से लंबी साँस से कर पीछे को हट गये ओर मेरे गालों पर आपने हाथ फेराते हुए बोले “मई बात रूम जा रहा हू,तुम खाना लगा देना,”

मई ने देखा चाचा के हाथ मे टवल साहबुन के एलवा एक छोटा सा डब्बा भी था. “आराम से बनाओ खाना बात रूम मे थोड़ा लाते होगा,” कह कर चाचा चले गई, 1/2 घंटा के बाद चाचा बाहर आय,और बोले “खाना बन गया हो तो आपनी मा को प्लेट मे डाल कर उसके रूम मे ही दे दो ओर उसे सुला दो . फिर जाओ जल्दी से नहा धो कर नया वाला ड्रेस पहन लो,” मैं ने मा को खाना दे उन्हें सो जाने को कह दिया ओर फिर अंदर जा कर पहले बाग खोला,जिसे देख कर लाज भी आई और चाचा पर प्यार भी,उसमे मिनी स्कर्ट और शर्ट के एलवा एक सदा रंग का पेंटी भी था. मैं शवर के पास गई तो उसी डब्बे पर नज़र गई. उत्सुकता वॉश उठा कर देखा, जब पता चला तो मैं सनसना गई. वो बाल साफ करने का करीम था, जो आधा खाली था. ये सोच कर सनसना गई के चाचा ने आपना झांट चिकना कर लिया है. मेरी चुत मे फिर से सनसनाहट होने लगी. शायद चाचा के मन मे आज कुछ ऊऊर ही है जो आज इट टाइम , रात को उन्होने आपनी झाँट सॉफ की है ओर लंड को चिकना बनाया है. क्या यह सब कुछ मेरे लिए है? आज मेरा 18 जानम दिन भी , तो क्या आज चाचा कुछ स्पेशल दंग से इसे मानना चाहते है? . यह सब कुछ सोच सोच कर मेरी चुत गीली होने लगी. ऐसा लग रहा था की जैसे मेरी चुत मे कोई छींटी चल रही हो. अंजाने ही मेरा हाथ मेरी सलवार मे चला गया ओर मैं आपनी चुत पर उसे चलाने लगी. चुत मे इतना पानी आ रहा था की मेरी सारी उंगली गीली हो गयी. कुछ देर के बाढ़ मैने आपना हाथ आपने सलवार मे से निकाला. क्योंकि मेरे को नहाने मे डियर हो रही थी, ऊऊर ज़यादा डियर होने से चाचा को भी शक हो जाता की मैं बाथरूम मे इतनी डियर तक क्या कर रही हूँ.

वाईसे अब मैं समझी के चाचा ने क्यू कहा था के देर होगी. मेरी चुत पर भी घने बाल उगे थे क्यू की कभी साफ नही किया था. सोचा क्यू ना मैं भी साफ करलू वाईसे भी आज मेरा 18वा जानम दिन है, और चाचा कह रहे थे की अब मैं जवान हो गयी हूँ. जब बाल साफ हो गया तो मेरी चुत खिल उठी. चुत पूरा पवरोती की तरह फूला हुवा था जो पहले बालो मे छुपा होने के कारण दिखता नही था. मैं नहा कर कपड़ा पहन ने लगी तो पाया की पेंटी बहुत छोटी थी यानी गांड का उपर का कुछ भाग खुला रह गया. पेंटी छोटी होने की वजह से वो आयेज से भी मेरी चुत पर कस गये थी.

शायद चाचा पहली बार लाए थे, इसलिय साइज़ मालूम नही था. उसपर मिनी स्कर्ट डाला और फिर शर्ट पहन लिया. शर्ट मे प्रेस बटन था पहन ने मे आसानी हुई. तभी चाचा की आवाज़ सुनाई दी,”नीता कितना देर लगा दिया,” मैं अंदर से ही बोली “हो गया चाचा आती हू,” तो चाचा बोले “ठीक है, तुम उपर वाले रूम मे चली जाना तुम्हारा केक वही रखा है. मैं तेरी मम्मी को नींद का दवा खिला कर आता हू,” यह सुन कर मेरे मन मे कुछ कुछ होने लगा की चाचा मेरा जानम दिन उपर कमरे मे मानना चाहते है और उस मे मेरी मा को शामिल ना कर के, पहले उसे सुला देना चाहते है. शायद आज चाचा मेरे जनमदिन को कुछ इस दंग से मानना चाहते थे की इस मे मेरी मा शामिल ना हो सके. मेरे दिल मे ज़ोर ज़ोर से कुछ गुदगुदी सी होने लगी.मई उपर चाट पर कमरे मे गई, वाहा का बल्ब ऑफ था बस एक मोमबत्ती जल रही थी.

मई समझी के इस रूम का बिजली खराब है, इसलिए चाचा ने कॅंडल जलाया होगा. रोस्नी इतना कम था के कुछ भी साफ दिखता नही था. चाचा ने सारा इंतज़ाम कर रखा था, टेबल पर 18 कॅंडल सज़ा था. तभी चाचा अंदर आए. मैने देखा, ये क्या चाचा का बदन तो नंगा था, बस एक पतला सा गमछा कमर मे लपेट रखा था. जो सामने से कुछ उठा था. मैं जान गई वो चाचा का प्यारा लंड था जिसमे हल्का तनाव आया हुवा था. चाचा की कमर पर सिर्फ़ इक गमछा ही था शायद क्योंकि उस मे से मुझे चाचा के लंड की आउटलाइन या झलक दिखाई दे रही थी. लगता थे की चाचा ने आपना अंदरवेर पहले से हे उतार दिया था. चाचा के लंड मे उभार आ रहा था जिस की यज़ाह से गँचे का कपड़ा उपर की ओर उठ रहा था. मैं चाचा के लंड को देख कर मदहोश नन लगी.

चाचा मुझे अज़ीब नज़र से देखा पास आकर बोले “ऊओ गोद मेरी नीता तो दुनिया की सब से सुंदर लड़की है.” मैं शर्मा कर चाचा से लिपट कर बोली,”मेरे चाचा भी तो सब से अच्छे है,” चाचा का हाथ जहा जाना था जा चुका था. चाचा आपने हाथ से मेरा कड़क चुचि दबाने लगे. मेरे मुँह से सिसकारी निकल गयी जिसे चाचा ने भी सुन लिया. वो मन ही मन खुश हो गये क्यूंकी उन्हे ये अहसास हो गया की मैं भी अब उत्तेजित हो जाती हू. मगर इस बार तो चाचा हद से एज बढ़ गये. चाचा आपना हाथ मिनी स्कर्ट के नीचे से अंदर कर पेंटी पर ले आए.

जैसे हे उनका हाथ पेंटी के उपर खुला गांड पर गया मैं सिहर उठी जिससे चाचा ने भी महसूस किया. चाचा का लंड में, जो मेरी चुत पर सटा था, हल्का सा हरकत हुवा. चाचा ने पेंटी के एलास्टिक को उपर करने की कोशिश काइया, और बोले, “आरीई ये तो छोटी प़ड़ गई. नीता तुमने बताया क्यू नही की ये छोटी है. कोई बात नही उतार दो कल चेंज कर देंगे,”

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One comment

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