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मस्त भाभी की मस्त चूत की चुदाई

हैलो दोस्तो.. मैं अन्तर्वासना का एक नियमित पाठक हूँ। मैंने यहाँ बहुत सी कहानियाँ पढ़ी हैं और मुठ भी मारी है.. तो सोचा कि क्यों न अपनी कहानी भी लिख कर आप सभी को मजा दूँ।

यह कहानी मेरी और मेरे ही मकान में किराए पर रहने वाली एक भाभी की है, मेरा घर 2 मंज़िल का है.. और छत पर 2 कमरे अतिरिक्त बने हुए हैं.. जिसमें मैं स्टडी और रीडिंग करने के बहाने रहता हूँ। मेरी उम्र 22 साल है। भाभी की उम्र करीब 28 साल होगी।
भाभी का नाम भावना है और वो मेरे मकान के नीचे की मंज़िल पर किराए पर रहती हैं। भाभी की शादी के कई साल हो गए थे.. लेकिन फिर भी वो दिखने में एकदम अभी माल लगती थीं। उनकी हाइट करीब 5’4″ थी। वे बहुत गोरी नहीं थीं.. लेकिन मस्त छवि लिए हुए एक मस्त अल्हड़ हवा का झोंका सा थीं।

भावना भाभी रोज सुबह छत पर नाइटी पहन कर अपने कपड़े सुखाने आती हैं.. मैं हमेशा उसको ही देखता रहता हूँ। मुझे रोज सुबह उठ कर भावना भाभी का सेक्सी फिगर देख कर मुठ मारनी पड़ती थी।

वैसे भावना भाभी का फिगर करीब 34-30-36 होगा। मैं रोज सोचता था कि कुछ करूँ कि मछली मेरे जाल में फंस जाए.. लेकिन कुछ कर नहीं पा रहा था।
भाभी ने कई बार मुझे उसको लाइन मारते हुए और उसकी चूचियों को देखते हुए पकड़ लिया था.. लेकिन वो क्या कर सकती थी.. चुपचाप शर्मा कर चली जाती थी।

एक दिन भावना भाभी अपने कपड़े लेने के लिए दोपहर को छत पर आई और उस वक्त वो बहुत खुश दिख रही थी।

वो कपड़े उठाकर जा ही रही थी कि तभी उसके हाथ में से उसकी लाल रंग की ब्रा नीचे गिर गई और वो मुझे देखती हुई चली गई।

मैंने देखा कि भाभी ने जानबूझ कर ब्रा गिराई थी। मैं गया.. ब्रा उठाई और भाभी को बोला- भाभी खजाना भूल गई आप..
भाभी भी शरमाने का नाटक करते हुए बोली- लाओ.. मैंने तो तेरे लिए ख़ज़ाना छोड़ा था.. लेकिन तुझे नहीं चाहिए.. तो वापिस लाओ..।
वो ऐसा बोल कर चली गई।

मुझे अब पता चल गया था कि भाभी की चूत में मेरे लौड़े के लिए खुजली हो रही है।
फिर कई दिन निकल गए.. मैं कुछ नहीं कर पाया।

एक दिन बारिश आ रही थी.. तब भाभी कपड़े लेने आईं.. तो छत पर उसका पैर फिसल गया।
इससे उसके पैर में मोच आ गई और वो वहीं पर गिर गई और ज़ोर से चिल्लाई- ऊऊयय्यी माँ..!

मैं कमरे में ही था.. मैंने बाहर जाकर देखा तो भाभी गिरी पड़ी थी।
मैंने भाभी को उठाया और कहा- अरे आपको तो मोच आ गई है.. चलो मेरे कमरे में चल कर थोड़ा आराम कर लो।
भाभी बोली- ठीक है.. लेकिन मैं चल नहीं पा रही हूँ।
मैंने कहा- ठीक है.. मैं आपको अपने कमरे में ले चलता हूँ..

