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जयपुर से बेंगलोर तक चोदा चोदी

प्रेषक : राहुल धवन

हैल्लो फ्रेंड्स मेरा नाम राहुल धवन है और में 24 साल का हूँ.. में दिखने में स्लिम बॉडी और बहुत सुंदर  हूँ.. मेरा रंग सावंला है और मेरी हाईट 5.8 इंच है और में राजस्थान का रहने वाला हूँ। में कामुकता डॉट कॉम का आप ही की तरह एक रेग्युलर रीडर हूँ और में इस साईट पर कई सेक्सी कहानियाँ पढ़ चुका हूँ और मुझे इस पर कहानियाँ पढ़ना बहुत अच्छा लगता है और में उम्मीद करता हूँ कि आप सभी को मेरी ये कहानी बहुत पसंद आएगी।

दोस्तों ये बात तब की है जब मैंने अपनी इंजिनियरिंग की पढ़ाई पूरी की थी और मुझे एक नौकरी के लिए बेंगलोर से इंटरव्यू का कॉल आया था। तभी मैंने तत्काल में टिकिट लिया और में वहाँ पर जाने की तैयारी करने लगा। में उस समय जयपुर में था और जयपुर से बेंगलोर पहुंचने में लगभग 40 घंटे लगते है। फिर अगले दिन शाम 7:40 की मेरी ट्रेन थी और में समय पर स्टेशन पहुंच गया और क्योंकि ट्रेन वहीं से शुरू होती है तो में आराम से ट्रेन में जाकर बैठ गया। मेरी सीट साईड में नीचे की थी और फिर मेरे बैठने के थोड़ी देर में ट्रेन चल पड़ी.. मैंने भी अपना समान ठीक से रख लिया और बैठ गया।

फिर इतने में ट्रेन जयपुर के ही एक लोकल स्टेशन पर रुकी जिसका नाम दुर्गापुरा था। वहाँ से एक लड़की चड़ी और मेरी नज़रे तो वहीं पर रुक गयी और वो एकदम हॉट, सेक्सी उसके बाल खुले हुए थे और दिखने में 22-23 साल की लग रही थी और उसने सफेद कलर का कुर्ता और भूरे कलर का लोवर पहना था। उसकी हाईट कुछ मेरे बराबर ही होगी। उसके बाल उसके चहरे पर आ रहे थे और वो अपना बेग उठाए मेरी तरफ आ रही थी। तभी मैंने अपना हाथ थोड़ा साईड में कर लिया और सोचने लगा कि काश ये लड़की मेरी ही सीट पर आए और हुआ भी वही और वो मेरे पास वाली सीट पर आई और उसने अपना समान रख दिया और बैठ गयी और हेडफोन लगा कर गाने सुनने लगी।

तभी मेरा लंड तो सातवें आसमान पर था.. लेकिन उसके फिगर का साईज़ तो में ठीक से नहीं बता सकता हूँ.. लेकिन उसके गोल गोल बड़े बड़े बूब्स जिसकी वजह से कुर्ता बहुत उठा हुआ सा थाज उसकी टांगे तो ऐसी थी मानो हाथ लगाया तो फिसल जाएगा। फिर में उसे घूर रहा था कि इतने में उसने मेरी तरफ देखा और मैंने नज़रे झुका ली। फिर मैंने सोचा कि बात करने की कोशिश करते है क्या पता लॉटरी लग जाए। तभी मैंने उससे पूछा कि आप कहाँ पर जावोगी? तो उसने कहा कि में बेंगलोर जा रही हूँ। ये सुनते ही मेरे मन में तो लड्डू फूटने लगे.. फिर हमने बात करना शुरू की और मुझे पता लगा कि उसका नाम यामिनी है और वो भी वहीं पर एक इंटरव्यू देने जा रही है जहाँ पर में जा रहा हूँ। फिर ठंड का मौसम था और रात की 9:00 बज चुकी थी। मेरी और उसकी बात बीच बीच में शुरू हो जाती.. फिर उसने एक कंबल निकाला और अपने पैरों पर डालकर बैठ गयी और नोवल पड़ने लगी। फिर में ये सोच चुका था कि चाहे कुछ भी हो इसको तो चोदना है और वैसे भी उसे भी मुझ में रूचि थी.. क्योंकि वो बार बार मुझे नज़रे उठा उठाकर देख रही थी और मैंने भी अपना कंबल निकाला और उसकी तरह बैठ गया और उसके कंबल में पैर डालने की कोशिश करने लगा क्योंकि हम आमने सामने बैठे थे। अपने कंबल की आड़ में मैंने अपना पैर उसके कंबल में डाल दिया ताकि किसी को कुछ पता ना लगे और जैसे ही मेरा पैर उसके पैर से छुआ तो उसने एकदम से मेरी तरफ देखा और दो सेकण्ड देखने के बाद वो फिर से नोवल पड़ने लगी.. ये मेरे लिए ग्रीन सिग्नल था। तभी मैंने अपना पैर उसके पैर से फिर छुआ और उसने भी अपने पैर मेरे पैर की तरफ बड़ा दिया।

