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मैडम, और कुछ लेंगी

बाद जनवरी, २००९ की है, अरे अभी का नया नया किस्सा है। मैं अपने पति के साथ उनके बिज़नेस के सिलसिले में ग्वालियर, मध्य-प्रदेश गई थी। पहले तो सोचा कि ट्रेन से चलते हैं पर बाद में इन्होंने कहा कि नहीं, घूमते-घूमते चलेंगे, रास्ते में आगरा, मथुरा भी देखते हुए जाएँगे। अतः हम दोनों अपनी गाड़ी से लुधियाना से पहले दिल्ली गए और फिर वहाँ से ग्वालियर की ओर चल दिए। सारे रास्ते हम बहुत ही मज़े करते हुए गए। जब हम आगरा में थे तो मेरे पति को फोन आ गया कि ग्वालियर वाली मीटिंग किसी वज़ह से रद्द हो गई है और अब वह मीटिंग २ दिनों के बाद यानि १४ जनवरी को मोरेना में होगी क्योंकि अधिकतर सदस्य मोरेना में थे, तो हमने सोचा चलो पहले मोरेना में ही रूकते हैं बाद में ग्वालियर सिर्फ घूमने के लिए चले जाएँगे। अतः हम मोरेना जाकर एक होटल राधिका पैलेस में रूक गए। अच्छा सा, ख़ूबसूरत होटल था। मीटिंग वाले दिन मेरे श्रीमान जी मुझे आठ बजे ही होटल में छोड़कर, शाम में आने का कहकर चले गए।
उस वक्त मैं अपने बिस्तर में लेटी हुई थी और मेरे बदन पर सिर्फ एक रेशमी नाईटी थी जिसमें मेरा बदन छुप कम और दिख ज़्यादा रहा था। खैर मेरे पति के चले जाने के बाद मैं बिस्तर पर बैठ टीवी देखती रही, फिर मैंने फोन पर चाय का ऑर्डर दिया। १० मिनटों के बाद चाय आई और जो लड़का चाय लेकर आया, मैंने देखा वो मुझे घूर रहा था। जब मैंने अपनी ओर ध्यान दिया तो पाया कि नाईटी के नीचे खिसक जाने से मैं तो ऊपर से लगभग नंगी ही लग रही थी। मेरी गोल-मटोल, गोरी-गोरी चूचियों के सिर्फ निप्पल ही ढँके थे बाकी ऊपर का सारा बाहर झाँक रहा था। मैं भी मज़े लेने की मारी, जान-बूझकर लेटी रही और वेटर को घूरते देखती रही। जब वेटर ने २-३ बार पूछा, “मैडम, और कुछ लेंगी” तब मैंने भी पलट कर जवाब दिया, “और क्या है तुम्हारे पास देने को, अगर कोई दमदार चीज़ है तो बात कर।” पर वह झेंप गया और थैंक यू मैम कह कर चला गया।
चाय पीने के बाद मैं नहाने चली गई, नहा कर तरो-ताज़ा होकर मैं बाज़ार को निकल गई और बाज़ार में इधर-उधर फालतू की शॉपिंग करती रही। करीब १२ बजे मैं वापिस होटल में आ गई। थोड़ी देर बिस्तर पर लेट कर फिर टीवी देखा, पर मुझे तो टीवी भी बोर कर रहा था, तो मैंने अपना लैपटॉप उठाया और अपनी फैन मेल चेक करने लगी और मेल चेक करते-करते मुझे अपने एक फैन “स्माईल दोस्त” की मेल मिली। वह मोरेना में ही रहता था, मैंने सोचा ये मज़ा करने का अच्छा मौक़ा है अगर अच्छा नौजवान हुआ तो ठीक है नहीं तो वैसे ही मिलकर चाय पिला कर वापिस भेज दूँगी। अतः मैंने मेल में से उसका मोबाईल नम्बर लेकर उसे कॉल किया। वह भी खाली था तो बोला, “अरे संजना जी आप कहें और हम ना आएँ, ये कैसे हो सकता है, बताईए कहाँ आना है?” जब मैंने होटल का नाम बताया तो वह बोला, “अरे मैं तो आपके बिल्कुल नज़दीक हूँ, बस ५ मिनट में ही पहुँच जाता हूँ।”
ठीक ५ मिनट बाद मेरे रूम का दरवाज़े पर दस्तक हुई, जब मैंने दरवाज़ा खोला तो सामने एक संजीदा, आकर्षक, ३०-३२ साल का नौजवान, ५’८” का क़द, सुन्दर चेहरा, हाथों में फूलों का गुच्छा लिए मेरे सामने खड़ा था, हाथ मिलाया तो उसने दोनों हाथों से मेरा हाथ दबाया और हम अन्दर आ कर सोफ़े पर बैठ गए। कुछ देर हम इधर-उधर की एक दूसरे के बारे में बातें करते रहे।
फिर मैंने पूछा, “क्या पीओगे?”
