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देवरानी जेठानी का मुकाबला- Devrani Jethani Ka Muqabla

प्रेषक : तन्मय ..

हैल्लो दोस्तों.. में तन्मय आप सभी पाठकों का Antarvasnasex.net पर स्वागत करता हूँ। में अपनी नानी के घर पर अपनी दो मामियों के साथ अकेला था और में अपनी बड़ी मामी को पहले ही चोद चुका था और वो एकदम हॉट और सेक्सी है। उन दोनों मामियों के बीच बहुत लड़ाई थी और वो दोनों एक ही घर में अलग अलग रहती थी.. बड़ी मामी तो रात में भी मुझसे चुदने को तैयार थी.. लेकिन में छोटी मामी को भी चोदना चाहता था।

फिर मेरे प्लान के मुताबिक बड़ी मामी से यह कहा कि में छोटी मामी की नंगी फोटो उनको दूँगा.. अगर उन्होंने इसमें मेरा साथ दिया तो और बड़ी मामी तैयार हो गयी और मैंने छोटी मामी को भी अपने साथ रात में एक ही कमरे में सोने के लिए तैयार कर लिया और हम सब लोग ज़मीन पर चटाई बिछाकर लेट रहे थे। मेरी एक तरफ बड़ी मामी और उनका बेटा और दूसरी तरफ छोटी मामी और उनका बेटा सोये थे। अब में आगे की कहानी सुनाता हूँ।

मेरी छोटी मामी बड़ी मामी से ज्यादा मस्त थी और उनका फिगर एकदम पतला था और वो गोरी भी थी.. हम सब लोग लाईट बंद करके लेट गये और आधे घंटे के बाद मैंने अपना काम शुरू किया.. बड़ी मामी तो तैयार ही थी और में उनके मज़े भी ले चुका था.. तो अब बारी छोटी मामी की थी। दोनों मामी मेरी तरफ़ कमर करके और अपने बेटे की तरफ मुहं करके लेटी हुई थी। तो मैंने छोटी मामी की तरफ अपना एक हाथ बढ़ाया तो एक मिनट के बाद मेरे शरीर से उनका स्पर्श हुआ और अंधेरे में ही में धीरे धीरे उनके चूतड़ो तक हाथ ले गया और पहले दूर से ही महसूस किया.. उनके चूतड़ एकदम तरबूज की तरह थे।

