Home / आंटी की चुदाई / दोस्त के सामने उसकी मम्मी को चोदा

दोस्त के सामने उसकी मम्मी को चोदा

प्रेषक : भूपेंद्र ..

हैल्लो दोस्तों.. मेरा बचपन से ही मन सेक्स की तरफ बहुत आकर्षित होता था और मुझे AntarVasnaSex.Net बहुत अच्छी लगती है और में जब भी समय मिलता है कहानियाँ पढ़ता हूँ। में आज आप सभी के सामने अपनी एक सच्ची घटना सुनाने जा रहा हूँ और यह कहानी मेरे एक दोस्त की माँ के साथ हुए मेरे सेक्स पर आधारित है। दोस्तों राजीव मेरा एक बहुत अच्छा दोस्त है और जब हमारे कॉलेज में बारिश के दिनों 20 दिन की छुट्टियाँ हो गयी.. तो वो मुझे अपने घर जो पटना से 30 किलोमीटर दूरी पर था वहाँ पर ले गया। राजीव की मम्मी विधवा थी और उनकी उम्र 38 साल थी लेकिन उनको देखकर लगता था कि वो 28-30 साल से ज़्यादा उम्र की नहीं होगी। वो फिल्म हिरोइन जैसी दिखती थी.. पतली कमर और बड़े बूब्स वाली एकदम सेक्सी हॉट औरत। वो बहुत ही गोरी थी और उनके बूब्स बड़े बड़े थे और बूब्स खड़े ही रहते थे और ब्लाउज के अंदर से टाईट बूब्स को देखकर बहुत जल्दी में हॉट हो गया। आंटी, राजीव और मुझे बहुत प्यार करती थी और अच्छा-अच्छा खाना बनाकर खिलाती थी और रात को राजीव और में एक साथ सोते थे। फिर जब रात को हम दोनों टीवी पर पिक्चर देख रहे थे तो एक हॉट सीन को देखकर हम दोनों ने भी एक दूसरे से सेक्स की बातें करनी शुरू कर दी।

राजीव : वाह यार इसके बूब्स बहुत बड़े हैं।

में : हाँ यार इतने बड़े बूब्स को दबाने में भी बहुत मज़ा आएगा।

राजीव : हाँ यार मुझे तो इसकी मोटी जाँघ और गांड भी पसंद है।

में : लेकिन मुझे इसकी पतली कमर ही पसंद है।

राजीव : हाँ.. लेकिन पतली कमर वाली के ज्यादा बड़े बूब्स नहीं होते हैं।

में : नहीं यार होते हैं जरा ध्यान से सोच।

दोस्तों मेरा इशारा उसकी मम्मी की तरफ था.. आंटी 5.3 इंच की गोरी औरत थी और उनकी कमर 28 इंच की थी और गांड 34 इंच की लगती थी लेकिन उनके बूब्स का साईज़ 36 इंच और वो एकदम बड़े बड़े थे।

राजीव : अच्छा तू बता.. तेरी नजर में ऐसा कौन है?

में : रेखा.. क्यों आंटी के फिगर भी तो ऐसे ही है?

राजीव : चकित हो गया क्या.. तेरा मतलब मम्मी?

में : हाँ तूने ज्यादा ध्यान नहीं दिया.. इस उम्र में भी उनके बहुत कड़क बूब्स हैं और कमर भी एकदम पतली है और वो भी चुदवाने के लिए हमेशा तड़पती रहती है।

तो राजीव कुछ देर तक खामोश रहा और मुझे लगा कि शायद वो बुरा मान गया.. लेकिन उसने थोड़ी ही देर के बाद कहा कि क्या तुझे लगता है और क्या तूने बड़े गौर से देखा है?

में : हाँ यार मुझे लगता है कि उनको भी चुदवाने की इच्छा तो होती ही होगी.. आख़िर तू भी बोल रहा था कि वो पिछले 16 साल से विधवा हैं।

राजीव : हाँ यार।

में : उन्होंने तेरे पापा के बाद कभी किसी के साथ सेक्स नहीं किया होगा और अगर में तेरी मम्मी को खुश कर दूँ तो तुझे तो कोई आपत्ति नहीं है ना?

राजीव : मुझे क्या आपत्ति.. तुझे भी मज़ा मिलेगा और उनका भी तो काम होगा और फिर में क्या कहूँगा?

अब में मन ही मन में खुश हो गया.. लेकिन क्या मम्मी राज़ी होगी?