फिर में अपने दोनों पैरो से उसके पैरों को रगड़ने लगा.. लेकिन उसके लोवर की वजह से ऊपर नहीं जा रहा था और फिर थोड़ी देर तक ये सब चलता रहा और वो अपने नोवल की तरफ देखकर मुस्कुराती रही। फिर अचानक वो उठने लगी मैंने अपना पैर अपने कंबल में ले लिया वो उठी और उसने अपना बेग निकाला और उसमे से कुछ लेकर टॉयलेट की तरफ चली गयी। फिर पांच मिनट बाद जब वो आई तो मुझसे मुस्कुराए बिना रहा नहीं गया। उसने अपने लोवर की जगह नीचे तक की एक स्कर्ट पहन ली थी.. मेडम उस दिन फुल मूड में थी। मुझे लगा कि आज रात कुछ तो होगा.. लेकिन मेरे पास कंडोम नहीं था तो मैंने फोन निकाला और अपने फ्रेंड को फोन किया जो कि कोटा में रहता था और गाड़ी 11.00 बजे कोटा पहुंचने वाली थी। मैंने उसे कंडोम लाने को कहा और उसने कहा कि वो टाईम पर पहुँच जाएगा। सामान लेकर उसके बाद हम वापस वैसे ही बैठ गये।

अब कुछ लोग सो चुके थे तो थोड़ा रिस्क काम था.. इसलिए मैंने इस बार बड़े आराम से उसके कंबल में अपना पैर डाल लिया और फिर से उसके पैरो को मसाज करने लगा। फिर में उसी सीट पर लेट गया जिससे मेरे पैर आगे तक पहुंच सके और फिर मैंने उसकी जांघो को सहलाना शुरू किया। क्या बताऊँ क्या जांघे थी उसकी.. बिल्कुल मक्खन। मेरा पैर तो बार बार फिसल रहा था। फिर मैंने अपना पैर उसके दोनों पैरों के बीच में फंसा दिया और उसने एकदम ज़ोर की साँस ली.. शायद मुझे लग रहा था कि उसने पेंटी भी नहीं पहनी थी तभी मेरा पैर उसकी नंगी चूत पर था जिस पर हल्के हल्के बाल थे। जिसका मुझे सिर्फ़ अहसास हो रहा था.. मुझे तो बिल्कुल भी यकीन नहीं हो रहा था कि में उसकी चूत को अपने पैर से सहलाने लगा। अब वो पागल होने लगी थी। उसने अपने हाथ से अपनी नोवल का पेज पूरा हाथ में लेकर फाड़ दिया शायद वो बहुत गरम हो चुकी थी और मैंने भी कोई कसर नहीं छोड़ी और अपने पैर का अंगूठा उसकी चूत में डालने की कोशिश करता रहा। तभी इतने में कोटा का स्टेशन आ गया। हम दोनों ने अपने आपको वहीं पर छोड़ दिया और में अपने फ्रेंड से मिलने नीचे उतर गया.. उसने मुझे कंडोम का एक पॅकेट और एक कोल्डड्रिंक की बॉटल दी और उसने कहा कि मैंने कोल्डड्रिंक में वोडका मिला दी है तू मस्त मजे करते हुए जा ट्रेन चलने वाली थी.. इसलिए मैंने उसे थेंक्स कहा और अपनी सीट पर आकर बैठ गया। दोस्तों ये कहानी आप कामुकता डॉट कॉम पर पड़ रहे है।