फिर मैंने धीरे से उनके चूतड़ो को हाथ लगाया। मुझे बड़ी मामी के चूतड़ याद थे उनके चूतड़ बहुत मुलायम एकदम रुई जैसे थे और छोटी मामी के चूतड़ बहुत सख्त थे। छोटी मामी गावं की गोरी थी एकदम मजबूत शरीर वाली.. उनके चूतड़ो पर में हाथ फेरने लगा और में उनके पूरे चूतड़ो पर हाथ घुमा रहा था.. उन्होंने पेंटी नहीं पहनी थी। तो में उनकी चूतड़ो की दरार में उंगली डालते हुए उनकी जांघ तक पहुंच गया.. मामी सो नहीं रही थी.. लेकिन मेरे इस काम का विरोध भी नहीं कर रही थी.. क्योंकि उन्हे लगा कि में बस थोड़ी बहुत देर छूने के बाद सो जाऊंगा और वो बड़ी मामी किसी से कुछ कह ना दे इसलिए भी चुपचाप थी और उन्हें भी पता था कि यह सब काम बड़ी मामी की मदद से ही हो रहा था। तो मैंने अब उनके पेटीकोट के साथ अपनी उंगली घुमाई और साड़ी को पेटिकोट से अलग कर दिया था। अब वो केवल पेटीकोट में थी और अगले ही मिनट में उनके पेटीकोट का नाड़ा खुल गया और वो चुपचाप उठकर बाथरूम में चली गयी और उसके जाते ही में और बड़ी मामी अपने अपने अंडरगार्मेंट्स में आ गये और नाईट बल्ब जला दिया और जब वो लौटकर आई तो देखा कि में और बड़ी मामी केवल पेंटी, ब्रा में है और वो एकदम चकित हो गयी और वो अपने कमरे में जाने लगी तो मैंने उसको पकड़ लिया और कहा कि आज वो चुदेगी ज़रूर और वो भी चुदाई के मज़े ले या फिर केवल चुपचाप अपनी चुदाई सहे और यह भी कहा कि उसकी बात कोई नहीं मानेगा क्योंकि बड़ी मामी तो खुद ही अपनी मर्जी से चुदने जा रही थी। तो उसने कहा कि ठीक है.. लेकिन हमारे अलावा किसी को भी यह बात पता नहीं चलनी चाहिए? तो मैंने कहा कि तुम मेरी बात का पूरा विश्वास करो और बस आज अपनी चुदाई देखो और अब दोनों मामी मुझसे चुदने को तैयार थी। मैंने दोनों से कहा कि चलो आज दोनों मुकाबला कर लो.. जो जीतेगा वो बड़ा हो जाएगा। तो वो पूछने लगी कि कौन सा मुकाबला? मैंने कहा कि सेक्स मुकाबला। फिर में केवल अंडरवियर में और वो दोनों ब्रा और पेंटी में तैयार हो गई। सबसे पहला राउंड था लंड चाटने का.. जो पहले मुझे झाड़ेगा वो जीत जाएगा.. लेकिन आंड को भी जीभ से चाटना था और फिर छोटी मामी ने कहा कि वो लंड को मुहं में नहीं लेगी। तो मैंने और बड़ी मामी ने उनके दोनों हाथ पकड़ लिए और मैंने जबड़े में दबाव देकर उनका मुहं खोलकर उसमे अपना लंड घुसा दिया और आगे पीछे करने लगा और करीब दो मिनट के बाद उन्हे भी मज़ा आने लगा और वो बोली कि अरे यह तो एकदम लॉलीपोप की तरह है.. वो अगले चार मिनट तक चूसती रही और उसके बाद में झड़ गया।

तो उन्होंने पूरा का पूरा वीर्य अपने मुहं में ले लिया और मेरे लंड पर उनकी लार ही थी। अब बारी बड़ी मामी की थी.. वो इसमें बहुत अनुभवी थी.. मेरी बड़ी मामी सेक्स की देवी है और उन्होंने सबसे पहले अपनी जीभ से मेरे लंड के टोपे को छुआ फिर लंड के टोपे के ऊपर धीरे धीरे अपनी जीभ को घुमाने लगी। फिर धीरे से लंड को मुहं में लिया और वो बहुत अलग तरह से चूस रही थी। ऐसा लग रहा था कि लंड को मुहं में लेकर उन्हे उसका रस पीना हो। फिर में करीब तीन मिनट में ही झड़ गया और बड़ी मामी पहले राउंड में जीत गई और अगले राउंड में मैंने उनकी चूत को अपनी जीभ से चाटा। सबसे पहले मैंने चूत के बाहरी हिस्से को जीभ से खोला और फिर बहुत देर तक गोल गोल बाहर ही घुमाता रहा। फिर मैंने उनकी चूत में जीभ डाल दी.. बड़ी मामी की चूत एकदम चिकनी शेव की हुई थी और छोटी मामी की चूत पर मुलायम बाल भी थे। चिकनी चूत की वजह से मैंने बड़ी मामी की चूत को ज्यादा अच्छे से चूसा और वो ज्यादा जल्दी झड़ गई। दोस्तों ये कहानी आप Antarvasnasex.net पर पड़ रहे है।