में : यार उनके बूब्स कितने बड़े है और गांड भी बिल्कुल कसी हुई और टाईट लगती है.. उनको भी सेक्स की बहुत इच्छा होगी और तड़पती भी होगी।

राजीव : हाँ.. लेकिन तू यह सब कैसे करेगा?

में : तू मुझे अब कोई आईडिया सोचने दे।

फिर इस बातचीत के बाद अगले दिन से आंटी से मेरी बातें और भी ज़्यादा होने लगी और आंटी ने भी एक दो बार इस बात पर ध्यान दिया कि में उनके बूब्स को घूर रहा हूँ.. लेकिन वो ज्यादा देर ध्यान नहीं देती। एक दिन दोपहर को मैंने राजीव को किसी बहाने से घर से दूर रहने को कहा और वो आंटी से इजाजत लेकर कुछ गावं के लड़को के साथ नदी में तैरने चला गया और मुझे तैरना नहीं आता तो में घर पर ही रुका रहा। तो उस वक्त आंटी ज़मीन पर एक चटाई बिछाकर लेट रही थी और मैंने उनसे कहा कि आंटी आप इतनी मेहनत करती है.. खाना बनाती हैं, घर की साफ सफाई करती हैं, जानवरों की देखभाल, खेत के मजदूरों की झंझट, आप तो यह सब करके बहुत थक जाती होंगी? आंटी ने कहा हाँ में अकेली हूँ तो मुझे ही यह सब करना पड़ेगा.. इसलिए में दिनभर बहुत थक जाती हूँ लेकिन इसका ओर क्या चारा है?

तो मैंने कहा कि आंटी अगर आपको बुरा ना लगे तो में आपके पैरों की मालिश कर देता हूँ? और थोड़ी देर पैर भी दबा देता हूँ। इससे आपको बहुत आराम मिलेगा.. आंटी ने पहले तो मना किया और फिर मेरे ज़ोर देने पर राज़ी हो गयी। में ट्राऊजर औट टीशर्ट पहने हुए था और मैंने अंदर जानबूझ कर अंडरवियर नहीं पहनी हुई थी। तो आंटी पलटकर ज़मीन की तरफ मुँह करके चटाई पर लेट गयी और में उनके पैर दबाने और मसलने लगा.. उनके पैरों की मसाज से उन्हे बड़ा आराम मिल रहा था और 10 मिनट तक पैरों की मसाज के बाद में उनके पैर और घुटने दबाने लगा और फिर उनकी जांघो को दबाने और मसलने लगा लेकिन उनकी चिकनी गोरी जांघ बहुत ही कमाल की थी और मेरा मन कर रहा था कि में अभी उनके पैरों को चाट लूँ। लेकिन मैंने आपने आप पर काबू करके उनकी जांघो पर हाथ से सहलाने लगा और अब मैंने उनकी साड़ी को जांघो से थोड़ा ऊपर हटा दिया था और उनके पैर और जांघों की मसाज कर रहा था। फिर मैंने उनसे कहा कि आंटी आपको और भी ज्यादा आराम तब मिलेगा.. जब में आपकी कमर की भी मसाज कर दूंगा। तो आंटी ने कहा कि हाँ वो भी कर दो और यह सुनकर में आंटी की पीठ की भी मसाज करने लगा और उनके ब्लाउज के नीचे ब्रा की डोरी को महसूस करने लगा था। तो अब आंटी मेरे हाथों के मसाज का मज़ा ले रही थी और फिर मेरी हिम्मत भी थोड़ी बड़ने लगी थी और में अब उनके दोनों पैरों के ऊपर आकर उनकी जांघो और कमर की मसाज करने लगा था।