जब में अपनी सीट पर पहुंचा तो यामिनी ऊपर अपनी सीट पर जा चुकी थी। फिर में सोचने लगा कि अब क्या होगा? तभी उसने मुझसे कहा कि आप प्लीज़ पर्दा लगा देंगे में समझ गया कि ये लोगो को दिखाने के लिए ऊपर चड़ी है और अब ट्रेन चल चुकी थी और लगभग सभी लोग सो भी चुके थे। मैंने भी अपनी साइड सिट के पर्दे लगाए और अपनी सीट पर बैठ गया और सभी लोगो ने अपनी अपनी सीट्स के पर्दे लगा लिए थे.. इसलिए रिस्क बहुत कम था। फिर 2-3 मिनट बाद वो फिर से नीचे आकर बैठ गयी और उसके आते ही मैंने उसे किस कर लिया।

तभी वो बोली कि आराम से अभी बहुत टाईम है डियर। फिर मैंने उसे कोल्डड्रिंक ऑफर की तो उसने मना कर दिया.. फिर मैंने उसे जब बताया कि इसमे वोडका है उसने झट से बॉटल ले ली और 1/3 खाली करके मुझे दे दी। हम बहुत धीरे बातें कर रहे थे ताकि कोई सुन ना ले। फिर मैंने उस बॉटल को पूरा खत्म किया और उसे फिर से अपनी बाहों में ले लिया और दो मिनट बाद हम दोनों किस करने लगे लेकिन मेरा तो छोड़ो वो मेरे होंठो ऐसे चूस रही थी जैसे कोई लंड को भी नहीं चूसता। हमारा किस 5-6 मिनट तक चलता रहा। फिर में उसके बूब्स उसके कुर्ते के ऊपर से ही दबाने लगा। क्या बूब्स थे उसके जैसे वो मेरे हाथों के लिए ही बने हो.. ना ज़्यादा सॉफ्ट ना ज़्यादा टाईट.. बिल्कुल अच्छे गोल गोल बूब्स थे। तभी मुझसे रहा नहीं गया और मैंने उसका कुर्ता उतार दिया उसने काले कलर की ब्रा पहनी थी मैंने उसकी ब्रा को भी उतार दिया और उसे वहीं पर लेटा दिया और खुद साईड में उसके ऊपर लेट गया।