तो उसने मेरी चूचियों को देखते हुए कहा, “जो आप प्यार से पिला दें,”
मैं भी उसका इशारा समझ गई थी। ख़ैर मैंने वेटर को चिकेन लॉलीपॉप और दो ठंडी बीयर लाने का ऑर्डर दिया। फिर मैंने उससे पूछा “अरे तुम अपना नाम तो बताओ।”
वो बोला, “जो आप रख दें, वहीं मेरा नाम !”
मैंने कहा, “क्रिश चलेगा?”
वो बोला, “बिल्कुल !”
बातचीत के दौरान मैं महसूस कर रही थी कि क्रिश की इच्छा हो रही थी कि बस दो मिनट में वो मेरी साड़ी फाड़ कर मुझे चोद के रख दे। पर मैंने देखा कि उसकी बातचीत बड़ी संतुलित थी, उसने एक बार भी घटिया भाषा का या गन्दे इशारे का इस्तेमाल नहीं किया, पर उसकी आँखें मेरी ब्लाऊज़ से झाँक रहीं मेरी चूचियों पर ही टिकी थीं। मैंने भी उसकी इच्छा पूरी करने के लिए अपना पल्लू नहीं सँभाला और उसको नेत्र-भोजन करवा रही थी।
तभी डोर-बेल बजी, वेटर ऑर्डर लेकर आ गया। हम दोनों ने साथ बैठकर बीयर पी और चिकेन भी खाया। जैसे बीयर का सुरूर चढ़ता गया हम दोनो ज़्यादा खुलते गए, जो दूर-दूर बैठे थे बिल्कुल क़रीब होकर बैठ गए, फिर बातों-बातों में क्रिश ने मेरा हाथ पकड़ कर चूम लिया। मैंने कहा, “यह तो वो बात हो गई कि जो सारी गाड़ी चुरा सकता था, सिर्फ एक टायर चुराकर ही खुश हो गया लगता है !”
मेरी बात सुनकर क्रिश ने मुझे अपनी गोद में बिठा लिया। अब मेरा सिर उसकी गोद में था और उसने बड़े प्यार से मेरे बालों को सहलाते हुए मेरे गालों पर किस करना शुरू किया। किस्सिंग में क्रिश मुझे थोड़ा बदमाश लगा क्योंकि वो तो मेरे होठों को खा ही जाता था। किस्सिंग करते-करते उसने अपना एक हाथ मेरी चूचियों पर रखा और दबाने लगा। मुझे भी मज़ा आने लगा और मैंने अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी जिसे उसने बड़े प्यार से अन्दर खींच लिया और चूसने लगा।
फिर उसने मुझसे कहा, “सन्जू, अब सब्र नहीं होता, मैं तुम्हें पूरी नंगी देखना चाहता हूँ।”
मैंने कहा, “तुम्हारी गोद मैं लेटी हूँ, सारी की सारी तुम्हारी हूँ, जो चाहे कर लो, मैं मना थोड़े ही करूँगी।”
मेरी मंज़ूरी मिलने के बाद उसने एक-एक करके मेरे ब्लाऊज़ के बटन खोले और मेरा ब्रा के ऊपर से ही मेरी चूचियों को चूमा, दबाया और फिर मेरे ब्रा की हुक खोल कर मेरी दोनों चूचियों को आज़ाद किया। मेरी दोनों छातियों को बारी-बारी से अपने हाथों में लेकर दबाया और चूचुकों को मुँह में लेकर चूसा, जिससे मेरे चूचुक कड़े हो गए। आनन्द के मारे मेरे मुँह से “ओहहहहह, आआआआहहहह, उफ्फ्फ्फ्फफ्, स्स्स्स्सीसीसीसी” जैसी आवाज़ें निकल रहीं थीं। मेरी चूचियाँ चूसते-चूसते क्रिश ने मेरी पेटीकोट और साड़ी टाँगों से उठा कर मेरी टाँगों, जाँघों और मेरी चूत पर हाथ फिराना शुरू किया। मेरी चूत पानी छोड़-छोड़ कर गीली हुई पड़ी थी।
मैंने कहा, “मेरा तो सारा सामान देख लिया, अब अपना भी कुछ दिखाओ,”
यह सुनकर क्रिश बोला, “जानेमन, सब तुम्हारा ही तो है।”
यह कह कर उसने अपनी शर्ट और बनियान उतारी, फिर पैंट, बूट्स और ज़ुराबें भी उतार दीं, पर अन्डरवियर नहीं उतारा और कहा, “इसका उदघाटन तुम करो।”