तो मेरे मसाज के दबाव से उनकी साँस बीच-बीच में तेज़ हो रही थी। फिर में उनके दोनों पैरों के बीच बैठकर उनकी कमर दबाने लगा और जब मैंने उनकी कमर को साईड से सहलाया तो वो हल्की-हल्की सिसकियाँ लेने लगी। में उनकी दोनों जांघों के ऊपर बैठा हुआ था और उनका चेहरा नीचे की तरफ और वो पेट के बल लेटी हुई थी और उनकी साड़ी घुटनो से ऊपर थी। फिर मैंने देखा कि आंटी को मेरे मसाज करने से बहुत आराम पहुँच रहा है तो मैंने थोड़ी हिम्मत करके उनकी गांड पर हाथ रखा और साड़ी के ऊपर से ही दबाने लगा और में उनके कूल्हों को साड़ी के ऊपर से ही अपने दोनों हाथों से दबा रहा था। अब मेरा लंड भी खड़ा होने लगा था और उनकी गांड भी सच में बहुत टाईट थी.. जैसे कि वो कोई कुँवारी लड़की हो। तो मैंने थोड़ा नीचे सरककर उनके दोनों पैरों को और फैला दिया और उन्होंने भी बिना विरोध के दोनों पैर खोल दिए और मैंने उनके दोनों पैरों के बीच में बैठकर.. उनकी साड़ी को कमर से ऊपर हटाया और फिर उनकी गोरी गांड मेरी नजरों के सामने थी.. क्योंकि आंटी ने अंदर पेंटी नहीं पहनी थी और मुझे उनकी काली-काली झांटे दिख रही थी।

अब में धीरे-धीरे हाथ को आगे बढ़ाकर उनकी गांड को सहलाने लगा और फिर उनकी गांड के छेद पर मुँह रखकर चाटने लगा और अब आंटी सिसकियां लेने लगी थी। तो में उनकी गांड के छेद में जीभ को डालकर चाट रहा था और में धीरे से एक हाथ को सामने की तरफ ले जाकर उनकी चूत को सहलाने लगा.. लेकिन चूत पर बहुत बाल होने के कारण मुझे उनकी चूत का छेद दिखने में बहुत दिक्कत हुई.. लेकिन उनकी चूत गीली हो चुकी थी और ज़ल्द ही मुझे वो रसीला छेद मिल गया.. जहाँ से पानी टपक रहा था। तो मैंने अपनी एक उंगली को धीरे से अंदर डाल दिया और उंगली के अंदर घुसते ही आंटी चिल्ला पड़ी.. आअहह अईईई। तो में समझ गया कि बहुत दिनों से चूत के अंदर कोई भी लंड नहीं गया और आंटी को मज़ा आने लगा। उनकी चूत इतनी टाईट और रसीली थी कि उसे देखकर मेरे लंड का हाल तो और भी ज्यादा खराब होने लगा था और में आंटी की पीठ के ऊपर लेटकर उनकी गर्दन और पीठ को किस करते हुए एक उंगली से उनकी चूत के छेद को खोदता रहा और मेरे लंड को ट्राउज़र के ऊपर से ही उनकी गांड पर घिसने लगा। दोस्तों ये कहानी आप AntarVasnaSex.Net पर पड़ रहे है।

फिर मेरी उंगली आंटी की चूत में अंदर बाहर होने लगी थी और आंटी हल्की-हल्की सिसकियाँ लेने लगी थी.. आंटी की गर्दन को दाँत से हल्के-हल्के काटते हुए मैंने कहा कि आंटी आपकी चूत पर बाल बहुत बड़ गए हैं और लंड को अंदर डालने में बहुत दिक्कत होगी। वैसे मुझे चूत पर बाल तो बहुत अच्छे लगते है लेकिन आप बालों को थोड़ा छोटा करवा लेना और में आपको अगले 8 दिन तक बहुत चोदना चाहता हूँ.. क्यों करोगी ना चूत के बालों को थोड़ा छोटा? यह पूछकर में और स्पीड से उंगली उनकी चूत में अंदर बाहर करने लगा। तभी दरवाज़े पर राजीव के आने की आवाज़ सुनाई दी और आंटी अपनी साड़ी को समेटकर.. मुझे देखे बगैर ही बाथरूम में घुस गयी। तो मैंने उठकर दरवाज़ा खोला और फिर राजीव मेरे खड़े लंड को देखकर चोंक गया। तो मैंने इशारों से कहा कि मामला सेट है और बाद में रात को खाना खाने के बाद बताऊंगा। फिर रात को हम खाना खाकर कमरे में चले गये और आंटी एकदम ऐसा व्यहवार कर रही थी जैसे कुछ हुआ ही नहीं और हमे खाना देकर आंटी बाथरूम में नहाने के लिए चली गई और अपने साथ में राजीव के शेविंग बॉक्स से कैंची भी बाथरूम में ले गई। तो में समझ गया कि आज आंटी चूत के बाल कम करेंगी। फिर रात के खाने के बाद राजीव को मैंने सब कुछ बताया.. वो भी गरम हो गया और एक घंटे तक मेरे लेपटॉप पर हम दोनों के ब्लूफिल्म देखने के बाद में धीरे से उठा और राजीव को कहा कि अब में तेरी मम्मी को चोदने जा रहा हूँ।

राजीव : तू क्या इस ब्लूफिल्म में जैसे गांड में लंड डाल रहे है वैसा भी करेगा? ओर क्या मेरी मम्मी की चूत को डोगी पोज़िशन में भी चोदेगा?