हम दोनों नशे की वजह से भूल चुके थे कि हम ट्रेन में हैं। में उसके बूब्स को चूसने लगा.. उसके निप्पल उसके बूब्स पर बहुत अच्छे लग रहे थे। मैंने उसके निप्पल को मुहं में लिया और उसे भी चूसने लगा और अपने दूसरे हाथ से उसके दूसरे बूब्स को दबाने लगा यामिनी लंबी लंबी साँसे ले रही थी और कभी मेरे बालों को खींच रही थी और कभी मेरे सर को अपने बूब्स की तरफ दबा रही थी। तभी में भी पूरे जोश के साथ उसके बूब्स को चूस रहा था। ऐसा मज़ा पहले कभी किसी के बूब्स चूसने में नहीं आया जो आज आ रहा था। में अपने दांतों से उसके निप्पल को काट रहा था और दूसरे हाथ से उसके दूसरे निप्पल को अपनी उंगलियों में मसल रहा था। वो तेज तेज आवाज़ निकालने लगी आहह आअहह अह्ह्हहरे यार प्लीज़ धीरे करो.. प्लीज़ चूसो बस आाह्ह्ह्हह और कर प्लीज़। तभी मैंने एकदम उसके मुहं पर हाथ रख दिया। थोड़ी देर तक यही चलता रहा फिर वो मेरी टी-शर्ट को ऊपर करने लगी में समझ गया कि उसे क्या चाहिए और मैंने अपनी टी-शर्ट उतार दी और मैंने हम दोनों के ऊपर कंबल डाल लिया फिर वो मेरे ऊपर आकर मुझे किस करने लगी और फिर मेरी छाती को चाटने लगी। में तो पागल हो रहा था इतने में वो मेरे लोवर में हाथ डालने लगी और उसने उसे बिना उतारे हुए मेरे लंड को बाहर निकल लिया। फिर वो दो मिनट तक तो बस लंड को ही देखती रही और फिर धीरे धीरे करके उसे अपने मुहं में डालने लगी और थोड़ी देर में वो उसे आईस्क्रीम की तरह चूसने लगी.. मुझे लगा था कि इसे लंड ज़बरदस्ती चुसवाना पड़ेगा.. लेकिन वो तो बहुत तेज थी। मेरा लंड उसके मुहं में पूरा नहीं जा रहा था.. लेकिन वो लंड को पूरा पूरा लेने की पूरी कोशिश कर रही थी। फिर उसने बहुत देर तक मेरा लंड चूसा और जब में झड़ने वाला था तो उसने अपने मुहं में ही झड़ने को कहा.. प्यास में वो सब पी गयी जैसे जन्मो की प्यासी हो और उसके बाद मेरे बॉल्स को मुहं में लेकर चाटने लगी वो अपनी पूरी जीभ मेरी बॉल्स पर बड़े प्यार से फैरने लगी और उन्हें किस भी करने लगी।

में तो जैसे जन्नत में था और में जानता था कि इतना मज़ा मुझे फिर लाईफ में कभी नहीं मिलेगा.. इसलिए मैंने उस हर पल को एंजाय किया। उसने करीब आधे घंटे तक मेरे बॉल्स को चाटा और उसके बाद मैंने उसे लेटाया और उसके बचे हुए सारे कपड़े उतार दिए और साथ साथ अपने भी उतार दिए। वो तो जैसे हर चीज़ के लिए पहले से ही तैयार थी। अब वो सिर्फ़ पेंटी में थी और फिर धीरे से मैंने उसे भी उतार दिया.. क्या चूत थी उसकी? हल्के हल्के बाल थे उस पर.. ऐसा लग रहा था कि अभी कुछ दिन पहले ही साफ किए हो। तभी मैंने उसके लंड चूसने के तरीके से पता लगा लिया था कि ये तो पहले से ही कई लोगो से चुदी होगी.. लेकिन चूत देखने के बाद पता लगा कि में बिल्कुल गलत था और जब मैंने उससे पूछा तो उसने बताया कि वो वर्जिन है।

में बहुत उत्तेजित था की आज तो मुझे सील तोड़ने को मिलेगी और सबसे पहले में उसकी चूत से खेलने लगा। मैंने अपनी एक उंगली उसकी चूत में ज़रा सी डालने की कोशिश की तो वो एकदम चीखने लगी तो मैंने उसके मुहं पर हाथ रख दिया। फिर में धीरे धीरे उसकी चूत को अपनी उंगली से खोलने लगा और फिर मैंने उसकी चूत को चाटना शुरू किया। में अपनी जीभ उसकी चूत में डालने लगा और उसकी चूत को चूसने लगा। वो तो मुझे नोचने लगी और कहने लगी कि खा जाओ इसे.. पूरा खा जाओ छोड़ो मत साली बहुत परेशान करती है चूसो और ज़ोर से चूसो। में भी पूरे जोश में आ गया और ज़ोर से चूसने और उसकी चूत को काटने लगा। फिर थोड़ी देर बाद वो झड़ गई और में भी उसके पेट पर सर रखकर लेट गया और उसके फिर से गरम होने का इंतजार करने लगा।