तो इस राउंड में छोटी मामी जीत गई और अब उन दोनों को खेल में बहुत मज़ा आने लगा और अगले राउंड में बूब्स को फुलाना था.. तो पहले मैंने बड़ी मामी के ब्लाउज को खोल दिया। उनके फिगर का साईज़ 36 था। में अपने लंड को उनकी नाभि के आसपास घुमा रहा था और फिर वहाँ से बॉडी पर रगड़ते हुए सीधे बूब्स के बीच में ले गया और बूब्स के किनारे में घुमाने लगा। उनका पूरा शरीर मेरे लंड की महक से महकने लगा। तो में एक हाथ से धीरे धीरे उनके निप्पल से खेलने लगा। उनके बूब्स एकदम खरबूजे की तरह हो गये थे और अब उनके बूब्स का साईज़ 41 हो गया था। इसके बाद मैंने छोटी मामी के साथ भी ऐसा ही किया.. उनके बूब्स 30 साईज के थे.. लेकिन वो कुछ देर बाद में 38 साईज के हो गये और वो जीत गई। तो बड़ी मामी बहुत कामुक हो रही थी.. वो अपनी चूत में बहुत तेज़ी से उंगली करने लगी और कहने लगी कि तन्नू प्लीज यह खेल अब खत्म कर.. चल अब हम चुदाई करते है। तो मैंने कहा कि ठीक है और छोटी मामी दोनों राउंड जीती है तो वो जीत जाएँगी.. वो खेल को आगे बड़ाने को तैयार हो गई। मैंने भी जल्दी ही खेल ख़त्म करने की सोची और मैंने फाइनल राउंड में उन दोनों की गांड में लंड डालने को कहा और जिसकी गांड में लंड ज्यादा अंदर जाएगा वो जीत जाएगा.. लेकिन उन दोनों ने कभी भी गांड में लंड नहीं डलवाया था.. इसलिए वो दोनों बहुत डरकर घबरा गई।

तो वो दोनों साफ मना करने लगी और मैंने कहा कि तो ठीक है फिर कोई भी नहीं जीतेगा.. तभी बड़ी मामी बोली कि तन्नू ठीक है तुम जैसे चाहो वैसे चोद सकते हो.. तुम चाहो तो हमारी गांड मारो और तुम चाहो तो चूत.. लेकिन प्लीज थोड़ा आराम से कहीं गांड फट ना जाए और में तुम्हारे मामा को क्या बताउंगी कि यह कैसे फटी? फिर पहले मैंने छोटी मामी की गांड में लंड डाला और एक हाथ से लंड को पकड़ा और दूसरे से उनकी गांड का छेद बड़ा किया और एकदम से एक ज़ोर का धक्का दिया और लंड घुसेड़ दिया। वो एकदम चीख पड़ी.. हाए दैया रे.. मार डाला मदारचोद ने.. आज मेरी गांड को फाड़ डाला। दोस्तों उसकी गांड बहुत टाईट थी जिसकी वजह से मेरा लंड केवल 4 इंच ही अंदर गया.. लेकिन उसको बहुत दर्द हुआ और वो एकदम चटपटा गई। अब दूसरी बारी थी बड़ी मामी की.. उनकी गांड पर हाथ लगते ही जन्नत का अहसास हो गया। फिर मैंने वैसा ही किया और उनकी कामुक गांड के छेद को फैलाकर मैंने एक ही धक्के में अपना लंड पूरा का पूरा लंड अंदर डाल दिया और वो जीत गयी। तो मेरी दोनों मामीयां बहुत बड़ी चुदक्कड़ थी और उनकी आपस की लड़ाई भी ख़त्म हो गयी थी और वो दोनों बारी बारी से मेरे लंड को चूसती और चुदती और में सोच रहा था कि सेक्स भी कितनी बड़ी चीज़ है। दोनों परिवारों की लड़ाई ख़त्म करा सकता है।