तो मैंने कहा कि तेरी मम्मी को पहले लंड चुसवाऊंगा.. फिर आखरी में डोगी पोज़िशन में चोदूंगा और अगर वो मान गयी तो आज गांड में भी लंड डालूँगा.. नहीं तो गांड में डालने के लिए और 2-3 दिन धीरे धीरे कोशिश करनी पड़ेगी। फिर राजीव ने कहा कि उसको भी चुदाई देखनी है तो मैंने कहा कि में जाकर शुरू करता हूँ। जब थोड़ी देर बाद चुदाई ज़ोर से चलेगी.. तब तू छुपकर देख लेना और ध्यान रखना की आंटी को पता ना चले और वो राज़ी हो गया। तो में आंटी के बेडरूम की तरफ गया और जैसा मेरा अनुमान था.. दरवाज़ा खुला था और में बिस्तर पर आंटी को सोते हुए देखकर उनके पास बैठ गया और उनके एक बूब्स पर हाथ रखा और दबाने लगा। तो आंटी नींद से उठ गयी और थोड़ा चौंकने का बहाना करके बोली कि तुम यहाँ हो तो राजीव कहाँ है? तो मैंने कहा कि रूम बाहर से लॉक है और वो गहरी नींद में सोया है और अब वो कल सुबह तक ही उठेगा। फिर में उनके ऊपर लेटकर उनके होंठ को चूमने लगा वो भी मेरा साथ देने लगी.. मैंने उनके ब्लाउज को खोल दिया और नंगे बूब्स को दबाते हुए एक निप्पल चूसने लगा और वो भी मस्ती में आने लगी। फिर में ज़ोर-ज़ोर से निप्पल को एक-एक करके चूसने लगा और वो अह्ह्ह उह्ह्ह आअहहह करने लगी.. फिर मैंने अपना लंड ट्राउज़र से बाहर निकालकर आंटी के हाथ में दिया.. आंटी मेरा लंड सहलाने लगी।

आंटी : यह तो बहुत बड़ा है।

में : क्या आपने कभी इतना बड़ा नहीं लिया?

आंटी : नहीं.. मुझे बहुत डर लग रहा है।

में : आराम से करूँगा। उससे दर्द नहीं होगा.. मन ही मन में सोच रहा था कि आंटी गरम हो चुकी है और मेरा काला मोटा लंड अपनी चूत के अंदर डलवाना चाहती है और डर तो एक बहाना है और जब एक बच्चा इनकी चूत से निकल चुका है तो फिर मेरा लंड कितना बड़ा है? लेकिन उनकी चूत बहुत टाईट हो गई थी.. क्योंकि पिछले 16-17 साल से उन्होंने चूत नहीं मरवाई थी। तो मैंने लंड को उनके मुँह पर रखकर कहा कि इसको चाटकर गीला कर दो और में उनकी चूत पर मुँह रखकर उनके ऊपर सो गया। वो मेरे लंड को चाट रही थी और आईसक्रीम की तरह चूस रही थी और में उनके चूत के दाने को उंगली से रगड़ते हुए उनकी चूत को चाट रहा था और अब उनकी चूत पानी छोड़ना शुरू कर चुकी थी और मेरा लंड लोहे जैसा गरम हो गया था। तो उनके मुँह से मैंने लंड को बाहर निकाला और एक तकिया उनकी गांड के नीचे रखा और में अपने लंड को उनकी चूत के छेद पर रखकर धीरे-धीरे रगड़ रहा था और एक हल्का सा धक्का दिया। तो उन्होंने थोड़ी सी सिसकियाँ लेकर गांड को हटा लिया.. तो लंड अंदर नहीं जा सका और अब मैंने उनकी कमर को एक हाथ से पकड़कर रखा था.. तो आंटी बोलने लगी कि थोड़ा धीरे कर आहह उह्ह्ह मुझे बहुत दर्द हो रहा है बेटा धीरे डालना यह बहुत बड़ा है।