मुझे उसके अन्डरवियर में छुपा उसका मूसल जैसा लण्ड दिख रहा था। जब मैंने उसकी अन्डरवियर उतारी तो अन्दर से एक ८ इंच लम्बा मोटा, लोहे जैसा सख्त लण्ड बाहर निकला। उसने अपने बाल साफ कर रखे थे जिस कारण उसका लण्ड और भी भयानक लग रहा था। मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उसका लण्ड हाथ में पकड़ कर अपनी ओर खींचा और मुँह में लेकर चूसने लगी। क्रिश मेरे बालों में हाथ फिरता रहा और धीरे-धीरे आगे-पीछे होकर मेरा मुँह चोदता रहा।
लण्ड चुसवाते-चुसवाते वह एक ओर झुका और मेरी साड़ी और पेटीकोट खोल कर उतार दी। अब हम दोनों बिल्कुल नंगे थे। मैंने उसका लण्ड पकड़ा और उसे खींच कर अपने बिस्तर पर ले गई। वहाँ हमने ६९ की स्थिति ले ली, मैंने उसके लण्ड को चूसा तो उसने भी अपनी पूरी जीभ मेरी चूत में डाल-डाल कर चाटी। और ९-१० मिनटर के मुख-मैथुन में हम दोनों झड़ गए। कुछ देर यूँ ही लेटे रहे फिर दोनों उठकर बाथरूम में गए, बाथ-टब में एक साथ नहाए। नहा कर तौलिये से एक-दूसरे के बदन को पोंछा और क्रिश मुझे गोद में उठाकर बिस्तर पर ले आया।
जब उसने मुझे बिस्तर पर लिटाया तो मैंने देखा कि उसका लण्ड फिर से अकड़ गया था। मैंने कहा, “ये क्या कह रहा है?”
वो बोला, “नाराज़ होकर अकड़ गया है कि मुझे मेरी सहेली से तो मिलाया ही नहीं, ख़ुद ही सारे मज़े ले लिए, मुझे तो मज़ा दिलाया ही नहीं !”
तो मैंने कहा, “अरे भाई किसी को नाराज़ नहीं करना चाहिए, इसकी सहेली भी इससे मिलने को बेताब है, आओ दोनों को मिला दें।”
इतना सुनते ही क्रिश छलाँग लगा कर मेरे ऊपर आ गया और फिर से मेरे होठों, गालों और चूचियों को चूसना शुरू कर दिया। २-४ मिनट की पूर्व-क्रिया के बाद मेरी चूत फिर से गीली हो गई। मैंने क्रिश का कड़क लण्ड हाथ में पकड़ा, अपनी टाँगें चौड़ी कीं और उसका लण्ड अपनी चूत के मुँह पर रखा।
“देखो, सहेली अपने यार का मुँह चूम रही है।” मैंने कहा।
तो क्रिश बोला, ” यार कहता है कि मैं तो सहेली के मुँह में ही घुस जाऊँगा,” इतना कहकर क्रिश ने धक्का लगाया और उसके लण्ड का सुपाड़ा मेरी चूत में घप्प से घुस गया और २-४ शॉट्स में उसने पूरा लण्ड अन्दर-बाहर करना शुरू कर दिया। मैंने देखा कि क्रिश के चोदने में भी स्टाईल थी। सारा समय उसनी चुदाई एक ही गति से और लगातार की। थोड़ी देर के बाद उसने स्थित बदलने को कहा, अब उसने मुझे घोड़ी बनने को कहा और पीछे से अपने लण्ड को मेरी चूत में डाल कर मुझे चोदा।
कुछ देर इस तरह से चोदने के बाद वह नीचे लेट गया और मुझे ऊपर आने को कहा, पर चोदा फिर भी उसी ने, मैंने ऊपर हवा में अपनी कमर रोक कर रखी और वह नीचे से झटके लगाता रहा। इसी दौरान मेरा जिस्म अकड़ गया और मैं झड़ गई पर वो लगा रहा। कभी दाईं ओर से, कभी बाईं ओर से, कभी मैं ऊपर, कभी वह ऊपर, चूस-चूस कर उसने मेरे होंठ सूजा दिए, पी-पीकर उसने मेरे निप्पल भी दुखा दिए पर वह झड़ने का नाम नहीं ले रहा था। जब दो बार झड़ने के बाद मेरी चूत दुखने लगी तो मैंने कहा, “अब झड़ भी जाओ यार, मेरी तो दुखने भी लगी है !”