मैंने भाभी को सहारा दिया और उसको अपने कमरे में लाकर बेड पर लेटा दिया।

भाभी को कमरे में लाते वक़्त मैंने जानबूझ कर उसकी चूचियों पर हाथ लगा दिया था और एक बार तो हल्के से दबा भी दिया था.. लेकिन वो कुछ नहीं बोली थी।
भाभी- अमन लगता है.. तुमको मेरे पैर पर मालिश करनी पड़ेगी।

मैं- हाँ भाभी.. कोई बात नहीं.. मैं मालिश कर दूँगा।

भाभी- तू मेरा बहुत ख़याल रखता है.. ठीक है.. अब नीचे जा.. मेरे घर में मेरे बेडरूम में टेबल पर मालिश करने का आयल पड़ा होगा.. वो लेकर आ.. और सुन.. मेरे घर पर कोई नहीं है.. तो घर को लॉक करते आना.. क्योंकि विकास (उसका लड़का) भी स्कूल चला गया है।

मैं बहुत खुश होते हुए- हाँ भाभी ज़रूर..
अब मैं झपट कर नीचे गया और बेड के साइड की दराज से आयल की शीशी उठा लाया।
मैंने देखा तो उधर कन्डोम भी रखा था, वो भी मैंने साथ ले लिया।

तभी नीचे से ऊपर वापिस आते वक़्त मेरी माँ मिलीं.. वे बोलीं- मैं बाहर काम से जा रही हूँ.. एक घंटे में वापिस आऊँगी।
मैंने कहा- ओके माँ।

अब तो भावना की चूत में मेरा लंड का जाना तय हो चुका था। मैं कमरे में आया और भावना भाभी के पैर पर मालिश करने के लिए तेल हाथ में लिया।

फिर मैंने धीरे से उसकी नाइटी पैर की जगह से ऊपर की.. और मालिश करने लगा। मैं भाभी को सामने देखकर उसको स्माइल दे रहा था और वो भी बहुत लाइन दे रही थी।
यूँ ही बात करते-करते बातों-बातों में ही उसने मुझसे पूछ लिया- तेरी गर्लफ्रेंड हैं?
मैंने बता दिया- नहीं हैं..।

वो बोली- फिर तो तू बिल्कुल कोरा है.. मीन्स वर्जिन है..
मैंने कहा- भाभी कोरा नहीं, बिल्कुल सूखा हूँ..
वो भाभी हँसने लगीं और बोली- कोई बात नहीं.. मैं तुझे भीगा कर दूँगी..
और ये कह कर वो ज़ोर से हँसी।

अब भाभी की नीयत भी मेरे से कम नहीं बिगड़ी थी.. उसे भी आज मेरे लंड से चुदने की बहुत जल्दी थी।
भाभी- अमन.. मेरी कमर में भी बहुत दर्द है.. वहाँ भी मालिश कर देगा?
मैं- हाँ भाभी..क्यों नहीं..

फिर भाभी उल्टी लेट गई और उसने अपनी नाइटी ऊपर कर दी। अब भाभी मेरे सामने मेरे ही कमरे में पीछे से नंगी पड़ी थी.. यह देख कर मेरा लंड टाइट हो गया था।

मैं- आपने ब्रा क्यों नहीं पहनी?
भाभी- अरे अमन.. वो क्या है.. आज सुबह ही तेरे भाई ने चोदा था.. तो फिर मैंने तभी से कपड़े नहीं पहने और सिर्फ़ नाइटी पहन ली थी।
उन्होंने अपनी चुदास को मेरे सामने बिल्कुल ही खोल दिया था।

मैं- भाभी मज़ा आता है सेक्स में?
यह कहानी आप अन्तर्वासना डॉट कॉम पर पढ़ रहे हैं !
भाभी- अरे पगले.. ये कोई पूछने की बात है..?
मैं- हाँ.. क्यों मैंने कभी किया नहीं.. तो मुझे कैसे पता होगा?
भाभी- ओके..।

अब मैं मालिश करते-करते भाभी की चूचियों को साइड में से छूने लगा।
वो बोली- अमन क्या कर रहे हो?
मैं- भाभी मालिश कर रहा हूँ।
भाभी- तू वैसे कोरा है.. लेकिन तू चालाक बहुत है.. तूने मुझे कमरे में लाते वक़्त भी मेरे चूचियों को क्यों दबाया था?
मैं थोड़ी देर चुप रहा।

भाभी- चल अब ठीक से दबा ले..
मैं- सच में?
भाभी- हाँ.. अब तू कब तक वर्जिन रहेगा..

मैं खुश होकर भाभी की चूचियों को दबाने लगा। मुझे बहुत मज़ा आ रहा था.. वाउ.. क्या चूचे थे.. बहुत बड़े थे.. उनके चूचे मेरे हाथों में भी नहीं समा रहे थे।

भाभी- अबे साले हरामी.. मेरी चुदाई तू दरवाजा खुला छोड़ कर करेगा? कोई आ जाएगा तो? दरवाजा बंद कर..
मैं उठ कर दरवाजा बंद करने गया। उतने में भाभी अपनी नाइटी निकालने लगीं।

अब भाभी मेरे सामने सिर्फ़ पैन्टी में थी, हाय काली पैन्टी में क्या सेक्सी लग रही थी वो..