फिर मैंने बड़ी मामी की गांड से अपना लंड बाहर नहीं निकाला और ज़ोर ज़ोर से धक्के मारने लगा.. पहले तो वो बोली कि यह क्या कर रहे हो? तो मैंने कहा कि आप बस मज़े लो और वो मस्त होने लगी और में धक्के मार रहा था.. तो वो दूसरी मामी से बोली कि संध्या तू मेरी चूत चाट.. बड़ी मामी कुतिया स्टाइल में थी.. जिसकी वजह से उनकी चूत को चाटने के लिए बहुत जगह थी और छोटी मामी उनकी चूत चाटने लगी। दोनों ऐसे थी जैसे कोई माँ अपने बच्चे को दूध पीला रही हो.. यहाँ पर बस अंतर यह था कि दूध की जगह चूत थी और छोटी मामी के चूतड़ बड़ी मामी की तरफ थे और वो उनको चाट रही थी। तो छोटी मामी बोली कि दीदी आप तो बहुत अच्छे से चूतड़ चाटती हो। अब 15 मिनट के धक्को के बाद में छोटी मामी के पीछे लग गया और वो एकदम पलटकर बोली कि तन्नू मेरी गांड मत मार.. मुझे बहुत दर्द होगा। मेरी गांड दीदी की तरह मुलायम नहीं है.. लेकिन मैंने उसकी एक नहीं सुनी और उसकी गांड में धक्के मारने लगा वो ज़ोर ज़ोर से चीखने चिल्लाने लगी। तो बड़ी मम्मी बोली कि संध्या तू तो ऐसे चिल्ला रही जैसे कि आज ही पहली बार चुद रही है.. थोड़ा सब्र कर अभी मज़ा आने लगेगा.. लेकीन फिर भी छोटी मामी का चिल्लाना बंद नहीं हुआ.. तो बड़ी मामी ने अपने निप्पल को उनके मुहं में घुसा दिया और जब मेरा मन छोटी मामी की गांड से भर गया तो मैंने अपना लंड बड़ी मामी की चूत में डाला.. अब हम तीनों आराम से लेटे थे। में बड़ी मामी की चूत में लंड डाल रहा था और वो छोटी मामी की चूत को अपनी उंगलियों से और जीभ से चाटकर मज़े दे रही थी। फिर करीब 15 मिनट बाद बड़ी मामी थक गयी और बोली कि तन्नू बस कर अब संध्या को भी मज़े करा दे.. इतना कहते ही उसने अपनी चूत का पानी भी निकल दिया और अब में छोटी मामी की चूत में अपना लंड डाल रहा था और बीच बीच में रुकने से में झड़ नहीं रहा था और ज्यादा देर तक चोद पा रहा था। मुझे यह कला उसी दिन पता चली थी। फिर में लंड को संध्या मामी की चूत में डालने लगा और बहुत तेज तेज झटके मारने लगा.. वो बड़ी मामी से बोली कि दीदी आप एकदम रंडी हो और आपने आज मुझे भी रंडी बना दिया।

तो बड़ी मामी बोली कि हाँ तू बड़ी सती सावित्री है मज़ा तो बड़े मन से ले रही है और मुझे कहती है कि में चुदक्कड हूँ। फिर छोटी मामी बोली कि जब सब कुछ फ्री में मिल रहा हो तो कोई मौका जाने थोड़े ही देता है और दोनों हंसने लगी.. छोटी मामी की चूत एकदम टाईट थी और मुझे उनसे ज्यादा मज़ा आ रहा था। 15 मिनट बाद उनकी भी चूत का पानी निकलने लगा और में भी झड़ने लगा। फिर मैंने कहा कि किसकी चूत में निकालूं? तो छोटी मामी बोली कि मेरी चूत में मत झड़ना.. बड़ी मामी बोली कि इस रंडी की चूत में मत झड़ना इसके मुहं में झड़ना। तो मैंने छोटी मामी के मुहं में लंड डाल दिया और अपना पूरा वीर्य उनके मुहं में धक्के देकर डाल दिया.. जिसे वो रबड़ी की तरह चाट चाटकर साफ करने लगी और इसके बाद हम तीनों ने कपड़े पहने और हम सब आपस में लिपटकर सो गये ।।

धन्यवाद …

7 comments

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