वह बोला, “बस काम होने ही वाला है बताओ कहा छुडाऊँ, चूत में, चूचियों पर, या मुँह में?”
मैंने कहा “जहाँ तुम चाहो !”
तो उसने कहा, “तो ठीक है तेरी चूत में झड़ूँगा।”
यह कहकर उसने अपनी गति बढ़ा दी और धाड़-धाड़ ज़ोरों से धक्के मार कर मुझे चोदने लगा। मुझे दर्द तो हुआ पर मैं उसके मज़े को खराब नहीं कर सकती थी इसलिए दर्द सहती रही और २ मिनट बाद ही उसने मेरे सिर के बाल ज़ोर से पकड़ लिए और मेरे निचले होंठ को ज़ोर से अपने होठों में भींच लिया और ताबड़तोड़ झटके लगता हुआ मेरी चूत में झड़ गया। मैंने भी उसे कस के अपनी बाहों में जकड़ लिया, उसका बदन पसीने से भींगा हुआ था, साँस धौंकनी की तरह चल रही थी, दिल ज़ोर-ज़ोर से धड़क रहा था।
छूटने के बाद वो कितनी देर मेरे ऊपर ही लेटा रहा। मैं महसूस कर रही थी कि उसका कड़क लण्ड झड़ने के बाद मेरी चूस में ही धीरे-धीरे सिकुड़ रहा था। आखिर क्रिश मेरे ऊपर से नीचे उतरा और मेरी बगल में लेट गया। “संजू, ज़िन्दगी में पहली बार इतना मज़ा आया, शायद नेट पर चैटिंग करते-करते तुम्हें चोदने की जो हसरत दिल में पैदा हो गई थी उसे पूरा होने की खुशी थी, पता नहीं क्या, पर बेहद मज़ा आया।”
मैं भी खुश थी, मैंने उसके होठों को किस किया और उठकर बाथरूम को जाते हुए बोली,” एक बार और नहाया जाए?”
“हाँ, पर नहाने के बाद एक दौर और चलाएँगे?” उसने कहा।
तो मैंने आँखों से “हाँ” का इशारा करके बाथरूम की ओर भागी तो वो भी उठा और मुझे पकड़ने के लिए मेरे पीछे भागा।

5 comments

  1. Nice safar karaya aapne..
    Kaafi achi he story aapki…

  2. Madarchod mujhse chudwale

  3. kahani bahut acchi hai medam ji dhanyavad ji

  4. अगर कोई शादीशुदा औरत या girls एक पर्सनल सीक्रेट सेक्स रिलेशनशिप चाहती हो वो भी फुल प्राइवेसी में तो प्लीज एक बार मुझे जरूर कांटेक्ट करे , खासकर वो लेडी जो अपनी सेक्स लाइफ में खुश नही है पर परिवार के मर्यादा के कारण अपनी सेक्स फिल्लिंग्स को छुपाये हुए है। मै आपसे वादा करता हु आपकी सेक्स लाइफ को खुशियो से भर दूँगा। मेरा लंड 9″ इच लम्बा है contact whataap(+917055674454)sicret sarves