फिर 10 मिनट तक हम वैसे ही लेटे रहे और फिर में उठा और उसे किस करने लगा। वो भी मुझे किस करने लगी फिर मैंने उसे कहा कि अब में तुम्हे चोदुंगा.. तुम्हे थोड़ा दर्द होगा लेकिन तुम चिल्लाना मत चाहे कुछ भी हो जाए.. तो उसने कहा कि आज तो चाहे जो भी हो जाए लेकिन में चुद कर ज़रूर रहूंगी। फिर मैंने उसे सीधा किया और और उसके पैरों को फैला कर अपने कंधो पर रख दिया.. मेरा लंड बिल्कुल सीधा खड़ा था और चूत में घुसने के लिए तड़प रहा था।

तभी मैंने कंडोम निकाला और उसे अपने लंड पर लगाने लगा.. इतने में यामिनी ने मुझे रोक लिया और कहा कि मैंने सुना है कंडोम से इतना मज़ा नहीं आता। तुम प्लीज़ बिना कंडोम लगाए ही चुदाई करो और उसने कहा कि उसने पहले कभी भी सेक्स नहीं किया और बात रही बच्चा होने की तो वो टेबलेट खा लेगी। फिर में मान गया और कंडोम को हटा दिया.. फिर मैंने अपने लंड पर थोड़ा तेल लगाया जो मेरे बेग में ही था और थोड़ा उसकी चूत पर भी लगाया.. फिर मैंने अपना लंड उसकी चूत पर रखा और धक्का मारने की कोशिश बार बार करने लगा.. लेकिन लंड हर बार थोड़ा सा जाकर फिसल कर बाहर आ जाता था। उसने अपनी आँखें बंद की हुई थी और हल्की हल्की आवाज़े आ रही थी। मैंने फिर से ट्राई किया.. इस बार मैंने लंड अपने हाथ से उसकी चूत पर लगाया और लंड को पकड़े रहा और एकदम बिना कोई इशारा दिए एक ज़ोर का झटका मार दिया और उसके मुहं पर अपना हाथ लगा दिया वो बहुत ज़ोर से चीखी.. चीख इतनी तेज थी कि उसे मेरा हाथ भी नहीं दबा पाया।

तभी मेरा आधे से ज़्यादा लंड अंदर जा चुका था। मैंने ज़्यादा देर ना करते हुए दूसरा धक्का मारा और अपना पूरा लंड उसकी चूत में डाल दिया। वो मुझसे छूटने की कोशिश कर रही थी। फिर मैंने उसे थोड़ी देर उसी पोज़िशन में रखते हुए उसे किस किया और 5-10 मिनट बाद वो थोड़ी ठीक होना शुरू हुई। मैंने भी फिर धीरे धीरे अपने लंड को अंदर बाहर करना शुरू किया। अब तो वो भी अपनी कमर उठा उठाकर लंड लेने लगी और मुझे अपनी और खींचकर मेरे चेहरे गले और होंठो पर किस करने लगी। वो इस तरह से उछल रही थी कि जिस तरह से कंगारू भागा करते है। फिर उसने मुझे नीचे लेटा दिया और खुद मेरे ऊपर आकर मेरे लंड को अपनी चूत में डाल कर घुड़सवारी करने लगी और चुदाई के पूरे मजे लेने लगी। फिर थोड़ी देर तक ये सब चलता रहा और फिर में उसकी चूत में ही झड़ गया। हम करीब 40 मिनट वैसे ही पड़े रहे और वो मेरे ऊपर थी और उसका एक बूब्स मेरे होंठो के ऊपर था।

फिर हम दोनों उठे और हमने अपने अपने कपड़े पहने और फिर उसने मुझे एक जोरदार किस किया और थेंक्स बोला और फिर हम दोनों सो अपनी अपनी जगह पर जाकर सो गये ।।

धन्यवाद …