फिर मैंने अपने लंड को उनकी चूत की दीवार पर रखकर उनकी निप्पल को थोड़ा चूसा और बोला कि आंटी आप बिल्कुल भी डरो मत बस थोड़ा सा लंड पहले अंदर चले जाने दो और फिर आपकी चूत के अंदर मेरा लंड खुद अपनी जगह बना लेगा और बस एक बार लंड को थोड़ा अंदर जाने दीजिए। फिर यह कहकर मैंने उनके दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर ऊपर की तरफ उठाया और कमर के नीचे एक हाथ को डालकर गांड को तकिये के ऊपर खींचकर रखा और उनकी चूत ऐसा करने से और भी ज्यादा खुल गयी तो मैंने लंड को उनकी गुलाबी रसभरी चूत के छेद पर रखकर उनकी हल्के-हल्के झांटो वाली चूत के दाने को दूसरे हाथ की उंगली से सहलाया लेकिन आंटी ने योनसुख के मारे आँखे बंद करके उूउउस्स्स्स्स आअहमम्म्म ऊऊऊहह कर रही थी। तो यह सही मौका देखकर मैंने अपने लंड को चूत में एक ज़ोरदार धक्का लगाया.. आंटी उईईईइ माँ मर गयी बाहर निकालो इसे.. मेरी चूत फट गई.. मुझे बहुत दर्द हो रहा है और यह कहकर मुझे धकेलने वाली ही थी कि में उनको अपने दोनों हाथों से पकड़कर उनके होंठो को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा और वो दर्द से थोड़ी सी कसमसाने लगी थी।

तभी मैंने अपने पैर और जांघो से उनके दोनों पैर को ऊपर की तरफ धकेल रखा था और लंड का दो इंच से ज़्यादा हिस्सा आंटी की चूत में जा चुका था और आंटी के मुँह में अपना थूक डालते हुए और उनके थूक को उनके मुँह से चूसते हुए उनकी जीभ को अपनी जीभ से चूसता और चूसते हुए मैंने धक्का लगाना ज़ारी रखा और अब करीब 5 इंच का मेरा काला मोटा लंड उनकी नरम, गरम झांट वाली चूत के रस में भीगने लगा था। तो में बीच-बीच में उनकी गरम झांटो वाली चूत को हाथ लगाकर और भी हॉट हो जाता और ज़ोर-ज़ोर से धक्का लगा रहा था और आंटी को भी बहुत मज़ा आ रहा था। तो में अब उन्हे किस करना बंद करके उनके बूब्स दबाता और निप्पल चूसते हुए फुल स्पीड से उनको चोद रहा था। आंटी ने अब अपने दोनों पैरों को मेरी कमर के ऊपर से लॉक कर दिया था और अपनी गांड को उठा उठाकर मेरा साथ दे रही थी।

तो उनकी सिसकियों की आवाज़ तेज़ हो रही थी और धीरे-धीरे आंटी की सिसकियाँ बढ़ रही थी और उनको यह ख्याल भी नहीं था कि राजीव पास के रूम में सो रहा है लेकिन राजीव तो चुपचाप छुपकर यह सब देख रहा था। फिर आंटी ने मेरे बाल पकड़कर मेरा मुँह अपने निप्पल पर रखा और 15 मिनट हो चुके थे। मेरा शरीर अकड़ रहा था और जोश की वजह से मैंने आंटी को टाईट अपने जिस्म पर दबोच लिया। तो आंटी नाख़ून से मेरी पीठ को पागलों की तरह नोच रही थी। फिर आंटी और में एक साथ झड़ गये और मेरा लंड ज़ोर-ज़ोर के धक्को के साथ अपना पानी उनकी चूत में छोड़ रहा था और फिर कुछ देर के बाद धीरे-धीरे सिकुड़कर बाहर आ गया और उनकी भी पकड़ मेरे शरीर से ढीली होती गई। फिर आंटी दो तीन मिनट के बाद उठकर बाथरूम गई और में अपने रूम पर वापस आ गया तो वहाँ पर राजीव मेरा इंतज़ार कर रहा था। तभी मेरे वहाँ पर पहुंचते ही उसने कहा कि यार तेरा इतना मोटा लंड मम्मी बड़ी आसानी से अंदर ले रही थी। फिर मैंने उसकी हर बात का जवाब दिया और हम सो गए। उसके बाद मैंने आंटी को बहुत बार चोदा और हर बार राजीव छुपकर हमारी चुदाई देखा करता था ।।

धन्यवाद …

2 comments