मैंने भाभी की चूचियों को चूसना शुरू किया।
भाभी- साले हरामी.. तुझे तो सब पता है कि सेक्स में क्या-क्या करना है और कैसे करना है? तुझे कैसे पता.. जब किया नहीं तो?
मैं- भाभी.. मैं रोज अन्तर्वासना पर सेक्स कहानी पढ़ता हूँ और उसमें से ही मैंने सब कुछ सीखा है।
भाभी- अच्छा.. चल.. तो मेरे जंगली कुत्ते शुरू हो जा..

अब मैं उसने निप्पलों को चूस रहा था.. भाभी के निप्पल ब्राउन कलर के थे और करीब 1 इंच के लम्बे उठे हुए निप्पल थे।
मैं बारी-बारी से दोनों निप्पलों को चूसने लगा।

भाभी ने मेरे माथे पर हाथ रखा और मस्त होकर सिसयाने लगीं- प्लीज़ चूस इसको.. चूस ले तू आज.. और तेरी जवानी की प्यास बुझा ले तू.. अमन.. आह्ह..
फिर मैंने भाभी के होंठों पर किस करना शुरू किया और ‘ऊहह..’ क्या मज़ा आ रहा था।
भाभी भी अब जंगली होती जा रही थी। वो भी मेरे होंठों को चूसने लगी।

हम दोनों ने 5-7 मिनट तक खूब चूमा-चाटी की।

भाभी- चल अब मेरी चूत को चाटने का टाइम हो गया है..
मैं- भाभी.. मैं आज तो आपकी चूत को चाट-चाट कर लाल कर दूँगा।
फिर मैंने पैन्टी निकाल दी.. और भाभी की चूत चाटने लगा।
वाउ बहुत मज़ा आ रहा था..
भाभी बोली- चल अब 69 में आ जा..

मैंने अपने सारे कपड़े निकाल दिए.. अब हम 69 की अवस्था में आ गए थे.. उसने मेरा लंड लॉलीपॉप की तरह मुँह में ले लिया।
सच में हमने एक-दूसरे को चाट-चाट कर बहुत मज़ा लिया।
भाभी- तेरा लंड इतना बड़ा कैसे?

मैं भाभी की चूत मे उंगली डालते हुए- वो क्या है ना.. भाभी.. मैं आपके नाम की मुठ रोज मारता हूँ। मैं 3 साल से तुम्हें मेरे सपने मे चोदता हूँ। तुम्हारी वजह से ही मेरा लंड आज इतना बड़ा है।
भाभी- आआआहह.. ये बात है.. ऊऊऊहह अमन.. अब अपनी भाभी को कितना तड़पाएगा?

मैं- ओके.. अब डाल देता हूँ।
मैंने कन्डोम निकाला.. भाभी को दिया- पहना दो।

भाभी- कन्डोम कहाँ से लाया?
मैं- भाभी आपके कमरे की दराज से..
भाभी- ओह अमन.. यू आर सो केयरिंग..

भाभी ने मेरे लंड पर कन्डोम पहना दिया.. भाभी अब डॉगी स्टाइल में थी। मैंने पीछे से लंड डाला.. एक ही झटके में पूरा लंड अन्दर..

भाभी- आआअहह अमन… तेरा लंड तो बहुत दर्द दे रहा है..
मैं- भाभी दर्द तो होगा ही.. मेरा लंड बहुत मोटा है न इसलिए…
भाभी- चल अमन अब चोद दे.. अपनी इस रंडी भाभी को आज…
मैं- हाँ भाभी.. तू रंडी ही है.. आज तो तेरी चूत के मैं चिथड़े उड़ा दूँगा।

फिर मैं लंड अन्दर-बाहर कर के चोदने लगा, दस मिनट तक भाभी को डॉगी स्टाइल में हचक कर चोदा, फिर दूसरी स्थिति में सेक्स किया और भाभी को खूब मज़ा दिया।

उस दिन मैंने भाभी को कई बार चोदा।
उस दिन के बाद जब भी मौका मिलता है.. भाभी मेरे कमरे में आ जाती है.. और मैं भावना भाभी को खूब चोदता हूँ।

दोस्तो, कैसी लगी मेरी कहानी.. प्लीज़ कमेंट और ईमेल ज़रूर करें।

2 comments

  1. excellent